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संदिग्ध परिस्थितियों में बुजुर्ग की मौत

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पारिवारिक क्लेश के बाद एक बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है। मृतक के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं है। पुलिस मौत के रहस्य से परदा उठाने का प्रयास कर रही है। घटना कनखल थाना क्षेत्र की है।

जगजीतपुर के गांव जमालपुर कलां, निवासी यासीन, पत्नी समीरा व बेटे मियाज, मुराद और बेटी के साथ रहता है। रात्रि करीब नौ बजे खेल-खेल में ही भाई-बहन का झगड़ा शुरू हो गया। यासीन की पत्नी ने बेटी को शोर मचाने पर डांट दिया। जिसके बाद दोनों भाइयों और बेटी के बीच विवाद बढ़ गया। बीच-बचाव करने आये यासीन ने सभी को समझाने का प्रयास किया। इसी बीच झगड़े में यासीन नीचे गिर गया।

यासीन के गिरते ही परिवार में एक दम सन्नाटा पसर गया। बेहोशी की हालत में यासीन को नजदीक के अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सकों ने यासीन को मृत घोषित कर दिया। इसी दौरान किसी ने पुलिस को हत्या की सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। कार्यवाहक एसओ महावीर रावत ने बताया कि मौत की जांच के लिये शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

पलायन को अपने अंदाज में चुनौती देती ये पहाड़ की बेटी

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उत्तराखंड का नाम जहन में आते ही पहाड़ों के खाली होते गांवों की तस्वीरें हर उत्तराखंडी के सामने आ जाती हैं। सरकारी फाइलों में, गोष्ठियों में पलायन को रोकने की तमाम बातें कैद हैं लेकिन सच ये है कि पहाड़ों पर युवा बेहतर जिंदगी और काम की तलाश में लगातार मैदानों की तरफ रुख कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच कभी कभी ऐसी तस्वीरें भी सामने आती हैं जो वीरान होते पहाड़ों पर फिर खुशहाली के लौटने की उम्मीद जगाती है। ऐसी ही एक तस्वीर है 25 साल की रंजना रावत।

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रुद्रप्रयाग जिले के धीरी गांव की रहने वाली रंजना ने अपनी मेहनत, लगन और जोश से पहाड़ों पर रचे बसे जीवन को एक नया रूप दिया है।रंजना रुद्रप्रयाग की रहने वाली हैं और यहीं से उसने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, इसके बाद रंजना ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से बी-फार्मा की डिग्र हासिल की। इस डिग्री ने रंजना को देहरादून में इंडस्ट्रीयल फार्मसिस्ट की नौकरी दिला दी, जहाँ लगन से रंजना ने तीन साल काम किया। अपने सफर के बारे में बात करते हुए रंजना कहती हैं कि, “नौकरी करके मुझे एहसास हुआ कि मैं सिर्फ अपनी जीवन शैली को बेहतर करने की तरफ काम कर रही थी, अपने अंदर मौजूद स्किल और टैलेंट का कोई खास इस्तेमाल नहीं हो रहा था”

इसी एहसास ने रंजना को दिल्ली में मशरूम की खेती से रूबरू कराया। इसके बाद रंजना को अपने हुनर को निखारने और अपने जन्मभूमि के लिये कुछ करना का रास्ता साफ दिखने लगा। पिछले जनवरी, रंजना ने देहरादून में अपनी नौकरी छोड़ी व अपने गांव वापस पहुंच कर पूरी शिद्दत से अपने लक्ष्य को हासिल करने में लग गई। 

आज रंजना की गिनती मशरूम की खेती करने वाली सफल उद्यमियों में होती है। लेकिन रंजना ने इस कला को अपने तक ही सीमित नहीं रखा, रंजना ने अपने यहां मशरूम केती को लेकर वर्कशाॅप आयोजित की, “इस काम में मेहनत और लागत दोनों ही कम है और मुनाफा अच्छा खासा है।” रंजना के इस कदम से आज उनके गांव के 50 परिवार आम, अमरूद, आढू की खेती कर रहे हैं। इसके साथ पाॅली हाउस लगा कर मौसमी फल, सब्ज़ी और मशरूम भी उगाते हैं। यहीं नही,  यहां के लोग राज्य के करीब 6 जिलों में लोगों को ट्रैनिंग भी देते हैं।   

रंजना अब अपने इलाके की युवा पीढ़ी के लिये प्रेरणा बन गई हैं। वो कहती हैं कि “पहले लोग खेती को टाइम-पास मानते थे। लेकिन मेरा फार्म माॅडल बन गया है, में पहले खुद उगाती हूं और फिर लोगों को सिखाती हूं जिससे वो भी अपनी आमदनी कर सके।” हांलाकि रंजना की राह न पहले आसान थी न अब है। वो बताती हैं कि, ‘सरकार के पास योजनाऐं तो बहुत हैं पर उनका सीधा और समय पर फायदा नहीं मिल पाता, इसके साथ-साथ तकनीकि मदद न के बराबर है।’

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फिलहाल रंजना ने अपने गांव को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने को अपना लक्ष्य बना रखा है। वो कहती हैं कि “मैं अपने गांववालों को साथ लेकर व्यापर करना चाहती हूं ताकि बीच के बिचौलियों को खत्म किया जा सके और किसान को उसकी उपज का सीधा और सहीं मोल मिल सके।”

रंजना न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देशभर के युवाओं के लिये प्रेरणा हैं। वो दिखाती हैं कि अगर मन में विशवास और दृढ़ संक्लप हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती।

उत्तराखंड मौसम विभाग का पूर्वानुमान,आने वाले दो दिन बारिश

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उत्तराखंड में आने वाले दिनों में भी बारिश से राहत मिलती नही दिख रही है। राजधानी देहरादून में सोमवार सुबह से बारिश शुरू हो गई थी। मौसम विभाग की माने तो राज्य के अधिकांश जिलों में आठ अगस्त से भारी बारिश हो सकती है। देहरादून में सुबह से आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे। लगभग 6 बजे के करीब शहर में बारिश शुरू हो गई और आधे घंटे से तह जोरदार बारिश चलती रही, इसके बाद बारिश हल्की हो गई।

आने वाले 5 दिनों में प्रदेश में बारिश का असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 9 अगस्त से 10 अगस्त को भारी बारिश कि संभावना है। प्रदेश के कई जिलें जिनमें मुख्यतः देहरादून ,हरिद्वार ,नैनीताल और अल्मोड़ा विशेष हैं।

मौसम विभाग ने 11 अगस्त से 12 अगस्त को भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक उत्तराखंड के मैदानी इलाको विशेषकर ,देहरादून ,नैनीताल ,पौड़ी ,भारी से भारी बारिश हो सकती है।

भालू ने तीन महिलाओं को किया घायल

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चमोली जिले के नारायणबगड ब्लाॅक के पलेठी गांव की तीन महिलाओं को भालू ने तब घायल कर दिया जब वे जंगल में घास काट रही थी। घालय महिलाओं को सीएचसी, नारायणबगड में भर्ती किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नारायणबगड विकास खंड के पलेठी गांव की रहने वाली मुन्नी देवी, लक्ष्मी देवी व अलका देवी गांव के पास के ही कौब के जंगल में अपने मवेशियों को चारापत्ति लेनी गई थी कि अचानक महिलाओं पर भालू ने हमला कर दिया जिससे इनके सिर और पैर पर चोटें आईं।

साथ ही अन्य महिलाओं द्वारा हो हल्ला मचाने के बाद भालू भाग खड़ा हुआ। महिलाओं को ग्रामीणों द्वारा उपचार के लिए सीएचसी नारायणबगड लाया गया है। चिकित्सकों के अनुसार महिलाओं की स्थिति ठीक है। 

अधिकारियों पर भड़के डीएम, दी हिदायत

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जिलाधिकारी डाॅ नीरज खैरवाल ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को विभागीय परिसंपत्तियों की अपडेट स्थिति की जानकारी नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। मंगलवार को जिलाधिकारी ने शासन के पत्र का हवाला देते हुए, इस सम्बन्ध में सभी अधिकारियों को पुनः सख्त निर्देश दिये है कि वे अपने-अपने विभाग की निर्धारित वांछित बिन्दुओं पर विभागीय संपत्ति का विवरण तत्काल उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

डीएम ने सभी अधिकारियों को हिदायत दी है कि वह जिला मुख्यालय स्थित संपत्तियों के सम्बन्ध में वांछित सूचना नोडल अधिकारी एडीएम राजस्व के माध्यम से तथा ब्लॉक व तहसील स्तर के अधिकारी अपनी संपत्तियों का विवरण सम्बन्धित उप जिलाधिकारियों के जरिये उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

उन्होंने अधिकारियों को सचेत किया है कि यदि समय पर परिसंपत्तियों की सूचना नहीं प्राप्त होती है तो इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। डीएम ने एडीएम प्रताप सिंह शाह को निर्देश दिये हैं कि वह अधिकारियों से संपत्तियों के बावत वांछित सूचना संकलित कर 17 अगस्त तक उपलब्ध कराये।

ग्रामीण क्षेत्रों को निगम में शामिल करने की सीएम से लगाई गुहार

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भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ऋषिकेश के नगर निगम में शामिल होने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में सीएम से मिलकर बात की।

भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रविन्द्र राणा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलकर एक ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल होने के लिए पत्र सौंपा। पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग नगर निगम में शामिल होने के लिए तैयार हैं। ग्राम सभा ऋषिकेश के अलावा आईपीएल, कृष्णा नगर कॉलोनी,वीरपुर खुद, विस्थापित क्षेत्र गुमानीवाला जो कि राजमार्ग से लगा हुआ है। जिसे निगम की परिधि में लाये जाने के लिए जनता के द्वारा काफी समय से मांग की जाती रही है।
इस सम्बंध में जनता के हस्ताक्षर युक्त कई बार पत्र भी शासन-प्रशासन को दिये जा चुके है। पत्र में कहा गया है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल किया जाएगा तो उनका विकास होगा।

खस्ताहाल भवनों में चल रहा खुफिया विभाग

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खुफिया विभाग जिन्हें सरकार की आंख-कान समझा जाता है लेकिन ऋषिकेश खुफिया विभाग आज भी खंडहर भवन में चलने को मजबूर है।
ऋषिकेश में कार्यरत खुफिया विभाग के कर्मचारियों द्वारा टिहरी पौड़ी देहरादून व हरिद्वार जिले से जुड़े अधिकांश नगर की प्रमुख जानकारियां सरकार को दी जाती है। जिस खंडहर में खुफिया विभाग के कर्मचारी सरकार की आंख कान बनकर कार्य कर रहे हैं। इस खंडहर भवन में दो कार्यालय लोकल एलआईयू तथा विशेष शाखा अभिसूचना विभाग के कर्मचारी यहां काम करते है। हाल यह है कि कार्यालय भवन की छत भीग कर खराब हो रही है और इस कारण में रखा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना कर्मचारियों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। ऐसे में कर्मचारियों को काम करना संकट से कम नहीं है।

पांच पालिकाओं के लिए एसटीपी योजना स्वीकृत

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चमोली जिले की पांच पालिकाओं, जिसमें बदरीनाथ, जोशीमठ, गोपेश्वर, नंदप्रयाग व कर्णप्रयाग शामिल है के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान स्वीकृत किया गया है।

वरिष्ठ पर्यावरण विशेषज्ञ विक्रांन्त त्यागी ने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत बदरीनाथ, जोशीमठ, गोपेश्वर, नंदप्रयाग तथा कर्णप्रयाग में आई एंड डी विद् एसटीपी योजना स्वीकृत की गई है। जिसकी कुल लागत 14705.09 लाख है। इस योजना के अंतर्गत सीवर लाइन, नाला टेपिंग, घाटों का आधुनीकरण आदि कार्य किये जाना प्रस्तावित है।
बताया गया कि जिला स्तर पर गठित गंगा संरक्षण समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष तथा नगर पालिका परिषद गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, ईई लोनिवि, सिंचाई, जल निगम, जल संस्थान, सीएमओ, डीएफओ, परियोजना प्रबंधक स्वजल, व्यापार संघ गोपेश्वर के चैयरमैन अंकोला पुरोहित, जय मां नन्दा समिति से चन्द्रकला तिवारी तथा यूको क्लब जोशीमठ के सतीश चौहान सदस्य के रूप में नामित है। जिला गंगा संरक्षण समिति की हर तीन माह में जिला स्तर पर बैठक कर समय-समय पर माॅनिटरिंग की जायेगी।

बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ स्लाइड जोन बना नासूर

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चारधाम यात्रा के लिए बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ स्लाइड जोन नासूर साबित हो रहा है। हल्की बारिश भी चारधाम यात्रा पर ब्रेक लगा रही है। बीते रविवार को अपराह्न बाद बंद हुआ लामबगड़ मंगलवार तक भी नहीं खुल पाया, जिस कारण यात्रा अवरुद्ध हो गई। केवल पैदल यात्री ही बदरीनाथ धाम पहुंच पा रहे है।
लामबगड़ में पहाड़ी से बार-बार आ रहे भारी बोल्डर व मलवे से हाईवे अवरुद्ध चल रहा है। यहां पर काम कर रही एनएच की मैकाफेरी कंपनी के अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि जब भी हम मार्ग को खोल रहे हैं, वैसे ही पहाड़ी पर से पत्थर गिरने शुरू हो जा रहे हैं। ऐसे में यात्रा वाहनों को जाने देना खतरे से खाली नहीं है। खतरे को देखते हुए यात्रा वाहनों को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पत्थरों का गिरना बंद हो जायेगा तभी यात्रा वाहनों को आने जाने दिया जायेगा, प्रयास है कि जल्द से जल्द मार्ग को खोला जाए।

जर्जर स्थिति में पहुंच गया है ऋषिकेश का सबसे पुराना प्राथमिक स्कूल

सूबे में नई त्रिवेंद्र सरकार आते ही शिक्षा मंत्री ने शिक्षा में सुधार के कई नियम कायदे तो बना दिए हैं लेकिन जर्जर हो चुके शिक्षा के इन मंदिरों में देश की आने वाले जनरेशन आज भी जान हथेली पर लेकर पढ़ रही है। उत्तराखंड में शिक्षा को लेकर तमाम दावे तो हमेशा किए जाते हैं लेकिन प्राथमिक शिक्षा की स्थिति खासकर सरकारी विद्यालयों में देखने लायक है, ड्रेस कोड और अंग्रेजी शिक्षा की ओर बढ़ते उत्तराखंड प्रदेश के प्राइमरी स्कूल आज बदहाली का शिकार है।

सूबे के शिक्षा मंत्री रोज नए फरमान तो जारी करते हैं लेकिन राजधानी से मात्र 39 किलोमीटर दूर तीर्थ नगरी ऋषिकेश का सबसे प्राचीन स्कूल बरसात के इन दिनों में अपनी हालत पर रो रहा है। 1925 में स्थापित और 1940 में निर्मित राजकीय प्राथमिक स्कूल नंबर 5, ऋषिकेश में शिक्षा का प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, आज भी स्कूल की बिल्डिंग मजबूती के साथ खड़ी हुई है लेकिन बरसात का मौसम आते ही रखरखाव के अभाव में प्राचीन इमारत हर जगह से टपकने लग जाती है।

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उत्तराखंड में बारिश अपने साथ कई तरह की मुसीबतें लेकर आती है लेकिन ऐसे में इस आफत की बारिश का सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूली बच्चों को उठाना पड़ता है। राज्य भर में प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति किसी से भी नहीं छुपी है, भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं और बारिश होते ही टपक टपक कर वह तालाब में तब्दील हो जाते हैं, ऐसे में स्कूली बच्चे पढ़े तो पढ़े कैसे?

यह हालात हैं ऋषिकेश के आजादी से पहले बने स्कूलों के, ऐसा ही एक स्कूल है प्राथमिक स्कूल नंबर 5 जहां पर बच्चे बारिश में बड़ी मुश्किल हालातों से गुजरते हैं लेकिन शिक्षा विभाग ईश्वर ध्यान ही नहीं देता, उत्तराखंड में शिक्षा मंत्रालय सबसे तामझाम वाला मंत्रालय है जिसमें सबसे ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी हैं।

हमेशा किसी ना किसी बात को लेकर शिक्षक संघ का सरकार से गतिरोध चलता रहता है लेकिन राज्य में प्राथमिक स्कूलों के भवनों की दुर्दशा पर ना ही कभी शिक्षक संघ आवाज उठाता है और ना ही शिक्षा मंत्रालय इनकी सुध लेता है आखिर ऐसे में सवाल उठता है इन हालातों में कैसे पढ़ेगा इंडिया और कैसे आगे बढ़ेगा इंडिया?