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हाईकोर्ट की सम्पत्ति पर कौन कर रहा सेंधमारी

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हाईकोर्ट की सम्पत्ति में ही हर बार क्यो होती है चोरों की सेंधमारी? और क्या वजह है कि पुलिस को नहीं लगती भनक? जही हां, काशीपुर शुगर मिल की सम्पत्ति फिलहाल हाईकोर्ट के अधीन है। कई बार इस शुगर मिल में बडे-बडे गिरोह लाखों की चोरी की वारदात को अंजाम दे चुके हैं, यही नहीं पुलिस पर भी फायरिंग हो चुकि है बावजूद इसके जिन पुलिस कर्मियों को सुरक्षा पर तैनात किया गया है वहीं हाईकोर्ट की सम्पत्ति पर सेंधमारी कराने में जुटे हैं।

मामला काशीपुर की आईटीआई थाना क्षेत्र का है जहां पुलिस कर्मियों की मिली भगत से हाईकोर्ट की सम्पत्ति के अंदर अवैध खनन सामग्री की चोरी की जा रही थी।  हाईकोर्ट की सम्पत्ति पर कौन कर रहा दखल और कौन है जो हाईकोर्ट की प्रोपर्टी में चला रहा मनमानी? ये सवाल जहन में तब उठते हैं खनन सामग्री हाईकोर्ट की प्रोपर्टी से उठाई जाती है और वो भी बिना अनुमति के पुलिस की मिलीभगत से।

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जी हां, कई सालों से काशीपुर की डीएसएम शुगर मिल बंद पडी है, जिसका करोडों का मजदूरों और किसानों का बकाया भुगतान नहीं हो पाया, जिसके चलते लम्बी प्रशासनिक कार्यवाही के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट में  मिल की सम्पत्ती को जब्त कर लिया और सम्पत्ति के निस्तारण ना होने तक इसमें किसी की भी दखल अंदाजी ना हो सकी हिदायद देते हुए पुलिस की सुरक्षा में रखा गया है। लेकिन जिन पुलिस कर्मियों की सुरक्षा में हाईकोर्ट की सम्पत्ति है उन्ही के द्वारा वहीं खनन कराया जा रहा है, यही नहीं अवैध रुप से पुलिस द्वारा सीज वाहन भी इसी प्रोपर्टी पर खडे किये गये जाते हैं जिसका फायदा पुलिस उठाती है, और खनन सामग्री को चोरी छुपे ही पार लगा देती है।

मंगलवार को ही सुबह एेसा मामला देखने को मिला जब अवैध खनन के वाहन का रेता छोटे वाहन द्वारा उठाया जा रहा था तो पुछे जाने पर कोई जवाब नहीं मिला। वहीं हाईकोर्ट की प्रोपर्टी की सुरक्षा में तैनात एक जवान की देख रेख में उठ रहे खनन सामग्री के होने बात सामने आयी, जबकि बिना अनुमति के हाईकोर्ट की सम्पत्ती से कोई भी सामान नहीं उठाया जा सकता था, वहीं उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद कोतवाल चंचल शर्मा ने बताया कि, “मामला संज्ञान में आते ही कार्यवाही के लिए एसएसपी को पत्र लिखा गया है और जिनकी इस मामले में संलिप्ता पायी जाएगी उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।”

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित मसूरी कार्यक्रम के अवसर पर पुलिस बल की ब्रीफिंग

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित एल.बी.एस.एन.ए.ए मसूरी, में भ्रमण कार्यक्रम के अवसर पर पुलिस लाइन देहरादून में अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार की अध्यक्षता में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने  ड्यूटी में नियुक्त किए गए समस्त पुलिस बल की ब्रीफिंग की गई।

ब्रीफिंग के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखंड, पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना, पुलिस उप महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र, जिलाधिकारी देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा ड्यूटी में लगने वाले समस्त पुलिस बल को निर्देशित किया, कि वी.वी.आई.पी ड्यूटी के दौरान निर्धारित समय से 3 घण्टा पूर्व अपने ड्यूटी स्थल पर पहुंचकर अपनी ड्यूटी के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर लें तथा ड्यूटी स्थल व उसके आस पास के स्थान को भली-भांति चैक कर लिया जाए।

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जिन कर्मचारियो की डियूटी रात में है उन्हे वूलन कपडे साथ लाने को कहा गया, कोई भी संदिग्ध वस्तु मिलने पर उसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारी गणों को दी जाए। वी.वी.आई.पी से मिलने वाले व्यक्तियों पर भी सुरक्षा की दृष्टि से कड़ी नजर रखी जाए एवं पूर्व में नामित व्यक्तियों को ही एंटी सबोटाज चेकिंग के पश्चात कार्यक्रम स्थल में जाने की अनुमति दी जाए। नोडल पुलिस अधिकारी अपने साथ वर्दी एवं सादे में लगने वाले समस्त पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों की पहचान कर उनके ड्यूटी कार्ड चेक कर लें तथा उनको उनकी ड्यूटी के बारे में एवं आकस्मिक परिस्थितियों के प्लान सम्बन्ध में भली-भांति ब्रीफ कर ले।

प्रभारी अधिकारी जौलीग्रान्ट को निर्देशित किया गया कि वह एयरपोर्ट व उसके आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश व सघन कांबिंग करा ले व जिन स्थानो पर यातायात एवं भीड़ का दबाव अधिक रहता हो वहां रस्सों व बैरिकेटिंग की सहायता से यातायात नियंत्रित किया जाए। संदिग्ध व्यक्तियो एवं वाहनों की चेकिंग विधिवत रुप से की जाए ।

आपराधिक, अवांछनीय एवं सांप्रदायिक तत्वों पर कड़ी दृष्टि रखी जाए ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई त्रुटि ना हो इसके अतिरिक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक , देहरादून द्वारा ड्यूटी प्वाइंटो पर नियुक्त समस्त प्रभारी अधिकारियों को बताया कि रिर्हसल के पश्चात यदि उन्हें किसी ड्यूटी प्वाइंट पर सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता हो तो उसे डी-ब्रीफिंग के दौरान बता दें ताकि समय से सारी सुरक्षात्मक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाए।

साथ ही “RESPECT ALL SUSPECT ALL” के तौर पर डियूटी करने के लिए बताया गया, ड्यूटी पर लगने वाले समस्त कर्मियों को निर्देशित किया गया कि ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन का बिल्कुल इस्तेमाल ना किया जाए एवं ना ही बिना बताए अपने ड्यूटी पॉइंट को छोड़ा जाए। ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कडी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी उदासीनता के चलते एक करोड़ की पंपिंग योजना बनी शोपीस

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गोपेश्वर,चमोली जिले के नगर पालिका क्षेत्र गोपेश्वर के रामपुरा, कोठियाल और भैड़ी गांवों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए एक करोड़ की लागत से निर्मित पंपिंग पेयजल योजना शो पीस बनी हुई है। ठेकेदार और जल संस्थान के बीच आपसी सामंजस्य न होने के कारण एक वर्ष पूर्व निर्मित पंपिंग योजना आज तक सुचारु नहीं हो पाई है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोग प्राकृतिक पेयजल स्रोतों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

कोठियाल सैंण क्षेत्र में पेयजल की किल्लत को देखते हुए शासन से वर्ष 2014 में कोठियाल सैंण पंपिंग पेयजल योजना के निर्माण को स्वीकृत मिली। जिसके बाद वर्ष 2016 में योजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया। लेकिन अभी तक योजना पर पेयजल की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। पूर्व पालिका सभासद विनोद कनवासी और गीता बिष्ट का कहना है कि कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से मौहल्लों में पेजयल आपूर्ति की मांग की गई, लेकिन वर्तमान तक पेयजल सुचारु आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।

इधर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता का कहना है कि कोठियाल सैंण में बनी पंपिंग योजना वर्तमान तक विभाग को हस्तांतरित नहीं हो पाई है। निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार को कार्य पूर्ण कर पेयजल लाइन हस्तांतरित करने के लिये कहा गया है। फिलहाल क्षेत्र में वैकल्पिक रूप से पेयजल सप्लाई की जा रही है। जल्द ही पंपिंग योजना को सुचारु कर लिया जाएगा।

यूजेवीएन की जमीन पर बसने लगी अवैध बस्ती

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विकासनगर, शक्ति नहर किनारे सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध अतिक्रमण के बाद अब उत्तराखंड जल विद्युत निगम की खाली पड़ी जमीन पर भी अवैध कब्जे की कोशिशें होने लगी हैं। कब्जाधारक शुरुआती दौर में खाली पड़ी जमीन पर घास फूस के छप्पर बना रहे हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाता है।

हैरानी की बात है कि इन दिनों ढकरानी में जिस जमीन पर अवैध अतिक्रमण करने की कोशिश की जा रही है, वहीं यूजेवीएन के कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर ही है। जिससे जाहिर होता है कि निगम प्रबंधन व स्थानीय प्रशासन कब्जाधारकों को मौन समर्थन दे रहे हैं। पछवादून में सरकारी जमीनों व बरसाती नालों पर अवैध अतिक्रमण का खेल राज्य गठन के बाद से ही जारी है। देहरादून से सटा क्षेत्र होने के चलते यहां तेजी से बसावट बस रही है जिसका लाभ भू माफिया उठा रहा है।

माफिया खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे कर उन्हें खुर्द बुर्द करने में लगा हुआ है। जबकि कुछ जगहों पर बाहर से प्रवासी मजदूर अवैध झुग्गी बना रहे हैं जिन्हें बाद में पक्के निर्माण में तब्दील कर दिया जाता है। क्षेत्र में हो रहे अवैध अतिक्रमण पर स्थानीय प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। जबकि अवैध बस्ती बसने के कुछ समय बाद ही बस्ती के बाशिंदों को राशन कार्ड, पहचान पत्र मुहैया हो जाते हैं जिससे अवैध कब्जों का राजनैतिक संरक्षण मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। इन दिनों ढकरानी उत्तराखंड जल विद्युत निगम की खाली पड़ी जमीन पर अवैध कब्जे करने की कोशिश की जा रही है।

प्राथमिक विद्यालय से सटी इस जमीन पर शुरुआती दौर में घास फूस के छप्पर बनाए जा रहे हैं जिन्हें शीघ्र ही ही नहीं हटाया गया तो अन्य अवैध बस्तियों की तरह ही बाद में पक्के निर्माण में तब्दील कर दिए जाने की संभावना है। उधर, एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि, “ढकरानी में बस रही अवैध बस्ती का भौतिक निरीक्षण कर उचित विधिक कार्रवाई की जाएगी।”

रैगिंग के मामलों में छात्र के साथ नपेंगे संस्थान

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देहरादून,  बीडीएस में नए सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों की यदि सीनियर छात्र रैगिंग करते पाए गए तो न सिर्फ रैगिंग कमेटी उन्हें एक साल के लिए निष्कासित कर सकती है बल्कि डेंटल कॉलेज की मान्यता तक जा सकती है। भारतीय दंत परिषद ने रैगिंग को लेकर देशभर के डेंटल कॉलेजों को सख्त चेतावनी दी है। उनसे 31 अक्तूबर तक रैगिंग रोकने को उठाए गए कदम की जानकारी मांगी है। अगर कॉलेज इस अवधि में जानकारी नहीं देता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

परिषद ने सरकारी और प्राइवेट डेंटल कॉलेजों से कहा है कि जिनकी रिपोर्ट समय पर नहीं आएगी, उनके नाम सार्वजनिक करने के अलावा सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के समक्ष भी रखे जाएंगे। ताकि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। कॉलेजों को जारी निर्देश के अनुसार शैक्षिणक संस्थानों में रैगिंग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने और विद्यार्थियों को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सख्ती से नियम लागू किए जा रहे हैं।हर वर्ष प्रवेश के दौरान न सिर्फ छात्र बल्कि उनके माता-पिता को भी एक शपथ पत्र रैगिंग को लेकर देना पड़ता है। इसी सिलसिले में परिषद ने सभी कॉलेजों से रैगिंग रोकने के लिए किए गए उपायों की रिपोर्ट मांगी है।

भारतीय दंत परिषद की सचिव डॉ. सब्यसाची साहा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को हर वर्ष की रिपोर्ट डीसीआइ की ओर से सौंपी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला है कि कॉलेज प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। यही वजह है कि अब इन्हें 31 अक्तूबर तक का वक्त दिया गया है। अगर इस अवधि में रिपोर्ट जमा नहीं होती है तो ऐसे कॉलेजों की मान्यता तक खत्म की जा सकती है। कॉलेज परिसर में रैगिंग के खिलाफ साइन बोर्ड व पोस्टर लगाने, हॉस्टल वाडर्न का नंबर साझा करने और कॉलेज के सदस्यों को विद्यार्थियों का काउंसलर बनाने जैसे कदम उठाने को भी कहा गया है। 

समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सहेजे द्वाराहाट और स्याल्दे बिखौती का मेला

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‘ओ भिना कसिकै जानूं द्वारहाटा’ जैसे कुमाऊं के लोकप्रिय लोक गीतों में वर्णित और कत्यूरी शासनकाल में राजधानी रहा द्वाराहाट अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-प्रदेश में प्रसिद्ध है। उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जिले में रानीखेत तहसील मुख्यालय से लगभग 21 किलोमीटर दूर गेवाड़ घाटी में स्थित इस छोटे से कस्बे में 8वीं से 13वीं शदी के बीच निर्मित महामृत्युंजय, गूजरदेव, मनिया, शीतला देवी व रत्नदेव आदि अनेक मंदिरों के अवशेष आज भी अपनी स्थापत्य कला से प्रभावित करते हैं। मंदिरों के चारों ओर अनेक भित्तियों को कलापूर्ण तरीके से शिलापटों अलंकृत किया गया है।

द्वाराहाट में मौजूद वर्ष 1048 में निर्मित बद्रीनाथ मंदिर समूह में तीन मन्दिरों को मिलाकर बना है। प्रमुख मंदिर में सम्वत 1105 अंकित काले पत्थर की विष्णु की मूर्ति स्थित है। स्थानीय नदी खीर गंगा के तट पर निर्मित एक अन्य वनदेव मन्दिर मध्य हिमालय के प्राचीन विकसित फांसना शैली के मन्दिरों में से एक है, जिसे पीड़ा देवल शैली के नाम से भी जाना जाता है। 13वीं शताब्दी में निर्मित तीसरा गुर्जर देव मन्दिर मध्य हिमालय में नागर शैली मंदिरों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पंचायतन शैली में निर्मित यह मन्दिर एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है जिसका अधिष्ठान एवं जंघा भाग देव प्रतिमाओं, नर्तकों एवं पशु प्रतिमाओं से अलंकृत है। इस मन्दिर के स्थापत्य व ध्वसांवशेषों से ज्ञात होता है कि यह अत्यन्त भव्य मन्दिर था। कचहरी मन्दिर समूह में 11वीं से 13वीं शताब्दी में बने कुल 12 छोटे-बड़े अर्धमण्डप युक्त मूर्ति विहीन मन्दिर हैं। ए

क कुटुम्बरी मन्दिर की उपस्थिति 1960 तक बताई जाती है, पर अब यह अस्तित्व में नहीं है। इसकी वास्तु संरचनाओं के अवशेष निकटवर्ती घरों में किए गये निर्माणों में दिखते हैं। 11-12वीं शताब्दी में बना मनियान मन्दिर समूह नौ मन्दिरों का समूह है। इनमें से चार मन्दिर आपस में जुड़े हुए हैं। इनमें से तीन मंदिरों में जैन तीर्थकारों की तथा शेष में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां इतिहास की एक नई धारा की ओर इशारा करती हैं। इसी दौर में निर्मित मृत्युजंय मन्दिर समूह का प्रमुख मन्दिर भगवान शिव-मृत्युजंय को समर्पित है। नागर शिखर शैली में निर्मित यह पूर्वाभिमुखी मन्दिर त्रि-रथ योजना में निर्मित है, जिसमें गर्भगृह, अंतराल और मंडप युक्त है। मन्दिर परिसर में एक मन्दिर भैरव का तथा दूसरा छोटा मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था है। 11-13वीं शताब्दी में निर्मित रतनदेव मन्दिर समूह भी नौ मन्दिरों का समूह रहा है, पर अब इसमें छह मन्दिर ही बचे हैं। इनमें से ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश को समर्पित तीन मन्दिर एक सामूहिक चबूतरे पर स्थित हैं। जिनके आगे उत्तरमुखी मंडप है जो सम्भवत् थे।

कुमाऊं के एक अन्य लोकप्रिय लोक गीत-‘अलबेरै बिखौती मेरि हंसि रिसै गे’ में वर्णित द्वाराहाट के प्रसिद्ध स्याल्दे बिखौती (यानी विषुवत संक्रान्ति) के मेले में आज भी ग्रामीण परिवेश की झलक मिलती है। पाली पछाऊँ क्षेत्र की परंपरागत लोक संस्कृति को पेश करने वाले इस मेले का माहौल आसपास के गांवों में फूलदेई के त्योहार से ही बनना प्रारंभ हो जाता है, द्वाराहाट से आठ किमी दूर प्रसिद्ध शिव मंदिर विमांडेश्वर में इसकी औपचारिक शुरुआत हो जाती है।

आगे मेला वैशाख माह की पहली तिथि तक द्वाराहाट बाजार तक पहुंच जाता है। मेले के दौरान गांवों में एक खास अंदाज में एक-दूसरे के हाथ थाम और कदम से कदम मिलाते हुए कुमाऊं के प्रसिद्ध लोक नृत्यों झोडे, चांचरी, छपेली आदि का परंपरागत वस्त्रों व अंदाज में लोग आनंद लेते मिल जाते हैं। मेले में द्वाराहाट बाजार की मुख्य चौक पर रखे एक खास पत्थर-ओड़ा को भेटने यानी छूने की एक खास परंपरा का निर्वाह किया जाता है। इस बारे में जनश्रुति है कि शीतला देवी के मंदिर से लौटने के दौरान एक बार किसी कारण दो गांवों के दलों में खूनी संघर्ष हो गया। हारे हुए दल के सरदार का सिर खड्ग से काट कर जिस स्थान पर गाड़ा गया वहां स्मृति चिन्ह के रूप में एक पत्थर रख दिया गया, जिसे ही ‘ओड़ा’ कहा जाता है। तभी से बनी ‘ओड़ा भेटने’ की परम्परा के अनुसर इस ओड़े पर चोट मार कर ही मेले में आगे बढ़ा जा सकता है। पहले इसके लिए ग्रामीणों को अपनी बारी आने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इसके लिए अब आल, गरख और नौज्यूला धड़ों के बीच एक सुव्यवस्थित व्यवस्था तय कर दी गई है। लोक नृत्य और लोक संगीत से लकदक इस मेले में अब भी रात-रात भर भगनौले जैसे लोकगीत अजब समां बाँध देते हैं। जिसे देखने-सुनने को पर्यटक भी दूर-दूर से पहुंचते हैं।

अब गढ्ढों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए अफसर होंगे जिम्मेदार

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सड़क पर गड्ढे हादसों का सबब बनते आ रहे है। किसी की जान जाने का अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन पुलिस ने दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कमर कसते हुए इसके लिए एनएचएआइ को जिम्मेदार ठहरा कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है। सीओ ने एनएचएआइ को पत्र लिख कर हादसों का सबब बन रही सड़कों की दशा सुधारने के लिए कहा है।

सड़क की दुर्दशा पर नजर डाले तो बिलासपुर से लेकर पंतनगर तक हालत खराब है। खराब सड़कों के चलते आए दिन हादसों में लोग अनायस ही काल का ग्रास बन रहे है। सड़क पर गड्ढों से बचने के लिए लोग वाहन का स्टेयरिंग मोड़ देते है, जिसके चलते आए दिन लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे है। लेकिन सड़कों की दशा में कोई सुधार हादसों के बाद भी नहीं दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ रहे हादसों के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए एनएचएआइ को पत्र लिख एनएच 74 पर रामपुर रोड से पंतनगर तक खस्ताहाल सड़क से हो रही परेशानी को दूर करने के लिए कहा है। सड़क की दशा सहीं न होने की दशा में दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी एनएचएआइ की होगी। साथ ही दशा न सुधारने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दे दी है।

किच्छा मार्ग पर इंदिरा चौक से लेकर भूतबंगला तक सिंगल सड़क की काम कर रही है, जिससे वहां पर दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। कार्यदायी संस्था द्वारा सड़क को यहां पर अधूरा छोड़ा गया है। सीओ ने उसे भी बनवा मार्ग पर आवाजाही खोलने को कहा है।

स्वतंत्र कुमार, सीओ सिटी ने बताया कि एनएचएआइ के पीडी को पत्र लिख कर दुर्घटना का कारण बन रही सड़कों की दशा सुधारने को कहा है। इस पर एनएचएआइ के जवाब के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कर्नल संदीप कार्की, पीडी एनएचएआइका कहना है कि, “भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण प्रोजक्ट में काफी देर हो रही है। रामपुर-काठगोदाम मार्ग पर कार्यदायी संस्था कार्य को तैयार है। भूमि उपलब्ध होने के बाद काम की गति दिखाई देगी। साथ ही तीन करोड़ का प्रपोजल एनएचएआइ हेडक्वार्टर गया है। कुछ ही दिनों में प्रपोजल की मंजूरी मिलने की संभावना है। दो माह के अंदर रुद्रपुर से लेकर लालकुआं तक गड्ढे सड़क पर दिखाई नहीं देंगे।”

अब्बास-मस्तान के साथ काम करेंगे अक्षय कुमार

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अक्षय कुमार के कैरिअर में खिलाड़ी फिल्म से पहली बड़ी सफलता दिलाने वाली निर्देशक जोड़ी अब्बास मस्तान की अगली फिल्म में अक्षय कुमार हो सकते हैं। ऐसा हुआ, तो 13 साल बाद अक्षय कुमार इस निर्देशक जोड़ी के साथ काम करेंगे। 13 साल पहले 2004 में सुभाष घई के बैनर में बनी फिल्म एतराज में अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा और करीना कपूर ने मुख्य भूमिकाएं की थीं और अब्बास मस्तान की जोड़ी ने इस फिल्म का निर्देशन किया था।

‘एतराज’ के अलावा अब्बास मस्तान की फिल्म अजनबी में अक्षय कुमार के साथ बाबी देओल, करीना कपूर और बिपाशा बसु ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। अब्बास मस्तान के निर्देशन में बनी पिछली फिल्म ‘मशीन’ में उनका बेटा मुस्तफा बतौर हीरो लांच किया गया था, लेकिन बाक्स आफिस पर ये फिल्म सुपर फ्लाप रही। टिप्स कंपनी में अब्बास-मस्तान के साथ रेस की दो सफल कड़ियां बनाने के बाद जब सलमान खान को रेस 3 के लिए कास्ट किया गया, तो निर्देशन की जिम्मेदारी अब्बास-मस्तान की जगह रेमो डिसूजा को सौंप दी गई। अब्बास मस्तान ने अक्षय कुमार को जिस फिल्म का प्रस्ताव दिया है, उसमें एक हीरो की अलग अलग 12 भूमिकाएं हैं।

अक्षय को ये प्रस्ताव पसंद आया है, लेकिन अभी तक उन्होंने अंतिम फैसला नहीं किया है। अक्षय कुमार इस वक्त फरहान अख्तर की कंपनी की फिल्म ‘गोल्ड’, टी सीरिज की फिल्म ‘मुगल’ के अलावा करण जौहर के साथ बन रही फिल्म ‘केसर’ में बिजी हैं। रिलीज के लिए तैयार अक्षय कुमार की फिल्मों में आर बाल्की की ‘पैडमैन’ और शंकर की ‘रोबोट 2.0’ हैं। ये दोनों फिल्में अगले साल रिलीज होंगी।

सोनम कपूर की दो नई फिल्में

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सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर अगले साल (2018) के लिए दो नई फिल्में साइन करने की खबर को शेयर किया है, लेकिन इन दोनों फिल्मों को लेकर कोई डिटेल्स नहीं दी है। साथ ही सोनम ने अपनी आने वाली तीन फिल्मों का जिक्र किया है, जिसमें एक फिल्म उनकी बहन रेहा कपूर द्वारा बनाई जा रही ‘वीरां दी वैडिंग’ है, जिसमें वे पहली बार करीना कपूर खान के साथ काम कर रही हैं। स्वारा भास्कर और शिखा तल्सानिया भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। शशांक खेतान इसका निर्देशन कर रहे हैं और फिल्म अगले साल मई में होगी।

सोनम की इस लिस्ट की दूसरी फिल्म ‘पैडमैन’ है, जिसमें वे अक्षय कुमार के साथ हैं। आर बाल्की इसके निर्देशक हैं। ये फिल्म 2018 में अप्रैल में रिलीज होगी। इस लिस्ट की तीसरी फिल्म राजकुमार हीरानी की फिल्म है, जो संजय दत्त की जिंदगी पर है और इसमें वे अपनी पहली फिल्म सांवरिया के बाद रणबीर कपूर के साथ नजर आएंगी और ये फिल्म अगले साल 30 मार्च को रिलीज होगी।

सोनम ने जिन दो फिल्मों का जिक्र किया है, उनमें से एक फिल्म को लेकर कहा जा रहा है कि विधु विनोद चोपड़ा की प्रोडक्शन कंपनी में बनने जा रही इस फिल्म में सोनम पहली बार अपने पिता के साथ काम करने जा रही हैं। दूसरी फिल्म को लेकर संकेत हैं कि इस फिल्म में विनोद मेहरा के बेटे रोहन मेहरा की जोड़ी होगी।

नौ साल बाद संवासिनी के घर का लगा पता

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काशीपुर, राजकीय नारी निकेतन में रह रही संवासिनी पिंकी की पहचान काशीपुर के रूप में हुई है। किशोरी रामनगर रेलवे स्टेशन पर करीब नौ साल पहले पुलिस को मिली थी जिसे देहरादून भेज दिया गया था।

रामनगर रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2008 में पुलिस को करीब सात साल की एक लड़की मिली थी। पुलिस ने पूछताछ की, मगर मूकबधिर होने के कारण वह कुछ बता नहीं सकी। पुलिस ने लड़की को नारी निकेतन हल्द्वानी भेज दिया जहां पर वह करीब दो साल रही। इसके बाद लड़की को नारी निकेतन, देहरादून भेज दिया गया है।

करीब डेढ़ साल पहले ऋतु शर्मा की मूक बधिर विशेषज्ञ के पद तैनाती की गई तो निकेतन में रहने वाली लड़कियों व बच्चों के नाम व पते लगाने में जुट गई। उन्होंने जब रामनगर से मिली किशोरी से इशारों में बात की तो किशोरी ने अपना नाम पिंकी बताया। पिता का नाम मदन व माता का नाम मीना निवासी सिनेमा हाल के पास बताया। निकेतन के अफसरों ने पुलिस विभाग से संवासिनी के बारे में पता बताने को कहा।

पुलिस ने जब रिक्शा यूनियनों से पूछताछ की तो पता चला कि पिंकी के पिता मदन लाल बाजपुर रोड स्थित दीपक सिनेमा के पास अंडे व पकौड़ी की ठेली लगाते थे। करीब 8-10 साल पहले मदन की मौत हो गई। पिंकी के भाई मनोज रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाता था। वह 8-10 साल पहले परिवार के साथ मुरादाबाद चला गया, जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. रजनीश बत्रा ने बताया कि पिंकी की बहन का नाम ऋतु है। बताया कि पिंकी घर से गुरुद्वारा के लिए निकली थी और वह भटक कर रामनगर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई थी।

राजकीय नारी निकेतन, देहरादून में करीब डेढ़ साल में मानसिक रूप से विक्षिप्त 80 महिलाओं को उनके घर पहुंचाया गया। 225 बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया। मूक बधिर विशेषज्ञ ऋतु शर्मा के साथ पिंकी से पूछताछ की तो उसने काशीपुर का पता बताया। यदि परिवार को जानकारी मिल जाएगी तो पिंकी को उसके घर पहुंचा दिया जाएगा।