देहरादून। राज्य सरकार गरीबों के हित में एक और कदम उठाने जा रही है। गरीब लोगों को उनके राशन का पैसा सीधे उनके खाते में डाल दिया जाएगा। खाद्य घोटाले के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रातव ने यह घोषणा बुधवार को किसान भवन के समीप रिंग रोड, देहरादून में राज्य स्तरीय कृषक महोत्सव रबी-2017 का शुभारंभ करते हुए की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि कृषकों को उनके द्वारा उत्पादित फसलों को एकत्र करने के लिये कोल्ड स्टोरेज एवं फसलों को मंडियों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिये कोल्ड वैन उपलब्ध कराने की योजना बनायी जा रही है। मुख्यमंत्री ने चकबंदी को प्रोत्साहित करने के लिए इसे अपने गांव में भी शुरू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने गांववासियों का आह्वान किया कि चकबन्दी शुरू करें, इस पर गांव के लोग सहर्ष चकबंदी के लिए तैयार हो गए। वहां चकबंदी की प्रक्रिया शुरु हो गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विभागों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों एवं स्वयं सहायता समूहों के लगाए गए स्टाॅल्स का अवलोकन किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि कृषकों को आधुनिक तकनीक की जानकारी उपलब्ध कराने एवं उनकी आय दोगुनी करने के उद्देश्य से आज राज्य स्तरीय कृषक महोत्सव रवि-2017 की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कृषि मंत्री सुबोध उनियाल एवं प्रदेश भर से आए कृषकों को बधाई देते हुए कृषकों से अपील की कि इस महोत्सव का पूरा-पूरा लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि कृषक महोत्सव में दूर-दूर से हमारे किसान भाई-बहन आए हैं, उन्हें यहां से बहुत कुछ लेकर जाना चाहिए। इस महोत्सव के माध्यम से किसान भाई कृषि से संबंधित उपकरणों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यहां कई प्रकार की जानकारी किसानों को दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि में आधुनिक तकनीकों एवं विधियों का प्रयोग करके निश्चित रुप से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के किसान भाइयों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने का जो लक्ष्य रखा है, उसे पूरा करने के लिये किसान भाईयों के सहयोग की आवश्यकता है। इसके लिये समर्पण की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिये ऐसी फसलों को उगाया जा सकता है, जिन्हें जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते।
कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि कृषक महोत्सव के माध्यम से कृषकों एवं अधिकारियों के मध्य संवाद स्थापित हो सकेगा। जो कृषकों के लिये फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के चेहरे पर खुशहाली लाने के लिये कुछ योजनाएं तैयार की हैं। सेब की खेती को प्रोत्साहित कर के उत्तराखण्ड की आर्थिकी को सुधारा जाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न पार्कों का निर्माण कर हाॅर्टी-एग्री टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। कोल्ड स्टोरेज एवं कलेक्शन सेंटर तैयार किये जा रहे हैं।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने किसान भवन प्रांगण में वीर शिरोमणि माधो सिंह भंडारी की मूर्ति का अनावरण भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय कृषक महोत्सव रबी-2017 रथों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित भी किया।
अब गरीबों के राशन का पैसा सीधे उनके खाते में : मुख्यमंत्री
नहीं थम रहा स्वाइन फ्लू और डेंगू का कहर
देहरादून। डेंगू व स्वाइन फ्लू के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। दून में भी एडीज मच्छर और एच वन एन वन वायरस एक के बाद एक कई लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। मंगलवार को प्राप्त रिपोर्ट में जनपद देहरादून में चार और मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, जबकि स्वाइन फ्लू का भी एक और मामला सामने आया है।
राज्य में डेंगू व स्वाइन फ्लू के डबल अटैक से स्वास्थ्य विभाग भी सकते में है। स्थिति यह कि मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। नोडल अधिकारी डॉ. पुनीत चंद्रा ने बताया कि जनपद में जनवरी से अब तक स्वाइन फ्लू संभावित 426 मरीजों के सैंपल लिए गए। जिनमें 168 में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें सर्वाधिक 76 मरीज अगस्त माह में सामने आए हैं। जबकि सितम्बर में 41 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। स्वाइन फ्लू से 20 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। जिनमें ग्यारह देहरादून, चार यूपी, एक हरिद्वार, दो पौड़ी व दो मरीज उत्तरकाशी से हैं। इधर, डेंगू का भी प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जनवरी से अब तक डेंगू संभावित 1161 मरीजों की एलाइजा जांच कराई गई है। जिनमें 187 में डेंगू पॉजीटिव पाया गया। जिसमें 103 मरीज देहरादून के हैं। जबकि 64 मरीज हरिद्वार से सामने आए हैं। इसके अलावा टिहरी से तीन, चमोली से एक, रुद्रप्रयाग से दो व यूपी के 18 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
घोटालों का बन रहा रिकार्ड एनएच से बड़ा चावल घोटाला
रुद्रपुर, लगता है उत्तराखण्ड मे घोटालों का एम्पायर खडा किया जा रहा हो, एक के बाद एक घोटाला, और वो भी पिछले घोटालों से और भी बडा। एेसा लगता है जैसे घोटालों की आढ में सरकारी मशीनरी पुरी तरह से लिप्त है, एनएच 74 के बाद बड़ा चावल घोटाला सामने आ गया है। करोड़ों के चावल घोटाले में शामिल सभी लोगों तक पहुंचने के लिए विस्तृत जांच हो सकती है। हालांकि एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में ही कई सौ करोड़ का घपला पकड़ लिया है।
धान खरीद से लेकर ट्रांसपोर्ट व चावल की आपूर्ति तक हर जगह घपला ही घपला निकला है। सेवा विस्तार पर चल रहे आरएफसी की बर्खास्तगी के बाद अभी अन्य बड़े अफसरों पर भी गाज गिरेगी, लेकिन इस मामले में एफआईआर से पहले विस्तृत जांच भी होने के आसार हैं, ताकि सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके। सरकार के कड़े रुख से भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी नजूल जगदीश कांडपाल, एएसपी देवेंद्र पिंचा, काशीपुर के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विनीत तोमर व कलक्ट्रेट प्रभारी युक्ता मिश्रा की टीम ने खाद्यान्न घोटाले की जांच की। जांच में पाया गया कि राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में तीन लाख सात हजार छह सौ बानवे क्विंटल चावल 2,310/- रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया। जिसमें दो साल में 71 करोड़ सात लाख 68 हजार रुपये का घोटाला होने की चर्चा है। तीन लाख सात हजार छह सौ बानवे क्विंटल चावल के वितरण में ट्रांसपोर्टेशन शुल्क यदि 50 रुपये क्विंटल भी माना जाए तो इसमें डेढ़ करोड़ का गोलमाल सामने आ सकता है। बोरों की खरीद में भी 3.69 करोड़ रुपये प्रति वर्ष सरकार को चूना लगाने की बात सामने आ रही है।
इसके अलावा यूपी व अन्य राज्यों से 50 लाख 47 हजार 948 क्विंटल धान खरीदा गया, इसे कच्चा आढ़तियों से खरीदा दिखाते हुए लाखों रुपये की कर चोरी भी सामने आई है। इसके अलावा जब एसआईटी ने गोदामों का स्टाक वैरिफिकेशन किया तो बाजपुर, काशीपुर, रुद्रपुर व किच्छा में अनाज के बोरे ही गायब मिले। 3680 बोरों में टैग गलत पाए गए। धान की नीलामी अथवा खुली नीलामी से बोली लगाई जाने की व्यवस्था के तहत दस फीसदी मामलों में बिल बनाए गए। इस घोटाले में राइस मिलर्स ने भी चांदी काटी। मंडियों में फर्जी तरीके से धान की खरीद दिखाई गई। चावल घोटाले में भी पूरा सिंडीकेट काम करता रहा।
इस मामले में जिलाधिकारी नीरज खैरवाल का कहना है कि, “अभी घोटाले में विस्तृत जांच की जरूरत है। शासन के निर्देश पर वह अग्रिम कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह कह दिया है कि जरूरत पड़ी तो चावल घोटाले में एफआईआर कराई जाएगी।” माना जा रहा है कि विस्तृत जांच के बाद ही एफआईआर कराई जा सकती है।खाद्यान्न घोटाला सामने आने के बाद समय समय पर उच्चाधिकारियों द्वारा की जाने वाली समीक्षा बैठकों पर भी सवाल उठने लगा है। आखिर समीक्षा बैठकों में यह अनियमितताएं क्यों सामने नहीं आती? घोटाले होते रहें तो फिर पर्यवेक्षण अधिकारियों की समीक्षा बैठकों का औचित्य क्या है?
एनएच 74 में हुए मुआवजा घोटाले पर गौर करें तो समय समय पर उच्च अधिकारी समीक्षा करते रहे, मगर घपला कहीं पकड़ में नहीं आया। एनएच घोटाला खुलता भी नहीं यदि तत्कालीन एसएलएओ ने माफियाओं की मनमर्जी पर रोक न लगाई होती। खैर मुआवजा घोटाला खुला तो उसकी परतें उधड़ती चली गई।
इसी तरह खाद्यान्न घोटाला सामने आया है। खाद्यान्न घोटाला भी तब सामने आया जब मुख्यमंत्री ने इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। सवाल यह उठता है कि धान खरीद से लेकर खाद्यान्न योजना तक की समीक्षा बैठकें हुई तो यह अनियमितताएं क्यों पकड़ में नहीं आई? अफसर उस वक्त क्यों नजरें फेरे रहे? यदि योजना की समीक्षा बैठकों में ही अनियमितताएं पकड़ी जाती तो शायद घोटाला हो ही नहीं पाता।
सीबीएसई स्कूलों में अब एक सेक्शन में 40 छात्र
देहरादून। सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) अब छात्र-शिक्षक अनुपात को लेकर भी सख्ती के मूड में दिख रहा है। बोर्ड ने कक्षा नौ से एक कक्षा में अधिकतम 40 छात्रों के नामांकन का प्रावधान किया है। शिक्षक सभी छात्रों पर बराबर ध्यान दे सकें।
वर्तमान में निजी स्कूल एक-एक सेक्शन में मानकों से ज्यादा छात्र रखते हैं। यह संख्या 50 से 60 छात्र तक भी रहती है। छात्र नौवीं में छात्रों के नामांकन के आधार पर ही वे दसवीं की परीक्षा में शामिल होते हैं। हाल में नामांकन प्रक्रिया चल रही है। जिसके तहत सीबीएसई ने निर्देश जारी किए हैं। जिसमें कहा गया है कि नौवीं कक्षा में यदि तीन सेक्शन हैं और इनमें क्रमश: 39, 41,41 छात्र हैं, तो इन तीन सेक्शन में 40-40 छात्र समायोजित करना होंगे। इस तरह से 120 छात्रों के लिए तीन सेक्शन होंगे और बचे हुए छात्र के लिए अलग सेक्शन होगा। इस सेक्शन में भी अधिकतम 40 छात्र ही रखे जाएंगे। यानि अगर चार सेक्शन हैं तो प्रत्येक में 40 के मान से अधिकतम छात्र 160 होंगे। गाइडलाइन में स्पष्ट निर्देश हैं कि अगर किसी सेक्शन में 40 से एक छात्र भी ज्यादा हो रहा तो अलग सेक्शन बनाया जाए। 11वीं में भी नियम यही रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शिक्षकों का छात्रों पर पर्याप्त ध्यान रहे और हरेक छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सके।
फैकल्टी की किल्लत से जूझ रहा श्रीनगर मेडिकल कॉलेज
श्रीनगर गढ़वाल। रेडियोलॉजी के बाद अब राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर का मनोरोग विभाग भी फैकल्टी विहीन हो गया है। विभाग की इकलौती फैकल्टी सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रदीप निराला ने त्यागपत्र के साथ तीन माह का नोटिस थमा दिया है। फिजिकल रिहेबिलिटेशन पीएमआर विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक भी मेडिकल कालेज से त्याग पत्र दे चुके हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती तो दूर अब सामान्य फैकल्टियों की कमी भी प्रदेश के पहले सरकारी मेडिकल कालेज पर भारी पड़ने लगी है। 30 प्रतिशत से अधिक फैकल्टियों की कमी बनी हुई है। फरवरी 2017 से फैकल्टियों की तैनाती को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग वॉक इन इंटरव्यू भी नहीं कर रहा है, जिससे फैकल्टियों का संकट निरंतर गहराता जा रहा है। इससे पहले लगभग हर दो महीने में फैकल्टियों की नियुक्ति को लेकर वॉक इन इंटरव्यू देहरादून में होते रहे हैं।
श्रीनगर मेडिकल कालेज में मेडिसन, बाल रोग विभाग, रेडियोलॉजी जैसे क्लीनिकल विभाग में फैकल्टियों की भारी कमी का असर बेस अस्पताल में रोगियों के उपचार की व्यवस्था पर पड़ रहा है। मेडिकल कालेज का अस्पताल होने की वजह से गढ़वाल के अन्य अस्पतालों से रोगियों को बेस अस्पताल इलाज के लिए भेजा जाता है, लेकिन उपचार को लेकर यहां की खस्ताहाल व्यवस्था देख परिजन और तीमारदार रोगी को दून या जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर होते हैं।
यमुनोत्री धाम के लिए वैकल्पिक मार्ग की राह मुश्किल
उत्तरकाशी। यमुनोत्री हाइवे पर ओजरी के पास बन रहे वैकल्पिक मार्ग का निर्माण अभी पूरा नहीं हो पाया है। मार्ग की अभी जो मौजूदा स्थिति है, उससे इसे बनने में अभी एक सप्ताह से अधिक का समय लगना तय है। विशेषज्ञों के अनुसार इस वैकल्पिक मार्ग पर यमुना नदी को पार करने के लिए जब तक पुल का निर्माण अथवा ह्यूम पाइप नहीं बिछाया जाता, तब तक यह मार्ग यमुनोत्री हाइवे का विकल्प नहीं बन सकता।
सितंबर के दूसरे सप्ताह ओजरी के पास पहाड़ी से भूस्खलन होने के कारण यमुनोत्री हाइवे बंद हुआ था। इसके चलते जिला प्रशासन ने ओजरी से स्यानाचट्टी तक वैकल्पिक मार्ग बनाने का निर्णय लिया। 19 सितंबर से मार्ग का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन अब तक वह बनकर तैयार नहीं हुआ है। साथ ही वैकल्पिक मार्ग के हाइवे का विकल्प बनने के आसार भी नजर नहीं आ रहे। मौके पर तैनात इंजीनियरों का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग का समरेखण भी सही नहीं है। कहीं मार्ग पर चढ़ाई बहुत अधिक है तो कहीं उतराई। नदी के किनारे बने करीब 200 मीटर मार्ग का अस्तित्व भी खतरे में है। यमुना नदी को पार करने के लिए न तो नदी में ह्यूम पाइप डाले जा रहे हैं और न पुल का ही निर्माण किया जा रहा। ऐसे में यमुना को पार करते समय खासकर छोटे वाहन नदी के बीच में ही फंस सकते हैं। फिर इस मार्ग का उपयोग सिर्फ शीतकाल में हो सकता है, जब नदी का जलस्तर न्यून रहता है। जबकि, इस अवधि में यात्रा होती ही नहीं। नाम न छापने की शर्त पर लोक निर्माण विभाग के एक इंजीनियर ने यहां तक कहा कि 2.5 किलोमीटर लंबे वैकल्पिक मार्ग का करीब एक किलोमीटर हिस्सा तो पैदल मार्ग बनाने लायक भी नहीं है। यहां पूरी जमीन दलदली है और कुछ हिस्सा नदी के बहाव क्षेत्र में आ रहा है। बता दें कि लोनिवि बड़कोट वैकल्पिक मार्ग के निर्माण में 20 लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि मुख्य हाइवे न खुलने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग बनाने का निर्णय लिया गया था। वैकल्पिक मार्ग पर वाहन कैसे आवाजाही कर पाएंगे, इस संबंध में तो इंजीनियर ही बेहतर बता सकते हैं। वहीं, लोनिवि बड़कोट के ईई जेपी रतूड़ी कहते हैं कि वैकल्पिक मार्ग को वाहनों की आवाजाही लायक बनाने में अभी एक सप्ताह का समय लग सकता है। यमुना नदी को पार करने के लिए पानी में पत्थर बिछाकर रपटा बनाया जाएगा। यहां ह्यूम पाइप डालने अथवा पुल निर्माण का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है
ओजरी के निकट जहां से वैकल्पिक मार्ग को यमुना नदी में पार किया जाना है, वहां पर बहाव क्षेत्र छह से सात मीटर चौड़ा है। पानी का लेबल भी यहां डेढ़ से दो मीटर गहरा है। ऐसे में बिना पुल अथवा ह्यूम पाइप के वाहन नदी कैसे पार करेंगे, यह समझ से परे है। दूसरी ओर, नदी से लेकर स्यानाचट्टी तक तो वैकल्पिक मार्ग को बिना समरेखण के ही बनाया जा रहा है।
उत्तरकाशी के जिला अधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि ओजरी में वैकल्पिक मार्ग केवल इसी सीजन के लिए बनाया जा रहा है। जहां तक नदी को पार करने का सवाल है, वहां पर फिङ्क्षलग की जानी है, ताकि आसानी से नदी पर हो सके। स्थायी समाधान के लिए ओजरी से त्रिखली होते हुए मार्ग बनना है। इस मार्ग पर वन भूमि आ रही है, जिसके हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होनी है।
कंगना और रितिक का विवाद फिर भड़का
रितिक रोशन और कंगना के बीच दो साल से चला आ रहा विवाद एक बार फिर मीडिया के केंद्र में आ गया है। ये केस एक बार फिर कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ा है। खबरों के मुताबिक, रितिक रोशन के वकीलों ने कंगना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, तो कंगना के वकील की ओर से रितिक की शिकायत को नकार दिया गया है।
सोशल मीडिया पर कंगना की बहन रंगोली द्वारा रितिक को अंकल का ताना मारा गया, तो ये विवाद और गहरा गया। रितिक के वकील महेश जेठमलानी की ओर से मुंबई पुलिस मे एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसमें कंगना द्वारा कथित तौर पर लिखे ईमेल का विवरण है। 29 पेज की इस शिकायत में रितिक के वकीलों की टीम ने कंगना पर अश्लील मैसेज भेजने के आरोप लगाए।
मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम ने पिछले साल भी इस केस की जांच की थी और बिना किसी नतीजे के इस जांच को बंद कर दिया था। रितिक रोशन की ओर से दर्ज शिकायत के बाद ये जांच फिर से आगे बढ़ेगी। पुलिस ने भी कहा है कि मामला बंद नहीं हुआ है और जांच आगे बढ़ेगी। कंगना के वकील रिजवान अली ने इस शिकायत पर एक बयान जारी कहा, जिसमें उनका कहना था कि ये मामला नया नहीं है और दो सालों से पब्लिक डोमेन में हैं। उनका कहना है कि जांच तेजी से होनी चाहिए और निष्पक्ष होनी चाहिए।
रितिक की रिपोर्ट की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर कंगना की बहन रंगोली एक बार फिर तैश में आ गईं और उन्होंने रितिक का नाम लेकर उनको खरी खोटी सुनाईं और उनके लिए अंकल शब्द का इस्तेमाल किया। रंगोली का कहना है कि जब रितिक की पहली फिल्म रिलीज हुई, तो कंगना सिर्फ तीन साल की थीं। अगर वे हीरो न होते, तो कंगना उनको अंकल बुलातीं। रंगोली ने रितिक पर आरोप लगाया कि उनकी बहन को बदनाम करने के लिए वे उल्टे सीधे हथकंडे अपना रहे हैं। कंगना की बहन ने ये भी कह दिया कि कंगना जैसी अमीर लड़की को जिंदगी में अंकल टाइप किसी की जरुरत नहीं होती।
परिणीती चोपड़ा के पांव में चोट आई
मुंबई, परिणीती चोपड़ा जहां इन दिनों दीवाली पर रिलीज होने जा रही अपनी फिल्म गोलमाल 4 के प्रमोशन में व्यस्त हैं, वहीं हाल ही में उन्होंने यशराज की नई फिल्म ‘संदीप और पिंकी फरार’ का पहला शेड्यूल भी किया। इस फिल्म में वे ‘इश्कजादे’ के बाद एक बार फिर अर्जुन कपूर के साथ जोड़ी बना रही हैं।
इसी फिल्म के सेट पर एक सीन करते हुए परिणीती चोपड़ा के पांव में चोट आ गई। बताया जाता है कि उनका पांव एक कांच से टकरा गया, जिसकी वजह से काफी खून बहा। इसी हादसे में उनका पांव मुड़ गया और उस पर सूजन आ गई। परिणीती ने अपना प्रोफेशनल रवैया दिखाते हुए चोट लगने के बाद भी उस दिन की शूटिंग का काम किया और साथ में ‘गोलमाल 4’ के प्रमोशन के काम को भी जारी रखा।
इस फिल्म में वे पहली बार रोहित शेट्टी की टीम से जुड़ी हैं और पहली बार अजय देवगन की हीरोइन बनी हैं। ‘गोलमाल 4’ की टीम ने परिणीती के जज्बे की तारीफ की है।
सोशल मीडिया पर सक्रिय दुनिया के सितारों की लिस्ट मे प्रियंका-दीपिका
सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले अंतर्राष्ट्रीय सितारों को लेकर हाल ही में जारी एक लिस्ट में बालीवुड से दो सितारों के नाम हैं। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर प्रियंका चोपड़ा का नाम है, तो दीपिका पादुकोण सातवें नंबर पर हैं। इन दोनों ने ही हाल ही में
हालीवुड की फिल्मों में अपना कैरिअर शुरु किया है। इसी साल जहां प्रियंका की फिल्म बेवाच रिलीज हुई, तो दीपिका की फिल्म ट्रिपल एक्स भी परदे पर आई। ये अलग बात है कि बाक्स आफिस पर न प्रियंका की फिल्म चली और न ही दीपिका की।
भारतीय दर्शकों को अपनी पसंदीदा हीरोइनों में से किसी की फिल्म नहीं पसंद आई। दिलचस्प बात ये है कि सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाले अंतर्राष्ट्रीय सितारों की इस लिस्ट में पहले नंबर पर डवेन जानसन हैं, जो राक के नाम से जाने जाते हैं और प्रियंका के साथ बेवाच में हीरो थे। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर दीपिका की फिल्म के हीरो रहे विन डिजल हैं।
जेनिफर लोपाज का नाम प्रियंका के बाद इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है और एमिलिया क्लार्क पांचवे नंबर पर हैं। संजय लीला भंसाली की बाजीराव मस्तानी में प्रियंका और दीपिका ने पहली बार एक साथ काम किया था, जबकि रामलीला में दीपिका हीरोइन थीं और प्रियंका ने इसके लिए एक आइटम सांग किया था।
कृषक महोत्सव मनाने का सरकार को नहीं अधिकारःबेहड
रुद्रपुर, पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ ने कहा कि, “प्रदेश की भाजपा सरकार को कृषक महोत्सव मनाने को कोई अधिकार नहीं है। जिस प्रदेश में छह किसानों ने कर्ज में डूब कर आत्महत्या कर ली हो उस सरकार को कृषक महोत्सव मनाने के बजाए किसानों के हित के लिए योजनाएं चलानी चाहिए, ताकि हमारे अन्न दाता अपनी जान देने को मजबूर न हो।”
पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ ने कहा कि उत्तराखण्ड में किसान अपनी फसल बेचने के लिए मारे मारे घूम रहा है। सरकार द्वारा धान के कांटे जगह-जगह लगाए नहीं गए है और जिस जगह लगे हैं तो कोई धान खरीद नहीं रहा है। ऐसे में किसान अपनी फसल लेकर दर दर भटक रहा है जो हमारे देश के लिए चिंता का विषय है। विगत दिनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा बयान दिया गया था के भाजपा ने कभी किसानों के कर्ज माफी का वादा नहीं किया था। “भाजपा नेताओं को इतनी भी शर्म नहीं आती कि दिन में तीन बार जिस किसान का उगाया अन्न खाकर वह अपना पेट भरते हैं उसकी मृत्यु का मजाक उड़ाना क्या अच्छा है।”
जिला उधमसिंह नगर में तीन तीन किसानों के कर्ज में डूब कर आत्हत्या कर ली थी, प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मृतक किसानों के परिजनों से मिलना भी जरूरी नहीं समझा तो आज यह किस हक से कृषक महोत्सव मना रहे हैं। यह कृषक उत्सव नहीं बल्कि मृतक किसानों का अपमान है।
श्री बेहड़ ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने किसानों की फसल के नुकसान के बाद राहत देने के लिए बीमा फसल योजना शुरू की है। जिसमें जिस किसान ने सोसाइटी से लोन लिया हुआ है और उसका पी्रमियम कटा हुआ है, यदि उसकी फसल खराब होती है तो उसको 24 घण्टे के अन्दर प्रार्थना पत्र के साथ कटे हुए प्रीमियम की रसीद भी बैंक या सोसाइटी में जमा करवानी होगी उसके बाद किसान का प्रार्थना पत्र केन्द्र में भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बीमा कम्पनी को भेजा जाएगा। श्री बेहड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार व उत्तराखण्ड सरकार किसानें के लिए एक जुमला साबित हुई है।





























































