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फरहा खान ने कंगना को लिया आड़े हाथों

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बालीवुड में भाई-भतीजावाद के मुद्दे पर मशहूर फिल्मकार करण जौहर को निशाना बनाने वाली कंगना को जहां कुछ लोग बहादुरी कहकर उनकी तारीख कर रहे हैं, वहीं करण जौहर के प्रति भी बालीवुड में समर्थन बढ़ता जा रहा है। करीना कपूर के बाद अब बालीवुड की मशहूर डांस डायरेक्टर और फिल्म डायरेक्टर फराह खान आगे आई हैं और उन्होंने कंगना को आड़े हाथों लिया है।

फरहा खान का कहना है कि महिला होने के नाते बार-बार सहानुभूति बंटोरने की ये कोशिश समझ में नहीं आती। फरहा का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में कोई किसी पर मेहरबानी नहीं करता, लेकिन कुछ लोगों की कुंठा इतनी बढ़ चुकी है कि वे खुद को संभालने की जगह दूसरों को परेशान करके खुश हो रहे हैं। हैरानी इस बात को लेकर है कि एक ऐसी महिला, जिसे इसी इंडस्ट्री ने पहचान दी, रुतबा दिया, कामयाबी दी, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

कंगना का नाम लिए बिना फराह ने कहा कि फिल्म के प्रमोशन के लिए ये सब किया गया है, तो इससे घटिया बात कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आपस में मतभेद होते हैं, लड़ाईयां भी हो जाती हैं, लेकिन लांछन नहीं लगाए जाते, जो हो रहा है। फरहा ने साफ कहा कि महिला होने का ऐसे फायदा उठाना ठीक नहीं है। 

देश में पहली मेडिकल थ्रिलर फिल्म ‘उम्मीद’ का ट्रेलर लॉन्च

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22 सितम्बर को रिलीज होने जा रही फिल्म ‘उम्मीद’ को देश की पहली मेडिकल थ्रिलर फिल्म कहा जा रहा है। हाल ही में मुंबई में इस फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया गया। पूर्व में रामगोपाल वर्मा के लिए फिल्म ‘प्यार तूने क्या किया’ (फरदीन खान-उर्मिला) का निर्देशन करने वाले रजत एस मुखर्जी ने इस थ्रिलर फिल्म का निर्देशन किया है।

फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में मिलिंद गुणाजी, फ्रेडी दारुवाला, अंजलि पाटिल, दलीप ताहिल, मोहन कपूर, अंचित कौर, पल्लवी दास, यतिन कार्येकर हैं। अमित सेतिया इस फिल्म के निर्माता हैं। निर्देशक रजत मुखर्जी का कहना है कि ये देश का पहला मेडिकल थ्रिलर है, जिसमें गैरकानूनी रूप से बनने वाली दवाइयों के निर्माण के गोरखधंधे का पर्दाफाश किया गया है।

रजत ने कहा कि ये फिल्म दिखाती है कि कैसे बड़ी बड़ी दवाइयां बनाने वाली कंपनियां इस धंधे में शामिल हैं और आम लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म रिलीज होने के बाद सरकार भी इस तरफ ध्यान देगी और इसे रोकने के लिए कुछ कदम उठाएगी। इस फिल्म में इन दवा निर्माण कंपनियों की राजनैतिक हैसियत रखने वाले नेताओं के साथ कनेक्शन को भी दिखाया गया है। रजत और उनकी टीम का दावा है कि इस विषय पर इससे पहले कोई फिल्म देश में नहीं बनी है।

क्यों मांगी दून पुलिस ने इस जज पर कार्यवाही करने की इजाजत

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प्रेमनगर थाने में पुलिस कर्मियों से मारपीट करने वाली महिला जज पर कार्रवाई के लिए देहरादून की एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुमति मांगी है।एसएसपी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जिला जज को पत्र लिख उन्नाव में तैनात महिला जज के अभद्र व्यवहार के बारे में पूरी जानकारी भेजी है। इसके साथ ही महिला जज के खिलाफ मुकदमा चलाने और अग्रिम कार्र्वाई की अनुमति मांगी है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को संबोधित इस पत्र की एक प्रति उन्नाव जिला जज के साथ ही एक प्रति देहरादून जिला जज को भी भेजी गई है।
क्या था मामला ? | मंगलवार को पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे दो छात्रों में मारपीट हो गई थी। इसके चलते दोनों पक्षों को प्रेमनगर थाने लाया गया था। इनमें से एक युवक रोहन पाठक की मां जया पाठक उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले की अपर ज़िला न्यायाधीश थीं। बेटे को पुलिस द्वारा थाने में लाए जाने पर भड़की महिला जज ने पहले तो थाने में जमकर हंगामा किया। जब पुलिसकर्मी वीडियो रिकोर्डिंग करने लगे तो उन्होंने पुलिस कर्मियों के थप्पड़ जड़ दिए। इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली थी।

यहां देखें विडियोः

दस्तावेज देते ही फिर शुरु हुई केदारनाथ में हेली सेवाएं

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उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट ऑथरिटी (यूकाडा) ने केदारनाथ में हवाई कंपनियों को हेली सेवाएं फिर शुरू करने की अनुमति दे दी है। इसके बाद बुधवार को हवाई कंपनियों ने 50 से अधिक उड़ान भरी, जिससे ढाई सौ भक्तों ने बाबा केदार के दर्शन किए।

नेशनल ग्र्रीन ट्रिब्यूलन (एनजीटी) की ओर से निर्धारित मानकों का पालन और जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करने के कारण मंगलवार को सभी नौ कंपनियों की हवाई सेवाओं पर रोक लगा दी थी। दरअसल, केदारनाथ में उड़ान भरने के लिए सरकार ने हवाई कंपनियों के लिए कुछ मानक तय किए हैं। इसमें दो हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर ही उड़ान भरने की अनुमति है, ताकि नीचे स्कूलों अथवा आम ग्रामीणों को ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायत न हो।

इसके अलावा, हेली कंपनियों के लिए उड़ान भरने का समय निर्धारित होता है और इसी आधार पर निश्चित समय के दौरान हवाई कंपनियां उड़ान भरती हैं। इस मामले में हवाई कंपनियों ने उड़ानों से संबंधित दस्तावेज उड्डयन विभाग में जमा नहीं किए थे।

इस आधार पर सरकार ने मंगलवार को सभी कंपनियों की उड़ानों पर रोक लगा दी थी। कंपनियों के जरूरी दस्तावेज जमा कराने के बाद बुधवार को सभी नौ कंपनियों को हेली सेवा की अनुमति मिली। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि सभी हवाई कंपनियों को मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

ये कंपनियां देती हैं हेली सेवाएंः केदारनाथ में नौ कंपनियों इंडोकॉप्टर, ट्रांसभारत, आर्यन, पवन हंस, एरो, हेरीटेज, हिमालयन हेली, ग्लोबल, सुमित एविएशन हेली सेवाएं देती हैं।

कोटद्वार में वकील को सरेआम गोली मारकर हत्या

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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में बुधवार सुबह करीब 11 बजे घर के बाहर खडे एडवोकेट सुशील रघुवंशी को अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल वकील को संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में भर्ती कराया गया। वहां से उन्हें हायर सेंटर के लिये रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही वकील ने दम तोड़ दिया।

बीईल रोड निवासी एडवोकेट सुशील रघुवंशी बुधवार की सुबह लगभग 11 बजे घर के बाहर खड़े थे। सफेद रंग की कार से दो युवक बाहर आये, जिन्होंने गोली मार दी। घायल सुशील को पड़ोसी सुरेश तिवारी तत्काल राजकीय संयुक्त चिकित्सालय ले गए। इस घटना से क्षेत्र में दहशत है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक उत्तम सिंह जिम्मीवाल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस फोर्स अस्पताल पहुंच गई। उन्होंने बताया कि सुशील कुमार रघुवंशी ने अपने बयान में 5-6 लोगों के नाम बताये है। जिनसे उनकी पुरानी रंजिश चल रही थी, लेकिन वह शूटरों को पहचान नहीं पाये।कोतवाली प्रभारी निरीक्षक उत्तम सिंह ने कहा कि मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जायेगा। बार संघ के अध्यक्ष अजय कुमार पंत ने बताया कि गोली लगने से गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता सुशील कुमार राघुवंशी ने हायर सेंटर जाते समय दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उनके शव का हरिद्वार में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

समझ से परे क्यों होती जा रही है सरकारी हिंदी?

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चमोली के पोखरी गांव के बाहर एक बोर्ड पर लिखा है “सर्व शिक्षा अभियान से अच्छादित” जहां पहले तीन चार शब्द तो आम बोल चाल की भाषा के थे वहीं “अच्छादित” ने मुझे उलझन में डाल दिया।क्या इस शब्द का मतलब अच्छा है या बुरा? इन ख्यालों नेa डाॅ पुरोहित को असमंजस मे डाल दिया।

मैं डाॅ पुरोहित की बात को बिलकुल समझ सकती हूं। डेढ़ दशक के अपनी मीडिया के सफर के दौरान मैं लगातार सरकारी प्रेस रिलीज़ और आॅर्डरों की काॅपी से जूझती रही हूं। इन सब में हिंदी भाषा के ऐसे इस्तेमाल किया जाता है जो संस्कृत भाषा से मिलता जुलता है। ये शब्दावली हिंदी का सबसे शुद्ध रूप तो है लेकिन क्या ये आज के ज़माने में अन्य भाषाओं ख़ासतौर पर अंग्रेज़ी से अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही हिंदी को बचाने में कारगर है? बहरहाल अपना काम आसान करने के लिये मुझे सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल से रिटायर्ड अपनी मां का सहारा मिल जाता है। मां बताती हैं कि ” सरकारी हिंदी भाषा ने पिछले कई सालों में संस्कृत की छाप वाली हिंदी से आम लोगों के बोलचाल की हिंदी तक का सफर तय नहीं किया है। अपने 37 साल की सरकारी नौकरी मे मैंने एक भी ऐसा सरकारी पत्र नहीं देखा जिसे पढ़ने और समझने में परेशानी नहीं हुई हो”

मेरे हिसाब से तो सरकारी आदेश, पत्र आदि लिखते हुए ऐसा लगता है कि मानो मुकाबला हो रहा हो सबसे कठिन और जटिल शब्द कौन ढूंढ के ला सकता है। और शायद ये ही कारण है कि राजभाषा होने के बावजूद हिंदी आज भी अंग्रेज़ी से मात खा रही है।अाज जब देश लिखित से डिजिटल दौर की तरफ बढ़ चुका है ऐसे मे दौर चीज़ों को फटाफट और आसान तरीके से बताने और समझाने का है। हिंदी को बचाने और युवाओं के बीच में बढ़ावा देने के लिये कई विभाग हैं, सम्मेलन होते हैं, डिबेट होती हैं लेकिन शायद ही किसी ने इस पहलू पर ध्यान दिया है कि रोज़ाना लाखों लोगों को जिस माध्यम से हिंदी से रूबरू होना पड़ता है कहीं वो हिंदी को लोगों से दूर तो नहीं ले जा रहा?

खुद सरकारी अधिकारी भी इस बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं। एसएसपी उधमसिंह नगर सदानंद दात्ते कहते हैं कि “शुद्ध हिंदी को ज़रूरत से ज्यादा महत्व दिया जाता है। हिंदी अपने आप मे वही आम लोगों के बोलचाल की भाषा है लेकिन सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाली हिंदी काफी जटिल होती है, इसे आम लोगों के लिये और आसान बनाने की ज़रूरत है।”

नेता भी किस बात को मानते हैं कि सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाली हिंदी काफी जटिल है। कांग्रेस के प्रदेश अधयक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि “जानभूझकर सरकारी कामों और आदेशों में हिंदी को इतना जटिल रखा जाता है ताकि वो ज्यादातर लोगों को समझ में न आये।”     

बोलचाल की हिंदी और कागज़ों में लिखे जाने वाली हिंदी के बीच की दूरी हर सरकारी पत्राचार के साथ बढ़ती जा रही है। शायद अब वो समय आ गया है कि वास्तव में हिंदी को लोगों की पसंदीदा भाषा बनाने के लिये कुछ ज़मीनी कदम उठाये जायें।आम आदमी सराकरी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली हिंदी नहीं समझ पाता है और ये एक बड़ा कारण है कि आज हिंदी सरलता से दूर “क्लिशत” होती जा रही है।

चौरास मोटर पुल का धन सिंह रावत ने लिया जायजा

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उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बहुप्रतीक्षित चौरास मोटर पुल का बुधवार को निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुल के 45 मीटर हिस्से पर पड़े लेंटर का जायजा लिया।

श्रीनगर विधायक व उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि जल्द ही लोगों को इस पुल से आवागमन की सुविधा मिले, इसका प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक पुल पर सुचारू रूप से आवागमन शुरू हो जाएगा। लोक निर्माण विभाग के ईई सुरेश तोमर ने राज्य मंत्री डा. रावत को पुल पर लेंटर पड़ने व पुल निर्माण से संबंधित जानकारियां दीं।

उन्होंने बताया कि पुल के निर्माण में सुरक्षा व मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। मंत्री डा. रावत ने लोनिवि के ईई को श्रीनगर की तरफ पुल के लिए जाने वाली एप्रोच रोड का काम भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। चौरास की ओर से बनने वाली एप्रोच रोड के बारे में उन्होंने कहा कि जल्द ही इस रोड का कार्य शुरू हो, सरकार की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बजट भी स्वीकृत कर दिया गया है।

कब बहुरेंगे ब्लाक मुख्यालय की लाइफ लाइन एटी रोड के दिन

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बद से बदत्तर बनती जा रही अगलाड़-थत्यूड़ मोटर मार्ग, लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। यूं तो ब्लॉक मुख्यालय को जोड़ने वाली अगलाड़-थत्यूड़ मोटर मार्ग को लाइफ लाइन कहा जाता हैं लेकिन इसकी खुद की लाइफ इतनी दयनीय हैं कि इसमें सफर करने वाले लोगों की सांस में सांस अटकी रहती हैं, फिर भी लोग इस पर सफर करने को मजबूर हैं।

ब्लॉक मुख्यालय को जोड़ने वाली खस्ताहाल पड़ी अगलाड़ थत्यूड़ मोटर मार्ग की स्थिति दिन पर दिन बद से बदत्तर बनती जा रही है। नैनबाग-विकासनगर हाईवे पर अगलाड़ पुल से शुरू होती एटी रोड़ की स्थिति बंदर कोट से ही दयनीय बनी हुई है, सडब खाला में सड़क की दीवारें टूटी हुई है जिससे मार्ग बहुत ही संकरा है। 7-8 किमी,  कैंणु खाला नामे तोक पर वर्ष 2010 व 2013 में भारी भूस्खलन होने से वह सबसे खतरनाक डेंजर जोन हैं, जिससे लगातार पहाड़ी से पत्थर गिरते रहते हैं। वर्ष 2016 में यहा चल रहे ग्राम बेल के नैन सिंह के पैर पर बड़ा बोल्डर गिरा था जिससे घटनास्थल पर पड़े रहने से अधिक रक्तस्राव होने के कारण उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। हालांकि घटना के बाद इस डेंजर जोन के मरम्मत का कार्य किया गया लेकिन अभी भी पहाड़ी से पत्थर गिरने का सिलसिला बदस्तूर जारी हैं।

वही 11 किमी गरखेत मुख्य बाजार के समीप सड़क पर बहते बरसाती गदेरे को पार करना जोखिम भरा रहता हैं। बरसाती गदेरे के कारण 2013 की दैवीय आपदा में सड़क के निचले हिस्से की दीवार बह गई थी जिससे पैदल स्कूली बच्चों पर भी खतरा बना रहता हैं।  खस्ताहाल अगलाड़-थत्यूड़ मोटर मार्ग पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं जिसमें अलग-अलग घटनाओं में अब तक 7 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हांलाकि एटी रोड अगलाड़ पुल से ब्लॉक मुख्यालय 44 किमी बहुत ही संकरा हैं लेकिन 15 से 20 किमी बंदर कोर्ट से बिच्छू खड़ तक का सफर तय करने में लोगों की सांस में सांस अटकी रहती हैं।

2010 से बदहाल अगलाड़-थत्यूड़ मोटर मार्ग से 23 राजस्व व 12 ग्राम पंचायत की लगभग दस हजार स्थानीय आबादी सहित नैनबाग क्षेत्र के लालूर, इडवाल्सयू, सिलवाड़ पट्टी से ब्लाक मुख्यालय जाने वाले हजारों ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। वही विभाग का कहना है कि एटी रोड़ की डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है बजट स्वीकृत होते ही मरम्मत का काम शुरू कर दिया जायेगा।

स्थानीय निवासी प्रधान द्वारगढ़ दिनेश रावत, प्रधान खासकुदाऊं श्याम सिंह, बौराडी प्रधान सीमा देवी, राजेंद्र रावत, जनानन्द बिजल्वाण, अतुल गुसाईं, नागेंद्र प्रसाद, प्रताप सिंह आदि का कहना हैं कि अगलाड़ थत्यूड़ मोटर मार्ग का मुद्दा कई बार बीडीसी के माध्यम से, विकास गोष्टी के मंचों के माध्यम से और कई जिलाधिकारियों को दिया ज्ञापन से इस विकराल समस्या के बारे में अवगत कराया लेकिन अब तक किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी। लगता हैं कि सरकार और प्रशासन अभी और बड़ी दुर्घटनाओं का इंतजार कर रही हैं।

खुल गई पोल, मंदिर प्रबन्धक जाएंगे जेल?

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जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति गठन की उठापठक जारी है। इस बार दून से आई जांच ने कईयों के पसीने छुड़ा दिए हैं। लोगों की शिकायत पर हुई जांच के बाद देहरादून से भेजी गई खुफिया टीम के अधिकारियों ने वर्तमान प्रबंधक प्रकाश भट्ट से ज्वाइंट इंट्रोगेशन किया।  इस पूछताछ में प्रकाश भट्ट की पुरानी कुंडली भी खंगाली गई। जांच जिला मुख्यालय पहुंचते ही प्रबंधक के नेता और पुजारी दावेदारों में हड़कंप मचा हुआ है। शुरुआती जांच के बाद प्रकाश भट्ट के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 478 और 471 के तहत केस दर्ज होने तय माना जा रहा है। इस आपराधिक मुकदमे के तहत गिरफ्तारी के साथ रिकवरी के भी पूरे आसार हैं।

हाईकोर्ट के आदेशानुसार जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति में प्रबंधक पद के लिए कोई पुजारी या राजनैतिक दल से संबंद्ध लोग आवेदन नहीं कर सकते हैं, इस बार इसका उल्टा हुआ है। इस बार प्रबंधक पद पर एक पुजारी समेत पांच भाजपाई और दो कांग्रेसी नेताओं ने आवेदन कर डाले। तत्कालीन डीएम सविन बंसल के आदेश पर एलआईयू जांच से इस बात की पुष्टि होने पर उक्त सभी के आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। डीएम के तबादले के तत्काल बाद उक्त सभी नेताओं और पुजारियों ने दोबारा आवेदन कर दिए थे।

सूत्रों के मुताबिक एक मंत्री और एक स्थानीय नेता से प्रेशर डलवाकर सभी नेताओं ने अपने आवेदन देहरादून फारवर्ड करवा लिए थे। किसी ने इसकी शिकायत राज्यपाल से कर दी थी। शिकायतकर्ता ने वर्तमान प्रबंधक प्रकाश भट्ट पर भी कोर्ट को गुमराह कर पद हासिल करने के आरोप लगाए थे। सूत्रों के मुताबिक इसको गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल ने डीएम अल्मोड़ा को प्रकाश भट्ट मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए। सूत्रों के मुताबिक प्रकाश भट्ट देहरादून से पहुंची सपेशल खुफिया टीम ने अलग-अलग स्थानों पर चार घंटे से अधिक पूछताछ की। इस पूछताछ में प्रकाश भट्ट हड़बड़ा गए थे। उन्होंने जांच अधिकारियों के सामने पूरा सच उगल दिया।

सूत्रों के मुताबिक खुफिया टीमें अब भी प्रकाश भट्ट की कुंडली खंगालने में जुटी हुईं हैं। ऐसे हालात में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना भी तय माना जा रहा है। प्रशासन के इस कदम से वर्तमान में प्रबंधक और उपाध्यक्ष पद पर आवेदन करने वाले नेताओं और पुजारियों में हड़कंप मचा हुआ है। कल तक जो नेता अपनी गोट फिट करने में जुटे हुए थे अब वह इस पद से दूर होने की कोशिशों में भी जुटे हुए हैं। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि सभी अयोग्य दावेदारों ने आवेदन के साथ ही झूठे शपथ पत्र भी भरे हैं। स्थाननीय लोगों के पास इससे सम्बंधित तमाम फ़ोटो और अखबारों की कतरन मौजूद हैं।  इसके अलावा तत्कालीन जिलाधिकारी भी उनके आवेदन पत्रों को मार्क कर गए हैं। इस सम्बंध में लोगों ने उन आवेदन पत्रों की प्रतिलिपि हासिल करने को आरटीआई भी डाल दी है।
पांच लाख दो तो अभी हो जाएगा काम।

सूत्रों के मुताबिक विज्ञप्ति जारी होते ही जागेश्वर विधान सभा और  प्रॉपर जागेश्वर के कुछ नेता भी कमेटी गठन की आड़ में अपना उल्लू साधने की कोशिशों में जुट गए थे। कुछ नेता तो आवेदकों को ऊंची पकड़ का हवाला देते हुए  पद पर ताजपोशी के एवज में पांच लाख घूस की भी डिमांड करने लगे थे। ऐसे नेता खुद को आला कमान का खास बता रहे थे। ऊपर से जांच आते ही अब ये कथाकथित नेता भी प्रवंधन समिति से खुद को दूर करने लगे हैं।सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां भी इन नेताओं की कुंडली का अध्ययन करने में जुट गईं हैं। जांच की आंच आंच में ये नेता भी झुलस सकते हैं।

टाटा सफारी लूट के दो इनामी बदमाश गिरफ्तार

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बहादराबाद पुलिस ने टाटा सफारी लूट के फरार दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि एक बदमाश फरार होने में कामयाब रहा।

सीओ कनखल जेपी जुयाल ने बताया कि, “12 अगस्त 2016 को एक लड़की और पांच लड़कों ने  शिवा ट्रांसपोर्ट मुजफ्फरनगर से दो हजार रुपये में हरिद्वार के लिए टाटा सफारी बुक कराई थी। इस्लाम हरिद्वार में बोंगला बाईपास पर पहुंचा तो पीछे बैठे एक लड़के ने थप्पड़ मारकर गाड़ी रोकने को कहा। अन्य लोगों ने कनपटी पर तमंचा लगाकर गाड़ी से नीचे उतार दिया। इसके बाद वह गाड़ी लेकर भाग गए थे।” उसने मामले की सूचना पुलिस को मिली।  पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दौलतपुर शराब के ठेके के पास जंगल में घेराबंदी करके गाड़ी सहित अमृतपाल कौर पुत्री नक्षत्र सिंह, हरजीत सिंह पुत्र बलविंदर और संदीप पुत्र बूटा निवासी मूसा थाना कोटधरमू मानसा पंजाब को गिरफ्तार कर लिया था।  

पीड़ित की तहरीर पर पुलिस 6 व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। पुलिस पूछताछ में साथियों के नाम कुलदीप सिंह और गुरुप्रेम सिंह व देवी बताया। पुलिस अधीक्षक नगर के निर्देश पर थाना प्रभारी निरीक्षक सूर्य भूषण नेगी, उप निरीक्षक मान सिंह नेगी, कांस्टेबल मुकेश नौटियाल, दीपक चैहान को मिलाकर पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने 12 सितंबर उक्त अपराधियों के घर पर दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। जबकि उनका एक साथी देवी मौके से फरार हो गया। गाड़ी लूट के तीनों फरार आरोपियों पर ढाई-ढाई हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।