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बॉक्स ऑफिस पर ‘बादशाहो’ मजबूत, ‘शुभ मंगल सावधान’ ढीली

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अजय देवगन की ‘बादशाहो’ पिछले शुक्रवार को रिलीज हुई और पहले तीन दिनों में बॉक्स ऑफिस पर अपनी जगह मजबूत कर ली है। 1975 की इमरजेंसी के बैकड्रॉप पर बनी इस मसालेदार फिल्म ने पहले तीन दिनों में 43 करोड़ के लगभग का कारोबार किया है, जिसे बहुत अच्छा माना जा रहा है। इस मल्टी स्टारकास्ट फिल्म ने पहले दिन 12 करोड़ की कमाई के साथ मजबूत शुरुआत की और शनिवार तथा रविवार को फिल्म की स्थिति और मजबूत होती चली गई।

शनिवार और रविवार, दोनों दिन फिल्म का कारोबार 15 करोड़ से ज्यादा का रहा। फिल्मी कारोबार के जानकार इसे सन 2017 की सबसे बड़ी ओपनिंग लेने वाली फिल्मों में मान रहे हैं| कहा जा रहा है कि अगले वीकेंड तक, यानी रिलीज के दस दिनों में ये 100 करोड़ के क्लब में जा सकती है|

पहले सप्ताह में फिल्म का कलेक्शन 60 करोड़ से 65 करोड़ के बीच रहने की उम्मीद है। टी सीरीज में बनी इस फिल्म का निर्देशन मिलन लुथरिया ने किया है। इसके साथ रिलीज हुई फिल्म शुभ मंगल सावधान को बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। पहले दिन 2.71 करोड़ का कारोबार करने वाली इस फिल्म की पहले तीन के बाद कमाई 11 करोड़ के आसपास हो गई। आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर की जोड़ी की ये फिल्म अपनी लागत (12 करोड़) लागत वसूलने के करीब है, लेकिन जानकारों को बहुत ज्यादा मुनाफे की उम्मीद नहीं नजर आ रही। अनुमान है कि पहले सप्ताह में फिल्म 15-18 करोड़ तक की कमाई कर सकती है। 

गुलदार ने आठ मवेशियों को बनाया निवाला

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चमोली जिला मुख्यालय के निकटवर्ती गांव पाडुली में दो-तीन दिनों के भीतर गुलदार ने आठ मवेशियों को अपना निवाला बनाया है। गुलदार के आतंक से ग्रामीण काफी भयभीत है, उन्होंने वन विभाग से गुलदार को पकड़ने की मांग की है।

पाडुली के ग्रामीण अमर सिंह, परवीन बिष्ट, सुरेंद्र लाल, ताजबर सिंह व राजवर सिंह बत्र्वाल ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से पाडुली गांव में गुलदार ने ग्रामीणों के आठ मवेशियों को अपना निवाला बना दिया है, जिससे लोगों में दहशत बनी हुई है।

ग्रामीण अंधेरा होने पर घरों में दुबकने के लिए मजबूर हो रहे हैं। यही नहीं रात को ग्रामीण एक साथ एक स्थान पर पर एकत्र होकर रातभर शोर मचाकर गुलदार को गांव में प्रवेश नहीं करने का प्रयास भी कर रहेे हैं। इस संबंध में वन विभाग से गुलदार को पकड़ने की मांग की गई है ताकि उनके पशु सुरक्षित रह सकें। 

बारिश का दौर थमा पर दुश्वारियां कम नहीं हुईं

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उत्तराखंड में भले ही बारिश का दौर थम गया है लेकिन दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। राज्य में हुई भारी बारिश से 97 मोटर मार्ग अब भी बंद है। पिथौरागढ़ जिले में 14 अगस्त को बारिश ने भारी तबाही माचाई थी। राज्य अपदा परिचालन केन्द्र के अनुसार यहां अभी 10 मोटर मार्ग बंद पड़े है कई गांवों का सम्पर्क टूटा हुआ है।

इसी तरह हरिद्वार में बीते दो सितंबर को तहसील लक्सर के समीप सोलानी नदी में जलस्तर बढ़ने व तेज बहाव के कारण ग्राम मखाना के पास लगभग 50 मीटर बहा तटबंध अभी क्षतिग्रस्त हालत में है। सिंचाई विभाग द्वारा टूटे तटबंध की मरम्मत करायी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्र अंतर्गत सुरक्षा की दृष्टि से एक एसडीआरएफ की एक सब टीम एवं जल पुलिस की टीम भी तैनात है। जिले में एक राज्य मार्ग व छह ग्रामीण मार्ग अवरुद्ध है, जिन्हें खोलने की कार्रवाई की जा रही है।

वहीं पौड़ी गढ़वाल जिले में एक राज्य मार्ग व 53 ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध है। इसी तरह देहरादून जिले में आठ ग्रामीण मार्ग अवरुद्ध है। प्रशासन द्वारा इन मार्गों को सुचारू करने पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं, भारी बारिश से टिहरी जिले में चार ग्रामीण मोटर मार्ग, उत्तरकाशी जिले में भी सात ग्रामीण मोटर मार्ग अब भी अवरुद्ध है।

भारी बारिश व मलबा आने से चमोली जिले में आठ ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध है जबकि चंपावत जिले में पांच मोटर मार्ग विरुद्ध है। अल्मोड़ा जिले में चार ग्रामीण मोटर मार्ग, नैनीताल जिले में 11 ग्रामीण मोटर मार्ग और बागेश्वर जिले में चार ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध है। सूबे में बंद मार्गों से गांव से सम्पर्क टूट गया है। ऐसे में रोजमर्रा की चीजों के लिए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य आपातकालिन परिचालन केन्द्र का कहना है कि सूबे के सभी अवरुद्ध मार्गों को शासन-प्रशासन द्वारा खोले जाने की कार्रवाई जारी है।

उत्तराखण्ड सेना भर्ती रैली 11 से देहरादून में

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उत्तराखण्ड सहित देश के सात राज्यों के युवाओं के लिए पांच दिवसीय सेना भर्ती रैली 11 सितम्बर से देहरादून में शुरू हो रही है।थलसेना की 108 इन्फेंट्री बटालियन प्रादेशिक सेना (टीए) महार के तत्वावधान में सेना की भर्ती रैली 11 से 16 सितम्बर तक गढ़ी कैंट स्थित शहीद जसवंत सिंह ग्राउंड में आयोजित होगी।

भर्ती रैली सुबह पांच बजे से शाम सात बजे तक चलेगी। 108 इन्फेंट्री बटालियन (टीए) महार रेजीमेंट के मेजर विकास कुमार सिंह ने बताया कि भर्ती के पहले दिन उत्तराखंड के अलावा मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, बिहार, छत्तीसगढ़ व झारखंड राज्यों के युवाओं को 1600 मीटर की दौड़ लगानी होगी। बताया कि 18 से 21 आयु वर्ग के अभ्यर्थियों को 5.40 मिनट, 20 से 40 आयु वर्ग के अभ्यर्थियों को 6.35 मिनट में, 40 से 42 आयु वर्ग के अभ्यर्थियों को 7.23 मिनट में दौड़ पूरी करनी होगी।

अभ्यर्थियों की राज्य के अनुसार ऊंचाई न्यूनतम 160 सेमी, वजन 50 किलो और छाती 77 सेमी, फुलाने पर पांच सेमी तक ज्यादा होगी। पूर्व सैनिक, वार विडो, खिलाड़ी कोटे के अभ्यर्थी को हाइट में दो सेमी की छूट दी जाएगी।

अवैध शराब की नौ पेटी छत से बरामद

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चमोली पुलिस ने लंगासू में एक मकान की छत पर अवैध रूप से रखी गई नौ पेटी अंग्रेजी शराब की पकड़ी है। पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत कर लिया है।

लंगासू चौकी इंजार्च उपनिरीक्षक नितिन बिष्ट ने बताया कि रविवार को देर शाम मुखबिर ने सूचना दी कि एक व्यक्ति भारी मात्रा में शराब लेकर अपने घर गया है। सूचना पर पुलिस ने महिपाल उर्फ दम्मू के घर पर छापा मारा तो उसके मकान की छत से नौ पेटी अवैध शराब की पकड़ी गई।

अभियुक्त महिपाल के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक नितिन बिष्ट के साथ सिपाही बल्लभ व होमगार्ड मनोज कुमार शामिल रहे।

 

सड़क हादसे में एसएसबी के दो जवानों समेत तीन की मौत

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एक टैक्सी खाई में गिरने से एसएसबी के दो जवान समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही टैक्सी में सवार एसएसबी के दो अन्य जवान गंभीर रूप से घायल है। पुलिस के अनुसार ये जनाव मटियानी गांव में गौरा महोत्सव देखने के लिए जा रहे थे।

रविवार की देर रात रौसाल से मटियानी गांव जा रही एक टैक्सी रौसाल से करीब चार किलोमीटर पहले घटीगाड़ के पास अनियंत्रित होकर करीब 300 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। टैक्सी में चार एसएसबी के चार जवान और चालक सवार थे। पुलिस के मुताबिक हादसे में दो एसएसबी के जवान और वाहन चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर एसडीआरएफ और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर गाड़ी ले घायलों और शवों को निकाला। गंभीर रूप से घायलों को लोहाघाट के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहां से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

पंचेश्वर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक डीएल वर्मा ने जानकारी दी कि टैक्सी में सवार एसएसबी के हेड कांस्टेबल संदीप कुमार मिश्रा ,कास्टेबल आंचल सिंह और वाहन चालक राजू भंडारी की मौके पर ही मौत हो गई थी, उनके शव अस्पताल भेजे गए। जबकि, कांस्टेबल सुमित कुमार तिवारी और कांस्टेबल बाल्मीकि सिंह हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए है। उनका सीएचसी लोहाघाट में प्राथमिक उपचार के बाद रात में ही हायर सेंटर रेफर कर दिया है। उन्होंने बताया कि चारों जवान सी कंपनी एसएसबी रौसाल में तैनात थे।

साहित्यिक चोरी पर रोक को यूजीसी का कानून

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अनुसंधान और शोध के क्षेत्र में चोरी अब भारी पड़ेगी। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने साहित्यिक चोरियों को रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसके लिए खास तौर पर नया रेगूलेशन तैयार किया है। नए नियमों के तहत जहां एक ओर ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, वहीं शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, अध्ययन, परियोजना के प्रति जिम्मेदार आचरण आदि को लेकर भी शैक्षणिक जागरुकता फैलाई जाएगी। अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रजुएट स्तर पर इसे पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा।

बीते कुछ वक्त में रिसर्च आदि में शोधकर्ताओं की कॉपी-पेस्ट की बढ़ती प्रवृत्ति के तमाम मामले सामने आ रहे थे। इसे रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी), आॅल इंडिया काउंसिल फोर टेक्निकल एजुकेशन(एआईसीटीई) समेत तमाम परिषदों ने कई नियम भी बनाए लेकिन बावजूद इसके कंटेंट चोरी के मामलों पर अंकुश नहीं लग पाया। इसी को देखते हुए अब यूजीसी ने ऐसे मामलों के सामने आने पर कड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया है। नए रेगूलेशन में साहित्यिक चोरी को लेकर कड़े प्रावधान भी निर्धारित किए गए हैं।

आयोग का मानना है कि संस्थानों में ऐसे कृत्यों पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। आयोग ने नए रेगूलेशन में कहा है कि संस्थानों में अनुसंधान आदि कार्यो में छात्रों, फैकल्टी व अन्य स्टाफ नियम कायदों आदि को लेकर शुचिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में संस्थानों में इसे लेकर जागरुकता लानी होगी। इसके अलावा, संस्थानों में साहित्यिक चोरी का पता लगाने और उसे रोकने के लिए तंत्र स्थापित करना होगा। ऐसे मामलों में छात्र, फैकल्टी या कर्मचारियों को दंडित करने का कार्य भी करना होगा।

पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा ईमानदारी का पाठ
आयोग के नए रेगूलेशन के अनुसार अब संस्थानों में एकेडमिक इंटीग्रिटी को पाठ्यक्रम में भी पढ़ाया जाएगा। इसके लिए संस्थानों को अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में अनिवार्य रूप से इसे शामिल करना होगा। साथ ही एमफिल और पीएचडी स्कॉलरों के लिए भी अनिवार्य रूप से पब्लिकेशन एथिक्स को कोर्स वर्क का हिस्सा बनाया जाएगा। वर्कशॉप व सेमिनार आदि के माध्यम से छात्रों और एकेडमिक स्टाफ को साहित्यिक चोरियों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा। साहित्यिक चोरियों की पहचान करने और पकड़ने के लिए छात्रों व कर्मचारियों को संबंधित आधुनिक तकनीकि और टूल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा छात्र, फैकल्टी, कर्मचारी और शोधकर्ता को अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता रजिस्ट्री प्रणाली पर पंजीकृत किए जाने को लेकर भी संस्थानों द्वारा प्रेरित करना होगा।

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीके गर्ग ने बताया कि शोध कार्यों में शोधकर्ताओं द्वारा कामचोरी की जाती है। इसके साथ किसी अन्य के शोध से कंटेंट को चोरी कर अपने शोध में उपयोग किया जाता है। यह अपराध है। आयोग इसे लेकर सख्ती के मूड में है। इस कदम से साहित्यिक चोरियों पर लगाम लगेगी।

संस्थानों को दिए निर्देश 
-संस्थानों को साहित्यिक चोरियों को रोकने के लिए तैयार करना होगा सॉफ्टवेयर।
-किसी भी अनुसंधान, रिसर्च पेपर या अन्य शोध के जमा करने के समय देनी होगी अंडरटेकिंग।
-एमफिल, पीएचडी स्कॉलरों को उनके शोध की साहित्यिक जांच के लिए टूल उपलब्ध कराए जाएं ताकि किसी भी प्रकार से संबंधित सामग्री साहित्यिक चोरी से मुक्त हो।
-सामग्री को साहित्यिक पहचान उपकरण के माध्यम से जांचा गया है इसे लेकर संबंधित शोधकर्ता को इसका पूरा दायित्व लेना होगा।
-संस्थानों को चोरियों को रोकने के लिए पॉलिसी तैयार कर संबंधित विश्वविद्यालय समिति से अनुमोदित कराना होगा।
-रिसर्च सुपरवाइजर को शोधकर्ता की शोध सामग्री साहित्यिक चोरी से मुक्त है, इसके लिए प्रमाण पत्र देना होगा।
-आयोग की आॅनलाइन लाइब्रेरी इंफ्लिबनेट पर शोधकर्ता को शोध आदि की सॉफ्ट कॉपी अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी।
-सभी संस्थान शोध, अनुसंधान, रिसर्च पेपर, थीसिस, डिजर्टेशन आदि का अपनी वेबसाइट पर संस्थागत रूप से संग्रह करेंगे।
-साहित्यिक चोरी का मामला सामने आने पर एकेडमिक मिसकंडक्ट पैनल (एएमपी)द्वारा जांच की जाएगी।
-प्लेगियारिज्म डिसिपिलिनेरी अथॉरिटी(पीडीपी) को जांच सौंपी जाएगी। इसके बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

तीन लेवल पर होगी कार्रवाई 
प्लेगियारिज्म डिसिपिलिनेरी अथॉरिटी(पीडीपी) द्वारा सहित्यिक चोरी की पुष्टि होने पर संबंधित छात्र, फैकल्टी या कर्मचारी के खिलाफ तीन लेवल पर कार्रवाई की जाएगी। आयोग के रेगूलेशन के अनुसार तीन अलग अलग श्रेणी निर्धारित की गई। इसमें चोरी के प्रतिशत के आधार पर दंड निर्धारित किया जाएगा।

छात्रों पर यह होगी कार्रवाई 
लेवल 1: 10% से 40% साहित्यिक चोरी- इस मामले में छात्र को किसी भी प्रकार से कोई अंक या क्रेडिट प्रदान नहीं किया जाएगा। साथ ही छह महीने के अंदर दोबारा साहित्यिक चोर से मुक्त शोध सामग्री जमा कराने का मौका दिया जाएगा।
लेवल 2: 40% से 60% साहित्यिक चोरी- ऐसे मामले में संबंधित छात्र को कोई अंक या क्रेडिट प्रदान नहीं किया जाएगा। साथ ही शोध पुन: जमा करने के लिए अधिकतम 18 महीने का समय दिया जाएगा।
लेवल 3: 60% से अधिक की साहित्यिक चोरी- ऐसे प्रकरण में संबंधित छात्र को कमेटी द्वारा कोई अंक या क्रेडिट प्रदान किया जाएगा। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जाएगा।

फैकल्टी व स्टाफ पर यह होगी कार्रवाई
लेवल 1: 10% से 40% साहित्यिक चोरी- मामले में मैनूस्क्रिप्ट (हस्तलिपी) वापस लेने को कहा जाएगा। साथ ही किसी भी प्रकार के प्रकाशन पर एक वर्ष का प्रतिबंध।
लेवल 2: 40% से 60% साहित्यिक चोरी- मामले में मैनूस्क्रिप्ट वापस लेने को कहा जाएगा। किसी भी प्रकार के प्रकाशन पर दो वर्ष के प्रतिबंध के साथ ही एमफिल या पीएचडी स्कॉलर के गाइड के रूप में कार्य करने पर प्रतिबंध।
लेवल 3: 60% से अधिक की साहित्यिक चोरी- अगले दो साल तक वेतनमान में वृद्धि पर रोक। प्रकाशन के लिए दी गई मैनूस्क्रिप्ट स्वीकार नहीं की जाएगी। तीन वर्ष तक प्रकाशन पर प्रतिबंध व एमफिल या पीएचडी स्कॉलर के गाइड के रूप में कार्य करने पर 3 वर्ष का प्रतिबंध।

आयुर्वेद ​विवि को जल्द मिलेगा स्थाई कुलपति

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बीते काफी वक्त से स्थाई कुलपति न होने का दंश झेल रहे उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय को जल्द ही स्थाई कुलपति मिलने वाला है। कुलपति चयन समिति का गठन करते हुए नए कुलपति के लिए आवेदन भी मांगे गए हैं। कुलपति पद के लिए इच्छुक अभ्यर्थी सात अक्टूबर तक आवेदन कर सकेंगे।

उत्तराखंड आयुर्वेद विवि बीते काफी वक्त से कई मामलों को लेकर चर्चाओं में रहा है। कभी पदों की विज्ञप्तियों में खामियों को लेकर तो कभी पेपर लीक मामला। इसके अलावा कई अन्य अनियमितताओं को लेकर हंगामें प्रदर्शन भी विवि झेल चुका है। इन सब के पीछे के कारणों पर गौर करें तो यहां स्थाई कर्मचारियों के अभाव में विवि की कार्यप्रणाली पर कई बार सवाल उठ चुके हैं। लेकिन अब इन सबपर अंकुश लगाने के लिए विवि में स्थाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में अब विवि कुलपति चयन समिति ने रिक्त पड़े विवि कुलपति के पद के लिए भी आवेदन स्वीकार किए हैं।
अभी तक कुलसचिव देख रहे थे कार्यभार
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति प्रो. एसपी मिश्रा को हटाने के बाद पद की जिम्मेदारी है एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सौदान सिंह को सौंपी गई थी। लेकिन, उनका कार्यकाल यहां पूरा हो गया था। जिसके बाद शासन ने उनका कार्यकाल आगे बढ़ाने के बजाय विश्वविद्यालय में बतौर कुलसचिव कार्य देख रहे डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी को कुलपति का कार्यभार सौंप दिया गया। तब से अभी तक वे बतौर प्रभारी कुलपति विवि की बागडौर संभाले हुए हैं।
विवि की कुलपति चयन समिति-2017 के सदस्य रजिस्ट्रार प्रो. अनूप गक्खड ने बताया कि विवि कुलपति के लिए आवेदन मांगे गए हैं। आवेदकों को अपने आवेदन कुलपति चयन समिति-2017 के नाम विवि को भेजने होंगे। इसके अलावा कई अन्य मानकों को भी पूरा करना होगा। उन्होंने बताया कि आवेदन के लिए आवेदन के पास बतौर प्रोफेसर न्यूनतम 10 वर्ष का शिक्षण अनुभव होना अनिवार्य है। इसके अलावा मौजूदा तैनाती स्थल अथवा विभाग से एनओसी भी प्राप्त कर विवि को भेजनी होगी। रिसर्च के क्षेत्र में कार्य, रिसर्च पेपर व शोध आदि उल्लेखनीय योगदान दिया होना चाहिए। इसके साथ ही अभ्यर्थी पर आपराधिक मामले दर्ज न हों, इसके लिए एक प्रमाण पत्र भी विवि में प्रस्तुत करना होगा। सभी दस्तावेज सेल्फ अटेस्टेड कर विवि को आवेदन के साथ भेजने होंगे। उन्होंने बताया कि आवेदक 7 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं।

श्रीकोट के बेस अस्पताल में नवजात बच्ची को टाॅयलेट में छोड़ गई मां

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मानवता को शर्मसार करने वाली घटना एक बार फिर सामने आई हैं।श्रीकोट के बेस हास्पिटल में एक नवजात शिशु को किसी ने अस्पताल के शौचालय में छोड़ दिया है।

जी हां, बेस अस्पताल श्रीनगर की यह घटना आज सुबह लगभग छः बजे की है जब हाॅस्पिटल प्रशासन के नोटिस में आया की अस्पताल के शौचालय से बच्चे की रोने की आवाज आ रही है। बच्ची की रोने की आवाज सुनकर जब अस्पताल के कर्मचारी वहां पहुंचे तो बच्ची वहां अकेली थी, छोड़ने वाले का कोई अता-पता नहीं था। खून से लथपथ बच्ची वहीं पैदा की गई, ऐसा प्रतीत हो रहा था क्योकि उसकी नाल भी नहीं कटी थी।अस्पताल के कर्मचारियो ने बच्ची को उठाया और उसकी साफ-सफाई की।

अस्पताल का कहना है कि प्रशासन के पास इस बच्ची की कोई जानकारी नहीं है, बच्ची किसकी है? किसने इसको जन्म दिया? यह सारे सवाल अभी भी बने हुए हैं। इस बाबत अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि अस्पताल के पास पिछले एक दिन मे किसी भी पेशेंट के डिलीवरी की कोई सूचना नही हैं, मतलब साफ है कि बच्ची को बाहर जन्म देने के बाद उसे अस्पताल में छोड़ दिया गय है।

इस बारे में डीएम पौड़ी सुशील कुमार को न्यूजपोस्ट ने अवगत कराया।

जानकारी के बाद डीएम ने बताया कि, “बच्ची अस्पताल के टाॅयलेट में मिली है, और पूरी तरह से स्वस्थ है।अभी बच्ची को अस्पताल प्रशासन और डाॅक्टरों की देखरेख में रखा गया है।इस संबंध में पुलिस ने केस दर्ज कर दिया है और इसपर इन्वेस्टिगेशन भी चल रही है।

डेंगू से पीड़ित सुनील ग्रोवर अस्पताल में भर्ती

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कपिल शर्मा के साथ विवादों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में रहे कॉमेडी कलाकार सुनील ग्रोवर इन दिनों डेंगू के वायरल बुखार की चपेट में आ गए हैं और मुंबई के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

सुनील ग्रोवर को पिछले सप्ताह अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां डाक्टरों ने उनकी हालत को बेहतर बताया है। डाक्टरों का कहना है कि सुनील ग्रोवर पूरी तरह से आराम कर रहे हैं और उनको अभी कुछ दिन अस्पताल में ही रखा जाएगा, ताकि वे डाक्टरों की निगरानी में रहें। उधर सुनील ग्रोवर इन दिनों अस्पताल में हैं और इधर कपिल शर्मा के अस्वस्थ होने की भी खबरें आ रही हैं। अस्वस्थता के चलते कपिल शर्मा ने अपने शो के कई एपीसोड की शूटिंग कैंसिल कर दी, जिसके चलते सोनी चैनल ने कपिल शर्मा शो को कुछ दिनों के लिए ब्रेक पर भेजने का फैसला कर लिया है।

कपिल शर्मा ने जब कलर चैनल पर अपना कॉमेडी शो शुरू किया था, तो गुत्थी के किरदार में सुनील ग्रोवर इस शो की पहचान बन गए थे। कपिल का शो जब कलर चैनल से सोनी चैनल पर शिफ्ट हुआ, तो सुनील ग्रोवर यहां डाक्टर गुलाटी के रोल में छा गए। कुछ वक्त पहले एक फ्लाइट में आपसी टकराव के चलते सुनील ग्रोवर कपिल के शो से अलग हो गए। इसके बाद से लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि सुनील ग्रोवर अपना नया शो शुरू करेंगे। सुनील ग्रोवर को फिर से कपिल के शो में लाने की कोशिश हुई, लेकिन सुनील ग्रोवर इसके लिए नहीं माने।