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दोस्त को गोली मार दुश्मन को फंसाने की थी साजिश

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रामनगर- पुलिस ने शाहनवाज उर्फ शानू हत्याकांड का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी ने अपने दुश्मनों को हत्या के मामले में फंसाने के लिए अपने की साथी की हत्या की थी।

गिरफ्तार किये आरोपियों में गुलरघट्टी निवासी, ट्रांसपोर्टर अकरम, भवानीपुर निवासी अंकुर शर्मा और चिल्किया निवासी सुखवीर सिंह रावत शामिल हैं। बता दे की 13 सितंबर की देर रात ग्राम पुछड़ी निवासी शाहनवाज (30)की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शाहनवाज तेलीपुरा स्थित हाजी अकरम के ट्रांसपोर्ट कार्यालय में काम करता था। उस रात को शाहनवाज को अकरम ने फोन कर कार्यालय बुलवाया। इसके बाद शाहनवाज की पत्नी सबीना को सूचना मिली कि शाहनवाज को किसी ने गोली मार दी।

पुलिस के मुताबिक हत्या के बाद यह फैलाया गया कि बगीचे के विवाद में शाहनवाज को गोली मारी गई। अकरम की ओर से हत्या के आरोप मो अकरम ने अपने विरोधी नजाकत पर लगाया।

पुलिस के मुताबिक अकरम और उसके साथियों ने मिलकर ही शाहनवाज को गोली मारी। ताकि नजाकत को गोली मारने के आरोप में फंसाया जा सके। लेकिन, मृतक की पत्नी ने जब पति के मालिक पर हत्या का आरोप लगाया तो पुलिस पड़ताल में लग गई। एसएसपी जनमेजय खण्डूरी ने बताया कि ट्रांसपोर्टर अकरम और उसके दो साथियो ने इस हत्या को अंजाम दिया है।

हाईकोर्ट ने दिए रिक्त पदों पर नियुक्ति के आदेश

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नैनीताल: हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग में प्राथमिक सहायक अध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द आरंभ कर बैकलॉग के रिक्त पदों को दो माह के भीतर भरने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार रिक्त पदों पर कार्यरत शिक्षा आचार्य व शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने के लिए दो अवसर मिलेंगे। कोर्ट ने इस संबंध में सरकार समेत अन्य की विशेष अपीलों को निस्तारित कर दिया।

दरअसल, बीएड टीईटी पास अभ्यर्थियों ने याचिका दायर कर कहा था कि योग्य होने के बाद भी उनकी रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की जा रही है। सरकार ने उन्हें नियुक्ति देने के बजाय शिक्षामित्र व शिक्षा आचार्यों को रिक्त पदों पर नियुक्ति दे दी। एकलपीठ ने मामले में फैसला देते हुए शिक्षा आचार्य व शिक्षा मित्र के पदों को रिक्त मानते हुए नियुक्ति के आदेश पारित किए। एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार, मनोज कुमार समेत अन्य ने विशेष अपील दायर की।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद शर्मा की खंडपीठ ने विशेष अपीलों को निस्तारित करते हुए एकलपीठ के बैकलॉग के पदों को भरने के आदेश को सही ठहराया। साथ ही दो माह में बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने का आदेश पारित किए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनय कुमार के अनुसार राज्य में एसटी के दो सौ से अधिक जबकि एससी के करीब एक हजार पद बैकलॉग से भरे जाने हैं। यहां उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है।

उत्तराखंड पुलिस के हत्थे चढ़े किडनी गैंग के मुख्य आरोपी

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थाना डोईवाला को सूचना मिली कि उत्तरांचल डेन्टल कॉलेज लालतप्पड के अन्दर स्थित गंगोत्री चेरिटेबिल हॉस्पिटल में अवैध रूप से किडनी निकालने का कार्य किया जा रहा है और जानकारी करने पर ज्ञात हआ कि एक व्यक्ति इनोवा गाड़ी से 04 व्यक्तियों, जिनकी किडनी निकाली गयी है , को लेकर हरिद्वार के रास्ते दिल्ली जा रहा है। जिस पर घटना वाले दिन दि0 11/09/17 को हरिद्वार व देहरादन पुलिस ने मिलकर इनोवा सं0- UA0TA – 5119 को सप्तऋषि चौकी हरिद्वार पर पकड लिया था।

जिस गाडी से एक वाहन चालक दीपक एवं 04 व्यक्ति क्रमश :

  • भावजी भाई
  • शेख ताज अली
  • सुषामा बैनर्जी
  • कृष्णा दास मिले,
    जिनमें से कृष्णा दास व शेख ताज अली की किडनी निकाली गयी थी। उनके द्वारा बताया गया कि उनको जावेद खान लेकर आया था और बताया था कि 3 लाख रूपये एक किडनी के मिलेंगें लेकिन हमें रूपये नही मिले।इस सम्बन्ध में 11 सितंबर को थाना डोईवाला पर मु0अ0सं0 256 /17 धारा 420 /120B / 370( i ) / 342 IPC व 18 /19 /20 मानव अंगो का प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 बनाम डॉ0 अमित कुमार आदि पंजीकृत किया गया। 11 सितंबर को ही जावेद खान को गिरफ्तार किया गया, जिसके द्वारा बयानों में बताया गया कि इस मामले में काफी लोग मिले हुए है। जिनमें डॉ0 अमित , डॉ0 अक्षय , डा0 संजय दास , राजीव चौधरी , चन्दना गुडिया आदि शामिल है। अभियुक्तगणों की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी देहरादून द्वारा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण देहरादून के पर्यवेक्षण में पुलिस की टीमें गठित कर पंचकुला , पानीपत , गुजरात , दिल्ली , चण्डीगढ़ आदि स्थानों पर रवाना किया गया।
    दौराने विवेचना पीड़ित
  • 1- भावजी भाई ,
  • 2- शेख ताज अली ,
  • 3- सुषामा बैनर्जी ,
  • 4- कृष्णा दास का सम्पूर्ण मेडिकल , अल्ट्रा साउण्ड आदि मेडिकल परीक्षण कराया गया। पीडितों के धारा 164 सीआरपीसी के बयान अंकित कराये गये। अभियुक्तगण की गिरफ्तारी हेतु मा0 न्यायालय से सर्च वारण्ट लेकर अभियुक्त राजीव चौधरी के घर की खाना-तलाशी ली गई एवं डाक्टरों के नेचरविला में रूकने के साक्ष्यों के आधार पर वहां पर भी खाना तलाशी की कार्यवाही की गयी। दोराने विवेचना अनुपमा , नसीम , प्रदीप उर्फ बिल्लू , सरला , अभिषेक आदि का भी इस घटना में सम्मिलित होना पाया गया है। 14 सितंबर को पुलिस की एक टीम एएसपी सदर लोकेश्वर सिंह के नेतृत्व में वांछित अभियुक्तगण की तलाश करते हुए दिल्ली , पानीपत , चण्डीगढ़ तलाश करते हुए पंचकुला पहंची।जहां उनके द्वारा पूर्व में रवाना टीमों में से एसओजी प्रभारी पी0डी0 भट्ट एवं एसओ रानीपोखरी धर्मेन्द्र सिंह रौतेला को टीम के पंचकुला बुलाया गया। उक्त टीमों को साथ लेकरएएसपी/सीओ सदर महोदय द्वारा पंचकुला में साहिल पुरी के घर 6/8 सेक्टर 02 पंचकुला में दबिश दी गई तो घर बन्द मिला। 15 सितंबर को टीम सेक्टर 18 पहुँची। मुखबिर की सूचना व सर्विलांस के आधार पर पल्लवी होटल सैक्टर 18 पंचकुला हरियाणा के सामने स्थित पार्किग खडी दो कार मरस्डीज सं0 UP 16 AR – 1100 व बीएमडब्लू सं0 DL -3FT- 5000 से क्रमश : अभियुक्तगण अमित कुमार व सरला एवं जीवन कुमार को गिरफ्तार किया गया । मरस्डीज से ₹ 33 लाख 73 हज़ार 200 प्राप्त हुए। अभियुक्तगणों के पास से 06 मोबाईल फोन भी प्राप्त हुए अभियुक्तगण द्वारा बताया गया कि हम सब लोग नेपाल जाने की तैयारी में थे। दौराने पूछताछ इन अभियुक्तगणों द्वारा बताया गया। वर्ष 2016 में पिछले वर्ष उत्तरांचल डेन्टल कॉलेज से गंगोत्री चेरिटेबिल हॉस्पिटल चलाने का एग्रीमेंट अशोक जोगी व राजीव चौधरी के माध्यम से किया था। हम लोगों द्वारा ग्राहकों से अग्रिम पैसा लेकर अस्पताल में सामान लगाया गया था, इसके बाद ऑपरेशन के जरिए पूर्ति की गयी ।
    गंगोत्री अस्पताल का मैनेजमेन्ट राजीव चौधरी व उनकी पत्नी अनुपमा देखते थे तथा हम लोग ऑपरेशन का काम करते थे। हमारे साथ ओटी में अस्पताल का पूरा स्टाफ रहता था तथा हमारे पास दलाल है। जो जगह -जगह से डोनर व ग्राहक की व्यवस्था करते है और वे ही लोग उन्हें लाते व वापस ले जाते है। कई बार फ्लाईट के माध्यम से भी डोनरों को छोड़ते थे। हमारे सम्पर्क में कई विदेशी ग्राहक भी रहते थे व ऑपरेशन से पूर्व की चैकिंग दिल्ली अस्पताल से पूर्व में ही करा लेते थे। पूछताछ में जानकारी प्राप्त हुई कि अमित के विरूद्ध मुम्बई, गुंटूर, आन्ध्र प्रदेश, आनन्द गुजरात, सी0बी0आई0 व ई०डी० में कई अभियोग पंजीकृत है तथा अभियुक्त के विषय में अन्य जानकारी प्राप्त की जा रही है।
    राजीव चौधरी के साथ मैनेजमेन्ट का कार्य देखने वाले प्रदीप उर्फ बिल्लू जो कि राजीव चौधरी की गाडी भी चलाता था और डॉनरों व ग्राहकों को दिल्ली छोडता था। अभियुक्त को प्रदीप उर्फ बिल्लू को एसएसआई मनोज रावत के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त को गाडी फोर्ड फिगो स० UK08 – AL – 3777 सहित रायवाला के पास से गिरफ्तार किया गया।

बरामदगी का विवरण :-

  • 01 मोबाईल फोन Lenovo
  • 01 – iphone 7 ,
  • 01 iphone – 6 ,
  • 01 i-tel. मोबाईल फोन ,
  • 01 मोबाईल फोन Micromax
  • कुल बरामद धनराशि – 33 लाख 73 हजार 200 रूपये।
  • कार मरस्डीज सं0 UP16AR – 1100
  • कार BMW सं0 DL -3FT- 5000
  • कार Ford Fig0 सं० UK08 AL – 3777

गिरफ्तार अभियुक्त गणों का विवरण :-
1 – डॉ0 अमित कुमार
2- डॉ0 जीवन
3- नर्स सरला
4- ड्राईवर प्रदीप उर्फ बिल्लू

पुलिस टीम : –
1- ASP/C0 सदर श्री लोकेश्वर सिंह ( IPS )
2- SSI मनोज रावत , थाना डोईवाला।
3- उ0नि0 आशिष गुसाई, थानाध्यक्ष रायवाला।
4- उ0नि0 धर्मेन्द्र सिंह रौतेला, थानाध्यक्ष रानीपोखरी।
5- उ0नि0 पी0डी0 भट्ट, SOG प्रभारी।
6- SI बृजपाल सिंह , चौकी प्रभारी हर्रावाला।
7- SI भुवन चन्द्र पुजारी , चौकी प्रभारी लालतप्पड़
8- SI मंजुल रावत , चौकी प्रभारी जॉलीग्रांट
9- SI दिनेश सिंह सती
10- SI योगेश कुमार
11- SI दीपक सिंह पंवार
12- LSI विनीता बेलवाल ,
13- HC राजकुमार
14- का0 सोबन सिंह , का0 अनिल कुमार , का0 शमीम अहमद , का0 राजीव कुमार , का0 भूपेन्द्र सिंह , का0 रविन्द्र टम्टा , का0 मन्दीप सिंह , का0 विनोद कुमार , का0 मोनू मलिक , का0 आनन्द कुमार , का0 नवनीत सिंह , का0 SOG प्रमोद सिंह , का0 SOG अमित कुमार , का0 S0G आशीष शर्मा , का0 SOG आशीष नैनवाल , L/C तारावती , L/C सीमा ।

सेंसर बोर्ड से नाराज उम्मीद की टीम

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मेडिकल घोटालों पर बनी फिल्म ‘उम्मीद’ की टीम इस बात से निराश है कि सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को एडल्ट फिल्म का सार्टिफिकेट दिया है। सेंसर बोर्ड के इस फैसले से निराश फिल्म के निर्देशक रजत एस मुखर्जी का कहना है कि, “मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि सेंसर बोर्ड नहीं चाहता कि देश की दवा कंपनियों के घोटालों की बात देश की जनता तक न पंहुचे। हम फिल्म के लिए यूए सार्टिफिकेट चाहते थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इस फिल्म को देखें। सेंसर बोर्ड ने हमें पत्र भेजा है, जिसमें इस बात की कोई वजह नहीं बताई गई है कि हमारी फिल्म को यूए सार्टिफिकेट क्यों नहीं दिया गया?” उनका कहना है कि, “सेंसर बोर्ड द्वारा भेजे गए पत्र में सिर्फ ये लिखा गया है कि हमें एडल्ट सार्टिफिकेट पाने के लिए फिल्म में कौन कौन से बदलाव करने हैं। हमारे पास सेंसर बोर्ड के निर्देशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। प्रसून जोशी के सेंसर बोर्ड का चेयरमैन बनने के बाद हमें सकारात्मक बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन इस फैसले ने हमें निराश किया है।”

रजत एस मुखर्जी के अनुसार, सेंसर ने फिल्म से सच्ची घटनाओं पर आधारित टैग को हटाने के लिए भी कहा है। उनका कहना है कि हमने बरसों की रिसर्च के बाद कहानी तैयार की है, जिसमें मेडिकल कंपनियों के घोटाले हैं, लेकिन सेंसर हमारा रास्ता रोक रहा है। इस फिल्म को पहले सितंबर में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन सेंसर बोर्ड के आदेश के बाद इसकी रिलीज को आगे बढा दिया गया है। फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में फैडी दारुवाला, अंजलि पाटिल, हर्ष छाया, दलीप ताहिल, अंचित कौर और मिलिंद गुणाजी हैं।

दिलीप कुमार को जायदाद पर कब्जा वापस मिला

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दस साल से विवादों में फंसी एक जायदाद का कब्जा फिर से दिलीप कुमार को मिल गया। उनकी बेगम सायरा बानू को इस जायदाद की चाबियां सौंपी गई। सोशल मीडिया पर सायरा बानू ने संदेश में लिखा कि इस विवाद के खत्म होने से हम सब राहत महसूस कर रहे है और चाबियां मिलने के बाद से दिलीप कुमार भी खुश हैं।

एक बिल्डर के साथ दिलीप कुमार के बंगले के अंदर की एक जमीन के हिस्से को लेकर विवाद कई सालों से चल रहा था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से दावे-प्रतिदावे किए गए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पंहुचा, जहां दिलीप कुमार के पक्ष में फैसला आया। सर्वोच्च अदालत ने इसे दिलीप कुमार को सुपुर्द करने का फैसला सुनाया, जिस पर अब अमल किया गया है।

कपिल का ब्रेकअप

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कहा जाता है कि जब तकदीर के सितारे गर्दिश में हों, तो चारों तरफ से मुसीबतें आकर घेरती हैं। ऐसा ही कुछ कपिल शर्मा के साथ हो रहा है, उनका कामेडी शो फिलहाल बंद हो चुका है। उनकी सेहत को लेकर तरह तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। साथी कलाकारों से लेकर बालीवुड सितारों के साथ उनके बर्ताव को लेकर किस्सों की बाढ़ सी आई हुई है और अब खबर मिल रही है कि उनका अपनी गर्लफ्रेंड गिन्नी के साथ उनका ब्रेकअप हो गया।

हाल ही में जब सुनील ग्रोवर और दूसरे साथियों के साथ एक हवाई यात्रा में उनकी हरकतों की खबरों ने जोर पकड़ा, तो इस मामले को टालने के लिए कपिल शर्मा ने सोशल मीडिया पर अचानक गिन्नी को अपनी गर्लफ्रेंड के तौर पर पेश किया और ये इरादे भी जाहिर कर दिए कि दोनों जल्दी से शादी करने वाले है।

अब सूत्रो के हवाले से खबर आ रही है कि गिन्नी और कपिल के बीच इस बात को लेकर मनमुटाव हुआ कि कपिल शर्मा इन दिनों बालीवुड की एक हीरोइन के काफी करीब माने जा रहे हैं। गिन्नी ने इसी बात को लेकर कपिल से रिश्ता तोड़ लिया है। कपिल शर्मा की टीम ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देने से मना किया है, लेकिन उनके शो से जुड़े रहे सूत्रों ने कपिल के हीरोइन के साथ अफेयर की खबरों को सही बताया है।

नींद में खर्राटें की आवाज को न करें नजरअंदाज

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नींद में नाक या मुंह के रास्ते आने वाली अनेक तरीके की आवाजें, जिन्हें हम खर्राटे कहकर बुलाते हैं। ये खर्राटे कई तरह के होते हैं जैसे सीटी की आवाज वाले खर्राटे, गहरी आवाज वाले घर्र-घर्र करने वाले खर्राटे, रुक-रूक कर तेज आवाज फैलाने वाले खर्राटे आदि-आदि। ऐसे खर्राटों की आवाज़ को कभी हम काॅमेडी कर नजरअंदाज कर देते हैं तो कभी ज्यादा खास ध्यान नहीं देते। लेकिन, विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि खर्राटे खतरनाक भी हो सकते हैं। समय रहते इसकी जांच कराना ही समझदारी है।
नींद में खर्राटों के कारण और उसके दुष्प्रभावों को लेकर विशेषज्ञ डाॅ. जगदीश रावतका कहना है कि अनिंद्रा के कारण रोगी को आॅब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया बीमारी हो सकती है। इस बीमारी की वजह से मरीज को दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर बढ़ना, अचानक सोते समय दिल की धड़कन बंद होना, ब्लड शुगर का अनियंत्रित होना, अचानक दिमाग की नस फटना और लकवा मारना हो सकते हैं। ऐसे में इस बीमारी को नजरअंदाज करना किसी लिहाज से समझादारी नही है। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार के खर्राटों की समस्या परिवार में किसी को भी हो इसे मजाक में न लेकर गंभीरता से इसका उपचार कराना उचित होगा।
एसएमआई ने लगाया निशुल्क कैंप
शुक्रवार को श्री महंत इंदिरेश अस्पताल परिसर में खर्राटे एवं अनिद्रा रोग सम्बंधित रोगियों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु निशुल्क शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 110 रोगियों का परीक्षण किया गया, 19 रागियों को डाॅक्टरों ने स्लीप स्टडी का परामर्श दिया। अस्पताल की ओर से वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि शिविर में ऐसे मरीजों की संख्या अधिक थी जिन्हें खर्राटे, मोटापा, दिन में ज्यादा नींद आना, ड्राइविंग करते समय सोने की
शिकायत, सोते समय अचानक सांस रूकने के अहसास से नींद टूट जाना, अनिंद्रा, सैक्स से विरक्ति, नींद में चलना या बोलना आदि की शिकायत रहती है। डाॅक्टरों ने ऐसे मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनकी आवश्यक जांचें की। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपलब्ध अत्याधुनिक स्लीप स्टडी मशीन के माध्यम से मरीजों की स्लीप स्टडी की जाएगी। शिविर में पंजीकृत रोगियों को खर्राटे व अनिद्रा रोग सम्बन्धित जांच पर 30 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी।

दिल्ली की युवा लड़की ”दिविता” ने उठाया सिंगटाली को स्मार्ट गांव बनाने का बीड़ा

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फोटोः कृष्णा रावत

ऋषिकेशः कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो!! यह पंक्तियां दिविता जैन पर सटीक बैठती है, स्नातक पत्रकारिता और सोशियल वर्क में पीजी करने के बाद दिल्ली निवासी दिविता जैन अपने सामाजिक कार्य के लिए टिहरी जिले के नरेंद्रनगर ब्लॉक के अटाली ग्राम पंचायत के सिंगटाली गांव को चुना जो ऋषिकेश-कौडियालय ईकोटूरिज्म जोन में स्थित है। यहां  पलायन  और बेरोजगारी  चलते गांव खाली होने के कगार पर आ गया है खेती चौपट है जो थोड़ा बहुत होता है उसे बंदर नष्ट कर जाते हैं।  इस गंगा तटीय गांव की बेसिक स्टडी के बाद  दिवीता ने अब इसकी बेहतरी के लिए  एक विस्तृत योजना बनाई  जिससे  आने वाले दिनों में  यह गांव  स्मार्ट गांव की श्रेणी में आ जाएगा। दिविता ने बताया कि ईकोवीटा फाउंडेशन 17 सितंबर से गांव की सीमा में व्यापक पौधा रोपण कर इस योजना का शुभारंभ करेगी जिसमें गांव की सीमा में फलदार और औषधीय पौधे रोपे जाएंगे। गांव के खेत खलिहालों को आबाद करना और जल स्रोतों को रिचार्ज करना भी उनके एजेंडे में है। साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार पूर्वक योजनाओं से जोड़कर  स्वालंबी बनाया जाएगा और गांव में उद्यान बागवानी और हॉटरीकल्चर जैसे कार्यों से पुरुषों को जोड़कर एक कमाई का जरिया बनाया जाएगा, जिससे गांव में पलायन रुके और लोगों को रोजगार मिल सके। इस काम में उनका सहयोग कर रहे डा. एसएन मिश्रा उर्फ पेड़ बाबा स्थानीय ग्रामीण भी उन्हें पूरा सहयोग दे रहे हैं। जिसकी शुरुवात 17 सितम्बर से की जा रही है।

विदेशी के घर पर लहराता है तिरंगा, हिंदी का है दीवाना

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एक ऐसा विदेशी, जिसके घर पर लहराता है तिरंग और वे हिंदी के हैं दीवाने। धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले स्विट्जरलैंड के निवासी पीथल लोदार(भोला दास) अपना देश छोड़कर उत्तराखंड में बसे गए हैं। उनका पूरा परिवार ऋषिकेश के पास पौड़ी के यमकेश्वर ब्लॉक में रह रहा है। 17 साल से यहां बसे लोदार परिवार ने अब भारत को ही अपना देश मान लिया है। ये परिवार यहां एक छोटे से गांव में हिंदी को बढ़ावा देने और समझने के बाद अब तमाम स्थानों पर घूमकर लोगों को हिंदी का महत्व समझा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार संवाददाता ने हिंदी दिवस पर इस शख्स से बातचीत की। पीथल अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़कर पहाड़ में ही खेती करके अपना गुजारा करते हैं। जानवर पालकर उनका दूध निकालकर और चूल्हे में रोटी बनाकर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी ठीक वैसे ही जी रहा है जैसे एक पहाड़ का परिवार जीता है। इस विदेशी परिवार के मुखिया पीथल लोदर अब भोला दास बन गए हैं। भोला दास ने अपना नाम तो बदला ही साथ ही अपनी पत्नी और दो बच्चों का नाम भी बदल लिया है। ईसाई धर्म से सनातन धर्म में परिवर्तन होने के बाद भोला दास अब उत्तराखंड की संस्कृति, यहां की आबोहवा और गांव के लोगों में ऐसा रच-बस गए हैं कि उन्हें न तो अपने देश की याद आती है और न ही किसी की कमी महसूस होती है।
भोला दास के यहां रहने के बाद से गांव के आसपास के लोग अब भोला दास और उसके परिवार को कहीं जाने नहीं देना चाहते। भोला दास के बच्चे देहरादून में पढ़ते हैं। फर्राटेदार इंग्लिश बोलने वाले पति-पत्नी अब हिंदी में बात करते हैं। भोला दास की पत्नी बेहद शर्मीली है। लिहाजा गांव के बुजुर्गों के सामने हमेशा घूंघट डाले रहती है। भोला दास के घर पहुंचने के बाद जरा भी यह नहीं लगेगा कि यह किसी विदेशी का घर है। भोला के घर में खेतीबाड़ी का सारा सामान मिलेगा। चूल्हे में बनती हुई रोटी मिलेगी, चूल्हे के धुएं से काली होती घर की छत मिलेगी। बाहर रंग बिरंगे फूल भी खिलते मिलेंगे। सबसे खास बात भारत माता का तिरंगा भोला दास के घर की शोभा बढ़ाता है। भोला का कहना है कि भारत और यहां के लोगों के साथ-साथ उत्तराखंड से उसे इतना लगाव हो गया है कि अब वो भूल चुका है कि वह स्विट्जरलैंड में रहा करता था।
आज भी स्विट्जरलैंड सरकार उसे पेंशन के तौर पर अच्छी खासी रकम देती है जिससे वह अपने परिवार और गांव वालों का बहुत सहयोग करता है। इतना ही नहीं शादी-विवाह, नाच-गाना, सुख-दुख हर समय में भोला दास और उसका परिवार गांव वालों के साथ रहता है।भोला दास और उसके परिवार से गांव के लोग भी बेहद खुश हैं, लेकिन भोला गांव की एक परेशानी से इतना परेशान है कि वह सरकारी अफसरों के भी सामने अपनी गुहार लगा चुका है। दरअसल, भोला का कहना है कि वह पौड़ी के बंदरों से इतना परेशान है कि आए दिन सरकारी दफ्तरों में भी चक्कर काट रहा है। इतना ही नहीं बंदर उसकी खेती और उसके फूल पत्तियों को रोज नुकसान पहुंचाते हैं।
गांव वालों से भी मिला प्यार और साथ
इन सब कठिन हालातों से जूझते हुए गांव वालों के साथ और प्यार के साथ भोला दास और उसका परिवार मजे में उत्तराखंड के पहाड़ों में जिंदगी बिता रहा है और यही संदेश दे रहा है कि जो लोग छोटी मोटी समस्याओं को देखने के बाद उत्तराखंड से पलायन कर जाते हैं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। साथ ही उत्तराखंड के उन लोगों को भी उत्तराखंड आने का दोबारा आग्रह करता है जो पहाड़ छोड़ निचले इलाकों में बस गए हैं।

आयुर्वेदिक औषधियों में गम्भीर शोध की आवश्यकताः राज्यपाल

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हर्बल उत्पादों के समुचित क्वालिटी कंट्रोल, गहन शोध व विश्वसनीय चिकित्सकीय परीक्षण द्वारा आयुर्वेद को विश्व स्तर पर व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है। आयुर्वेद के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने से न सिर्फ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित होंगे, बल्कि प्रदेश आर्थिक रूप से भी बेहतर बनेगा। इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ पैट्रोलियम में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा ‘रिसेंट एडवांसेस इन आयुर्वेदिक हर्बल मेडिसिन- फ्राॅम सोर्स टू मेन्यूफेक्चरिंग’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल ने यह बात कही। उन्होंने आयुर्वेदिक औषधियों के क्षेत्र में गंभीर शोध की जरूरत बताई।
नेशनल मेडिकीनल प्लांट्स बोर्ड, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित सम्मेलन को प्रदेश के राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल, कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत व अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस मौके पर राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल ने आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इनके निर्माण में उच्च मानकों का पालन किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में औषधीय पौधों की तेजी से बढ़ती हुई मांग को देखते हुए इनकी प्रभावोत्पादता व सुरक्षा उपायों के उच्च मानक स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। क्वालिटी कंट्रोल के साथ ही औषधीय पौधों को कीटाणुओं, कीटनाशकों व अन्य प्रदूषकों से बचाना होगा।
राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद व योग हजारों वर्षों से भारत की जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। आयुर्वेद दृढ़ बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित विज्ञान की सुव्यवस्थित शाखा है। अथर्ववेद में जिन भी जड़ी बूटियों का जिक्र है, वे सभी उत्तराखंड में पाई जाती हैं। कह सकते हैं कि आयुर्वेद की उत्पत्ति उत्तराखंड में हुई है। इसलिए आयुर्वेद को आगे बढ़ाने व इसमें लोगों की विश्वसनीयता बनाने में उत्तराखंड का सर्वाधिक दायित्व है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। विश्वविद्यालय हर्बल पौधों में गहन अनुसंधान के लिए कार्ययोजना बनाए। इस अनुसंधान का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए। बाहर के देशों में केवल अश्वगंधा, सर्पगंधा व नीम पर आधारित आयुर्वेदिक दवाईयों की ही स्वीकार्यता स्थापित हो पाई है क्योंकि इनमें पर्याप्त अनुसंधान हुआ है। आयुर्वेद में फार्माकोपियो (औषधियों की सूची, जिसमें कि औषधियों का प्रभाव व उनके उपयोग का वर्णन होता है) बनाना चाहिए। इसके तहत हर्बल औषधि विशेष के लिए आवश्यक मृदा, तापमान, जलवायु, उर्वरक संबंधी दशाओं की जानकारी हो।
केबिनेट मंत्री डाॅ. हरक सिंह रावत ने कहा कि देश की जैव विविधता का 28 प्रतिशत उत्तराखंड में है। आयुर्वेद में बहुत काम किया जाना है। इसके लिए व्यवहारिक नीतियां बनानी होंगी। वैज्ञानिक तरीकों से लोगों में आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ाना होगा। आयुर्वेद से जुड़े लोगों को समर्पण की भावना से काम करना होगा। गम्भीरता के साथ अनुसंधान कार्य करने होंगे। केबिनेट मंत्री डाॅ. रावत ने कहा कि जायका के तहत औषधीय महत्व के पेड़ लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी। कार्यक्रम में सचिव आयुष हरबंस सिंह चुघ, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरुण कुमार त्रिपाठी, सीएसआईआर आईआईपी के निदेशक डाॅ. अंजन रे, यूकाॅस्ट के महानिदेशक डाॅ. राजेंद्र डोभाल व अन्य उपस्थित थे।