Page 425

‘नशे के विरूद्ध जागरूकता’ निकाली गयी चीता मोबाईल की रैली

0

उत्तराखण्ड के वर्तमान एवं भविष्य को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिये उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा लिये गये अपने उद्देश्य पर आगे बढ़ते हुए उत्तराखण्ड में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति एवं प्रचलन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिये, अक्टूबर में नशें के विरूद्ध चलाये जा रहे अपने अभियान के अन्तर्गत जनपद देहरादून में पुलिस ने मोटर साईकिल रैली का आयोजन किया।

cheetah team

जनपद के थानों की लगभग 50 पुरूष अौर महिला चीता मोबाईल ने प्रतिभाग किया। मोटर साईकिल रैली का उद्देश्य शहर में विशेषकर युवा वर्ग में नशे के विरूद्ध जनजागरूकता उत्पन्न करना था। मोटर साईकिल रैली सुबह रिजर्व पुलिस लाईन से शुरु होकर बन्नू स्कूल से रेसकोर्स से एमकेपी से दर्शनलाल चैक से राजपुर रोड सचिवालय से वापस पुनः पुलिस लाईन पर समाप्त हुई।

नशे के विरूद्ध जागरूकता के लिये निकाली गयी मोटर साईकिल रैली के लिये श्रीमती निवेदिता कुकरेती वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, श्री धीरेन्द्र गुंज्याल पुलिस अधीक्षक यातायात तथा श्रीमती सरिता डोभाल, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण से मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश प्राप्त करते हुए श्री राकेश देवली, क्षेत्राधिकारी यातायात ने अपने पर्यवेक्षण में निरीक्षक यातायात श्री राजपाल सिंह रावत व प्रतिसार निरीक्षक सुरेन्द्र प्रसाद बलूनी के सहयोग से मोटर साईकिल रैली का सकुशल सम्पन्न करवाया गया।

पीएम के दौरे के चलते मसूरी में ख़ुफ़िया विभाग सक्रिय

0

प्रधानमंत्री के मसूरी आगमन के दृष्टिगत निदेशानुसार आज एल.आई.यू यूनिट मसूरी व विदेश शाखा देहरादून ने गांधी चौक मसूरी से केम्पटी रोड में होटल शिलटन, क्लासिक, रतन, जीत, विष्णु पैलेस, देवलोक, द्वापर, लाइब्रेरी प्रेसिडेंसी, क्वीन प्लाज़ा, मसूरी रेसीडेंसी, शालीमार, सिल्वर रॉक, मधुबन हीलैंड आदि होटलों को चैक किया गया।

verification drive

सभी होटल प्रबंधको को सतर्क रहने तथा किसी व्यक्ति के संदिग्द प्रतीत होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस व एल.आई.यू को सूचित करने को निर्देशित किया गया। होटल में ठहरे बाहरी व्यक्तियों की आई.डी चेक करी गई व सत्यापन के लिये सम्बन्धित राज्य के जनपदों को प्रेषित की जा रही है। चेकिंग के दौरान किसी संदिग्द व्यक्तियों का होना प्रकाश में नही आया।

6 लोगों की टीम ने सुबह 11:00 से 4:00 बजे शाम तक गांधी चौक से केम्पटी रोड होते हुए अकादमी गेट तक लगी चाय, सब्जी ठेली, नाई, रेस्टुरेंट आदि में कार्यरत बाहरी व्यक्तियों व आई.एस अकादमी परिसर में काम कर रहें मजदूरों, तिब्बती होम फाउंडेशन, पोलो ग्राउंड में कार्यरत मजदूरों तथा एल बी एस एकेडमी गेट, पोलो ग्राउंड के अास पास दुकानदार/किराएदारों का भौतिक सत्यापन भी किया।

तो गूगल ने मनाया उत्तराखंड के इस महान पर्वतारोही का जन्मदिन

0

शनिवार को गूगल ने नैन सिंह रावत का 187वां जन्मदिन मनाया। इसके लिये खासतौर पर गूगल ने रावत को समर्पित एक डूडल बनाया। नैन सिंह रावत 19 वीं सदी के पर्वतारोही थे और ब्रिटिश सरकार के लिये हिमालय पर्वतों का मानचित्र बनाने वाले पहले व्यक्ति भी थे। उन्होने सबसे पहले तिब्बत का सर्वे कर तिब्बति राजधानी लाहसा की सटीक लोकेशन और ऊंचाी नापी थी।

गूगल का ये डूडल हरी और दीप्ति पानिकर ने बनाया है, इसमें एक पर्वातारोही (जो कि रावत को दर्शाता है) का प्रतिबिंब दिखाी देता है। इसके साथ ही चित्र में एक ट्राई पोड भी है जोकि रावत के काम को दिखाता है।

download (1)

 

रावत का जन्म 1830 में मिलम जो उत्तराखंड के जोहर घाटी में है हुआ था।रावत ने कम उम्र में तिब्बत जाकर अपने पिता के साथ लोकल भाषा और तौर तरीके सीख लिये जो आने वाले समय में उनके खासा काम आया।

19वीं शताब्दी में युरोपियन खोजकर्ताओं के सेंट्रस एशियन इलाके में कोज करने के सिलसिले शुरु हुए। इसके लिये उन्होने उन स्थानीय लोगों की मदद लेनी शुरू की जो इन दूर दराज के इलाकों की भाषा और तौर तरीकों से वाकिफ थे। रावत इन्ही चुनिंदा लोगों में से एक थे। स्थानीय लोगों के बीच जाने के लिये रावत भेष बदल कर कुमाऊं से लाहसा, काठमांडू जैसी जगहों तक पैदल गये। रावत के बारे में कहा जाता है कि वो एक मील 2000 कदम में पूरी कर लेते थो और मनको की माला से इसे नापते थे।

रावत का पहला दौरा जर्मन दल के साथ 1855-1857 के बीच रहा। उन्हेोने मानसरोवर और राकस ताल तक का सफर तय किया। इसके बाद आगेगारतोक और लद्दाख तक भी गये। इसके बाद रावत ने देहरादून के सर्वे दफ्तर से अपने काम आने वाली सर्वे की तकनीकी जानकारी हासिल की। कहा जाता है कि रावत का सबसे महत्वपूर्ण सफर 1873-1875 के बीच रहा जिसमें वो लेह से लाहसा होते हुए असम पहुंचे।

अपने जीवन काल में रावत को कई पुरसकारों से सम्मानित किया गया।जिनमें रॉयल जियोग्राफिक सोस्याइटी से मिले कई सम्मान शामिल हैं। जून 2004 में रावत की याद में एक पोस्ट स्टैंप भी जारी किया गया। निसंदेह रावत उत्तराखंड ही नही देश की ऐतिहासिक धरोहर का एक अमिट हिस्सा हैं।

 

खत्म हुई 2017 चारधाम यात्रा, सरकार ने यात्रियों की संख्या पर जताई खुशी

0

हिमालई इलाकों में सर्दियों के आगमन के साथ ही इस साल की उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा भी समाप्ति की ओर आ गई है। इस याशत्रा में सालाना लाकों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मिलकर चार धाम बनाते हैं।इस यात्रा को पूरा करने के लिये लाखों की तादा में यात्री यमुनोत्री से शुरू कर गंगोत्री और केदारनाथ होते हुए बद्रीनाथ में अपनी यात्रा को खत्म करते हैं।

 इन सब के बीच कपाट बंद होने में चमोली ज़िले में मौजूद सिखों के घर्म स्थल हेंमकुड साहिब का रहा। करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ये जगह सिकों के लिये अति धार्मिकमहत्व की है। हेंमकुड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को शबद कीरितन के बीच बंद हुए।

इसके बाद शीतकाल के लिये गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद हुए। इस साल अप्रेल में खुले कपाट में गंगोत्री धाम के कपाट 20 अक्टूबर और यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट 21 अक्टूबर को बंद हुए।

विजयदश्मी के दिन बदर्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख निकाली जाती है। इस साल बद्रीनाथ के कपाट 19 नवंबर शाम 7:28 पर बंद होंगे। 

इसी के साथ मध्यमहेशवर और तुंगनाथ धाम के कपाट भी 22 अक्टूबर और 27 अक्टूबर को होंगे। इसके साथ ही 2017 की चार धाम यात्रा  यात्रा का समापन भी हो जायेगा।  गौरतलब है कि 2013 में आी केदारनाथ आपदा के बाद से ही चारधाम यात्रा के पुनर्जन्म को लेकर तमाम कयास लगाये जाते रहे हैं। ये यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिये भी खासी महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में राज्य के लिये ये ज़रूरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें हिस्सा लें। 

तो जिंदल ग्रुप करेगा केदारपुरी का जीर्णोधार

0

केदारपुरी और आसपास के इलाके में होने वाले कई नये निर्माण कार्यों को सज्जन जिंदल समूह की कंपनी जिंदल स्टील वर्कस (जेएसडब्लू) करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे से केदारनाथ और आसपास के इलाके में होने वाले पुनर्निरमाण कामों को गति मिलने की उम्मीद है। अपने भाषण में भी प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत के दिग्गजों से आगे आकर देशभर और खासतौर पर केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों को अपनाने और वहां सुविघाओं के निर्माण में योगदान करने की अपील की।

इस बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कंपनी के चेयरमैन और एमडी सज्जन जिंदल ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा कि ये उनका और उनकी कंपनी का सौभाग्य है कि भगवान केदारनाथ की सेवा करने का मौका उन्हें मिला। इस काम के तहत  कंपनी सरस्वती नदी पर बने घाटों, आदि शंक्राचार्य की कुटिया और केदारपुरी में रिहाईशी मकानों का निर्माण करेगी।

गौरतलब है कि 2013 में आी आपदा के बाद से ही केदारनाथ और आसपास के इलाके में कई पुन: निर्माण कार्य हो रहे हैं। राज्य औऱ केंद्र ,सरकार के साथ साथ की अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों जैसे की विश्व बैंक औख एशियन डेवेलेपमेंट बैंक ने धन मुहैया कराया है। केंद्र में और राज्य में बीजेपी सरकार आने के बाद से इन कामों में तेज़ी आने की उम्मीद की जा रही है।

अवैध चरस के साथ युवक गिरफ्तार

0

चौकी धर्मावाला में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था, जिस दौरान मोटर साईकिल चालक पर शक होने पर रोका गया तो चालक वापस भागने का प्रयास करने लगा।

पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए चालक को पकड़ा,चालक ने अपना नाम सत्तार, पुत्र मेहँदी, निवासी मिर्जापुर पोल थाना मिर्जापुर सहारनपुर उ.प्र. बताया।

इसकी तलाशी में इसकी पैंट की जेब से 185 ग्राम अवैध चरस बरामद हुई जिसे नियमानुसार गिरफ्तार कर आवश्यक कार्यवाही की गयी है।उक्त सम्बन्ध में चौकी धर्मावाला में 8/20/60एनङीपीएस एक्ट का अभियोग पंजीकृत किया गया है। अभियुक्त को अाज न्यायालय में पेश किया जायेगा।

मुठभेड़ में पकड़े गए बदमाशों ने दिया कई घटनाओं को अंजामः एसएसपी

0

मंगलौर में मुठभेड़ के दौरान पकड़े गए बदमाशों ने जिले में पिछले दिनों रोड होल्डअप की कई घटनाओं को अंजाम दिया था।
कोतवाली सिविल लाइन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए एसएसपी हरिद्वार कृष्ण कुमार वीके ने बताया कोतवाली मंगलौर ने पुलिस कंट्रोल रूम रुड़की को सूचना दी थी कि देवबन्द-मंगलौर रोड पर रजवाहे की पुलिया पर कुछ बदमाश सडक पर पेड़ डालकर लूटपाट की घटना को अंजाम दे रहे हैं। बदमाशों ने शहजाद उर्फ सद्दू पुत्र लियाकत निवासी लंढौरा को अपना शिकार बनाया है। पुलिस को जानकारी मिली कि बदमाश घटना को अंजाम देकर खेत में छुप हैं। सूचना पर मय फोर्स पहुंचे कोतवाली प्रभारी निरीक्षक गिरीश चंद शर्मा और सूर्य भूषण ने और थाना प्रभारी झबरेड़ा सुखपाल सिंह ने बादमाशों की घेराबंदी की। इस दौरान मुठभेड़ में दरोगा रविंद्र कुमार गोली लगने से गंभीर घायल हो गए। वहीं पुलिस की गई फायरिंग में एक बदमाश याकूब निवासी रहकड़ा थाना भोपा जिला मुजफ्फरनगर भी घायल हुआ। एसएसपी ने बताया कि इन्हीं बदमाशों ने 19 अक्टूबर को झबरेड़ा थाना क्षेत्र के टिकोला गांव में कार सवार महिला से जेवर आदि लूटना, 13 सितंबर को लखनोता चौराहे के पास दो कारों से व्यक्तियों से लूट की घटना को अंजाम देना और 14 अक्टूबर को बहादराबाद से इब्राहिमपुर रोड से मोटरसाइकिल सवार मोबाइल लूटा व विरोध करने पर उसकी हत्या करना स्वीकार किया है। एसएसपी ने बताया कि इसके अलावा बदमाशों ने बहादराबाद में कार सवार लोगों से भी लूटपाट की घटना को अंजाम दिया था।

roorkee
कैसे देते थे घटना को अंजाम
ये बदमाश सड़क पर पेड़ काटकर डालते थे और वाहनों को रोककर तमंचे के बल पर लूटपाट करते थे। पीड़ित द्वारा विरोध करने पर मारपीट से लेकर जान से मारने से भी पीछे नही हटते थे। पकड़े गए बादमाशों में याकूब उर्फ राशिद मूल निवासी रहकड़ा थाना भोपा जिला मुजफ्फरनगर, सतवीर उर्फ शाहबाज पुत्र जनेश्वर सुभाष नगर थाना नई मंडी मुजफ्फरनगर, राशिद उर्फ महबूब पुत्र सद्दीक सबीर निवासी मखियाली खुर्द निवासी नई मंडी जिला मुजफ्फरनगर है। बदमाशों के पास से दो तमंचे 12 बोर के मय कारतूस, एक तमंचा 315 बोर मय कारतूस, एक मोबाइल, 2700 नकद, वोटर कार्ड, आधार कार्ड समेत विभिन्न वारदातों में लूटा गया सामान बरामद हुआ है।

शुरू हुई केदारनाथ में शिलापटों पर नामों की राजनीति

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदार पुरी दौरे को जहां सरकार और बीजेपी के नेता राज्य में विकास के डबल इंजन से जोड़ कर देख रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस दौरे को राजनैतिक शिष्टाचार की हत्या करार दे दिया है। दरअसल केदारनाथ विधानसभा सीट कांग्रेस के पास है और यहां से पहली बार विधायक बने मनोज रावत कांग्रेस की नुमाइंदगी कर रहे हैं। मोदी ने केदारनाथ में कई विकास कार्यों की आधारशीला रखी। कांग्रेस का आरोप है कि जानबूझकर प्रोटोकॉल को दरकिनारकर इन शिलापटों पर स्थानीय विधायक का नाम नहीं लिखा गया। इस बारे में न्यूजपोस्ट से बात करतेहुए मनोज रावत ने कहा कि “जब मैने इस बारे में डीएम से पूछा तो उन्होने कहा कि ये नाम सीधे पीएमओ से फाइनल होकर आये हैं। लेकिन ये काम तो राज्य सरकार का होता है। बीजेपी घमंड में राजनीतिक शिष्टाचार को भुला बैठी है और इसलिये मैंने भी कार्यक्रम में एक आम नागरिक की ही तरह हिस्सा लिया “। दरअसल प्रधानमंत्री के पिछले केदारनाथ दौरे के दौरान भी मनोज रावत ने सरकार और प्रशासन पर उन्हें आधिकारिक न्यौता न देने का आरोप लगाया था। इस बार स्थानीय विधायक को न्यौता तो मिला लेकिन शिलापट में विधायक के नाम को जगह नहीं मिल पाई।

वहीं बीजीपी इस मामले में कांग्रेस पार्टी और उनके विधायक पर बिना मतलब की राजनीति करने का आरोप लगा रही है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि कांग्रेस और उसके नेता केदारनाथ में हो रहे विकास के कामों में दिलचस्पी नहीं रखते बल्कि वहां बीजेपी द्वारा किया जा रहे कामों  को अपने नाम कैसे करा जाये इसमे रुचि रखते हैं।

बहरहाल इस पूरे मामले में ये बाततो तय है कि शिलापट पर किन लोगों के नाम आये इसमें सत्तारूढ़ दल की तरफ से खास ध्यान दिया गया है। लेकिन ये बात भी अपनी जगह है कि कांग्रेस को भी नामों पर ध्यान न देकर काम पर ध्यान देना चाहिये ताकि उनके द्वारा किेये गये काम किसी शिलापट के मोहताज न रहे।

बंद कमरे में बैठकर मौत का कर दिया सौदा

0
काशीपुर, एेसा पहली बार नहीं कि जब डाक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा हो और हंगामा ना हुआ हो, मगर हर बार की तरह ही इस बार भी एेसा ही हुआ, डाक्टरों की जमात ने फिर एक जान के बदले अपनी पेशकश रखी और शहर के मुअज्जिशों ने बैठ कर फैसला कर दिया। काशीपुर में एेसा कई बार हो चुका है, इससे ना डाक्टरों की जमात को फर्क पडा और ना आम जनता को कभी न्याय ही मिल पाया। मसलन कानून की दहलीज पर कभी एसे मामले पहुंच ही नहीं पाये और समाज की अलग अलग जमात ने मसले मौके पर निपटा दिये, इससे ना किसी को सबक मिला और ना ही न्याय।
इलाज के दौरान गर्भवती की मौत पर परिजनों ने मेहरोत्रा नर्सिग होम में तोड़फोड़ कर डाली। उन्होंने चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा काटा। चिकित्सक की गिरफ्तारी न होने तक शव को न उठाने की मांग पर परिजन अड़े रहे। इस पर अस्पातल स्वामी के घर पर मामले को सुलझाने का प्रयास किया गया, मगर मामला नहीं सुलझा।
मोहल्ला काजीबाग निवासी जीनत पत्नी मोहम्मद इस्लाम के पेट में गुरुवार दोपहर दर्द की शिकायत हुई। जीनत करीब आठ माह की गर्भवती थी, इस्लाम ने रामनगर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर महिला चिकित्सक न होने पर चिकित्सकों ने महिला को रेफर कर दिया। परिजन उसे डॉक्टर लाइन स्थित मेहरोत्रा नर्सिग होम में उसी दिन शाम करीब पांच बजे भर्ती कराया। महिला की शुक्रवार को करीब 11 बजे मौत हो गई। इस पर परिजन उग्र हो गए। उन्होंने अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। गेट के शीशे तोड़ दिए और कुछ सामान इधर-उधर फेंक दिए। उन्होंने चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा काटना शुरू कर दिया और चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ गए।
सूचना पर मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, मगर परिजन मानने को राजी नहीं हुए। इस बीच शहर के कुछ लोग अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने वार्ता के लिए चिकित्सक को मौके पर ही बुलाने की मांग की। बावजूद अस्पताल स्वामी डॉ. रीता मेहरोत्रा मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद लोग परिजन के साथ मोहल्ला खत्रियान निवासी डॉ. रीता मेहरोत्रा के घर पहुंचे। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज को देखने महिला चिकित्सक नहीं आई। यदि आतीं तो यह दिन देखने को नहीं मिलता। इस पर डॉ. रीता मेहरोत्रा ने कहा कि मरीज का हीमोग्लोबिन 7.2 था। गुरुवार रात आठ बजे मरीज को देखा तो सब ठीक था। शुक्रवार की सुबह सात बजे मरीज को देखने गए तो चेकअप के दौरान अचानक महिला की मौत हो गई।

आजादी के सत्तर सालों से अंधेरे में कटती है यहां दीपावली

0

पिथौरागढ़- भारत-चीन सीमा पर साल भर आबाद रहने वाले बुई और पातों गांवों में आजादी के सत्तर साल बाद इस दिवाली पर बिजली तो पहुंची लेकिन घर रोशन नहीं हो सके। बिजली का पहुंचने का फायदा दोनों गांवों के 120 में मात्र दो परिवारों को मिल सका है। इस दीपावली पर भी बिजली से अपने घर रोशन करने का ग्रामीणों का सपना पूरा नहीं हो सका।

मुनस्यारी तहसील मुख्यालय से 17 किमी की दूरी पर स्थित बुई और पातों गांव आज तक बिजली से वंचित हैं। इन गांवों के लिए बिजली आने की बात तो कई वर्षो से चलती आ रही थी परंतु इस बार दिवाली से पूर्व गांव तक बिजली पहुंच गई। बिजली पहुंचने से इस दुर्गम और दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों में खुशी फैल गई। इस बार की दीपावली बिजली के प्रकाश में मनाने को लेकर ग्रामीण उत्साहित थे। घरों को रोशन करने के लिए बाजार से बिजली की माला तक खरीद कर ले गए थे। ग्रामीणों की हसरत पर ठेकेदार ने पानी फेर दिया।

गांव तक बिजली तो पहुंचा दी। शिनाख्त के रूप में गांव के पूर्व प्रधान और सरपंच के घर तक बिजली पहुंचा कर उन्हें संयोजन दिए। इसके बाद सामान समेट कर चल दिया। ग्रामीण दीपावली की सायं तक अपने घरों के भी रोशन होने की आस में बैठे रहे। ठेकेदार के कार्य को इतिश्री कर चले जाने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों में रोष फैल गया। ग्रामीणों ने इसे अपने साथ छल बताया है।

पातों गांव में 70 और बुई में 50 परिवार रहते हैं। बुई और पातों के बीच में दो तीन परिवार रहते हैं। ठेकेदार ने दोनों गांवों के बीच में रहने वाले दो परिवारों को बिजली दी है। वहीं ओखली नामक स्थान पर खराब ट्रांसफार्मर लगाया है। ग्रामीण अब इस बात को लेकर संशय में हैं कि गांव को कागजों में विद्युतीकृत दर्शा कर सीमांत के अन्य गांवों की तरह ही बिजली से वंचित कर दिया जाएगा। बुई और पातों के ग्रामीण दो गांवों को जिंदा रखे हैं। बुई और पातों के साथ-साथ विश्व प्रसिद्ध रालम ग्लेशियर के निकट स्थित रालम गांव को आबाद किए हैं। दुर्भाग्य यह है कि सीमा के इन अवैतनिक प्रहरियों को आज तक बिजली नहीं मिल सकी है। बुई व पातों गांवों में जहां ग्रामीण परंपरागत खेती के साथ आलू, राजमा का उत्पादन करते हैं वहीं लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित रालम गांव में जड़ी-बूटी, राजमा की खेती करते हैं। अलबत्ता साल के छह माह हिमाच्छादित रालम गांव तक नहीं जा पाते हैं। गांव के निवासी एवं भाजपा जिला महामंत्री मनोहर दरियाल ने बिजली के नाम पर जो खेल हुआ है उसे ग्रामीणों के साथ छल बताया है। इस मामले की शिकायत सीएम से करते हुए दोनों गांवों को बिजली संयोजन देने की मांग की है। साथ ही ठेकेदार और इसमें शामिल विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।