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इन महिलाओं के हाथ के लड्डू खाए जाते हैं देश-विदेश में

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जोशीमठः चमोली जिले के सीमांत नगर जोशीमठ में छह साल पहले एक महिला ने चौलाई के लड्डू बनाने की जो पहल शुरू की थी, वह आज 50 से अधिक लोगों के रोजगार का आधार बन गई है। इतना ही नहीं, महिलाओं द्वारा तैयार इन लड्डुओं को देश-दुनिया के यात्री भी हाथों हाथ ले रहे हैं। अन्य मिठाइयों के मुकाबले दाम कम होने और स्थानीय उत्पाद से बने होने के कारण इन लडडुओं की बाजार में भी मांग बढ़ी है।

जोशीमठ ब्लॉक को चौलाई उत्पादन करने वाले अग्रणी क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां प्रतिवर्ष 500 टन चौलाई का उत्पादन काश्तकार करते हैं। लेकिन, स्थानीय स्तर पर इसका व्यावसायिक उपयोग न होने के कारण काश्तकार बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर रहते हैं। इसी को देखते हुए वर्ष 2012 में ब्लॉक के गणेशपुर गांव की धर्मा देवी ने चौलाई का उपयोग और इससे स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में पहल की। धर्मा देवी को स्वयं सेवी संस्था हैस्को ने स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योग लगाने की प्रेरणा दी थी। धर्मा देवी ने सबसे पहले अपने घर पर ही चौलाई के लड्डू बनाकर उन्हें स्थानीय बाजार में बेचना शुरू किया। परिणाम सकारात्मक मिले तो बदरीनाथ धाम आने वाले यात्रियों को प्रसाद के रूप में चौलाई के लड्डू परोसने की मुहिम शुरू हुई।

धर्मा देवी ने जय बदरी विशाल स्वयं सहायता समूह गठित कर इस कार्य में अन्य ग्रामीण महिलाओं का भी सहयोग लिया। वह बताती हैं, कि पहले चरण में उनके साथ सात परिवार जुड़े, लेकिन वर्तमान में 50 से अधिक परिवार चौलाई के लड्डू बनाने में जुटे हैं। इन परिवारों की महिलाएं लड्डू तैयार कर उन्हें बदरीनाथ धाम में प्रसाद की दुकानों में भेजती हैं। इनकी उन्हें 250 रुपये प्रति किलो कीमत मिल जाती है। भविष्य में इसका दायरा बढ़ाकर अन्य गांवों की महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का विचार है। 

ग्रामीणों से खरीदते हैं चौलाईः जोशीमठ प्रखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में चौलाई का उत्पादन बहुतायत में होता है। ये महिलाएं सीधे काश्तकारों से चौलाई खरीदती हैं। इसका उन्हें बाजार भाव दिया जाता है। चौलाई के लड्डू बनाने के बाद महिलाएं स्वयं इनकी पैकिंग, मार्केटिंग व अन्य कार्य करती हैं।

अब तक बना चुकीं 600 क्विंटल लड्डूःमहिलाओं ने इस वर्ष 600 क्विंटल लड्डू तैयार कर उन्हें बाजार में पहुंचाया। इस बार यात्रियों की आमद बढ़ने के कारण ये लड्डू प्रसाद में खूब बिके। महिलाओं को इससे 2.52 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ।

वर्षा के चलते बद्रीनाथ सहित ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी शुरू

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गोपेश्वर। चमोली जिले में हो रही लगातार वर्षा के कारण बद्रीनाथ, हेमकुंड, औली गौरसों की पहाड़ियों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। जिससे यहां ठंड बढ़ने लगी है। वहीं नीचले स्थानों पर हो रही वर्षा के कारण ठंड बढ़ने लगी है।

शुक्रवार से जनपद में हो रही लगातार वर्षा के कारण ठंड बढ़ने लगी है। बद्रीनाथ धाम के नर नारायण, नीलकंठ हेमकुंड साहेब, जोशीमठ के औली गौरसों सहित अन्य पहाड़ियों पर बर्फबारी शुरू हो गई है।
बर्फबारी के कारण ठंड बढ़ने लगी है। ठंड से बचने के लिए लोगों ने गर्म कपड़े पहनने शुरू कर दिए है। लगातार वर्षा के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 

छात्रवृत्ति की पहली कट ऑफ डेट 31 अक्टूबर

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समाज कल्याण विभाग ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य पिछड़ी जाति पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए पहली, दूसरी व तीसरी कट ऑफ डेट जारी कर दी है।

निदेशक समाज कल्याण वीएस धनिक की ओर से जारी किए गए निर्देश में छात्र-छात्राओं द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने की पहली कट ऑफ डेट 20 सितम्बर से 31 अक्टूबर तय की गई है। इस अवधि में छात्र-छात्राएं आवेदन करेंगे। इसके बाद 10 नवंबर तक संबंधित शैक्षणिक संस्थान उक्त आवेदन को जिला समाज कल्याण अधिकारी को भेजेंगे, जिसकी विभाग दस दिसंबर तक जांच करेंगे। 31 दिसंबर तक छात्रों के खाते में छात्रवृत्ति भेजी जाएगी।

इसी तरह से दूसरी कट ऑफ डेट 11 नवंबर से 31 दिसंबर तय की गई है। इसमें दस जनवरी 2018 तक कॉलेज आवेदन जिला समाज कल्याण अधिकारी को भेजेंगे, जिस पर दस फरवरी तक विभाग अपनी जांच पूरी कर छात्रवृत्ति भेजेगा। 11 जनवरी 2018 से 28 फरवरी तक तीसरी कट ऑफ डेट रहेगी। पांच मार्च तक कॉलेज विभाग को आवेदन भेजेंगे, जिस पर 20 मार्च तक विभाग अपनी जांच पूरी करेगा। निदेशक ने साफ किया है कि तय समय के बाद भेजे जाने वाले आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

 

अगले 24 घंटे भारी बारिश की चेतावनी

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देहरादून। प्रदेश की राजधानी देहरादून सहित राज्य के सात जिलों में अगले 24 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन अलर्ट पर है। मौसम विभाग के मुताबिक कुमाऊं मंडल के चार जिलों और गढ़वाल मंडल के तीन जिलों में भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी बारिश के आसार हैं।

राजधानी दून में शुक्रवार की देर रात से शुरू हुई बारिश शनिवार दोपहर तक जारी है। बारिश के कारण शहर के मार्ग पर यातायात बाधित रहा। वहीं कुमाऊं के नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़, चंपावत और गढ़वाल के पौड़ी, हरिद्वार में बारिश हो रही है।
मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि इन जिलों के ज्यादातर स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है, जिससे भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। बताया कि सामान्य तौर पर प्रदेश से मानसून की विदाई सितम्बर अंत या अक्टूबर शुरू में होती है। अगले दो दिनों तक बारिश का क्रम इसी तरह जारी रह सकता है। 

महंत मोहनदास को खोजने में प्रदेश सरकार की रुचि नहीं: प्रीतम सिंह

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हरिद्वार। उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने शनिवार को कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन पहुंचकर अखाड़े के कोठारी महंत मोहनदास की गुमशुदगी की बाबत जानकारी ली। उन्होंने अभी तक महंत का पता नहीं लगा पाने पर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

विदित हो कि बड़ा अखाड़े के कोठारी महंत मोहनदास महाराज 15 सितम्बर को रात्रि लोकमान्य तिलक रेल से मुम्बई के लिए निकले थे। रास्ते में ही वह अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गए। पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी उनका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया। अब जांच एसआईटी को सौंप दी गई है। महंत का पता न लगा पाने से आक्रोशित संतों ने शुक्रवार को शिवमूर्ति से सुभाष घाट हरकी पैड़ी तक सांकेतिक मार्च भी निकाला और सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम महंत को ढूढ़ने के लिए दिया। इसी कड़ी में शनिवार की दोपहर उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रीतम सिंह अखाड़े पहुंचे। उन्होंने कहा कि आठ दिन बीत जाने के बाद भी महंत मोहनदास का पता न चलना प्रदेश सरकार की नाकामी को दर्शाता है। कहा कि दो दिन पूर्व देहरादून में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का आगमन हुआ। पूरी सरकार उनकी आवभगत में लगी रही। किन्तु महंत मोहन दास की तलाश में सरकार ने कोई रूचि नहीं दिखाई। श्री सिंह ने कहा कि यदि सरकार महंत मोहनदास को ढूढ़ने में तत्परता दिखाती तो उनका पता चल सकता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। आम आदमी आज सुरक्षित नहीं है। उन्होंने महंत मोहनदास की खोज के लिए केन्द्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जिस कोच में महंत मोहनदास सफर कर रहे थे, वह एसी कोच था। जिसमें सुरक्षा गार्ड होता है। सुरक्षा गार्ड के होते हुए एक महंत का लापता हो जाना आश्चर्यजनक है। उन्होंने कहा कि यह तो एक संत की बात है। आम आदमी की सुरक्षा का इसी से पता चल जाता है। यदि एसी कोच का ऐसा हाल है तो साधारण कोच की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने महंत मोहनदास के गायब होने के लिए रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को भी जिम्मेदार ठहराया। इस दौरान उन्होंने संतों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाते हुए प्रदेश सरकार से तन्मयता से लापता महंत मोहनदास की खेज की मांग की। 

भूस्खलन से ऋषिकेश बद्रीनाथ मार्ग अवरुद्ध

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ऋषिकेश। शनिवार की शाम से पहाड़ों पर हो रही जबरदस्त बारिश के कारण ऋषिकेश व बद्रीनाथ राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया है।

शनिवार की सुबह से कोई भी सवारी गाड़ी के साथ माल वाहन भी बद्रीनाथ की ओर रवाना नहीं हुआ। मुल्ला गांव, ब्यासी से पहले कई स्थानों पर हुए भूस्खलन के कारण जगह-जगह रास्ते बंद हो गए, जिससे वाहन बीच-बीच में फंसे है। रास्ते खोलने में सड़क सीमा संगठन के कर्मचारी जी जान से जुटे है।

हाईकोर्ट के आदेशों को आयुर्वेद विवि दिखा रहे ठेंगा

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देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी अपने ही बनाए नियम कायदों पर नहीं चल रही है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि मानकों, निर्देशों और नियमों को अनदेखा कर लिए गए यूनिवर्सिटी के तमाम फैसले इसकी तस्दीक करते हैं। मनमानी और नाफर्मानियों का आलम यह है कि उच्च न्यायालय तक के आदेशों को भी विवि द्वारा ताक पर रखा जा रहा है।
मामला विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित की गई फीस में मनमानी बढ़ोत्तरी कर उसके आधार पर सत्र संचालन का है। दरअसल, उत्तराखंड आयुष विभाग ने 14 अक्टूबर साल 2015 में यूजी व पीजी पाठ्यक्रमों की फीस में बढ़ोत्तरी की थी। इसमें बीएएमएस में 2.15 लाख, बीएचएमएस एक लाख दस हजार और एमडी व एमएस के लिए 3.15 लाख रुपये फीस निर्धारित की गई थी। विभाग द्वारा इस बदलाव पर हाईकोर्ट ने याचिका दायर की गई थी। इसी क्रम में अब हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए आयुष विभाग के फीस बढ़ोत्तरी के फैसले पर स्थगन का आदेश दे दिया है।
हाईकोर्ट द्वारा उत्तराखंड आयुष विभाग द्वारा साल 2015 में की गई फीस वृद्धि को स्थगित करते हुए पूर्व निर्धारित फीस पर दाखिला दिए जाने के आदेश दिए जा चुके हैं लेकिन इसके बाद भी विवि के मुख्य पक्षधर होने के बावजूद हाईकोर्ट के आदेशों की नाफर्मानी करते हुए विवि ने आयुष पाठ्यक्रमों के लिए आयोजित होने जा रही काउंसिलिंग में बढ़ाई गई फीस का ही विवरण किया गया है, जो कि सीधे ही कोर्ट की अवमानना है।
मामले में कई छात्रों ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल, आयूष विभाग और विश्वविद्यालयों को सीधे शुल्क वृद्धि का अधिकार नहीं है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति आधिकारिक रूप से अधिकृत है। शुल्क वृद्धि को लेकर समिति ने बीते दो व तीन सितम्बर को विज्ञप्ति जारी कर सभी संस्थाओं से विधिवत प्रस्ताव मांगा है। मामले में आगामी 25 सितम्बर को बैठक भी आयोजित की जानी है। बैठक में सभी व्यवसायिक संस्थाओं को आमंत्रित किया गया है। बैठक में विभिन्न प्रस्तावों पर विचार करने के बाद फीस निर्धारण किया जाएगा।
समित द्वारा चिकित्सा एवं आयूष पद्धति के संस्थानों के विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए साल 2007 में फीस निर्धारित की थी। जिसमें एमबीबीएस के लिए एक लाख 75 हजार रुपये, बीएएमएस के लिए 80 हजार, बीएचएमएस में 73 हजार 600 रुपये निर्धारित की गई थी। इसके बाद से अभी तक किसी भी प्रकार की कोई शुल्क वृद्धि नहीं कई गई है। छात्रों का आरोप है कि निजी प्रबंधन के दबाव में आकर आयुष विभाग ने शुल्क वृद्धि की, जो कि तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गई। फैसले को अवैध पाकर उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश दे दिया, मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण यदि किसी भी संस्था द्वारा नए शुल्क की वसूली की जाती हैं तो वह न्यायालय की अवमानना माना जाएगा।

अतीत की यात्रा: तिलक सोनी

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“पहाड़ों में एक बार रहने के बाद आप पहाड़ों से दूर नहीं जा सकते” मशहूर लेखक रसकिन बॉंड की ये लाइनें 43 साल के तिलक सोनी के लिये सही साबित हुई। राजस्थान के तिलक सालों पहले दिल्ली बस गये और दो दशकों से ज्यादा एक एक्सपोर्ट हाउस में काम किया। लेकिन शहर की भाग दौङ से तंग होकर तिलक ने उत्तराकाशी को अपना घर बना लिया, आइये अापको रूबरू कराते हैं कि तिलक सोनी से।

दरअसल तिलक उत्तराखंड के पौराणिक, भुल व खो चुके पगडंडियों और रास्तों को दोबारा जीवंत करने का शौक रखते है। तिलक की यह मुहिम व हिमालय के लिये उनका प्यार उन्हें यहां खींच लाया अौर वह यही के हो गये। न्यूजपोस्ट से बात करते हुए सोनी कहते हैं कि, “मैं सालों से पहाड़ों पर घूम रहा हूं और समय के साथ खो चुके रास्तों और जगहों को चिह्नित करने में लगा हुआ हूं। इसी सिलसिले में मैं तीन साल पहले फोटग्राफरों, पर्वतारोहियों के एक दल को लेकर उत्तराखंड, हिमाचल औऱ तिब्बत को जोड़ने वाली नेलौंग घाटी गया जोकि 1962 युद्ध के बाद से आम लोगों के लिये बंद थी।”

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सोनी बताते हैं कि, “2013 में हमारे दल के वहां जाने के बाद मैने नेलौंग में कंट्रोल्ड पर्यटन शुरू करने पर एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार किया। फलस्वरूप इस साल करीब 1100 लोग वहां जा चुके हैं और उन्हें वो जगह लाहोल स्पीति,लेह,लद्दाक से भी ज्यादा पसंद आई है।”

27 सितंबर विशव पर्यटन दिवस है और इस मौके पर तिलक सोनी वक्त के हाथों भुला दिये गये गरतंग गली पुल के उद्धाटन करने जा रहे है। यह 105 मीटर लंबा पुल देवदार की लकड़ी से बना है, इस पुल का इस्तेमाल सालों पहले भूटिया समुदाय के लोग तिब्बत से व्यापार करने के लिये किया करते थे।

इस पुल के महत्व के बारे में बताते हुए तिलक कहते हैं कि, “ये लकड़ी का पुल अपने आप में अद्भुत है और सालों की ऐतिहासिक धरोहर को अपने आप में संजोय हुए है। 140 साल पुराना ये पुल पेशवरी पठानों ने बनाया था और ये अाज भी वैसे का वैसा ही है, इसकी मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पुल पर सामान से लदे याक लगातार रास्ता पार करते थे। जड़ गंगा के ठीक ऊपर बना ये पुल अपने आप में एक सांस्कृतिक धरोहर है। “

पर्यटन दिवस के मौके पर ये पुल दोबारा पर्यटकों के लिये खोला जायेगा, एक सांकेतिक वॉक इस दौरान किया जायेगे जिसमें देश के कोने कोने से आये लोग हिस्सा लेकर इस ऐतिहासिक धरोहर का दोबारा एहसास करेंगे।

पुन: आम लोगों तक ऐसी कई भुला दी गई धरोहरों को पहुंचाने का श्रेय तिलक सोनी व उनकी लगन को जाता है।

आइए आपको बताएं किस-किस राष्ट्रपति ने की मां गंगा की पूजा

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हरिद्वार। हरकी पैड़ी पर मां गंगा की पूजा अर्चना करने वाले महामहिम रामनाथ कोविंद देश के चौथे राष्ट्रपति हैं। इनसे पूर्व डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति थे, जिन्होंने हरकी पैड़ी पहुंचकर मां गंगा की पूजा अर्चना की थी। उनके बाद राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी हरकी पैड़ी पर पूजा अर्चना कर मां गंगा का आशीर्वाद हासिल कर चुके हैं।

गंगा सभा के पदाधिकारी गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि हरिद्वार के लिए गौरव की बात है कि महामहिम राष्ट्रपति बनने के बाद रामनाथ कोविंद मां गंगा की पूजा करने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 15 मिनट का कार्यक्रम निर्धारित है। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति पूजा अर्चना करेंगे। उसके बाद गंगा सभा के कार्यालय में उनका अभिनंदन किया जायेगा। उनको रुद्राक्ष की माला भेंट की जायेगी। शाल ओढ़ाकर उनका सम्मानित किया जायेगा। पवित्र गंगाजल दी जाएगी। महमहिम को अभिनंदन पत्र दिया जाएगा।
इस दौरान गंगा सभा के सम्मति पुस्तिका में महामहिम राष्ट्रपति के भाव अंकित कराए जाएंगे। पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, ज्ञानी जैल सिंह और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अपने भाव अंकित कर चुके हैं। राष्ट्रपति के स्वागत के लिये गंगा सभा की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। 

भुवन बाम का लाइव परफॉमेंस 24 को दून में

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देहरादून। भुवन बाम ने अपनी कॉमिक टाइमिंग और गायिकी से मौजूदा दौर की युवा पीढ़ी को हमेशा ही रोमांचित किया है। उनके द्वारा देहरादून में ‘याहावी आइकन्स-भुवन बाम इंडिया टुअर‘ का आयोजन किया जा रहा है।

वह 24 सितंबर 2017 को होटल सैफरोन लीफ देहरादून में लाइव परफॉर्म करेंगे। भुवन बाम दर्शकों को लाइव परफॉर्मेंस के दौरान हास्य एवं मनोरंजन के सफर पर ले जाने का वादा करते हैं। ‘याहावी आइकन्स-भुवन बाम इंडिया टुअर‘ आपके पसंदीदा आइकन की लाइफ कॉमेडी और म्यूजिक का भरपूर संयोजन है। यह निश्चित रूप से आपको रोमांचित करेगा।
पुणे से शुरू हुए इस मल्टी-सिटी टुअर का समापन नवंबर में कोलकाता में होगा। इस दौरान यह टुअर देहरादून, जयपुर, भोपाल, रायपुर, नागपुर, कानपुर, चंडीगढ़, अहमदाबाद और दिल्ली की यात्रा करेगा।