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राजाजी पार्क में मादा बाघों के लिए लाए जाएंगे नर बाघ

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राजाजी पार्क में नर बाघों को लाने के लिए चल रहे प्रयास को कुछ कयासों ने धता बता दिया था, जबकि ऐसा नहीं है। दोनों मादा बाघ कैमरा ट्रैप के तहत देखी जा सकती हैं। इनके लिए पांच नर बाघ इसी क्षेत्र में छोड़े जाने हैं।

सूत्रों का मानना है कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में दोनों मादा बाघ कैमरा ट्रैप के तहत हैं। पार्क के दक्षिणी हिस्से में बाघ शिफ्टिंग की योजना थी।
राजाजी पार्क में बाघों की तादाद बढ़ाने के लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व के तराई क्षेत्र से पांच बाघ शिफ्ट किए जाने आरटीआर प्रशासन लंबे समय से प्रयासरत है। पार्क प्रशासन चाहता है कि बाघ शिफ्टिंग से पहले यहां मौजूद दोनों मादा बाघ को ट्रैंकुलाइज कर उसके गले में रेडियो कॉलर लगा दिया जाए ताकि उसकी पूरी निगरानी हो सके। बाघों को लाने से पहले राजस्थान के सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व में यहां के 27 से 28 कर्मचारियों को तीन-चार वर्गों को प्रशिक्षित होने के लिए भेजा गया है। जहां प्रशिक्षिण लेकर वहां बाघ भी लाए जा सकते हैं।
मादा बाघों की संख्या में नर बाघों की संख्या कम है। पार्क सूत्र मानते हैं कि राजाजी टाइगर रिजर्व के दक्षिणी हिस्से मोतीचूर, बेरीवाड़ा और धौलखंड रेंज में सिर्फ दो मादा बाघ मौजूद हैं। इनकी उम्र छह वर्ष के आसपास है। नर बाघों की संख्या न होने के कारण अभी बाघों की संख्या कम होने के कारण बाघों की संतति नहीं बढ़ पा रही है। पार्क प्रशासन चाहता है कि इस सीजन में इन मंइन दोनों मादा बाघों का अकेलापन दूर करने के साथ ही पार्क में बाघों की संख्या बढ़ाने पर विचार चल रहा है और प्रयास हो रहा है। यह भी पता चला है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कार्बेट टाइगर रिजर्व से यहां दो नर व तीन मादा बाघ लाने की की अनुमति दी है। इसके लिए मादा बाघ के मुख्य वास स्थल के करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र को बाड़े के रूप परिवर्तित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी क्षेत्र में नर बाघों को छोड़ जाएगा ताकि नर और मादा साथ-साथ आ सकें। जिन जगहों पर मादा बाघ का चित्र कैमरे में आया है तथा उनके पदचिह्न भी देखे गए हैं,उसी क्षेत्र में इन बाघों को छोड़ा जाएगा। राजाजी पार्क के निदेशक वीके गांगटे के प्रशिक्षण में होने के कारण उनका पक्ष नहीं प्राप्त हो सका, लेकिन सूत्र बताते हैं कि दोनों मादा बाघ कर्मचारियों के संज्ञान में हैं और उनकी संतति वृद्धि के लिए बाघ स्थानांतरण योजना पर काम चल रहा है। 

जापान के भूस्खलन विशेषज्ञों से मिले वन मंत्री

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राज्य में भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने जापान के भू-स्खलन प्रबन्धन विशेषज्ञ दल से मुलाकात की। इस दौरान उत्तराखण्ड में भूस्खलन के उपचार के लिए नवीनतम जापानी तकनीकों पर विचार-विमर्श किया।

डॉ. रावत ने कहा कि, ‘कुछ दशकों में जापान ने सभी प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के समाधान को लेकर प्रगति और तकनीकी विकास किया है। इसे देखते हुए भारत और उत्तराखण्ड व सभी हिमालयी राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबन्धन में इन तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर जापान से काफी कुछ सीखा जा सकता है।’

डॉ. रावत ने कहा कि, ‘जापान, भारत सरकार और उत्तराखण्ड सरकार के बीच अगस्त, 2016 में एक करार हुआ था। इसके अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य में भू-स्खलन क्षेत्रों के उपचार के लिए नई जापानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना सुनिश्चित हुआ।’ इस परियोजना को जिका टेक्नीकल को-ओपरेशन प्रोजेक्ट फॉर मैनेजमेंट अफ लैंड स्लाइड्स इन फॉरेस्ट कहा गया है। इस परियोजना पर होने वाला तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण, विशेषज्ञों का भ्रमण आदि पर व्यय जापान सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण भूस्खलन उत्तराखण्ड के लिए बड़ी समस्या हैं। इससे न केवल सड़कें और मूलभूत सेवाएं प्रभावित होती है, बल्कि वन क्षेत्रों पर भी इनका बुरा प्रभाव पड़ता है।

यह परियोजना वन विभाग की क्षमता के विकास में भी अहम साबित होगी। देहरादून पहुंचे जापानी दल को वन मंत्री ने सरकार की ओर से हरसम्भव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। 

भीख मांगने पर उत्तराखंड में लगी रोक, पकड़े जाने पर पांच साल की जेल

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उत्तराखंड में भीख मांगने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। समाज कल्याण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम 1975 की धाराओं में संशोधन किया है। इसके साथ ही उत्तराखंड 20 अन्य राज्यों और दो संघ शासित प्रदेशों की लीग में शामिल हो गया है जिन्होंने भीख पर प्रतिबंध लगाया है।

अब सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगते या देते पकड़े जाने पर यह अपराध की श्रेणी में होगा और इसमें बगैर वारंट के गिरफ्तारी हो सकेगी। अधिनियम में अपराध साबित होने पर जुर्माने के साथ एक से तीन साल की सजा का प्रावधान है। दूसरी बार अपराध सिद्ध होने पर सजा की अवधि पांच साल तक हो सकती है। निजी स्थलों पर भिक्षावृत्ति की लिखित और मौखिक शिकायत पर अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई होगी।

सार्वजनिक स्थलों पर भीख देने को भी अपराध की श्रेणी में माना गया है। इस तरह भीख देना और लेना दोनों अपराध श्रेणी में होंगे। किशोर न्याय अधिनियम की तहत अभी तक 14 साल तक के बच्चों से भिक्षावृत्ति को संज्ञेय अपराध माना गया था और इस पर पूरी तरह से रोक थी। मगर अब सभी उम्र के लोगों पर सार्वजनिक स्थलों में भीख मांगने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में 274 बच्चों सहित करीब 3,000 भिखारी हैं। हालांकि, गौर करने वाली बात है कि देश के कई राज्यों ने भीख मांगने पर प्रतिबंध लगा दिया है, इसके बाद भी बीते वर्षों में भिखारियों की संख्या में वृद्धि हुई है। 

करीना कपूर के जोड़ीदार होंगे सुमीत व्यास

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टीवी सीरियलों में काम करने वाले एक्टर सुमीत व्यास को फिल्म ‘वीरा दी वैडिंग’ में करीना कपूर के जोड़ीदार के रोल में चुना गया है। ये फिल्म अनिल कपूर की छोटी बेटी और सोनम कपूर की बहन रेहा कपूर के साथ बालाजी की एकता कपूर मिलकर बनाने जा रही हैं। इस फिल्म से करीना कपूर की मां बनने के बाद परदे पर वापसी होने स्जा रही है।

फिल्म में करीना के साथ पहली बार परदे पर सोनम कपूर होंगी। इन दोनों के अलावा इस महिला प्रधान फिल्म में स्वारा भास्कर और शिखा तुलस्यान को भी शामिल किया गया है। स्वारा भास्कर और सोनम ने फिल्म ‘रांझणा’ में साथ काम किया था। फिल्म का निर्देशन शशांक कर रहे हैं, जो इससे पहले सोनम कपूर की फिल्म ‘आयशा’ का निर्देशन कर चुके हैं। 

इस फिल्म की शूटिंग पहले अप्रैल से होनी थी, लेकिन करीना उस वक्त बेटे को जन्म देने वाली थी, इसलिए शूटिंग को अगस्त तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। फिल्म का पहला शेड्यूल अगस्त में मुंबई में होने जा रहा है, जिसके लिए तैयारियां अंतिम चरण में पंहुच गई हैं। खुद सोनम कपूर इन दिनों अमेरिका के न्यूयार्क में राजकुमार हीरानी की फिल्म की शूटिंग के लिए गई हैं, जिसमें वे रणबीर कपूर की हीरोइन हैं। वहां से लौटकर सोनम अपनी बहन की फिल्म की शूटिंग का हिस्सा बनेंगी। 

बागेश्वर की मनीषा उडीसा में दिखायेगी जौहर

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हौसले अगर बुलंद हों तो कोई भी कठिनाई आपका रास्ता नहीं रोक सकती, दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना और खेल के प्रति मनीषा के जूनून के आगे परेशानियां भी छोटी पड गयी और बुलंद हौसलों से आज मनीषा ने राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता में अपनी जगह बना ली है।

मनीषा कपकोट तहसील के चलकाना गांव की रहने वाली है। उसके पिता मदन मेहता किसान है और माता गृहणी है। वर्तमान में वह जिला मुख्यालय स्थित ठाकुरद्वारा में रहती है। मनीषा के फुटबाल कोच नीरज पांडे ने बताया कि, ‘यह जिले के लिए गौरव की बात है। मनीषा पहली खिलाड़ी है जो राष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल खेलेगी। संसाधनों के अभाव में उसकी यह उपलब्धि किसी मील के पत्थर से कम नही है। वह युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।’

कोटद्वार में 342 टिन अवैध लीसा जब्त

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जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोतवाली कोटद्वार में 342 टिन लीसा पकड़ा गया। कोतवाली कोटद्वार से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली थाना क्षेत्र के अन्तर्गत कोडिया चेक पोस्ट पर कल देर शाम पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक ट्रक को रोका तो ट्रक भागने का प्रयास करने लगा जिस पर पुलिस ने ट्रक को तो पकड लिया लेकिन अंधेरे का फायदा उठाते हुए चालक फरार हो गया लेकिन परिचालक पकडा गया है। ट्रक में 342 टीन अवैध लीसा भरा हुआ था जिसकी कीमत लगभग 11 लाख रूपये है।पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर वन अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर लिया है। कोटद्वार कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक उत्तम सिंह जिम्मीवाल के अनुसार कल देर शाम पुलिस ने कोडिया चेक पोस्ट पर एक ट्रक से 342 कनस्तर अवैध लीसा सहित ट्रक के परिचालक विनोद कुमार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है जो मूल रूप से नेपाल का रहने वाला है, जो ये लीसा बरामद हुआ है इसी परिपेक्ष में वन अधिनियम में अभियुक्त पंजीकृत किया गया है | इसमें ट्रक के ड्राइवर और मालिक की तलाश की जा रही है। बताते चले कि इससे पहले भी इस ट्रक में 2015 में 209 टीन अवैध लीसा बरामद हुआ था |

प्रेमी अब भी फरार

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घर से भागने की योजना बनाने के बाद परिजनों को जहर देने की घटना का आरोपी अभी फरार है। पुलिस ने युवती से पूछताछ करने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। मामले में युवती के ताऊ ने प्रेमी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। चिकित्सकों  द्वारा तीन लोगों का अभी भी उपचार किया जा रहा है, जबकि दो लोगों की छुट्टी कर दी है।

रविवार को मोहल्ला चैहानान निवासी राजेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करा कर कहा था कि शनिवार की साय सात बजे मौहल्ला जोशियान निवासी मुनेश जोशी पुत्र भोलू जोशी उनके मकान की छत पर आया था। उसने उसकी भतीजी को बहला-फुसलाकर अपने प्रेम जाल में फास लिया और उसे जहर देकर कहा कि यह नींद की गोलिया पिसी हुई हैं इन्हें कोल्ड ड्रिंक अथवा चाय में डालकर अपने परिवार के सभी सदस्यों को पिला देना। कुछ समय बाद वह सब सो जाएंगे और हम भाग जाएंगे। आठ माह पूर्व भी वह उसकी भतीजी को भगाकर ले गया था। उस समय परिवार की इज्जत के कारण उन्होंने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की थी। मुनेश जोशी के जाने के बाद उसकी भतीजी ने दादी जयवती 80, पिता डालीराम 50, माता सरला देवी 45, भाई जितेंद्र 15, मनोज 13 वर्ष को कोल्ड ड्रिंक में उसका दिया हुआ सफेद पाउडर मिलाकर पिला दिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया। उपचार कर रहे डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि किशोरी के भाई जितेंद्र कश्यप एवं मनोज कश्यप को छुट्टी दे दी गई है, लेकिन डालीराम, सरला देवी और जयवती को उपचाराधीन रखा गया है। सभी की हालत खतरे से बाहर है। सीओ राजेश भट्ट ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया है। मामले की विवेचना की जा रही है। जाच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

केदारनाथ क्षेत्र की जनता के लिये खुशखबरी

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एमएलए मनोज रावत की पहल से अाज बिजली की समस्याओं को देखते हुए चंद्रापुरी में 33 KVA के सब स्टेशन को वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिल गयी है। लगभग 1 साल में यह स्टेशन बन कर तैयार हो जाएगा, इस स्टेशन के बनने से क्योंजा घाटी बसुकेदार तहसील, भीरी व परकंडी क्षेत्र की पावर ड्राप की समस्या और बार-बार विजली जाने की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

ये काम रिकॉर्ड 9 दिनों में हुअा। 11 जुलाई 2017 को प्रधान प्रतिनिधि भटवारी सुनार हरीश गुसाईं ने भूमि हेतु अनापत्ति दी, उसी दिन अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ व्हाटसअप से पत्र भेजकर फ़ाइल एईं दीवान सिंह खाती को भेजा। सभी औपचारिकताओं को पूरी कर फ़ाइल देहरादून लाईं गईं, जंहा एमएलए मनोज रावत ने 19 जुलाई को सीएमङी बी सी के मिश्रा से भेंट कर 20 जुलाई से स्वीकृति करा दी। शायद पहली बार नीचे से पूरी प्रक्रिया शुरू करने के बाद 33KVA का स्टेशन को 9 दिनों प्रशासनिक ओर वित्तीय स्वीकृति मिल पाई हो।

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इस पावर स्टेशन से मद्यमहेश्वर गंगा प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली 15 MW बिजली को बांटने का सर्किट तो मिलेगा ही , बची हुई बिजली को श्रीनगर ओर कर्णप्रयाग के 220 KVA स्टेशन जाने के लिए भी तकनीकी रास्ता मिलेगा।

एमएलए मनोज रावत का कहना है कि, ‘आधुनिक समय में जीवन और पर्यटन के लिए विजली बहुत आवश्यक है। मैंने 1 महीना और कामों के साथ विजली की समस्याओं को देने का निश्चय किया है। हम अपने लक्चयों को समय से पहले पूरा कर रहे हैं। ये सब जन प्रतिनिधियो और अधिकारियों के सहयोग के साथ भगवान और लोगों के आशीर्वाद से ही संभव हुअा है।’

अब सोनप्रयाग के 33KVA स्टेशन और रुद्रपुर या आस-पास 220 KVA स्टेशन को भूमि दिलवानी की पहल की है, जिससे केदारनाथ विधानसभा में आने वाले 20 साल तक बिजली की कमी नही होगी। जल्दी ही चोपता-तुंगनाथ, कार्तिक स्वामी आदि स्थानों पर बिजली पंहुचाने का बेङा अौर साथ ही साथ केदारनाथ के लिए अंडर ग्राउंड लाइन का काम भी जल्दी शुरु हो ने वाला हैं। केदारनाथ और गोण्डार के उरेङा पावर हाउस पर भी काम शुरु होगा।

डबल लाक से घोटाले की फाईल बाहर

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उधम सिंह नगर में हुए हाइवे चौड़ीकरण में मुआवजा घोटाले से जुडी फाइलें डबल लॉक से लंबे इंतजार के बाद बाहर निकल आईं। इस दौरान सीसीटीवी कैमरे में पूरी कार्यवाही रिकॉर्ड हुई। साथ ही सुरक्षा के इंतजाम भी कड़े किए गए थे। आपको बतादे एनएच-74 भूमि अधिग्रहण घोटाले के सामने आने के बाद मूल दस्तावेजों के साथ हो रही छेड़छाड़ को देखते हुए भूमि अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन ने कोषागार स्थित डबल लॉक में इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे।

दस्तावेज डबल लॉक में तो सुरक्षित हो गए, लेकिन प्रशासनिक कार्य इससे प्रभावित होने लगे। दस्तावेज न होने की दशा में तहसील व उप जिलाधिकारी कार्यालय के कार्य प्रभावित हो रहे थे। भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच कर रही एसआइटी का काम भी दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण अटक रहा था। इसके चलते जरूरत महसूस हुई तो शासन में पैरवी की गई। शासन स्तर पर हुए मंथन के बाद मूल दस्तावेजों को डबल लॉक में ही सुरक्षित रखते हुए उनकी प्रमाणित फोटो कॉपी संबंधित विभाग के साथ ही एसआइटी को दिए जाने की अनुमति दे दी गई। आज भूमियाध्यापित अधिकारी सहित एसआईटी की टीम ने फाइलों को डबल लोक से बाहर निकाला।

उत्तराखंड के सरकारी ”रेस्ट हाउस” में अब फिल्म य़ूनिट को मिलेगी ’50 प्रतिशत’ की छूट

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पहाड़ी राज्य में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने पर नजर रखने के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन विभाग के होटलों के कमरों के टैरिफ में फिल्म यूनिट को 50 प्रतिशत छूट देने का फैसला किया है।

उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (यूटीडीबी) के सीईओ मीनाक्षी सुंदरम ने पिछले सप्ताह गढ़वाल और कुमाऊं मंडल विकास निगम को एक पत्र जारी किया जिसमे,kmvn rest house सुंदरम ने कहा कि, ‘राज्य में फिल्म पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए कलाकारों, कास्ट और क्रू (फिल्म यूनिट) के लिए आवास सुविधाओं में इस तरह की छूट प्रदान करना महत्वपूर्ण है’। इसके अलावा सुंदरम ने दोनों कार्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर को यह निर्देश दिया है कि यह छूट वह अपने अपने क्षेत्रों में लागू कर दें।

राज्य भर में जीएमवीएन और केएमवीएन द्वारा संचालित 130 से अधिक पर्यटक रेस्टरुम और बंगले हैं।

हालांकि यह छूट एक कंडीशन के साथ आएगी कि टूरिज्म पीक के महीने जैसे कि मई, जून और अक्टूबर मे लागू नहीं होंगे- जिसके बारे में फिल्म एक्सपर्ट का कहना है कि यह तीन महीनें ही पहाड़ी क्षेत्रों में फिल्मों की शूटिंग के लिए ज्यादा बेहतरीन माने जाते है।एक्सपर्ट का कहना है कि इन महीनो में शूटिंग करने का मुख्य कारण होता है मौसम और लाइटिंग कंडीशन जो फिल्मों के लिए परफेक्ट होती है।

उत्तराखंड स्थित लाइन प्रोड्यूसर संजीव मेहता, जिन्होंने यहां कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग का समन्वय किया है, उनके मुताबिक ‘यदि वास्तव में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने में अच्छे परिणाम चाहते है, तो सरकार को छूट की अवधि को वर्ष भर में विस्तार करने पर विचार करना चाहिए या कम से कम उन चार महीने यात्रा मार्गों के अलावा सभी रेस्टहाउस में छूट (पीक महीनों के दौरान) देना चाहिए। हर साल छह महीने की लंबी तीर्थयात्रा पहाड़ी राज्य में लाखों पर्यटकों को आकर्षित करती है।

2015 में राज्य की फिल्म नीति को प्रभावी बनाने के बाद 60 से अधिक फिल्में,डाक्यूमेंट्री, टीवी धारावाहिक, वीडियो एल्बम, क्षेत्रीय फिल्मों और विज्ञापन फिल्में की पहाड़ी राज्य में शूटिंग की गईं है। पूरे साल में फिल्म यूनिट को कमरे के किरायें में मिलने वाली रियायत के अलावा, क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं ने भी मांग की है कि इस छूट को 70 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए क्योंकि स्थानीय फिल्म यूनिट आमतौर पर सीमित संसाधनों में काम करती हैं।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड फिल्म डेवलेपमेंट काउंसिल के डेप्यूटी डायरेक्टर के.एस चौहान ने न्यूज़पोस्ट टीम को बताया कि ”बड़े बजट की फिल्म यूनिट को सब्सिडी से कुछ लेना देना नहीं होता,और उन्हें सब्सिडी की आवश्यकता भी नहीं होती। यह एक अच्छी और सकारात्मक पहल है खासकर छोटे बजट की फिल्म के लिए और क्षेत्रीय फिल्म यूनिट के लिए। चौहान ने कहा कि इस पहल से क्षेत्रीय फिल्मकारों को बहुत मदद मिलेगी और यह उनके लिए अच्छी खबर है।