बुधवार को मसूरी विधायक गणेश जोशी ने अपने कार्यालय में हंस फाउंडेशन के सहयोग से उपचार, उच्च शिक्षा एवं निर्धन परिवारों की कन्याओं के विवाह के लिए 21.95 लाख रुपये की धनराशि के 32 चैकों का वितरण किया। इस अवसर पर हंस फाउंडेशन के उत्तराखण्ड राज्य प्रभारी पदमेन्द्र सिंह बिष्ट भी उपस्थित रहे।
मसूरी विधायक गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड रत्न से सम्मानित हंस फाउंडेशन की संस्थापक परम पूज्य माता मंगला के आर्शीवाद से अब तक मसूरी विधानसभा क्षेत्र के लगभग 160 से अधिक जरूरतमंद लोगों को एक करोड़ पैंसठ लाख रुपये से अधिक धनराशि की चिकित्सा एवं अन्य मदों में सहयोग के लिए दी जा चुकी है।
जोशी ने बताया कि निर्धन आय वर्ग के कई परिवार जिनके परिवारजनों या सगे संबंधियों का इलाज विभिन्न चिकित्सालयों में जारी था लेकिन वह इस इलाज का खर्च वहन नहीं कर पा रहे थे। ऐसे लोगों को हंस फाउंण्डेशन की ओर से आश्वस्त किया गया है कि वास्तविक जरूरतमंदों की सहायता हेतु वह हमेशा सहयोग करेंगे।
विधायक जोशी ने हंस फाउंडेशन एवं हंस कल्चरल सेंटर नई दिल्ली का आभार व्यक्त किया। विधायक जोशी ने कहा कि हंस फाउंडेशन के सहयोग से ही देहरादून एवं आस-पास के क्षेत्रों में शहीद द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है।
हंस फाउंडेशन के उत्तराखण्ड राज्य प्रभारी पदमेन्द्र सिंह बिष्ट ने बताया कि हंस फाउंडेशन के माध्यम से राज्य सरकार को भी प्रत्येक मद में आवश्यक मदद की जा रही है। प्रभारी बिष्ट ने कहा कि माता मंगला एवं हंस फाउंडेशन लगातार ही गरीब परिवारों की सहायता के लिए तत्पर रहता है।
सहायता के रूप में इलाज हेतु मोनिका कनौजिया, संध्या देवी, जोतो सिंह, शांति देवी, विनोद कुमार, विक्रम सिंह, बासवानन्द जोशी, प्रमोद कुमार उप्रेती, सरोज देवी, सड़क राम, विकास कुमार, नवीन भण्डारी, सम्पत्ति देवी तथा कन्याओं के विवाह के लिए मुन्नु लाल, अर्चना खान, मदन लाल, निहारिका बिष्ट, कुसुम बिष्ट एवं जयवीर सिंह, सुरेश सिंह, अमीचन्द रमोला, सूर्य सिंह पवांर, दलबीर सिंह दानू, पूनम, विजय कुमार, आफताब हुसैन, सीता देवी, कमला गैरोला, दीपा शाह, धर्म सिंह राणा, राकेश सोनकर, आशू देवी को सहायतार्थ एवं उच्च शिक्षा के लिए धनराशि प्रदान की गई।
सभी लाभार्थियों ने मसूरी विधायक गणेश जोशी एवं हंस कल्चरल सेंटर की चेयरमैन माता मंगला का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर भाजपा मसूरी मण्डल से महामंत्री दीपक पुण्डीर, पार्षद भूपेन्द्र कठैत, जगदीश पयाल, नरेन्द्र मेलवान आदि उपस्थित रहे।
हंस फाउंडेशन के सहयोग से विधायक जोशी ने की जरूरतमंदों की मदद
बंद कमरों में खराब हो रहे उपकरण, हवा हो रहे आयुष प्रदेश बनाने के दावे
देवभूमि उत्तराखंड को आयुष प्रदेश बनाने का सरकार के दावे हवा हवाई साबित हो रहा है। तमाम योजनाएं और सुविधाएं बंद कमरों व अलमारियों में धूल फांक रही है। यह हम नहीं बल्कि आयुष क्षेत्र में प्रदान की जाने वाली योजनाओं के ताजा हालात इसकी तस्दीक कर रहे हैं। आलम यह है कि नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत प्रदेशभर की आयुष विंग के लिए खरीदे गए पंचकर्म और फीजियोथेरेपी के उपकरण बिना खुले ही खराब हो रहे हैं।
प्रदेश में आयुष को बढ़ावा देने और लोगों को आयुष चिकित्सा की ओर जागरूक करने के मकसद से कई यूनिटों को विकसित किया गया। सरकार ने आयुष क्षेत्र के प्रचार प्रसार के लिए कई योजनाएं भी शुरू की। अब यह तमाम योजनाएं और सुविधाएं अव्यवस्थाओं को दंश झेल रही हैं। इतना ही नहीं खोले आयुष के माध्यम से जन स्वास्थ्य की अलख जगाने के लिए सरकारी अस्पतालों में खोली गई पंचकर्म यूनिटों का हाल बुरा है। यहां एनएचएम की सहयता से जो उपकरण उपलब्ध कराए गए वे बंद कमरों में सड़ रहे हैं। मौजूदा स्थिति यह है कि देहरादून में कालसी, पिथौरागढ़ में वड्डा एवं मुंसियारी। टिहरी में नरेंद्रनगर आदि जगहों में आयुष विंगों में नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत खरीदे गए पंचकर्म एवं फीजियोथेरेपी के उपकरण बिना खुले ही खराब हो रहे है। यही हाल बागेश्वर, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग और चमोली आदि जनपदों में भी है।
न चिकित्सक – न दवाएं, नाम की सुविधाएं
प्रदेशभर में स्थापित आयुष यूनिटों की बात करें तो यहां नाम को ही यूनिट खोली गई। विभाग और सरकारी दावों की पोल इसी बात से खुलती हैे कि इन यूनिटों को खोलने के बाद यहां चिकित्सकों की व्यवस्था तक नहीं की गई। अधिकांश पंचकर्म यूनिटों में चिकित्सक हैं ही नहीं। यूनिटों में पंचकर्म सहायक तक नहीं हैं। इतना ही नहीं विभाग यूनिट में सीमित दवाएं ही भेजता है, लिहाजा दवाइयों का भी टोटा बना रहता है। कई बार स्थिति यह होती है कि मरीज को बाहर की दवाइयां लिखकर दी जाती हैं। यूनिटों की संख्या पर गौर करें तो प्रत्येक जनपद में तीन से चार पंचकर्म यूनिट हैं। इनमें से कुछ अपग्रेडेड यूनिट हैं। कुछ को छोड़ बांकि सारी यूनिटों पर ताला पड़ा है।
क्या है पंचकर्म
शरीर की शुद्धि की प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति है पंचकर्म। आयुर्वेद के अनुसार शोधन चिकित्सा एवं शमन चिकित्सा दो प्रकार होते हैं। जिन रोगों से मुक्ति औषधियों द्वारा संभव नहीं होती, उन रोगों के कारक दोषों को शरीर से बाहर कर देने की पद्धति शोधन कहलाती है। यही शोधन चिकित्सा पंचकर्म है। पंचकर्म विधि से शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त बनाया जाता है। इससे शरीर की सभी शिराओं की सफाई हो जाती है और शरीर के सभी सिस्टम ठीक से काम करने लगते हैं। पंचकर्म के जरिए रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है।
डॉ अरुण कुमार त्रिपाठी, निदेशक आयुर्वेद ने कहा कि जिन यूनिटों में उपकरण रखे-रखे खराब हो रहे हैं। वहां से उपकरण ऐसी यूनिटों में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां उनका उपयोग हो सके। इसे लेकर जिलों के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।
दो जगह सेवाएं नहीं दे सकेंगे निजी संस्थानों के शिक्षक, संस्थानों पर भी नकेल
श्री देव सुमन यूनिर्विटी से जुड़े निजी संस्थानों को अब अपनी फैकल्टी का आधार और पैन नंबर विवि को देना है। विश्वविद्यालय के इस कदम के बाद ऐसे शिक्षकों के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली है, जो एक साथ दो-दो संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसके अलावा निजी संस्थानों पर नकेल कसते हुए विवि ने सरकारी कॉलेजों की कर्ज पर ही निजी संस्थानों में वेतनमान निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश की हायर एजुकेशन के हालात सुधारने के मकसद से श्री देव सुमन विश्वविद्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। विवि ने निजी संस्थानों पर शिकंजा कसते हुए संस्थानों में नियुक्त फैकल्टी का वेतनमान सरकारी कॉलेजों की तर्ज पर निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, संस्थानों में पढ़ा रहे शिक्षकों का पैन कार्ड और आधार नंबर की जानकारी भी विवि को भेजने के निर्देश दिए हैं। इस कदम के बाद ऐसे शिक्षक जो दो-दो संस्थानों में पढ़ाने का कार्य कर रहे थे, वे केवल एक ही संस्थान में अपनी सेवाएं दे पाएंगे। दरअसल, आधार और पैन की जानकारी विवि से साझा होने के बाद संस्थानों को वेतन आदि की जानकारी भी विवि को देनी होगी। ऐसे में वो शिक्षक पकड़ में आ जाएंगे जो दो संस्थानों से वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
श्री देव सुमन विश्वविद्यालय के वीसी डॉ उदय सिंह रावत ने बताया कि प्राइवेट संस्थानों में वेतन कम होने के चलते कई फैकल्टी एक से ज्यादा निजी संस्थानों को सेवा दे रहे हैं, जिससे शिक्षा पर भी असर पड़ रहा है। इसके लिए विवि ने निजी संस्थानों को अपनी फैकल्टी को सरकारी कॉलेजों की भांति निर्धारित न्यूनतम वेतन 35 हजार तक देने के भी निर्देश जारी किए हैं। जिससे फैकल्टी को परेशानी भी न हो। इसके साथ ही सभी फैकल्टी के लिए बैंक अकांउट खोलना भी जरूरी होगा। साथ ही हर इंस्टीट्यूट को सभी नियमों को सख्ताई से पालन करने को कहा गया है। जिसमें फैकल्टी को नेट या पीएचडी में से एक योग्यता को भी अनिवार्य किया गया है। बतादें कि श्री देवसुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में 28 सरकारी और 120 निजी संस्थान संबद्ध है
छात्र संघ ने ड्रेस कोड का किया विरोध
स्थानीय राजकीय महाविद्यालय में छात्रसंघ पदाधिकारियों ने दूसरे दिन विश्वविद्यालय में ड्रेस कोड लागू किए जान के विरोध की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
छात्र संघ के पदाधिकारियों ने महाविद्यालय के प्रधानाचार्य को दिए गए ज्ञापन में कहा कि 51 प्रतिशत छात्र-छात्राओं की सहमति के पश्चात ड्रेस कोड लागू किए जाने की बात गले नहीं उतर रही है, जिससे छात्र-छात्राओं मे रोष उत्पन्न हो रहा है।
पदाधिकारियों द्वारा दिए गए पत्र मे कहा ‘शिक्षा मंत्री के दिए गए आदेश पर छात्रों की सहमति नहीं बन पा रही है लेकिन शिक्षा मंत्री द्वारा स्पष्ट कर दिया गया 51 प्रतिशत छात्र छात्राओं की सहमति के बाद भी ड्रेस कोड लागू की जाएगी जबकि छात्र संघ के पदाधिकारियों ने सभी कक्षा में छात्र-छात्राओं से बातचीत की, और उनकी सहमति जाननी चाही। कॉलेज में मात्र चार से पांच प्रतिशत छात्र-छात्रा ही ड्रेस कोड का समर्थन कर रहे हैं ऐसे मे ड्रेस कोड लागू किया जाना छात्र हित में नहीं है।’
अब आएगी अनिल कपूर की बायोग्राफी
करण जौहर से लेकर शत्रुघ्न सिन्हा और ऋषि कपूर की बायोग्राफी आने के बाद इस कड़ी मे अब अनिल कपूर का नाम जुड़ने जा रहा है। खबर है कि अनिल कपूर जल्दी ही बायोपिक लिखने जा रहे हैं।
हाल ही में 28 जुलाई को उनकी फिल्म मुबारकां रिलीज हुई, जिसने बाक्स आफिस पर बहुत अच्छा कारोबार नहीं किया लेकिन अनिल कपूर के काम की हर किसी ने तारीफ की। इसी सप्ताह अनिल कपूर की नई फिल्म फन्ने खां की शूटिंग शुरू हुई है, जिसमें वे 17 सालों के बाद ऐश्वर्या राय के साथ काम करने जा रहे हैं, लेकिन फिल्म में वे दोनों जोड़ीदार नहीं बने हैं।
अनिल कपूर की बायोग्राफी को लेकर जानकारी मिल रही है कि उनके करीबी दोस्त और मशहूर पत्रकार खालि मोहम्मद ये बायोग्राफी लिख रहे हैं, जिसका काम शुरू हो चुका है। अनिल कपूर का कहना है कि वे अपनी बायोग्राफी में अपनी 25 साल से लंबी फिल्मी यात्रा की यादों को समेटने की कोशिश करेंगे, लेकिन इसमें कोई अफेयर या विवाद की बात नहीं होगी।
23 साल की उम्र में 1984 में अनिल कपूर ने हमारे तुम्हारे फिल्म से अपने कैरिअर की शुरुआत की थी। उनके कैरिअर की प्रमुख फिल्मों में रामलखन, परिंदा, लम्हें, किशन कन्हैया, मि. इंडिया, बीवी नंबर वन, नो एंट्री, वेलकम रही हैं। उन्होंने अमेरिकन सीरिज 24 की हिंदी रुपांतर भी किया है, जिसे काफी पसंद किया गया। चर्चा है कि अनिल कपूर की बायोग्राफी इस साल के अंत तक पूरी होगी।
त्रियुगीनारायण में शुरू हुई ‘केदारनाथ’ की शूटिंग
हिंदी फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग मंगलवार से रुद्रप्रयाग जिले के सीमांत गांव त्रियुगीनारायण में शुरू हो गई। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहले दिन फिल्म की नायिका सारा अली खान पर दृश्य फिल्माए गए। फिल्म की शूटिंग को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है।
केदारनाथ आपदा में अस्तित्व खो चुकी रामबाड़ा चट्टी का सैट त्रियुगीनारायण में तैयार किया गया है। शूटिंग के पहले दिन फिल्म की नायिका सारा अली खान, जो कि केदारनाथ दर्शनों को आई है और आपदा में फंस जाती है, पर दृश्य फिल्माए गए। शूटिंग के लिए जिला पुलिस की ओर से भारी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। त्रियुगीनारायण में बीस दिन तक शूटिंग होनी है। हालांकि परिस्थितियों के हिसाब से दिन बढ़ाए भी जा सकते हैं।
इसके बाद सोनप्रयाग, गौरीकुंड, केदारनाथ, चोपता व केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी लगभग एक महीना शूटिंग होगी। शूटिंग को लेकर स्थानीय लोगों में भारी उत्साह है। त्रियुगीनारायण गांव के लोग फिल्म यूनिट का भरपूर सहयोग कर रहे हैं। स्थानीय निवासी राजेश भट्ट का कहना है कि फिल्म की शूटिंग से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। वहीं, पुलिस अधीक्षक पीएन मीणा ने कहा कि शूटिंग में कोई व्यवधान न हो, इसके लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।
मोटर खराब होने पर रुकी शूटिंग
शूटिंग के दौरान भारी बारिश का सीन दिखाया जा रहा था, लेकिन बीच में ही बारिश करने वाले फव्वारों से पानी आना बंद हो गया। पता चला कि मोटर खराब होने से यह व्यवधान आया है। इस पर निर्माता अभिषेक कपूर ने कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। बाद में केदारनाथ पैदल मार्ग पर जा रही यात्रियों की भीड़ का फिल्मांकन किया गया।
धूमधाम से मनाई जाएगी पंत जयंती
जिलाधिकारी दीपक रावत ने 10 सितम्बर को भारत रत्न पं. गोविन्द बल्लभ पंत जयंती को समारोह पूर्वक मनाये जाने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने इस दिन प्रातः 10ः30 बजे पन्त पार्क निकट भल्ला काॅलेज देवपुरा तिराहे पर समस्त गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पत्रकारों की उपस्थिति में पं.गोविन्द बल्लभ पंत की प्रतिमा पर माल्यापर्ण तथा व्याख्यानमाला कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना निर्धारित किया।
इस उपलक्ष्य में ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के आॅडीटोरियम में स्कूलों में वाद-विवाद, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताएं कराई जायेंगी, एवं शिक्षा विभाग के माध्यम से स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।
इस अवसर पर नगर के मार्गों, घाटों के आस-पास एवं पार्कों में वन विभाग एवं उघान विभाग द्वारा वृक्षारोपण किया जायेगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुष्ठ आश्रमों, मेला एवं जिला चिकित्सालयों में गरीब, असहाय एवं बीमार व्यक्तियों को फल वितरण किया जायेगा। समस्त निकायों के द्वारा नगर में मलिन बस्तियों को चिन्हित कर अभियान के तौर पर समुचित सफाई, झाड़ी कटान, चूना झिड़काव, नालियों आदि की सफाई की व्यवस्था की जायेगी।
शिकायत पर ग्राम प्रधान को नोटिस जारी
सहसपुर की ग्राम प्रधान को विभिन्न योजनाओं के निर्माण में मनरेगा भुगतान की गड़बड़ियों को लेकर नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर जावाब मांगा गया है। जिला विकास अधिकारी पीके पांडेय ने सुरेश कुमार निवासी सहसपुर ने मुख्यमंत्री को शिकायत कर सहसपुर ग्राम प्रधान को विभिन्न योजनाओं के निर्माण कार्यों में धांधली करने का आरोप लगाया। उनके शिकायत पर सीएम ने जांच के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। जांच समिति ने मौके पर टीचर कॉलोनी में सीसी मार्ग के निर्माण के लिए धनराशी आहरित किये जाने के बाद भी निर्माण कार्य नहीं हुआ। इसके अलावा मनरेगा कार्यों में गलत तरीके से भुगतान की शिकायतें जांच में पायी गयी है। जिसमें मनरेगा मजदूरों ने स्पष्ट रूप से कहा कि मनरेगा में उनके द्वारा कोई कार्य नहीं किया गया। इसके बावजूद उनके खाते में मनरेगा मजदूरी भेजी गयी। जिसे बाद में उनसे वापस लिया गया। इसके अलावा कई अन्य मजदूरों ने भी इस तरह की शिकायतें की हैं। मुख्य विकास अधिकारी पांडेय ने ग्राम प्रधान को एक सप्ताह के अंदर नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया है। समय पर जवाब न दिए जाने पर जिला प्रशासन प्रधान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा।
बगैर वर्दी मिले तीन डाॅक्टरों का एक दिन का वेतन काटा
श्रीनगर मेडिकल कालेज में वार्ड ड्यूटी कर रहे दो जूनियर रेजीडेंट और एक प्रशिक्षु डाक्टर के वर्दी में न मिलने पर एक दिन का वेतन काट दिया गया।
मंगलवार को कालेज प्राचार्य प्रोफेसर डा. चंद्रमोहन सिंह रावत निरीक्षण को पहुंचे तो उन्हें तीन डाक्टर वर्दी पहने नहीं मिले, जबकि एक प्रशिक्षु फार्मेसिस्ट की वर्दी पर नेमप्लेट नहीं लगी मिली। प्राचार्य ने डाक्टरों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। फार्मेसिस्ट को चेतावनी देकर छोड़ा गया।
प्राचार्य ने सभी विभागाध्यक्षों को ड्रेस कोड में कतई ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए। वार्डों में तीमारदारों की संख्या अधिक होने पर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। कहा कि एक मरीज के साथ एक बार में एक से ज्यादा लोग नहीं रुकने चाहिए। जच्चा-बच्चा वार्ड में सफाई व्यवस्था के संबंध में भी दिशा-निर्देश जारी किए।
प्राचार्य ने बेस अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड सैपरेशन यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो पाने के कारणों के बारे में जानकारी लेकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. सुरेश जैन और ब्लड बैंक प्रभारी डा. सतीश कुमार को इसकी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा। डा. रावत ने मेडिकल कालेज के हास्टलों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने एमबीबीएस प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्रों से फीडबैक भी लिया।
राजधानी को खुले में शौच मुक्त करने को लेकर ज्ञापन
राजधानी देहरादून को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए ‘देवभूमि जनसेवा’ समिति के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को मंगलवार को एक ज्ञापन सौंपा। समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह नेगी कहा कि कुछ समय पूर्व ‘देवभूमि जनसेवा’ समिति के हैल्प लाइन नंबर पर जागरूक नागरिकों ने समस्या बतायी थी कि लक्खी बाग में बस्ती वासी खुले में शौच करते हैं। जिसकी गंदगी और बदबू से राहगीरों को खासी दिक्कतें आती हैं।
देवभूमि जनसेवा समिति के पदाधिकारी लक्खीबाग पहुंचे और कुछ दुकानदारों से उस स्थान की जानकारी चाही, जहां लोग सड़क किनारे खुले में शौच करते हैं। हर किसी ने रास्ता बताने के साथ ही कहा कि बस्ती वासियों ने पूरी सड़क का बुरा हाल किया हुआ है। मौके पर पहुंचने पर श्मशान घाट (लक्खीबाग) और वाल्मीकि मंदिर (मातावाला बाग) की ओर की दोनों ही सड़कों के किनारे जगह-जगह खुले में शौच की गंदगी देखी गई।
इसी क्रम में संस्था की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप कर समस्या से अवगत कराया गया है। समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह नेगी और उप सचिव नरेश अग्रवाल ने ज्ञापन में कहा कि राजधानी देहरादून को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए, क्षेत्रवासियों को ‘स्वच्छता अभियान’, नुक्कड़ नाटक और ‘टॉयलेट’ फ़िल्म के माध्यम से जागरूक किया जा सकता है। साथ ही ज्ञापन में कहा गया कि घर-घर शौचालय निर्माण अनिवार्य और निकट ही स्थित दो-दो सुलभ शौचालयों (लक्खीबाग और मातावाला बाग) का प्रयोग करने के लिए भी इन्हें प्रेरित किया जाना चाहिये। समिति द्वारा जिलाधिकारी से प्रधानमंत्री के ‘स्वच्छ भारत’ अभियान को सफल बनाने में सहयोग के लिए, सम्बंधित विभागाधिकारी को आदेशित करने की बात कही गयी। ताकि राजधानी देहरादून खुले में शौच से मुक्त बन सके।





























































