Page 528

विद्या मंदिर को भेंट की बस, सीएम ने झण्डी दिखाकर रवाना किया

0

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में हंस फाउण्डेशन द्वारा सरस्वती विद्या मन्दिर माण्डूवाला एवं काहन चन्द बोहरा शिशु मन्दिर अटकफार्म को भेंट की गई बसों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने हंस फाउण्डेशन के संस्थापक भोले जी महाराज एवं माता मंगला के सामाजिक सरोकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हसं फाउण्डेशन उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि पूरे देश में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती छात्रों को कम खर्चे पर गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान कर रही है। इस तरह के सहयोग से शिक्षण संस्थाओं का मनोबल बढ़ता है। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय भी मौजूद थे।

राष्ट्रपति के उत्तराखंड दौरे की तैयारियों को लेकर सीएम ने बुलाई बैठक

0

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को सचिवालय में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के उत्तराखंड सितम्बर माह के द्वितीय पक्ष में प्रस्तावित दौरे की तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने देहरादून शहर की व्यवस्था सुधारने के लिए भी सख्त निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सुरक्षा की दृष्टि से सभी व्यवस्थाएं दुरस्त रखी जाएं। एस.एस.पी देहरादून को सुनियोजित ट्रैफिक प्लान बनाने तथा किसी भी वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रेफिक डायवर्ट प्लान को प्रेस के माध्यम से प्रचार करने के निर्देश दिये, जिससे जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
लोक निर्माण विभाग को सड़कों का समतलीकरण एवं पैचवर्क करने के निर्देश दिये। वन विभाग को एमडीडीए के साथ चिन्हित स्थानों पर सौन्दर्यीकरण करने तथा जल संस्थान को पानी के लीकेज की मरम्मत करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्युत विभाग को निर्देश दिये के यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं भी झूलते हुए तार न हों। एमडीडीए को चिन्हित स्थानों पर हैरिटेज लाइटिंग, पेंटिंग एवं सौन्दर्यीकरण करने को कहा। एनएचआई के कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एनएचआई के अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने कहा कि राष्ट्रपति के उत्तराखंड आगमन की तैयारियों को लेकर सभी कार्यदाई संस्थाएं समन्वय बनाकर कार्य करें। सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण कर ली जाए। कार्यों के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। बैठक में सचिव श्रीमती राधिका झा, सचिव अमित सिंह नेगी, सचिव अरविन्द सिंह हयांकी, अपर सचिव वी.षणमुगम,अपर सचिव विनय शंकर पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून एस.ए.मुरूगेशन, एस.एस.पी निवेदिता कुकरेती आदि उपस्थित रहे।

निर्माणाधीन डोबरा चांठी पुल को लेकर फिर गर्माई सियासत

0

टिहरी झील पर इंटरनेशनल तकनीक से निर्माणाधीन डोबरा चांठी पुल का निर्माण पूरा करने के लिए भाजपा सरकार का डबल इंजन फेल हो गया है। केन्द्र सरकार ने अपने हिस्से की आधी धनराशि अभी तक जारी नहीं की है, जिससे प्रतापनगर के लाखों लोगों की जीवनरेखा डोबरा-चांठी पुल का भविष्य अधर में लटक गया है। यह आरोप प्रतापनगर के पूर्व काग्रेंसी विधायक विक्रम सिंह नेगी ने लगाया है।

उन्होंने कहा कि डोबरा-चांठी पुल के आई.आई.टी डिजाईन फेल होने के कारण पिछली कांग्रेसी सरकार ने दुनियाभर से तकनीक खोजकर पुल के लिए ग्लोगल टैन्डर करवाकर डिजाइन का कार्य कोरिया देश को दिया था। अतराराष्ट्रीय तकनीक से तैयार हो रहे इस पुल के लिए आधा-आधा धन उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार ने देना था। नेगी ने कहा कि हमने पुल का पैसा देकर अपने कार्यकाल में पुल के दोनों टावरों को नए तकनीक से मजबूत किया, चांठी की तरफ पुल तक सड़क और करीब 20 मीटर स्पान का एप्रोच पुल तैयार करवाया, पुल निर्माण के लिए आवश्यक कैटवाक के तार लगवाए, इस पुल के निर्माण के सभी उपकरण और रस्से भी डोबरा की साइट में उपलब्ध हैं। तब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राज्य में एक ही इंजन की सरकार है, भाजपा को वोट दो, तो डबल इंजन की सरकार डबल काम करेगी।
उन्होंने कहा कि कहा कि लगता है कि डबल इंजन डोबरा में फेल हो गया हैं और प्रतापनगर में तो सिंगल इंजन भी अभी तक स्टार्ट नही हो पाया है। नेगी ने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रतापनगर की लाखों की जनता के साथ इस छल को बर्दास्त नही किया जाएगा। अगर तुरन्त भाजपा की मोदी सरकार ने डोबरा पुल के लिए अपने हिस्से का अंश जारी नही किया तो कांग्रेस इसके खिलाफ निर्णायक आंदोलन करेगी

तीर्थनगरी में लंबे अरसे से चला आ रहा था किडनी का काला कारोबार

0

तीर्थनगरी से कुछ किमी दूर एक धर्मार्थ अस्पताल में अधर्म चल रहा था। कहने के लिए डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है, लेकिन यहां के डॉक्टर जो कुछ कर रहे थे वह किसी हैवानियत से कम नहीं। अस्पताल में संगठित रूप से किडनी की खरीद-फरोख्त का धंधा चल रहा था। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यहां गुर्दा प्रत्यारोपण के सारे संसाधन मौजूद मिले, जबकि अस्पताल इसके लिए अधिकृत नहीं है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रदेश में गुर्दा प्रत्यारोपण का लाइसेंस मात्र दो ही अस्पताल के पास है। एक श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल और दूसरा हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट है।

दरअसल किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया इतनी भी सरल नहीं है। इसके लिए बकायदा नियम बनाए गए हैं। जिसके तहत अधिकृत अस्पताल के पास एक अधिकारिक कमेटी होती है जो डोनेशन की इजाजत देती है। जीवित व्यक्ति द्वारा किडनी दान करने के मामले में दानदाता के पास मरीज से पारिवारिक संबंध का सबूत होना जरूरी है। हर माह होने वाले किडनी ट्रांसप्लांट की जानकारी मूल्यांकन के लिए स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य है। किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है। किडनी देने के समय डॉक्टरों का एक पैनल दानकर्ता से इस बात की पड़ताल करता है कि कहीं उससे अवैध तरीके से तो किडनी नहीं ली जा रही है या फिर किसी दवाब में उससे किडनी ली जा रही हो। इसके लिए चिकित्सकों के एक पैनल का गठन किया जाता है। उसके आधार पर ही अंतिम फैसला होता है।

लंबे समय से चला आ रहा था किडनी का काला कारोबार
गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल में किडनी रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्य जांच टीम जांच के लिए अस्पताल भेजी, जिसमें नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हरीश बसेरा, सर्जन डॉ. कुश ऐरन व एनेस्थेटिक डॉ. एसके वर्मा शामिल रहे। जिनकी जांच में इस बात की तस्दीक हुई है कि अस्पताल में लंबे वक्त से अवैध तरीके से गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा रहा है।

अस्पतालों तक फैला ब्रोकरों का जाल
किडनी फेल होने वाले या किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को नियमित रूप से डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। जहां ब्रोकरों ने अपना जाल फैलाया हुआ है। वह इस किडनी रैकेट में एजेंट के तौर पर काम करते हैं। वह मरीज, अस्पताल और सबसे महत्वपूर्ण डोनर के बीच की कड़ी हैं। ब्रोकर न सिर्फ एक उपयुक्त ब्लड ग्रुप के डोनर की व्यवस्था करता है, बल्कि कानून की खामियों का फायदा उठाकर गलत ढंग से मरीज की फाइल बनाता है। अगर डोनर मरीज का नजदीकी रिश्तेदार दिखा दिया जाए तो फाइल को सिर्फ आंतरिक कमेटी से स्वीकृति की जरुरत होती है। ऐसे में पुलिस की अब इस नेटवर्क पर भी निगाह है।

किडनी के लिए मुंह मांगी रकम
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, किडनी की रकम ग्राहकों की हैसियत पर तय होती है। व्यापारिक घराने से ताल्लुक रखने वाले और विदेशों में नौकरी करने वाले कई रोगी अपनी जान बचाने के लिए किडनी के लिए मुंहमांगी रकम देने को तैयार हो जाते हैं। पुलिस अब उन रोगियों से भी संपर्क साध रही है जिन्हें बीते कुछ वक्त में किडनी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।

ये हैं नियम
-अंग प्रत्यारोपण के लिए अस्पताल में दो तरह की कमेटियां होती हैं।
-नजदीकी रिश्तेदारों से अंगदान के लिए इंटरनल असेसमेंट कमेटी होती है, जिसमें डॉक्टरों के अलावा सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल होते हैं।
-दूर के रिश्तेदारों या परिचितों से अंगदान प्रत्यारोपण के लिए बाहरी कमेटी होती है। इस कमेटी में सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
-अंगदान प्रक्रिया के लिए लीगल दस्तावेजों के अलावा नोटरी से शपथ पत्र भी देना पड़ता है।
-अंगदान प्रत्यारोपण में अस्पताल की कमेटी मरीज और डोनर का सत्यापन करने के बाद ट्रांसप्लांट की स्वीकृति देती है।
-कमेटी की स्वीकृति के बिना डॅाक्टर प्रत्यारोपण नहीं कर सकते हैं।

खरीदने वाला दोषी और बेचने वाला भी
अंगदान प्रत्यारोपण के लिए मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 बना हुआ है। वर्ष 2014 में इस अधिनियम में संशोधन के जरिए नई अधिसूचना जारी की गई। इस कानून के तहत अंगो की खरीद-फरोख्त करना गैरकानूनी धंधा है। इस नियम की अवहेलना व अंगों की खरीद-फरोख्त करने पर तीन साल से लेकर 10 साल तक की सजा और 30 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

आसान नहीं है प्रत्यारोपण
– जब डॉक्टर स्पष्ट करता है कि गुर्दे ने काम करना बंद कर दिया है।
– कानूनी तौर पर रिश्तेदारों को दाता के रूप में चुना जाता है। या कोई अन्य सहमति से दान कर सकता है।
– दाता की जांच कर पता लगाया जाता है कि गुर्दा मरीज के अनुरूप है कि नहीं।
– पहले दाता की लेप्रोस्कोपी की जाती है। गुर्दे को बाहर निकालकर उसे संभालकर रखा जाता है।
– मरीज की ओपन सर्जरी की जाती है। इसके लिए रोशनी के साथ हवादार वातावरण की आवश्यकता होती है।
– ट्रांसप्लांट योग्य डॉक्टर, सर्जन, और यूरोलॉजिस्ट की मौजूदगी में होता है।

छात्रों के हित में सरकार तेजी से कर रही है काम : धन सिंह रावत

0

प्रदेश के उच्च शिक्षा, सहकारिता एवं दुग्ध विकास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा सोमवार सरदार भगत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शौर्य दीवार का अनावरण किया। इस दौरान 51.58 लाख से निर्मित 50 केवी सौर उर्जा संयत्र का लोकार्पण व महाविद्यालय मे 53 लाख से बनने वाले वाचनालय भवन का शिलान्यास किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत द्वारा दीप प्रज्जवन कर किया गया। रावत ने कहा कि सरकार पहली बार छात्र हितों के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में वर्तमान में 02 लाख 76 हजार छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उनके लिए सरकार द्वारा 02-02 लाख का निःशुल्क बीमा कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में कार्यरत प्राचार्यों, उपनल कार्मिकों, चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों का भी बीमा किया जायेगा। उन्होंनेे कहा कि जो छात्र विदेशों में अध्ययन कर रहे हैं, उन्हे 50 लाख का ऋण 08 प्रतिशत ब्याज की दर से उपलब्ध कराया जायेगा। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं को 20 लाख का एजूकेशन लोन दिया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि बच्चों को पीसीएस, आईआईटी कराने हेतु भी प्रशिक्षित किया जाएगा। उत्तराखण्ड में आईएएस व पीसीएस अधिक से अधिक लोग निकाले इसके लिए सभी महाविद्यालय मे कोचिंग क्लास प्रारम्भ की जाएगी, जिसमे जनपद मे कार्यरत आईएएस अधिकारी भी उनका मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन अभिभावकों की आय एक लाख से कम हैं, ऐसे 100 बच्चों को निःशुल्क पीएचडी कराई जायेगी।
उन्होंने कहा कि सभी कॉलेजों में 180 दिन की पढाई करनी अवश्य होगी और ऐसी व्यवस्थाओं को 06 माह के अन्दर सभी महाविद्यालयों की आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाएंगी। 04 माह के अन्दर सभी कॉलेजों में प्रोफेसरो की नियुक्ति कर दी जाएगी। उन्होंने कहा सभी डिग्री कॉलेजो में स्वैच्छिक रक्तदान किया जाएगा जो सेना के काम आएगा।
उन्होंने कहा कि इस सत्र से डिग्री को आधार कार्ड से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा सभी महाविद्यालयों में अगले सत्र से योग, वेद व संस्कृत की कक्षाए भी कराई जाएंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजकुमार ठुकराल ने कहा विज्ञान संकाय मे भवन निर्माण हेतु 03 करोड़ रुपये आवंटन करने, विज्ञान संकाय में एमएससी मे जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, गणित व सांख्यिकी मे इसी सत्र से प्रत्येक विभाग मे 02-02 पदो की सृजित कर कक्षाएं प्रारम्भ करने की मांग की गई। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य जीएस विष्ट द्वारा महाविद्यालय की आख्या प्रस्तुत की।

फिर नहीं पहुंची 108, दूध की गाड़ी में जन्मी बच्ची

0

राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं की हालत लगातार खराब होती जा रही है। रविवार को जहां गोपेश्वर में एंबुलेंस सेवा 108 के नहीं आने के कारण कूड़ा उठाने वाली गाड़ी में डिलीवरी करानी पड़ी थी, तो सोमवार को टिहरी जनपद में दूध की गाड़ी में एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया, हालांकि, जज्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं।

टिहरी जिले के दूरस्थ क्षेत्र भिलंगना ब्लॉक के मोल्डा गांव निवासी विनोद ममगाईं की पत्नी प्रिंयका को रविवार देर रात रात प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने महिला को अस्पताल ले जाने के लिए 108 आपातकालीन सेवा को कॉल की। मगर 108 आपालकालीन सेवा काफी देर के बाद भी नहीं आई। इसके बाद गांव के ही हीरामाणि ममगाईं महिला प्रियंका को दूध बेचने वाली गाड़ी से पिलखी स्थित अस्पताल ले जाने के लिए निकले। कुछ दूर जाने के बाद महिला की पीड़ा बढ़ गई और 12 बजे के करीब महिला ने एक बच्ची को गाड़ी में ही जन्म दिया। इसके बाद जच्चा-बच्चा को पिलखी अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों के अनुसार दोनों स्वस्थ हैं। इस घटना को लेकर ग्रामीणों में रोष है।

खतरों को न्यौता देते सड़कों के गड्ढे

0

कांवड़ यात्रियों के आवागमन और अन्य दिनों आम लोगों के लिए सुविधा बनने वाली कांवड़ पटरी जगह-जगह टूटी होने के कारण हादसों को दावत दे रही है। वहीं, इससे गंगनहर के लिए भी खतरा बढ़ रहा है।
रुड़की से हरिद्वार और मुजफ्फर नगर की ओर कांवड़ यात्रा के दबाव को कम करने के लिए गंगनहर के किनारे कांवड़ पटरी का निर्माण किया गया है। बारिश में यह पूरी तरह से टूट गई है। कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। सड़कों का अधिक कटाव होने के कारण नहर का पानी आबादी क्षेत्र में घुसने का खतरा भी बना हुआ है, वहीं इस मार्ग पर रात में वाहन इन गड्ढों में गिर सकते हैं। स्थानीय लोगों की तमाम शिकायतों के बावजूद विभाग इनकी ओर ध्यान नही दे रहा है। करीब 15 दिन पहले पीरबाबा कॉलोनी के समीप टूटी कांवड़ पटरी को विभाग द्वारा मिट्टी डालकर भरा गया। उसपर चलने वाले राहगीरों के लिए हादसों का खतरा बरकार है। अब मोहनपुरा मोहमदपुर के समीप कांवड़ पटरी पर बनी एक पुलिया का एक बड़ा हिस्सा जमीन में धंस गया है और बड़ा गढ्ढा राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना है। ग्रामीण संदीप, कुशलवीर, सुभाष राठी, नीरज कुमार, मनीष कुमार, संजय कुमार, संजय राठी, दीपक धारीवाल, महिपाल, कल्लू आदि ने इस मामले में लोक निर्माण विभाग में शिकायत की है। उनका कहना है इस रास्ते से स्कूली बच्चों के अलावा काफी संख्या में राहगीर गुजरते हैं और विभाग इस ओर से आंखें मूंदे बैठा है।

आकस्मिक निरीक्षण में स्कूलों से गायब मिले पांच शिक्षक

0

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लापरवाही का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। विभाग के तमाम कड़े दिशा निर्देशों का शिक्षक जमकर मखौल उड़ा रहे हैं। आलम यह है कि सोमवार को विभाग द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण में प्रदेश के चार जनपदों के विभिन्न स्कूलों में पांच शिक्षक गैरहाजिर पाए गए।

सरकारी स्कूलों को ढर्रे पर लाने की शिक्षा विभाग की तमाम कोशिशें फेल साबित हो रही हैं। खास बात यह कि विभाग के प्रयासों को स्कूलों में तैनात शिक्षक ही पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि विभाग द्वारा सोमवार को प्रदेश के चार जनपदों के सरकारी स्कूलों में किए गए आकस्मिक निरीक्षण के बाद सामने आए आंकड़े बता रहे हैं। सोमवार को महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड कैप्टन आलेक शेखर तिवारी के निर्देश पर चार जिलों के मंडलीय, जनपदीय व विकासखंड स्तर के अधिकारियों ने प्रारंभिक व माध्यमिक विद्यालयों में आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण देहरादून, पौड़ी, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिलों के 75 स्कूलों में किया गया। निरीक्षण के दौरान पांच शिक्षक बिना अनुमति के स्कूलों से गैरहाजिर पाए गए।
अकेले देहरादून से चार शिक्षक गैरहाजिर
शिक्षा नगरी देहरादून की बात करें तो यहां सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के गैर हाजिर रहने की स्थिति बाकी सभी जिलों की तुलना में सबसे बुरी है। यह हम नहीं बल्कि निरीक्षण से सामने आए परिणाम इसकी तस्दीक करते हैं। काम से मुंह मोड़ने का आलम यह है कि चार जिलों में निरीक्षण के दौरान गैरहाजिर शिक्षकों की संख्या राजधानी में सबसे ज्यादा है। पांच में से चार शिक्षक अकेले देहरादून जिले में गैरहाजिर पाए गए। खास बात यह कि इन चारों शिक्षकों में से तीन शिक्षक एक ही स्कूल से गायब मिले।
दुर्गम में देंगे सेवाएं
निरीक्षण के बाद विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया है। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा कै. आलोक शेखर ने बताया कि बिना अवकाश स्वीकृति के अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों को दुर्गम स्थानों में स्थानांतरित किए जाने के लिए नीति बनाए बनाई गई है। जिसके तहत स्कूलों में आकस्मिक निरीक्षण में अनुपस्थित पाए जाने वाले शिक्षकों को दुर्गम स्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा। दुर्गम में सेवाएं देने की नीति के तहत विभाग निरंतर स्कूलों से गायब रहने वाले शिक्षकों के रिकार्ड खंगालेगा। जिसके बाद ऐसे शिक्षकों को दुर्गम में भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि स्कूलों की गुणवत्ता विभाग की पहली प्राथमिकता है। ऐसे में शिक्षकों की गैरहाजिरी बेहद संजीदा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि शिक्षक के गैर हाजिर रहने से बच्चों को शिक्षित करने का कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में बच्चे भी स्कूलों से गैर हाजिर हो रहे हैं।
यह शिक्षक रहे गैरहाजिर

  • बिजेंद्र सिंह रावत, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, देहरादून
  • प्रतिक्षा पुंडीर, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कौलागढ़, देहरादून
  • अमर सिंह, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कौलागढ़, देहरादून
  • अनीता सकलानी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय कौलागढ़, देहरादून
  • सुरेश जोशी, राजकीय इंटर कॉलेज, सितारगंज, ऊधमसिंह नगर

इन स्कूलों में हुआ निरीक्षण

  • जिला स्कूल की संख्या बिना स्वीकृत अवकाश गैरहाजिर
  • देहरादून 41 04
  • पौड़ी 09 —
  • नैनीताल 23 —
  • ऊधमसिंह नगर 02 01
  • कुल 75 05 

सांसद निशंक को मिला इण्डोनेशिया सरकार का न्यौता

0

लोकसभा में सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष और उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक को इण्डोनेशिया सरकार से विधिवत आमंत्रण मिला है। इस कार्यक्रम में डाॅ. निशंक 14 से 19 सितंबर तक हो रहे इस अंतर्राष्ट्रीय शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करेंगे। जहां वे भारतीय संस्कृति और उसके मानवीय मूल्यों पर व्याखान देंगे।
गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की इण्डोनेशिया यात्रा की 90 वीं वर्षगांठ पर इण्डोनेशिया सरकार और भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार का आयोजन 14 से 19 सितंबर तक योगायाकाती में किया जा रहा है। इण्डोनेशिया दूतावास के शिक्षा और संस्कृति में प्रभारी प्रोफेसर इवान प्रानातो ने डाॅ. निशंक के दिल्ली स्थित आवास पर मिल कर उन्हें विधिवत निमंत्रण दिया। भारतीय कला, संस्कृति, स्थापत्य कला, मूर्तिकला, भाषा, चित्रकला, नृत्य का इण्डोनेशिया पर गहरा प्रभाव रहा है। इसी के चलते इण्डोनेशिया सरकार द्वारा गुरूदेव की यात्रा की वर्षगांठ को बड़े पैमाने पर मनाने का निर्णय लिया गया है।
डा. निशंक ने बताया कि भारतीय संस्कृति और उसके मानवीय कूल्यों पर व्याखान देंगे। उन्होंने कहा कि हिमालय भारतीय सभ्यता का जन्मदाता एवं पोषक रहा है और वे हिमालय से भारत की सद्भावना लेकर वहां जा रहे हैं। डाॅ. निशंक ने आशा प्रकट की कि उनकी इस यात्रा से दोनों देश अत्यंत निकट आएंगे। डाॅ. निशंक के साथ उच्च स्तरीय शिष्टमंडल भी दौरे पर जाएगा। योगायाती में हो रही इस महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया भर से विद्वान जमा होंगे।
डाॅ. निशंक ने बताया कि वे यात्रा को लेकर बेहत उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति राष्ट्र का प्राण है और इण्डोनेशिया द्वारा भारतीय संस्कृति को पुष्पित पल्लवित किया जाना अद्वितीय है। कहा कि भारत इण्डोनेशिया विश्व शांति बंधुत्व के लिए बड़ा कार्य कर सके हैं। सांसद निशंक ने कहा कि भारत इण्डोनेशिया को सामरिक साझीदार करार दिया। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों, संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन की इण्डोनेशिया ने अनूठी मिसाल पेश की है।
प्रोफेसर इवान प्रांतो ने डाॅ. निशंक की साहित्य पर्यावरण, गंगा सफाई हिमालय के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सहाहना करते हुए कहा कि उनका देश भारत और इण्डोनेशिया के संबंधों को नई उंचाईयों तक ले जाने के लिए कृतसंकल्प है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति के आदान प्रदान में बड़ी ताकत है और घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंधों की मजबूत नींव पर मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की ईमारत खड़ी हो सकती है। डाॅ. प्रांतों ने कहा कि उनका देश डाॅ. निशंक सरीखे विद्वान राजनेता को आमंत्रित करने पर अभिभूत है। रामायण और महाभारत की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि उनका देश इस्लाम धर्मावलम्बी होने के बावजूद भारतीय संस्कृति से बेहद प्यार करता है।

छेड़छाड़ करने के आरोप में सात युवक गिरफ्तार

0

टिहरी जिले के चम्बा के समीप स्थित दिखोल गांव की स्कूली छात्राओं और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने और अश्लील कमेंट करने की शिकायत पर पुलिस ने सात युवकों को गिरफ्तार किया है। युवकों को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा था। मामला दो संप्रदायों से जुड़ा होने के कारण क्षेत्र में तनाव की स्थिथि बन गई है, हालांकि पुलिस ने मामला शांत कराया।
पुलिस के अनुसार, ग्रामीणों ने पुलिस से शिकायत की थी कि टिहरी के पास चम्बा में एक संप्रदाय के कुछ युवक समूह बनाकर छात्राओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश काफी दिन से कर रहे थे। ये युवक नाम बदल कर हिंदु छात्राओं और महिलाओं को परेशान कर रहे थे। 10 सितम्बर की रात्रि पुरानी टिहरी रोड पर सात युवक आती-जाती युवतियों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे। ग्रामीणों ने जब युवकों को देखा तो वे वहीं रूक गए।
ग्रामीण विकास का कहना है कि ये युवक छात्राओं को बर्बाद करने की बात कर रहे थे। इस पर ग्रामीणों ने एकत्र होकर इन सातों युवकों को पकड़ने की कोशिश की तो वे भाग खड़े हुए। हालांकि, ग्रामीणों ने थोड़ी दूरी पर ही उन्हें दबोच लिया। इस पर युवक ग्रामीणों से भिड़ गए और हाथापाई की। इसमें कुछ ग्रामीणों को चोट भी आईं। मुश्किल से ग्रामीणों ने इन युवकों को पकड कर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची चंबा पुलिस ने युवकों को गिरफ्तार कर थाने भेजा। इसके बाद चम्बा बाजार में माहौल तनावपूर्ण हो गया और पूरा बाजार बन्द किया कराया गया। पुलिस ने स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया है।
चंबा थानाध्यक्ष देवेंद्र चौहान ने बताया कि विका रावत की तहरीर पर सात युवकों रिजवान पुत्र इस्माइल खान, सलमान पुत्र खुर्शीद, वरिश पुत्र नसीम, सलमान पुत्र बुंदु ठेकेदार, शाबीर पुत्र कासिम, अबुल कलाम पुत्र खुर्शीद और शाबिर पुत्र मुस्तफा के विरुद्ध धर्म के आधार पर साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है।