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गायब लड़की मंगेतर पुलिस वाले के साथ मिली

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गोपेश्वर, चमोली जिले के एक गांव से लापता हुई लड़की नाटकीय ढंग से अपने मंगेतर के साथ मिल गई। उसका मंगेतर पीएसी में तैनात है। पुलिस जब दोनों को चमोली थाने ले गई तो पता चला कि लड़की अपने मंगेतर पुलिस कर्मी के साथ स्वयं आयी थी। थाने में दोनों पक्ष के परिजन भी आये और समझौते के बाद अपने घर लौट गये।

तीन दिन पहले चमोली निवासी लड़की के परिवार की तरफ से लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवायी गई थी। पुलिस ने सर्विलांस के माध्यम से लड़की की खोज शुरू की तो वह बदरीनाथ में एक पुलिस कर्मी के साथ मिली। पुलिस जब उसे लेकर चमोली आयी तो पता चला कि लड़की स्वयं की मर्जी से अपने मंगतेर के पास गई थी।

दोनों के परिजनों को थाने में बुलाया गया। थानाध्यक्ष चमोली सतेंद्र सिंह ने बताया कि लड़की अपनी मर्जी से अपने मंगेतर के पास गई थी। गुदोनों के परिजनों ने इनके विवाह की स्वीकृति दी है और वे अपने घर चले गये हैं। 

सरकार बीचौलियो को लाभ पहुँचाने के लिए फ़सल ख़रीद की नीति की घोषणा नहीं कर रही है: रावत

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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा सरकार धान की ख़रीद की नीति साज़िश के तहत जारी न करने का आरोप लगाते हुवे कहा कि सरकार बीचौलियो को लाभ पहुँचाने के लिए अपनी फ़सल ख़रीद की नीति की घोषणा नहीं कर रही है,उन्होंने कहा कि, “आज मैंने बाजपुर मंडी में भी यही हालात देखे की काँटे ख़ाली पड़े है किंतु धान ख़रीद की नीति की घोषणा न होने के कारण किसान अपने धान को बीचौलिये को मजबूरी में बेच रहे है बाद में सरकार उसी धान को अधिक मूल्य में बीचौलिये से ख़रीद सके।

अारौप लगाते हुये कहा कि, “किसानो का शोषण कर एक बड़े घोटाले की तय्यारी की जा रही है, नीति की घोषणा न करना किसानो को मजबूरी में धान बेचने को मजबूर करने की साज़िश है जिसमें सरकार के कई नुमाइंदों की मिलिभक्त भी है।”

 पुलिस लाईन में मासिक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया

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पुलिस लाईन देहरादून में एसएसपी, देहरादून निवेदिता कुकरेती कुमार ने अधिकारीयों /कर्मचारियों का सैनिक सम्मेलन एव तदोपरान्त मासिक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया।

सम्मेलन के दौरान एसएसपी द्वारा सभी कर्मचारियों की समस्याओं को सुनकर उनके त्वरित निस्तारण के लिये सम्बन्धित को निर्देशित किया गया। सम्मेलन में उपस्थित अधिकारियों/कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एसएसपी ने बताया कि, “त्यौहारो के सीजन के दृष्टिगत सभी थाना प्रभारी अपने-अपने थाना क्षेत्रो में भीड़-भाड़ वाले स्थानों को चिन्हित कर समुचित संख्या में पुलिस बल नियुक्त करना सुनिश्चित करें। साथ ही थानों को आवंटित पी.ए.सी बल की निर्धारित बीट चयनित कर उन्हे उसी बीट पर गतिशील रखा जायें। इसके अतिरिक्त दीपावली के पर्व के अवसर पर लगने वाली पटाखों की दुकानों के सम्बन्ध में जारी किये गये दिशा निर्देशों का अनुपालन करना सुनिश्चित करे तथा पूर्व में निर्धारित स्थानों पर ही दुकानो लगाने की अनुमति दी जाये।”

इसके अतिरिक्त भीड़- भाड़ वाले इलाकों, जहाँ पर बड़े दमकल वाहन नही जा सकते है, उन स्थानों को चिन्हित कर ऐसे स्थलों पर छोटे दमकल वाहन /मो.साईकल को पूर्व से ही नियुक्त कर लिया जाए ताकि किसी अप्रिय घटना होने पर कार्यवाही की जा सके। इस दौरान उनके द्वारा पुलिस लाइन देहरादून के आवासीय परिसर में पूर्व में किये गये औचक निरीक्षण के दौरान अपने आवासों व उसके आसपास अच्छी साफ- सफाई रखने वाले पुलिस कर्मीयों को पुरस्कृत किया गया।

मासिक अपराध गोष्ठी के दौरान एसएसपी दून द्वारा सभी थाना प्रभारियों को बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के दृष्टिगत रैश डाईविंग करने वाले सिटी बस/ विक्रम चालको के विरुद्ध चालानी कार्यवाही करने तथा सभी बस संचालकों व ट्रांसपोर्टरों की थाने में मीटिंग बुलाकर उन्हे निर्धारित गति से वाहन चलाने तथा लेफ्ट टर्न को खाली रखने की हिदायत देने  के लिये निर्देशित किया गया।

इसके अतिरिक्त पुलिस कंट्रोल रुम प्रभारी को रात्री में प्रमुख चौराहों/ स्थानों पर सी.सी.टी.वी कैमरों की सहायता से संदिग्ध व्यक्तियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिये गये। साथ ही अवैध खनन व ओवरलोडिंग में नियमित रूप से चेकिंग व चालानी कार्रवाई करने, पुराने नकबजनों के सत्यापन, वांछितों की गिरफ्तारी, सम्मन/वारंट की तामील व उनका नियमित रिकॉर्ड मेंटेन रखने, लंबित मामलों के जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिये।

विगत 2 माह से अधिक अवधि के लम्बित शिकायती प्रार्थना पत्रों के जल्द निस्तारण तथा लम्बित विवेचनाओं के त्वरित निस्तारण हेतु सभी थाना प्रभारीयों को निर्देशित किया गया। साथ ही सभी राजपत्रित अधिकारीयों को अपने अपने सर्किल में एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाकर अधिक समय से लम्बित चल रही विवेचनाओं के समय बद्ध निस्तारण हेतु निर्देशित किया गया।

माह सितम्बर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र व नगद पुरूस्कार देकर सम्मानित किया गया तथा भविष्य में भी उनसे इसी प्रकार से अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करने की अपेक्षा की गयी।

सोमेश्वर देवता पर बना खास गाना कफुवा जल्द होगा रिलीज

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हर्षील की हसीन वादियों में स्थित मुकबा अपने आप में एक अद्भुत गांव है जो की भागीरथी के तट पर स्थित है।यां पर विराजमान सोमेश्वर देवता के आंगन में हर साल सेलकू मेला आयोजित किया जाता है।

इस साल इस मेले के उपलक्ष्य में यहां के लाल, रजनीकांत सेमवाल ने एक सुंदर ‘काफुवां’ संजोया है जिसमें बड़ी खुबसूरती से सोमेश्वर देवता की कुल्लू से टंकोर की यात्रा का विवरण किया गया है।

सोमेश्वर देवता एक चरवाहा थे जो अपनी भेड़-बकरियों के साथ हिमालय की दूर-दराज क्षेत्र में घूमा करते थे। इसी श्रृंखला में वह गंगोत्री पहुंचे और यहां गंगा में स्नान करने के बाद मुकबा में बस गए। मान्यता यह है कि अगर आप सच्चे मन से सोमेश्वर देवता से कुछ मांगते हैं तो आपकी हर इच्छा पूरी होती है।

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सोमेश्वर देवता की जीवन गाथा इस 16 मिनट के गाने में बयान की गई है।न्यूजपोस्ट टीम से बातचीत में रजनीकांत सेमवाल ने बताया कि, “यह पूरा गीत लगभग 15-16 मिनट लंबा है, मुझे एक साल से उपर लगा कफुवा को तैयार करने में, कुछ मेरे पिताजी के कलेक्शन से और कुछ गांव के बड़े बुर्जुगों से बात करके मैने इसे संजोया।”

उसके बाद रजनीकांत की कोर टीम के 6 सदस्य और मुकबा के स्थानीय लोगों ने मिलकर इस गाने में रंग भरे हैं जोकि एक विडियो के रुप में तैयार होकर जल्द ही यूट्यूब पर भी रिलीज होने जो रहा है।

पहाड़ की नियति बन चुके पलायन को कैसे रोकेगी त्रिवेन्द्र सरकार

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देहरादून। उत्तराखण्ड से बढ़ते पलायन प्रदेश के साथ-साथ देश के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जबकि इसे रोकने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकार दावें करती है लेकिन पलायन थमने का नाम नहीं ले रहा, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में वर्तमान सरकार ने पलायन रोकने के लिए पलायन आयोग बनाने का ऐलान किया है।
यूपी से अलग होकर उत्तराखण्ड को राज्य के निर्माण के लिए 17 साल हो गए। यहां की जनता राज्य बनने का जश्न तो मना रही है लेकिन आज भी उनको चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा है। जबकि राज्य की सभी नौ सरकारें पलायन को ख़त्म करने की बातें करती रही और पहाड़ के गांव खाली होते रहे। ऐसे में विवश होकर प्रदेश के गढ़वाल-कुमाऊं के युवा नौकरी के लिए दिल्ली-मुंबई-चंडीगढ़ जैसे शहरों का रुख कर रहे हैं।
राज्य में सत्ता से बेदखल विपक्ष में बैठी कांग्रेस सरकार सात महीने के भाजपा सरकार के कार्यकाल को विफल बता रही है। उनका कहना है पहाड़ की मूल समस्या को छूने में त्रिवेन्द्र सरकार पूरी तरह से असहाय दिख रही है। ऐसे में इस सरकार से ज्यादा उम्मीद नही किया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह सूबे की त्रिवेंद्र सरकार पर लगातार पलायन व रोजगार जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर वार कर रहे हैं।
वर्तमान प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहाड़ पर रोकने के लिए पलायन आयोग बनाने का ऐलान किया है लेकिन पहाड़ की नियति बन चुके पलायन को रोकने में आयोग कितना कारगर साबित होगा यह चुनौती से कम नहीं है। वर्ष 1991 से लेकर 2011 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सोलह सालों में उत्तराखंड में 32 लाख लोगों ने पलायन किया है।
उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ में जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घटती जा रही है। सीमावर्ती जिलों से लोगों का पलायन देश की सुरक्षा लिहाज से भी खतरनाक साबित हो सकता है और इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी चिंता जता चुके हैं। सरकारी आंकड़ों की माने तो पहाड़ में दो लाख अस्सी हजार छह सौ पंद्रह घरों में कोई रहने वाला नहीं है।
राज्य सरकार ने पलायन से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में से एक पौड़ी में पलायन आयोग का गठन कर सही दिशा में पहल तो की है लेकिन क्या यह आयोग राज्य के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर पाएगा? राज्य ही नहीं मैदानों में रहने वाले लाखों उत्तराखंडी प्रवासियों को भी इस सवाल के जवाब का इंतजार रहेगा।
जनगणना 2011 के आंकड़े बताते हैं कि पहाड़ में राज्य बनने के बाद करीब पैंतीस फीसदी आबादी ने अपने मूल स्थानों से पलायन किया है। 2001 से 2011 के बीच दस सालों में उत्तराखंड की आबादी 19.17 फीसदी बढ़ी और इससे भी ज़्यादा बढ़ा पहाड़-मैदान का अंतर। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी में वृद्धि 11.34 फीसदी रही जबकि मैदानी क्षेत्रों में यह करीब चार गुना अधिक 41.86 फीसदी रही। पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों में तो जनसंख्या कम ही हो गई है। वर्ष 2001 में पौड़ी की कुल जनसंख्या थी 3,66,017, जो 2011 में 3,60,442 हो गई, यानि की 10 साल में आबादी 5,575 घट गई। अल्मोड़ा में 2001 में 3,36,719 लोग रहते थे, जो 2011 में 3,31,425 ही रह गए। इस तरह आबादी 5,294 कमी आई।

रेस 3 में अब इमरान हाश्मी का नाम

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सलमान खान की नई फिल्म ‘रेस 3’ में काम करने वाले कलाकारों को लेकर रोज नए नाम सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में अब इमरान हाश्मी का नाम सामने आया है। कहा जा रहा है कि इमरान को इस फिल्म के लिए अप्रोच किया गया है। इमरान हाल ही में रिलीज हुई अजय देवगन की फिल्म बादशाहों मे नजर आए थे।

चर्चा ये है कि जिस रोल के लिए पहले आदित्य राय कपूर का नाम सामने आया था, इसके लिए ही अब इमरान हाश्मी का नाम सामने आया है। इमरान ने कभी सलमान खान के साथ पहले काम नहीं किया। कहा जा रहा है कि फिल्म मे वे डेजी ईरानी के साथ होंगे, जबकि जैक्लीन फर्नांडिज की जोड़ी सलमान खान के साथ होगी। इस फिल्म की कास्टिग को लेकर एक खबर ये भी है कि सिद्धार्थ मल्होत्रा का नाम भी पक्का नहीं है। वे करण जौहर की कंपनी की नई फिल्म शुरु करने जा रहे हैं, इसलिए उनके साथ तारीखो का मामला नहीं जम रहा है।

फिल्म का निर्माण करने जा रही टिप्स कंपनी के रमेश तौरानी का कहना है कि ‘रेस 3’ को लेकर मीडिया में बहुत कुछ आ रहा है, जिस पर वे सही समय आने पर खुलासा करेंगे कि फिल्म की सही कास्टिंग क्या है। रमेश तौरानी की मानें, तो सलमान के अलावा किसी का नाम पक्का नहीं है।

मक्खी की हीरोइन की शादी नागार्जुन के बेटे से

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हिंदी मे डब होकर रिलीज हुई फिल्म ‘मक्खी’ से पहली बार हिंदी दर्शकों में पहचान बनाने वाली साउथ की एक्ट्रेस सामंथा प्रभु और नागार्जुन के बेटे नागा चेतन्य शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। हैदराबाद में होने जा रही इस शादी में दोनों परिवारों के अलावा करीबी लोग शामिल होंगे, लेकिन बाद में होने वाले रिसेप्शन में बालीवुड से भी कई सितारे जाएंगे।

जानकारी के अनुसार, श्रीदेवी, अजय देवगन, सलमान खान और दीपिका पादुकोण के रिसेप्शन में शामिल होने की संभावना है। सामंथा ने प्रतीक बब्बर और एमी जैक्सन की फिल्म’ एक दीवाना था’ में भी मेहमान भूमिका की थी। शादी का कार्यक्रम तीन दिन चलेगा और 8 अक्तूबर को ये समारोह संपन्न हो जाएगा।

10 अक्तूबर को भव्य स्तर पर रिसेप्शन का आयोजन किया जाएगा। सामंथा कैथलिक हैं, इसलिए पहले शादी उनके धर्म की रीतियों से होगी और फिर हिंदू परंपराओं के मुताबिक शादी के फेरे संपन्न होंगे। नागा चेतन्य और सामंथा पिछले तीन सालों से रिलेशनशिप में बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि दिसंबर में ये जोड़ी हनीमून पर जाएगी।

जान अब्राहम की फिल्म की रिलीज आगे बढ़ी

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1 दिसंबर को संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को रिलीज किए जाने की घोषणा के बाद इस दिन और इसके आसपास रिलीज होने वाली फिल्मों में खलबली मच गई है। पहले 1 दिसंबर को रिलीज के लिए शेड्यूल फिल्मों ने खुद को इस तारीख से हटा लिया है और अब इसका असर आने वाले अगले सप्ताह की फिल्मों पर भी नजर आने लगा है।

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जान अब्राहम की प्रोडक्शन में बनी फिल्म परमाणु-द स्टोरी आफ पोकरण को पहले 8 दिसंबर को रिलीज किया जाना था, अब खबर मिल रही है कि इसकी रिलीज डेट को भी आगे खिसका दिया गया है। मिली खबरों के मुताबिक, ये फिल्म अब अगले साल 23 फरवरी को रिलीज होगी।

ये फिल्म 1998 में श्रीअटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार द्वारा किए गए परमाणु परीक्षणों को लेकर बनी है इस फिल्म में जान के साथ पहली बार डायना पेंटी होंगी, जिनको कुछ दिनों पहले फिल्म लखनऊ सेंट्रल में फरहान अख्तर के साथ देखा गया था। दोनों ने पहली बार साथ काम किया है और दोनों इस फिल्म में भारतीय सैनिक अधिकारियों के रोल में है। अभिषेक शर्मा इस फिल्म के निर्देशक हैं, जो पूर्व में कामेडी फिल्म तेरे बिन लादेन बना चुके हैं।

मृतक ट्रैकर का शव हेलीकॉप्टर से गुप्तकाशी लाया गया

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रुद्रप्रयाग। बद्रीनाथ-मदमहेश्वर ट्रैक पर बीते 10 दिनों से पश्चिम बंगाल के मृतक ट्रैकर सुप्रिय बर्मन का शव पड़ा था। जिसे शुक्रवार को हेलीकॉप्टर से गुप्तकाशी लाया गया। पनपतिया गए एसडीआरएफ के पर्वतारोही दल को मृतक ट्रैकर का शव गुरुवार को दिखाई दिया था।
बूड़ा मदमहेश्वर के पनपतिया ग्लेशियर में पिछले करीब 10 दिनों से फंसे ट्रैकर सुप्रियो बर्मन के शव को रेस्क्यू कर लिया गया है। शव को हेलीकॉप्टर से गुप्तकाशी लाया गया है। यहां से शव को रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

trekkerपहले एसडीआरएफ द्वारा इस स्थान के पास बर्फ हटाकर अस्थाई हेलीपैड बनाया गया। इसके बाद शुक्रवार सुबह हेरिटेज का हेलीकॉप्टर रेकी के लिए भेजा गया। हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद एसडीआरएफ के जवान शव को नीचे लाए। शव को गुप्तकाशी लाया गया, जहां से रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। बता दें कि जहां ट्रैकर सुप्रियो बर्मन का शव था वहां के हालात काफी कठिन है। बर्फ के बीच ऐसी चढ़ाई और उतराई थी कि यहां आसानी से खुद चलना ही मुश्किल था।
पुलिस और एसडीआरएफ दल के कुछ सदस्यों ने बड़ी मुश्किल से रेस्क्यू कर करीब आठ सदस्यों को निकाल लिया था लेकिन इस दौरान ट्रैकिंग ग्रुप के टीम लीडर सुप्रियो वर्मन की 26 अक्टूबर को पनपतिया में मौत हो गई थी। जिन्हें निकालने की लगातार कोशिश की जा रही थी लेकिन खराब मौसम के चलते टीम को सफलता नहीं मिल पा रही थी।

ऋषिकेश और रायवाला क्षेत्र में लगी धारा 144

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ऋषिकेश। बीते मंगलवार को रायवाला में हुई एक युवक की हत्या के मामले ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया। हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों की तत्काल गिफ्तारी की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने रायवाला बाजार में कुछ दुकानों को निशाना बनाया और तोड़फोड़ की। तो वहीं इस घटना की आग ऋषिकेश शहर तक भी फैलने में देर न लगी और ऋषिकेश छेत्र  में भी कुछ लोगों ने बड़ी सब्जी मंडी में उत्पाद मचाया, और दूसरे समुदाय के लोगों की दुकानों पर तोड़ फोड़ की जिससे तनाव की स्तिथि बन गयी।

फिलहाल ऋषिकेश और रायवाला छेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिए गए है और दोनों चित्रों में धारा 144 लगा दी गयी है।