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योगी से मिले अक्षय, टैक्स फ्री हुई टायलेट एक प्रेमकथा

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अगले सप्ताह 11 अगस्त को रिलीज होने जा रही अपनी नई ‘फिल्म टायलेट एक प्रेम कथा’ के प्रमोशन के लिए अक्षय कुमार और फिल्म की टीम शुक्रवार को लखनऊ पंहुची, जहां अक्षय कुमार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मुलाकात की और इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री की ओर से ‘टायलेट एक प्रेमकथा’ को राज्य में मनोरंजन कर से मुक्त करने की घोषणा कर दी गई।

उ.प्र. देश का पहला राज्य बन गया है, जहां इस फिल्म को मनोरंजन कर से मुक्त करने की घोषणा की गई है। अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म को मनोरंजन कर से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री योगी के प्रति आभार व्यक्त किया।

लखनऊ यात्रा के दौरान अक्षय कुमार ने मुख्यमंत्री के साथ राज्य में सफाई अभियान में हिस्सा लेते हुए झाड़ लगाई और एक समारोह में लोगों को सफाई रखने के लिए शपथ दिलाई। ये फिल्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को समर्पित बताई गई है। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में अक्षय कुमार और भूमि पेड़णेकर के साथ सुधीर पांडे और अनुपम खेर हैं। 

दिलीप कुमार की स्थिति में सुधार, अब भी आईसीयू में

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दिलीप कुमार की तबियत को लेकर उथलपुथल भरी खबरें जारी रहीं, गुरुवार रात तबियत बिगड़ जाने के बाद डॉक्टरों की टीम भी उनके सेहत को लेकर चिंतित थी। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके लीवर की सूजन कम होने का नाम नहीं ले रही थी। साथ में रक्तचाप बढ़ जाने से मामला और गंभीर होता जा रहा था, लेकिन सुबह स्थिति में सुधार होना शुरू हुआ और दोपहर बाद खबर आई कि दिलीप कुमार की स्थिति में सुधार को देखते हुए उनको वेंटिलेटर से अलग कर दिया गया है।

डॉक्टरों की ओर से ये भी कहा गया कि और सुधार ज्यादा तेजी से हुआ, तो शाम तक आईसीयू से बाहर शिफ्ट किया जा सकता है लेकिन आईसीयू से स्पेशल रूम में शिफ्ट करने के फैसले को शुक्रवार रात के लिए टाल दिया गया। कहा गया कि तबियत में सुधार है लेकिन अब भी निगरानी की जरूरत है। आईसीयू से बाहर आने का फैसला अब शनिवार दोपहर तक होने की उम्मीद है। इस बीच दिलीप कुमार के फैमिली डॉक्टर कहे जाने वाले डॉ जलील पारकर शुक्रवार कोे लीलावती अस्पताल में उनसे मिले लेकिन उन्होंने दिलीप कुमार की सेहत को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा। इस कारण अस्पताल ने दिलीप कुमार की तबियत को लेकर अधिकारिक रूप से मेडिकल बुलेटिन जारी करने से मना कर दिया और संकेत दिए कि परिवार के अनुरोध पर ऐसा किया जा रहा है।

एक दूसरी खबर के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की ओर से डॉक्टरों से फोन पर दिलीप कुमार की सेहत को लेकर पूछताछ की गई। ऐसी ही एक खबर के अनुसार, अमिताभ बच्चन ने दिलीप कुमार की बेगम सायरा बानो से फोन पर सेहत को लेकर जानकारी ली। सायरा बानो की ओर से आज अधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया लेकिन उनके मैनेजर के हवाले से कहा गया कि सबकी दुआएं रंग ला रही है और उम्मीद करते हैं कि वे जल्दी ही अच्छे होकर घर आ जाएंगे।

काठगोदाम पुलिस ने पकड़ी एक करोड़ की हीरोईन

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हल्द्वानी क्षेत्र में नशे का कारोबार कम होने का नाम नहीं ले रहा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूरी ने बाकायदा नशे के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इसी के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। पुलिस ने चेकिंग के दौरान करीब एक करोड़ की हेरोइन बरामद की।
शनिवार को नशे के खिलाफ जारी अभियान के तहत काठगोदाम पुलिस को बड़ी सफलता मिली। पुलिस ने वाहनों की चेकिंग के दौरान 786 ग्राम हीरोइन के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए युवकों में सवेंद्र कुमार पुत्र सुंदर लाल निवासी बरसिया, बीसलपुर पीलीभीत व धर्मेन्द्र कुमार पुत्र शिवपाल निवासी मजरा क्योलड़िया बरेली उत्तर प्रदेश शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में पकड़ी गई हेरोइन की कीमत लगभग एक करोड़ रुपये है।
एसएसपी खंडूरी ने पुलिस को इस सफलता पर बधाई दी। उन्होंने का कि नशे के सौदागरों के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से सटे क्षेत्रों में विशेष रूप से चेकिंग अभियान तेज किया जाएगा।

शनिवार शाम से मौसम में बदलाव, हल्की बारिश की संभावना

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राजधानी देहरादून सहित प्रदेश में पिछलों दो दिनों से लगातार रात दिन हो रही बारिश से शनिवार शाम तक राहत मिलने की मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है।

राजधानी देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, चमोली, नैनीताल,पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह सुबह हल्की बारिश दोपहर तक होती रही। हालांकि दिन चढ़ने के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
दून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि शनिवार से अगले चार दिन तक प्रदेश में कही बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश की संभावना है। खासतौर पर मैदानी जिलों में शनिवार भी भारी बारिश होने के आसार है। इससे भूस्खलन होने के साथ यातायात प्रभावित हो सकता है। आठ अगस्त तक मौसम काफी बेहतर रहेगा और हल्की बारिश रहेगी।
शुक्रवार को राज्य में सर्वाधिक 22 मिलीमीटर बारिश मुकतेश्वर में दर्ज की गई। टिहरी में 4.5 और पंतनगर में 0.6 एमएम बारिश हुई। शनिवार को देहरादून में न्यूनतम तापमान 23 डिग्री और अधिकतम तापमान 31 डिग्री तक रहने का अनुमान है। जबकि शुक्रवार को देहरादून का अधिकतम तापमान 27.5 डिग्री और न्यूनतम 24.4 डिग्री रहा।

गंगा में मिले मां-बेटी के शव

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कनखल थाना क्षेत्र में मातृसदन के समीप जगजीपुर में गंगा से एक युवती व महिला की लाश मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को गंगा से बाहर निकाला। पुलिस ने शवों को निकालने के बाद पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भिजवाया। शवों की पहचान नहीं हो पाई है।

मृतकों की उम्र करीब 15 व 40 वर्ष है। प्रथम दृष्टया शवों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो दोनों ने आत्महत्या की है। दोनों शव एक-दूसरे से चुन्नी में बंधे हुए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार की प्रातः कनखल थाना क्षेत्र के मातृ सदन के समीप जगजीतपुर में गंगा किनारे दो शव झाड़ियों में पड़े होने की पुलिस को सूचना मिली। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को बाहर निकाला। कनखल थानाध्यक्ष अनुज सिंह के अनुसार युवती व महिला की उम्र करीब 15 व 40 वर्ष है। बताया कि आत्महत्या के उद्देश्य से दोनों ने स्वंय को चुन्नी से बांधकर गंगा में छांलाग लगा आत्महत्या की होगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बारिश से थमे बसों के पहिये

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जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में आई आपदा से जहां जन मानुस का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। वहीं उत्तराखंड परिवहन निगम कोटद्वार डिपो की बसों के पहिये भी थम गए।

बताते चलें कि पिछले 12 घण्टे से हो रही बरिश की वजह से परिवहन निगम के वर्कशॉप एवं कार्यलय में भी मलबा आ गया। डिपो के वर्कशॉप में मलबा आने से अधिकांश बसों का रुटीन चेक भी नहीं हो पाया। पहाड़ जाने वाली सभी बसों का संचालन बन्द ही रहा जिससे परिवहन निगम को लाखों रुपए की हानि हुई है।

सहायक महाप्रबंधक उत्तराखंड परिवहन निगम कोटद्वार डिपो वीके सैनी ने बताया कि डिपो के यात्री सेड एवं वर्कशॉप में मलबा आ गया है और दैवीय आपदा से कम्प्यूटर भी खराब हो गए है और पौड़ी, त्रिपलिसेंण, पौखडा सहित पहाड़ के कई मार्गो पर बसों का संचालन नहीं हो पाया है।

तीर्थनगरी में चाइनीज राखियों का हो रहा विरोध

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रक्षाबंधन पर्व की तैयारियों को लेकर हरिद्वार एवं ज्वालापुर के विभिन्न बाजारों में तरह-तरह की फैन्सी राखियां सजने का क्रम जारी है। बड़ी संख्या में दुकानों पर राखी की जमकर खरीदारी भी हो रही है। चाइनीज राखियों की बिक्री बाजारों में कम ही हो रही है। स्थानीय लोग परम्परागत राखियों को खरीदना अधिक पसन्द करते हैं। बच्चों की पसन्दीदा डोरीमोन, छोटा भीम, मोटू पतलू, स्पाइडमैन, जैसी राखियां दुकानों पर सजी हुई हैं। जबकि चाइनीज राखियों की बिक्री बाजारों में कम हो रही है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि चीन लगातार भारत विरोधी गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाता चला आ रहा है। ऐसे में हमें भी चाइनीज उत्पाद का विरोध करना चाहिए। चाइनीज राखियों को कतई भी नहीं खरीदना चाहिए। व्यापारी विपिन गुप्ता का कहना है कि बाजारों में भारतीय परम्पराओं की राखियों का विशेष महत्व होता है। भगवान की प्रतिमाओं वाली राखियां काफी प्रचलित हैं। चंदनवाली राखियों की भी बिक्री रक्षाबंधन पर्व के दौरान होती है। विपिन गुप्ता ने कहा कि बाजार में अधिकांश भारत में निर्मित राखियों की बिक्री ज्यादा है। चाइनीज राखियों की बिक्री इस बार बाजार में आंशिक रूप से ही हो रही है।

रक्षा बंधन पर्व के लिए बहनें अपने भाइयों की कलाई पर तरह-तरह की राखियां बांधती है। बहनें विशेष तैयारियों में जुटी हुई है। बाजारों में जगह-जगह राखियां सज चुकी है। बाजारों में खरीदारी भी प्रारंभ हो चुकी है। वह बहनें भी राखियां खरीद रही हैं, जिनके भाई काफी दूर दराज के क्षेत्रों में रहते हैं साथ ही अन्य राज्यों मेें निवास करते हैं। जिनको बहनें डाक, कोरियर के माध्यम से राखियों को भेजकर अपना स्नेह प्रेम बहनें दिखाती हैं। फेसबुक इंटरनेट, व्हाट्अप, टयूटर आदि के माध्यम से रक्षा बंधन पर्व की बधाइयों का क्रम जारी है। आस्था की नगरी हरिद्वार में बाजार सजे हुए हैं, जहां-तहां देखों दुकानों पर विभिन्न प्रकार की राखियां सजी हुई हैं। बड़ी संख्या बहने अपने भाइयों की कलाई पर बांधने के लिए राखियों की खरीदारी कर रही है।

कोटद्वार आपदा पीड़ित की मदद के लिए आगे आया हंस कल्चर सेंटर

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उत्तराखंड में पिछले दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते शुक्रवार को कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों देर रात बादल फटने से भारी तबाही हुई हैं। आधी रात को अचानक आई इस आफत के बाद क्षेत्र में भगदड़ मच गई। बादल फटने से अलग-अलग परिवार के छै लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों घरों में मलबा जमा हो गया है।

इस आपदा पर सरकार और तमाम समाजिक संगठनों ने अपनी संवेदना प्रकट की है। समाज सेवी माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज ने कोटद्वार आपदा पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हुए उन्हें हर संभव मदद देने की घोषणा की है। हंस कल्चर सेंटर दिल्ली के सचिव चंदन सिंह भंडारी ने बताया हैं कि, ‘लगातार मूसलाधार बारिश के बाद कोटद्वार में जो तबाही हुई है। उसके प्रति माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज ने अपनी संवेदना प्रकट की है और जरूरतमंद लोगों तक तत्काल जरूरी सामान पहुंचाने के निर्देश दिए। बादल फटने से जिन लोगो को और घरों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है उन लोगों और घरों को जल्द से जल्द मदद पहुंचे, इसके लिए माताजी-महाराज जी निरंतर नजर रखे हुए हैं और कोटद्वार में सभी प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में हैं।’

आपको बात दें कि माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज ने कोटद्वार में बादल फटने से अपना सब कुछ खो चुके परिवारों के लिए हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तत्काल प्रभाव से पीड़ितों के लिए राहत सामग्री पहुंचा दी हैं। जिसके लिए सरकार और पीड़ित परिवारों ने माता मंगलाजी एवं भोलेजी महाराज का आभार प्रकट किया है।

देर रात कोटद्वार में पनियाली गधेरे बादल फटने से ग्राम सभा मानपुर से सटी आर्मी की कैंटीन की दीवार टूट गई और उसमें मलबा घुस गया। इसके बाद रिफ्यूजी कॉलोनी में मलबा घुसा और चारों तरफ़ अफरा-तफरी मच गई। जिसके चलते कई लोग इसकी चपेट में आ गए और मलबे में दबने से छ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन अभी भी कोटद्वार में रेस्क्यू आपरेशन चला रहा है जबकि लोगों का कहना है कि मलबे में अभी भी कई लोग दबे हैं।

वाम दलों की राजनीति क्यों हुई खारिज

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left politics on a downfall

लेफ्ट पार्टियों के सिकुड़ने और खारिज होने का ताजा प्रमाण यह है कि अब इनका पश्चिम बंगाल से कोई भी सदस्य राज्य सभा में नहीं आयेगा। राज्यसभा के इतिहास में आजादी के बाद यह पहली बार हो रहा है। वैसे तो लेफ्ट पार्टियों का पतन भारतीय राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है। इन दलों को अब अपनी वजूद को कायम रखने के लिए जनता के बीच में अधिक काम करना होगा। जनता से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष करते रहना होगा। इन्हें देश के राजनीतिक पटल से पूरी तरह से खारिज होने से अपने को बचाना ही होगा।
जनभावनाओं की अनदेखी
आप वाम दलों के पतन का गहराई से अध्ययन करें तो महसूस करेंगे कि इन दलों का नेतृत्व पिछले पचास दशकों से जन भावनाओं से पूरी तरह से हटकर सोच रहा है। इसका एक उदाहरण ले लीजिए। यह बहुत पुरानी बात नहीं है जब केन्द्र सरकार ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया और वहां आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया। जवाब में ये वाम दल मांग करते रहे कि सरकार सर्जिकल स्ट्राइक के प्रमाण प्रस्तुत करे। वामदल अपने को गरीब-गुरबा के हितों का सबसे मुखर प्रवक्ता बताते हैं। जरा कोई बता दे कि इन्होंने हाल के वर्षों में कब महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी जैसे सवालों पर कोई आंदोलन छेड़ा हो। सारा देश राष्ट्रीय एकता और अखंडता के सवालों पर एक है। इस पर भी ये वामदल अपने तरीके से सोच रहे हैं। इनके येचुरी तथा करात सरीखे नेता सिर्फ कैंडिल मार्च निकाल सकते हैं या केरल में आर.एस.एस. के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या पर वामपंथी कार्कर्ताओं के बचाव में खड़े हो सकते हैं। इसीलिए अब इन्हें जनता खारिज करती जा रही है। देश ने 1962 में चीन से जंग के वक्त इनका पहली बार असली चेहरा देखा । तब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(भाकपा) ने राजधानी के बारा टूटी इलाके में चीन के समर्थन में एक सभा तक आयोजित करने की हिमाकत की थी। हालांकि वहां पर मौजूद लोगों ने तब आयोजकों को अच्छी तरह पीट दिया था। इसके अलावा वामदलों के अधिकतर राज्यों में सिकुड़ने का एक अहम कारण यह भी है कि इनके गैर जिम्मेदाराना हरकतों से छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां बंद होती रही हैं। इसके चलते वामपंथी ट्रेड यूनियन आंदोलन कमजोर हो गया और वाम नेता दूसरे किसी मुद्दे पर कोई विशेष छाप नहीं छोड़ सके। संगठन के स्तर पर भी इन्होने कोई जमीनी काम नहीं किया, सिवाय इसके कि फर्जी एन.जी.ओ. बनाकर सरकारी योजनाओं का पैसा कांग्रेस के सहयोग से भरपूर लूटा और हर तरह की मौजमस्ती में अपना समय और लूट के धन का अपव्यय किया।
घटा स्पेस
कुछ महीने पहले हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि लेफ्ट पार्टियों के लिए देश की राजनीति में अब कोई स्थान नहीं रह गया है। अप्रासंगिक होती जा रही वामपंथी पार्टियों की नीतियों और कार्यक्रमों को जनता स्वीकार करना तो छोड़िए, सिरे से ही ख़ारिज करती जा रही है। इसीलिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) लोक सभा से लेकर राज्य विधानसभा चुनावों तक में धराशायी होती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश चुनाव में पहली बार भाकपा, माकपा और भाकपा( माले) ने विधानसभा चुनावों के लिए साझा प्रत्याशी उतारे। उन्होंने सौ सीटों पर कम से कम 10 से 15 हजार वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा।
वामदलों से सीताराम येचुरी, डी.राजा, वृंदा करात, दीपांकर भट्टाचार्य जैसे नेताओं ने जमकर प्रचार किया। फिर भी कोई फायदा नहीं हुआ। आंकड़े गवाह हैं कि करोड़ों की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में वामदल कुल मिलाकर एक लाख 38 हजार 763 वोट ही हासिल कर सके। यह कुल मतों का दशमलव दो प्रतिशत होता है। वहीं नोटा के लिए प्रदेश की जनता ने सात लाख 57 हजार 643 वोट दिए, यह करीब दशमलव नौ फीसदी बैठता है।
कभी वाम मोर्चा का गढ़ रहे पश्चिम बंगाल में भी उसकी दुकान बंद होती जा रही है। वहां 2011 के विधानसभा चुनाव में उसे 41.0 फीसद मत मिले। यह आंकड़ा 2014 के लोकसभा चुनाव में 29.6 फीसद रह गया। अब आया 2016 का विधानसभा चुनाव। अब लेफ्ट पार्टियों को मिले 26.1 फीसद। यानी गिरावट का यह सिलसिला लगातार जारी है। गौर करें कि पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे लेफ्ट पार्टियां सिकुड़ रही हैं, भारतीय जनता पार्टी का असर वहां पर उसी रफ्तार में बढ़ता जा रहा है।
नौजवानों की ना
अब ये पार्टियां पश्चिम बंगाल, केरल तथा त्रिपुरा में ही सिकुड़ कर रह गई हैं। इनसे अब नौजवान नहीं जुड़ पा रहे हैं। माकपा के कुल सदस्यों में मात्र 6.5 फीसद ही 25 साल से कम उम्र के हैं। माकपा का नेतृत्व तो बुजुर्गों से भरा है। नेतृत्व में नौजवान नाममात्र के ही हैं। माकपा की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि उसकी विशाखापट्नम में 2015 में हुई कांग्रेस में 727 नुमांइदों ने भाग लिया। उनमें सिर्फ दो ही 35 साल से कम उम्र के थे। यानी माकपा से नौजवानों का मोहभंग होता जा रहा है। अब माकपा और पश्चिम बंगाल की बात कर लीजिए। बंगाल पर माकपा ने 1977 से लेकर 2011 तक राज किया। ज्योति बसु लंबे समय तक माकपा के नेतृत्व वाली वाम सरकार के मुख्यमंत्री थे। अब उसी बंगाल में भी माकपा लोकसभा और राज्य सभा के चुनाव बार-बार हार रही है।
फिर वापस चलते हैं उत्तर प्रदेश चुनाव पर। तब ये पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक चंद वोटों को ही जुटाने में तरस गए। अयोध्या की बात करें तो यहां भाकपा के सूर्यकांत पांडेय काफी कोशिश के बाद भी महज 1353 लोगों का ही वोट हासिल कर सके। दंगे की आग से झुलसे मुजफ्फरनगर में माकपा के मुर्तजा सलमानी को कुल मिलाकर 491 वोट ही मिले। आजमगढ़ में भी यही हाल रहा। यहां माकपा के राम बृक्ष की 1040 वोट के साथ जमानत जब्त हुई, जबकि गाजियाबाद के साहिबाबाद में इसी पार्टी के जगदंबा प्रसाद 1087 वोट के साथ जमानत नहीं बचा सके। इन सभी जगहों पर वाम दलों का बीते समय में तगड़ा असर रहा है। यानी उत्तर प्रदेश से लेफ्ट पार्टियां का सूपड़ा साफ हो चुका है। 2007, 2012 के बाद अब 2017 में वह एक सीट जीतने को तरस गए।
हो सकता है कि आज की पीढ़ी को मालूम न हो, पर एक दौर में उत्तर प्रदेश में वाम दलों का असर था। 1957 से 2002 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में वाम दल के उम्मीदवार जीत हासिल करते रहे। इनमें 1969 की भाकपा की 80 और माकपा की एक सीट पर जीत अब तक की वाम दलों की उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी जीत मानी जाती है।
केरल में वाम दलों का एक अलग चेहरा भी देश देख रहा है। वहां पर इनकी सरकारों के संरक्षण में गुंड़े बीते दशकों से भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार रहे हैं। अभी तक सैकड़ों कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद वहां की बेशर्म सरकारें खूनियों को बचाती रही हैं। सारा देश देख रहा है केरल में खेले जा रहे इस खूनी खेल को। निस्संदेह इन तमाम कारणों के चलते ही देश का मतदाता वाम दलों की चुनावों में भरपूर दुर्दशा कर रहा है।

वेब सीरीज से शमिता शेट्टी भी जुड़ीं

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शिल्पा शेट्टी की छोटी बहन शमिता शेट्टी भी अब वेब सीरीज से जुड़ने जा रही हैं। उनकी मुख्य भूमिका वाली वेब सीरीज की शुरुआत अगस्त के दूसरे सप्ताह में होने जा रही है। हरियाणा और अंग्रेजी भाषा की इस कामेडी-थ्रिलर सीरीज को वायकाम 18 कंपनी रिलीज करने जा रही है।

इस वेब सीरीज में शमिता शेट्टी के अलावा फिल्म दंगल में आमिर खान के भतीजे का रोल करने वाले आयुष्मान खुराना के भाई अपरक्षित खुराना के साथ साथ गौरव पांडे और रिद्धिमा पंडित हैं। गौरव पांडे को वरुण धवन और आलिया भट्ट की जोड़ी वाली फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनियां में काफी पसंद किया गया।

रिद्धिमा पंडित ने हाल ही में उनके डेली के टीवी शो हमारी बहू रजनीकांत में पसंद किया गया। खुद शमिता शेट्टी सन 2009 में बिग बास के तीसरे सीजन में हिस्सा ले चुकी हैं और इसके बाद दो साल पहले 2015 में वे डांस शो झलक दिखला जा के आठवें सीजन में नजर आई थीं।

फिल्मों में शमिता की शुरुआत यशराज में बनी आदित्य चोपड़ा निर्देशित फिल्म मोहब्बतें से हुई। इसके बाद उन्होंने अजय देवगन के साथ अनुभव सिन्हा की कैश, अपनी बहन शिल्पा शेट्टी के साथ क्राइम थ्रिलर फरेब और इमरान हाश्मी के साथ जहर फिल्मों के अलावा बोनी कपूर की फिल्म बेवफा में काम किया, लेकिन उनका करियर आगे नहीं बढ़ पाया।