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सरेआम हथियारों की नुमाईश पर हाईकोर्ट सख्त

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अब हथियारों की नुमाईश आप हर जगह नहीं कर पायेंगे। शादी समारोह हो या फिर धार्मिक आयोजन हथियारों को ले जाने पर पुरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। हाईकोर्ट ने खास तौर पर आदेश पारित करते हुए हथियारों को इन स्थानों पर ले जाने पर पाबंदी लगाई है। अापको बता दें कि हर्ष फायरिंग मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए राज्य में शादी समारोह, धार्मिक आयोजन, सार्वजनिक सभाओं व शैक्षिक संस्थानों में हथियार ले जाने पर पाबंदी लगा दी है। इतना ही नहीं, अदालत ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए हैं। इनका अनुपालन कराने के लिए जिला पुलिस प्रमुखों को जवाबदेह बनाया गया है।

हर्ष फायरिंग में दो लोगों की मौत के मामले में निचली अदालत से हुई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दोषी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश दिए। बागेश्वर निवासी धर्म सिंह ने गांव के ही भगवान सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उसके शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान चार लोगों को गोली लग गई थी। इनमें से दो की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में निचली अदालत ने 12 जुलाई, 2013 को भगवान सिंह को हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि शस्त्र अधिनियम में बरी कर दिया था। भगवान सिंह ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त की अपील को गुणदोष के आधार पर खारिज कर दिया, साथ ही हर्ष फायरिंग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए।

अदालत ने अपने आदेशों में कहा है कि 21 साल से कम आयु वालों को शस्त्र लाइसेंस जारी न किए जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति को हिंसा व अन्य मामलों में सजा हो चुकी हो, उसे पांच साल तक शस्त्र लाइसेंस देने पर विचार ही न किया जाए। अदालत ने शांति व्यवस्था के दौरान पुलिस की ओर से पाबंद किए गए व्यक्तियों को भी लाइसेंस जारी न करने को कहा है।

चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार

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थाना पटेलनगर पुलिस ने पटेलनगर क्षेत्र में बीते दिनों घरों में हुई चोरी तथा बाइक चोरी का खुलासा किया। पुलिस चोरी के आरोप में पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों के पास से छह लाख 75 हजार के चोरी के सामान बरामद हुए हैं।
थाना पटेलनगर क्षेत्र में बीते दिनों चोरी के कई मामले दर्ज किए गये थे। इन मामलों में पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी। पुलिस बुधवार को चेकिंग के दौरान पथरीबाग चौक पर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग करते हुए मुखबिर द्वारा दी गई सूचना के आधार दो मोटरसाइकिल पर बैठे चार लड़कों को रोककर गाड़ी के कागजात मांगे वे अपनी गाड़ियों के कागज नहीं दिखा पाए।
चारों युवकों से पूछताछ करते हुए पुलिस ने तलाशी ली तो उनके पास बैग में दो लैपटॉप, एक एलईडी रखा था, जिसके बारे में पूछा गया तो कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये। शक होने पर सख्ती से पूछताछ की गई तो बताया कि यह सामान व गाड़ियां पूर्व में पटेल नगर क्षेत्र से चोरी की है। जिसे वे बेचने जा रहे थे।
अभियुक्तों ने बताया कि यह चोरी गई मोटरसाइकिल को अपने साथी (मैकेनिक) एहसान, भगत सिंह कॉलोनी रायपुर को बेचते हैं तथा वह गाड़ियों को कटवाता हैं तथा कुछ मोटरसाइकिल के चेचिस नंबर व इंजन नंबरों को हम एहशान से डाई मशीन से बदलवा देते हैं।
पुलिस ने बताया कि बरामदा सामान, गाड़ियों के संबंध में थाना पटेलनगर पर पूर्व मुकदमा पंजीकृत है। पुलिस के गहनता से पूछताछ करने पर अभियुक्तों ने बताया कि वे चारों दोस्त हैं। मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले हैं तथा यहां ब्राह्मण वाला झुग्गी झोपड़ियों में किराए पर रहते हैं। बताया कि चारों फेरी का काम, पुताई का काम, कबाड़ी का काम करते हैं। साथ ही दिन में घूमकर बंद घरों व सुनसान जगह में बने घरों को चिन्हित करते हैं। पुताई व कबाढ़ के बहाने वो लोग घरों में रहने वाले सदस्यों के बारे में भी जानकारी कर लेते हैं तथा रात्रि के समय मौका देखकर हम आपस में मिलकर इन घरों से सामान चोरी कर लेते हैं।
अभियुक्त सहजाद ने कि वह दिन भर फेरी करके घरों के बाहर सड़क के किनारे नो पार्किंग की जगह पर खड़े मोटरसाइकिल को मौका देखकर डुप्लीकेट चाबी से खोलकर चोरी करता है तथा उन्हें कम दामों में बेच देता है। अभियुक्त सहजाद ने थाना नेहरू कॉलोनी के दीप नगर क्षेत्र से भी करीब दो माह पूर्व एक मोटरसाइकिल व थाना डालनवाला क्षेत्र से भी मोटरसाइकिल चोरी की गई जो अभियुक्तगण की निशानदेही पर बरामद की गई है।
अभियुक्तगणों द्वारा पूर्व में करीब 11 मोटरसाइकिल, तीन लैपटॉप, दो टीवी, एक मोबाइल, दो एलईडी, पांच गैस सिलेंडर चोरी किए गए हैं, जो अभियुक्तों की निशान देहि पर बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक अभियुक्त शातिर किस्म के चोर हैं तथा पूर्व में भी जेल जा चुके हैं।

सोशल मीडिया पर क्षेत्रीय भाषा-बोली में संवाद करेंगे सीएम

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गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार एक अनूठी पहल शुरू करने जा रही है। उत्तराखण्ड की लोक भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सोशल मीडिया पर गढ़वाली, कुमाऊनीं व उत्तराखण्ड की अन्य बोली-भाषा में आम-जन से संवाद स्थापित करेंगे। इसकी शुरुआत गुरुवार को मुख्यमंत्री ने अपने ट्विटर अकाउंट पर गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली में ट्वीट कर की।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किए जाने का प्रयास कर रही है। गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली को दर्जा दिलाने की मांग पहले भी संसद में भी उठाई जा चुकी है और यह प्रयास जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, बोली/भाषा से जुड़ाव रखना चाहिए। आज का युवा सोशल मीडिया में अधिक सक्रिय है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में अपनी लोक भाषा गढ़वाली, कुमाऊनीं व उत्तराखण्ड की अन्य बोली भाषा में संवाद करने से युवा पीढ़ी के साथ-साथ भावी पीढ़ी को भी अपनी बोली व संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपेक्षा की है कि वे समय-समय पर सोशल मीडिया पर गढ़वाली, कुमाऊनीं व उत्तराखण्ड की अन्य बोली भाषा में भी उनसे संवाद स्थापित करेंगे। 

कागजों पर लगे पौधे, धरातल पर उगे नहीं

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प्रदेश में बीते कुछ दिनों से पौधारोपण की होड़ सी लगी है। लग रहा है कि अब आने वाले दिनों में प्रदेश की आबोहवा तरो-ताजा रहेगी, लेकिन बीते कुछ सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो यह सब महज आडंबर लगेगा। पर्यावरण प्रेम के नाम पर केवल पौधों को रोपा जाता है। इसके बाद उनकी देखरेख का समय किसी के पास नहीं, जबकि वन क्षेत्रों में रोपित पौधों की तीन साल तक देखभाल का प्रावधान है। चार सालों के आंकड़े ही देखें तो हर साल औसतन 1.71 करोड़ पौधों का रोपण किया गया। इनमें से कितने जीवित हैं, इसका वन विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। ऐसे में प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक ठोस नीति बनाए जाने की जरूरत है ताकि प्रदेश हरीभरी वादियों से लहलहाता रहे।

पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण के आंकड़ों की बात करें तो एक अनुमान के मुताबिक हर साल डेढ़ से दो करोड़ पौधों का रोपण किया जाता है। हर बार इसी प्रकार से अभियानों का आगाज और अंजाम होता है। कुछ ऐसे ही दावे वन महकमा भी करता रहा है। पिछले 17 साल से यह सिलसिला चल रहा है। बावजूद इसके वनों का क्षेत्रफल 46 फीसद से आगे नहीं बढ़ पाया है। यह है 71 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड का हाल। जिस हिसाब से राज्यभर में वर्षाकाल में पौधरोपण हो रहा है, उसमें से आधा फीसद भी पनप नहीं रह पा रहे। इससे साफ जाहिर है कि सिस्टम की नीति और नीयत में कहीं न कहीं खोट है। पर्यावरण प्रेमी भी सोशल मीडिया के लिए पौधे लगा रहे है। यदि ऐसा नहीं होता तो कागजों की जगह धरातल पर जंगल खूब पनपे होते।
विशेषज्ञों की मानें तो शासन व वन विभाग को ठोस कार्य योजना तैयार कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पौधों का रोपण करना चाहिए। साथ ही कुछ सालों तक इनकी देखभाल सुनिश्चित करनी होगी। तब जाकर ही कुछ सकारात्मक नतीजे सामने आ पाएंगे। राज्य में गुजरे चार सालों के आंकड़े ही देखें तो हर साल औसतन 1.71 करोड़ पौधों का रोपण किया गया। इनमें से कितने जीवित हैं, इसका महकमे के पास कोई जवाब नहीं है। यह स्थिति तब है, जबकि वन क्षेत्रों में रोपित पौधों की तीन साल तक देखभाल का प्रावधान है। बावजूद इसके न तो महकमा खुद पौधों को बचा पा रहा और न ग्रामीणों को इसके लिए प्रेरित कर पा रहा। हर साल, बस किसी तरह लक्ष्य पूरा करने और बजट को खपाने की होड़ सी नजर आती है।
अब पौधों के जिंदा न रह पाने के पीछे विभाग के तर्कों पर भी नजर डालते हैं। अफसरों के मुताबिक वन्यजीवों के साथ ही भूक्षरण, जंगल की आग, अवैधकटान जैसे कारणों से 30 से 40 फीसद पौधे जिंदा नहीं रह पाते। जानकारों की मानें तो यहां ये आंकड़ा 50 से 60 फीसद तक है और कहीं-कहीं तो 70 फीसद तक। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगना लाजिमी है। दरअसल, पौधरोपण के कार्यक्रम में सबसे बड़ी खामी है कि नियोजन की। विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में शायद ही कभी स्थानीय जलवायु के अनुरूप पौधरोपण के लिए प्रजातियों का चयन होता हो। यह पौधों के न पनप पाने का सबसे बड़ा कारण है।
पर्यावरणविद् व पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती कहते हैं कि इसके लिए शासन और विभाग में बैठे लोगों को नियोजन का ढर्रा बदलने की जरूरत है। वह कहते हैं कि मौजूदा स्थिति में पौधरोपण को तो हम उद्वेलित दिखते हैं, मगर किस तरह के पेड़ लगा रहे हैं, इसकी ठीक से प्लानिंग अथवा तैयारी कभी नहीं होती। एक रोपित पौधे की तब तक उचित देखभाल होनी चाहिए, जब तक कि वह 10 साल की आयु पूरी न कर ले। कहने का आशय से वन समूह से जुड़े प्रत्येक अंग को मजबूत करना होगा, तब जाकर ही पौधरोपण सफल हो सकता है। उत्तराखंड समेत हिमालयी राज्यों में अर्थव्यवस्था स्थानीय संसाधनों पर आधारित होती है। इसके लिए जंगल, पानी व मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।
पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी कहते हैं कि इसे तात्कालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रूप में देखना होगा। वनों को स्थायी अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही ग्रामीणों को साथ जोड़कर उनकी जरूरतों को भी पूरा किया जाना चाहिए। इसके लिए विभाग को भविष्य के लिए प्लानिंग, प्रजाति, मृत्युदर व रणनीति का ठोस प्लान तैयार करना होगा।

मदेश्वर देवता के मेले में दिखी उत्तराखंड सं​स्कृति की झलक

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कोटियाल गांव मे मदेश्वर देवता के मेले के अवसर पर सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि पुरोला विधायक राजकुमार ने किया। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को प्रदेश की संस्कृति के परिचायक बताया। इस दौरान प्रदेश की विभिन्न संस्कृतियों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ने कहा कि मेले हमारी पौराणिक संस्कृति के परिचायक हैं, मेलों के जरिए ही आपसी भाईचारा तथा मेलमिलाप को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि पौराणिक संस्कृति को बचाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है। उन्होंने कोटियाल गांव मे बारात घर के निमार्ण के लिए आठ लाख की घोषणा की व एक वर्ष के अंदर जटा से सुनारा होते हुए कोटियाल गांव तक दो किमी सड़क निर्माण का वादा किया। ग्रामीणों की मांग थी कि इस वैकल्पिक मोटर मार्ग के बनने से सुनारा, कोटियालगांव, मंजियाली, कंसोला, पलेठा, खान्सी आदि आधा दर्जन गावों को लाभ मिलेगा।
चुनाव जीतने के बाद पहली बार कोटियालगांव मे सावन के महीने मे होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे विधायक राजकुमार का ग्रामीणों ने स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। इस मौके पर विधायक ने कहा कि सावन के इस मेले को आगामी वर्ष मे भव्य रूप दिया जाएगा व वह अपने स्तर से प्रदेश के बड़े कलाकारों को यहां बुलाने का काम करेंगे। इस दौरान ग्रामवासियों ने गांव की समस्याओं को ले कर उन्हें मांग पत्र सौंपा।
जिला पंचायत सदस्य विमला रावत ने मदेश्वर देवता के मंदिर सौंदर्यकरण के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। ब्लाॅक प्रमुख रचना बहुगुणा ने भी अपने स्तर से मदद करने का आश्वासन दिया। सांस्कृतिक महोत्सव जौनसार से आई कलाकारों की टीम ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए सभी को झूमने के लिए मजबूर किया। जौनसार के उभरते गायक अज्जु तोमर ने जौनसारी व हिमाचली गानों में अपनी आवाज का जादू बिखेर कर लोगों की वाहवाही लूटी। स्थानीय कलाकार कुलदीप भाई समाजसेवी ने भी अपने गानों के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम मे हरिमोहन नेगी, मोहन प्रसाद सिल्वाल, राम प्रसाद सेमवाल, जगेंद्र राणा, प्रदीप डोभाल, कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष विशाल मणि बंधानी, राजेंद्र नौटियाल, राहुल नौटियाल, श्वेता बंधानी, आदेश नौटियाल, सूर्यमणि बंधानी आदि लोग उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद को मिलेगी नई ऊंचाई: जयश्रीकृष्ण

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गुरुवार को सूचना एवं लोक संपर्क विभाग स्थित उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के कार्यालय में परिषद के नवनियुक्त उपाध्यक्ष जयश्रीकृष्ण नौटियाल ने पदभार ग्रहण कर लिया। इस अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष हेमंत पाण्डेय ने नौटियाल का स्वागत करते हुए बधाई दी। नौटियाल और पाण्डेय के मध्य उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
परिषद के उपाध्यक्ष पाण्डेय ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत को बधाई देते हुए कहा कि सरकार के इस निर्णय से परिषद को मजबूती प्रदान होगी। पाण्डेय ने कहा कि परिषद ने कम समय में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनके शीघ्र ही सकारात्मक परिणाम सामने आयेंगे। पाण्डेय ने कहा कि परिषद में नौटियाल के उपाध्यक्ष पद पर नामित होने से परिषद के कार्याें को गति मिलेगी।
इस अवसर पर नवनियुक्त उपाध्यक्ष नौटियाल ने कहा कि उनका लक्ष्य परिषद को मजबूती प्रदान करना होगा। परिषद के माध्यम से उत्तराखण्ड को फिल्म क्षेत्र में नई पहचान दिलाना होगा। राज्य में फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों को किस प्रकार से अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान की जा सके, इसका प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पाण्डेय एवं परिषद के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद को नई ऊंचाई प्रदान की जायेगी।
इस दौरान परिषद के नोडल अधिकारी एवं उप निदेशक के.एस. चौहान ने बताया कि परिषद का गठन वर्ष 2015 में हुआ था। परिषद में माननीय मुख्यमंत्री जी अध्यक्ष हैं, जबकि दो उपाध्यक्ष सहित 15 सदस्य हैं। परिषद गठन से अब तक 60 से अधिक फिल्म निर्माता/निर्देशक को हिन्दी फिल्म, धारावाहिक एवं गढ़वाली, कुमांऊनी फिल्मों की शूटिंग हेतु अनुमति प्रदान की जा चुकी है। परिषद द्वारा वर्तमान में शार्ट फिल्म फेस्टिवल व फिल्म विधा से जुड़े कलाकारों के लिए डायरेक्टरी का निर्माण करने की योजनाएं गतिमान है। इस अवसर पर परिषद के सदस्य कुंवर राम सिंह नेगी भी उपस्थित रहे।

करण जौहर की नई फिल्म ड्राइव का पोस्टर जारी

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सुशांत सिंह राजपूत और जैक्लीन फर्नांडिज की जोड़ी को लेकर करण जौहर की प्रोडक्शन कंपनी धर्मा प्रोडक्शन में बनने जा रही एक्शन थ्रिलर फिल्म ड्राइव का पहला पोस्टर जारी कर दिया गया है। इस फिल्म का निर्देशन तरुण मनसुखानी कर रहे हैं और फिल्म को अगले साल होली के मौके पर रिलीज किए जाने की योजना है। इस फिल्म में फाक्स स्टूडियो करण जौहर का पार्टनर के तौर पर जुड़ा हुआ है।

सुशांत सिंह और जैक्लीन पहली बार धर्मा प्रोडक्शन के साथ किसी फिल्म में काम कर रहे हैं। निर्देशक तरुण मनसुखानी इससे पहले अभिषेक बच्चन, जान अब्राहम और प्रियंका चोपड़ा की टीम वाली फिल्म दोस्ताना का निर्देशन कर चुक हैं। सुशांत सिंह राजपूत, जिनकी हाल ही में आई फिल्म राब्ता बाक्स आफिस पर नाकाम साबित हुई थी, इन दिनों अमेरिका में नासा गए हुए हैं, जहां वे अपनी नई फिल्म चंदा मामा दूर के के लिए ट्रेनिंग करेंगे। इस फिल्म में सुशांत सिंह एक अंतरिक्ष यात्री का रोल कर रहे हैं। इस फिल्म को संजय पूर्ण सिंह चौहान निर्देशित करेंगे। ये फिल्म अगले साल अक्तूबर में रिलीज की जाएगी।

आत्मकथा लिख रहे हैं नवाजुद्दीन

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नवाजुद्दीन सिद्दीकी का नाम भी जल्दी ही बॉलीवुड के उन सितारों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने अपनी बायोग्राफी लिखी है। खबर है कि नवाजुद्दीन ने हाल ही में अपनी बायोग्राफी लिखने का काम शुरू किया है। उनकी टीम के सदस्य बता रहे हैं कि उनकी बायोग्राफी चार महीनों में पूरी हो जाएगी और साल के आखिर तक लॉन्च हो सकती है।

हाल ही के समय में बॉलीवुड में करण जौहर, आशा पारेख, शत्रुघ्न सिन्हा और ऋषि कपूर द्वारा लिखी बॉयोग्राफी काफी चर्चा में रही हैं। उनकी बॉयोग्राफी का नाम ‘द इनक्रेडबल लाइफ ऑफ द ड्रामा किंग ऑफ इंडिया’ होगा। ये बायोग्राफी एक पत्रकार के साथ उनकी बातचीत पर आधारित होगी, जिसमें उनके जीवन के हर पहलू को समेटा जाएगा। नवाज ने फिल्मों में सफलता पाने से पहले कई सालों तक कड़ा संघर्ष किया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला मुज्जफरनगर के एक गांव से आए नवाजुद्दीन को संघर्ष के दिनों में वॉचमैन तक का काम करना पड़ा था। आज उनकी गिनती बॉलीवुड के उच्च कोटी के सितारों में की जाती है। हाल ही में रिलीज हुई श्रीदेवी की फिल्म ‘मॉम’ में अपनी अदाकारी से प्रभावित करने वाले नवाज की नई फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ आगामी 25 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। 

अनिल और अर्जुन कपूर ने किया ‘मुबारकां’ का प्रमोशन

रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘मुबारकां’ रिलीज के करीब है| इसी के साथ बॉलीवुड स्टार अनिल कपूर और अर्जुन कपूर भी अपनी इस फिल्म के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यही वजह है कि वे फिल्म के प्रमोशन के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डटे हुए हैं। वे फिल्म के प्रमोशन के लिए दिल्ली में कई कर्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और लोगों से मिल रहे हैं।

इसी क्रम में दोनों ही अभिनेता यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ‘सदभावना दिवस’ का जश्न मनाने के तुरंत बाद, अनिल और अर्जुन विज्ञान विहार स्थित बागई केंद्र पहुंचे। यहां वह बागई परिवार और लोगों से मिले। बागई परिवार के प्रमुख विपुल कुमार बागाई ने दोनों कलाकारों के स्वागत और अपने घर में इनकी विशेष उपस्थिति बनाए रखने के लिए कोई कसर शेष नहीं छोड़ी। दरअसल, इस बार अर्जुन और अनिल कपूर, यानी असली जिंदगी के चाचा-भतीजे की जोड़ी सिल्वर स्क्रीन पर रॉक करने के लिए तैयार हैं, जबकि ‘मुबारकां’ में इन दोनों डायनैमिक स्टार्स के साथ आथिया शेट्टी, इलियाना डिक्रूज जैसी अदाकाराएं भी रोमांस और कॉमेडी के संयोजन की अहम कड़ी साबित होंगी।

इस फिल्म की कहानी अर्जुन कपूर द्वारा निभाए गए दो जुड़वां भाइयों के चारों ओर घूमती है, जिसने अपने विलक्षण चाचा को यह सुनिश्चित करने के लिए बदल दिया है कि वे दोनों उस स्त्री से शादी करेंगे, जिनसे वे प्यार करते हैं। अनीस बज्मी द्वारा निर्देशित और सोनी पिक्चर्स द्वारा निर्मित यह फिल्म 28 जुलाई को रिलीज होगी।

नंदा में गौरा का विलय, बनी ‘नंदा-गौरा कन्याधन’ योजना

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महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की योजना नंदा-देवी कन्याधन और समाज कल्याण विभाग की योजना गौरादेवी कन्याधन का संचालन अब ‘नंदा-गौरा कन्याधन योजना’ के रूप में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग करेगा। इन दोनों योजनाओं का स्वरूप बदलते हुए विलय कर एक ही योजना बनाई गई है, इस मामले में शासनादेश भी जारी किया गया है।

बालिकाओं के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर तैयार की गई एकीकृत योजना का लाभ बालिका के जन्म लेते ही मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए अभिभावकों को बालिका के नाम पर शून्य बैलेंस पर राष्ट्रीयकृत बैंक में माता के साथ संयुक्त खाता खुलवाना होगा। माता के जीवित नहीं रहने पर पिता के साथ और यदि पिता की भी मृत्यु हो चुकी है तो संरक्षक के साथ मिलकर संयुक्त खाता खोला जाएगा। इतना ही नहीं किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े से बचने के लिए इस खाते को आधार कार्ड से लिंक करना होगा।

प्रथम चरण में योजना का लाभ उत्तराखंड राज्य में निवास करने वाले पात्र परिवार की दो जीवित बालिकाओं को दिया जाएगा। एक जुलाई 2017 के बाद पहली बार लाभ लेने के लिए सामाजिक, आर्थिक व जातीय आधारित जनगणना 2011 मान्य होगी। लाभार्थी योजना के संचालन के लिए प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में मुख्य विकास अधिकारी अध्यक्ष, जिला कार्यक्रम अधिकारी उपाध्यक्ष, जनपद के लीड बैंक के अधिकारी व संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी सदस्य होंगे।

योजना का लाभ लेने के लिए माता-पिता को बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय में जन्म के तीन माह के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र आंगनबाड़ी केंद्र व बाल विकास परियोजना कार्यालयों में निशुल्क उपलब्ध होंगे। योजना के तहत बालिका को कुल 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इसमें जन्म के समय 5000 रुपये, एक वर्ष की आयु पर 5000 रुपये, आठवीं कक्षा पास करने पर 5000 रुपये की राशि खाते में जाएगी। इसी तरह, 10वीं व 12वीं कक्षा पास करने पर पांच-पांच हजार रुपये, स्नातक या डिप्लोमा करने पर 10 हजार रुपये और विवाह के समय 16 हजार रुपये की राशि इस संयुक्त खाते में सरकार की ओर से डाली जाएगी।