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25 साल का सफर पूरे करने पर 4 महानगरों में होंगे रहमान के शोज

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जाने-माने संगीतकार एआर रहमान का फिल्मी सफर 25 साल का होने जा रहा है। इस मौके पर रहमान देश के अलग अलग शहरों में कांसर्ट करने जा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, नवंबर और दिसंबर महीने के बीच रहमान के कांसर्ट आयोजित किए जाएंगे। ये शोज मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और हैदराबाद में होंगे। इस टूर को एआर रहमान-इनकोर का नाम दिया गया है।

इसके तहत सबसे पहले हैदराबाद में 26 नवंबर को पहला शो होगा। दूसरा शो 3 दिसंबर को अहमदाबाद में, इसके बाद मुंबई में 17 दिसंबर को तीसरा शो और इसके बाद चौथा और आखिरी शो 23 दिसंबर को दिल्ली में होगा। आस्कर एवार्ड विजेता संगीतकार एआर रहमान ने 1992 में मणिरत्नम की रोजा से अपना फिल्मी सफर शुरु किया था।

25 साल के सफर में रहमान ने रंगीला, ताल, दिल से, दिल्ली 6, हाईवे, स्वदेस, लगान, राक स्टार, युवराज सहित सौ से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया है। फिल्म स्लमडाग मिलेनियर के लिए रहमान को आस्कर दिया गया था।

परिवारवाद के खिलाफ हूं मैं-सैफ अली

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सैफ अली खान को फिल्मों में इसलिए पहला मौका मिला, क्योंकि उनकी मां शर्मिला टैगोर अपने दौर की बहुत बड़ी हीरोइन रहीं। सैफ अली की बहन सोहा अली फिल्मों में काम कर चुकी हैं। सोहा के पति कुणाल खेमू भी फिल्मों में काम करते हैं। सैफ की दोनों शादियां हीरोइनों से हुई है और अब सैफ की अपनी बेटी सारा अली खान फिल्मी परदे पर आने के लिए तैयारियां कर रही है और सैफ अली खान बयान दे रहे हैं कि वे वंशवाद के खिलाफ हैं।

सैफ अली खान की फिल्म शैफ अगले शुक्रवार 6 अक्तूबर को रिलीज होने जा रही है और इन दिनों वे फिल्म के प्रमोशन में बिजी हैं। इसी फिल्म को लेकर मीडिया से बातचीत करते हुए सैफ अली खान ने वंशवाद को खतरनाक बताया और कहा कि वे महसूस करते हैं कि इस वजह से कई बार अयोग्य व्यक्तियों को आगे जाने का मौका मिल जाता है। सैफ अली खान ने साथ में कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में परिवारवाद की वजह से किसी को मौका मिल सकता है, लेकिन कामयाबी सिर्फ टेलेट के बूते पर मिलती है।

सैफ ने कहा कि ऐसा न होता, तो फिल्मी परिवारों से जुड़े सभी कलाकार कामयाबी की चोटी पर पंहुच जाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और न ही ऐसा होता है। सैफ ने कहा कि कैमरे और दर्शकों के सामने कोई रिश्तेदारी नहीं चलती।

उत्तराखंड चीन सीमा पर पहुंचने वाले दूसरे गृह मंत्री बने राजनाथ सिंह

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भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को भारत के आखिरी गांव माणा में स्थित सेना व आईटीबीपी के जवानों से मिले और शनिवार को यहां से उत्तराखंड के सीएम के साथ विजया दशमी के अवसर पर भारत चीन सीमा चैकी लफतल और रिमखिम में भारत सीमा प्रहरियों से मुलाकात के लिए रवाना हो गए है। इससे पूर्व लालकृष्ण आडवानी जो भारत के गृह मंत्री थे रिमखिम पहुंचे थे।

चीन और भारत के बीच कुछ समय पहले सीमा को लेकर विवाद और तनाव की स्थिति आ गई थी हालांकि अब स्थिति सामान्य है मगर चीन भारत सीमा पर बार-बार उठते सवालों के बीच गृहमंत्री का भारत चीन सीमा चैकी पर भारत के जवानों से मुलाकात अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। वे ऐसे दुसरे गृह मंत्री है जो उत्तराखंड के चमोली जनपद में लफतल और रिमखिम की सीमा चैकी पर पहुंचेगे।

चीन और भारत के बीच उत्तराखंड से लगी बडाहोती क्षेत्र में चीन द्वारा कई बार सीमा में प्रवेश करने की खबरें सुर्खियां बनी। इसी वर्ष ऐसी दो बड़ी घटनाऐं उत्तराखंड से लगी चीन सीमा पर खबरों की सुर्खिया बनी थी जब बडाहोती के उस पार से चीन के दो हेलीकॉप्टर भारत की सीमा में आ गये थे। हांलाकि कुछ समय बाद ही वापस लौट गए थे।

दूसरी घटना जब भारत के अधिकारियों की टीम जब बडाहोती गई तो उनसे भी चीनी सैनिकों ने इशारों से वापस जाने की बात कही। वहीं भारत के जो चरवाहे बडाहोती में बकरियां चराने सदियों से जाते है उन्हें भी चीन ने परेशान किया है ऐसी खबरे प्रकाश में आयी।

ऐसे दौर में भारत के गृहमंत्री का रिमखिम और लफतल में जो कठिन सीमा चैकी हैं वहां पर भारतीय सैनिकों से मुलाकात और उनकी हौसला अफजायी को बहुत सकारात्मक ढंग से देखा जा रहा है। गृह मंत्री की इस क्षेत्र में सीमा और सैनिकों से मुलाकात कितनी महत्वपूर्ण है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे दो दिन चमोली जनपद में सैनिकों के साथ रहेंगे। 

छठ पूजा के लिए घाट का विधायक जोशी ने किया शिलान्यास

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मसूरी विधायक गणेश जोशी ने राजपुर के काठबंगला में छठ पूजन के लिए बनने वाले घाटों का शिलान्यास किया। यह कार्य विधायक निधि के छह लाख की लागत से अगले दो महीने में सम्पन्न होगा।

विधायक गणेश जोशी ने उपस्थित जनसमूह को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विजयदशमी के पवित्र अवसर पर घाटों के निर्माण का कार्य प्रारम्भ होना शुभ संकेत है। उन्होनें बताया कि विधायक निधि के छह लाख लागत से बनने वाले यह घाट छठ पूजा के दौरान काठबंगला, वीर गबर सिंह बस्ती के हजारों लोगों को लाभान्वित करेगें।

स्थानीय निवासियों की सुविधा को देखते हुए विधायक जोशी द्वारा पिछली छठ पूजा के कार्यक्रम के दौरान घाटों के निर्माण की घोषणा की गई थी।

जल संस्थान को मिलेंगी 87 नई पेयजल योजनाएं

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देहरादून। लंबे समय से पानी के संकट से जूझ रहे उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए 87 पेयजल योजनाएं तैयार हो चुकी हैं। अगले तीन से चार माह के अंतराल में पेयजल निगम इन योजनाओं को भौतिक सत्यापन कराकर जल संस्थान को हैंडओवर कर देगा, जिससे दस जिलों के करीब दो लाख ग्रामीण आबादी को पानी की किल्लत से निजात मिलेगी।

पेयजल निगम ने नाबार्ड, एनआरडीडब्ल्यूपी (राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम), स्टेट सेक्टर आदि प्रोजेक्ट के तहत दो साल पहले इन योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया था, लेकिन इनमें कुछ पेयजल योजनाओं पर जल संस्थान की आपत्तियां होने के कारण हैंडओवर की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई थी। इसके बाद मामला शासन तक पहुंचा तो शासन के हस्तक्षेप के बाद इन योजनाओं की हैंडओवर प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। इनमें सबसे ज्यादा टिहरी गढ़वाल की 26 व इसके बाद पौड़ी की 19 योजनाएं शामिल हैं। सबसे कम उधमसिंहनगर व नैनीताल की एक-एक योजनाएं हैं, जबकि देहरादून के ग्रामीण क्षेत्र की आठ योजनाएं शामिल हैं।
पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक भजन सिंह ने कहा कि पेयजल निगम ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 87 पेयजल योजनाओं का निर्माण कर लिया है। जल्द ही इन्हें जल संस्थान को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
जिला- कुल योजनाएं
बागेश्वर- 05
टिहरी- 26
पिथौरागढ़- 04
चमोली- 01
हरिद्वार- 18
पौड़ी- 19
देहरादून- 08
नैनीताल- 01
अल्मोड़ा- 04
उधमसिंहनगर- 01
कुल- 87

उत्तराखंड के पानी व जवानी बचाने को सचिवालय घेराव करेगा उसमा

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विकासनगर। प्रदेश से पलायन रोकने व पानी का सदुपयोग करने में प्रदेश सरकार पर असमर्थ रहने का आरोप उत्तराखंड संवैधानिक संरक्षण मंच ने प्रदेश सरकार पर लगाया। मंच की कोर कमेटी की बैठक के बाद मीडिया को जारी बयान में मंच के प्रदेश संयोजक व प्रदेश सह प्रवक्ता अरविंद शर्मा ने कहा कि भाजपा व कांग्रेस बारी-बारी से प्रदेश के संसाधनों का दोहन कर जनता का शोषण किया है। प्रदेश में घोटाले व दल बदल की संस्कृति को बढ़ावा देकर दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकीं है।

मंच के प्रदेश सह प्रवक्ता शर्मा ने कहा सूबे के किसानों का कर्जा माफ कराने, राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में नब्बे सरकारी महकमों के 15907 बैकलाग के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने व उत्तराखंड में जगह-जगह चैक स्कीम को लिफ्ट योजना से जोड़कर स्थानीय किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने की मांग को लेकर मंच आगामी 25 अक्टूबर को सचिवालय का घेराव करेगा। इसके साथ ही मंच उत्तराखंड के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों को मालिकाना हक दिए जाने, औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को सत्तर प्रतिशत रोजगार दिए जाने, प्रदेश में बंद पड़ी उर्दू शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी सरकार पर दबाव डाला जाएगा।
मंच के प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर ने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से एससी, एसटी, ओबीसी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि प्रदेश के औद्योगिक व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कई बाल श्रमिक मजदूरी कर रहे हैं लेकिन सरकार के पास इन बाल श्रमिकों के शिक्षा व पुनर्वास के लिए कोई नीति नहीं है। बताया कि सभी मसलों पर सरकार का ध्यान आकर्षित कर प्रदेश का पानी व जवानी बचाने के लिए 25 अक्टूबर को सचिवाल घेराव किया जाएगा जिसके बाद मंच चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।

साधारण लगने वाले बालकृष्ण बने देश के आठवें अमीर

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हरिद्वार। कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो और दिल में सच्ची लगन हो तो रास्ते में कितनी भी मुश्किलें आएं फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मंजिल साफ नजर आती हैं। कुछ ऐसे ही यात्रा रही है आचार्य बालकृष्ण की। आज इस नाम को कहीं भी पहचान की जरूरत नहीं। ये उनकी लगन का ही नतीजा है कि पतंजलि को घर-घर में जगह मिली है। आज बालकृष्ण आचार्य होने के साथ-साथ देश में टॉप 10 उद्योगपतियों में शामिल हो गए हैं। योग गुरु स्वामी रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण से अब देश के बड़े उद्योगपति घबराने लगे हैं। अडानी-अंबानी हों या फिर टाटा-बिड़ला जैसे दिग्गज। जिस तेजी से बालकृष्ण देश के बड़े उद्योगपतियों में अपना नाम दर्ज करवा रहे हैं उसे देख इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि आने वाले दिनों में आचार्य बालकृष्ण देश के सबसे बड़े अमीर बिजनेसमैन बन सकते हैं।

यह हम नहीं, बल्कि हर साल उद्योगपतियों और लोगों की संपत्ति पर सर्वे करने वाली सबसे बड़ी बिजनेस पत्रिका हुरून रिच ने कहा है। आचार्य बालकृष्ण देश के टॉप 10 अमीरों में से आठवें स्थान पर पहुंच गए हैं यानी शून्य से शुरू हुआ बालकृष्ण का सफर आज देश की नामचीन हस्तियों में पहुंच गया है। नेपाल में जन्मे आचार्य बालकृष्ण बहुत सामान्य परिवार से आते हैं। पांच भाई-बहनों में से एक बालकृष्ण का परिवार आज भी सामान्य जीवन ही जी रहा है। नेपाल में पैदा हुए और गुरुकुल में अपनी शिक्षा दीक्षा ग्रहण करने के साथ योग और आयुर्वेद में उपलब्धि हासिल करने के बाद साल 2000 में पूरी तरह से योग गुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण अस्तित्व में आए थे। 2000 के आसपास ही रामदेव ने आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर पतंजलि योगपीठ और दूसरी संस्थाओं की स्थापना की थी। धीरे-धीरे ये कदम बढ़ते गए और एक पतंजलि आज भारत के साथ-साथ कई देशों में स्थापित हो चुकी है।
लगभग 15 साल पहले रामदेव ने अपने काम की शुरुआत की थी, जिसका नतीजा आज पूरे देश में नजर आ रहा है। सर्वे करने वाली मैग्जीन की मानें तो उनकी प्रॉपर्टी में 173 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है और वह बढ़कर 70,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। आप सभी को यह जानकार हैरानी होगी कि पतंजलि का वित्त वर्ष 2017 में कुल टर्नओवर 10,561 करोड़ रुपये था। हुरुन के मुताबिक, पतंजलि के सीईओ बालकृष्ण अब देश के टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं।
सर्वे में मुकेश अंबानी पहले और दिलीप सांघवी दूसरे नंबर पर हैं। पतंजलि का मुनाफा पिछले तीन साल में रिकॉर्ड तोड़ प्रतिशत से बढ़ा है। सर्वे के मुताबिक, पतंजलि भारत का सबसे तेजी से बढ़ता एफएमसीजी ब्रांड है। फिलहाल पतंजलि का सालाना टर्न ओवर 5000 करोड़ से अधिक है और 2017 में ये दोगुना हो गया है। 2013-14 में पतंजलि का कुल मुनाफा 95.19 करोड़ था।
साल 1995 में आचार्य बालकृष्ण ने अपने गुरु शंकरदेव के आश्रम में दिव्य फार्मेसी की शुरुआत की थी। आज दिव्य फार्मेसी की सहयोगी पतंजलि दुनिया में मशहूर हो चुकी है। देश ही नहीं विदेशों में भी आज पतंजलि के प्रोडक्ट्स की भारी मांग है। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि जब उन्होंने यह सफर शुरू किया था तब भी और आज जब वो इस मुकाम पर पहुंचे हैं उनकी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है। आज भी वह धोती कुर्ता ही पहनते हैं। सामान्य सा जीवन जीते हैं। पतंजलि योगपीठ में खेतों में काम करते हैं और जंगलों में घूमकर जड़ी-बूटी ढूंढ़ने का भी वह स्वयं काम करते हैं। बालकृष्ण कहते हैं कि जब वह आज लोगों के बीच गांव-गांव जाते हैं तो सभी उनसे यही सवाल करते हैं आखिरकार वो वहां क्या कर रहे हैं। उनके साथ आईआईटी-आईआईएम और दूसरे बड़े शिक्षा संस्थानों से पासआउट लोग काम करते हैं, लेकिन वह कहते हैं कि जब तक आदमी स्वयं काम नहीं करता तब तक वह सफल नहीं हो सकता इसलिए वो अपना हर काम खुद अपने हाथों से करते हैं।
बालकृष्ण का कहना है कि वह आज भी खेतों में काम करके गाय का गोबर उठाते हैं। इतना ही नहीं वह सुबह चार बजे उठते हैं जिसके बाद वह नित्य कर्म करने के बाद रात 10 बजे तक पतंजलि योगपीठ से जुड़ा काम भी करते हैं। हालांकि, वो ये कहते हैं कि लोग उनके कपड़ों को देखकर कई बार ये सोच लेते हैं कि आखिरकार धोती कुर्ता पहनने वाला इतनी ऊंचाई तक कैसे पहुंच सकता है जिस पर उनका यही कहना है कि इंसान के कपड़े नहीं बल्कि उसका दिमाग उसे आगे बढ़ाता है।
आज जब वह बड़े-बड़े सेमिनार बड़ी-बड़ी मीटिंग में जाते हैं तो तमाम बिजनेसमैन कोट पेंट टाई और सूट बूट में आते हैं लेकिन वो एकमात्र ऐसे सीईओ हैं जो धोती कुर्ता और एक झोले के साथ बड़ी से बड़ी बिजनेस मीटिंग में पहुंच जाते हैं। आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि वो आज भी इस दिशा में काम कर रहे हैं कि लोगों को अच्छा खाना मिले, लोग स्वस्थ रहें और देशवासियों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो। आज जो भी काम कर रहे हैं वो अपने लिए नहीं बल्कि देश के लिए कर रहे हैं। अगर किसी भी संस्थान ने उन्हें देश में टॉप-10 उद्योगपतियों में शामिल किया है तो वह उनका सम्मान नहीं बल्कि देशवासियों का सम्मान है।
जहां पर पतंजलि योगपीठ और आचार्य बालकृष्ण सहित स्वामी रामदेव पहुंचे हैं, वहां तक पहुंचना उनका लक्ष्य नहीं है। बालकृष्ण की मानें तो वो चाहते हैं कि देश में भारतीय संस्कृति का डंका बजे। देश को जो कंपनियां लूटने में लगी हुई हैं, यहां से भागे और देश के सभी लोग खुशहाल रहें। यही उनकी इच्छा है और यह मिशन तब तक जारी रहेगा जब तक भारत में यह सब कुछ संभव नहीं हो जाता। जब उनका मिशन शुरू हुआ था तब से लेकर आज तक वह बड़ी-बड़ी कंपनियों के टारगेट पर भी रहे हैं। लिहाजा यहां तक का सफर बेहद खतरनाक भी रहा है लेकिन इन सब को दरकिनार कर वो अपने काम को अंजाम देते रहे और उसका असर यह हुआ कि आज लोग आयुर्वेद और योग को घर-घर अपना रहे हैं। बालकृष्ण शांति और सौम्यता का रंग सफेद धारण करते हैं। वो सफेद रंग के कुर्ते और धोती में ही नजर आते हैं। लेकिन आचार्य के आसपास बाउंसरों का घेरा रहता है। बालकृष्ण 70 लाख से भी महंगी रेंज रोवर गाड़ी में चलते हैं। कंधे पर थैला और पैरों में साधारण सी चप्पल धारण करने वाले आचार्य बालकृष्ण रामदेव के आयुर्वेद का पूरा कारोबार संभालते हैं।

आरके स्टूडियो में लगी आग पर अब भरना होगा जुर्माना

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विगत 16 सितंबर को आरके स्टूडियो में लगी आग से जहां भारी नुकसान हुआ, वहीं अब मुंबई के दमकल विभाग ने नोटिस भेजा है, जिसमें कहा गया है कि स्टूडियो में आग बुझाने की व्यवस्था नहीं थी और इसके लिए तय कानूनों का पालन नहीं किया गया था। इस नोटिस पर जवाब के बाद दमकल विभाग आरके स्टूडियो के प्रबंधन के खिलाफ जुर्माना तय करेगा। विभाग के सूत्रों ने माना है कि जुर्माना लगेगा, लेकिन इसका फैसला नोटिस का जवाब मिलने के बाद होगा।

दमकल विभाग का नोटिस जारी होने के बाद इस मामले का निपटारा होने तक अब स्टूडियो में किसी भी तरह की शूटिंग नहीं हो पाएगी। दमकल विभाग का कहना है कि विभाग द्वारा एनओसी जारी करने के बाद ही वहां कोई शूटिंग हो सकेगी। 16 सितंबर की दोपहर को आरके स्टूडियो में लगी आग में वहां का सेट नंबर एक जलकर खाक हो गया। यहां सोनी चैनल के एक डांस शो की शूटिंग होनी थी।

रविवार होने की वजह से उस दिन वहां कोई शूटिंग नहीं थी, वरना इस कांड में कई जानें जा सकती थीं। इस अग्निकांड से आरके स्टूडियों में सालों पुरानी तमाम चीजें भी जलकर राख हो गईं, जिसमें कई पुरानी ड्रेसेज भी थीं। दमकल विभाग का कहना है कि 2014 के बाद स्टूडियो ने इस बारे में एनओसी लेने के लिए कोई आवेदन नहीं किया, जबकि कानूनी रुप से हर साल दमकल विभाग से एनओसी लेना पड़ता है और इसके लिए आग रोकने के लिए की गईं व्यवस्थाओं का विवरण विभाग को भेजना पड़ता है, जिनकी जांच के बाद ही एनओसी जारी होता है।

जिस दिन आग लगी थी, उसी दिन ये बात सामने आई थी कि वहां बिजली के तारों की पुराने दौर की फिटिंग होने से आग का खतरा बना हुआ था, जिस तरफ आरके के प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया। ऋषि कपूर ने इस नोटिस मिलने की खबर पर कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया। 

कार पार्किंग को लेकर दीपिका का टकराव

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दिसंबर में ‘पद्मावती’ बनकर परदे पर आने को तैयार दीपिका पादुकोण इन दिनों एक और जंग में शामिल हैं। ये जंग कार पार्किंग को लेकर है। मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई के बांद्रा उपनगर के पाली हिल इलाके की जिस बिल्डिंग में जहां दीपिका पहले रहा करती थीं, वहां कार पार्किग को लेकर बिल्डिंग की सोसायटी के साथ दीपिका का मामला टकराव की ओर बढ़ गया है और ये कानूनी जंग में बदल सकता है।

सोसायटी का तर्क है कि दीपिका अब इस बिल्डिंग में नहीं रहतीं, इसलिए उनके लिए रिजर्व पार्किंग देना संभव नहीं, क्योंकि पार्किंग की जगह ज्यादा नहीं है। दीपिका अब दादर में लिए नए घर में रहने जा चुकी हैं और उनका तर्क है कि अभी फ्लैट उनका है और पार्किंग की जगह का किराया वे दे चुकी हैं, ऐसे में उनकी जगह सोसायटी नहीं छिन सकती। अब इस मामले को लेकर दोनों पक्ष कानूनी कार्रवाई की बात कह रहा है।

दीपिका का तर्क है कि बालीवुड हीरोइन होने की वजह से उनको निशाना बनाकर कुछ लोग पब्लिसिटी पाना चाहते है, तो सोसायटी का कहना है कि दीपिका सेलिब्रिटी हैं, इसलिए वे कानूनों को तोड़ मरोड़ना चाहती है, जबकि सोसायटी के कानून बिल्डिंग में रहने वाले सभी सदस्यों के लिए एक जैसे हैं।

एक अक्टूबर से नि:शुल्क महिला चिकित्सा ​शिविर का आयोजन

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देहरादून। केन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की ओर से एक अक्टूबर से नि:शुल्क महिला चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें महिलाओं से संबंधित रोग का निदान विशेष महिला डॉक्टरों की ओर से किया जाएगा। पांच अक्टूबर को प्रेस क्लब में सुबह दस से एक बजे तक महिलाएं शिविर का लाभ उठा सकेंगे।

शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान फाउंडेशन की अध्यक्ष और स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता प्रभाकर ने बताया कि महिला जनित रोग की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इस तरह के रोग को लेकर महिलाएं खुलकर बता नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि स्तन और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। यदि समय-समय पर जांच होती रहे तो इनको रोका जा सकता है। इसी क्रम में संस्था की ओर से अक्टूबर माह में शहर के कई जगहों पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाया जा रहा है। जिसमें महिलाएं स्तन, सर्वाइकल कैंसर के अलावा शुग, ब्लड प्रेशर की जांच नि:शुल्क करवा सकेंगी। प्रेस क्लब में पांच अक्टूबर को यह शिविर लगाया जा रहा है। जिसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ महिलाओं की जांच करेंगे। यदि पहले चरण में इलाज किया जाए तो रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है। संस्था ने पिछले चार साल में विभिन्न जगह कैंप लगाकर दस हजार लोगों की जांच कराई। जिसमें से आठ सौ महिलाओं का सफल इलाज किया गया। इस दौरान संस्था के संरक्षक महेश कुडियाल, सचिव प्रवीण डंग आदि मौजूद रहे।