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सेंसर बोर्ड से पास हुई फिल्म पोस्टर ब्वॉय

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2014 में आई मराठी फिल्म ‘पोस्टर ब्वायज’ के हिंदी रिमेक को सेंसर बोर्ड से रास्ता साफ कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से सिर्फ एक कट मिला है। ये फिल्म अगले शुक्रवार, 8 सितंबर को रिलीज होने जा रही है।

इस फिल्म का निर्देशन श्रेयस तलपड़े ने किया है, जो हिंदी और मराठी के बड़े कलाकार हैं और ‘इकबाल’ तथा ‘गोलमाल’ सीरिज की फिल्मों में काम कर चुके हैं और पहली बार निर्देशन के मैदान में आ रहे हैं। सोनी पिक्चर्स द्वारा बनाई गई इस फिल्म में देओल भाई सनी और बाबी देओल एक साथ आ रहे हैं। साथ में खुद श्रेयस तलपड़े भी हैं। इनके अलावा फिल्म में सोनाली कुलकर्णी और समीक्षा भटनागर भी हैं। फिल्म के ट्रेलर को काफी पसंद किया गया है।

सनी और बाबी एक साथ काफी अंतर के बाद परदे पर लौट रहे हैं। पूर्व में वे फिल्म अपने और ‘यमला पगला दीवाना’ की दो कड़ियों में साथ काम कर चुके हैं। भगत सिंह पर बनी फिल्म में भी दोनों ने साथ काम किया था और फिल्म हीरोज में भी दोनों साथ थे। ये दोनों भाई इन दिनों हैदराबाद में यमला पगला दीवाना की तीसरी कड़ी के पहले शेड्यूल की शूटिंग में व्यस्त हैं। इस फिल्म में सनी और बाबी एक बार फिर अपने पापा धर्मेंद्र के साथ नजर आएंगे।

फिल्म डैडी को मिला सेंसर बोर्ड से ए सर्टिफिकेट

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अगले सप्ताह रिलीज होने जा रही अर्जुन रामपाल की फिल्म डैडी को सेंसर बोर्ड ने ए सर्टिफिकेट के साथ पास कर दिया है। फिल्म में कुछ कट्स भी दिए हैं, जिनको लेकर अर्जुन रामपाल की ओर से कोई समस्या व्यक्त नहीं की गई है।

सेंसर बोर्ड की ओर से अर्जुन रामपाल को ये विकल्प भी दिया गया था कि अगर फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट दिया जाए, तो इसके लिए ज्यादा कट्स लगेंगे। इस पर अर्जुन रामपाल ने कम कट्स के साथ ए सर्टिफिकेट स्वीकार करने का फैसला किया है।

मुंबई की दगड़ी चॉल में रहने वाले अंडरवर्ल्ड डान और बाद में राजनेता बने अरुण गवली की जिंदगी पर बनी इस फिल्म में अर्जुन रामपाल ने गवली का रोल किया है। अपने लोगों के बीच अरुण गवली डैडी नाम से ही जाने जाते हैं। इन दिनों अरुण गवली जेल में बंद हैं, ये कोशिश की गई कि अरुण गवली पेरोल पर जेल से बाहर आएं और अर्जुन के साथ फिल्म का प्रचार करें, लेकिन ये नहीं हो पाया। जेल प्रशासन ने पेरोल की अरुण गवली के निवेदन पर कोई फैसला नहीं किया।

इस फिल्म में अर्जुन रामपाल के अलावा साउथ की फिल्मों मे काम करने वाली अभिनेत्री ऐश्वर्या राजेश भी हैं, जो अरुण गवली की पत्नी आशा गवली का रोल कर रही हैं। वे पहली बार किसी हिंदी फिल्म में काम कर रही हैं। अशीम अहुलवालिया इस फिल्म के निर्देशक हैं, जबकि फिल्म की स्क्रिप्ट खुद अर्जुन रामपाल ने लिखने का दावा किया है। 

कंगना की फिल्म सिमरन का नया गाना लांच

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15 सितंबर को रिलीज होने जा रही हंसल मेहता की फिल्म सिमरन का नया गाना सिंगल रहने दे.. आज सोशल मीडिया पर लांच किया गया। इसे गायिका शलमाली खोलगड़े ने गाया है और सचिन-जिगर की जोड़ी ने संगीतबद्ध किया है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर लांच किया गया, जिसे अच्छा रेस्पांस मिला है।

टी सीरिज और हंसल मेहता द्वारा मिलकर बनाई गई इस फिल्म की कहानी अमेरिकन में रहने वाली सिमरन नाम की भारतीय लड़की की है, जो रिश्तों की मस्ती में डूबी हुई है। क्वीन के बाद इस फिल्म में कंगना के साथ मेहमान भूमिका में राजकुमार राव हैं। फिल्म के लेखक अपूर्वा साहनी को लेकर सिमरन विवादों में भी रही। अपूर्वा साहनी ने फिल्म में कंगना को सह लेखक का क्रेडिट देने का विरोध किया था, जिसे लेकर अपूर्वा और कंगना में आरोप-प्रत्यारोप भी हुए।

कंगना ने पहली बार हंसल मेहता की फिल्म में काम किया है, जो पूर्व में शाहिद, अलीगढ़ और दिल पे मत ले यार जैसी फिल्में बना चुके हैं। सिमरन के अलावा हंसल मेहता की एक और फिल्म बनकर तैयार है, जिसमें राजकुमार राव ने एक आतंकवादी का रोल किया है। ये फिल्म अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर फैले आतंकवाद को लेकर बनी है। सिमरन के बाद कंगना की नई फिल्म रानी लक्ष्मीबाई की जिंदगी पर है, जिसकी आधे से ज्यादा शूटिंग हो चुकी है और अगले साल अप्रैल में ये रिलीज होगी। इसके बाद कंगना ने खुद के निर्देशन में फिल्म बनाने का फैसला किया है।

एटीएम क्लोनिंग के तीन आरोपी गिरफ्तार, 32 एटीएम कार्ड बरामद

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देहरादून में हुई एटीएम क्लोनिंग की घटनाओं से जुड़े तीन आरोपियों को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर उनके पास से 32 एटीएम कार्ड व दो स्कीमर बरामद किए हैं। विगत माह देहरादून जिले में हुई एटीएम क्लोनिंग की घटनाओं में थाना नेहरू कॉलोनी व अन्य थानों में 97 अभियोग पंजीकृत किये गए थे। अभियुक्तों ने विभिन्न बैंक खातों से करीब 34 लाख रुपये निकाल चुके हैं।

पंजीकृत अभियोगों में नामजद अभियुक्तों रामबीर, जगमोहन तथा सुनील को पुलिस ने 21 अगस्त को कोल्हापुर से गिरफ्तार किया था। उसके बाद गिरफ्तार अभियुक्तों के अभियोग से सम्बंधित वाहन, एटीएम क्लोनिंग से सम्बंधित उपकरणों व अन्य दस्तावेजों की बरामदगी के लिए 31 अगस्त की शाम से चार दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया था। पुलिस रिमांड के दौरान अभियुक्तों से गहनता से पूछताछ कर अभियोग से संबंधित दस्तावेजों एवं उपकरणों की रिकवरी के लिए पुलिस ने हरियाणा में रोहतक, झज्जर आदि स्थानों पर रवाना हुई।

एसएसपी के पीआरओ ने बताया कि इन स्थानों पर अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस टीम ने अभियुक्त रामबीर के अर्बन स्टेट, जिला रोहतक, अभियुक्त सुनील के ग्राम- खराबड़, जिला झज्जर तथा अभियुक्त जगमोहन के ग्राम बरहाना जिला झज्जर स्थित आवासों से एटीएम क्लोनिंग से संबंधित दस्तावेज, उपकरण, वाहन व अन्य सामान बरामद किया गया।
बरामद किए गए सामान में 32 एटीएम कार्ड, दो स्कीमर, एक डायरी, एक स्कॉर्पियों, एक आई-10 कार व एटीएम मशीन खोलने के उपकरणों को घटना के समय अभियुक्त द्वारा पहने गए कपड़े आदि शामिल हैं।

ट्रक की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत

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एक ट्रक की टक्कर से बाइक सवार एक युवक की मौत हो गर्इ। जबकि उसके साथ बैठा दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में ले लिया है और युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच कर रही है।

शनिवार को धनौरी क्षेत्र के बेगमपुर निवासी अजय (25) किराएदार के साथ बाइक से गांव बहादरपुर में म्हाड़ी के मेले से घर लौट रहा था। दोनों पथरी-रौ पुल के पास पहुंचे, तभी सामने से तेज गति से आ रहे एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। अजय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं ट्रक चालक फरार हो गया। हादसे की सूचना राहगीरों ने पुलिस को दी। पुलिस ने घायल को एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया। आरोपी ट्रक चालक को पुलिस तलाश रही है।

राजेश शुक्ला के बयान पर अजय भट्ट की सफाई

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भाजपा के किच्छा विधायक राजेश शुक्ला का कांग्रेस प्रेम पर दिखाई गयी खबर के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उनके द्वारा कांग्रेस की नेता और नेता प्रतिपक्ष के बारे में दिये गये बयान पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। नेेता प्रतिपक्ष अनुभवि और बडे नेताओं में है जिनके अनुभवों का लाभ लेने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, यही नहीं उनके मार्ग दर्शन से बाजपा को भी लाभ मिलेगा।

अजय भट्ट ने कहा कि ये कहना गलत होगा कि 58 विधायकों में भाजपा विधायकों की सुनवायी कम हो रही है, एेसा नहीं है भाजपा में सभी को समान रुप से देखा जाता है और विधायकों की हर समस्या का समाधान भाजपा करती है, यही नहीं मंत्री मंण्डल में भाजपा विधायक राजेश शुक्ला की ताजपोशी ना होने पर बी अजय भट्ट ने कहा कि ये हाई कमान का निर्णय होता है।

जिसमें मुख्यमंत्री और शीर्ष नेतृत्व ही इसका निर्णय लेता है किसकी मंत्रीमण्डल में ताजपोशी होगी और किसकी नहीं, सभी को मंत्रीमण्डल में जगह नहीं मिल सकती इसलिए किसी विधायक को यदि जगह नहीं मिली तो वो उम्मीद ना खोये और संगठन के निर्णय को ही सर्वोपरी माने।

बिना शिक्षक के कैसे हो पढ़ाई

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जनपद पौड़ी गढ़वाल के घण्डियाल क्षेत्र के विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति न होने से क्षेत्र के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। बिना शिक्षकों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। शनिवार को डांगी विद्यालय के शिक्षक अभिभावक संघ के अध्यक्ष और क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी जगमोहन डांगी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल अपर निदेशक शिक्षा महावीर सिंह बिष्ट से मिला और विद्यालय की समस्याओं काे लेकर उन्हें ज्ञापन दिया।

राउमा. विद्यालय डांगी में प्रधानाचार्य समेत शिक्षकों के पांच खाली पदों पर तैनाती की मांग की। उन्होंने बताया कि विद्यालय अंग्रेजी, व्यायाम व सामान्य तीन अध्यापकों के भरोसे संचालित हो रहा है। इससे छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसलिए शीघ्र ही विद्यालय में प्रधानाचार्य समेत अन्य शिक्षकों के खाली पदों पर नियुक्ति दी जाए। इसका संज्ञान लेते हुए अपर निदेशक ने गणित के एक अध्यापक को विद्यालय में नियुक्ति प्रदान की है।

अकीदत के साथ की नमाज अदा

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ईद उल अजहा के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिदों में अकीदत के साथ नमाज अदा की। नमाजियों ने मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर मुबारकवाद दी।

मुस्लिम समुदाय के तमाम लोगों ने बकरीद के मौके पर बकरों की कुर्बानियां दीं और अपने लोगों में तबर्रुख तकसीम किया। शहर के मस्जिदो में मुकर्रर वक्त पर वहां के इमामों ने नमाज अदा कराई। इस दौरान कई ईदगाहों पर लगे मेले में भारी बरिश होने के चलते दुकानदारों को मायूस होकर लौटना पड़ा।  वहीं नमाज के दौरान पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। शहर में साफ सफाई की भी विशेष व्यवस्था की गई थी।

मुस्लिमों के अलावा अन्य सम्प्रदाय के लोगों ने भी बकरीद की खुशियों में शामिल होकर भाईचारे की मिसाल कायम की। नमाज के बाद घरों में कुर्बानियों का सिलसिला शुरू हुुआ। इस मौके पर मस्जिदो मे लोगो ने एक दूसरो को गले मिलकर ईद की बधाई दीं। वही कुमाऊं डिवीजन के कमिश्नर चदं्रशेखर भट्ट व जिलाधिकारी दीपेन्द्र कुमार चौधरी ने जनपद के लोगों को ईद उल अजहा (बकरीद) की मुबारकबाद दी है।

इमरजेन्सी के आंदोलनकारियों की हो रही उपेक्षा

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इमरजेन्सी काल के आंदोलनकारियों के साथ भेदभाव किये जाने और दोहरे मापदण्ड से आंदोलनकारी आज आहत है, एक ओर इमरजेन्सी में मीसा के तहत जेल में बेद हुए आंदोलनकारियों को पेंशन सुविधा देने की घोषणा की गयी तो दुसरी ओर डीआईआर के तहत उसी दौरान जेल में बंद हुए आंदोलकारियों को पेंशन सुविधा से वंचित किया जा रहा है, सरकार की इस दोहरी नीति से जहां आंदोलनकारी नाखुश है वहीं अब सरकार भी मान रही है कि गलती हुई है और सुधार किया जाएगा।
25 जून 1975 को देश में इमरजेन्सी काल लगाया गया था और देश के कोने में कई आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों को इस दौरान जेल भेजा गया था। इसी दौरान उत्तराखण्ड से भी कई लोगों को अलग अलग जेलों में भेजा गया था,  किसी को नैनीताल जेल तो किसी को बरेली जेल भेजा गया, लेकिन किसी को मीसा के तहत जेल भेजा गया तो किसी को डीआईआर के तहत, सभी को एमरजेन्सी काल में भाजपा या संघ के होने के नाते या फिर सरकार के खिलाफ षडयंत्र रचने या आंदोलन करने के जुर्म में जेल भेजा गया था, जिन्होने जेल मे भी कई यातनाए सही।
लम्बे समय बात उनकी याद तो भाजपा सरकार को आयी और भेजापा शासित राज्यों में उन सभी को सम्मान के तौर पर पेंशन देने की घोषणा भी की गयी, जिसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तराखण्ड प्रमुख है, लेकिन अन्य राज्यों में मीसा और डीआईआर को एक समान रखा गया है। जबकि उत्तराखण्ड में जारी शासनादेश में सिर्फ मीसा का उल्लेख किया गया है, जिससे डीआईआर के तहत रहे आंदोलनकारी इस पेशन सुविधा से वंचित हो गये।
वहीं सरकार से चूक हुई है और उसे सुधारने के प्रयास किये जा रहे हैं ये बात भी सामने आ रही है, खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि मीसा और डीआईआर एक ही है मगर सरकार से जल्दबाजी में शासनादेश में सिर्फ मीसा का उल्लेख होने से डीआईआर के तहत जेल गये आंदोलनकारियों को निराश होने की जरुरत नहीं है, बल्कि जल्द ही शासनादेश में बदलाव कर दिया जाएगा और सभी को समान रुप से सम्मान दिया जाएगा।

इमरजेन्सी काल के दौरान जिन्होने सरकार की प्रताडना सही और जेल में यातनाए सही उनमें भेद डालकर सरकार ने अपने लिए ही खाई खोद ली है.. अब जहां प्रदेश भर में मीसा के आंदोलनकारी गिने चुने ही रह गये है एसे में डीआईआर के तहत रहे आंदोलनकारियों में इस बात से आक्रोश है कि उनके साथ सरकार द्वारा आखिर ये भेदभाव क्यो किया गया, वहीं सरकार की गलती का खामियाजा अब इन आंदोलनकारियों को बुगतना पड रहा है, देखना होगा कि आखिर कबतक सरकार नया शासनादेश जारी करती है और कब डीआईआर आंदोलनकारियों को समान अधिकार मिल पाता है।

नया फैशन आया बाजार में एसआईटी से जांच

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प्रदेश के सरकारी तंत्र का नया फैशन आ गया है, यहां अब हर मामले की जांच एसआईटी से कराने का फैशन शुरु हो गया है। भूमि घोटाले से शुरु हुआ ये फैशन, गेहू के घोटाले तक पहुंच गया है, प्रदेश में भ्रष्टचार से जुड़ा मामला हो या फिर खनन से या फिर किसी अन्य  मामले से हर मामले में एसआईटी गठित कर जांच कराये जाने का उत्तराखंड में मानो फैशन सा बन गया हो। अब टीडीसी के चर्चित बीज घोटाले की बात करे, तो इस पर पूर्व में मुख्य सचिव के अध्यक्षता में पहले जांच हो चुकी है।

इतना ही नहीं जांच के आधार पर कई अधिकारियों के खिलाफ  मुकदमा तक पंजीकृत हो चुका है। लेकिन एक बार फिर निष्पक्ष जांच के नाम पर टीडीसी से जुड़े घोटाले को एसआईटी के हवाले कर दिया गया है। यहां सवाल यह भी है कि हर जांच के लिए एसआईटी गठित किया जाना कहा तक तर्क संगत है। क्योंकि ऐसा करने से जहां कई जांच एजेन्सियों की साख पर सवालिया निशान लग रहे है। वही एसआईटी पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से करेंगी। इसकी क्या गारंटी है। क्योंकि जिस पुलिस के नेतृत्व में एसआईटी गठित की जा रही है। उससे पहले यह देखा जाना जरूरी होगा कि उसकी अपनी सामान्य छवि क्या है। क्योंकि जिस पुलिस के नेतृत्व में एसआईटी गठित की जा रही है। उसकी अपनी छवि किसी से छुपी नहीं है। पुलिस को जांच सौंपने का मतलब ठीक उसी तरह होगा, जिस प्रकार बिल्ली से दूध की रखवाली के लिए कहा जाए।

प्रदेश में एसआईटी संभवत सबसे पहले पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान जमीन से जुड़े प्रकरणों की जांच के लिए गठित हुई। तब एसआईटी का गठन संभवत इसलिए भी किया गया, क्योंकि इस तरह के मामलों में पुलिस खासकर कि थाना चौकियों की भूमिका संदिग्ध होती जा रही थी। ऐसे मामलों में पुलिस का दखल इस कदर बढ़ गया था।  उच्च स्तर से आदेश तक करने पड़े कि पुलिस सिविल मामलों अनावश्यक दखल न दे। लेकिन बाद में जमीन संबंधी शिकायती मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई। इसके बाद तो मानो प्रदेश में एसआईटी के गठन का सिलसिला ही शुरू हो गया। जमीन संबंधी मामलों के बाद अवैध खनन से जुड़े मामलों की जांच के लिए भी एसआईटी बनाई गयी। इसके साथ ही एसआईटी के गठन पर सवाल भी उठने शुरू हो गए। यह माना जाने लगा कि एसआईटी का गठन राजनीति से प्रेरित है। अब हाल यह है कि तमाम सवालों के साथ एसआईटी हर ‘मर्जÓ की दवा बन चुकी है। आज राज्य में स्थिति यह है कोई भी बड़ा मामला सामने आता है, तो पहले किसी बड़ी एजेंसी से जांच कराने की मांग की जाती है लेकिन बाद में वही जांच एसआईटी के हवाले कर दी जाती है। एनएच घोटाला इसका ज्वलंत उदाहरण है।

इस हाई प्रोफाइल घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की घोषणा खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने की थी। मगर आज हकीकत यह है कि इसकी जांच एसआईटी कर रही है। कल्पना कीजिए जिस एनएच घोटाले के तार कई बड़े सफेदपोशों और अफसरों तक से जुड़े हैं, उसमें अदनी सी एक एसआईटी असल गुनाहगारों तक पहुंच भी पाएगी। एक अन्य मामले में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षा महकमे में नौकरी पाने वाले शिक्षकों की जांच भी सरकार ने एसआईटी को ही सौंपी है। जबकि सच यह है कि यह जांच खुद विभाग ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकता था, या फिर किसी अन्य विशेषज्ञ एजेंसी सीआईडी आदि को ये जांच सौंपी जा सकती थी। चूंकि जांच बड़े पैमाने पर होनी है लिहाजा तय है कि पुलिस का दखल भी उतना ही ज्यादा बढ़ेगा। शिक्षा महकमा इस दखल को कितना स्वीकार कर पाता है, अंत: निष्कर्ष क्या रहता है। यह भी बड़ा सवाल है।

हाल ही में करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच भी अब एसआईटी से कराने की घोषणा की जा चुकी है। कहां तो यह कहा जा रहा था कि इस घोटाले की जांच सीबीआई से करवाई जा सकती है लेकिन अब सरकार साफ  मुकर रही है। अहम तथ्य यह है कि एसआईटी का गठन ऐसे वक्त में किया जा रहा है जब पुलिस के पास संसाधनों की भारी कमी है।

शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच वाले मामले में खुद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ने एसआईटी जांच से इंकार करते हुए कहा था कि पुलिस के पास जांच के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर एसआईटी को प्रकरण पर प्रकरण सौंपे जा रहे हैं। यह सीधे सीधे महकमों में पुलिस का अनावश्यक दखल बढ़ाने जैसा तो है। साथ ही यह ‘निष्पक्षता पर भी सवाल है।