देहरादून। पिछले 20 माह से वेतन न मिलने से परेशान पौड़ी और टिहरी के दुग्ध संघों के कर्मचारियों के सामने सरकार ने दो विकल्प रखे हैं। इसके तहत वे या तो स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) को आवेदन कर सकते हैं या फिर उन्हें हरिद्वार अथवा देहरादून के दुग्ध संघों में शिफ्ट किया जा सकता है। इसके लिए अब इन कार्मिकों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, 37 कर्मियों ने तो वीआरएस लेने का मन बनाते हुए आवेदन करने की बात कही है।
पौड़ी और टिहरी के दुग्ध संघों की एक दौर में धाक हुआ करती थी। संघ लाभ में रहे तो वहां कर्मियों की भर्ती भी की जाती रही। प्रबंधन की खामियों समेत दूसरे कारणों के चलते धीरे-धीरे इन संघों की माली हालत खराब होती चली गई। अब आलम ये है कि दोनों दुग्ध संघों के 110 कर्मचारियों को पिछले 20 माह से वेतन के लाले पड़े हैं। वेतन भुगतान की मांग को लेकर वे आंदोलित भी हैं, मगर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है।
दुग्ध विकास राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि दुग्ध संघों के कर्मचारियों का वेतन संघों की लाभ-हानि से जुड़ा है। चूंकि, पौड़ी व टिहरी दुग्ध संघों में दुग्ध उपार्जन नाममात्र का रह गया है। इसी वजह से कर्मियों को वेतन नहीं मिल पा रहा। उन्होंने बताया कि इस सबको देखते हुए वीआरएस का विकल्प रखने पर 37 कर्मचारियों ने इसकी हामी भरी है। उन्होंने कहा कि बाकी कर्मियों को लाभ में चल रही हरिद्वार व देहरादून के दुग्ध संघों में समायोजित किया जा सकता है लेकिन यह कर्मचारियों को तय करना है कि वे शिफ्ट होना चाहते हैं अथवा नहीं।
क्यों ले रहे हैं दुग्ध संघों के कर्मचारी जबरन वीआरएस?
तो दून के इन बिल्डरों को मिला “रेरा” का नोटिस
देहरादून। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में पंजीकरण कराए बिना शहर में होर्डिंग लगाकर प्रचार-प्रसार करने पर पनाश वैली व पैसिफिक हिल्स को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों में तीन और नोटिस जारी किए गए। इनमें विशपरिंग विलोज, शिमला बाइपास रोड स्थित सरदार जसवीर सिंह व जीएमएस रोड पर बिना नाम की एक परियोजना शामिल है। बिना पंजीकरण परियोजना का प्रचार करने पर रेरा अब तक 29 बिल्डरों को नोटिस जारी कर चुका है। वहीं, पूर्व में जारी नोटिस के क्रम में 14 बिल्डरों ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है।
रेरा के नियामक प्राधिकारी व सचिव आवास अमित नेगी के मुताबिक, तय समय के भीतर जिन बिल्डरों ने जवाब नहीं दिया है, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह राशि कुल परियोजना लागत की पांच फीसद तक हो सकती है। बिना पंजीकरण परियोजनाओं का प्रचार-प्रसार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उधर, रेरा के सचिवालय के रूप में काम कर रहे उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) के कार्यक्रम प्रबंधक कैलाश पांडे ने बताया कि रेरा में पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई (एक मई 2017 से पहले कंप्लीटीशन सर्टिफिकेट न लेने वाले बिल्डर) तक 168 बिल्डर पंजीकरण को आवेदन कर चुके थे। जबकि इसके बाद अब तक 185 बिल्डर आवेदन कर चुके हैं। बाद के 17 बिल्डरों पर परियोजना लागत का एक फीसद जुर्माना लगाया जा रहा है। इनमें सात का पंजीकरण पूरा हो चुका है, जबकि शेष के दस्तावेज में खामियां पाए जाने के चलते कार्रवाई गतिमान है। वहीं, 100 पॉपर्टी डीलर/रियल एस्टेट एजेंट भी पंजीकरण को आवेदन कर चुके हैं और 57 का पंजीकरण पूरा हो चुका है। वहीं, रेरा के नियामक प्राधिकारी अमित नेगी के मुताबिक पंजीकरण के लिए सितम्बर माह के अंत से ऑनलाइन प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। उन्होंने सभी बिल्डरों व रियल एस्टेट एजेंट से अपील की कि वह बिना पंजीकरण किसी भी तरह का प्रचार-प्रसार न करें।
किडनी कांडः एक और आरोपी हुआ गिरफ्तार
पिछले दिनों लालतप्पड़ (डोईवाला क्षेत्र) में किडनी खरीद- फरोख्त / ट्रांसप्लांट प्रकरण में थाना डोईवाला पुलिस द्वारा थाना डोईवाला में पंजीकृत मु0अ0सं0 256 /17 धारा 420/120B/370 ( i ) / 342 IPC व 18 / 19/20 मानव अंगो का प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 में घटना के दिन से ही फरार चल रहे अभियुक्त राजीव कुमार चौधरी पुत्र स्व0 श्री सुरेन्द्रपाल पाल सिंह नि0 14/41 आदर्श नगर बिनोली रोड बडौत बागपत को मय कार होंडा सिटी नंबर . डीएल-8 सीएनबी-0010 के 17 सितंबर को मुखबीर की सूचना पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय गेट के सामने गली नं-02 हरिपुर कलां थाना रायवाला के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। राजीव चौधरी राज्य छोडकर भागने की फिराक में था। राजीव चौधरी की कार की डिग्गी से बरामद एक कम्प्यूटर कैबनेट जिस पर एसस का डीवीडी राईडर लगा है एवं पीले रंग की गत्ते की फाईल मिली, जिसमें कॉलेज से सम्बन्धित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज व मेडिकल रिपोर्ट है। राजीव का जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। राजीव के पिता बीडीओ थे तथा राजीव ने अपनी पढाई बडौत से ही शुरू की थी। उसने बीएससी एग्रीकल्चर एवं फिर एम.ए इकोनाॅमिक्स किया। सन् 1998 में उसने स्नेह से शादी की जिससे उसको एक बेटा है फिर वर्ष 2000 में उसका तलाक हो गया। वर्ष 2004 में दूसरी शादी अर्चना से की जिससे एक लडकी हुई तथा वर्ष 2013 में उसका फिर से तलाक हो गया, फिर वह अनुपमा के सम्पर्क में आया जो पहले से तलाकशुदा थी। दोनों ने वर्ष 2014 में विवाह कर लिया। राजीव शुरू से जल्दी – जल्दी पैसा कमाना चाहता था। वर्ष 1999 में उसने हरिद्वार में बीएसएनएल अन्डर ग्राउण्ड केबिल बिछाने का टैण्डर लिया था। टैण्डर खत्म होने के बाद वह हरिद्वार में प्रोपर्टी डीलिंग का कार्य करने लगा। फिर उसके बाद उसने लक्सर में खनन का काम भी शुरू कर दिया और साथ -साथ प्रोपर्टी डीलिंग का कार्य भी करता रहा। वर्ष 2005 में अपने एक मित्र अब्बास, जो कि अब दुबई में रहता है, के माध्यम से राजीव की जान – पहचान डॉ0 अमित से हुई। राजीव ने अपनी पत्नी अनुपमा को नेचरविला में मैनेजर की नौकरी दिलायी और यहां से इनकी उत्तरांचल डेन्टल कॉलेज के चेयरमेन पाण्डे से भी जान – पहचान हो गयी। वर्ष 2016 में डॉ0 अमित ने जब राजीव से देहरादून में एक हॉस्पिटल खोलने की बात कही तो राजीव चौधरी ने उत्तरांचल डेन्टल कॉलेज के चेयरमैन पाण्डे से बात कर जुलाई 2016 में डॉ0 अमित को गंगोत्री चेरिटेबिल हॉस्पिटल लालतप्पड की बिल्डिंग को लीज पर दिलाया। उसके बाद राजीव चौधरी के द्वारा ही उक्त हॉस्पिटल की फिनिशिंग की गयी जिसमें कि डॉ0 अमित का एक साथी भी शामिल था। इन लोगों के द्वारा ही उक्त हॉस्पिटल में सम्पूर्ण सामान लगाया गया । 03 – 04 महीने में कार्य खत्म होने पर राजीव चौधरी डॉ0 अमित के साथ इस हॉस्पिटल को चलाने लगा। जब हॉस्पिटल से मोटी कमाई होने लगी तो राजीव चौधरी ने अपनी पत्नी को वहां पर कैन्टीन भी दिला दी। राजीव चौधरी सम्पूर्ण किडनी प्रकरण में सम्मिलित था, उसके द्वारा ग्राहकों को हॉस्पिटल में लाया जाता था, जिससे राजीव चौधरी को हॉस्पिटल से अच्छी कमाई होने लगी। राजीव चौधरी की चल – अचल सम्पत्ति एवं आपराधिक इतिहास की अन्य जानकारी प्राप्त की जा रही है।
बरामदगी का विवरण : –
1- 01 कार होंडा सिटी नंबर . डीएल 8 सीएनबी 0010,
2- कम्प्यूटर कैबनेट जिस पर एसस का डीवीडी राईडर लगा है
3- पीले रंग की गत्ते की फाईल जिसमें हॉस्पिटल से सम्बन्धित महत्तवपूर्ण कागजात है।
पुलिस टीम : –
1- थानाध्यक्ष रायवाला, श्री आशीष गुंसाई।
2- का0 नितिन कुमार।
3- का0 नवनीत सिंह।
4- का0 देवेन्द्र चौधरी।
5- का0 मनोज कुमार।
पर्यटन विभाग सुधारेगा चौरासी कुटिया की दशा: सतपाल महाराज
साइकिल के पहियों से तय किया गिनीज बुक रिकॉर्ड का सफर इस उत्तराखंडी ने
उत्तराखंड में हर तरफ युवा कला और प्रतिभा हर क्षेत्र में मिसाल कायम कर रहे हैं। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गरुड़ क्षेत्र के रहने वाले प्रदीप राणा ने साइकिल से 116 दिनों में 15261 किलोमीटर का सफर तय कर नया कीर्तिमान रचा है। एक साधारण किसान के बेटे प्रदीप ऐसा कारनामा करने वाले पहले इंसान बन गये हैं।
वो कहते हैं ना जहां चाह वहां राह, कुछ ऐसा ही कर दिखाया ग्राफिक एरा हिल यूनिर्वसिटी के प्रदीप राणा ने।आपको बतादें कि प्रदीप ने अपनी मुहिम की शुरुआत अपने यूनिर्वसिटी कैंपस से करी। लगभग 116 दिन पहले उन्होंने अपने कैंपस से साइकिल चलाना शुरु किया और आज वह बहुत से राज्यों को पार कर चुके हैं। साइकिल यात्रा के दौरान बहुत से नए अनुभव और यादें सजोतें हुए प्रदीप को पता भी नहीं चला कि कब उन्होंने इतना लंबा सफर तय कर लिया। प्रदीप साइकिल यात्रा के दौरान उ.प्र.,बिहार,नागालैंड,सिक्किम,कर्टक,पश्चिम बंगाल,गोवा,राजस्थान,पंजाब,महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश,केरल,असम और हरियाणा जैसे काफी राज्यों का सफर कर चुके हैं। प्रदीप का कहना कि “यह लाज़मी है कि अगर आप साइकिल से सफर कर रहे तो बहुत से लोगों से सामना होता है। कभी जानवर तो कभी इंसान लेकिन यह सभी आपके जीवन में एक अनुभव की तरह होते हैं।”

जिस तरह बूंद बूंद से तालाब भरता है ठीक उसी तरह प्रदीप ने हर दिन इसके लिए मेहनत की है। यह रिकार्ड बनाना आसान नहीं था लेकिन एक निरंतर मेहनत से यह बड़ा काम भी मुमकिन हो गया।मन में लगन और मेहनत से प्रदीप हर रोज 130-150 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं।हालांकि उन्होंने अपने सफर की शुरुआत मॅनसून में कि थी और ऐसे बहुत से दिन हुए जब उन्हें सफर के दौरान भारी बारिश का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रदीप इसमें भी साइकिल चलाते रहें और आगे बढ़ते रहे। पहाड़ी क्षेत्रों में उबड़-खाबड़ रास्तों में साइकिल के टायर पंचर होते तो प्रदीप उसे ठीक कर लेते और फिर आगे बढ़ जाते और किसी भी बात को अपने सफर का रुकावट नहीं बनने देते। उन्होंने बताया कि प्रसाद इरांडे का 141 दिन में 14576 किलोमीटर साइकिल चलाने का विश्व रिकॉर्ड तोड़कर संतोष होली ने साल 2015 में 111 दिन में 15222 किलोमीटर साइकिल चलाने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। गिन्नीज बुक के संतोष होली के इस रिकॉर्ड को प्रदीप राणा ने तोड़ दिया है।
प्रदीप इतने से हार नहीं मानने वाले हैं और 20 हजार किलोमीटर साइकिल चलाने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। प्रदीप राणा अक्टूबर के पहले सप्ताह देहरादून पहुंचेंगे। गौरतलब हैं कि ग्राफिक एरा के शिक्षक और छात्रों का यह पांचवा कीर्तिमान है।
स्वच्छता व खुले में शौच से मुक्ति के महायज्ञ में सभी दें योगदान की आहुति : राज्यपाल
स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम के तहत रविवार को सेवा दिवस के अवसर पर राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाॅल ने नगर निगम कॉम्प्लेक्स के समीप श्रमदान करते हुए साफ-सफाई की। उनके साथ कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत, विधायक खजानदास ने भी स्वच्छता अभियान में प्रतिभाग किया। उन्होंने एक सार्वजनिक शौचालय के निर्माण की नींव भी रखी।
राज्यपाल डाॅ. पाल ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। उन्होंने पर्यावरण मित्रों को स्वच्छता किट भी वितरित किए। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छता के लिए जनजागरूकता बहुत जरूरी है। इसमें शिक्षकों की अहम भूमिका हो सकती है। शिक्षक अपने छात्र-छात्राओं को स्वच्छता के महत्व के बारे में जानकारी दें और इसके लिए प्रेरित करें। स्वच्छता के प्रति जागरूक बच्चे अपने अभिभावकों व परिवारजनों को गंदगी फेलाने से रोक सकते हैं। समाज में स्वच्छता का एक सकारात्मक माहौल बनाना होगा।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 02 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान प्रारम्भ करते हुए आमजन को इससे जोड़ा। आज प्रधानमंत्री के जन्म दिन को सेवा दिवस के तौर पर मनाकर हम सभी अपने घरों के साथ ही अपने मोहल्लों, सार्वजनिक स्थलों, शहरों, राज्य व देश की स्वच्छता का संकल्प ले रहे हैं। प्रधानमंत्री के भारत को खुले में शौच से मुक्त कराने की मुहिम को बड़ी कामयाबी मिल रही है। इस मुहिम को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए हम सभी मिलकर काम करना होगा।
राज्यपाल ने कहा कि देश की स्वच्छता व खुले में शौच से मुक्ति का महायज्ञ चल रहा है। इसमें हम सभी को अपने योगदान की आहुति देनी है। पक्के शौचालयों के निर्माण से न केवल स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा बल्कि महिला कल्याण व महिला सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छता करना ही काफी नहीं है बल्कि स्वच्छता बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। यह तभी हो सकता है जबकि हमारा ध्यान लगातार इस ओर हो। स्वच्छता का भाव हमारी आदत में शुमार होना चाहिए। उत्तराखण्ड, देवभूमि है और इस देवभूमि में स्वच्छता का महत्व और भी अधिक है। इधर -उधर कचरा फैलाते समय हर व्यक्ति के जेहन में यह बात आनी चाहिए कि यह देवभूमि है। हम सभी को समझना होगा कि स्वच्छता हमारी मौलिक आवश्यकता है।
राज्यपाल ने शहरी विकास के अधिकारियों को देहरादून की स्वच्छता की मुहिम में अधिक से अधिक वालन्टियर्स को जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर नगम की मोबाईल टीमें हों जो कि लगातार शहर का निरीक्षण करते रहे और जहां भी गंदगी हो, तुरंत साफ करवाए। आमजन द्वारा मोबाईल पर गंदगी की सूचना देने पर कार्यवाही किए जाने के संबंध में बताए जाने पर राज्यपाल ने कहा कि इस बात का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए कि किसी व्यक्ति द्वारा कब गंदगी के बारे में सूचना दी गई और कितनी देर में इस पर कार्रवाई की गई।
कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि हम केवल अपने घरों की सफाई पर ही ध्यान देते हैं और मान लेते हैं कि सार्वजनिक स्थलों की सफाई का जिम्मा केवल सरकार का है। निस्संदेह सरकारी विभागों का दायित्व है। परंतु इसे अगर जनसाधारण का सक्रिय सहयोग मिल जाए तो गंदगी हो ही नहीं सकती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने सफाई का अभियान प्रारम्भ करते हुए करोड़ों लोगों को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
यही कारण है आज निचले स्तर से लेकर सर्वोच्च स्तर तक विराजमान व्यक्ति भी एक साथ स्वच्छता के लिए संकल्पबद्ध है। श्री पंत ने कहा कि केवल कानून बनाने से परिवर्तन नहीं आता है। परिवर्तन होता है जब समाज आगे आता है। उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्र ओडीएफ हो चुके हैं। अब शहरी क्षत्रों पर ध्यान देना है विशेष तौर पर साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर।
स्वच्छता सेवा संकल्प के रूप में मनाया जन्मदिवस, चलाया घाटों पर सफाई अभियान
स्वच्छ गंगा अभियान टीम के सदस्यों ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस को स्वच्छता ही सेवा संकल्प के रूप में मनाया। स्वच्छ गंगा अभियान टीम के सदस्यों ने गंगा घाटों पर साफ सफाई अभियान चलाते हुए दिव्यांग घाट वेद भारती घाट पर सफाई अभियान चलाया। टीम के सदस्यों ने गंगा घाटों पर स्नान कर रहे यात्रियों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
गंगा घाटों की सफाई अभियान में यूरोप से पहुंचे यात्री श्रद्धालुओं ने भी गंगा घाटों की सफाई की। सौरभ सामंत ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरे देश में स्वच्छता का संदेश आमजनमानस में फैला रहे हैं। टीम का प्रत्येक सदस्य उनके जन्मदिवस पर स्वच्छता ही सेवा संकल्प के रूप में आगे कार्य करता रहेगा। गंगा घाटों पर फैली गंदगी को नियमित रूप से साफ किया जाएगा साथ ही जन-जागरूकता पैदा करने के लिए समय-समय पर टीम के सदस्य आवासीय क्षेत्रों में पहुंचकर गंगा के प्रति जनजागरूक करेगें।
रजनीश भारद्वाज ने कहा कि स्वच्छ गंगा अभियान टीम के सदस्य सराहनीय कार्य कर रहे हैं उनके द्वारा गंगा घाटों पर फैली गंदगी को एकत्र कर स्वच्छता का संदेश फैलाया जा रहा है जिससे निश्चित तौर पर गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी। हिमांशु प्रधान एवं आशीष शर्मा ने प्रण लेते हुए कहा कि निश्चित तौर पर गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जायेगी। हमारा प्रयास है कि गंगा घाटों को स्वच्छ सुन्दर बनाये साथ ही आमजनमानस को भी गंगा घाटों को स्वच्छ रखने के लिए अपना सहयोग प्रदान करना होगा।
पाॅलीथीन पन्नियां वेस्ट सामग्री का उपयोग गंगा घाटों पर न करें। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस की उन्होंने बधाई दी। सफाई अभियान में शामिल अजय धीमान सन्नी राणा, शिवम गुप्ता, सुबोध मिश्रा, गंगा शर्मा, आयुष श्रेत्रीय, हेमन्त, मोहित भारद्वाज, रचित गुज्जर, बाली कौशिक, तेजस, मोनू, कुणाल, मनोज, शिवम, उत्कृर्ष आदि शामिल रहे।
नम आंखों से दी गई मार्शल अर्जन सिंह को अंतिम विदाई
नई दिल्ली। वायुसेना के रिटायर्ड मार्शल अर्जन सिंह का अंतिम संस्कार आज सुबह साढ़े नौ बजे यहां बरार स्क्वॉयर स्थित सैन्य छावनी में किया गया। मार्शल अर्जन सिंह का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार छावनी स्थित बरार स्क्वायर में किया गया।
मार्शल अर्जन सिंह के पार्थिव शरीर को सोमवार को उनके निवास स्थान से प्रातः 8 बजकर 15 मिनट पर बन्दूकधारी गाड़ी में जलूस के रूप में ले जाया गया। अंत्येष्टि से पहले मार्शल अर्जन सिंह के सम्मान में वायुसैनिक बंदूकों की सलामी दी। वहीं वायुसेना की तरफ से युद्धक विमानों की परेड के माध्यम से सम्मान दिया गया।
गृह मंत्रालय के अनुसार सोमवार को राजधानी में सभी सरकारी भवनों पर जहां राष्ट्रीय ध्वज नियमित तौर पर जहां-जहां फहराया जाता है वो आधे-झुके रहेंगे। मार्शल अर्जन सिंह को आकिरी श्रद्धांजली देने के लिये खास और आम लोगो का तांता लगा रहा। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री, तीनों सेना अंगों के प्रमुख, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ादि सामिल रहे।
गौरतलब है कि वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के नायक और पांच सितारा रैंक तक पदोन्नत किए गए वायुसेना के एकमात्र अधिकारी मार्शल अर्जन सिंह का शनिवार को सेना के अस्पताल में निधन हो गया था। वह 98 वर्ष के थे
कूड़े के ढेर में बायो मैडिकल कूड़ा मिलने पर मैड ने दायर की याचिका
देहरादून। शिक्षित छात्र संगठन मेकिंग ए डिफरेंस बाय बीइंग दी डिफरेंस (मैड) ने बीते रविवार को शहर में सफाई एवं जागरुकता अभियान के दौरान खुले में पाए गए बायो मेडिकल पदार्थों के मामले में नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में याचिका दायर कर आपत्ति जताई है।
शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में (मैड) संस्थापक व अधयक्ष अभिजित नेगी ने रविवार को सफाई अभियान में पाए गए बायो मेडिकल कूड़े को वीडियो के माध्यम से दिखाया। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों शहर के कई स्थानो पर सफाई कार्यक्रम चलाया गया था। इस दौरान जब खुले में इस प्रकार से पदार्थ मिलने लगे तो तत्काल अभियान को रोककर उसका सैंपल लिया गया और इसे निगम कर्मचारियों को दिखाया गया।
वहीं, संस्था के सदस्यों का कहना है इस प्रकार के कूड़े का खुले में मिलना न सफाई कर्मचारियों के लिए बल्कि जानवरों के लिए भी बड़ा खतरा है। ऐसे कूड़े को सड़क पर फेंकने से महामारी का संकट गहरा सकता है। इसे समय रहते रोकना होगा नही तो आने वाले दिनों में ये बड़ा खतरा साबित हो सकता है। मैड संस्था इसके लिए शहर में विशेष अभियान चलाकर लोगों को इसके प्रति जागरूकता लाएगी।ताकि ऐसे पदाथों को कूड़े की ढ़ेर में न फेंका जाए।
इधर, संस्था का कहना है पिछले वर्ष हरित न्यायाधीकरण द्वारा सरकार को फटकार लगाई गई थी फिर भी सरकार द्वारा बायो मेडिकल कूड़े का निस्तारण सही ढंग से नही किया जा रहा है। साथ ही ऐसे चिकित्सालयों पर निगरानी भी नही रखी जा रही है जो कूड़े में ढेर में ऐसी हानीकारक पदार्थ को डाल रहे है। ऐसे लोगों पर शासन प्रशासन की ओर से रोक लगाई जाए। इस मौके पर विवेक गुप्ता, करण महेश्वरी सहित अन्य उपस्थित रहे।
तो ऐसे चाय की दुकान पर खुले थे किडनी रैकेट के राज़
पिछले दिनों उत्तराखंड पुलिस को एक बड़ी कामयाबी तब मिली जब उसके हत्थे अंतर्राजीय किडनी रैकेट का सरगना डाॅ अमित चढ़ा। इसके बाद परत दर परत किडनी रैकेट में शामिल लोगों के राज़ खुलते रहे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड में फैले इस गिरोह का सुराग पुलिस को कैसे मिला? इसके पीछे न कोई तकनीक थी न ही कोई बड़ी टीम बल्कि एक सजग पुलिस कर्मी की सूझबूझ।
करीब एक महीने पहले रानीपुर थाने में तैनात कांस्टेबल पंकज शर्मा चाय पीने के लिये नुक्ड़ की दुकान पर गये। वहां पहले से मौजूद दो ड्राइवरों को बात करते उन्होनें सुना। वो दोनों किसी निजि अस्पताल में गैरकानूनी काम होने के बारे में बात कर रहे थे। दरअसल इन दोनों ड्राइवरों पर गंगोत्री अस्पताल में किडनी डोनरों को लाने की जिम्मेदारी थी।
पंकज कहते हैं कि, “दोनों की बात सुनकर मुझे शक हुअा कि हो न हो देहरादून या आसपास के इलाके में कोई बड़ा अंगों का अवैध रैकेट चल रहा है।” इसके बाद शर्मा ने अपने सीनियर अधिकारियों को इसके बारे में सूचित किया। जिसके बाद ये मामला हरिद्वार एसएसपी कृष्ण कुमार तक पहुंचा। जिन्होंने न्यूज़पोस्ट टीम को बताया कि, यह जानकारी दो लोगों से मिली पंकज शर्मा और सब इंस्पेक्टर अभिनव शर्मा और फिर तकरीबन एक महीने से ऊपर की कड़ी मेहनत के बाद कुछ साॅलिड लीड्स हाथ लगे,जिसके आधार पर एक टीम गठित की गई।
मामले में कोई सटीक जानकारी न होने के बावजूद पुलिस विभाग ने अपने खुफिया तंत्र की मदद से आखिरकार डोईवाला में गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल की पहचान कर ली चहां ये किडना रैकेट फल फूल रहा था।लेकिन देहरादून पुलिस को इस बारे में बताने के लिेये हरिद्वार पुलिस के पास अभी भी पर्याप्त सबूत नहीं थे। इसलिये दोबारा करीब एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद पुलिस को ये पुख्ता जानकारी मिली कि 10 सितंबर को किडनी डोनरों को एक गाड़ी में ले जाया जायेगा। इसके चलते पुलिस ने एक्शन लिया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें डाॅ अमित का मुख्य गुर्गा जावेद भी सामिल था जिसपर डोनरों को लाने ले जाने की जिम्मेदारी थी।





























































