
एक ऐसा स्कूल जो स्लम के बच्चों के सपनों को दे रहा है शिक्षा के पंख

छात्रों के चरित्र निर्माण में योदगान दें शिक्षकः सीएम रावत
शिक्षक सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्य के विकास और विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अपना योगदान दें। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के 4,000 शिक्षकों को सीधे संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को स्वाध्याय के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि एक शिक्षक के एक घंटे के स्वाध्याय का परिणाम औसतन 160 घंटे का अध्यापन होता है।
मंगलवार को सचिवालय के सभागार शिक्षक दिवस पर राज्य के शिक्षकों से संवाद किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों की अपेक्षा प्राइवेट स्कूलों में अभिभावकों व शिक्षकों के रुझान पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रति बच्चे पर व्यय देश में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में सर्वश्रेष्ठ अध्यापक होने के बाद भी सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वास में कमी है। सरकारी शिक्षकों की सेवा शर्ते, वेतन इत्यादि भी प्राइवेट स्कूलों से बेहतर है। प्राइवेट स्कूलों में जहां औसतन 25 बच्चों पर एक अध्यापक होता है, वहीं सरकारी स्कूलों में 12 बच्चों पर एक अध्यापक होता है। उन्होंने राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों का आह्वान किया कि वे अपनी क्षमता एवं लगन से सरकारी विद्यालयों के प्रदर्शन को और बेहतर बनाएं। उन्होंने कहा कि राज्य में कुल मिलाकर 14,985 प्राइमरी स्कूल और 5088 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इसके अतिरिक्त 2259 माध्यमिक स्कूल हैं। प्राइमरी स्कूलों में 4,88,833 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, इनमें 2,22,792 बालक और 2,66,041 बालिकाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य के प्राइमरी स्कूलों में बालिकाओं के बढ़ते प्रतिशत पर संतोष व्यक्त किया लेकिन उन्होंने राज्य में बालिकाओं के अपेक्षाकृत कम लिंगानुपात पर चिन्ता भी व्यक्त की। उन्होंने शिक्षक समुदाय को इस दिशा में समाज को जागृत करने के लिए आगे आने की अपील की। सीएम ने कई स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं होने और कई स्कूलों में 10 से भी कम विद्यार्थी होने पर चिन्ता व्यक्त करते हुए विद्यालयों की क्लबिंग का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों की क्लबिंग करके हम शिक्षकों और अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने शिक्षक संगठनों से भी अपील की है कि वे सरकार और समाज को अपना रचनात्मक सहयोग दें। सरकार सभी शिक्षक संगठनों का सम्मान करती है और उनकी सभी मांगों एवं सुझावों को लेकर संवेदनशील है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक समुदाय के चुनाव, जनगणना जैसी विभिन्न लोक कल्याणकारी गतिविधियों में दिए जा रहे योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में ‘आधार योजना‘ और तकनीक के विस्तार से इन अतिरिक्त कार्यों में कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आगे आकर अपनी बात रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही वे mygov.in के उत्तराखण्ड चैप्टर पर अपने सुझाव दे सकते हैं। साथ ही वे [email protected] पर भी अपने सुझाव भेज सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी 13 जनपदों के शिक्षकों को सम्बोधित किया। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जनपद, ब्लॉक और तहसील के 114 स्वान सेन्टर, 94 कामन सर्विस सेन्टर, 13 जिला डायट केन्द्र और 13 जिला एनआईसी केंद्र जुड़े थे। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के शिक्षक भी सीधे जुड़े। सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय, अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह, शिक्षा सचिव चंद्रशेखर भट्ट, सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा आदि मौजूद रहे।
शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को किया सम्मानित
शिक्षक दिवस के अवसर पर मसूरी विधायक गणेश जोशी ने कैप्टन प्रतीक आचार्य राजकीय इंटर कॉलेज डोभालवाला में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर शिक्षकों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर विधायक जोशी ने देश के द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन की स्मृति पर पुष्पाजंलि अर्पित करते हुए सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएं दी। विधायक जोशी ने कहा कि हमारे देश में पहले संस्कृत को 12वीं तक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाता था लेकिन आज कक्षा आठवीं से संस्कृत को पढ़ाया ही नहीं जाता| उसकी अनिवार्यता को खत्म करते हुए उसे वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। विधायक जोशी ने कहा कि जिस प्रकार से संस्कृत की उपेक्षा की जा रही है ठीक उसी प्रकार से संस्कृति भी विलुप्त हो रही है।
विधायक जोशी ने विद्यार्थीयों को उनके अच्छे भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सदैव शिक्षा व शिक्षकों का सम्मान करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। विधायक जोशी ने कहा कि पूर्व में गुरुओं का आदर सर्वप्रथम किया जाता था। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एकलव्य ने अपना अंगूठा काटकर अपने गुरु दोणाचार्य को दे दिया था। वर्तमान में विद्यार्थी अपने गुरुओं के चरण स्पर्श तक नहीं करते।
विद्यालय प्रबंधन की तरफ से प्रधानाचार्य ने विधायक जोशी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान स्कूल प्रबंधन ने विधायक के समक्ष स्कूल की कुछ समस्याएं भी रखी। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य एसएस बिष्ट, भाजपा के युवा नेता सिकन्दर सिंह, सतेन्द्र नाथ, मोहन बहुगुणा, गोविन्द सिंह कठैत, अनुज रोहिला आदि उपस्थित रहे।
अगले पांच दिन तक मौसम पर्यटकों के लिए लाभकारी
अगर आप देवभूमि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा और यहां की खूबसूरत वादियों के दीदार का मन बना रहे हैं तो बेझिझक आ जाएं। मौसम विभाग ने प्रदेश का मौसम पर्यटकों के लिए लाभकारी बताया है।
गौरतलब हो कि प्रदेश में लगातार हो रही बारिश आफत बन गई थी। चारधाम यात्रा मार्ग सहित अन्य सड़के भारी वर्षा और मलबा आने से बार-बार अवरुद्ध हो रहीं थी| हालांकि अब सूबे में मौसम साफ है। मंगलवार से अगले पांच दिन तक मौसम बिल्कुल साफ और सफर के लायक है। मौसम विभाग विज्ञान केन्द्र देहरादून के मुताबिक अगले पांच दिन तक भारी वर्षा एवं आंधी-तूफान आने जैसी कोई संभावना नहीं है।
मौसम विभाग केन्द्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि पांच सितम्बर यानि मंगलवार से दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधियां 10 सितंबर तक कमजोर रहेंगी। ऐसे में पर्यटकों के लिए मौसम अनुकूल रहेंगे। इस अवधि के दौरान उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्री, पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुन्दरता का आनंद ले सकते हैं।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि मंगलवार को आंशिक रूप से लेकर आमतौर पर बादल छाये रहेंगे। उत्तराखण्ड में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम गर्जन के साथ वर्षा हो सकती है। राजधानी देहरादून में आंशिक रूप से बादल छाये रहेंगे। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के लगभग रहेगा।
प्रदेश के 28 शिक्षक ‘गवर्नर्स टीचर्स अवार्ड’ से सम्मानित
शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल ने प्रदेश के विद्यालयों के चयनित शिक्षकों को ‘गवर्नर्स टीचर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले शिक्षकों में प्रत्येक जिले से चयनित माध्यमिक शिक्षा व प्राथमिक शिक्षा के एक-एक शिक्षक, जबकि संस्कृत शिक्षा के लिए राज्य स्तर पर चयनित दो शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
प्रदेश के कुल 28 शिक्षकों को शिक्षा में नवाचार, नामांकन, बेहतर परीक्षा परिणाम, सामाजिक कार्यों, विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता आदि में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित किए गए शिक्षकों को 10-10 हजार रुपये की राशि के साथ ही राज्यपाल की ओर से चार-चार पुस्तकें भी भेंट की गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों के संकलन ‘मन की बात’, महात्मा गांधी की ‘माई एक्सपेरीमेंट विद ट्रूथ’, प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की ‘डिस्कवरी आॅफ इंडिया’ व पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. एस.राधाकृष्णन की ‘लीविंग विद द परपज’ पुस्तकें भेंट की गईं।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों के बेहतरीन काम को सार्वजनिक मान्यता देने व अन्य शिक्षकों को प्रेरणा मिल सके, इस उद्देश्य से वर्ष 2015 में राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल द्वारा ‘गवर्नर्स टीचर्स अवार्ड’ प्रारम्भ किए गए थे। इस वर्ष से संस्कृत शिक्षा के भी दो शिक्षकों को सम्मानित किए जाने की शुरुआत की गई है। राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया गया।
राज्यपाल ने पूर्व राष्ट्रपति व महान शिक्षाविद डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डाॅ.राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक व नीतिज्ञ थे। वे स्वामी विवेकानंद के बाद दूसरे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने भारतीय दर्शन व संस्कृति की जानकारी, प्रभावकारी तरीके से पूरे विश्व को प्रदान की।
शिक्षक दिवस की बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक शिक्षा देता है, जबकि गुरु ज्ञान देता है। प्रत्येक शिक्षक को गुरु बनने का प्रयास करना चाहिए। जब शिक्षक गुरु बनकर अपने विद्यार्थियों को ज्ञान देेंगे तो बच्चे स्वतः ही उनका सम्मान करेंगे और आजीवन उनके प्रति कृतज्ञ रहेंगे। राष्ट्रनिर्माण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षक की होती है। वर्ष 2030 तक भारत में 40 करोड़ युवा होंगे। इन युवाओं को सही दिशा, शिक्षक ही दिखा सकते हैं। शिक्षकों को किताबी पाठ्यक्रम से ऊपर उठना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए जिला स्तर पर टीचर्स रिफ्रेशर कोर्स या इसी प्रकार की गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जा सकती हैं, जहां कि शिक्षकों को नई शिक्षण विधियों से परिचित कराया जाए। बच्चों में वैज्ञानिक व जिज्ञासु प्रकृति विकसित करने के प्रयास करने चाहिए। शिक्षा को रोचक बनाने के लिए ई-लर्निंग व मल्टीमीडिया एजुकेशन का भी प्रयोग करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि आज इंटरनेट तक बच्चों की आसान पहुंच है। इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि बच्चे इंटरनेट का किस प्रकार प्रयोग कर रहे हैं। ब्लू-व्हेल जैसे इंटरनेट गेम्स पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इन घटनाओं पर रोक के लिए जरूरी है कि शिक्षकों का बच्चों के साथ निरंतर संवाद हो। बच्चे अपने आप को अकेला महसूस न करें। शिक्षक बच्चों की मनोदशा की जानकारी रखें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि समाज को नई दिशा दिखाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए पुस्तकीय ज्ञान के अतिरिक्त भी विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान की जाए। गवर्नर्स अवार्ड में संस्कृत शिक्षकों को भी पहली बार पुरस्कार की श्रेणी में शामिल किये जाने पर मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृत संस्कारों को प्रदान करने वाली एक सात्विक भाषा है। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति श्री एस.राधाकृष्णन को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि श्री राधाकृष्णन ने 40 वर्षों तक शिक्षक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। आज आवश्यकता है कि शिक्षक अपने ज्ञान के भण्डार में वृद्धि करते रहें। जिससे नव भारत निर्माण के लिए युवाओं को अच्छी शिक्षा और संस्कार मिले।
संगठित आपराधिक गैंग्स के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाईः अशोक कुमार
मंगलवार को अशोक कुमार,अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड ने रिद्धिम अग्रवाल एसएसपी एसटीएफ के साथ एसटीएफ/साईबर पुलिस स्टेशन के अधिकारयों के साथ एक बैठक कर एसटीएफ/साईबर क्राइम पुलिस स्टेशन की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श किया। अशोक कुमार ने बताया की बैठक की कुछ मुख्य बातेंः
- वर्तमान में राज्य में अपराधियों के 6 गैंग सक्रिय है जिनके कुछ सदस्य जेल में है तथा कुछ सक्रिय सदस्य जमानत पर बाहर है। जमानत पर छूटे सदस्यों को चिन्हित कर उनकी जमानत को रद्द कराने तथा जमानतियों के विरुद्ध भी वैधानिक कार्यवाही की जाये। साथ ही गैंगस्टर एक्ट के अन्तर्गत सक्रिय गैंग के सदस्यों की सम्पत्ति जब्त कराने की कार्यवाही की जाये।
- इनामी बदमाशों की सूची को अद्यावधिक कर लम्बे समय से फरार अपराधियों पर इनाम की राशि बढ़वाये जाने की कार्यवाही करने के साथ ही रु0 5000/- से अधिक के इनामी बदमाशों जिनकी संख्या लगभग 40-50 है, की गिरफ्तारी हेतु एसटीएफ को भी निर्देशित किया गया।
- आज के परिदृश्य में समाज में ड्रग्स एक बड़ी समस्या बन कर उभरा है अतः ड्रग्स माफियाओं का चिन्हीकरण कर उनके विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्यवाही की जाये।
- साईबर क्राइम के मामलों में जैसे एटीएम एवं बैंक फ्राॅड, सोशल मीडिया पर महिलाओं को परेशान करने आदि में तत्काल एफआरआई दर्ज कर अपराधियों की गिरफ्तारी कर कड़ी वैधानिक कार्यवाही की जाये जिससे पीड़ित को न्याय मिल सके।
- एसटीएफ तथा जनपदीय एस0ओ0जी0 के मध्य समन्वय बढ़ाने की उद्देश्य से उनके मध्य मासिक बैठक की जाये जिससे उनके कार्य की गुणवत्ता में वृद्धि होने के साथ-साथ अपराधों का शीघ्र अनावरण किया जा सके।
- एसटीएफ व साईबर पुलिस स्टेशन के कार्यों की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ द्वारा मासिक समीक्षा तथा अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था द्वारा त्रैमासिक समीक्षा करने का निर्णय लिया गया ।
राज्य सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका,बनी रहेगी पुरानी बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति
बद्रीनाथ और केदारनाथ मन्दिर समिती को दोबारा भंग करने के सरकार के फैसले को गलत मानते हुए आज न्यायाधीश सुधांशू धूलिया की एकलपीठ ने पूरी तरह से निरस्त कर दिया है ।समिति के सदस्य और याचिकाकर्ता दिवाकर चमोली व अन्य ने सरकार द्वारा समिती भंग करने के खिलाफ उच्च में याचिका दायर की थी जिसपर न्यायालय ने अंतिम आदेश पारित करते हुए श्री.बद्रीनाथ और केदारनाथ मन्दिर समिती को बहाल कर दिया है ।
याची ने सरकार पर असंवैधानिक तरीके से पहली बार समिती को भंग करने का आरोप लगाया था । पूर्व में सरकार ने एक अप्रैल 2017 को पहली बार सचिव धर्मस्व शैलेश बगौली को प्रशासक बनाया था ।
आपको बतादें कि राज्य सरकार ने अप्रैल के महीने में बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को भंग कर दिया था। इसके बाद समिति के कुछ सदस्य कोर्ट पहुंचे और कोर्ट ने 30 मई को राज्य सरकार को समिति को बहाल करने के आदेश दिये थे। हांलाकि 8 जून को सरकार ने स्पेशल क्लाॅज का हवाला देते हुए समिति को दोबारा भंग कर दिया था। हाई कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया।राज्य सरकार ने समिति एक्ट के क्लाॅज 2 ए, सेक्शन 11 का हवाला देते हुए इसे दोबारा भंग किया था। भंग करने करने के प्रमुख कारणों में से एक था सात मनोनीत सदस्यों का चयन जो कि सरकार के अनुसार समिति के संविधान के सेक्शन 5 के तहत नहीं हुआ। हांलाकि याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ये कारण वैध नहीं है और समिति के किसी भी काम काज पर आज तक कोई विवाद नहीं खड़ा हुआ है।
गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार के समय गठित हुई समिति में ज्यादातर सदस्य और पदाधिकारी कांग्रेस से ताल्लुक रखते हैं जिसमें सबसे पहले समिति के चेयरमैन उस समय के कांग्रेसी विधायक गणेश गोदियाल हैं।
मनोज रावत को क्यों आती है अपने को विधायक कहने में शर्म
एक तरफ जहां लोग राजनीति में आने के लिये न जाने क्या-क्या पापड़ बेलते हैं, वहीं उत्तराखंड के केदारनाथ विधायक मनोज रावत को इन दिनों अपने आपको विधायक कहने में शर्म आ रही है। केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने अपने फेसबुक के माध्यम से लोगों से कहा कि उन्हें खुद को लोगों का जनप्रतिनिधि कहने में शर्म आती है, दरअसल रावत ने अपने क्षेत्र की विधवाओं का दर्द बयां किया है।
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा:
“उम्र 100 साल से ऊँपर ,15 साल की उम्र में विधवा, दो बार आवेदन किया पर विधवा पेंशन नही मिल पाई। दशज्यूला काण्डई का एक गांव है क्यूड़ी, वंहा की कृष्णा देवी, की उम्र 100 साल से ऊँपर है, पति नरेंद्र सिंह, जम्मू- कश्मीर में आजादी से पहले रेलवे में काम करते थे। तब वंही मर गए। जब पति मरे, कृष्णा देवी की उम्र 15-16 साल थी और जीवन काटने के लिए कुछ महीने का एक बेटा था। तब पति की पेंशन भी नही लगी। कही सरकारी विधवा पेंशन योजनाएं आयी, कही सरकारें बनी, कही जनप्रतिनिधि चुने गए पर 100 साल की ओर बड़ रही कृष्णा देवी की आज तक पेंशन नही लग पाई। कुछ साल पहले बेटे भी मर गए। अब परिवार में दो विधवाएं हैं। 3 पोतियों की शादी हो गयी।
बगल पर शंकरी देवी के पति नायक धीर सिंह भी 1971 के युद्ध में शहीद हो गए उनके बेटे भी फौज को नौकरी के लिए चिट्ठी लिखते हुए बहुत कम उम्र में मर गए। शंकरी देवी के पति के शहीद होने के 4 दिन बाद उनका ये अभागा बेटा मुन्ना पैदा हुआ था। फौज ने भी शहीद सैनिक के परिवार के लिए कुछ नही किया।यानि एक परिसर में रहने वाले 2 परिवारों में दो- दो विधवाएं।
अब नई आफत, इस बरसात में इन 4 विधवाओं का मकान टूट रहा है। उसी टूटे मकान में ये 4 विधवाएं एक ओर आपदा के इंतजार कर रही हैं।मुझे इन 4 विधवाओं के समूह से मिल कर ओर उनकी हालात देखकर स्वयं को जनप्रतिनिधि बताते हुए शर्म आ रही है।”
विधायक मनोज रावत की इस पोस्ट से एक बात तो साफ है कि सिस्टम के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। अगर किसी विधायक को अपनी बात फेसबुक के माध्यम से करनी पड़ रही है तो अाम अादमी अपना दुख कहा बयान करें?
नंदा को है मां का इंतजार
बीते सोमवार को किसी ने नवजात बच्ची को बेस अस्पताल श्रीकोट के टॉयलेट में छोड़ दिया था।बच्ची के मां का अब तक कोई पता नहीं हैं लेकिन बच्ची से मिलने अस्पताल में कोई ना कोई आता रह रहा है।
गौरतलब है कि बेस अस्पताल श्रीकोट में कल किसी ने अपनी बच्ची टॉयलेट में छोड़ कर खुद लापता हो गया था और प्रशासन को इसका पता तब चला जब बच्ची के रोन की आवाज करीब 6 बजे आई।खून से लथपथ बच्ची वहीं पैदा की गई, ऐसा प्रतीत हो रहा था क्योकि उसकी नाल भी नहीं कटी थी।अस्पताल के कर्मचारियो ने बच्ची को उठाया और उसकी साफ-सफाई की।अस्पात कर्मचारीयों ने बच्ची को उठाया और अपनी देखरेख में रखा।
बच्ची को मां नंदा का नाम दिया गया है।उत्तराखंड में अराध्य मा नंदा का नाम मिलना किसी के लिए भी सौभाग्य की बात होगी लेकिन इस बच्ची को नाम देने के पीछ बहुत बड़ कारण है।एक नवजात बच्ची जिसे पैदा होते ही अपनी मां से अलग होना पड़ा उसके लिए इसे बड़े दुख की बात क्या होगी।इतना कठोर दुख सहकर भी नंदा खुश है और ङस रही हैं।
आपको बतादें कि नंदा को गोद लेने के लिए बहुत से लोग फोन कर रहे हैं और कुछ तो उससे मिलेन अस्पताल तक भी आए।लेकिन अभी अस्पताल प्रशासन और नंदा दोनो ही नंदा की असली मां का इंतजार कर रहे हैं।आने वाले दिनों में नंदा को उसकी मां का इंतजार हैं और देखना यह है कि नंदा की मां का दिल कब पिघलता है और वह अस्पताल आकर अपनी बेटी को लेकर जाती है।इसे हमने नंदा का नाम दिया नंदा इस प्रदेश की आराध्य देवी है। ये बच्ची भी किसी देवी से कम नहीं।
उत्तराखंड में कमजोर पड़ा मानसून
उत्तराखंड में मानसून के कमजोर पड़ने के साथ ही मौसम भी साफ हो गया है। इसके बावजूद यात्रियों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। पहाड़ों से गिरते मलबे से तो जान जोखिम में है ही, बरसाती नदियों का उफान भी जिंदगी पर भारी पड़ रहा है।
रविवार देर रात सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद बदरीनाथ के पास गोविंदघाट में मलबे से बंद हाईवे खोलने में सफलता हासिल कर ली। इसके बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की निगहबानी में हाईवे पर फंसे वाहनों में स्लाइडिंग जोन पार कराया गया। सोमवार से हाईवे पर यातायात पूरी तरह सुचारु हो गया है। देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब मानसून की रफ्तार मंद पड़ चुकी है। हालांकि बुध से शुक्रवार तक कुछ क्षेत्रों में मध्यम बारिश के आसार बन रहे हैं।
दूसरी ओर सोमवार सुबह ऋषिकेश के पास बहने वाली बरसाती नदी बीन के उफान में एक बस के फंसने से 30 सवारियों की सांस अटक गई। बताया गया कि नदी पर बने रपटे से गुजरते समय एक बाइक सवार को बचाने के चक्कर में चालक बस पर से नियंत्रण खो बैठा और बस के दो टायर रपटे उतर गए। आसपास के ग्रामीणों ने तत्काल ट्रैक्टर के जरिये सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया। हालांकि कुछ देर बाद बहाव कम होने पर बस को भी निकाल लिया गया। वहीं कुमाऊं में टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे बारिश में खतरनाक साबित हो रहा है। मार्ग पर आधा दर्जन स्थानों पर नए डेंजर जोन उभर आए हैं। यहां पर पहाड़ों से गिर रहे बोल्डर यात्रियों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।





























































