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आर्मी चीफ जनरल रावत ने अपने स्कूली दिनों की यादें की ताज़ा

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आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने शनिवार को दून में अपने स्कूली दिनों की यादें ताजा कीं। जनरल रावत अपने स्कूल कैंब्रियन हाॅल में स्कूल के 51वें स्थापना दिवस और वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में एक पूर्व छात्र की हैसियत से हिस्सा ले रहे थे।जनरल रावत कैंब्रियन हॉल स्कूल से 1973 बैच के पासआउट हैं।
मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल निवासी जनरल बिपिन रावत के पिता ले. जन. लाछु सिंह रावत (अप्र) भी सेना में थे। उनके देहरादून में पोस्टेड रहने के दौरान जनरल रावत ने छठीं से आठवीं तक की पढ़ाई गढ़ी कैंट स्थित कैंब्रियन हॉल स्कूल से की। इसके बाद पिता का तबादला शिमला हो गया तो बिपिन रावत भी वहीं चले गए। उन्होंने नौंवी से आगे की पढ़ाई शिमला के सेंट एडवर्ड्स स्कूल से पूरी की। उनका बैच कैंब्रियन हॉल स्कूल से 1973 में पासआउट हुआ। शनिवार को जनरल रावत अपने स्कूल के स्थापना दिवस समारोह में पूर्व छात्र के तौर पर आकर्षण का केंद्र रहे।
उनके बैच के कई और छा६ों ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया। आर्मी चीफ का दून से खास नाता रहा है। स्कूली पढ़ाई के बाद उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें आईएमए के सबसे प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर अवार्ड से भी नवाजा गया था। करीब चार दशक बाद अपने स्कूल में पूर्व साथियों और शिक्षकों से रूबरू होना एक अलग अनुभव रहा।
इससे पहले कैंब्रियन हॉल के 51वें स्थापना दिवस समारोह का शुक्रवार को रंगारंग आगाज हुआ। जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) सब एरिया मेजर जनरल जेएस यादव ने समारोह का शुभारंभ किया। छात्रों ने साहित्य, कला एवं क्राफ्ट, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और गृह विज्ञान से जुड़े मॉडल पेश किए।

उत्तराखण्ड में बिजली कटौती व सप्लाई की रोज हो रही जांच

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राज्य में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से बिजली कटौती को कम किया जा रहा है। साथ ही विद्युत वितरण खण्ड में प्रतिदिन कटौती व आपूर्ति जैसे कार्यों का रोज मूल्यांकन भी किया जा रहा है जिससे व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।
सचिव ऊर्जा राधिका झा ने बताया कि सभी अधीक्षण अभियन्ताओं एवं अधिशासी अभियन्ताओं को निर्देश दिये है कि दैनिक रूप से विद्युत बाधा का अनुश्रवण किया जाए और विद्युत आपूर्ति में कम से कम कटौती की जाए। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन विद्युत आपूर्ति रिपोर्ट का अनुश्रवण किया जा रहा है तथा इसके आधार पर विद्युत आपूर्ति गुणवत्ता के क्रियान्वयन को अधिकारियों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट में शामिल किया जायेगा। इससे अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में सुधार लाने के लिये व्यक्तिगत रूप से कार्य करना आवश्यक होगा।
उन्होंने बताया कि ऊर्जा विभाग द्वारा यह योजना राज्य में प्रथम बार लागू की गई है तथा विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। विगत वर्ष में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में माह अप्रैल से जुलाई (चार माह) में प्रणाली में कुल औसतन विद्युत व्यवधान 268 के सापेक्ष घटकर 241 हो गया है तथा इन विद्युत व्यवधानों की अवधि 12586 मिनट से घटकर 9386 मिनट हो गयी हैं। पिछले वर्ष की तुलना में सम्मानित विद्युत उपभोक्ताओं को 3200 मिनट अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई है, यद्यपि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों के सापेक्ष अभी अपेक्षाकृत कम सुधार आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यृत आपूर्ति में बाधा की सूचना व्यक्ति विशेष द्वारा(मैनवली) दी जाती है तथा शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट से कम विद्युत बाधित सूचना की गणना नही की जाती है।
उन्होंने बताया कि सभी विद्युत वितरण खण्डों की रेटिंग इन मानकों के आधार पर करना भी प्रारम्भ किया गया है, इससे कमी वाले क्षेत्रों को लक्षित कर विशेष कार्य योजना बनाने तथा क्रियान्वयन में आसानी होगी एवं आपसी प्रतिस्पर्धा से कर्मी स्वयं भी विद्युत आपूर्ति में सुधार के लिए प्रोत्साहित होंगे।

कर्नाटक सरकार ने गौरी लंकेश हत्या मामले की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी

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नई दिल्ली। सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार गौरी शंकर की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। गौरी लंकेश की अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या कर दी गयी थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कर्नाटक सरकार के मुख्य शासन सचिव ने रिपोर्ट में इस सनसनीखेज हत्या और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर विस्तृत रूप से गृह मंत्रालय, भारत सरकार को ब्यौरा दिया है।
वहीं, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच और 55 वर्षीय गौरी लंकेश की हत्या के मामले में शामिल अपराधियों का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है।
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने गौरी शंकर की हत्या के बाद कर्नाटक सरकार से घटना की विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा से रिपोर्ट मांगने के लिए कहा था, जिस पर अमल करते हुए सचिव ने मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट की राज्य सरकार से मांगी थी।

राज्य के सभी स्कूलों में ड्राइवर,कंडक्टर और सभी कर्मचारियों का होगा सत्यापन

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अनिल के० रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने बीते दिन गुरुग्राम, हरियाणा के स्कूल में स्कूल बस के कंडक्टर द्वारा एक छात्र की हत्या किये जाने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए स्कूली बच्चों की सुरक्षा के सम्बन्ध एक एडवाइजरी निर्गत करने के निर्देश दिए हैं|

अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था ने बताया कि निदेशानुसार इस सम्बन्ध में सभी स्कूलों में स्कूल बसों के ड्राईवर, कंडक्टर, सुरक्षा गार्डों तथा कर्मचारियों का तत्काल सत्यापन कराये जाने, स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरों चालू हालत में रखने/रखरखाव आदि सुनिश्चित कराने हेतु राज्य के सभी जनपद प्रभारियों को विस्तृत निर्देश निर्गत किये जा रहे हैं|

बहनोई अतुल की नई फिल्म में काम करेंगे सलमान खान

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सलमान खान एक तरफ अपने छोटे बहनोई आयुष शर्मा को बॉलीवुड में बतौर हीरो लॉन्च करने जा रहे हैं, जिसको लेकर तैयारियां चल रही हैं। दूसरी ओर, अब खबर आ रही है कि सलमान अपने बड़े बहनोई अतुल अग्निहोत्री (उनकी बहन अल्वीरा के पति) की नई फिल्म में काम करने के लिए तैयार हो गए हैं।

अतुल अग्निहोत्री के प्रोडक्शन में बनने वाली ये फिल्म एक कोरियाई फिल्म का रीमेक होगी, जिसके लिए अधिकारिक रूप से अधिकार खरीदे गए हैं। इस फिल्म का टाइटल ‘ओह माई फादर’ बताया जाता है। इसके हिन्दी रीमेक को 1947 के भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बैकड्रॉप पर बनाया जाएगा। इसकी कहानी पर काम शुरू होने जा रहा है और अनुमानित तौर पर कहा जा रहा है कि इसे अगले साल जनवरी तक शुरू किया जाएगा।

सलमान इन दिनों यशराज की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ को पूरा करने में बिजी हैं। इसके बाद वे टिप्स की फिल्म ‘रेस 3’ शुरू करने जा रहे हैं। इसके बाद वे अरबाज खान की फिल्म ‘दबंग 3’ शुरू करेंगे। अतुल अग्निहोत्री के बैनर में बनी ‘बॉडीगार्ड’ और ‘हैलो’ फिल्मों में सलमान खान काम कर चुके हैं। साउथ के निर्देशक सिद्दीकी के निर्देशन में बनी ‘बॉडीगार्ड’ में सलमान के साथ करीना कपूर की जोड़ी थी। ‘हैलो’ का निर्देशन अतुल ने खुद किया था और इसमें सलमान ने मेहमान भूमिका निभाई थी। 

हिमालय दिवस पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने दिया धरना

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हिमालय दिवस पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने दिया धरना उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने शनिवार को परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर हिमालय दिवस के अवसर पर हिमालय के संसाधनों की सुरक्षा, पर्यावरण, विस्थापन व बड़े-बड़े बांधों के दुष्प्रभाव को केंद्रित करते हुए एक दिवसीय धरना दिया।
इस अवसर पर पार्टी के प्रधान महासचिव एपी जुयाल ने कहा कि एक ओर भाजपा सरकार हिमालय दिवस के नाम पर शपथ दिलवा कर पूरे जनमानस को हिमालय बचाने को प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी ओर हिमालय व हिमालय वासियों को डुबाने और विस्थापित करने के लिए बड़े-बड़े बांधों के निर्माण करा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रस्तावित 556 बांधों के चलते लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा। लाखों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो जाएगी तथा प्राकृतिक जड़ी-बूटियां खनिज संपदा, वन संपदा नष्ट हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं की डीपीआर बनाते समय परियोजनाओं से होने वाले लाभ का आकलन किया गया, हानि का नहीं। जबकि बिजली उत्पादन से होने वाले लाभ से कहीं अधिक वन संपदा, कृषि भूमि, जड़ी-बूटियां अन्य खनिज पदार्थों के हमेशा के लिए लुप्त हो जाने का खतरा है। इसका जरा भी संज्ञान नहीं लिया गया है।
धरने को संबोधित करते हुए पार्टी कार्यकार्ता ईडी नौटियाल ने कहा कि टिहरी बांध हमारे सामने उदाहरण है, जो अपने प्रस्तावित लागत व निर्माण की प्रस्तावित अवधि से कई गुना अधिक लागत व समय ले गया। इसके बावजूद अनुमानित उत्पाद से आधी भी बिजली प्राप्त नहीं हो रही है। ऊर्जा प्रदेश होने के बावजूद आज भी बाहर से बिजली खरीदी जा रही है।
नारायण सिंह रावत ने कहा कि पहले ही टिहरी से विस्थापित किए हुए लोगों को पुनर्वास की समस्या का सही व पूर्ण रूप से निदान नहीं हो पाया है अब कुमांऊ के लोगों को विस्थापित करने का कुटिल षड्यंत्र रचा जा रहा है। इस दौरान कुलदीप मघवाल ने कहा कि सरकार केवल अपनी हठधर्मिता के चलते जन भावनाओं की उपेक्षा कर रही है।
इस दौरान युद्ध राज त्यागी ने कहा उत्तराखंड की जनता जान चुकी है कि बड़े-बड़े पूंजी पतियों को लाभ पहुंचाने की नियत से ही भाजपा सरकार जबरन उत्तराखंड में बड़े-बड़े बांधों का निर्माण करने जा रही है। उन्होंने कहा कि जन भावनाओं की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार हठधर्मिता छोड़ हिमालय दिवस पर हिमालय को डूबने की प्रक्रिया को वापस ले। अन्यथा आंदोलन एक मात्र विकल्प होगा। इसके अतिरिक्त धरने पर ज्ञानवीर त्यागी, राज कुमार त्यागी, राजेश मौर्य, सत्यवीर जगदीश सिंह आदि लोगों ने अपने विचार रखे।

बिजली चोरी रोकने के लिए उत्तराखंड अपनाएगा यूपी का फार्मूला

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सारे पैतरे अपनाने के बाद उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) बिजली चोरी रोकने के लिए उत्तर प्रदेश का फार्मुला अपनाएगा। साथ ही यूपीसीएल की सतर्कता इकाई यानी विजीलेंस विंग की मॉनिटरिंग आइजी स्तर के अधिकारी करेंगे। विजीलेंस को मजबूत बनाने के लिए 12 पुरुष व चार महिला कांस्टेबलों की भी नियुक्ति की जाएगी। यह निर्देश सचिव ऊर्जा ने यूपीसीएल प्रबंधन को दिए हैं और प्रबंधन ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है।

दरअसल, यूपीसीएल का लाइन लॉस 17.25 फीसद है, जबकि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) का लाइन लॉस 35 फीसद से ज्यादा। लॉइन में अधिकांश हिस्सा बिजली चोरी का होता है और कुछ तकनीकी। वहीं, उत्तराखंड की बिजली मांग जहां 12 हजार मिलियन यूनिट से ज्यादा है तो उत्तर प्रदेश की बिजली मांग करीब एक लाख मिलियन यूनिट है। ऐसे में सचिव ऊर्जा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में शायद बिजली चोरी पर लगाम कसने के लिए किसी बेहतर प्लान का इस्तेमाल किया जा रहा हो।

यूपीसीएल प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश की दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एसके वर्मा से बात हो गई है। वह विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराएंगे कि उनके यहां बिजली चोरी रोकने और लाइन लॉस कम करने के लिए किसी प्लान पर काम किया जा रहा है। जल्द ही एक टीम पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मेरठ स्थित मुख्यालय में भेजी जाएगी।

उत्तर प्रदेश की अन्य दोनों बिजली वितरण कंपनियों से भी इस संबंध में जानकारी ली जाएगी। साथ ही यूपीसीएल अन्य राज्यों की उन बिजली वितरण कंपनियों की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी जुटाएगा, जहां लाइन लॉस सबसे कम है। इसके बाद एक प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाएगी।

सचिव ऊर्जा ने हर जोन में सतर्कता इकाई की मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी अधीक्षण अभियंता को देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि मुख्यालय स्तर पर भी मुख्य अभियंता स्तर का अधिकारी मॉनिटरिंग करे। प्रदेश में यूपीसीएल के चार जोन हैं।

 प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा ने बताया कि सतर्कता इकाई को मजबूत करने के लिए इसका पुनर्गठन किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे आगामी निदेशक मंडल की बैठक से पास कराने के बाद शासन को प्रेषित किया जाएगा। दरअसल, 2003 में यूपीसीएल निदेशक मंडल की बैठक से प्रस्ताव पास हुआ था, जिसमें डीआइजी स्तर पर मॉनिटरिंग की बात थी। लेकिन, यह प्रस्ताव धरातल पर नहीं आ सका।

 वर्तमान में सालाना 2205 मिलियन यूनिट बिजली लाइन लॉस के रूप में बर्बाद हो रही है। इस तरह निगम को करीब छह अरब रुपये का झटका लग रहा है।

खत्म हुई इस साल की कैलाश मानसरोवर यात्रा

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18वें जत्थे के उत्तराखंड के लीपूलेख पास से होते हुए गूंजी वापस आने के साथ साथ 2017 की कैलाश मानसरोवर यात्रा भी समाप्त हो गई। यात्रा से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस साल 24 राज्यों के 919 श्रद्धालुओं ने कुमाऊं की तरफ से इस तीर्थ यात्रा में हिस्सा लिया। ये संख्या 1981 में इस तरफ से रास्ते की शुरुआत होने के बाद से अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है।

शनिवार को आकिरी जत्था जिसमें 33 श्रद्धालू हैं उन्हें जिनमें नौ महिलाऐं भी हैं उन्हें धारचूला ले जाया गया। इस दल में शुरूआत में 34 लोग थे पर एक यात्री को टोटिल होने के कराण यात्रा को आदे में ही छोड़ के वापस आना पड़ा। जून 12 को सुरू हुई यात्रा के आकिरी दल के लोग सितंबर 11 तक अपने अपने गंतव्य स्थानों तक पहुंच जायेंगे।

मूलत: इस साल की यात्रा सामान्य रही। हांलाकि 14 अगस्त को मालपा में बादल फटने के कारण हुए भूस्खलन के चलते तीन दलों के शड्यूल में बदलाव लाना पड़ा। ट्रैक रूट के भूस्खलन के कारण टूटने के चलते आखिरी तीनों दलों को जो भारत लौट रहे थे उन्हें गूंजी से एयरलिफ्ट करके धारचूला पहुंचाया गया।

 

उत्तराखंड मेट्रो कार्पोरेशन के एमडी ने दिया इस्तीफा मेट्रो निर्माण को बड़ झटका

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उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र त्यागी ने इस्तीफा दे दिया है। इससे मेट्रो प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में ही राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। त्यागी ने अपने इस्तीफे की वजह व्यक्तिगत कारणों को बताया है।

वहीं, शहरी विकास मंत्री और शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि कारपोरेशन के एमडी ने माहभर पहले निजी क्षेत्र में उत्तराखंड से बेहतर अवसर मिलने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट पर इस्तीफे का कोई असर नहीं पड़ने  दिया जाएगा। राज्य सरकार अपने इसी कार्यकाल में मेट्रो के सपने को साकार करेगी।

देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच मेट्रो के सपने को साकार करने के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट में अधिकारी रहे जितेंद्र त्यागी को उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन लि. के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस वर्ष एक फरवरी को उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया।

इस बीच 23 मार्च को कारपोरेशन का गठन हुआ और 23 मई को कारपोरेशन की पहली बैठक हुई। त्यागी को कारपोरेशन की कमान मिलने से उम्मीद जगी कि यह पहल अब तेजी से आगे बढ़ेगी। इस दिशा में कवायद भी होने लगी। त्यागी की पहल पर ही ‘मेट्रो मैन’ ई श्रीधरन को यहां भी मेट्रो का प्रमुख सलाहकार बनाने का सरकार ने आग्रह किया था।

तब सरकार की ओर से यह प्रस्ताव भी श्रीधरन को भेजा गया। इस बीच छह सितंबर को त्यागी ने नोटिस देते हुए सरकार को इस्तीफा सौंप दिया।

माना जा रहा कि दिल्ली मेट्रो जैसी फास्ट कार्यशैली में कार्य करने वाले त्यागी को यहां सरकारी कार्यशैली रास नहीं आ रही थी। हालांकि, त्यागी का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है।

नदी में डूबने से दो की मौत

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धनौरी स्थित रतमऊ नदी के बावनदरे ने फिर दो जाने ले ली। पिछले एक हफ्ते में ये दूसरी घटना है इससे पहले दो युवकों की जान भी बावनदरे में जा चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक युवक व युवती की मौत शुक्रवार को बावनदरे में डूबने से हो गयी। सूचना पर मौके पर पहुंची धनौरी पुलिस ने युवक के शव को नदी से निकलवाकर परिजनों की मांग पर उनको सुपुर्द कर दिया। जबकि युवती के परिजन पुलिस के पहुंचने से पहले ही युवती का शव लेकर मौके से चले गए।

मुरादाबाद जनपद के कटघर थाना क्षेत्र के करुला निवासी 15 वर्षीय युवक इकबाल पुत्र अनवर हुसैन अपने परिजनों के साथ कलियर में जियारत करने के लिए आए थे। शुक्रवार को वह अपने परिजनों के साथ रतमऊ नदी के बावनदरा में घूमने आए थे। बावनदरा में नहाते समय युवक इकबाल की पानी के गहरे कुंड में डूबने से मौत हो गई।

सूचना पर मौके पर पहुंची धनौरी पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से उसके शव को नदी से बाहर निकाला। बालक के परिजनों की ओर से कोई कार्रवाई न चाहने पर उसके शव को उन्हें सोप दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियो ने बताया कि शुक्रवार सुबह ही एक 17 वर्षीय युवती की बावनदरा में डूबने से मौत हो गई। युवती के परिजन पुलिस के आने से पहले ही उसके शव को लेकर मौके से चले गए। इस बावत धनौरी चौकी प्रभारी रणजीत सिंह ने बताया कि युवक के परिजनों की ओर से कोई कार्रवाई करने से मना कर दिया गया।