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तीर्थनगरी में चाइनीज राखियों का हो रहा विरोध

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रक्षाबंधन पर्व की तैयारियों को लेकर हरिद्वार एवं ज्वालापुर के विभिन्न बाजारों में तरह-तरह की फैन्सी राखियां सजने का क्रम जारी है। बड़ी संख्या में दुकानों पर राखी की जमकर खरीदारी भी हो रही है। चाइनीज राखियों की बिक्री बाजारों में कम ही हो रही है। स्थानीय लोग परम्परागत राखियों को खरीदना अधिक पसन्द करते हैं। बच्चों की पसन्दीदा डोरीमोन, छोटा भीम, मोटू पतलू, स्पाइडमैन, जैसी राखियां दुकानों पर सजी हुई हैं। जबकि चाइनीज राखियों की बिक्री बाजारों में कम हो रही है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि चीन लगातार भारत विरोधी गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाता चला आ रहा है। ऐसे में हमें भी चाइनीज उत्पाद का विरोध करना चाहिए। चाइनीज राखियों को कतई भी नहीं खरीदना चाहिए। व्यापारी विपिन गुप्ता का कहना है कि बाजारों में भारतीय परम्पराओं की राखियों का विशेष महत्व होता है। भगवान की प्रतिमाओं वाली राखियां काफी प्रचलित हैं। चंदनवाली राखियों की भी बिक्री रक्षाबंधन पर्व के दौरान होती है। विपिन गुप्ता ने कहा कि बाजार में अधिकांश भारत में निर्मित राखियों की बिक्री ज्यादा है। चाइनीज राखियों की बिक्री इस बार बाजार में आंशिक रूप से ही हो रही है।

रक्षा बंधन पर्व के लिए बहनें अपने भाइयों की कलाई पर तरह-तरह की राखियां बांधती है। बहनें विशेष तैयारियों में जुटी हुई है। बाजारों में जगह-जगह राखियां सज चुकी है। बाजारों में खरीदारी भी प्रारंभ हो चुकी है। वह बहनें भी राखियां खरीद रही हैं, जिनके भाई काफी दूर दराज के क्षेत्रों में रहते हैं साथ ही अन्य राज्यों मेें निवास करते हैं। जिनको बहनें डाक, कोरियर के माध्यम से राखियों को भेजकर अपना स्नेह प्रेम बहनें दिखाती हैं। फेसबुक इंटरनेट, व्हाट्अप, टयूटर आदि के माध्यम से रक्षा बंधन पर्व की बधाइयों का क्रम जारी है। आस्था की नगरी हरिद्वार में बाजार सजे हुए हैं, जहां-तहां देखों दुकानों पर विभिन्न प्रकार की राखियां सजी हुई हैं। बड़ी संख्या बहने अपने भाइयों की कलाई पर बांधने के लिए राखियों की खरीदारी कर रही है।

कोटद्वार आपदा पीड़ित की मदद के लिए आगे आया हंस कल्चर सेंटर

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उत्तराखंड में पिछले दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते शुक्रवार को कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों देर रात बादल फटने से भारी तबाही हुई हैं। आधी रात को अचानक आई इस आफत के बाद क्षेत्र में भगदड़ मच गई। बादल फटने से अलग-अलग परिवार के छै लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों घरों में मलबा जमा हो गया है।

इस आपदा पर सरकार और तमाम समाजिक संगठनों ने अपनी संवेदना प्रकट की है। समाज सेवी माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज ने कोटद्वार आपदा पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हुए उन्हें हर संभव मदद देने की घोषणा की है। हंस कल्चर सेंटर दिल्ली के सचिव चंदन सिंह भंडारी ने बताया हैं कि, ‘लगातार मूसलाधार बारिश के बाद कोटद्वार में जो तबाही हुई है। उसके प्रति माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज ने अपनी संवेदना प्रकट की है और जरूरतमंद लोगों तक तत्काल जरूरी सामान पहुंचाने के निर्देश दिए। बादल फटने से जिन लोगो को और घरों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है उन लोगों और घरों को जल्द से जल्द मदद पहुंचे, इसके लिए माताजी-महाराज जी निरंतर नजर रखे हुए हैं और कोटद्वार में सभी प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में हैं।’

आपको बात दें कि माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज ने कोटद्वार में बादल फटने से अपना सब कुछ खो चुके परिवारों के लिए हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तत्काल प्रभाव से पीड़ितों के लिए राहत सामग्री पहुंचा दी हैं। जिसके लिए सरकार और पीड़ित परिवारों ने माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज का आभार प्रकट किया है।

देर रात कोटद्वार में पनियाली गधेरे बादल फटने से ग्राम सभा मानपुर से सटी आर्मी की कैंटीन की दीवार टूट गई और उसमें मलबा घुस गया। इसके बाद रिफ्यूजी कॉलोनी में मलबा घुसा और चारों तरफ़ अफरा-तफरी मच गई। जिसके चलते कई लोग इसकी चपेट में आ गए और मलबे में दबने से छ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन अभी भी कोटद्वार में रेस्क्यू आपरेशन चला रहा है जबकि लोगों का कहना है कि मलबे में अभी भी कई लोग दबे हैं।

वाम दलों की राजनीति क्यों हुई खारिज

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left politics on a downfall

लेफ्ट पार्टियों के सिकुड़ने और खारिज होने का ताजा प्रमाण यह है कि अब इनका पश्चिम बंगाल से कोई भी सदस्य राज्य सभा में नहीं आयेगा। राज्यसभा के इतिहास में आजादी के बाद यह पहली बार हो रहा है। वैसे तो लेफ्ट पार्टियों का पतन भारतीय राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है। इन दलों को अब अपनी वजूद को कायम रखने के लिए जनता के बीच में अधिक काम करना होगा। जनता से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष करते रहना होगा। इन्हें देश के राजनीतिक पटल से पूरी तरह से खारिज होने से अपने को बचाना ही होगा।
जनभावनाओं की अनदेखी
आप वाम दलों के पतन का गहराई से अध्ययन करें तो महसूस करेंगे कि इन दलों का नेतृत्व पिछले पचास दशकों से जन भावनाओं से पूरी तरह से हटकर सोच रहा है। इसका एक उदाहरण ले लीजिए। यह बहुत पुरानी बात नहीं है जब केन्द्र सरकार ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया और वहां आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया। जवाब में ये वाम दल मांग करते रहे कि सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के प्रमाण प्रस्तुत करे। वामदल अपने को गरीब-गुरबा के हितों का सबसे मुखर प्रवक्ता बताते हैं। जरा कोई बता दे कि इन्होंने हाल के वर्षों में कब महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी जैसे सवालों पर कोई आंदोलन छेड़ा हो। सारा देश राष्ट्रीय एकता और अखंडता के सवालों पर एक है। इस पर भी ये वामदल अपने तरीके से सोच रहे हैं। इनके येचुरी तथा करात सरीखे नेता सिर्फ कैंडिल मार्च निकाल सकते हैं या केरल में आर.एस.एस. के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या पर वामपंथी कार्कर्ताओं के बचाव में खड़े हो सकते हैं। इसीलिए अब इन्हें जनता खारिज करती जा रही है। देश ने 1962 में चीन से जंग के वक्त इनका पहली बार असली चेहरा देखा । तब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(भाकपा) ने राजधानी के बारा टूटी इलाके में चीन के समर्थन में एक सभा तक आयोजित करने की हिमाकत की थी। हालांकि वहां पर मौजूद लोगों ने तब आयोजकों को अच्छी तरह पीट दिया था। इसके अलावा वामदलों के अधिकतर राज्यों में सिकुड़ने का एक अहम कारण यह भी है कि इनके गैर जिम्मेदाराना हरकतों से छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां बंद होती रही हैं। इसके चलते वामपंथी ट्रेड यूनियन आंदोलन कमजोर हो गया और वाम नेता दूसरे किसी मुद्दे पर कोई विशेष छाप नहीं छोड़ सके। संगठन के स्तर पर भी इन्होने कोई जमीनी काम नहीं किया, सिवाय इसके कि फर्जी एन.जी.ओ. बनाकर सरकारी योजनाओं का पैसा कांग्रेस के सहयोग से भरपूर लूटा और हर तरह की मौजमस्ती में अपना समय और लूट के धन का अपव्यय किया।
घटा स्पेस
कुछ महीने पहले हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि लेफ्ट पार्टियों के लिए देश की राजनीति में अब कोई स्थान नहीं रह गया है। अप्रासंगिक होती जा रही वामपंथी पार्टियों की नीतियों और कार्यक्रमों को जनता स्वीकार करना तो छोड़िए, सिरे से ही ख़ारिज करती जा रही है। इसीलिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) लोक सभा से लेकर राज्य विधानसभा चुनावों तक में धराशायी होती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव में पहली बार भाकपा, माकपा और भाकपा( माले) ने विधानसभा चुनावों के लिए साझा प्रत्याशी उतारे। उन्होंने सौ सीटों पर कम से कम 10 से 15 हजार वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा।
वामदलों से सीताराम येचुरी, डी.राजा, वृंदा करात, दीपांकर भट्टाचार्य जैसे नेताओं ने जमकर प्रचार किया। फिर भी कोई फायदा नहीं हुआ। आंकड़े गवाह हैं कि करोड़ों की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में वामदल कुल मिलाकर एक लाख 38 हजार 763 वोट ही हासिल कर सके। यह कुल मतों का दशमलव दो प्रतिशत होता है। वहीं नोटा के लिए प्रदेश की जनता ने सात लाख 57 हजार 643 वोट दिए, यह करीब दशमलव नौ फीसदी बैठता है।
कभी वाम मोर्चा का गढ़ रहे पश्चिम बंगाल में भी उसकी दुकान बंद होती जा रही है। वहां 2011 के विधानसभा चुनाव में उसे 41.0 फीसद मत मिले। यह आंकड़ा 2014 के लोकसभा चुनाव में 29.6 फीसद रह गया। अब आया 2016 का विधानसभा चुनाव। अब लेफ्ट पार्टियों को मिले 26.1 फीसद। यानी गिरावट का यह सिलसिला लगातार जारी है। गौर करें कि पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे लेफ्ट पार्टियां सिकुड़ रही हैं, भारतीय जनता पार्टी का असर वहां पर उसी रफ्तार में बढ़ता जा रहा है।
नौजवानों की ना
अब ये पार्टियां पश्चिम बंगाल, केरल तथा त्रिपुरा में ही सिकुड़ कर रह गई हैं। इनसे अब नौजवान नहीं जुड़ पा रहे हैं। माकपा के कुल सदस्यों में मात्र 6.5 फीसद ही 25 साल से कम उम्र के हैं। माकपा का नेतृत्व तो बुजुर्गों से भरा है। नेतृत्व में नौजवान नाममात्र के ही हैं। माकपा की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि उसकी विशाखापट्नम में 2015 में हुई कांग्रेस में 727 नुमांइदों ने भाग लिया। उनमें सिर्फ दो ही 35 साल से कम उम्र के थे। यानी माकपा से नौजवानों का मोहभंग होता जा रहा है। अब माकपा और पश्चिम बंगाल की बात कर लीजिए। बंगाल पर माकपा ने 1977 से लेकर 2011 तक राज किया। ज्योति बसु लंबे समय तक माकपा के नेतृत्व वाली वाम सरकार के मुख्यमंत्री थे। अब उसी बंगाल में भी माकपा लोकसभा और राज्य सभा के चुनाव बार-बार हार रही है।
फिर वापस चलते हैं उत्तर प्रदेश चुनाव पर। तब ये पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक चंद वोटों को ही जुटाने में तरस गए। अयोध्या की बात करें तो यहां भाकपा के सूर्यकांत पांडेय काफी कोशिश के बाद भी महज 1353 लोगों का ही वोट हासिल कर सके। दंगे की आग से झुलसे मुजफ्फरनगर में माकपा के मुर्तजा सलमानी को कुल मिलाकर 491 वोट ही मिले। आजमगढ़ में भी यही हाल रहा। यहां माकपा के राम बृक्ष की 1040 वोट के साथ जमानत जब्त हुई, जबकि गाजियाबाद के साहिबाबाद में इसी पार्टी के जगदंबा प्रसाद 1087 वोट के साथ जमानत नहीं बचा सके। इन सभी जगहों पर वाम दलों का बीते समय में तगड़ा असर रहा है। यानी उत्तर प्रदेश से लेफ्ट पार्टियां का सूपड़ा साफ हो चुका है। 2007, 2012 के बाद अब 2017 में वह एक सीट जीतने को तरस गए।
हो सकता है कि आज की पीढ़ी को मालूम न हो, पर एक दौर में उत्तर प्रदेश में वाम दलों का असर था। 1957 से 2002 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में वाम दल के उम्मीदवार जीत हासिल करते रहे। इनमें 1969 की भाकपा की 80 और माकपा की एक सीट पर जीत अब तक की वाम दलों की उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी जीत मानी जाती है।
केरल में वाम दलों का एक अलग चेहरा भी देश देख रहा है। वहां पर इनकी सरकारों के संरक्षण में गुंड़े बीते दशकों से भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार रहे हैं। अभी तक सैकड़ों कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद वहां की बेशर्म सरकारें खूनियों को बचाती रही हैं। सारा देश देख रहा है केरल में खेले जा रहे इस खूनी खेल को। निस्संदेह इन तमाम कारणों के चलते ही देश का मतदाता वाम दलों की चुनावों में भरपूर दुर्दशा कर रहा है।

वेब सीरीज से शमिता शेट्टी भी जुड़ीं

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शिल्पा शेट्टी की छोटी बहन शमिता शेट्टी भी अब वेब सीरीज से जुड़ने जा रही हैं। उनकी मुख्य भूमिका वाली वेब सीरीज की शुरुआत अगस्त के दूसरे सप्ताह में होने जा रही है। हरियाणा और अंग्रेजी भाषा की इस कामेडी-थ्रिलर सीरीज को वायकाम 18 कंपनी रिलीज करने जा रही है।

इस वेब सीरीज में शमिता शेट्टी के अलावा फिल्म दंगल में आमिर खान के भतीजे का रोल करने वाले आयुष्मान खुराना के भाई अपरक्षित खुराना के साथ साथ गौरव पांडे और रिद्धिमा पंडित हैं। गौरव पांडे को वरुण धवन और आलिया भट्ट की जोड़ी वाली फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनियां में काफी पसंद किया गया।

रिद्धिमा पंडित ने हाल ही में उनके डेली के टीवी शो हमारी बहू रजनीकांत में पसंद किया गया। खुद शमिता शेट्टी सन 2009 में बिग बास के तीसरे सीजन में हिस्सा ले चुकी हैं और इसके बाद दो साल पहले 2015 में वे डांस शो झलक दिखला जा के आठवें सीजन में नजर आई थीं।

फिल्मों में शमिता की शुरुआत यशराज में बनी आदित्य चोपड़ा निर्देशित फिल्म मोहब्बतें से हुई। इसके बाद उन्होंने अजय देवगन के साथ अनुभव सिन्हा की कैश, अपनी बहन शिल्पा शेट्टी के साथ क्राइम थ्रिलर फरेब और इमरान हाश्मी के साथ जहर फिल्मों के अलावा बोनी कपूर की फिल्म बेवफा में काम किया, लेकिन उनका करियर आगे नहीं बढ़ पाया। 

डेंगू से पीड़ित सुचित्रा कृष्णामूर्ति अस्पताल में भर्ती

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हाल ही में सोशल मीडिया पर मस्जिदों से अजान की आवाज को लेकर अपनी पोस्ट से विवादों में आई अभिनेत्री-गायिका सुचित्रा कृष्णामूर्ति को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार, उनको नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वे डेंगू से पीड़ित बताई जा रही हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि उनको रविवार तक अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी, सुचित्रा के करीबी सूत्रों के मुताबिक, तबीयत खराब होने की वजह से उनकी बेटी कावेरी का नया म्यूजिक एलबम लॉन्च करने के समारोह को भी टाल दिया गया है। सोशल मीडिया पर अजान को लेकर पोस्ट के विवादों में आने के बाद सुचित्रा ने लगातार मिल रही धमकियों और गाली भरे संदेशों को लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी, जिसे देखते हुए पुलिस ने उनकी और उनके अंधेरी स्थित आवास की सुरक्षा बढ़ा दी थी।

सोशल मीडिया पर सुचित्रा और उनकी बेटी को लेकर लगातार धमकियां दी जा रही थीं। सुचित्रा से पहले गायक सोनू निगम भी इसी तरह से अजान में इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर किए गए पोस्ट के बाद विवादों में घिर गए थे।

25 अगस्त को रिलीज होगी ओमपुरी की फिल्म मि. कबाड़ी

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दिवंगत अभिनेता ओमपुरी के अभिनय वाली फिल्म मि. कबाड़ी 25 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। खास बात ये है कि इस फिल्म का निर्देशन उनकी पहली पत्नी सीमा कपूर ने किया है और सीमा कपूर के भाई अनु कपूर ने फिल्म में कबाड़ी वाले की भूमिका को निभाया है।

निधन से पहले ओमपुरी इस फिल्म की शूटिंग तो पूरी कर चुके थे, लेकिन उनकी डबिंग का काम बाकी था। फिल्म में उनकी डबिंग का काम सतीश कौशिक ने पूरा किया, जो ओमपुरी के करीबी दोस्तों में माने जाते हैं। ओमपुरी और अनु कपूर के अलावा इस फिल्म की अन्य प्रमुख भूमिकाओ में विनय पाठक, सारिका, ब्रिजेंद्र काला, राजवीर सिंह, कशिश वोरा और मीनल कपूर हैं। फिल्म समाज के व्यंग्य पर आधारित बताई जाती है।

गजल और भजन गायक अनूप जलोटा के साथ राकेश गुप्ता और दिनेश गुप्ता ने मिलकर इस फिल्म का निर्माण किया है। ओमपुरी को हाल ही में ईद के मौके पर रिलीज हुई सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाइट में देखा गया था। मि. कबाड़ी के अलावा बनारस पर बन रही ओमपुरी की एक और फिल्म के रिलीज होने का इंतजार किया जा रहा है, जिसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है। 

बारिश के बीच आसमान से बरसी आग ने मचाई तबाही

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काशीपुर के कुण्डेश्वरी थाना क्षेत्र में झोपड़ी पर आकाशीय बिजली गिरने से चार मवेशियों की मौत हो गई। जबकि एक गाय बुरी तरह झुलस गयी। सूचना पर मौके पर पहुंचकर पटवारी ने घटना की जानकारी ली। साथ ही पशुधन प्रसार अधिकारी ने झुलसी गाय का हाल जाना। उन्होंने बताया कि करीब 80 फीसद झुलसने से गाय की हालत गंभीर बनी है।

कुंडेश्वरी निवासी नितिन भंडारी पुत्र रघुनाथ भंडारी का भीमनगर रोड स्थित गंगापुर गुसाईं में भंडारी फार्म हाउस है। इसकी देखभाल के लिए करीब 30 वर्ष से ग्राम नौलिया, चंपावत निवासी बच्चे सिंह पुत्र भीम सिंह परिवार सहित रह रहे हैं। वह यहा रहकर मवेशी पालकर परिवार का खर्च चलाते हैं।

रात मौसम खराब होने से आसमान में बिजली कड़क रही थी। आकाशीय बिजली अचानक झोपड़ी पर गिर गई। इससे झोपड़ी में आग लग गई। साथ ही उसमें बंधे तीन गाय और एक बछड़े की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक गाय खूंटा तोड़कर भागने से बच तो गई, लेकिन फिर भी वह बुरी तरह झुलस गई। कुंडेश्वरी पशु अस्पताल से पशु चिकित्सक खड़क सिंह ने झुलसी गाय का इलाज किया।

आंचल दूध से हो जाईये सावधान

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आंचल दूध के आंचल से यदि आप अपने परिवार और बच्चो को दूध पिला रहे हो तो सावधान हो जाईये, क्योकि आंचल दूध कभी भी आपकी सेहत बिगाड सकता है और आपके और आपके परिवार के लिए भी नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। जी हां, आंचल दूध की शुद्धता और विश्वनीयता पर तब सवाल खडे हो गये जब काशीपुर के कुण्डा क्षेत्र के एक युवक द्वारा ताजा दूध तो खरीदा गया मगर घर ले जाते ही सारा दूध फट गया और उससे दुर्गंध आने लगी जिसकी शिकायत दुकानदार से की तो पता चला कि दूध के पैकेट पर मेनीफ्क्चरिंग डेट तक नहीं है।

आंचल के दूध में दुर्गध की शिकायत पर ऊधमसिंह नगर, दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, खटीमा के अफसरों में हड़कंप मच गया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर जांच के लिए चार नमूने भरे। अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी। राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषक लैब, रुद्रपुर में जांच के लिए नमूने भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

अनोखी मुहिम: कूड़ा फेंकने पर मिलेगा स्मार्ट फोन

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एक किलो कूड़ा आपको फ्री में मोबाइल दिला सकता है लेकिन इसके लिए आपको अपने घर का कूड़ा कूड़ेदान में ही डालना होगा। अगर आप अपने घर से एक किलो सूखा कूड़ा लेकर अपने वार्ड के डस्टबिन में जाएंगे तो आप एक स्मार्ट फोन जीत सकते हैं। नगर पालिका के कर्मचारी सभी नौ वार्डों में आपके द्वारा लाए गए कूड़े को तोलकर आपको कूपन देंगे और एक सप्ताह बाद इन कूपनों के लक्की ड्रा के माध्यम से विजेता घोषित किया जाएगा। जनता में कूड़ा निस्तारण और सफाई के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए जिलाधिकारी आशीष कुमार श्रीवास्तव के आदेश पर स्वजल परियोजना के तहत यह योजना बनाई गई है।

डीएम डॉ आशीष कुमार ने इस संबंध में बैठक लेकर परियोजना प्रबंधक स्वजल व स्थानीय निकाय सहायक अधिकारियों को इस योजना को अमल में लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिका‌रियों को निर्देश दिये कि लोगों को घरों से कूड़ेदान तक कूड़ा लाने के लिए मोबाइल लक्की ड्रा प्रतियोगिता करायें। प्रतियोगिता में एक किलो सूखा कूड़ा लाने पर एक मोबाइल कूपन दिया जायेगा। उन्होंने शीघ्र ही तिलोथ, जोशियाड़ा, लदाड़ी आदि क्षेत्रों के कूड़ा निस्तारण के लिए मशीन लगायी जायेगी जिसमें 48 घंटे के भीतर गीला कूड़ा खाद में बदल दिया जाएगा। उन्होंने कहा सीडीओ एवं परियोजना प्रबंधक स्वजल को निर्देश दिए कि चिन्हित भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर कूड़ा निस्तारण की कार्रवाई में तेजी लाएं। साथ ही, कहा कि इन ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ बैठक कर यूजर चार्ज भी निर्धारित करें। जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत गंगोत्री को भी क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण के लिए वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई शीघ्र पूर्ण करने के आदेश दिए। उन्होंने परियोजना प्रबंधक स्वजल, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को निर्देश दिए कि गंगोत्री, उत्तरकाशी, चिन्यालीसौड़ आदि महत्वपूर्ण स्थानों पर लोगों को आ‌‌कर्षित करने वाले बोर्ड लगाएं, जिसमें स्थान विशेष की जानकारी के साथ-साथ कूड़ा निस्तारण की जानकारी तथा संयोजक विभाग का नाम दर्ज करें। बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी विनीत कुमार, अपर जिलाधिकारी पीएल शाह, परियोजना प्रबंधक स्वजल राकेश जखमोला, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका सुशील कुमार आदि उपस्थित रहे। 

पत्नी समेत दो पर हत्या का आरोप, मुकदमा दर्ज

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शहर कोतवाली पुलिस ने युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पत्नी समेत दो लोगों के विरुद्ध हत्या के आरोप में न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार, मायापुर देवपुरा निवासी नितिन ठाकुर ने मायापुर निवासी मनीषा उर्फ डॉली से प्रेम विवाह किया था। परिवार के विरोध के बाद दोनों अलग रह रहे थे। 13 जुलाई को युगल शहर कोतवाली क्षेत्रांतर्गत शिवमूर्ति चौक में एक गेस्ट हाउस में ठहरा था। मध्यरात्रि को नितिन के हाथ की नस कटने की जानकारी मनीषा ने गेस्ट हाउस कर्मियों को दी। उन्होंने नितिन को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। रात करीब तीन बजे अस्पताल में नितिन की मौत हो गई थी।

इस घटना के बाद नितिन के परिजनों ने मनीषा पर हत्या का आरोप लगाया था। मनीषा आठ माह की गर्भवती थी। पुलिस ने जांच करने की बात कही, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।इस पर परिजनों ने न्यायालय की शरण ली थी। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए शहर कोतवाली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।

कोतवाली निरीक्षक चंद्रभान सिंह ने बताया कि मनीषा व उसके साथी संजय निवासी मायापुर के खिलाफ हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। नितिन के पिता राजेश शर्मा ने आरोप लगाया कि मनीषा ने नितिन को प्रेमजाल में फंसाया था। मनीषा नितिन को ब्लैकमेल कर रही थी, उसने ढाई लाख की मांग की थी।