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कलर्स के नए शो पर देव आनंद के परिवार ने भेजा नोटिस

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कलर्स चैनल पर शुरू होने जा रहा नया जासूसी शो ‘देव आनंद’ विवादों में आ गया है। खबर मिली है कि बॉलीवुड के एवरग्रीन सितारे दिवंगत देव आनंद के परिवार ने इस शो का नाम उनके नाम पर रखे जाने पर एतराज जताया है और इस बाबत चैनल को नोटिस भेजा है। खबरों के अनुसार, देव आनंद के परिवार ने शो का नाम बदलने को कहा है। परिवार का कहना है कि इस तरह के शो से नाम जुड़ने से देव आनंद के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा प्रभावित होगी।

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कलर्स चैनल की ओर से अधिकारिक रूप से इस नोटिस को लेकर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन चैनल से जुड़े एक अधिकारी ने निजी तौर पर नाम बदलने की संभावना से मना कर दिया और देव आनंद के परिवार की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि महज शो का नाम रखने से देव आनंद की प्रतिष्ठा को कोई नुकसान नहीं होगा।

इस शो में देव आनंद जासूस का नाम है, जिसे अभिनेता आशीष चौधरी ने निभाया है। कलर्स के अधिकारी का कहना है कि जब नोटिस आएगा, तो उसका जवाब भेज दिया जाएगा। दूसरी ओर, आशीष चौधरी ने इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि शो का नाम उनके नाम पर रखना हमारी ओर से महान कलाकार के लिए छोटी सी श्रद्धांजलि है। इस पर विवाद की कोई बात उनकी समझ से बाहर है। इस शो में जासूस का पूरा नाम पहले देवआनंद बर्मन था, जिसे बाद में छोटा करके देव आनंद कर दिया गया। ये शो इसी महीने 29 जुलाई से शुरू होने जा रहा है।

हाईकोर्ट ने देहरादून के गुरुसिंह सभा पर सुनाया फैसला

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हाई कोर्ट ने देहरादून में सिखों की प्रतिष्ठित संस्था गुरुसिंघ सभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराने के आदेश पारित किए हैं। कोर्ट ने इस संबंध में दायर विशेष अपील को निस्तारित कर दिया है। सभा के निष्कासित सदस्य गुरदीप सिंह ने विशेष अपील दायर कर कहा था कि इसी साल चार अप्रैल को संस्था द्वारा उन्हें बिना कारण बताए निष्कासित कर दिया गया। इसकी शिकायत सभा के रजिस्ट्रार को की गई। मगर रजिस्ट्रार ने शिकायत को खारिज कर दिया। जबकि संस्था की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए कहा गया कि वह सिंघ सभा की आड़ में अवैध कार्य कर रहे थे, जिस कारण उन्हें निष्कासित कर दिया गया।

इस मामले को याचिकाकर्ता द्वारा चुनौती दी गई तो एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद एकलपीठ के आदेश को विशेष अपील कर चुनौती दी गई। खंडपीठ के समक्ष संस्था की ओर से बताया गया कि गुरु सिंघ सभा की कार्यकारिणी का कार्यकाल सितंबर 2017 में खत्म हो रहा है, इसलिए वह कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही चुनाव करा लेंगे। संस्था के इस वक्तत्व के बाद विशेष अपील को निस्तारित कर दिया गया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ में हुई।

गुरुकुल परम्पराः देश विदेश से संस्कृत अध्यन को पहुंचे विद्यार्थी

हर साल श्रावणी पर्व के मौके पर ऋषिकेश के  गंगा घाट पर संस्कृति का अध्ययन करने वाले छात्र वेद उपनयन की शिक्षा शुरु करते हैं लेकिन इस साल चंद्र ग्रहण का असर श्रावण मास की होने वाली जनेऊ संस्कार पर पड़ा यही कारण है कि इस साल श्रावणी पर्व से पहले ही नाग पंचमी के मौके पर जनेऊ संस्कार को की परंपरा पूरी की गई की गई।

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धर्मशास्त्रो का कहना है कि जिस ओर गंगा पूरब की ओर बहे वही तीर्थ हैं ,यही कारण है कि हमारी हिन्दू संस्कृति के व्रत व त्योहारों में हमारे तीर्थो में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। श्रावणी पर्व भी हमारी प्राचीन गुरुकुल की परंपरा का निर्वहन करता एक सांस्कृतिक पर्व है जिसका उत्साह आज के दौर में भी देखने को मिलता है। आज उपनयन के बाद ये ऋषिकुमार वेद-शास्त्रों की शिक्षा-दीक्षा के अधिकारी बन जाते है।

वेद-शास्त्रों का अध्ययन करने ऋषिकेश में जुटे ये छात्र उतराखंड के विभिन्न क्षेत्रो से है साथ ही नेपाल से भी कई छात्रों ने यहाँ वेद कर्म काण्ड के अधयन्न के लिए प्रवेश लिया है। यहाँ इन्हें एकजुट देखकर एकबारगी प्राचीन गुरुकुल परंपरा जीवंत हो उठती है। इनकी  खुशी स्वयं बयां होती है। शास्त्रों में  मान्यता है कि आज ही के दिन से वेद व कर्मकांड का अध्ययन करने वाले वेदपाठी उपनयन संस्कार के बाद गुरुकुल में दीक्षा आरम्भ करते है।

 जन्म न  जायते शुद्र,संस्कारत द्विज उच्चते अर्थात जन्म से तो सभी शुद्र होते है लेकिन मनुष्य को संस्कार ही उच्च बनाते है। आज ये ऋषिकुमार इसी शुद्ता की ओर जाने का संकल्प ले रहे है।

 

कैदी लेंगे डान के हाथों का स्वाद

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अन्डरवर्ड डान को सितारगंज की जेल में आम कैदियों की तरह ही अपनी दिनचर्चा काटनी होगी और खेती के साथ ही खाना भी बनाना होगा। डान को व्यस्त रखने के लिए जेल प्रशासन ने कई काम डान को सौंप दिये हैं। आम कैदियों के साथ डान भी अब पसीना बहायेगा। और डान के  हाथों से बने खाने का स्वाद जेल प्रशासन और कैदी लेंगे। सितारगंज सेंट्रल जेल में अंडरवर्ल्‍ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी के आने के बाद जहां उसकी सुरक्षा को लेकर अधिकारी रणनीति बनाने में जुटे हैं। वहीं अधिकारियों ने मंथन कर निर्णय लिया  है कि गया कि डॉन को व्यस्त रखने के लिए उससे जेल में खेती कराई जाएगी और खाना बनवाया जाएगा, ताकि उसे काम में लगाकर उस पर आसानी से नजर रखी जा सके।

दस साल पहले 2007 में पीपी नैनीताल जेल से पेशी के दौरान भाग चुका है। उसके भागने में एक पुलिसकर्मी का हाथ पाया गया था। इसलिए जेल प्रशासन डॉन की सुरक्षा को लेकर बेहद चौकन्ना है। वर्तमान में भी सेंट्रल जेल में डॉन खूंखार बंदियों के साथ रह रहा है। यहां पर हाई सिक्योरिटी बैरक भी नहीं है। जेल प्रशासन के उच्चाधिकारियों का भी मानना है कि सुरक्षा में चूक होने पर डॉन मुसीबत खड़ी कर सकता है।  जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि पीपी खूंखार कैदियों के बीच सजा काट रहा है। ऐसे में वह कोई न कोई रणनीति बना सकता है। इसलिए बंदियों को व्यस्त रखने के लिए यहां काम कराने का प्रावधान है।

बंदियों की काम में व्यस्तता होने से उन्हें खुराफात में दिमाग लगाने का समय नहीं मिलेगा। काम नहीं होने से बंदी जेल में तरह-तरह के हथकंडे, साजिश रचने लगते हैं। जेल अधीक्षक ने कहा कि डॉन की व्यस्तता बढ़ाई जाएगी। गौरतलब है कि प्रकाश पांडे उर्फ पीपी को सोमवार को देहरादून जेल से सितारगंज सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया है।

आॅल इंडिया सीनियर डबल्स रैकिंग बैडमिंटन में उत्तराखंड की उम्मीद बरकरार

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उत्तराचंल स्टेट बैडमिंटन एसोसिएशन के तत्वाधान में हरिद्वार जिला बैडमिंटन संघ के सहयोग से सत्यपाल कुमार मेमोरियल आॅल इंडिया बैडमिंटन टूर्नामेंट में क्वालिफाइंग दौर पूरा हो गया, अब मुख्य मुकाबले होंगे। 

उत्तराखंड से भावेश पांडे और दीपांक वर्मा, अभिषेक अग्रवाल और अमृतपाल, सौरभ पांडे, ईशीता पवार की जोड़ी ने लीग मुकाबले जीतकर उत्तराखंड के लिए उम्मीद बरकरार रखी है। तमिलनाडु से गणेश कुमार ए. और अविनाश के, महाराष्ट्र से विनायक दण्डवते और निहार केलकर, उप्र और उत्तराखंड से अभिषेक अग्रवाल और अमृतपाल सिंह ने भी मिक्स डबल में जीतकर बढ़त ली है। इनके अतिरिक्त पंजाब, गोवा, दिल्ली, जम्मू कश्मीर हरियाणा आदि के खिलाड़ियों ने भी अगले दौर में कदम रखा है।

टूर्नामेंट के आयोजन सचिव नीरज कुमार और चेयरमैन अजय कुमार ने बताया कि 29 जुलाई को फाइनल मैच खेला जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को प्री क्वार्टर फाइनल और क्वार्टर फाइनल मुकाबले होंगे। आॅल इंडिया सीनियर डबल्स रैकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में हरिद्वार से मंगल सिंह, बबीता जोशी, शिवम् जोशी और लक्की शर्मा रैफरी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि कोर्ट संचालन के जिम्मेदारी सुमन कुमार, सीपी सिंह निभा रहे हैं। खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पूर्व खिलाड़ी (वेटरेन प्लेयर) डाॅ. प्रमोद त्यागी, कौशल, अंकित, गुलशन भाटिया, मोनू, राजेश निझावन, आशुतोष शर्मा आदि खिलाड़ी इस दौरान मौजूद रहे। डाॅ. प्रमोद त्यागी फिजोयोथैरेपिस्ट के रूप में इस टूर्नामेंट में निःशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। 

सरेआम हथियारों की नुमाईश पर हाईकोर्ट सख्त

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अब हथियारों की नुमाईश आप हर जगह नहीं कर पायेंगे। शादी समारोह हो या फिर धार्मिक आयोजन हथियारों को ले जाने पर पुरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। हाईकोर्ट ने खास तौर पर आदेश पारित करते हुए हथियारों को इन स्थानों पर ले जाने पर पाबंदी लगाई है। अापको बता दें कि हर्ष फायरिंग मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए राज्य में शादी समारोह, धार्मिक आयोजन, सार्वजनिक सभाओं व शैक्षिक संस्थानों में हथियार ले जाने पर पाबंदी लगा दी है। इतना ही नहीं, अदालत ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए हैं। इनका अनुपालन कराने के लिए जिला पुलिस प्रमुखों को जवाबदेह बनाया गया है।

हर्ष फायरिंग में दो लोगों की मौत के मामले में निचली अदालत से हुई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दोषी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश दिए। बागेश्वर निवासी धर्म सिंह ने गांव के ही भगवान सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उसके शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान चार लोगों को गोली लग गई थी। इनमें से दो की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में निचली अदालत ने 12 जुलाई, 2013 को भगवान सिंह को हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि शस्त्र अधिनियम में बरी कर दिया था। भगवान सिंह ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त की अपील को गुणदोष के आधार पर खारिज कर दिया, साथ ही हर्ष फायरिंग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए।

अदालत ने अपने आदेशों में कहा है कि 21 साल से कम आयु वालों को शस्त्र लाइसेंस जारी न किए जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति को हिंसा व अन्य मामलों में सजा हो चुकी हो, उसे पांच साल तक शस्त्र लाइसेंस देने पर विचार ही न किया जाए। अदालत ने शांति व्यवस्था के दौरान पुलिस की ओर से पाबंद किए गए व्यक्तियों को भी लाइसेंस जारी न करने को कहा है।

चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार

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थाना पटेलनगर पुलिस ने पटेलनगर क्षेत्र में बीते दिनों घरों में हुई चोरी तथा बाइक चोरी का खुलासा किया। पुलिस चोरी के आरोप में पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों के पास से छह लाख 75 हजार के चोरी के सामान बरामद हुए हैं।
थाना पटेलनगर क्षेत्र में बीते दिनों चोरी के कई मामले दर्ज किए गये थे। इन मामलों में पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी। पुलिस बुधवार को चेकिंग के दौरान पथरीबाग चौक पर संदिग्ध वाहनों की चेकिंग करते हुए मुखबिर द्वारा दी गई सूचना के आधार दो मोटरसाइकिल पर बैठे चार लड़कों को रोककर गाड़ी के कागजात मांगे वे अपनी गाड़ियों के कागज नहीं दिखा पाए।
चारों युवकों से पूछताछ करते हुए पुलिस ने तलाशी ली तो उनके पास बैग में दो लैपटॉप, एक एलईडी रखा था, जिसके बारे में पूछा गया तो कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये। शक होने पर सख्ती से पूछताछ की गई तो बताया कि यह सामान व गाड़ियां पूर्व में पटेल नगर क्षेत्र से चोरी की है। जिसे वे बेचने जा रहे थे।
अभियुक्तों ने बताया कि यह चोरी गई मोटरसाइकिल को अपने साथी (मैकेनिक) एहसान, भगत सिंह कॉलोनी रायपुर को बेचते हैं तथा वह गाड़ियों को कटवाता हैं तथा कुछ मोटरसाइकिल के चेचिस नंबर व इंजन नंबरों को हम एहशान से डाई मशीन से बदलवा देते हैं।
पुलिस ने बताया कि बरामदा सामान, गाड़ियों के संबंध में थाना पटेलनगर पर पूर्व मुकदमा पंजीकृत है। पुलिस के गहनता से पूछताछ करने पर अभियुक्तों ने बताया कि वे चारों दोस्त हैं। मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले हैं तथा यहां ब्राह्मण वाला झुग्गी झोपड़ियों में किराए पर रहते हैं। बताया कि चारों फेरी का काम, पुताई का काम, कबाड़ी का काम करते हैं। साथ ही दिन में घूमकर बंद घरों व सुनसान जगह में बने घरों को चिन्हित करते हैं। पुताई व कबाढ़ के बहाने वो लोग घरों में रहने वाले सदस्यों के बारे में भी जानकारी कर लेते हैं तथा रात्रि के समय मौका देखकर हम आपस में मिलकर इन घरों से सामान चोरी कर लेते हैं।
अभियुक्त सहजाद ने कि वह दिन भर फेरी करके घरों के बाहर सड़क के किनारे नो पार्किंग की जगह पर खड़े मोटरसाइकिल को मौका देखकर डुप्लीकेट चाबी से खोलकर चोरी करता है तथा उन्हें कम दामों में बेच देता है। अभियुक्त सहजाद ने थाना नेहरू कॉलोनी के दीप नगर क्षेत्र से भी करीब दो माह पूर्व एक मोटरसाइकिल व थाना डालनवाला क्षेत्र से भी मोटरसाइकिल चोरी की गई जो अभियुक्तगण की निशानदेही पर बरामद की गई है।
अभियुक्तगणों द्वारा पूर्व में करीब 11 मोटरसाइकिल, तीन लैपटॉप, दो टीवी, एक मोबाइल, दो एलईडी, पांच गैस सिलेंडर चोरी किए गए हैं, जो अभियुक्तों की निशान देहि पर बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक अभियुक्त शातिर किस्म के चोर हैं तथा पूर्व में भी जेल जा चुके हैं।

सोशल मीडिया पर क्षेत्रीय भाषा-बोली में संवाद करेंगे सीएम

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गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार एक अनूठी पहल शुरू करने जा रही है। उत्तराखण्ड की लोक भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सोशल मीडिया पर गढ़वाली, कुमाऊनीं व उत्तराखण्ड की अन्य बोली-भाषा में आम-जन से संवाद स्थापित करेंगे। इसकी शुरुआत गुरुवार को मुख्यमंत्री ने अपने ट्विटर अकाउंट पर गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली में ट्वीट कर की।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किए जाने का प्रयास कर रही है। गढ़वाली व कुमाऊनीं बोली को दर्जा दिलाने की मांग पहले भी संसद में भी उठाई जा चुकी है और यह प्रयास जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, बोली/भाषा से जुड़ाव रखना चाहिए। आज का युवा सोशल मीडिया में अधिक सक्रिय है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में अपनी लोक भाषा गढ़वाली, कुमाऊनीं व उत्तराखण्ड की अन्य बोली भाषा में संवाद करने से युवा पीढ़ी के साथ-साथ भावी पीढ़ी को भी अपनी बोली व संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपेक्षा की है कि वे समय-समय पर सोशल मीडिया पर गढ़वाली, कुमाऊनीं व उत्तराखण्ड की अन्य बोली भाषा में भी उनसे संवाद स्थापित करेंगे। 

कागजों पर लगे पौधे, धरातल पर उगे नहीं

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प्रदेश में बीते कुछ दिनों से पौधारोपण की होड़ सी लगी है। लग रहा है कि अब आने वाले दिनों में प्रदेश की आबोहवा तरो-ताजा रहेगी, लेकिन बीते कुछ सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो यह सब महज आडंबर लगेगा। पर्यावरण प्रेम के नाम पर केवल पौधों को रोपा जाता है। इसके बाद उनकी देखरेख का समय किसी के पास नहीं, जबकि वन क्षेत्रों में रोपित पौधों की तीन साल तक देखभाल का प्रावधान है। चार सालों के आंकड़े ही देखें तो हर साल औसतन 1.71 करोड़ पौधों का रोपण किया गया। इनमें से कितने जीवित हैं, इसका वन विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। ऐसे में प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक ठोस नीति बनाए जाने की जरूरत है ताकि प्रदेश हरीभरी वादियों से लहलहाता रहे।

पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण के आंकड़ों की बात करें तो एक अनुमान के मुताबिक हर साल डेढ़ से दो करोड़ पौधों का रोपण किया जाता है। हर बार इसी प्रकार से अभियानों का आगाज और अंजाम होता है। कुछ ऐसे ही दावे वन महकमा भी करता रहा है। पिछले 17 साल से यह सिलसिला चल रहा है। बावजूद इसके वनों का क्षेत्रफल 46 फीसद से आगे नहीं बढ़ पाया है। यह है 71 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड का हाल। जिस हिसाब से राज्यभर में वर्षाकाल में पौधरोपण हो रहा है, उसमें से आधा फीसद भी पनप नहीं रह पा रहे। इससे साफ जाहिर है कि सिस्टम की नीति और नीयत में कहीं न कहीं खोट है। पर्यावरण प्रेमी भी सोशल मीडिया के लिए पौधे लगा रहे है। यदि ऐसा नहीं होता तो कागजों की जगह धरातल पर जंगल खूब पनपे होते।
विशेषज्ञों की मानें तो शासन व वन विभाग को ठोस कार्य योजना तैयार कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पौधों का रोपण करना चाहिए। साथ ही कुछ सालों तक इनकी देखभाल सुनिश्चित करनी होगी। तब जाकर ही कुछ सकारात्मक नतीजे सामने आ पाएंगे। राज्य में गुजरे चार सालों के आंकड़े ही देखें तो हर साल औसतन 1.71 करोड़ पौधों का रोपण किया गया। इनमें से कितने जीवित हैं, इसका महकमे के पास कोई जवाब नहीं है। यह स्थिति तब है, जबकि वन क्षेत्रों में रोपित पौधों की तीन साल तक देखभाल का प्रावधान है। बावजूद इसके न तो महकमा खुद पौधों को बचा पा रहा और न ग्रामीणों को इसके लिए प्रेरित कर पा रहा। हर साल, बस किसी तरह लक्ष्य पूरा करने और बजट को खपाने की होड़ सी नजर आती है।
अब पौधों के जिंदा न रह पाने के पीछे विभाग के तर्कों पर भी नजर डालते हैं। अफसरों के मुताबिक वन्यजीवों के साथ ही भूक्षरण, जंगल की आग, अवैधकटान जैसे कारणों से 30 से 40 फीसद पौधे जिंदा नहीं रह पाते। जानकारों की मानें तो यहां ये आंकड़ा 50 से 60 फीसद तक है और कहीं-कहीं तो 70 फीसद तक। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगना लाजिमी है। दरअसल, पौधरोपण के कार्यक्रम में सबसे बड़ी खामी है कि नियोजन की। विषम भूगोल वाले उत्तराखंड में शायद ही कभी स्थानीय जलवायु के अनुरूप पौधरोपण के लिए प्रजातियों का चयन होता हो। यह पौधों के न पनप पाने का सबसे बड़ा कारण है।
पर्यावरणविद् व पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती कहते हैं कि इसके लिए शासन और विभाग में बैठे लोगों को नियोजन का ढर्रा बदलने की जरूरत है। वह कहते हैं कि मौजूदा स्थिति में पौधरोपण को तो हम उद्वेलित दिखते हैं, मगर किस तरह के पेड़ लगा रहे हैं, इसकी ठीक से प्लानिंग अथवा तैयारी कभी नहीं होती। एक रोपित पौधे की तब तक उचित देखभाल होनी चाहिए, जब तक कि वह 10 साल की आयु पूरी न कर ले। कहने का आशय से वन समूह से जुड़े प्रत्येक अंग को मजबूत करना होगा, तब जाकर ही पौधरोपण सफल हो सकता है। उत्तराखंड समेत हिमालयी राज्यों में अर्थव्यवस्था स्थानीय संसाधनों पर आधारित होती है। इसके लिए जंगल, पानी व मिट्टी सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।
पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी कहते हैं कि इसे तात्कालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रूप में देखना होगा। वनों को स्थायी अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही ग्रामीणों को साथ जोड़कर उनकी जरूरतों को भी पूरा किया जाना चाहिए। इसके लिए विभाग को भविष्य के लिए प्लानिंग, प्रजाति, मृत्युदर व रणनीति का ठोस प्लान तैयार करना होगा।

मदेश्वर देवता के मेले में दिखी उत्तराखंड सं​स्कृति की झलक

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कोटियाल गांव मे मदेश्वर देवता के मेले के अवसर पर सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि पुरोला विधायक राजकुमार ने किया। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को प्रदेश की संस्कृति के परिचायक बताया। इस दौरान प्रदेश की विभिन्न संस्कृतियों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ने कहा कि मेले हमारी पौराणिक संस्कृति के परिचायक हैं, मेलों के जरिए ही आपसी भाईचारा तथा मेलमिलाप को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि पौराणिक संस्कृति को बचाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है। उन्होंने कोटियाल गांव मे बारात घर के निमार्ण के लिए आठ लाख की घोषणा की व एक वर्ष के अंदर जटा से सुनारा होते हुए कोटियाल गांव तक दो किमी सड़क निर्माण का वादा किया। ग्रामीणों की मांग थी कि इस वैकल्पिक मोटर मार्ग के बनने से सुनारा, कोटियालगांव, मंजियाली, कंसोला, पलेठा, खान्सी आदि आधा दर्जन गावों को लाभ मिलेगा।
चुनाव जीतने के बाद पहली बार कोटियालगांव मे सावन के महीने मे होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे विधायक राजकुमार का ग्रामीणों ने स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। इस मौके पर विधायक ने कहा कि सावन के इस मेले को आगामी वर्ष मे भव्य रूप दिया जाएगा व वह अपने स्तर से प्रदेश के बड़े कलाकारों को यहां बुलाने का काम करेंगे। इस दौरान ग्रामवासियों ने गांव की समस्याओं को ले कर उन्हें मांग पत्र सौंपा।
जिला पंचायत सदस्य विमला रावत ने मदेश्वर देवता के मंदिर सौंदर्यकरण के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। ब्लाॅक प्रमुख रचना बहुगुणा ने भी अपने स्तर से मदद करने का आश्वासन दिया। सांस्कृतिक महोत्सव जौनसार से आई कलाकारों की टीम ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए सभी को झूमने के लिए मजबूर किया। जौनसार के उभरते गायक अज्जु तोमर ने जौनसारी व हिमाचली गानों में अपनी आवाज का जादू बिखेर कर लोगों की वाहवाही लूटी। स्थानीय कलाकार कुलदीप भाई समाजसेवी ने भी अपने गानों के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम मे हरिमोहन नेगी, मोहन प्रसाद सिल्वाल, राम प्रसाद सेमवाल, जगेंद्र राणा, प्रदीप डोभाल, कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष विशाल मणि बंधानी, राजेंद्र नौटियाल, राहुल नौटियाल, श्वेता बंधानी, आदेश नौटियाल, सूर्यमणि बंधानी आदि लोग उपस्थित रहे।