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केदारनाथ में हेली सेवाओं पर रोक

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नागरिक उड्डयन विभाग ने केदारनाथ में हेली सेवाओं पर रोक लगा दी है। दरअसल, निर्धारित मानकों का पालन न करने पर विभाग ने यह कदम उठाया है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि कंपनियों ने उड़ान से संबंधित समय सारिणी उड्डयन विभाग को नहीं सौंपी है।

जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में केदारनाथ के लिए नौ हेली कंपनियां उड़ान संचालित कर रही हैं। इनमें इंडोकॉप्टर, ट्रांसभारत, आर्यन, पवन हंस, एरो, हेरीटेज, हिमालयन हेली, ग्लोबल और सुमित एविएशन शामिल हैं। नागरिक एवं उड्डयन महानिदेशालय के मानकों के अनुसार केदारघाटी में हेलीकॉप्टर 2000 फीट से नीचे उड़ान नहीं भर सकते। इस बारे में विभाग ने कंपनियों से दस्तावेज तलब किए थे। इसके अलावा कंपनियों से उड़ान की समय सारिणी भी मांगी गई थी, लेकिन ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
जिलाधिकारी ने बताया कि मंगलवार को उड़ान पर रोक लगाते हुए संबंधित दस्तावेज जमा कराने के लिए कंपनियों को एक दिन की मोहलत दी गई है। प्रशासन की ओर से नियुक्त सहायक नोडल अधिकारी (हेलीकाप्टर सेवा) सुरेन्द्र सिंह पंवार ने बताया कि मंगलवार को हेली कंपनियों के प्रतिनिधि देहरादून स्थित उड्डयन विभाग में जरूरी दस्तावेज जमा करने गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बुधवार से सेवाएं शुरू हो जाएंगी। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि हेली कंपनियों से एनजीटी के निर्देशों को सुनिश्चित कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसके बाद ही इन्हें उड़ान भरने की अनुमति दी जाएगी।

दिल्ली के व्यापारी ने केदारनाथ मंदिर को दान की दो कुंतल चांदी

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केदारनाथ मंदिर में गर्भ गृह के खंभों पर चांदी की नक्काशी की जाएगी। इसके अलावा मंदिर में चांदी से अन्य सजावट भी की जाएंगी। इसके लिए दिल्ली के एक व्यापारी ने मंदिर को दो कुंतल चांदी दान किया है।

बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि एक वर्ष पूर्व व्यापारी महेश शर्मा ने गर्भ गृह की सजावट चांदी से करने के लिए मंदिर समिति को प्रस्ताव भेजा था। हालांकि उन्होंने व्यापारी के बारे में ज्यादा कुछ बताने से इन्कार किया, लेकिन बताया कि समिति ने तीर्थ पुरोहितों के साथ विचार विमर्श के बाद प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि व्यापारी ने इसके लिए कारीगर भी केदारनाथ भेजे हैं। बीडी सिंह ने बताया कि इसी सीजन में कार्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि केदारनाथ मंदिर को इस वर्ष विभिन्न स्रोतों से तकरीबन पांच करोड़ रुपये दान के रुप में प्राप्त हो चुका है।
मोरारी बापू भी दे चुके हैं मंदिर को एक करोड़ रुपये
बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि केदारनाथ मंदिर को को दान देने वालों की लंबी सूची है। वर्ष 2015 में प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू ने मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए एक करोड़ रुपए दान में दे चुके हैं। इसके अलावा इस बार भी उन्होंने करीब 80 लाख रुपये दान किए। वर्ष 2016 में उद्योगपति मुकेश अंबानी ने पूजा सामग्री के लिए 50 लाख रुपये दिए थे।

नाच इंडिया नाच आॅडिशन दून में 14 से

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नाच इंडिया नाच प्रोग्राम के माध्यम से गांव, शहर और कस्बों से निकालकर टीवी और फिल्मों के माध्यम से कलाकारों को सही पहचान दिलाने के उद्देश्य से देहरादून में 14, 15 व 16 सितम्बर को आॅडिशन आयोजित किए जा रहे हैं। आॅडिशन में आठ साल के बच्चे से लेकर 60 साल के बुजूर्ग भी हिस्सा ले सकते हैं।
मंगवलार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में जय श्री कृष्णा प्रोड्क्शन हाउस प्राइवेट लिमिटेड के प्रोड्यूसर ललित शर्मा ने बताया कि प्रोग्राम नाच इंडिया नाच जो कि एक डांसिंग रियलिटी शो है, उसका पहला आॅडिशन एवं टाॅप नौ का सिलेक्शन करने के लिए देवभूमि उत्तराखंड के ऐतिहासिक देहरादून शहर को चुना गया है। आॅडिशन ओएनजीसी आडिटोरियम में होंगे।
ललित शर्मा के अुनसार, कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखण्ड में छिपी प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर भविष्य संवारने का अवसर देना है। शो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संजय कुमार जोगी का बाॅलीवुड इंडस्ट्री में जाना-पहचाना नाम है। कई अवार्ड शोध् एवं रियलिटी शो स्कोर उन्होंने बनाया है एवं कुशल संचालन भी कर रहे हैं। शर्मा ने बताया कि प्रधनमंत्राी नरेंद्र मोदी के मिशन ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ पर आधरित फिल्म कके बारे में भी आॅडिशन में बताया जायेगा।
उन्होंने बताया कि नाच इंडिया नाच देश क सबसे बड़ा डांसिंग रियलिटी शो है जो कि 29 राज्यों के 210 शहरों में आयोजित होने जा रहा है। आॅडिशंस एवं टाॅप नाइन के प्रतिभागियों को फिनाले में जाने का मौका मिलेगा। इस अवसर पर बाॅलीवुड स्टार नितिन शर्मा ने कहा कि 16 सितम्बर को आॅडिशन में जज के तौर पर इंडियन आईडल के प्रिंस गुप्ता आ रहे हैं। कार्यक्रम में प्रथम आने वाले प्रतिभागियों को वर्गवार सम्मानित भी किया जायेगा।

पालिका के परिसीमन को लेकर ग्रामीण सड़क पर उतरे

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चमोली जिले के विकास खंड जोशीमठ के ग्रामीणों ने नगर पालिका क्षेत्र का परिसीमन करने तथा पांच गांवों को इसमें जोड़ने के विरोध में ग्रामीण सड़कों पर उतर आये हैं। ग्रामीण गांव बचाओ रैली निकालकर नगर पालिका कार्यालय पर प्रदर्शन कर तहसील प्रांगण में धरना दे रहे हैं।
पांच गांवों को नगर पालिका जोशीमठ में जोड़ने के विरोध में मंगलवार को गांवों के ग्रामीणों ने जोशीमठ पहुंचकर नगर पालिका के कार्यालय पर गांव बचाओ रैली के साथ प्रदर्शन किया। उसके बाद ग्रामीणों का जुलूस तहसील प्रांगण पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने धरने के माध्यम से एक ज्ञापन सूबे के मुख्यमंत्री को भी भेजा है, जिसमें उन्होंने सरकार को परिसीमन के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। धरना-प्रदर्शन करने वालों में हरीश भंडारी, रमेश सती, राकेश भंडारी, ग्राम प्रधान हेमा देवी, बलवंत भंडारी, विक्रम सिंह कुंवर आदि शामिल थे।

शिक्षा मंत्री को स्कूलों में न घुसने दें शिक्षकः शिवानंद

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मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वमी शिवांनद सरस्वती महाराज ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय द्वारा विगत दिन शिक्षकों की क्लास लेने और अपमान करने की जमकर निंदा की। वैसे शिक्षा मंत्री के इस व्यवहार के सोशल मीडिया में आने के बाद से जमकर निंदा हो रही है। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने कहा कि जिस शिक्षामंत्री को खुद विषय का ज्ञान नहीं है, वह शिक्षकों के ज्ञान की क्या परीक्षा लेगा। ऐसे शिक्षामंत्री को सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि वे अपनी मर्यादा का ध्यान रखकर विद्यार्थियों को शिक्षा दें और ऐसे शिक्षामंत्री को स्कूलों में घुसने न दें।

विदित हो कि शिक्षा मंत्री द्वारा एक स्कूल के निरीक्षण के दौरान बच्चों को पढ़ा रही एक शिक्षका का शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने क्लास रूम में ही टेस्ट लेना शुरू कर दिया था और उसी दौरान उनका अपने शब्दों के बाणों से अपमान भी किया। स्वामी शिवानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करें और दूसरों से भी कराएं। उनका कहना है कि कोई भी कानून को हाथ में न लें। अगर सरकार फिर से खनन खोलने की अनुमति देती है तो मातृ सदन इसके विरोध में तपस्या करेगा। बता दें कि बीते रोज प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बरसात बाद खनन खोलने संबंधी बयान दिया था।

पंद्रह फीट लंबा किंग कोबरा पकड़ा

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पन्द्रह फीट लंबा किंग कोबरा कौतुहल का केन्द्र बना रहा। क्लेमनटाउन क्षेत्र में एक सैन्य अधिकारी के घर देर रात्रि किंग कोबरा पकड़ा गया,जो लगभग 15 फीट लंबा और 15 किलो वजनी था। आशारोड़ी वन विभाग की टीम को 108 के माध्यम से सूचना मिली कि क्लेमनटाउन क्षेत्र में एक सैन्य अधिकारी के घर एक सांप मिल गया है। सूचना मिलने पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पाया कि सैन्य अधिकारी के घर में एक सांप घुसा हुआ है। वन विभाग की टीम ने प्रयासकर उक्त सांप को कब्जे में ले लिया। वन विभाग के कर्मचारियों के अनुसार यह सांप 15 फीट लंबा वह 15 किलो वजन का है जो विशेष खूखार किंग कोबरा प्रजाति का है।

टीम द्वारा पकड़े गए सांप को वन विभाग मुख्यालय लाया गया,जहां सूचना मिलने पर देखने वालों की भीड़ लग गई। किन्तु विभाग की मुस्तैदी के कारण इस किंग कोबरा सांप को राजाजी नैशनल पार्क में छोड़ दिया गया है। किंग कोबरा टीम में सर्प विशेषज्ञ एएसओ अमित भट्ट,प्रभारी रवि जोशी नितिन क्षेत्री, वीर ङ्क्षसह क्षेत्री व आशारोड़ी वन विभाग के प्रदीप रस्तोगी व चन्द्रमोहन असवाल शामिल थे। इस सांप के पकड़े जाने और राजाजी पार्क में छोड़ जाने की चर्चा बनी हुई है। लोग इस विशेष प्रजाति के सांप को एक बार देखना चाहते हैं। 

विद्या मंदिर को भेंट की बस, सीएम ने झण्डी दिखाकर रवाना किया

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में हंस फाउण्डेशन द्वारा सरस्वती विद्या मन्दिर माण्डूवाला एवं काहन चन्द बोहरा शिशु मन्दिर अटकफार्म को भेंट की गई बसों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने हंस फाउण्डेशन के संस्थापक भोले जी महाराज एवं माता मंगला के सामाजिक सरोकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हसं फाउण्डेशन उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि पूरे देश में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती छात्रों को कम खर्चे पर गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान कर रही है। इस तरह के सहयोग से शिक्षण संस्थाओं का मनोबल बढ़ता है। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय भी मौजूद थे।

राष्ट्रपति के उत्तराखंड दौरे की तैयारियों को लेकर सीएम ने बुलाई बैठक

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को सचिवालय में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के उत्तराखंड सितम्बर माह के द्वितीय पक्ष में प्रस्तावित दौरे की तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने देहरादून शहर की व्यवस्था सुधारने के लिए भी सख्त निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सुरक्षा की दृष्टि से सभी व्यवस्थाएं दुरस्त रखी जाएं। एस.एस.पी देहरादून को सुनियोजित ट्रैफिक प्लान बनाने तथा किसी भी वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रेफिक डायवर्ट प्लान को प्रेस के माध्यम से प्रचार करने के निर्देश दिये, जिससे जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
लोक निर्माण विभाग को सड़कों का समतलीकरण एवं पैचवर्क करने के निर्देश दिये। वन विभाग को एमडीडीए के साथ चिन्हित स्थानों पर सौन्दर्यीकरण करने तथा जल संस्थान को पानी के लीकेज की मरम्मत करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्युत विभाग को निर्देश दिये के यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं भी झूलते हुए तार न हों। एमडीडीए को चिन्हित स्थानों पर हैरिटेज लाइटिंग, पेंटिंग एवं सौन्दर्यीकरण करने को कहा। एनएचआई के कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एनएचआई के अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने कहा कि राष्ट्रपति के उत्तराखंड आगमन की तैयारियों को लेकर सभी कार्यदाई संस्थाएं समन्वय बनाकर कार्य करें। सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण कर ली जाए। कार्यों के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। बैठक में सचिव श्रीमती राधिका झा, सचिव अमित सिंह नेगी, सचिव अरविन्द सिंह हयांकी, अपर सचिव वी.षणमुगम,अपर सचिव विनय शंकर पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून एस.ए.मुरूगेशन, एस.एस.पी निवेदिता कुकरेती आदि उपस्थित रहे।

निर्माणाधीन डोबरा चांठी पुल को लेकर फिर गर्माई सियासत

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टिहरी झील पर इंटरनेशनल तकनीक से निर्माणाधीन डोबरा चांठी पुल का निर्माण पूरा करने के लिए भाजपा सरकार का डबल इंजन फेल हो गया है। केन्द्र सरकार ने अपने हिस्से की आधी धनराशि अभी तक जारी नहीं की है, जिससे प्रतापनगर के लाखों लोगों की जीवनरेखा डोबरा-चांठी पुल का भविष्य अधर में लटक गया है। यह आरोप प्रतापनगर के पूर्व काग्रेंसी विधायक विक्रम सिंह नेगी ने लगाया है।

उन्होंने कहा कि डोबरा-चांठी पुल के आई.आई.टी डिजाईन फेल होने के कारण पिछली कांग्रेसी सरकार ने दुनियाभर से तकनीक खोजकर पुल के लिए ग्लोगल टैन्डर करवाकर डिजाइन का कार्य कोरिया देश को दिया था। अतराराष्ट्रीय तकनीक से तैयार हो रहे इस पुल के लिए आधा-आधा धन उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार ने देना था। नेगी ने कहा कि हमने पुल का पैसा देकर अपने कार्यकाल में पुल के दोनों टावरों को नए तकनीक से मजबूत किया, चांठी की तरफ पुल तक सड़क और करीब 20 मीटर स्पान का एप्रोच पुल तैयार करवाया, पुल निर्माण के लिए आवश्यक कैटवाक के तार लगवाए, इस पुल के निर्माण के सभी उपकरण और रस्से भी डोबरा की साइट में उपलब्ध हैं। तब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्य में एक ही इंजन की सरकार है, भाजपा को वोट दो, तो डबल इंजन की सरकार डबल काम करेगी।
उन्होंने कहा कि कहा कि लगता है कि डबल इंजन डोबरा में फेल हो गया हैं और प्रतापनगर में तो सिंगल इंजन भी अभी तक स्टार्ट नही हो पाया है। नेगी ने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रतापनगर की लाखों की जनता के साथ इस छल को बर्दास्त नही किया जाएगा। अगर तुरन्त भाजपा की मोदी सरकार ने डोबरा पुल के लिए अपने हिस्से का अंश जारी नही किया तो कांग्रेस इसके खिलाफ निर्णायक आंदोलन करेगी

तीर्थनगरी में लंबे अरसे से चला आ रहा था किडनी का काला कारोबार

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तीर्थनगरी से कुछ किमी दूर एक धर्मार्थ अस्पताल में अधर्म चल रहा था। कहने के लिए डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है, लेकिन यहां के डॉक्टर जो कुछ कर रहे थे वह किसी हैवानियत से कम नहीं। अस्पताल में संगठित रूप से किडनी की खरीद-फरोख्त का धंधा चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यहां गुर्दा प्रत्यारोपण के सारे संसाधन मौजूद मिले, जबकि अस्पताल इसके लिए अधिकृत नहीं है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रदेश में गुर्दा प्रत्यारोपण का लाइसेंस मात्र दो ही अस्पताल के पास है। एक श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल और दूसरा हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट है।

दरअसल किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया इतनी भी सरल नहीं है। इसके लिए बकायदा नियम बनाए गए हैं। जिसके तहत अधिकृत अस्पताल के पास एक अधिकारिक कमेटी होती है जो डोनेशन की इजाजत देती है। जीवित व्यक्ति द्वारा किडनी दान करने के मामले में दानदाता के पास मरीज से पारिवारिक संबंध का सबूत होना जरूरी है। हर माह होने वाले किडनी ट्रांसप्लांट की जानकारी मूल्यांकन के लिए स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य है। किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है। किडनी देने के समय डॉक्टरों का एक पैनल दानकर्ता से इस बात की पड़ताल करता है कि कहीं उससे अवैध तरीके से तो किडनी नहीं ली जा रही है या फिर किसी दवाब में उससे किडनी ली जा रही हो। इसके लिए चिकित्सकों के एक पैनल का गठन किया जाता है। उसके आधार पर ही अंतिम फैसला होता है।

लंबे समय से चला आ रहा था किडनी का काला कारोबार
गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल में किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्य जांच टीम जांच के लिए अस्पताल भेजी, जिसमें नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हरीश बसेरा, सर्जन डॉ. कुश ऐरन व एनेस्थेटिक डॉ. एसके वर्मा शामिल रहे। जिनकी जांच में इस बात की तस्दीक हुई है कि अस्पताल में लंबे वक्त से अवैध तरीके से गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा रहा है।

अस्पतालों तक फैला ब्रोकरों का जाल
किडनी फेल होने वाले या किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को नियमित रूप से डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। जहां ब्रोकरों ने अपना जाल फैलाया हुआ है। वह इस किडनी रैकेट में एजेंट के तौर पर काम करते हैं। वह मरीज, अस्पताल और सबसे महत्वपूर्ण डोनर के बीच की कड़ी हैं। ब्रोकर न सिर्फ एक उपयुक्त ब्लड ग्रुप के डोनर की व्यवस्था करता है, बल्कि कानून की खामियों का फायदा उठाकर गलत ढंग से मरीज की फाइल बनाता है। अगर डोनर मरीज का नजदीकी रिश्तेदार दिखा दिया जाए तो फाइल को सिर्फ आंतरिक कमेटी से स्वीकृति की जरुरत होती है। ऐसे में पुलिस की अब इस नेटवर्क पर भी निगाह है।

किडनी के लिए मुंह मांगी रकम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, किडनी की रकम ग्राहकों की हैसियत पर तय होती है। व्यापारिक घराने से ताल्लुक रखने वाले और विदेशों में नौकरी करने वाले कई रोगी अपनी जान बचाने के लिए किडनी के लिए मुंहमांगी रकम देने को तैयार हो जाते हैं। पुलिस अब उन रोगियों से भी संपर्क साध रही है जिन्हें बीते कुछ वक्त में किडनी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।

ये हैं नियम
-अंग प्रत्यारोपण के लिए अस्पताल में दो तरह की कमेटियां होती हैं।
-नजदीकी रिश्तेदारों से अंगदान के लिए इंटरनल असेसमेंट कमेटी होती है, जिसमें डॉक्टरों के अलावा सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल होते हैं।
-दूर के रिश्तेदारों या परिचितों से अंगदान प्रत्यारोपण के लिए बाहरी कमेटी होती है। इस कमेटी में सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
-अंगदान प्रक्रिया के लिए लीगल दस्तावेजों के अलावा नोटरी से शपथ पत्र भी देना पड़ता है।
-अंगदान प्रत्यारोपण में अस्पताल की कमेटी मरीज और डोनर का सत्यापन करने के बाद ट्रांसप्लांट की स्वीकृति देती है।
-कमेटी की स्वीकृति के बिना डॅाक्टर प्रत्यारोपण नहीं कर सकते हैं।

खरीदने वाला दोषी और बेचने वाला भी
अंगदान प्रत्यारोपण के लिए मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 बना हुआ है। वर्ष 2014 में इस अधिनियम में संशोधन के जरिए नई अधिसूचना जारी की गई। इस कानून के तहत अंगो की खरीद-फरोख्त करना गैरकानूनी धंधा है। इस नियम की अवहेलना व अंगों की खरीद-फरोख्त करने पर तीन साल से लेकर 10 साल तक की सजा और 30 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

आसान नहीं है प्रत्यारोपण
– जब डॉक्टर स्पष्ट करता है कि गुर्दे ने काम करना बंद कर दिया है।
– कानूनी तौर पर रिश्तेदारों को दाता के रूप में चुना जाता है। या कोई अन्य सहमति से दान कर सकता है।
– दाता की जांच कर पता लगाया जाता है कि गुर्दा मरीज के अनुरूप है कि नहीं।
– पहले दाता की लेप्रोस्कोपी की जाती है। गुर्दे को बाहर निकालकर उसे संभालकर रखा जाता है।
– मरीज की ओपन सर्जरी की जाती है। इसके लिए रोशनी के साथ हवादार वातावरण की आवश्यकता होती है।
– ट्रांसप्लांट योग्य डॉक्टर, सर्जन, और यूरोलॉजिस्ट की मौजूदगी में होता है।