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बिना शिक्षक के कैसे हो पढ़ाई

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जनपद पौड़ी गढ़वाल के घण्डियाल क्षेत्र के विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति न होने से क्षेत्र के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। बिना शिक्षकों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। शनिवार को डांगी विद्यालय के शिक्षक अभिभावक संघ के अध्यक्ष और क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी जगमोहन डांगी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल अपर निदेशक शिक्षा महावीर सिंह बिष्ट से मिला और विद्यालय की समस्याओं काे लेकर उन्हें ज्ञापन दिया।

राउमा. विद्यालय डांगी में प्रधानाचार्य समेत शिक्षकों के पांच खाली पदों पर तैनाती की मांग की। उन्होंने बताया कि विद्यालय अंग्रेजी, व्यायाम व सामान्य तीन अध्यापकों के भरोसे संचालित हो रहा है। इससे छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसलिए शीघ्र ही विद्यालय में प्रधानाचार्य समेत अन्य शिक्षकों के खाली पदों पर नियुक्ति दी जाए। इसका संज्ञान लेते हुए अपर निदेशक ने गणित के एक अध्यापक को विद्यालय में नियुक्ति प्रदान की है।

अकीदत के साथ की नमाज अदा

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ईद उल अजहा के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिदों में अकीदत के साथ नमाज अदा की। नमाजियों ने मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर मुबारकवाद दी।

मुस्लिम समुदाय के तमाम लोगों ने बकरीद के मौके पर बकरों की कुर्बानियां दीं और अपने लोगों में तबर्रुख तकसीम किया। शहर के मस्जिदो में मुकर्रर वक्त पर वहां के इमामों ने नमाज अदा कराई। इस दौरान कई ईदगाहों पर लगे मेले में भारी बरिश होने के चलते दुकानदारों को मायूस होकर लौटना पड़ा।  वहीं नमाज के दौरान पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। शहर में साफ सफाई की भी विशेष व्यवस्था की गई थी।

मुस्लिमों के अलावा अन्य सम्प्रदाय के लोगों ने भी बकरीद की खुशियों में शामिल होकर भाईचारे की मिसाल कायम की। नमाज के बाद घरों में कुर्बानियों का सिलसिला शुरू हुुआ। इस मौके पर मस्जिदो मे लोगो ने एक दूसरो को गले मिलकर ईद की बधाई दीं। वही कुमाऊं डिवीजन के कमिश्नर चदं्रशेखर भट्ट व जिलाधिकारी दीपेन्द्र कुमार चौधरी ने जनपद के लोगों को ईद उल अजहा (बकरीद) की मुबारकबाद दी है।

इमरजेन्सी के आंदोलनकारियों की हो रही उपेक्षा

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इमरजेन्सी काल के आंदोलनकारियों के साथ भेदभाव किये जाने और दोहरे मापदण्ड से आंदोलनकारी आज आहत है, एक ओर इमरजेन्सी में मीसा के तहत जेल में बेद हुए आंदोलनकारियों को पेंशन सुविधा देने की घोषणा की गयी तो दुसरी ओर डीआईआर के तहत उसी दौरान जेल में बंद हुए आंदोलकारियों को पेंशन सुविधा से वंचित किया जा रहा है, सरकार की इस दोहरी नीति से जहां आंदोलनकारी नाखुश है वहीं अब सरकार भी मान रही है कि गलती हुई है और सुधार किया जाएगा।
25 जून 1975 को देश में इमरजेन्सी काल लगाया गया था और देश के कोने में कई आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों को इस दौरान जेल भेजा गया था। इसी दौरान उत्तराखण्ड से भी कई लोगों को अलग अलग जेलों में भेजा गया था,  किसी को नैनीताल जेल तो किसी को बरेली जेल भेजा गया, लेकिन किसी को मीसा के तहत जेल भेजा गया तो किसी को डीआईआर के तहत, सभी को एमरजेन्सी काल में भाजपा या संघ के होने के नाते या फिर सरकार के खिलाफ षडयंत्र रचने या आंदोलन करने के जुर्म में जेल भेजा गया था, जिन्होने जेल मे भी कई यातनाए सही।
लम्बे समय बात उनकी याद तो भाजपा सरकार को आयी और भेजापा शासित राज्यों में उन सभी को सम्मान के तौर पर पेंशन देने की घोषणा भी की गयी, जिसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तराखण्ड प्रमुख है, लेकिन अन्य राज्यों में मीसा और डीआईआर को एक समान रखा गया है। जबकि उत्तराखण्ड में जारी शासनादेश में सिर्फ मीसा का उल्लेख किया गया है, जिससे डीआईआर के तहत रहे आंदोलनकारी इस पेशन सुविधा से वंचित हो गये।
वहीं सरकार से चूक हुई है और उसे सुधारने के प्रयास किये जा रहे हैं ये बात भी सामने आ रही है, खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि मीसा और डीआईआर एक ही है मगर सरकार से जल्दबाजी में शासनादेश में सिर्फ मीसा का उल्लेख होने से डीआईआर के तहत जेल गये आंदोलनकारियों को निराश होने की जरुरत नहीं है, बल्कि जल्द ही शासनादेश में बदलाव कर दिया जाएगा और सभी को समान रुप से सम्मान दिया जाएगा।

इमरजेन्सी काल के दौरान जिन्होने सरकार की प्रताडना सही और जेल में यातनाए सही उनमें भेद डालकर सरकार ने अपने लिए ही खाई खोद ली है.. अब जहां प्रदेश भर में मीसा के आंदोलनकारी गिने चुने ही रह गये है एसे में डीआईआर के तहत रहे आंदोलनकारियों में इस बात से आक्रोश है कि उनके साथ सरकार द्वारा आखिर ये भेदभाव क्यो किया गया, वहीं सरकार की गलती का खामियाजा अब इन आंदोलनकारियों को बुगतना पड रहा है, देखना होगा कि आखिर कबतक सरकार नया शासनादेश जारी करती है और कब डीआईआर आंदोलनकारियों को समान अधिकार मिल पाता है।

नया फैशन आया बाजार में एसआईटी से जांच

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प्रदेश के सरकारी तंत्र का नया फैशन आ गया है, यहां अब हर मामले की जांच एसआईटी से कराने का फैशन शुरु हो गया है। भूमि घोटाले से शुरु हुआ ये फैशन, गेहू के घोटाले तक पहुंच गया है, प्रदेश में भ्रष्टचार से जुड़ा मामला हो या फिर खनन से या फिर किसी अन्य  मामले से हर मामले में एसआईटी गठित कर जांच कराये जाने का उत्तराखंड में मानो फैशन सा बन गया हो। अब टीडीसी के चर्चित बीज घोटाले की बात करे, तो इस पर पूर्व में मुख्य सचिव के अध्यक्षता में पहले जांच हो चुकी है।

इतना ही नहीं जांच के आधार पर कई अधिकारियों के खिलाफ  मुकदमा तक पंजीकृत हो चुका है। लेकिन एक बार फिर निष्पक्ष जांच के नाम पर टीडीसी से जुड़े घोटाले को एसआईटी के हवाले कर दिया गया है। यहां सवाल यह भी है कि हर जांच के लिए एसआईटी गठित किया जाना कहा तक तर्क संगत है। क्योंकि ऐसा करने से जहां कई जांच एजेन्सियों की साख पर सवालिया निशान लग रहे है। वही एसआईटी पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से करेंगी। इसकी क्या गारंटी है। क्योंकि जिस पुलिस के नेतृत्व में एसआईटी गठित की जा रही है। उससे पहले यह देखा जाना जरूरी होगा कि उसकी अपनी सामान्य छवि क्या है। क्योंकि जिस पुलिस के नेतृत्व में एसआईटी गठित की जा रही है। उसकी अपनी छवि किसी से छुपी नहीं है। पुलिस को जांच सौंपने का मतलब ठीक उसी तरह होगा, जिस प्रकार बिल्ली से दूध की रखवाली के लिए कहा जाए।

प्रदेश में एसआईटी संभवत सबसे पहले पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान जमीन से जुड़े प्रकरणों की जांच के लिए गठित हुई। तब एसआईटी का गठन संभवत इसलिए भी किया गया, क्योंकि इस तरह के मामलों में पुलिस खासकर कि थाना चौकियों की भूमिका संदिग्ध होती जा रही थी। ऐसे मामलों में पुलिस का दखल इस कदर बढ़ गया था।  उच्च स्तर से आदेश तक करने पड़े कि पुलिस सिविल मामलों अनावश्यक दखल न दे। लेकिन बाद में जमीन संबंधी शिकायती मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई। इसके बाद तो मानो प्रदेश में एसआईटी के गठन का सिलसिला ही शुरू हो गया। जमीन संबंधी मामलों के बाद अवैध खनन से जुड़े मामलों की जांच के लिए भी एसआईटी बनाई गयी। इसके साथ ही एसआईटी के गठन पर सवाल भी उठने शुरू हो गए। यह माना जाने लगा कि एसआईटी का गठन राजनीति से प्रेरित है। अब हाल यह है कि तमाम सवालों के साथ एसआईटी हर ‘मर्जÓ की दवा बन चुकी है। आज राज्य में स्थिति यह है कोई भी बड़ा मामला सामने आता है, तो पहले किसी बड़ी एजेंसी से जांच कराने की मांग की जाती है लेकिन बाद में वही जांच एसआईटी के हवाले कर दी जाती है। एनएच घोटाला इसका ज्वलंत उदाहरण है।

इस हाई प्रोफाइल घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की घोषणा खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने की थी। मगर आज हकीकत यह है कि इसकी जांच एसआईटी कर रही है। कल्पना कीजिए जिस एनएच घोटाले के तार कई बड़े सफेदपोशों और अफसरों तक से जुड़े हैं, उसमें अदनी सी एक एसआईटी असल गुनाहगारों तक पहुंच भी पाएगी। एक अन्य मामले में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षा महकमे में नौकरी पाने वाले शिक्षकों की जांच भी सरकार ने एसआईटी को ही सौंपी है। जबकि सच यह है कि यह जांच खुद विभाग ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकता था, या फिर किसी अन्य विशेषज्ञ एजेंसी सीआईडी आदि को ये जांच सौंपी जा सकती थी। चूंकि जांच बड़े पैमाने पर होनी है लिहाजा तय है कि पुलिस का दखल भी उतना ही ज्यादा बढ़ेगा। शिक्षा महकमा इस दखल को कितना स्वीकार कर पाता है, अंत: निष्कर्ष क्या रहता है। यह भी बड़ा सवाल है।

हाल ही में करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच भी अब एसआईटी से कराने की घोषणा की जा चुकी है। कहां तो यह कहा जा रहा था कि इस घोटाले की जांच सीबीआई से करवाई जा सकती है लेकिन अब सरकार साफ  मुकर रही है। अहम तथ्य यह है कि एसआईटी का गठन ऐसे वक्त में किया जा रहा है जब पुलिस के पास संसाधनों की भारी कमी है।

शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच वाले मामले में खुद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ने एसआईटी जांच से इंकार करते हुए कहा था कि पुलिस के पास जांच के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर एसआईटी को प्रकरण पर प्रकरण सौंपे जा रहे हैं। यह सीधे सीधे महकमों में पुलिस का अनावश्यक दखल बढ़ाने जैसा तो है। साथ ही यह ‘निष्पक्षता पर भी सवाल है।

अधिक बरसात से फसल चौपट

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राजाजी नेशनल पार्क रामगढ़ रेंज से निकलने वाले बरसाती पानी ने मारखम ग्रान्ट के बुल्लावाला गांव के खेतों में खड़ी हरी-भरी फसल पूरी तरह चौपट कर दी। किसानों की गन्ने, धान, बाजरा की फसल बर्बाद हो गई है। वहीं आपदा प्रबन्धन और तहसील प्रशासन से जुड़े कर्मचारी और अधिकारियों ने फसल के नुकसान का कोई आंकलन नहीं किया, जिससे क्षेत्र के किसानों में आपदा प्रबन्धन के प्रति आक्रोश बना हुआ है।

दो दिन से हो रही झमाझम बारिश के चलते राजाजी नेशनल पार्क रामगढ़ रेंज के जंगल से निकलने वाले बरसाती पानी ने मारखमग्रान्ट के बुल्लावाला गांव के खेतों में खड़ी हरी-भरी फसल को तबाह कर दिया। सुसवा नदी में आये पानी ने किसानों की खेतों की भूमि का कटाव भी कर दिया। जिससे किसान बहुत परेशान हैं। वहीं, किसान अजय शर्मा के खेत में खड़ी एक बीघा गन्ने की फसल को नुकसान हुआ। जसवंत काम्बोज के गन्ने के खेत में पानी ने तबाही मचाई।

वहीं, किसान मनोज काम्बोज ने कहा कि, “दो दिन लगातार हुई बारिश से राजाजी नैशनल पार्क रामगढ़ रेंज के जंगल से निकलने वाले बरसाती पानी ने बुल्लावाला गांव में किसानों के खेतों में खड़ी गन्ने, धान और बाजरा की फसल नष्ट कर कर दी।  सोशल मीडिया पर गांव में घुसे पानी की फोटो डालने पर नायब तहसीलदार भगवत मोहन नेगी शुक्रवार को क्षेत्र का दौरा करके आ गये।लेकिन किसानों के खेतों में खड़ी फसल के नुकसान का आंकलन करने कोई कर्मचारी और अधिकारी नही पहुंचा।”

वहीं, डोईवाला एसडीएम कुसुम चौहान ने कहा कि, “तहसील प्रशासन की आपदा प्रबन्धन टीम सभी क्षेत्रों का दौरा कर रही है। क्षेत्रो में पानी से हुए नुकसान की रिपोर्ट अभी मेरे पास नही आयी है। रिर्पोट आने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। पार्क से बुल्लावाला गांव में आने वाले बरसाती पानी की जांच पड़ताल करायी जाएगी। इसके बाद इस समस्या का भी समाधान निकाला जाएगा।”

जलभराव से लोग हुए बेहाल, सडकों पर बही नदी

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क्षेत्रों मेें पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया। भारी बारिश के चलते जहां हल्द्वानी नगर की अधिकांश सड़के नदी में तब्दील हो गयी। सड़कों पर बह रहे बारिश व सीवर के पानी के चलते लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बीते 24 घंटे से लगातार हो रही बारिश से जहां नगर की ज्यादातर सड़के पानी से लबालब भर गई, वही नगर निगम के साफ सफाई के दावों की पोल पट्टी भी बारिश ने खोल कर रखा दी। जगह जगह कूड़ा आने से चोक हुई नालियां व सीवर अत्यधिक बारिश से उनमें जमी गंदगी व कीचड़ पानी के साथ सड़कों पर बहने लगा। भारी बारिश से कालाढंूगी चौराहे से लेकर पीलीकोठी तक सड़क नदी मेें परिवर्तित हो गयी। सड़क मेें तेज रफ्तार से बह रहे पानी के चलते राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर पहाड़ को जाने वाले यात्री तेज बारिश चलते पूरी तरह भीग गये। सड़कों पर पानी का जमाव होने से कई वाहनों के इंजन में पानी चले गये जिससे कई वाहन जहां तहां फंसकर रह गये।

 लगातार जो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। जनपद की नदियों के बढ़ते जल स्तर पर प्रशासन पैनी निगाह रखे हुए है। इधन खबर लिखे जाने तक गौला नदी का जल स्तर 54.72 फीसद बना हुआ था। जबकि नंधौर नदी सहित गौलापार के रास्तों पर पडऩे वाले सभी बरसाती नाले पूरे उफान पर बह रहे थे। वहीं पिछले 12 घंटों में नैनीताल जिले में 63 मीमी बरसात रिकार्ड की गई है।  काठगोदाम में सबसे ज्यादा 150 मीमी, नैनीताल में 72 और रामनगर में 54 मीमी बरसात रिकार्ड की गई।

देर रात से शहर में हो रही बारिश से जल भराव को हटाने के लिए नगर निगम  कार्य कर रही है। जगह जगह से कूड़ा हटाया जा रहा है। जिससे लोगों में जल भराव की समस्या से निजात मिल सके।शहर में देर रात से हो रही बरसात से कई जगहों पर जल भराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नगर आयुक्त हरवीर सिंह ने बताया कि जेसीबी से कूडुा हटाया जा रहा है जिससे जल भराव कम हो सकें। ईद के मददेनजर नगर निगम ने शहर में साफ सफाई की व्यवस्था की है। वहीं भारी बरसात को देखने हुए नगर निगम ने अपने कर्मचारियों को रेन कोट दिये जिससे वह बारिश में भी काम कर सके। और जल भराव को रोक सकेे। नगर आयुक्त हरवीर सिंह ने भारी बारिश में मौके पर जाकर सफाई व्यवस्था व जल भराव की स्थिति का जायजा लिया।

फोटो वायरल होने पर बाबा को आश्रम से निकाला

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सोशल साइट पर हरिद्वार के एक बाबा हरमेल दास की कार के बोनट पर एक युवती को किस करती फोटो वायरल हुई। फोटो पर जहां बाबा ने उन्हें इस कृत्य को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। वहीं युवती ने इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।

सोशल साइट पर वायरल हुई इस तस्वीर के बाद दिल्ली स्थित उदासीन आश्रम में रह रहे बाबा को आश्रम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके पहले बाबा हरमेल दास ने हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र स्थित हरिहर आश्रम में काफी समय व्यतित किया था। यहां भी झगड़ालु प्रवृत्ति का होने का आरोप लगाते हुए बाबा को आश्रम से निकाल दिया गया था। अब दिल्ली में रह रहे बाबा को फोटो वायरल होने के बाद आश्रम की बदनामी के डर से बाबा को आश्रम से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

हालांकि बाबा हरमेल दास का कहना है कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है। जबकि युवती ने इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।  वहीं, आसाराम व राम रहीम जैसे संतों की कारगुजारियां सामने आने पर आश्रम के लोग अब सतर्क हो गए हैं और वह किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से बच रहे हैं। यही कारण है कि बाबा हरमेल दास को आश्रम से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।

कपिल शर्मा के कॉमेडी शो पर ब्रेक लगा

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लगातार विवादों में घिरे रहे कपिल शर्मा के कॉमेडी शो को सोनी चैनल ने कुछ वक्त के लिए बंद करने का फैसला किया है। चैनल की ओर से जारी अाधिकारिक बयान में कहा गया है कि शो को लेकर एक ब्रेक लेने का फैसला किया गया है।


बयान के अनुसार, शो जल्दी ही लौटेगा। माना जा रहा है कि चैनल के अधिकारी उन खबरों से लगातार परेशान थे, जिनमें कपिल शर्मा द्वारा आखिरी पलों में शूटिंग कैंसिल हो रही थी, जिससे बड़ी फिल्मों के सितारों की टीमों को वापस लौटना पड़ रहा था। जब ‘हैरी मेट सेजल’ से लेकर अजय देवगन की ‘बादशाहो’ तक कई फिल्मों की टीमों के साथ शो के एपिसोड की शूटिंग को अंतिम पलों में रद्द कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, फिल्मों की टीमों की ओर से चैनल को शिकायत पहुंचाई गई, जिस पर अब चैनल का रुख सामने आया है। दिलचस्प ये है कि शो की लगातार घटती टीआरपी और बढ़ते विवादों के बीच चैनल ने कुछ ही दिनों पहले कपिल शर्मा के शो को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया था और अब इसे ब्रेक के नाम पर बंद कर दिया गया है। इस शो के टाइम पर अब अभिषेक कृष्णा के कॉमेडी शो लाया जा रहा है, जिसे अभिषेक अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं।अभिषेक के शो की टीआरपी बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन वे हमेशा से अपने शो को कपिल के शो से अच्छा होने के दावे करते रहे हैं।

कपिल शर्मा की सेहत को लेकर भी लगातार खबरें आ रही हैं। वे हर बार अस्वस्थ होने की बात कहकर शूटिंग कैंसिल कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर, वे अपनी फिल्म फिरंगी की शूटिंग लगातार कर रहे हैं। 10 नवम्बर को कपिल ने अपनी इस फिल्म को रिलीज करने की घोषणा भी कर दी है। चैनल से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि कपिल के शो को कुछ बड़े बदलाव के साथ वापस लाया जाएगा, लेकिन चर्चा ये भी है कि शायद ऐसा न हो। 

फिर सुर्खियों में आया कंगना और रितिक का विवाद

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हाल ही में सुर्खियों में रहा कंगना और रितिक रोशन के बीच रिश्तों का विवाद एक बार फिर गरमा गया है और कंगना ने रितिक रोशन के साथ उनके पिता से भी माफी मांगने को कहा है।

कंगना का कहना है कि वे इस बात को कभी भूल नहीं पाती हैं कि कैसे उनके विश्वास को धोखे में रखकर एक रिश्ते के नाम पर उनके साथ धोखेबाजी की गई। कंगना का कहना है कि रितिक रोशन ने उनके द्वारा भेजे गए ईमेल्स को सार्वजनिक करके उनकी न सिर्फ छवि को धूमिल करने की कोशिश की थी, बल्कि उनको मानसिक रूप से आघात पहुंचाया था। कंगना का कहना है कि रितिक और उनके पिता ने दावा किया था कि उनके पास इस मामले के बहुत सारे राज हैं, जिनको वे खोल दें, तो हंगामा हो जाएगा। कंगना ने चुनौती देते हुए कहा कि वे अब इसके लिए तैयार हैं।

कंगना ने कहा कि रोशन पिता पुत्र उनसे सार्वजनिक रुप से माफी मांगे। सोशल मीडिया पर रितिक के लिए कंगना द्वारा सिली एक्स के कमेंट से शुरू हुआ ये विवाद कानूनी लड़ाई तक जा पंहुचा था, जिसमें कंगना द्वारा निजी रूप से कथित तौर पर रितिक को लिखे मेल्स को लीक किया गया था। रितिक का दावा था कि कंगना की ओर से उनकी मेल आई डी पर मेल नहीं किए गए। कहा गया कि किसी ने रितिक के नाम से फेक आई डी बनाई, जहां कंगना के मेल्स पहुंचे।

मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इस मामले की जांच की, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा, तो ये मामला शांत पड़ गया, लेकिन अब कंगना के नए बयान ने इस विवाद को फिर से हवा दे दी है। कंगना ने रितिक के साथ पहले काइट्स और फिर कृष 03 में साथ काम किया था। कंगना के नए बयानों को लेकर अभी तक रितिक रोशन या उनके पिता राकेश रोशन की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन रितिक के वकीलों की टीम कंगना के इन बयानों पर नजर रख रही है। 

बाल यौन शोषण पर सिनेमाघरों में दिखाया जाएगा मेनका गांधी का संदेश

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केंद्रीय महिला एवं समाज कल्याण मंत्री मेनका गांधी की पहल पर सिनेमाघर जल्दी ही फिल्मों की स्क्रीनिंग शुरू करने से पहले एक संदेश का प्रसारण किया करेंगे, जिसमें बाल यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के प्रति सचेत रहने का संदेश दिया जाएगा।

मिली जानकारी के अनुसार, ये संदेश मेनका गांधी द्वारा ही परदे पर दर्शकों को दिया जाएगा। इतना ही नहीं, खबरों के अनुसार, ये संदेश रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, शापिंग मॉल्स और सोशल मीडिया पर भी प्रचारित किए जाने की योजना बनाई गई है। एक समाजिक संगठन के साथ मिलकर मेनका गांधी का मंत्रालय इस योजना पर काम कर रहा है। इस बात के संकेत भी दिए गए हैं कि देश भर में यौन शोषण के अपराधों के प्रति अभियान चलाने के लिए फिल्मों और टेलीविजन के क्षेत्रों की हस्तियों को भी इसमें जोड़ा जाएगा।

कहा जा रहा है कि सिनेमाघरों में फिल्म के शो से पहले चलने वाला मेनका गांधी का संदेश तैयार हो गया है और इसे जल्दी ही लागू किया जाएगा। हवाई अड्डों, रेलवे, बस स्थानकों और दूसरे सार्वजनिक स्थलों से जोड़ने की योजना को अंतिम रुप दिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से इस अभियान में मेगा सितारे अमिताभ बच्चन, उनकी पुत्रवधू ऐश्वर्या राय, विद्या बालन, रवीना टंडन, अनुपम खेर, सलमान खान, कामेडी कलाकार कपिल शर्मा और टीवी के दूसरे सितारों को भी जोड़ा जाने की कोशिश की जाएगी।