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बीमारी फैला रहा परिवार कल्याण केंद्र

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विकासनगर: ग्रामीण महिलाओं व नौनिहालों को टीकाकरण समेत सामान्य उपचार देने वाला परिवार कल्याण केंद्र इन दिनों उपचार के बजाय बीमारी फैला रहा है। भले ही स्वास्थ्य विभाग आम जनता को सफाई पर ध्यान देने की नसीहत दे रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के परिवार कल्याण केंद्र जीवनगढ़ की दशा पर विभागीय अधिकारियों-कर्मियों की नजर नहीं पड़ रही है।
यहां परिसर में पिछले एक माह से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। बरसात के दिनों से जमा पानी संक्रामक बीमारी का कारण बन रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से परिसर में स्वच्छता बनाए रखने की मांग की है।
अल्पसंख्यक बाहुल्य पंचायत जीवनगढ़ के बाशिंदों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए गांव में परिवार कल्याण केंद्र स्थापना की गई। खासकर गर्भवती महिलाओं को नौनिहालों को टीकाकरण सहित महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली सामान्य बीमारियों में परिवार कल्याण केंद्र उपचार मुहैया कराता है। लेकिन इन दिनों यहां आने वाले नौनिहालों व महिलाओं के संक्रामक बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा बना हुआ है। कारण केंद्र के परिसर में पिछले एक महीने बरसात का पानी जमा है जिसमें मच्छर पैदा हो गए हैं। परिसर में पानी जमा होने के कारण यहां मरीजों का आने जाने में भी परेशानी हो रही है।
उप प्रधान रेणू खान, फतेह आलिम, मौ. इस्लाम, शराफत, आसिफ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार परिसर की सफाई करने की गुजारिश की गई, लेकिन अधिकारी ग्रामीणों की समस्या की ओर ध्यान नहीं देकर उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। उधर, प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. केके शर्मा ने कहा कि सीएचसी से सफाई कर्मी भेजकर परिसर की सफाई करा दी जाएगी।

बरेली की बर्फी के बाद नई फिल्म आलिया के साथ

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बाक्स आफिस पर सफलता पाने वाली हालिया रिलीज फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ की निर्देशिक अश्विनी अयैर तिवारी की अगली फिल्म की योजना शुरु हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, इस बार तिवारी की फिल्म में आलिया भट्ट मुख्य भूमिका निभाएंगी। इस तरह के संकेत खुद अश्विनी की तरफ से मिले हैं। कहा जा रहा है कि अश्विनी तिवारी ने आलिया को अगली फिल्म के लिए कहानी सुनाई है, जो आलिया को पसंद आई है।

आलिया इन दिनों पंजाब में हैं, जहां वे मेघना गुलजार की बन रही फिल्म ‘राजो’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। जानकारी के अनुसार, इस फिल्म की शूटिंग निपटाकर मुंबई लौटकर आलिया और अश्विनी के बीच इस फिल्म को लेकर निर्णायक मुलाकात होगी।

आमिर खान की फिल्म दंगल के निर्देशक नितेश तिवारी की पत्नी अश्विनी अयैर तिवारी ने बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘निल बट्टे सन्नाटा’ बनाई थी, जिसमें स्वारा भास्कर और रत्ना पाठक शाह की अहम भूमिकाएं थीं और इस फिल्म को जमकर तारीफ मिली थी।

हाल ही में रिलीज हुई अश्विनी की दूसरी फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ को भी काफी पसंद किया गया है। इस फिल्म में आयुष्मान खुराना, कीर्ति सेनन और राजकुमार राव की प्रमुख भूमिकाएं रहीं। 

फिल्म ‘लखनऊ सेंट्रल’ के स्पेशल शो में पहुंचे सितारे

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आगामी शुक्रवार को रिलीज होने जा रही फिल्म ‘लखनऊ सेंट्रल’ की एक स्पेशल स्क्रीनिंग मुंबई के एक सिनेमाघर में हुई, जिसमें बॉलीवुड के दिग्गज सितारों ने शामिल होकर फिल्म की टीम को बधाई दी और फिल्म की तारीफ करी।

इस शो में हिस्सा लेने आए मेहमानों में सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय क्रिकेट के महान सितारे सचिन तेंदुलकर रहे, जो अपनी पत्नी अंजलि और बेटी सारा के साथ पहुंचे। सारा को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है कि वे जल्दी ही फिल्मों की दुनिया में कदम रखने जा रही हैं। सचिन और उनके परिवार के अलावा इस शो में शामिल होने आए बॉलीवुड के सितारों में तापसी पन्नू, राधिका आप्टे, चित्रगांधा सिंह, कीर्ति सेनन, अदिति राव हैदरी, दिया मिर्जा, ऋचा चड्ढा, विनोद मेहरा के बेटे रोहन, निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा, मधुर भंडारकर, ‘दंगल’ फेम नितेश तिवारी, ‘बरेली की बर्फी’ के निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी प्रमुख रहे।

निर्माता निखिल आडवाणी की प्रोडक्शन कंपनी में बनी इस फिल्म का निर्देशन रंजीत तिवारी ने किया है। फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में फरहान अख्तर, डायना पेंटी, राजेश शर्मा, दीपक डोबरियाल, इनामुल हक, रवि किशन और गिप्पी ग्रेवाल हैं।

अमृता सिंह से खफा सनी देओल

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सनी देओल की इस शुक्रवार को फिल्म ‘पोस्टर ब्वायज’ रिलीज हुई है। वे इन दिनों अपने बेटे करण देओल को बतौर हीरो लॉन्च करने के लिए तैयारियों में बिजी हैं। करण की लॉन्चिंग फिल्म को लेकर हाल ही में पत्रकारों से बात करते हुए सनी ने अपनी ‘बेताब’ फिल्म की हीरोइन अमृता सिंह को लेकर एक राज खोला।

सनी देओल ने बताया कि वे चाहते थे कि करण के साथ अमृता की बेटी (सारा अली खान) की जोड़ी वैसे ही बने, जैसे सालों पहले बेताब में सनी के साथ अमृता सिंह की जोड़ी को लॉन्च किया गया था। सनी के मुताबिक, करण के साथ सारा की जोड़ी को लॉन्च करने के लिए उन्होंने अमृता सिंह को अप्रोच किया, तो अमृता ने सोचने के लिए कुछ वक्त मांगा और फिर उनको कोई जवाब ही नहीं दिया। जिससे सनी खफा हो गए। 

सनी कहते हैं कि वे काफी वक्त तक अमृता सिंह के जवाब का इंतजार करते रहे। जब उनको खबर मिली कि सारा को कोई और लॉन्च कर रहा है, तो उन्होंने उम्मीद छोड़ दी और अपना आफर वापस ले लिया। सारा को पहले करण जौहर की कंपनी में बन रही फिल्म ‘स्टूडेंटस ऑफ द इयर’ की सीक्वल में लॉन्च किया जाना था, लेकिन अमृता सिंह और फिल्म की क्रिएटिव टीम के साथ गंभीर मतभेदों के बाद सारा को अलग कर दिया गया।

अब सारा अली खान को एकता कपूर की कंपनी बालाजी की फिल्म ‘केदारनाथ’ में लॉन्च किया जा रहा है, जिसके हीरो सुशांत सिंह राजपूत और निर्देशक अभिषेक कपूर हैं। फिल्म का पहला शेड्यूल हाल ही में उत्तरांचल मे देहरादून के करीब शुरू हुआ है। दूसरी ओर, करण के साथ सनी की फिल्म की शूटिंग लंदन में शुरू होगी। अपने बेटे की लॉन्चिंग फिल्म का निर्देशन सनी खुद कर रहे हैं। 

फरहा खान ने कंगना को लिया आड़े हाथों

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बालीवुड में भाई-भतीजावाद के मुद्दे पर मशहूर फिल्मकार करण जौहर को निशाना बनाने वाली कंगना को जहां कुछ लोग बहादुरी कहकर उनकी तारीख कर रहे हैं, वहीं करण जौहर के प्रति भी बालीवुड में समर्थन बढ़ता जा रहा है। करीना कपूर के बाद अब बालीवुड की मशहूर डांस डायरेक्टर और फिल्म डायरेक्टर फराह खान आगे आई हैं और उन्होंने कंगना को आड़े हाथों लिया है।

फरहा खान का कहना है कि महिला होने के नाते बार-बार सहानुभूति बंटोरने की ये कोशिश समझ में नहीं आती। फरहा का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में कोई किसी पर मेहरबानी नहीं करता, लेकिन कुछ लोगों की कुंठा इतनी बढ़ चुकी है कि वे खुद को संभालने की जगह दूसरों को परेशान करके खुश हो रहे हैं। हैरानी इस बात को लेकर है कि एक ऐसी महिला, जिसे इसी इंडस्ट्री ने पहचान दी, रुतबा दिया, कामयाबी दी, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

कंगना का नाम लिए बिना फराह ने कहा कि फिल्म के प्रमोशन के लिए ये सब किया गया है, तो इससे घटिया बात कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आपस में मतभेद होते हैं, लड़ाईयां भी हो जाती हैं, लेकिन लांछन नहीं लगाए जाते, जो हो रहा है। फरहा ने साफ कहा कि महिला होने का ऐसे फायदा उठाना ठीक नहीं है। 

देश में पहली मेडिकल थ्रिलर फिल्म ‘उम्मीद’ का ट्रेलर लॉन्च

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22 सितम्बर को रिलीज होने जा रही फिल्म ‘उम्मीद’ को देश की पहली मेडिकल थ्रिलर फिल्म कहा जा रहा है। हाल ही में मुंबई में इस फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया गया। पूर्व में रामगोपाल वर्मा के लिए फिल्म ‘प्यार तूने क्या किया’ (फरदीन खान-उर्मिला) का निर्देशन करने वाले रजत एस मुखर्जी ने इस थ्रिलर फिल्म का निर्देशन किया है।

फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में मिलिंद गुणाजी, फ्रेडी दारुवाला, अंजलि पाटिल, दलीप ताहिल, मोहन कपूर, अंचित कौर, पल्लवी दास, यतिन कार्येकर हैं। अमित सेतिया इस फिल्म के निर्माता हैं। निर्देशक रजत मुखर्जी का कहना है कि ये देश का पहला मेडिकल थ्रिलर है, जिसमें गैरकानूनी रूप से बनने वाली दवाइयों के निर्माण के गोरखधंधे का पर्दाफाश किया गया है।

रजत ने कहा कि ये फिल्म दिखाती है कि कैसे बड़ी बड़ी दवाइयां बनाने वाली कंपनियां इस धंधे में शामिल हैं और आम लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म रिलीज होने के बाद सरकार भी इस तरफ ध्यान देगी और इसे रोकने के लिए कुछ कदम उठाएगी। इस फिल्म में इन दवा निर्माण कंपनियों की राजनैतिक हैसियत रखने वाले नेताओं के साथ कनेक्शन को भी दिखाया गया है। रजत और उनकी टीम का दावा है कि इस विषय पर इससे पहले कोई फिल्म देश में नहीं बनी है।

क्यों मांगी दून पुलिस ने इस जज पर कार्यवाही करने की इजाजत

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प्रेमनगर थाने में पुलिस कर्मियों से मारपीट करने वाली महिला जज पर कार्रवाई के लिए देहरादून की एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुमति मांगी है।एसएसपी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जिला जज को पत्र लिख उन्नाव में तैनात महिला जज के अभद्र व्यवहार के बारे में पूरी जानकारी भेजी है। इसके साथ ही महिला जज के खिलाफ मुकदमा चलाने और अग्रिम कार्र्वाई की अनुमति मांगी है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को संबोधित इस पत्र की एक प्रति उन्नाव जिला जज के साथ ही एक प्रति देहरादून जिला जज को भी भेजी गई है।
क्या था मामला ? | मंगलवार को पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे दो छात्रों में मारपीट हो गई थी। इसके चलते दोनों पक्षों को प्रेमनगर थाने लाया गया था। इनमें से एक युवक रोहन पाठक की मां जया पाठक उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले की अपर ज़िला न्यायाधीश थीं। बेटे को पुलिस द्वारा थाने में लाए जाने पर भड़की महिला जज ने पहले तो थाने में जमकर हंगामा किया। जब पुलिसकर्मी वीडियो रिकोर्डिंग करने लगे तो उन्होंने पुलिस कर्मियों के थप्पड़ जड़ दिए। इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली थी।

यहां देखें विडियोः

दस्तावेज देते ही फिर शुरु हुई केदारनाथ में हेली सेवाएं

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उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट ऑथरिटी (यूकाडा) ने केदारनाथ में हवाई कंपनियों को हेली सेवाएं फिर शुरू करने की अनुमति दे दी है। इसके बाद बुधवार को हवाई कंपनियों ने 50 से अधिक उड़ान भरी, जिससे ढाई सौ भक्तों ने बाबा केदार के दर्शन किए।

नेशनल ग्र्रीन ट्रिब्यूलन (एनजीटी) की ओर से निर्धारित मानकों का पालन और जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करने के कारण मंगलवार को सभी नौ कंपनियों की हवाई सेवाओं पर रोक लगा दी थी। दरअसल, केदारनाथ में उड़ान भरने के लिए सरकार ने हवाई कंपनियों के लिए कुछ मानक तय किए हैं। इसमें दो हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर ही उड़ान भरने की अनुमति है, ताकि नीचे स्कूलों अथवा आम ग्रामीणों को ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायत न हो।

इसके अलावा, हेली कंपनियों के लिए उड़ान भरने का समय निर्धारित होता है और इसी आधार पर निश्चित समय के दौरान हवाई कंपनियां उड़ान भरती हैं। इस मामले में हवाई कंपनियों ने उड़ानों से संबंधित दस्तावेज उड्डयन विभाग में जमा नहीं किए थे।

इस आधार पर सरकार ने मंगलवार को सभी कंपनियों की उड़ानों पर रोक लगा दी थी। कंपनियों के जरूरी दस्तावेज जमा कराने के बाद बुधवार को सभी नौ कंपनियों को हेली सेवा की अनुमति मिली। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि सभी हवाई कंपनियों को मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

ये कंपनियां देती हैं हेली सेवाएंः केदारनाथ में नौ कंपनियों इंडोकॉप्टर, ट्रांसभारत, आर्यन, पवन हंस, एरो, हेरीटेज, हिमालयन हेली, ग्लोबल, सुमित एविएशन हेली सेवाएं देती हैं।

कोटद्वार में वकील को सरेआम गोली मारकर हत्या

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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में बुधवार सुबह करीब 11 बजे घर के बाहर खडे एडवोकेट सुशील रघुवंशी को अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल वकील को संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में भर्ती कराया गया। वहां से उन्हें हायर सेंटर के लिये रेफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही वकील ने दम तोड़ दिया।

बीईल रोड निवासी एडवोकेट सुशील रघुवंशी बुधवार की सुबह लगभग 11 बजे घर के बाहर खड़े थे। सफेद रंग की कार से दो युवक बाहर आये, जिन्होंने गोली मार दी। घायल सुशील को पड़ोसी सुरेश तिवारी तत्काल राजकीय संयुक्त चिकित्सालय ले गए। इस घटना से क्षेत्र में दहशत है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक उत्तम सिंह जिम्मीवाल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस फोर्स अस्पताल पहुंच गई। उन्होंने बताया कि सुशील कुमार रघुवंशी ने अपने बयान में 5-6 लोगों के नाम बताये है। जिनसे उनकी पुरानी रंजिश चल रही थी, लेकिन वह शूटरों को पहचान नहीं पाये।कोतवाली प्रभारी निरीक्षक उत्तम सिंह ने कहा कि मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जायेगा। बार संघ के अध्यक्ष अजय कुमार पंत ने बताया कि गोली लगने से गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता सुशील कुमार राघुवंशी ने हायर सेंटर जाते समय दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उनके शव का हरिद्वार में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

समझ से परे क्यों होती जा रही है सरकारी हिंदी?

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चमोली के पोखरी गांव के बाहर एक बोर्ड पर लिखा है “सर्व शिक्षा अभियान से अच्छादित” जहां पहले तीन चार शब्द तो आम बोल चाल की भाषा के थे वहीं “अच्छादित” ने मुझे उलझन में डाल दिया।क्या इस शब्द का मतलब अच्छा है या बुरा? इन ख्यालों नेa डाॅ पुरोहित को असमंजस मे डाल दिया।

मैं डाॅ पुरोहित की बात को बिलकुल समझ सकती हूं। डेढ़ दशक के अपनी मीडिया के सफर के दौरान मैं लगातार सरकारी प्रेस रिलीज़ और आॅर्डरों की काॅपी से जूझती रही हूं। इन सब में हिंदी भाषा के ऐसे इस्तेमाल किया जाता है जो संस्कृत भाषा से मिलता जुलता है। ये शब्दावली हिंदी का सबसे शुद्ध रूप तो है लेकिन क्या ये आज के ज़माने में अन्य भाषाओं ख़ासतौर पर अंग्रेज़ी से अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही हिंदी को बचाने में कारगर है? बहरहाल अपना काम आसान करने के लिये मुझे सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल से रिटायर्ड अपनी मां का सहारा मिल जाता है। मां बताती हैं कि ” सरकारी हिंदी भाषा ने पिछले कई सालों में संस्कृत की छाप वाली हिंदी से आम लोगों के बोलचाल की हिंदी तक का सफर तय नहीं किया है। अपने 37 साल की सरकारी नौकरी मे मैंने एक भी ऐसा सरकारी पत्र नहीं देखा जिसे पढ़ने और समझने में परेशानी नहीं हुई हो”

मेरे हिसाब से तो सरकारी आदेश, पत्र आदि लिखते हुए ऐसा लगता है कि मानो मुकाबला हो रहा हो सबसे कठिन और जटिल शब्द कौन ढूंढ के ला सकता है। और शायद ये ही कारण है कि राजभाषा होने के बावजूद हिंदी आज भी अंग्रेज़ी से मात खा रही है।अाज जब देश लिखित से डिजिटल दौर की तरफ बढ़ चुका है ऐसे मे दौर चीज़ों को फटाफट और आसान तरीके से बताने और समझाने का है। हिंदी को बचाने और युवाओं के बीच में बढ़ावा देने के लिये कई विभाग हैं, सम्मेलन होते हैं, डिबेट होती हैं लेकिन शायद ही किसी ने इस पहलू पर ध्यान दिया है कि रोज़ाना लाखों लोगों को जिस माध्यम से हिंदी से रूबरू होना पड़ता है कहीं वो हिंदी को लोगों से दूर तो नहीं ले जा रहा?

खुद सरकारी अधिकारी भी इस बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं। एसएसपी उधमसिंह नगर सदानंद दात्ते कहते हैं कि “शुद्ध हिंदी को ज़रूरत से ज्यादा महत्व दिया जाता है। हिंदी अपने आप मे वही आम लोगों के बोलचाल की भाषा है लेकिन सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाली हिंदी काफी जटिल होती है, इसे आम लोगों के लिये और आसान बनाने की ज़रूरत है।”

नेता भी किस बात को मानते हैं कि सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाली हिंदी काफी जटिल है। कांग्रेस के प्रदेश अधयक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि “जानभूझकर सरकारी कामों और आदेशों में हिंदी को इतना जटिल रखा जाता है ताकि वो ज्यादातर लोगों को समझ में न आये।”     

बोलचाल की हिंदी और कागज़ों में लिखे जाने वाली हिंदी के बीच की दूरी हर सरकारी पत्राचार के साथ बढ़ती जा रही है। शायद अब वो समय आ गया है कि वास्तव में हिंदी को लोगों की पसंदीदा भाषा बनाने के लिये कुछ ज़मीनी कदम उठाये जायें।आम आदमी सराकरी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली हिंदी नहीं समझ पाता है और ये एक बड़ा कारण है कि आज हिंदी सरलता से दूर “क्लिशत” होती जा रही है।