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दीपावली पर कुमांऊ को नई ट्रेन का तोहफा

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टनकपुरः दीपावली पर कुमांऊ के लोगों को रेलवे का बडा तोहफा मिलने जा रहा है, अब पहाड का रास्ता कम करने के लिए टनकपुर से मझौला तक चल रहे ब्रॉड गेज रेल लाइन का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। रेलवे विभाग की मानें तो दीपावली पर लोगों को नई ट्रेन की सौगात मिल सकती है।

वर्ष 2016 जून माह में टनकपुर से पीलीभीत तक ब्रॉड गेज करने का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इसके चलते टनकपुर-पीलीभीत रेल सेवा बंद हो गई थी। पीलीभीत से मझौला तक रेल सेवा शुरू हो चुकी है, जबकि टनकपुर से मझौला तक का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। रेलवे अधीक्षक केडी कापड़ी ने बताया कि टनकपुर में दो प्लेटफार्म बनाएं जा रहे हैं। एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए ओवर ब्रिज का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि रेल सेवा शुरू होने से पूर्व ही फुट ओवर ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा यात्री शेड बनकर तैयार हो चुका है, जिसमें 100 से अधिक यात्री बैठ सकते है। यात्रियों के लिए डोरमेट्री सुविधा दी जाएगी, जिसे बनाने का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्टेशन यार्ड में पांच लाइन बिछाई गई है। वहीं ट्रेन को धोने के लिए वॉशिंग पिट का भी निर्माण कार्य चल रहा है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल टनकपुर से शुरू में पैसेंजर ट्रेन चलाई जाएगी, जो बरेली, पीलीभीत, कासगंज तक जाएगी। वाशिंग पिट बनने के बाद टनकपुर से लंबी रेल यात्रा शुरू कर दी जाएगी। वाशिंग यार्ड बनने में अभी करीब एक वर्ष का समय लगेगा। दीपावली पर ट्रेन चलाने की तैयारी चल रही है।

अज्ञात युवकों ने वकील को सरेआम मारी गोली

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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में एक वकील को अज्ञात युवकों ने दिन दहाड़े गोली मार दी। हमले में वकील गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार एडवोकेट सुशील रघुवंशी को उनके घर के बाहर अज्ञात युवकों ने गोली मारी जिसके बाद उन्हें राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में भर्ती कराया गया। जहां पर उनकी हालत गम्भीर देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर के लिये रेफर कर दिया है। आज लगभग 11 बजे एडवोकेट सुशील रघुवंशी अपने घर के बाहर खड़े थे। जिसके बाद सफेद रंग की कार से दो युवक बाहर आये जिन्होंने अचानक गोली चला दी जिसमें सुशील घायल हो गए। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है। डॉक्टरों ने हालात गंभीर बताते हुए तुरंत बाहर रेफर करने को कहा। इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

विडियो साभारः मोहित डिमरी

यहां देखें विडियोः

रिश्वत लेने की वीडियो वायरल, जांच के आदेश

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लक्सर में राजस्व निरीक्षक की रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने के बाद एसडीएम ने इस पर जांच शुरू करा दी है। जांच के बाद पता लगेगा वीडियो असली है या नकली।

लक्सर में सोमवार को राजस्व निरीक्षक बीर सिंह की रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हुई थी। खानपुर के कमलपुर डेरा निवासी किसान ने एसडीएम से मिलकर बताया था कि उसी के गांव का एक परिवार उसके खेत के रास्ते अपने खेतों तक सिंचाई के नाली बनवाना चाहता है। उसने इसकी शिकायत तहसीलदार लक्सर से की थी तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक से मिलने की बात कही। मनप्रीत ने बताया कि राजस्व निरीक्षक ने कहा कि वह रिपोर्ट उसके पक्ष में लगा देगा और उसके एवज में पांच हजार रुपए देने होंगे।
मनप्रीत के अनुसार उसने पांच हजार रुपए राजस्व निरीक्षक को दिए तब उसके पक्ष में रिपोर्ट लगी और आदेश पर सोमवार को राजस्व विभाग ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर नाली भी खुदवा दी। इसके बाद मनप्रीत एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा से मिले और वीडयो रिकॉर्डिंग भी एसडीएम को सौंपी। वहीं एसडीएम ने वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच के बाद कार्रवाई की बात कही।

बाल सुरक्षा: बच्चों को पता हो सही गलत का फर्क

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बीते दिनों में घटित घटनाओं ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। ऐसी घटनाओं से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अलर्ट रखना बेहद जरूरी हो गया है। सुरक्षा के नजिरए से यह बेहद जरूरी है कि बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच का अंतर मालूम हो।

कुछ रोज पहले रायन इंटरनेशनल स्‍कूल में हुई एक बच्‍चे की हत्‍या ने पूरे देश के अभिभावकों को चिंता में डाल दिया। आपका बच्‍चा जिस स्‍कूल में पढ़ने जा रहा है, वहां कितनी सुरक्षा है। इसको लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सीबीएसई ने स्‍कूल-कालेजों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर गाइडलाइन तैयार की है, जिसे हर अभिभावक को जानना बेहद जरूरी है। दरअसल बच्चों से जुड़ी यौन शोषण की बात हो या फिर उत्पीड़न की। ऐसे मामलों में सबसे पहला कारण होता है कि बच्चों को ये मालूम ही नहीं होता कि उन्हें किस तरह से छुआ जा रहा है। ऐसे में परिवार के सदस्यों के लिए जरूरी है कि घर के बच्चों को ये सिखाया जाए कि किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा छूने पर ही इस बात का पता चल जाए कि ये गुड टच है या बैड टच।

सबसे पहले सिखाएं, किस पर यकीन करें और किस पर नहीं:
सीबीएसई की स्टूडेंट काउंसलर व न्यूरो साइक्लॉजिस्ट डात्र सोना कौशल गुप्ता के मुताबिक अभिभावकों को कम से कम 4 साल की उम्र से यह बात समझाना शुरू कर देना चाहिए कि वे किस पर यकीन करें और किस पर नहीं। अगर कोई उसकी जान पहचान का नहीं है तो किसी के साथ नहीं जाना चाहिए। अनजान व्यक्ति से उसे कुछ भी खाने की चीज नहीं लेनी चाहिए। इसके अलावा बच्चों से खुलकर बात करना बेहद जरूरी है। बच्चे को कभी भी ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वह कुछ कहेगा तो उसे डांट पड़ सकती है या उसकी बात अनसुनी कर दी जाएगी।

आराम से समझाएं सारी बातें:
सीनियर क्लीनिकल चाइल्ड साइक्लॉजिस्ट डा. मुकुल शर्मा का कहना है कि बच्चे से जुड़ा यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है, इसलिए इस बारे में बच्चे को बहुत धैर्य और आराम से जानकारी दें। कई बार बच्चों के लिए ये बातें समझना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि बच्चे को ऐसी बातें समझने में समय लगता है। उसे प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बताएं और समझाएं कि उसे इस जगह पर उसके अलावा कोई दूसरा नहीं छू सकता है। इसके अलावा कई बार लोग गोद लेने और चूमने का प्रयास करते हैं। परिवार इसे नजरअंदाज कर देता है। लेकिन ऐसी स्थिति में बच्चों को ये बताना बहुत जरूरी है कि अगर कोई आपको चूूमने या गोद में बैठाने की कोशिश कर रहा है तो इसकी शिकायत अभिभावकों से जरूर करें।
बच्चे को दिलाएं अपने साथ होने का भरोसा:

ऐसे मामलों में बसेस ज्यादा जरूरी है कि बच्चों को अपने माता पिता पर भरोसा हो। अगर उसे कुछ भी गंदा लग रहा हो तो वो अपने माता-पिता को तुरंत बता दे। हर छोटी से छोटी बात मां बाप के साथ साझा करे। दून इंटरनेशनल स्कूल के उप—प्रधानाचार्य दिनेश बड़थ्वाल ने बताया कि कई लोग मानसिक रोगी होते है और बच्चो तक के साथ दुष्कर्म करने से पीछे नहीं हटते। ऐसे में बच्चे को यह जरूर पता होना चाहिए कि गुड टच और बैड टच में क्या फर्क है ताकि मासूम बच्चे किसी की गलत भावनाओं का शिकार न होने पाएं। ऐसी वारदातों से बचाने के लिए इस बारे में सही से शिक्षा दी जाएं।

सीबीएसई ने बनाए हैं नियम:
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने स्‍कूलों में बच्‍चों की सुरक्षा को लेकर एक गाइडलाइन तैयार की है। सीबीएसई ने असे अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड किया है। इसमें सिर्फ उनकी देखरेख के बारे में ही नहीं बल्‍िक, शारीरिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी ध्‍यान रखा गया है। यानी कि स्‍कूल परिसर के अंदर आपके बच्‍चे की सुरक्षा की पूरी जिम्‍मेदारी स्‍कूल प्रशासन की होती है। पांच हिस्सों में बंटी गाइडलाइन में बोर्ड ने न सिर्फ स्कूलों बल्कि अभिभावकों की जिम्मेदारी भी निर्धारित कर रखी है। बोर्ड गाइडलाइन में फिजिकल सेफ्टी सबसे अहम मानी गई है। इसके अलावा इमोशनल सेफ्टी, सोशल सेफ्टी, हैंडल डिजास्‍टर और साइबर सेफ्टी आदि को लेकर भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

हर स्कूल में दिखाई जा रही फिल्में:
विशेषज्ञों की मानें तो छूने भर से ही यह पता चल जाता है कि वह अच्छा स्पर्श है या फिर बुरा। ऐसे में इसके लिए स्कूली स्तर पर इसके लिए जागरुकता लाना बेहतद अहम है। इसी को देखते हुए सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में बीते कुछ वक्त से निरंतर बच्चों को यूट्यूब के माध्यम से गुड टच व बैड टच को लेकर शॉर्ट फिल्मों का दिखाया जा रहा है। ताकि बच्चोें को स्पर्श के दौरान मानसिकता का आभास हो सके।

यह हैं बोर्ड की गाइडलाइन:

  • स्‍कूल के अंदर आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखना।
  • स्‍कूल परिसर में किसी भी तरह की गुप्‍त या छुपी हुई जगह नहीं होनी चाहिए।
  • स्‍कूल में काम करने वाले हर एक व्‍यक्‍ित (टीचर, प्रिंसिपल, चपरासी, अकाउंटेंट, या अन्‍य) के बैकग्राउंड के बारे में पता करने के बाद उन्‍हें काम पर रखना।
  • स्‍कूल परिसर में एक डॉक्‍टर या नर्स की तैनाती होना अनिवार्य।
  • स्‍कूल परिसर से 2 किमी की दूरी पर जो भी हॉस्‍पिटल होगा, उसके साथ टाई अप करना जरूरी।
  • स्‍कूल प्रशासन को चाइल्‍ड प्रोटेक्‍शन पॉलिसी को फॉलो करना जरूरी है। यानी कि बच्‍चे के साथ किसी भी तरह का टॉर्चर, मारपीट या शारीरिक शोषण नहीं किया जा सकता।

पंतनगर में प्लेन हाईजैक, सुरक्षाकर्मियों ने सकुशल छुड़ाया

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रुद्रपुर- पंतनगर एयरपोर्ट पर प्लेन हाईजेक की सूचना से हड़कम्प मच गया। भारी फोर्स तैनात कर किसी तरह से प्लेन को हाईजेकर्स के चुंगल से छुड़ा लिया गया और यात्रियों को सकुशल निकाल दिया गया। मगर ये घटना वास्तव में नहीं बल्कि एक माॅकड्रिल के दौरान हई। इस ड्रिल के सफल परीक्षण पर ऑपरेशन खत्म होते ही एयरपोर्ट डायरेक्टर एसके सिंह ने सभी कमांडो को सफलता पर बधाई दी।

दरअसल पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण प्रक्रिया प्रस्तावित है, जिसके बाद यहां से देश के प्रमुख महानगरों के लिए हवाई सेवाएं प्रारंभ होनी हैं। इसके मद्देनजर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने पंतनगर एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती को लेकर सचेत है। इसी के चलते पंतनगर एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा सुरक्षा संबंधी अलर्टनेस को परखने के लिए एंटी प्लेन हाइजेकिंग मॉकड्रिल कराई गई। मॉकड्रिल की शुरूआत दोपहर बारह बजे तब हुई जब एक प्लेन एयरोड्रम पर मंडराया। अपहर्ताओं ने विमान के अपहरण की सूचना देते हुए इसके लेंडिंग की इजाजत मांगी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने इसकी जानकारी एयरपोर्ट डायरेक्टर को दी। डायरेक्टर ने लेंडिंग की इजाजत देते हुए विमान के अपहरण की सूचना से जिलाधिकारी, एसएसपी, अग्निशमन आदि विभागों को अवगत कराया। जहाज के लैंड करते ही कमांडो दस्ता एयरपोर्ट पर पहुंच गया। अपहर्ताओं से वार्ता शुरू होते ही विमान के आगे फायर ब्रिगेड की गाड़ी लगा दी गई, ताकि विमान दोबारा उड़ान न भर सके। इस बीच कमांडो दस्ते ने विमान में पीछे से पहुंचकर अपहर्ताओं को काबू में करते हुए प्लेन में सवार अन्य यात्रियों को मुक्त करा लिया।

मॉकड्रिल के बाद डायरेक्टर एसके सिंह के नेतृत्व में एयरपोर्ट पर हुई बैठक में मॉकड्रिल के दौरान सामने आई सुरक्षा खामियों को दूर करने पर मंथन हुआ। 35 मिनट चली मॉकड्रिल में विमान की जगह टाटा 407 (एंबुलेंस) प्रयोग की गई थी, तथा एक घायल सहित 20 यात्रियों के स्थान पर एयरपोर्ट कर्मचारी शामिल थे। विमान अपहरण की सूचना के 30 सेकंड में सुरक्षाबल एवं क्राइसिस मैनेजमेंट कंट्रोल रूम सक्रिय होने सहित 10-15 मिनट में डीएम, एडीएम, एसएसपी, एएसपी समेत अग्निशमन, बमनिरोधक दस्ता, कमांडो, डॉग स्क्वॉड आदि एयरपोर्ट पहुंच गए। केवल स्वास्थ्य महकमा ऐसा था जो मॉकड्रिल से अनभिज्ञ रहा और एयरपोर्ट नहीं पहुंचा, जिसके लिए सीएमओ ने खेद जताते हुए भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न होने का आश्वासन दिया।

सरकार के खिलाफ गरजीं आशा कार्यकत्री

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नियत मानदेय की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से सीएचसी परिसर में धरने पर बैठी आशा कार्यकत्रियों ने मंगलवार को सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। आंदोलनरत कार्यकत्रियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जच्चा बच्चा की देखभाल व सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण कार्य करने के बावजूद प्रदेश सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। जबकि आशा कार्यकत्री विषम परिस्थितियों में अपने कार्य को अंजाम दे रही है। सम्मानजनक मानदेय नहीं मिलने से आक्रोशित कार्यकत्रियों ने राष्ट्रीय पोलियो अभियान व रुबेला, मीजिल्स टीकाकरण कार्यक्रम के बहिष्कार का ऐलान किया भी किया है।

आशा कार्यकत्री संगठन की जिलाध्यक्ष सलिता चौहान ने कहा कि सरकार से लंबे समय से सम्मानजनक मानदेय दिए जाने की मांग की जा रही है। लेकिन सरकार आशा कार्यकत्रियों की मांग को अनदेखी कर रही है। जबकि आशा प्रत्येक गांव में जच्चा बच्चा की सुरक्षा व देखभाल का कार्य मनोयोग से कर रही हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग व राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के संचालन में भी आशा कार्यकत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से संबंधित योजनाओं का संचालन किए जाने के बावजूद सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। हर मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओ को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने व बच्चों का टीकाकरण आशा कार्यकत्रियों के सहारे ही संचालित हो रहा है। नौ माह तक जच्चा बच्चा के स्वास्थ्य की देखभाल व सुरक्षा का जिम्मा संभालने के बावजूद कार्यकत्री को प्रसव उपरांत मात्र सात सौ रुपए की राशि दी जाती है। उन्होंने सम्मानजनक मानदेय मुहैया कराने के साथ ही वार्षिक प्रोत्साहन राशि दिए जाने की मांग सरकार से की है। साथ ही चेताया कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर राष्ट्रीय पोलियो अभियान व रुबेला, मीजल्स टीकाकरण अभियान का बहिष्कार किया जाएगा। प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालो में बबली, विमला मैठाणी, संजू डबराल, कुसुमलता, गीता चौहान, राज बिहाल, शबाना, प्रमिला, दीपा देवी, विजय देवी आदि शामिल रहे।

मकान का ताला तोड़कर जेवरात व नकदी उड़ाई

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बंद पड़े मकान का ताला तोड़कर चोर घर में रखी अलमारी से जेवरात एवं 25 हजार की नकदी चोरी कर ले गए। ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के शाह कॉलोनी निवासी रफीक अहमद पुत्र इस्लाम रविवार को परिवार सहित घर बंद कर सलेमपुर गांव स्थित रिश्तेदारी में गये थे। इसी का फायदा उठाते हुए चोरों ने बंद पड़े मकान के ताले तोड़ डाले। चोरों ने मकान में रखी अलमारी से हजारों रुपये की सोने एवं चादी के जेवरात एवं 25 हजार रुपये पर हाथ साफ कर दिए।

मंगलवार को जब रफीक परिवार के साथ घर लौटा तो मकान के ताले टूटे देख उसके होश उड़ गए। रफीक ने चोरी की घटना की सूचना पुलिस को दी।कोतवाल अमरजीत सिंह ने बताया कि अभी मामले की जांच की जा रही है। चोरी करने वाले आरोपी आसपास के ही हो सकते है।

 

मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में हो रहा खुलेआम अवैध खनन!

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फोटोः कृष्णा रावत

राजधानी से सटे डोईवाला छेत्र में सोंग और सुसवा नदी पर खनन माफिया का राज है,आए दिन खनन माफिया अवैध खनन कर के राजस्व को चूना लगा रहा है। लेकिन इस पर रोक लगाने में प्रसाशन नाकाम साबित हो रहा है। रोज की मिलती शिकायत के बाद भी प्रशाशन इस पर लगाम लगाने में नाकाम है। आपको बता दे की डोईवाला छेत्र में सोंग-सुसवा -जाखण-भिडालदा नदी में काफी लम्बे समय से आवेद खनन का कारोबार चल रहा है। पुलिस-प्रशाशन को जानकारी के बावजूद इनपर अभी तक कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया गया है। कभी कभी प्रशाशन द्वारा छापेमारी की जाती तो है लेकिन बावजूद इसके अवैध खनन के कारोबार पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

 

आखिर टूटी सरकार की नींद, 108 को छह करोड़ जारी

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लगातार आ रही शिकायतों के बाद आखिरकार सरकार की नींद टूटी और राज्य में 108 (आपातकालीन सेवा) के संचालन को सुदृढ़ करने के लिए शासन ने छह करोड़ रुपये की राशि अवमुक्त कर दी। इसका शासनादेश अपर सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने महानिदेशक स्वास्थ्य के लिए जारी कर दिया है।

राज्य में आपातकालीन सेवा 108 के तहत 138 एंबुलेंस वाहन और एक एंबुलेंस बोट संचालित है। बीते कुछ दिनों में लगातार एंबुलेंस खराब होने और समय पर नहीं पहुंच पाने के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में एंबुलेंस समय से नहीं आने पर दो बच्चों का जन्म दूध और कूड़े की गाड़ी में हुआ। इसको लेकर सरकार की लगातार किरकिरी हो रही थी।
मंगलवार को सरकार ने इस मामले में कदम उठाते हुए छह करोड़ की धनराशि जारी की।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस मौके पर कहा कि राज्य के दुर्गम व दूरस्थ क्षेत्रों में सुचारु रूप से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। आपातकालीन सेवा 108 राज्य के सभी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेषकर दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के प्रसव काल के दौरान उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की दिशा में यह सेवा महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर समस्याएं आईं, उन्हें तत्काल दूर किया जा रहा है। 

सीएम की नसीहत पर टूटी लिंगानुपात पर नींद

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कल तक कन्या भ्रुण हत्या रोकने के उपायों पर गंभीरता न दिखाने वाले स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदारों को अब अपनी कार्यशैली में सुधार करने के लिए मजबूर हो गया है।

गली कूचों में बगैर पंजीकरण के दर्जनों अल्ट्रासाउंड व सोनोग्राफी सेंटरों के संचालन को रोकने के लिए अब विभागीय चिकित्साधिकारी गंभीरता से पहल करने को मंथन कर रहे हैं। वजह सोमवार को सीसीआर सभागार में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की नसीहत। हालांकि जून महीने में जिलाधिकारी ने चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया था कि वे स्टिंग ऑपरेशन कर कन्या भ्रुण हत्या रोकने में जुटें लेकिन अभी तक कोई स्टिंग हुआ नहीं।
जिले में प्रति एक हजार पुरुषों पर हैं 906 बच्चियों के लिंगानुपात को सुधारने में अब पूरी संजीदगी दिखाने की नौबत आ गई है। जिले में पुरूष व महिलाओं के लिंगानुपात में असमानता को खत्म करने के लिए पीसीपीएनडीटी का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। विभाग की नाक के तले शहर से लेकर देहात तक बगैर पंजीकरण के कई सोनोग्राफी केंद्र संचालित हो रहे हैं। जहां चोरी छिपे लिंग जांच का काम किया जाता है। लेकिन विभाग इस पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है। यह आलम तब था जब जून महीने में जिलाधिकारी दीपक रावत ने पीसीपीएनडीटी समिति की बैठक में कलक्ट्रेट सभागार में कन्या भ्रुण हत्या रोकने के लिए चिकित्साधिकारियों को अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर स्टिंग ऑपरेशन करने को कह चुके हैं। लेकिन करीब दो ढाई महीने बीतने के बाद भी एक भी स्टिंग ऑपरेशन विभागीय अधिकारियों ने नहीं किया जिससे इनके संचालन बेरोकटोक चलते रहे। लेकिन अब सीएम की नसीहत के बाद विभाग नींद से जाग गया है।
सीएमओ ने एडिशनल सीएमओ डॉ. एचडी शाक्य को पीसीपीएनडीटी के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।