गोपेश्वर, बदरीनाथ हाईवे जो रुद्रप्रयाग से लेकर चमोली जिले के हेलंग तक बीआरओ से हटाकर एनएच को दिए जाने की प्रक्रिया चल रही हैै। उससे इस मार्ग पर बीआरओ के साथ काम कर रहे स्थानीय मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। इस संबंध में स्थानीय मजदूरों ने जिलाधिकारी के माध्यम से गढ़वाल सांसद को एक पत्र भेजकर उन्हें एनएच में समायोजित करवाने की मांग की है।
चमोली जनपद की सीमा गौचर से लेेकर नीती, माणा, गमसाली तक जाने वाले हाईवे का काम पहले बीआरओ के पास था। बीआरओ द्वारा इस मार्ग पर स्थानीय युवाओं को भी काम पर रखा गया था। अब जब यह मार्ग विकास खंड जोशीमठ के हेलंग तक बीआरओ से हट कर एनएच को सौंपा गया है। ऐसे में बीआरओ के साथ काम कर रहे मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया हैै। बीआरओ के साथ काम कर रहे मजदूरों ने अपनी व्यधा का एक पत्र गढ़वाल सांसद को भेजा है। जिसमें उन्होंने मांग की है कि उन्हें इस मार्ग पर कार्य करने वाली कंपनी को स्थानीय मजदूरों को भी कार्य पर रखने के लिए कहा जाए ताकि स्थानीय मजदूरों की रोजी-रोटी भी चल सके। ज्ञापन में मजदूर अनूप, गजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, आशा देवी, शिशुपाल आदि के हस्ताक्षर हैै।
बीआरओ के साथ काम कर रहे मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
सीएम की घोषणा के बावजूद नहीं बनी सड़क
उत्तरकाशी जिले में भटवाड़ी ब्लॉक के गमदिड़ गांव के ग्रामीणों द्वारा प्रस्तावित मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरt कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देते हुआ कहा कि लोनिवि निर्माण कार्य में देरी कर रहा है, जिससे उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री की घोषणा और सर्वे होने के बावजूद अभी तक तीन किलोमीटर मार्ग नहीं बन पाया है। ग्रामीणों ने जल्द काम शुरू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला मुख्यालय उत्तरकाशी के पास स्थित गमदिड़ गांव तक आजतक सड़क नहीं बन पाई है। जिस कारण ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक आने के लिए तीन किमी के कच्चे रास्ते पर पैदल सफर करना पड़ता है। इसी वजह से, वर्ष 2015 में महिपाल सिंह की गर्भवती पत्नी को समय से अस्पताल न पहुंचा पाने के चलते उसकी मौत हो गई थी। हालात ये हैं कि बरसात के मौसम के बाद तो इस मार्ग में पैदल चलना भी मुशकिल हो जाता है।
गांव के रितुराज राणा ने बताया कि 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने गांव के लिए मोटर मार्ग निर्माण कार्य कराने की घोषणा की थी। जिसके बाद लोनिवि द्वारा सड़क का सर्वे भी किया गया था लेकिन उसके बाद से कोई कार्य नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि विभाग की लापरवाही और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है, जिससे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अगर जल्द ही इस मार्ग का निर्माण शुरू नहीं कराया गया तो ग्रामीणों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ज्ञापन देने वालों में अखिलेश नेगी, अवतार सिंह, जयेंद्र सिंह, प्रकाशी देवी, प्रभा देवी, रणवीर पंवार आदि शामिल हैं।
त्रिकोण शक्तिपीठ का प्रमुख स्थल हरिद्वार: त्रिवेणी दास
उत्तर प्रदेश के विंध्याचल में त्रिकोण शक्तिपीठ के बाद हरिद्वार त्रिकोण शक्तिपीठ का प्रमुख स्थल है। विंध्याचल में जहां मां विंध्यवासिनी व महाकाली मंदिर तथा मां सरस्वती मंदिर मिलकर त्रिकोण का आकार बनाते हैं, वहीं हरिद्वार में मायापुरी की अधिष्ठात्री देवी मां माया देवी, चण्ड-मुण्ड का वध कर नील पर्वत पर विराजमान होने वाली मां चण्डीदेवी तथा विल्व पर्वत पर विराजमान मां मंशादेवी मिलकर हरिद्वार में त्रिकोण शक्तिपीठ को सार्थकता प्रदान करते हैं। त्रिकोण शक्तिपीठ के साधना का विशेष महत्व बताया गया है।
ज्योतिषाचार्य श्रीमंहत त्रिवेणी दास महाराज के अनुसार शक्ति के त्रिकोण पीठ में साधना का विशेष महत्व है तथा यह विशेष फलदायी भी होती है। नवरात्र में त्रिकोण शक्ति के केन्द्र साधना करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति होती है। त्रिवेणीदास महाराज के अनुसार तीर्थनगरी मायापुरी क्षेत्र में शक्ति साधना का महत्व अन्य स्थानों पर साधना करने से अधिक होता है। कारण कि देश-विदेश में स्थापित 51 शक्तिपीठों के प्रादुर्भाव का प्रमुख केन्द्र मायापुरी का कनखल क्षेत्र है। जो भगवान शिव की ससुराल भी है।
बतादें कि जिस स्थान पर मायादेवी मंदिर है वहां भगवती सती की नाभी का भाग गिरा था। इस कारण इसका नाम मायादेवी पड़ा। मायापुरी क्षेत्र में ही माता पार्वती ने भगवान शिव का पाने के लिए विल्वक्षेत्र में हजारों वर्षों तक तप किया। यह क्षेत्र नवदुर्गाओं की उत्पत्ति की आधारभूता मां पार्वती की तपस्थली होने के कारण भी शक्ति उपासना करना यहां विशेष फलदायी होता है। यही कारण है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर लोग यहां नवरात्र में शक्ति की आराधना करते हैं तथा ब्राह्मणों द्वारा पाठ करवाते हैं।
शिक्षिका से महीनों तक बलात्कार, बनाया एमएमएस
हरिद्वार, धर्मनगरी में स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका के साथ स्कूल प्रिंसिपल का बेटा कई महीनों तक बलात्कार करता रहा और एमएमएस भी बनाया। धर्मनगरी में अधर्म की पोल तब खुली जब महिला ने उस युवक से तंग आकर पुलिस में शिकायत कर दी। मामला हरिद्वार के पथरी थाने का है। कटारपुर के स्कूल में पढाने वाली शिक्षिका ने पुलिस में अपने साथ पिछले कई महिनों से किए जा रहे शोषण की शिकायत की। पुलिस ने संबधित धाराओं में मामला दर्ज करते हुए इसकी जांच शुरु कर दी हैं। हरिद्वार के थाना पथरी क्षेत्र के धनपुरा गांव की एक युवती ने कटारपुर स्थित एक स्कूल के प्रिंसिपल के बेटे के खिलाफ थाने में अपने शारीरिक शोषण का आरोप लगाया है। उसने पुलिस में शिकायत की है कि आरोपी ने एक बार धोखे से उसके साथ बलात्कार किया और उसका एमएमएस बना दिया और उसके बाद वह उसे लगातार प्रताडित करने लगा। तहरीर में कहा गया है कि वह बार बार एमएमएस का डर दिखाकर उसके साथ बलात्कार करता था। पीड़िता के अनुसार बार-बार हो रहे अपने इस शोषण से वह तंग आ गयी और आरोपी के न मानने पर उसने पुलिस में शिकायत की। पथरी थाना प्रभारी गजेंद्र बहुगुणा का कहना है कि इस मामले में एक युवती की तहरीर आयी थी जिस पर संबधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया हैं। पीड़िता युवती को मेडिकल के लिए भेज दिया गया है। इसके साथ ही आरोपी वैभव की तलाश की जा रही है।
रोमांच और ट्रैकिंग के चाहने वालों के लिये नया पता होगा “चाईंशील ट्रेक”
राज्य में ट्रैकिंग से जुड़े पर्यटन के विकास के लिये सरकार ने उत्तरकाशी के चाईंशील ट्रेक को ट्रेकिंग मैप पर जगह दिलाने की तैयारी की है।इसके लिये ट्रैक आॅफ द इयर चांईशील-2017 अभियान शुरू किया गया है।
इस बारे में बताते हुए पर्यटन सचिव मीनाक्षी सुन्दरम ने बताया कि “चांईशील ट्रैक को विश्व प्रसिद्ध बनाने और खासतौर पर युवाओं को इसमें हिस्सा लेने के लिये पर्यटकों को देश विदेश से बुलाया जा रहा है।”
संयुक्त निदेशक पर्यटन पूनम चंद इस ट्रेक के लिये नोडल अधिकारी होंगे।ये ट्रेक गुरूवार 21 सितम्बर, 2017 से 7 अक्टूबर, 2017 तक चलेगा। इस अभियान में
- पहले दिन प्रतिभागी देहरादून से चांईशील लगभग 230 कि.मी. की यात्रा करेंगे, रात में बेस कैम्प बलावत में होगा।
- दूसरे दिन बलावत से सुनौटी थाच तक लगभग 5-6 घण्टे का ट्रेक और सुनौती थाच में रात बिताई जायेगी।
- तीसरे दिन लगभग 5-6 घण्टे की यात्रा सामटा थाच तक करेंगे।
- चैथे दिन 5-6 घण्टे का सफर समता थाच से सरूताल/टिकुला थाच तक का होगा।
- पांचवे दिन टिकुला थाच से डगान मोरीयाच तक 4-5 घण्टे का ट्रैक किया जायेगा और रात डगान मोरीयाच में।
- छठे दिन मोरीयाच से चिवां तक 3-4 घण्टे का ट्रक करने के बाद देहरादून के लिए रवाना होंगे।
देहरादून से लगभग 230 कि.मी. की दूरी पर स्थित चांईशील, उत्तरकाशी के मोरी ब्लाॅक के बंगाण क्षेत्र की कोठीगाड घाटी एवं हिमाचल प्रदेश के रोहडू एवं डोडराक्वार के मध्य की ऊंची चोटियों की अर्द्धचंद्राकार पर्वत श्रृंखला के रूप में लगभग 25-30 कि.मी. में फैला है। चांईशील में छोटी-छोटी घास के बड़े-बड़े बुग्याल, फूलों की घाटियाों में पर्वतीय घास, विभिन्न प्रकार के फूल एवं जड़ी-बूटियां और जगह-जगह छोटी नदियां और वाटरफाॅल है। यहां पर मोनाल पक्षी भी प्रायः देखने को मिलते है। चांईशील की निचली घाटियों तथा कोठी गाड़ बंगाण में स्थानीय लोगों के सेब के बड़े-बड़े बागान एवं काष्ठकला की नक्काशीयुक्त लकड़ी से निर्मित देव मंदिर व मकान इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
महंत मोहनदास का नहीं चला पता, संतों का गुस्सा फूटा, एसटीएफ करेगी करीबियों से पूछताछ
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और बड़ा अखाड़ा उदासीन के कोठारी महंत मोहन दास के लापता होने के मामले में छह दिनों तक कुछ पता नहीं चलने पर संतों का गुस्सा राज्य सरकार और उत्तराखंड पुलिस पर फूट पड़ा।
संतों ने गुरुवार शाम बड़ा अखाड़ा में बैठक कर राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज की राजधानी से महज 50 किलोमीटर दूर हरिद्वार में इतनी बड़ी घटना घट गई लेकिन मुख्यमंत्री ने एक बार भी यहां आना गंवारा नहीं समझा। यही वजह है कि पुलिस भी मामले को हल्के ले रही है। उन्होंने कहा कि मनमोहन दास के अब तक ना मिलने के पीछे इस मामले में पुलिस में आपसी समन्वय और जनता के साथ मामले की जांच करने की कमी है। संतों ने इस मामले में छात्रों युवा वर्ग और सामाजिक संगठनों व्यापारियों का सहयोग मांगते हुए शुक्रवार को रेलवे स्टेशन से आक्रोश रैली निकालने की घोषणा की। साथ ही हर की पैड़ी पर होने वाली गंगा आरती तक हर की पैड़ी पर धरना देने की घोषणा की। बैठक में कुछ संतों का या भी मत था कि 23 तारीख को राष्ट्रपति के आने पर उन्हें और मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाए, लेकिन प्रमुख संतों ने इसे नकार दिया। उन्होंने कहा यह जरूरत पड़ने पर संतों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में जाकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आवास पर प्रधानमंत्री से भेंट का आक्रोश व्यक्त करेगा।
वहीं महंत मोहनदास की गुमशुदगी के मामले में उत्तराखंड एसटीएफ ने पड़ताल तेज कर दी है। गुरुवार को एसटीएफ ने कनखल पहुंचकर महंत के करीबियों की जानकारी जुटाई। इनकी पूरी लिस्ट तैयार की गई है। जल्द ही करीबियों से सिलसिलेवार तरीके से पूछताछ की जाएगी। वहीं पुलिस और सीआइयू की अलग-अलग चार टीमें गुरुवार को मेरठ में भी डेरा डाले रहीं। बड़ा अखाड़े के कोठारी महंत मोहनदास बीते शुक्रवार को ट्रेन से मुंबई जाने की बात कहकर हरिद्वार-एलटीटी सुपरफास्ट ट्रेन में सवार हुए थे। अगले दिन भोपाल से उनके गायब होने की खबर हरिद्वार पहुंची थी। तब से महंत की तलाश की जा रही है। मोबाइल की लोकेशन मेरठ पाए जाने के बाद से उत्तराखंड पुलिस और सीआइयू, उप्र. पुलिस व एटीएस के साथ मेरठ में डेरा डाले हुए है। पुलिस पर भी खुलासे का दबाव बढ़ता जा रहा है।
गुरुवार को एसटीएफ को मामले की कमान सौंपी गई। एसटीएफ की एक टीम ने बुधवार को अखाड़ा पहुंचकर पड़ताल की थी। गुरुवार को एसटीएफ टीम फिर कनखल पहुंची और महंत के करीबी लोगों की जानकारी जुटाई। अखाड़े के संतों से पूछताछ की गई कि महंत का किन-किन लोगों से मिलना जुलना था। टीम अब महंत के करीबियों से भी पूछताछ करेगी। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि एसटीएफ को भी जांच में मदद के लिए लगाया गया है। एक टीम ने गुरुवार को भी हरिद्वार पहुंचकर जांच पड़ताल की। एसएसपी ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी हरिद्वार पुलिस की टीमें जांच में जुटी है।
गढ़वाल में भारी वर्षा के आसार, शासन का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में प्रदेश में भारी बारिश की आशंका जताई है। विशेषकर गढ़वाल मंडल के लिए चेतावनी जारी की गई है। चेतावनी के मद्देनजर शासन ने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। देर शाम गंगोत्री और यमुनोत्री में हल्की बारिश के साथ ही ऊंची चोटियों पर हिमपात की सूचना है।
दूसरी ओर यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव बड़कोट के निकट ओजरी में पहाड़ी दरकने का सिलसिला बरकरार है। गुरुवार को बोल्डर गिरने से चारों ओर धूल के गुबार छाए रहे। इधर, वैकल्पिक मार्ग का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। पांच किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण ये यमुनोत्री यात्रा साढ़े तीन किलोमीटर लंबी हो जाएगी। उत्तरकाशी के जिलाधकारी डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि पांच सौ मीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। एनएच और लोक निर्माण विभाग की टीम संयुक्त रूप से मार्ग निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा यमुना नदी पर वैली ब्रिज बनाने की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। जिलाधिकारी के अनुसार भू-वैज्ञानिकों की टीम दरकते पहाड़ का अध्ययन कर रही है। टीम की रिपोर्ट मिलने पर ट्रीटमेंट के बारे में विचार किया जाएगा। इसके अलावा बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री धाम के लिए यात्रा सुचारु रही।
उधर, कुमाऊं में बुधवार रात को हल्की बारिश के बीच चम्पावत व नैनीताल जिलों में भूस्खलन की घटनाएं हुईं। चम्पावत जिले में पूर्णागिरि धाम के दर्शन करने जा रहे लखनऊ के श्रद्धालुओं की कार पर मलबा गिरा। हालांकि कार में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन कार रात भर मलबे में फंसी रही, जिसे सुबह निकाला जा सका। नैनीताल जिले के हैड़ाखान मार्ग पर भी भारी भूस्खलन हुआ है। इससे हैड़ाखान मंदिर व एक दर्जन से अधिक गांवों की आवाजाही बंद हो गई है।
अवैध काउंसिलिंग मामले में बैकफुट पर विश्वविद्यालय, तिथियों में बदलाव
उत्तराखंड, आयुर्वेद यूनिवर्सिटी अवैध काउंसिलिंग के मामले में बैकफुट पर आ गई है। विवि ने काउंसिलिंग की तिथियों में बदलाव कर दिया है। विवि ने कॉलेजों की मान्यता को लेकर उठ रहे सवालों को देखते हुए यह निर्णय लिया। संशोधित तिथियों के अनुसार यूजी पाठ्यक्रमों की सीटों को आवंटन नौ व पीजी सीटों का आवंटन 10 अक्टूबर को होगा।
उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल टेस्ट यूएपीएमटी 2017 परीक्षा को पास करने के बाद अब परीक्षार्थियों को आयुर्वेद कॉलेजों में सीटों की आवंटन प्रक्रिया से गुजरना है। इसी को लेकर विवि ने बीते दिनों काउंसिलिंग की तिथियां घोषित कर दी। विवि द्वारा यूएपीएमटी 2017 मेरिट के आधार पर बीएएमएस, बीएचएमएस व बीयूएमएस पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे/अखिल भारतीय कोटे की सीटों पर प्रवेश हेतु 24 सितंबर को पंजीकरण व दस्तावेजों का सत्यापन व 25 सितंबर को सीट आवंटित की जानी थी। इसी प्रकार पीजी पाठ्यक्रमों में एमडी व एमएस आयुर्वेद पाठ्यक्रम में राज्य कोटे/अलग राज्य कोटे की सीटों पर प्रवेश हेतु 25 सितंबर को पंजीकरण व अभिलेख सत्यापन और 26 सितंबर को सीट आवंटन किया जाना था। लेकिन प्रक्रिया उस वक्त खटाई में पढ़ गई जब कॉलेजों की मान्यता को लेकर सवालिया निशान लगा दिया गया।
दरअसल, अभी किसी भी निजी संस्थान को विश्वविद्यालय से शैक्षणिक सत्र 2017-18 की संबद्धता प्राप्त नहीं है। जबकि, यूजीसी रेगुलेशन 2009 और उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी परिनियमावली 2015 के अनुसार प्रत्येक वर्ष संबद्धता लेना अनिवार्य है। मानकों के तहत सभी संस्थाओं को एक लाख रुपये प्रोसेसिंग फीस जमा कर आवेदन करना होता है। उसके बाद निर्धारित मानकों की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है जो विवि कुलपति के अनुमोदन के बाद मामले को विवि कार्यसमिति में रखा जाता है। जिसके अनुमोदन के उपरांत संस्थाओं को संबद्धता प्रदान की जाती है। और उन्ही सम्बद्ध संस्थाओं को काउंसलिंग के माध्यम से छात्र आवंटित किए जाते हैं। मौजूदा स्थिति की बात की जाए तो विश्वविद्यालय के अंदर कार्यसमिति तो दूर, कोई समिति ही नहीं है। सारे निर्णय मात्र प्रभारी कुलपति और कुलसचिव ही ले रहे हैं। जो कि अवैध है। निजी संस्थान अपने स्तर पर बिना संबद्धता के अपनी कोटे की सीटों पर प्रवेश ले चुके हैं। ऐसे में नियमों के नजरिए से यह तमाम प्रक्रिया अवैध हो रही थी। लेकिन अब मामले की गंभीरता को देखते हुए विवि द्वारा काउंसिलिंग की संशोधित तिथियां घोषित की गई हैं।
विवि के कुलसचिव डा. अनूप कुमार गक्खड़ का कहना है कि कॉलेजों का निरीक्षण शुरू करा दिया गया है। अगले दो से चार दिनों में संस्थानों की जांच पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि किसी कारण वश यदि निरीक्षण प्रक्रिया अटकती तो काउंसिलिंग की तिथियां प्रभावित होती। इसी को देखते हुए काउंसिलिंग कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।
यह है संशोधित कार्यक्रम
यूएपीएमटी 2017 मेरिट के आधार पर बीएएमएस, बीएचएमएस व बीयूएमएस पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे/अखिल भारतीय कोटे की सीटों पर प्रवेश हेतु 8 अक्टूबर को पंजीकरण व दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद 9 अक्टूबर को सीट आवंटित की जाएगी। पीजी काउंसिलिंग के तहत एमडी एमएस आयुर्वेद पाठ्यक्रम में राज्य कोटे/अलग राज्य कोटे की सीटों पर प्रवेश हेतु 9 अक्टूबर को पंजीकरण व अभिलेख सत्यापन होगा। इसके बाद 10 अक्टूबर को सीट आवंटन किया जाएगा। काउंसलिंग मुख्य परिसर आयोजित होगी। अधिक जानकारी के लिए छात्र विवि की वेबसाइट पर लॉगइन कर काउंसिलिंग से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
मैक्समूलर ने वेदों का ज्ञान भारत से बाहर पहुंचाया: सीएम त्रिवेंद्र
देहरादून। मैक्समूलर ने वेदों के संबंध में वेदों का ज्ञान भारत से बाहर पहुंचाया। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। सच तो यह है कि भारत जैसे विशाल देश को समझ पाना हम भारतीयों के बस का नहीं है लेकिन संस्कृत के ज्ञान के माध्यम से जर्मन मैक्समूलर ने वेदों का ज्ञान भारत से बाहर पहुंचाकर भारतीयता का डंका उस समय बजाया जब भारत गुलाम था। यह विचार प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ‘भारत हमें क्या सिखा सकता है’ मैक्समूलर की कृति जिसे डॉ प्रकाश ने अनुदित किया है, के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकाश थपलियाल ने मैक्समूलर के इस कृति का अनुवाद किया है, जो अपने आप में विलक्षण है। प्रकाश थपलियाल ने अनुवाद कर हमें समझने के लिए एक साहित्य दिया है, जो उनकी विशिष्टता है। मुख्यमंत्री डॉ प्रकाश थपलियाल को बधाई देते हुए इस कृति को अच्छी कृति बताया। मुख्यमंत्री आवास में स्थित सभाकक्ष में रमाकांत बैंजोल के संचालन में संपन्न इस कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों में मुख्य अतिथि त्रिवेंद्र सिंह रावत, विशिष्ट अतिथि भाषा मंत्री प्रकाश पंत, वीरेन्द्रानंद गिरि, साहित्यकार चारूचंद चन्दोला उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रकाशक सुरेश चन्द्र भट्ट ने मुख्यमंत्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया, जबकि सुलोचना थपलियाल ने प्रकाश थपलियाल ने विशिष्ट अतिथि प्रकाश पंत का स्वागत किया। इससे पहले, इंजीनियर एस.ए. अंसारी ने काव्य पाठ किया। अपने विचारों में डॉ प्रकाश थपलियाल ने मैक्समूलर की कृतियों की चर्चा की तथा कहा कि लेखक मैक्समूलर दो पाटों के बीच में फंसे थे। उनके लिए भारत का श्रेष्ठ साहित्य एक महत्वपूर्ण अंग था, जबकि दूसरा अंग उनके विदेशी मित्र थे जो गुलाम भारत के विरोधी थे और भारत को ऊंचा नहीं देखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि इसका कारण भारत की तत्कालीन छवि थी। मैक्समूलर ही वह व्यक्ति हैं, जिसने भारत का साहित्यिक स्वरूप और ऊंचाई विदेश तक पहुंचाई। उन्होंने कहा कि अनुवाद विशिष्ट विधा है। योग पर भारत के ज्ञान को भारत से बाहर पहुंचाने का काम इन्हीं विदेशी लेखकों ने किया। यह सच है कि मूल्यांकन करते समय मैक्समूलर ने तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखा था।
पूर्व मुख्य सचिव इन्द्र कुमार पाण्डेय ने वेद के दार्शनिक पहलू तथा वेद के समस्त अंगों के कर्मकांड संबंधी स्थितियों की चर्चा की तथा कहा कि वेदांत दर्शन उपनिषद् में है। उन्होंने कहा कि मैक्समूलर को लोगों ने अलग-अलग समझा है। उन्होंने कहा कि अनुवादों में शब्दों की बहुलता के कारण यह कार्य महत्वपूर्ण है। वैदिक साहित्य में ऊषा की चर्चा करते हुए पूर्व मुख्य सचिव ने कहा कि ऊषा का कई बार प्रयोग किया गया है लेकिन इसका अलग-अलग अर्थ है। उन्होंने स्वामी कृष्णानंद के ईश्वर सत्ता पर एक लेख की चर्चा करते हुए कहा कि इस लेख में आचार्य शंकर के अद्वैतवाद को भी जोड़ा गया है। पाण्डेय ने अपने वैदिक ज्ञान और विशिष्टताओं की चर्चा करते हुए अनुवादक डॉ प्रकाश थपलियाल को बधाई दी तथा कहा कि यह कृति साहित्य क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान रखेगी। इस अवसर पर अपर सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी, मुनिराम सकलानी समेत तमाम विभूतियां उपस्थित रहीं।
कुहू की नजरें अब ओलम्पिक पदक पर
देहरादून,। राज्य में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन सुविधाएं नहीं होने के कारण खिलाड़ी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दे पाते हैं। साथ ही आर्थिक भार को कम करने के लिए अच्छे प्रायोजकों की जरूरत भी है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी कुहू गर्ग ने कहा कि अगर अच्छे स्पॉन्सर मिले तो और प्रतिभा सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि अब उनका सपना ओलम्पिक में पदक जीतना है।
गुरुवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब की तरफ से आयोजित ‘प्रेस से मिलिए’ कार्यक्रम में मीडिया से रुबरु हुईं कुहू गर्ग ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों को काफी बढ़ावा दिया है। अब राज्य के खिलाड़ी बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनके लिए सुविधाएं भी बेहतर की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा जरूरत के अनुसार राज्य में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बैडमिंटन हाॅल और चुनिंदा खिलाड़ियों के अच्छे कोच व अन्य सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट की तरह बैडमिंटन में भी प्राइवेट स्पॅान्सर्स बहुत जरूरी है। साइना, सिंधु जैसे स्टार खिलाड़ियों को स्पाॅन्सर्स मिल जाते हैं लेकिन युवा खिलाड़ियों को प्रायोजकों की ज्यादा जरूरत है।
कुहू ने कहा कि अभी डबल्स में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं है। विदेशी कोच मिले तो इसमें सुधार हो सकती है क्योंकि उनके पास तकनीक और अनुभव बेहतर है। खिलाड़ी तैयार करने में कोच की अहम भूमिका होती है। हर स्तर के खिलाड़ियों और उनकी स्पर्धा के अनुसार कोच नियुक्त होने चाहिए ताकि किसी एक कोच पर दबाव न पड़े।
इससे पूर्व कार्यक्रम में उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष नवीन थलेड़ी ने कुहू गर्ग को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। प्रेस क्लब महामंत्री भूपेंद्र कंडारी ने कुहू के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर कुहू के पिता और अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था व उत्तराखंड बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार, उत्तराखंड बैडमिंटन कोच दीपक रावत, प्रेस क्लब के संयुक्त मंत्री प्रवीन बहुगुणा, कार्यकारिणी सदस्य अनूप गैरोला, चेतन गुरुंग, मंगेश कुमार, राजेश बड़थ्वाल, रश्मि खत्री, प्रवीण डंडरियाला आदि मौजूद रहे।
कुहू का सफर
-2014 में बैल्जियम जूनियर इंटरनेशनल में अण्डर-17 में स्वर्ण पदक, स्विज में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
-वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2016 में क्वार्टर फाइनल में प्रतिभाग लिया।
-वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में 9वीं रैंकिंग एवं मिक्स डबल्स में 11वीं रैंकिंग हासिल की।
-वर्ल्ड सीनियर रैंकिंग चैंपियनशिप में प्राप्त किए गए पदक
-2014 मुम्बई में रजत पदक हासिल किया।
-2016 में मलेशिया में ब्रॉन्ज मैडल जीता।
-2016 में हैदराबाद में ब्रॉन्ज मैडल
-2017 में ग्रीस ओपन में पहली बार साल 2017 में इन्टरनेशनल ग्रीस ओपन मिक्स डबल्स में स्वर्ण पदक प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया।





























































