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टीएचडीसी ने ऋषिकेश के प्रमुख घाटो पर लगाया वार्निंग सिस्टम

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एशिया के बड़े बांधों में शुमार टिहरी की भागीरथी नदी पर बना टिहरी डैम हमेशा से ही सुर्खियों में बना रहता है। सबसे ज्यादा समस्या मैदानी इलाकों में टिहरी डैम से छोड़े गए पानी को लेकर बनी रहती है। ऋषिकेश में कई बार टिहरी डैम के पानी के चलते स्नान घाटों पर जल स्तर में वृद्धि होने के चलते लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ता था।

कई बार पुलिस ने रेस्क्यू कर के पानी में फंसे लोगों को बाहर निकाला। अब जाकर टीएचडीसी प्रशासन ने ऋषिकेश के प्रमुख घाट त्रिवेणी घाट पर राम झूला और लक्ष्मण झूला के घाटों पर टिहरी डाम से छोड़े गए पानी के लिए सैटेलाइट से कनेक्टेड वार्निंग सिस्टम को लगाया है।

तटीय इलाकों पर रहने वाले लोगों को टिहरी डैम से छोड़े गए पानी की सूचना सायरन के द्वारा समय पर ही दे देगा, जिससे आने वाले समय में बाहर से आने वाले तीर्थ यात्री को जल स्तर के बढ़ने और घटने की जानकारी स्थानीय प्रशासन के द्वारा दे दी जाएगी। सायरन बजते ही लोग सचित होकर गंगा के गहरे पानी से दूर हो जाएंगे जिससे किसी भी अनहोनी को टाला जा सकता है

डंपर के खाई में गिरने से दो की मौत, चार घायल

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बागेश्वर जिले के कपकोट स्थित लिली-गैनाड़ मोटर मार्ग पर अनियंत्रित डंपर खाई में गिरने से उसमे सवार दो महिला की मौत हो गई, जबकि चार घायल बताए जा रहे हैं जिनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 8 बजे एक बेकाबू डंपर लिली-गैनाड़ मोटर मार्ग में गहरी खाई में समा गई। जिससे डंपर में सवार धन सिंह(47) पुत्र नाथ सिंह निवासी फरसाली व रमा देवी (37) पत्नी कुंदन सिंह निवासी गिनाड की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि घटना में घायल चार लोगों को सीएचसी कपकोट में भर्ती कराया गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही राजस्व पुलिस व एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच कर राहत बचाव कार्य में जुट गई है। टीम ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, जिसमें एक की हालत बेहद नाजुक है। जिसे बेहतर उपचार के लिए बागेश्वर रेफर कर दिया गया है। वहीं अन्य घायलों का उपचार कपकोट में चल रहा है। 

मट्रोपोलिस सिटी में प्रबन्धन की मनमानी

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रुद्रपुर शहर की पाउस कालोनी में अव्यवस्थाओं के चलते सोसायटी के लोगों ने प्रबन्धन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कार्यवाही की बात कहीं है,  मेट्रोपोलिस सिटी में लोगों ने वहां व्याप्त विभिन्न समस्याओं को उठाते हुए कहा कि मेट्रोपोलिस प्रबंधन मनमानी पर उतारू है। मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने में भी आनाकानी की जा रही है।

सिटी स्थित क्लब में विधायक राजकुमार ठुकराल और उपजिलाधिकारी रोहित कुमार मीणा ने मेट्रोपोलिस के पदाधिकारियों के साथ वार्ता कर उनकी समस्याएं सुनी और समस्याओं का शीघ्र निराकरण करवाने का आश्वासन दिया। इस दौरान श्री ठुकराल ने कहा कालोनी वासियों का उत्पीडऩ नहीं होने दिया जाएगा। वहीं एसडीएम मीणा ने कहा कालोनी में व्याप्त समस्याओं के निराकरण के लिए प्रबंधन पर दबाव बनाया जाएगा।
उधर, कालोनी निवासी राज्य आंदोलनकारी समिति के अध्यक्ष जेपी पांडे व प्रवक्ता अवतार सिंह ने जारी बयान में कहा कि “मेट्रोपोलिस सिटी प्रबंधन की हठ धर्मिता के चलते कालोनीवासियों में रोष है। प्रमुख मांग मैंटीनेंस को पुरानी दर से बहाल करने की थी, जिसको पूर नहीं किया गया।”

नियमों की जमकर उडाई धज्जियां, घोटालेबाजों ने बटोरे करोडों

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एन एएच 74 में हुए भूमि घोटाले की जांच में हर दिन नये पहलू जुडते जा रहे हैं। कहीं अकृषि भूमि दिखाकर दस गुना लाभ कमाने का मामला सामने आता है तो कहीं अधिकारियों की मिलीभगत, वहीं अब एनएच के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने से ये बी जाहिर हो गया है कि मुआवजे के लिए अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण किया ही नहीं और कागजों में हाी कोरम पुरा कर करोडों रुपये की बंदरबांट कर ली।जिसके चलते अब एनएच 74 में भूमि अधिग्रहण के समय हुए नोटिफिकेशन में गड़बड़ी सामने आ रही है।

बगैर भूमि का निरीक्षण किए नोटिफिकेशन कर दिया गया। यदि थ्री डी से थ्री जी में बदलाव को घोटाले का बिन्दु माना जाता है तो पूरे प्रदेश के ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों में हुए भूमि अधिग्रहणों पर सवाल उठने लाजमी हैं। दरअसल, नोटिफिकेशन में जमीन की प्रकृति एवं प्रकार, रकबा स्पष्ट नहीं होने के कारण सक्षम अधिकारी से आख्या प्राप्त करके थ्री जी में बदलाव किया गया, जो सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। एनएच 74 में जिस समय भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना थ्री ए जारी की गई, उसमें सिर्फ खसरा नंबर का जिक्र था। थ्री सी के आदेश एवं थ्री डी की अधिसूचना से भी यह बात साफ है कि अधिकारियों ने जमीन का स्थलीय निरीक्षण नहीं किया गया। थ्री ए, थ्री सी एवं थ्री डी में भूमि के प्रकार एवं भूमि की प्रकृति के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। निजी भूमि को भूमि की प्रकृति में कृषि दर्शाया गया और भूमि का प्रकार सरकारी होने की स्थिति में भूमि की प्रकृति गैर कृषि दर्शाया गया। सामान्यता ऐसे मामले पाए गए जिनमें एक खसरा नंबर में सहखातेदार भी थे।

किसके हिस्से में कितनी जमीन है? जमीन की प्रकृति व प्रकार क्या है? यह स्पष्ट ही नहीं था। भूमि के प्रकार, प्रकृति, रकवे के संबंध में सही जानकारी के लिए सक्षम अधिकारी से आख्या तक नहीं ली गई।  ऐसे में जब मुआवजा धनराशि तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई तो यह पता लगाना जरूरी था कि किस खसरे में कितने सह खातेदार हैं। जमीन कृषि है अथवा अकृषि? इसके लिए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने संबंधित उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार की रिपोर्ट मंगाई। उसके बाद ही प्रतिकर तय किया गया। जानकारों की मानें तो एक्ट में इस बात का उल्लेख नहीं है कि भूमि की प्रकृति प्रतिकर निर्धारण करते समय थ्री डी के अनुसार ली जाए। एसआईटी की जांच का एक बिन्दु यह भी है कि थ्री डी से थ्री जी में बदलाव किया गया। यदि इसे घपला माना जाता है तो अन्य स्थानों पर हुए भूमि अधिग्रहण भी जांच के दायरे में आ जाएंगे, क्योंकि लगभग यह प्रक्रिया सभी स्थानों पर अपनाई जाती है।

हालांकि भूमि अर्जन एवं पुनर्वासन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 में भी स्पष्ट ही है कि पारदर्शिता के साथ उचित प्रतिकर निर्धारित किया जाए। इसके बाद भी विकल्प खुले हैं कि यदि किसी को उचित प्रतिकर नहीं मिलता है तो वह आर्विटेटर के यहां और उसके बाद कोर्ट में अपील कर सकता है।

गरीबों के आशियाने पर झूठ का पर्दा

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नगर निगम रुद्रपुर घोटालों के लिए लगातार चर्चाओं में रहा है, जिसको लेकर कई बार कोर्ट की फटकार भी निगम को पडी है, बावजूद इसके निगम अपनी कार्यशैली बदलने का नाम नहीं ले रही है वहीं निगम का एसा सच सामने आया है जिससे निगम की कार्यशैली सवालों में फिर घिर गयी है। कहने को तो राजनीति में झूठ सच बोल कर जनता को गुमराह करने की परंपरा है, लेकिन यहां निगम ने ऐसा झूठ बोला की करोडों की योजना का लाभ जो गरीब जनता को मिलना था वो नहीं मिल पाया, मामला रम्पुरा क्षेत्र का है जहां गरीबों के मकानों के निर्माण के लिए स्वीकृत हुई 16.5 करोड़ की योजना में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

इस आवासीय योजना के लिए 6.45 करोड़ की धनराशि अवमुक्त भी हो गई और दो साल तक नगर निगम में पड़ी रही, लेकिन गरीबों की आवासीय योजना शुरू नहीं हो सकी। अंतत: धनराशि को वापस करना पड़ा। इस मामले में मेयर सोनी कोली व पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप प्रत्यारोप की सियासत कर रहे हैं।

रम्पुरा के 378 गरीबों के मकान के लिए आई 6.45 करोड़ की धनराशि 13 फरवरी 2013 को प्राप्त हुई और 11 अगस्त 2015 को यह धनराशि नगर निगम से वापस भेजी गई। दो साल तक मेयर सोनी कोली के कार्यकाल में नगर निगम में पड़ी रही। उस पर 28.50 लाख रुपये बैंक ब्याज भी मिला, लेकिन यह धनराशि समय पर कार्य शुरू न होने के कारण नगर निगम को वापस करनी पड़ी। यानि दो साल तक पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा पर धनराशि पर कुंडली मारे बैठे रहने का मेयर का आरोप झूठा साबित हुआ। गौरतलब है कि मेयर सोनी कोली ने यह आरोप लगाया था कि यह योजना 2011 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन तत्कालीन पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा दो साल तक धनराशि पर कुंडली मारे बैठी रहीं। जब वह मेयर बनीं तो उन्होंने इस योजना में टेंडर निकाले, लेकिन कोई ठेकेदार टेंडर डालने को राजी नहीं हुआ। वजह यह थी कि दो वर्षों में लागत मूल्य बढ़ गया था। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी यह तोहमत मढ़ दी कि सरकार ने उन्हें मकान बनाने की अनुमति नहीं दी। इस बात में कितनी सच्चाई है इसका भी खुलासा जरूर होगा। इस बावत पूर्व पालिकाध्यक्ष का कहना था कि योजना जरूर 2011 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन धनराशि उन्हें 2013 में मिली। उसके बाद शासन ने पालिका को नगर निगम का दर्जा दे दिया था और उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही हटना पड़ा था।

सूचना के अधिकार से मिली प्रति में यह स्पष्ट हो गया है कि जवाहर लाल नेहरू अरबन मिशन योजना के तहत 13 फरवरी 2013 को 378 आवासों के लिए छह करोड़ पैतालीस लाख बत्तीस हजार रुपये की धनराशि पालिका के खाते में आई थी। नगर निगम के गठन के बाद रम्पुरा की सोनी कोली मेयर बनीं। अभिलेख गवाह हैं कि 11 अगस्त 2015 को यानि पूरे ढाई साल बाद 67387781 रुपये का चैक शासन को लौटाया गया। इस अवधि में 28.50 लाख रुपये तो अवमुक्त हुए 64532000 रुपयों पर ब्याज भी मिल गया। यदि नगर चाहती तो इस योजना के तहत गरीबों के मकानों का निर्माण कर सकती थी।

अब सवाल यह उठता है कि अपनी नाकामी छिपाने को मेयर ने झूठ क्यों बोला? यदि लागत मूल्य बढ़ा था तो ब्याज की धनराशि भी तो बढ़ी थी। बहरहाल, वजह कुछ भी हो, लेकिन गरीबों के पक्के मकान में रहने का सपना तो ध्वस्त हो गया।

मोहन भागवत पहुंचे हरिद्वार, मुख्यमंत्री ने की मुलाकात

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को अपने एक दिवसीय प्रवास पर हरिद्वार पहुंचे। यहां वो सूरत गिरी बंगला में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

mohan bhagwat

आज भागवत का जन्म दिवस है, जो सादगी पूर्वक धार्मिक विधि-विधान से मनाया जाएगा। इस अवसर पर वह कारगिल के शहीद परिवारों को सम्मानित भी करेंगे। जिसके लगभग दो घंटे के बाद पतंजलि योगपीठ के लिए प्रस्थान करेंगे।

हरिद्वार में दोपहर 12 बजे के बाद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संघ प्रमुख से मुलाकत कर सरकार के कामकाज के बारे में जानकारी दी। संघ के एजेंडे पर चर्चा हुई व इस दौरान भाजपा सहित संघ के तमाम वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। 

पेट्रोल व घरेलू गैस के बढ़ते दामों पर भड़के कांग्रेसी

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ब्लाॅक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तरुण नैयर के नेतृत्व में हरकी पौड़ी चौक अपर रोड पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महंगाई को लेकर जोरदार नारेबाजी की। इस अवसर पर ब्लाॅक अध्यक्ष तरूण नैयर ने कहा कि केन्द्र सरकार महंगाई पर नियंत्रण खो चुकी है। लगातार पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं। घरेलू गैस पर बेहिसाब पैसा बढ़ाया जा रहा है।

जनता को राहत देने में केन्द्र सरकार की विफलतायें साफ तौर पर नजर आ रही है। खाद्य पदार्थो में बेतहाशा मूल्य वृद्धि होने से आमजनमानस की मुश्किलें बढ़ रही है। घरेलू गैस की सब्सिडी समाप्त करने की राह पर केन्द्र सरकार साजिश के तहत जुटी हुई है। घरेलू गैस के दाम बढ़ने से आमजनमानस हताशा निराशा के दौर से गुजर रहा है। अच्छे दिन की बात करने वाली सरकार महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं कर पा रही है।
प्रदीप आहूजा व कैलाश भट्ट ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव के दौरान जो वादे देश की जनता से किये थे उन वादों पर प्रधानमंत्री खरे नहीं उतर रहे है। जमाखोरों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। राज्य सरकार भी प्रदेश की जनता को राहत देने में नाकायाब हो चुकी है। कई तरह के टैक्सों के बोझ के नीचे जनता को दबाया जा रहा है। मोनू उपाध्याय व सुमित भाटिया ने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्णय पूरी तरह से गलत साबित हो रहे हैं। नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू करना जनता पर भारी पड़ रहा है। व्यापारी जीएसटी को अब तक नहीं समझ पाये। केन्द्र सरकार द्वारा जल्दबाजी में निर्णय लेकर देश की जीडीपी दर को बुरी तरह से प्रभावित किया। महंगाई गरीबों पर मुंह का निवाला छीन रही है। विरोध प्रदर्शन करने वालों में डाॅ0 समीर सिंह, बलबीर सिंह (बल्ली) महेन्द्र अरोड़ा, राजीव अरोड़ा, शिव कुमार कश्यप, सुरेश ठाकुर आदि शामिल रहे।

बसपा के पूर्व विधायक से आईएसआई के नाम पर दो करोड़ की रंगदारी मांगी

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हरिद्वार जिले में आईएसआई के नाम से पत्र भेजकर बसपा के पूर्व विधायक मोहमद शहजाद से दो करोड़ की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। पुलिस ने अज्ञात बादमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पूर्व विधायक शहजाद के लाहबोली स्थित आवास पर स्पीड पोस्ट से एक पत्र मिला, देर शाम पूर्व विधायक शहजाद घर पहुंचे तो उन्होंने पत्र खोला, उसमें उनसे दो करोड़ की रंगदारी की मांग की गई थी। पत्र भेजने वाले खुद को आईएसआई से जुड़ा हुआ बताया है। साथ ही अपना पता देवबंद के पास जट जड़ौदा व नाम गुलबहार बता रखा है।

पत्र में कहा है कि उसके ग्रुप के लोग जमानत पर बाहर निकले हैं। वे बेहद खतरनाक हैं। इसकी तस्दीक वह देवबंद से कर सकते हैं। पत्र में एक बैंक का खाता नंबर भी दिया गया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर दो करोड़ रुपये खाते में नहीं डाले तो उनको परिवार सहित मार दिया जाएगा। विधायक शहजाद ने मंगलौर कोतवाली में तहरीर देकर जांच की मांग की है। वहीं पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कोतवाली प्रभारी जवाहरलाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

कोलकाता की पर्वतारोही महिलाओं ने अननेम्ड पीक पर किया फतह

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कलकत्ता से आए महिलाओं के 10 सदस्य दल ने छह सितंबर को वासुकीताल के समीप 6275 मीटर ऊंचाई वाली नई चोटी (अननेम्ड पीक)पर आरोहण कर तिरंगा लाहराया। जिस चोटी का दल ने आरोहण किया है, उस चोटी का अभी तक कोई नाम नहीं दिया गया है। इसलिए इसे पर्वतारोही अननेम्ड पीक कहते हैं।

27 अगस्त को कलकता से आए दस महिलाओं का दल स्नो स्पाइड ट्रेक एंड टूर के गाइड विष्णु सेमवाल के नेतृत्व में गंगोत्री के लिए रवाना हुआ। उसके बाद दल ने भोजवासा, गोमुख, नंदनवन और वासुकीता के लिए आरोहण किया। छह सितंबर को दल वासुकीताल के समीप 6275 मीटर ऊंचाई वाले शिखर पर तिरंगा लाहराया। दल ने फतह करने वाली चोटी को अभी कोई नाम नहीं दिया। आईएमए दिल्ली द्वारा पत्रचार के बाद सप्ताहभर के अंदर चोटी का नामकरण किया जाएगा। दल में दो गाइड, तीन स्टाफ और पांच पोर्टर शामिल थे। दल का यह करीब दो सप्ताह का आरोहण था। दल में शामिल सदस्य दल की अध्यक्ष महुआ विश्वास कष्टम विभाग, स्वरूपा मोडुल, उन्नति पांडेय, लक्ष्मी घोष, अमृतादास, सुप्रिया देई और मोमिता घोष छात्रा हैं, वंदना कलकता पुलिस विभाग, सुजाता भट्टाचार्य शिक्षिका और साथ सक्षमुख कलकता की एक कंपनी में कार्यरत है। टीम अध्यक्ष महुआ विश्वास ने बताया कि टीम में लड़कियों ने दो तीन बार हिमाचल और सिक्किम में पर्वतारोहण किया है। इसके लिए दल सदस्यों ने कलकत्ता में विशेष परीक्षण भी लिया है। परीक्षण लेने के बाद ही हम लोग पर्वतारोहण के ‌लिए निकलते है। उन्होंने कहा कि समाज में लोगों ने लड़कियों के प्रति गलत सोच पैदा कर दी है। लेकिन लड़कियों के दल करीब छह हजार मीटर ऊंचाई वाले पर्वत पर फतह कर समाज को संदेश दिया है कि हम भी किसी से कम नहीं है।

जाम से निजात को शहर में 93 अस्थायी पार्किंग चिन्हित

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राजधानी में ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने और दूनवासियों को जाम से निजात दिलाने के लिए दून पुलिस ने नए प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है। शहर में 93 स्थान इसके लिए चिन्हित किए गए हैं।

राजधानी दून में अब जाम की समस्या आम बात है। आए दिन जाम की वजह से दून की इमेज पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस द्वारा आए दिन शहर में जाम से निजात दिलाने के लिए नए-नए प्लान पर काम किया जा रहा है। कई जगह पर दूनवासियों को राहत भी मिली है। लेकिन अब भी बड़ी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार ने भी दून पुलिस को ट्रैफिक का नया प्लान बनाकर ट्रैफिक को दुरस्त करने के निर्देश दिए हैं। जिसको लेकर कप्तान और एसपी ट्रैफिक लगातार प्लान पर काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में शहर में 93 स्पॉट चिन्हित कर अस्थायी पार्किंग बनाई गई है।

अलग-अलग क्षेत्रों में चिन्हित किए स्थान
एसपी ट्रैफिक धीरेन्द्र गुंज्याल ने बताया कि राजपुर रोड पर 72, चकराता रोड पर 21 स्थान चिन्हित किए गए हैं। जहां पर डाइगनल तरीके से अस्थायी पार्किंग की जा रही है। इसके अलावा ईसी रोड पर पैरेलल पार्किंग शुरू की गई है। जिससे सड़क किनारे गाडिय़ां भी खड़ी हो सके और जाम भी न लग पाए। इसके अलावा एसपी ट्रैफिक ने बताया कि मॉल के बाहर अब बेवजह गाड़ी पार्क नहीं की जा सकेंगी। पार्किंग भर जाने की स्थिति में सड़क किनारे डाइगनल तरीके से पार्किंग करवाई जा सकेंगी। जिसके लिए नए गाइडलाइन जारी की गई है।