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“दत्त” में नजर आएंगे दत्त

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संजय दत्त की जिंदगी पर बन रही बायोपिक में संजय खुद भी परदे पर नजर आएंगे। फिल्म की टीम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, फिल्म के निर्देशक राजकुमार हीरानी इस मामले को लेकर उलझन में थे कि संजय को फिल्म के परदे पर लाया जाए या नहीं, लेकिन दीवाली से पहले संजय दत्त के घर पर हुई मीटिंग में इस बात को लेकर फैसला हो गया। इस मीटिंग में संजय के साथ निर्माता विधु विनोद चोपड़ा, निर्देशक राजकुमार हीरानी और फिल्म में संजय का किरदार निभा रहे रणबीर कपूर शामिल हुए।

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सूत्रों का कहना था कि अब तक संजय दत्त ही इस विचार से सहमत नहीं थे कि उनको परदे पर आना चाहिए। इस मीटिंग में वे इसके लिए मान गए हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी टीम इस पर काम कर रही है कि संजय का सीन कहां रखा जाए।

संभावना इस बात की है कि फिल्म के क्लाइमेक्स में परदे पर रणबीर कपूर और संजय दत्त पर एक साथ होंगे। कहा जा रहा है कि भूमि के बाक्स आफिस पर फ्लाप होने के बाद संजय दत्त ने अपनी फिल्म के लिए परदे पर आने का फैसला किया है। ये बायोपिक अगले साल 30 मार्च को रिलीज होगी। 

पद्मावती को लेकर स्मृति ईरानी से मिलेंगी दीपिका पादुकोण

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अपनी नई फिल्म ‘पद्मावती’ के कुछ स्थानों पर विरोध को देखते हुए दीपिका पादुकोण ने एक नई पहल करते हुए इस मामले में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी से मिलने का फैसला किया है। सूत्रों का कहना है कि दीपिका ने ईरानी से मुलाकात का समय मांगा है। ये मुलाकात दीवाली के बाद दिल्ली में संभव है।

सूत्रों का कहना है कि दीपिका मंत्री महोदया से मांग करेंगी कि वे सभी राज्यों को पत्र लिखकर उन सिनेमाघरों को सुरक्षा देने की बात करें, जहां उनकी ये फिल्म रिलीज होने जा रही है। कहा जाता है कि दीपिका उस घटना से बेहद आहत हैं, जहां सूरत में पद्मावती को लेकर बनाई एक रंगोली को नष्ट कर दिया गया। दीपिका ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया में इसे बेहूदगी करार दिया है।

कहा जाता है कि संजय लीला भंसाली भी ईरानी से मिलना चाहते थे, लेकिन वे अभी फिल्म के प्रोडक्शन में बिजी हैं, इसलिए दीपिका अकेली मुलाकात के लिए जाएंगी। दीपिका ने अपनी फिल्म को लेकर कहा कि हम आश्वस्त कर चुके है कि फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे विरोध का कोई औचित्य साबित हो सकता है। बिना फिल्म देखे ऐसे विरोध करना किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता।

कहा जा रहा है कि दीपिका ने स्मृति ईरानी को पत्र लिखा है और पत्र में ही फिल्म की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए मुलाकात के लिए वक्त मांगा गया है। वैसे कुछ दिनो पहले दिल्ली में एक समारोह में इस फिल्म को लेकर स्मृति ईरानी कह चुकी है कि फिल्म की रिलीज में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी और किसी को कानून को हाथ में लेने की इजाजत नहीं होगी।

अज्ञात कार चालक ने महिला को मारी टक्कर

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कल शाम स्थानीय व्यक्ति सुनील के द्वारा थाना क्लेमेंटटाउन पर सूचना दी गई कि गली नंबर 1, टर्नर रोड, क्लेमेंटटाउन के पास किसी अज्ञात कार चालक द्वारा एक महिला को टक्कर मार दी है, जो गंभीर रुप से घायल है|

सूचना पर थानाध्यक्ष क्लेमेंटाउन मय फोर्स के मौके पर पहुंचे एवं गंभीर रूप से घायल महिला सोना देवी, पत्नी श्री बल्लू, निवासी गली नंबर 1, टर्नर रोड, क्लेमनटाउन उम्र 68 वर्ष को पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से उपचार के लिये दून अस्पताल, देहरादून भेजा गया, जहां डॉक्टर द्वारा महिला को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने मृतिका का शव दून मोर्चरी में रखवाया। आज शव के पंचायत नामा/ पोस्टमार्टम की कार्यवाही की जा रही है| उक्त सम्बन्ध में तहरीर आने पर अग्रिम कार्यवाही/ अभियोग पंजीकृत किया जाएगा|

सड़क पर नशे में हुड़दंग करना पड़ा महंगा

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गुरुवार रात को सुभाषनगर, क्लेमनटाउन में रहने वाले आशीष ने थाने पर आकर शिकायत कि कुछ लड़के, जो पास के मकान में किराये पर रहते है, गुप्तास्टोर सुभाष नगर के पास शराब के नशे में ऊंची आवाज में गाना गा रहे है व शोरगुल कर रहे है, जिससे स्थानीय निवासियों को परेशानी हो रही है| सूचना पर चीता पुलिस मौके पर पहुंची और चारों व्यक्तियों को नशे में हुडदंग मचाकर न्यूसेंस फैलाने  के आरोप में गिरफ्तार किया। चारों व्यक्तियों का राजकीय दून अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। मेडिकल में चारों के शराब पीने की पुष्टि हुई|

हालाकि शुक्रवार सुबह सभी आरोपियों को थाने से ही ज़मानत मिल गई। गौरतलब है कि राजधानी देहरादून में सड़को और सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने के खिलाफ पुलिस ने अभियान छेड़ रखा है।

नदी में डूबने से युवक की मौत

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थाना डोईवाला को सूचना मिली कि सोन नदी पुल के पास एक युवक नदी में डूब गया है। सूचना पर थाना डोईवाला से पुलिस बल तथा गोताखोर की टीम तत्काल मौके पर पहुंची तथा उक्त युवक की तलाश हेतु राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। काफी मशक्कत के बाद गोताखोर टीम द्वारा उक्त युवक को नदी से बाहर निकाला गया, परंतु तब तक उसकी मृत्यु हो चुकी थी।

मृतक की पहचान आकाश कुमार,निवासी हर्रावाला थाना डोईवाला उम्र 20 वर्ष के रूप में हुई है। मृतक कुआवाला स्थित हौंङा शोरूम में कार्य करता था तथा आज अपने दोस्तों के साथ सोन नदी में नहाने आया था, जहाँ नहाने के दौरान पैर फिसल जाने के कारण वह नदी में डूब गया।

पुलिस द्वारा मृतक के परिजनों को सूचित किया गया है, जिनके आने के पश्चात पंचायतनामा व अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानमंत्री 26 को मसूरी में, नए प्रशासनिक अधिकारियों के बीच

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 माह में तीसरी बार उत्तराखंड के दौरे पर आने वाले हैं। वह अगले सप्ताह 26 अक्टूबर को मसूरी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करेंगे। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री 26 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे।

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मोदी अकादमी में 369 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों को सम्बोधित करेंगे। इन दिनों अकादमी में प्रशिक्षु आईएएस अफसरों का प्रशिक्षण चल रहा है।  बताया जा रहा है कि अधिकारियों के प्रशिक्षण की शुरूआत में ही उन्हें मसूरी आना था, किंतु कार्यक्रम नहीं बन पाया। तब मोदी की बजाय गृहमंत्री राजनाथ सिंह उक्त कार्यक्रम में पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री के तय कार्यक्रम के मुताबिक बताया जा रहा कि नरेन्द्र मोदी 26 अक्टूबर को अकादमी में पहुंचेंगे। कार्यक्रम के बाद वह वहीं रात्रि विश्राम करेंगे और 27 अक्टूबर को वापस दिल्ली लौटेंगे। गौरतलब है कि 6 माह के भीतर प्रधानमंत्री का यह उत्तराखंड में तीसरा और इस अक्टूबर माह में दूसरा दौरा होगा। इससे पूर्व, 20 अक्टूबर को उन्होंने केदारनाथ मंदिर जाकर दर्शन किए और इस तीर्थस्थल के पुर्ननिर्माण के लिए कई योजनाओं की घोषणा भी की।

संत समाज में शोक की लहर, ब्रह्मलीन हुए शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी

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ऋषिकेश, उत्तराखंड में संत समाज के लिए  एक बड़ा झटका लगा है ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य माधवाश्रम नहीं रहे। लंबे समय से बीमार चले रहे माधवाश्रम महाराज ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में अंतिम सांस ली। जिसके चलते पूरे संत समाज में शोक की लहर है गौरतलब है कि शंकराचार्य माधवाश्रम का उत्तराखंड से गहरा नाता रहा है उत्तराखंड में जन्म लेने के साथ ही पूरे देश विदेश में स्वामीजी के नाम जाना जाता है  वर्ष 1993 से ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन माधवाश्रम महाराज का चंडीगढ़ में निधन हो गए। महाराज लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके पार्थिव शरीर के देर शाम तक ऋषिकेश के दंडीबाड़ा आश्रम में लाया जाएगा। जहां उनके पार्थिव शरीर को  आम लोगों के दर्शनार्थ रखा जाएगा। इसके बाद विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके अनुयायियों का तीर्थनगरी पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है।

शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज उत्तराखंड के बद्रीनाथ तीर्थ के समीप जोशीमठ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य थे। यह आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों में से एक है। स्वामी माधव आश्रम उत्तराखण्ड क्षेत्र से शंकरारार्य के पद पर सुशोभित होने वाले पहले संन्यासी हैं। वे अखिल भारतीय धर्म संघ समेत विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के अघ्यक्ष एवं सदस्य भी रहे। स्वामी जी का जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अन्तर्गत बेंजी ग्राम में हुआ था। इनका मूल नाम केशवानन्द था। आरम्भिक विद्यालयी शिक्षा के पश्चात इन्होंने हरिद्वार, अम्बाला में सनातन धर्म संस्कृत कॉलेज, वृंदावन में बंशीवट में श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी के आश्रम एवं वाराणसीसमेतदेश के विभिन्न स्थानों पर वेदों एवं धर्मशास्त्रों की दीक्षा ली। विवाह के उपरान्त कुछ वर्ष पश्चात इन्होंने संन्यास ग्रहण किया। इनकी विद्वता को देखते हुए धर्म संघ के तत्वाधान में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी के आशीर्वाद से जगन्नाथ पुरीपीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ जी ने इन्हें ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य नियुक्त किया था। तब से वे इस परम्परा का बखूबी पालन कर रहे थे। स्वामी जी धर्मप्रचार एवं गौहत्या विरोधी विभिन्न आंदोलनों एवं संगठनों से जुड़े थे।

पलायन के चलते यहां टूटती है परम्पराएं

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अल्मोडा, सल्ट, अमूमन महिलाएं न तो हल लगाती हैं ना ही डोली उठाती हैं। मगर पलायन की मार झेल रहा तोलबुधानी गांव में यह परंपरा बार-बार टूटती है। मगर अफसोस जनता के नुमाइंदों को यह सब नहीं दिखता। यही कोई 300 परिवार। मगर सब पलायन से बेजार। पुरुष नौकरी के लिए बाहर तो युवा रोजगार की खातिर बड़े शहरों में। कहने को आठ-दस बुजुर्ग घरों में हैं लेकिन बुढ़ापा उन्हें ठीक से चलने नहीं देता। इन हालात में सुख हो या दुख, घर ही नहीं गांव की बड़ी जिम्मेदारी जिवट महिलाओं के कंधों पर ही रहती है। बेशक ग्रामीण विकास का कड़वा सच उनकी चुनौती को पहाड़ सरीखा बना देता है। मगर बुलंद हौसले की ताजा तस्वीर व्यवस्था को आइना भी दिखाते हैं।

यहां बात हो रही है सल्ट ब्लॉक के तोलबुधानी गांव का, जहां आधी आबादी का राज बुजुर्ग पुरुषों व नन्हे मुन्नों के लिए बड़ा सहारा है। शुभ कार्य हो अथवा दुख तकलीफ। मेहनतकश महिलाएं बगैर थके सिर पर बोझ व कंधों पर जिम्मेदारी के भार को बखूबी पछाड़ती हैं।

राज्य बने 17 वर्ष बीत चुके पर तोलबुधानी गांव में सड़क तो छोडि़ए शिक्षा व चिकित्सा की तक मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। वर्ष 2014 में शहीद हरि सिंह के नाम पर रतखाल से सड़क की घोषणा हुई भी। मगर इन चार सालों में महज सर्वे ही किया जा सका है। बिते दिनों की बात है बुजुर्ग महिला का स्वास्थ्य ज्यादा बिगड़ गया। उसकी जिंदगी बचाने के लिए महिलाएं जुटी। रोगी को डोली पर बैठाया। कंधे पर डोली उठा करीब छह किमी लंबी पगडंडी पार कर उसे अस्पताल पहुंचाया तो जान बची। बुनियादी सुविधाओं का अभाव कहें, या तंत्र की अनदेखी।

वर्ष 1995 तक तोलबुधानी ग्राम पंचायत के तीनों राजस्व तोक झीझाकोट, भैसोड़ा व तोलबुधानी में 300 परिवारों के डेढ़ हजार सदस्यों से पूरा गांव आबाद था। बेरोजगारी, सड़क, शिक्षा आदि के अभाव में साल दर साल परिवारों का पलायन होता रहा। फिलहाल यहां 110 परिवारों के 300 सदस्य रह गए हैं। इनमें करीब 200 महिलाएं हैं जो पुरुषार्थ की गाथा लिख रहीं।

प्रधान हेमा देवी के अनुसार, “करीब 50 बच्चे व किशोर जबकि शेष पुरुष हैं, इनमें अधिकांश बुजुर्ग। पुरुषों के हाथ का काम भी हम महिलाएं अरसे से करती आ रही हैं, यह मजबूरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी समझती हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अफसरों को भी पहाड़ की पीड़ा समझनी चाहिए। चार साल से सड़क नहीं बनी। लोनिवि के अधिकारियों से कई बार कह चुके लेकिन वन भूमि का रोड़ा बता पल्ला झाड़ लेते हैं। रोगियों को डोली पर अस्पताल तक ले जाना, महिलाओं की नियति बन चुका है। अपने लिए हम बच्चों की तरक्की नहीं रोक सकते, रोजगार के लिए बाहर निकलना ही पड़ेगा।”

ऋषिकेश में धूमधाम से मनाई गयी गोवर्धन पूजा आश्रमों में अन्नकूट उत्सव की धूम

भले ही देश की राजनीती में गौ को लेकर नए नए विवाद सामने आये हो लेकिन हिन्दू संस्कृति में गोवर्धन पूजा और अन्न कूट पर्व का विशेष महत्व है, आज के दिन गंगा तट पर हर आश्रम और मंदिर अन्न कूट पर्व मन रहे जिसमे भगवाल कृष्ण को 56 भोग लगाये जा रहे है। ऋषीकेश स्तिथ जयराम आश्रम में बड़ी धूमधाम से गोवेर्धन पूजा का आयोजन किया गया ,जिस में भगवान कृष्ण को 56 भोग का प्रसाद चडाया गया , भगवान कृष्ण ने इन्द्र का घमंड चूर करने के लीये गोवेर्धन पर्वत को अपनी तर्ज़नी उगली पर  उठा लिया और गो पूजा का सन्देश दीया तब से अब तक दीपावली के अगले दिन इस पूजा को बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। ऋषिकेश के प्रमुख आस्रमो में गो पूजा और भगवान कृष्ण को ५६ भोग लगाये जा रहे है ,देश की राजनीती में गाय को लेकर लगातार नए विवाद देखने को मिले ,लेकिन भारतीय परम्परा में गौ का स्थान सर्वोपरि यही कारण है आज का दिन गौ के लिए विशेष महत्व रखता है। 

केदारपुरी में होगा भव्य व दिव्य माहौलः पीएम

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नई केदारपुरी भव्य व दिव्य होगी। गुरुवार को बाबा केदार के दर्शनों के लिए केदारनाथ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 150 करोड़ रुपये की पांच परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में प्राकृतिक संपदा के विकास, पर्यटन की संभावनाओं और राज्य के विकास के लिए तमाम घोषणाएं की। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार की पीठ भी थपथपाई और राज्य के विकास में केंद्र से सहयोग का वादा दोहराया।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर स्थानीय लोगों को गढ़वाली में शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी दिल्ली से सेना के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यपाल डॉ. केके पॉल, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सतपाल महाराज व वरिष्ठ भाजपा नेता तीरथ सिंह रावत ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद वे एनआई-17 से केदारनाथ के लिए रवाना हो गए। केदारनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
प्रधानमंत्री ने स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वे पहले भी यहां आए थे और लंबे समय तक रहे, लेकिन शायद बाबा की इच्छा नहीं थी कि वे यहां रहें तो बाबा ने वापस भेज दिया। बाबा की इच्छा थी कि वे 125 करोड़ बाबाओं की सेवा करें। मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जनसेवा ही प्रभु सेवा है, इसलिए एक बार फिर बाबा के आशीर्वाद से वे देश की 125 करोड़ लोगों की आबादी की सेवा करने का संकल्प लेकर निकले हैं। उन्होंने कहा कि 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने पर देश का हर नागरिक हर तरह से आजाद हो, ये संकल्प है उनका। इस मौके पर उन्होंने प्राकृतिक आपदा में मारे गए देशभर के हजारों लोगों को श्रर्द्धांजलि दी।
केदारनाथ में आपदा के वक्त को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्होंने हरसंभव मदद की। अच्छा किया या बुरा यह तो इतिहास तय करेगा, लेकिन सेवा करने में सकोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि उस वक्त राज्य की सरकार से गुजारिश थी कि गुजरात सरकार केदारनाथ पुनर्निर्माण करेगी, सबने सहमति भी दी। मीडिया से भी यह समाचार फैला, लेकिन इसके बाद केंद्र सरकार में तूफान मच गया औऱ एक घंटे में ही राज्य सरकार ने घोषणा कर दी कि गुजरात से मदद नहीं ली जाएगी। लेकिन शायद बाबा ने यह तय किया था कि बाबा का यह काम इसी बेटे के हाथ से होगा। राज्य में भाजपा की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनी और उसी वक्त यह संकल्प ले लिया था कि बाबा केदार में भव्य पुनर्निर्माण किया जाएगा। आज इसी संकल्प के तहत पांच परियोजनाओं का शिलान्यास किया है। निर्धारित समय में ये निर्माण पूरे किए जाएंगे। श्रद्धालुओं और संतों के लिए ठोस व्यवस्था की जाएगी। धार्मिक वास्तु और प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित निर्माण किए जाएंगे।
इन योजनाओं का किया शिलान्यास
पांच परियोजनाओं में गौरीकुंड से केदारनाथ तक मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। यहां आरसीसी से निर्माण होगा और आधुनिक सुविधाओं से मार्ग लैस होगा। मार्ग पर हर प्रहर के अनुसार भक्ति संगीत प्रसारित होगा। साथ ही मंदाकिनी के तटों का निर्माण, यात्रियों के घाटों पर बैठने की व्यवस्था, संपर्क मार्गों के निर्माण, सरस्वती नदी के तटों की सुरक्षा और घाटों का निर्माण किया जाएगा। आपदा में ध्वस्त हुए आदि शंकराचार्य की समाधिस्थल का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसके लिए सर्वोच्च वास्तुविद् आमंत्रित किए जा रहे हैं। इन तमाम योजनाओं में सरकार धन की कमी नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए अन्य राज्यों की सरकारों, उद्योग घरानों को भी आमंत्रित किया कि वे आगे आएं और आर्थिक मदद करें। धन होगा तो पर्यावरण का ख्याल भी रखा जाएगा और आधुनिकता के साथ मूल आत्मा को भी बनाए रखा।
सुरक्षित यात्रा के संदेश से मिला लाभ
मोदी ने कहा कि कपाट खुलने के वक्त वे इसलिए यहां आए कि देश के लोगों को संदेश दे सकूं कि बाबा केदार की यात्रा सुरक्षित है। नजीता सामने है कि चार लाख लोगों ने इस साल दर्शन किए और आगामी साल में यह आंकड़ा 10 लाख की संख्या पार करेगा। उहोंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है, वीरभूमि है, यहां आने से कोई भी खुद को रोक नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल औऱ जम्मू में हिमालय की अनुभूति अलग है, लेकिन उत्तराखंड में हिमालय दिव्य अनुभूति देता है। उत्तराखंड साहसिक खेल, आयुर्वेद, पर्यटन, धर्म, पर्यावरण समेत तमाम क्षेत्रों में अलग स्थान रखता है। प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए सरकार ठोस नीति के साथ काम कर रही है। सिक्किम का उदाहरण दिया कि किस तरह आर्गेनिक फार्मिंग के क्षेत्र में खुद को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड 2022 तक खुद को आर्गेनिक फार्मिंग के क्षेत्र में स्थापित करे, केंद्र सरकार साथ है। रासायनिक खादों का इस्तेमाल बंद करें। पीएम ने कहा कि सरकार की मंशा है कि पहाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के काम आए। उन्होंने कहा कि पहाड़ के पानी का जलविद्युत परियोजनाओं, साहसिक खेलों, कृषि में इस्तेमाल किया जाएगा और जवानी यहीं रहकर और लोगों को रोजगार देगी।
राज्य सरकार की पीठ थपथपाई
मोदी ने त्रिवेंद्र सरकार की पीठ भी थपथपाई। अमित शाह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कम समय में राज्य सरकार बड़े फैसलों काे सराहा। उन्होंने कहा कि सरकार सही दिशा में काम कर रही है। सरकार ने राज्य के विकास को नई गति दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में खुले में शौच से मुक्त हुआ राज्य, शहरी क्षेत्र भी जल्द खुले में शौच से मुक्त होगा। किसानों के लिए, युवाओं के लिए, महिलाओं के लिए और भ्रष्टाचार पर रोक के लिए सरकार ने कड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का सबसे चहेता पर्यटनस्थल बने। एडवेंचर के लिए, प्राकृतिक शांति के लिए सबसे पहली पसंद बने, लोगी की दीपावली के इस मौके पर यह संकल्प लेते हैं। पर्यावरण की रक्षा जरूरी है। अगर हम प्रकृति की रक्षा करेंगे तो प्रकृति हमारी रक्षा करेगी।
प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना से मिलेगी बिजली
केदारनाथ में शिलान्यास के मौके पर पीएम ने कहा कि उज्जवला योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रदूषण रहित रसोई मुहैया कराने के बाद देश के चार करोड़ परिवारों को बिजली मुहैया कराने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के तहत चार करोड़ परिवारों को बिजली मुहैया कराई जाएगी।