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राज्य स्थापना दिवस पर 35 न्याय पंचायतों में होंगे खेल

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बागेश्वर। जिलाधिकारी ने राज्य स्थापना दिवस पर विभाग को 35 न्याय पंचायतों में खेलकूद कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए युवा कल्याण विभाग खेल महाकुंभ की तैयारी में जुट गया है।

कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी रंजना की अध्यक्षता में बैठक हुई। उन्होंने बताया कि नौ नवम्बर को जिले के 35 न्याय पंचायतों में खेल महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। यहां अव्वल रहे खिलाड़ी ब्लॉक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्तर पर खेल महाकुंभ से प्रतिभाएं निखरेंगी। इसके लिए विभाग को सफल संचालन के निर्देश दिए। यहां से चयनित खिलाड़ी जिलास्तर और प्रदेश स्तर में होनी वाली प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगे।
डीएम ने बताया कि न्याय पंचायत स्तर पर कराए जाने वाले खेलों में 12 से 19 साल तक के बालक-बालिकाएं प्रतिभाग कर सकेंगे। ऐसे खिलाड़ी ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करेंगे। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए ब्लॉक, जिला स्तर पर युवा कल्याण अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकेंगे। उन्होंने अन्य विभागों से भी इसमें सहयोग करने को कहा है। उन्होंने बताया कि निर्धारित तिथि पर खेल महाकुंभ होने हैं, जिसके लिए विभाग अभी से तैयारी करेगा।
बैठक में एडीएम राहुल गोयल, डीडीओ केएन. तिवारी, जिला पंचायत राज अधिकारी पूनम पाठक, खेल अधिकारी विनोद वल्दिया, डीईओ बेसिक आकाश सारस्वत, प्रभारी जिला युवा कल्याण अधिकारी हेमा परिहार आदि मौजूद थे। राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता नौ से 13 नवम्बर तक पीजी कॉलेज खेल मैदान में खेली जाएगी। खेल अधिकारी विनोद वल्दिया ने बताया कि प्रतियोगिता में पिथौरागढ़, हल्द्वानी, काशीपुर, उत्तरकाशी, हरिद्वार, अल्मोड़ा, गोपेश्वर, चंपावत, बागेश्वर आदि जिलों की टीमें भाग लेंगी। यह राज्य की सर्वश्रेष्ठ 12 टीमों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता लीग कम नॉक आउट आधार पर खेली जाएगी। खिलाड़ियों को निर्धारित मानकों के अनुसार वास्तविक रेल, बस किराया, भोजन भत्ता, आवास भत्ता और अनुसांगिक व्यय देय होगा।

डेंगू ने ली महिला की जान, मचा हंगामा

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हल्द्वानी- बालाजी अस्पताल में सुबह डेंगू बुखार से ग्रस्त महिला की मौत हो गई। वह अस्पताल में पांच दिन से भर्ती थी। महिला की मौत पर परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।

अस्पताल में मुखानी सदभावना विहार निवासी भावना राणा (45) साल की सुबह तबीयत  बिगड़ी और मौत हो गई। महिला की बेटी पिंसी राणा का कहना था कि उसकी मां को बुखार था। 28 अक्टूबर की रात को अस्पताल में भर्ती किया। तब प्लेटलेट्स 28 हजार थे, लेकिन एक दिन पहले 88 हजार हो गए। सोमवार की रात डॉक्टर ने अस्पताल में रुकने से मना कर दिया। रात में जब 11 बजे फोन मिलाया, तो तबीयत ठीक होने की बात कही। सुबह अस्पताल पहुंची, तो मां की मृत्यु हो गई थी।

पिंसी ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगया। मामला बढ़ा देख इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े सभी डॉक्टर अस्पताल पहुंच गए। पुलिस ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन परिजन मानने को तैयार नहीं हुए। तीन घंटे हंगामे के बाद पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई। इसके बाद मामला शांत हुआ।

डॉ. संदीप अग्रवाल का कहना था, मरीज का इलाज चल रहा था। सुबह अचानक बीपी कम हो गया, लेकिन कोशिश करने के बावजूद रिकवर नहीं हो सका। इसलिए मरीज की मौत हो गई।

प्रेम सम्बन्ध और पुरानी रंजीश बनी हत्या की वजह

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काशीपुर के कुंडा थाना क्षेत्र में व्यापारी की हुई हत्या का आखिर खुलासा हो गया, पुलिस ने हत्या में शामिल दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, पुलिस ने बताया कि रंजीत उर्फ मीतू की हत्या प्रेम संबंधों में बाधक बनने पर की गई थी। बताया जा रहा है कि पुरानी रंजीश के चलते रंजीत के भड़काने पर हत्यारोपी सतपाल को एक महीने जेल की हवा खानी पड़ी थी। तभी से मीतू की हत्या की साजीश रची जा रही थी, पुलिस ने हत्यारोंपी पिता पुत्र को हत्या के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार घटना में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल व रंजीत का पर्स व डायरी आदि बरामद की गई। बताया गया कि सतपाल का करीब ढाई साल से राखी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन रंजीत ने राखी के परिजनों को भड़का दिया। राखी के परिजनों ने सतपाल व उसके मामा बलजिंदर के खिलाफ छेड़छाड़ व पास्को अधिनियम में मुकदमा दर्ज करा दिया। जिस पर सतपाल को एक महीने की जेल में रहना पड़ा। सतपाल ने हत्या की योजना बनाते हुए बाजार से गुलाबी रंग की लिपिस्टिक खरीदी तथा रंजीत को मारने के बाद उसके हाथ पर लिपिस्टिक लगा दी, जिससे घटना लड़की बाजी के चक्कर में प्रदर्शित हो। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया है।

अतिक्रमण हटाने पर विरोध किया तो हुआ लाठीचार्ज

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काशीपुर में हाई कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने गई प्रशासन की टीम और व्यापारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई, व्यापारियों की बड़ती भीड़ और बडते विरोध के चलते पुलिस ने व्यापारी नेताओं को जबरन हिरासत मे लेकर कोतवाली में बंद कर दिया। वहीं भीड को तीतर बीतर करने के लिए जमकर लाठीचार्ज की, और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को जारी रखते हुए मुख्य बाजार की सभी दुकानों के बाहर से अतिक्रमण हटाया गया,  हालांकि, कुछ जगह दुकान के आगे नाली पर बने स्लैब हटाये गये तो कुछ दुकानों के सटर भी उखाड़ दिये गये। गौरतलब है कि दो दिन पूर्व प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की तो व्यपारियों के विरोध के चलते दो दिन का समय देकर प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने को कहा था लेकिन दो दिन बाद जब नगर निगम और प्रशसान की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची तो व्यापारियों ने एक बार फिर बखेड़ा खड़ा करना शुरु कर दिया, जिसके बाद पुलिस बल का सहारा लेते हुए विरोध करने वाले व्यापारियों को पुलिस ने खदेडना शुरु कर दिया, जिससे अफरा तफरी मच गयी, वहीं व्यापारियों ने विरोध के चलते दुकाने बंद कर दी, आधा दर्जन विरोध करने वाले व्यापारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को आज के दिन पुरा किया, वहीं शहर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, आपको बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश पर काशीपुर नगर निगम ने कोतवाली व रतन सिनेमा रोड पर 776 अतिक्रमण चिह्नित किए थे। इसके लिए पीले निशान लगाकर लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने को कहा गया था, मगर किसी ने अतिक्रमण नहीं हटाया। जिसके चलते प्रशासन को शख्ती के साथ अतिक्रमण हटाना पडा।

वर्ल्ड रिकार्ड तोड़ने वाले प्रदीप आज पहुंचेगे ग्राफिक एरा

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देहरादून। ग्राफिक एरा के प्रदीप राणा साइकिल से सबसे लम्बी दूरी तय करने का विश्व रिकार्ड बनाकर बुधवार को देहरादून पहुंचेंगे। एमएससी आईटी के छात्र प्रदीप ने साईकिल में 18300 किलोमीटर की दूरी तय कर गिनीज बुक का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में प्रदीप की इस उपलब्धि पर उनके स्वागत के लिए भव्य आयोजन किया गया है।

ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के के छात्र प्रदीप ने 23 मई को विश्वविद्यालय परिसर से यह साइकिल अभियान शुरू किया था। उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के गरूण क्षेत्र के निवासी प्रदीप राणा के पिता किशन राणा खेती करते हैं। साइकिल यात्रा के दौरान प्रदीप ने उत्तप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, नागालैंड, सिक्किम, कर्नाटक, मेघालय, असम, गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब समेत काफी राज्यों का सफर किया है। प्रदीप हर रोज 130 से 140 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं।
प्रदीप ने बताया कि प्रसाद इरांडे का 141 दिन में 14,576 किलोमीटर साइकिल चलाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़कर संतोष होली ने वर्ष 2015 में 111 दिन में 15,222 किलोमीटर साइकिल चलाने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था। गिनीज बुक के संतोष होली के इस रिकॉर्ड को प्रदीप राणा ने एक महिने पहले ही तोड़ दिया था इसके बाद भी प्रदीप की साइकिल यात्रा रुकी नहीं और वो अब तक 18300 किलोमीटर साइकिल चला चुके हैं। प्रदीप टिहरी, चम्बा, धनोल्टी और मसूरी से साईकिल चलाते हुए कल ग्राफिक एरा पहुंचेंगे। पहले उनका स्वागत ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय में किया जायेगा इसके बाद प्रदीप ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय पहुंचेंगे। ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला ने नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने पर प्रदीप राणा को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के साथ ही पूरे उत्तराखंड को प्रदीप राणा पर गर्व है।

यूटीयू के कुलपति प्रो. गर्ग हटे, डॉ. रावत ने संभाला चार्ज

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देहरादून। लगातार विवादों में घिरी रहने वाले उत्तराखंड तकनीकि विश्वविद्यालय (यूटीयू) के कुलपति मंगलवार को हटा दिए गए। प्रदेश के राज्यपाल व विवि के चांसलर डॉ. कृष्ण कांत पॉल ने विवि के कुलपति प्रो. पीके. गर्ग के स्थान पर डॉ. उदय सिंह रावत को कुलपति पद की जिम्मेदारी दी। डॉ. रावत अग्रिम आदेश आने तक यूटीयू की कमान संभालेंगे।

श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस. रावत ने मंगलवार को पदभार ग्रहण कर लिया। मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. रावत ने कहा कि विवि में बीते काफी वक्त से काफी अव्यवस्थाएं चली आ रही थी। इन कारणों से विवि का शैक्षिक माहौल भी बिगड़ रहा था। उन्होंने कहा कि सबसे पहले विवि का एकेडमिक माहौल बेहतर करने और विवि से जुड़े कॉलेजों के छात्र, कर्मचारी और अधिकारियों की समस्याओं को दूर करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।
डॉ. रावत ने कहा कि विवि से जुड़े संघटक कॉलेजों के सभी निदेशकों को बुलाकर उनकी बैठक ली जाएगी, जिसमें वहां से संबधित समस्याओं पर चर्चा होगी। शिक्षा का माहौल सुधारते हुए विवि से सम्बद्ध सरकारी व निजी तकनीकि संस्थानों में एकेडमिक एक्टिविटी का लक्ष्य दिया जाएगा, जिसे संस्थानों को पूरा करना होगा। विवि में स्वच्छ वातावरण होगा तो सभी प्रयास मिलकर पूरे करना संभव होगा।
लगातार विवादों में रहे पूर्व कुलपति
यूटीयू में साल 2013 में प्रो. डीएस. चौहान के कुलपति पद से इस्तीफा देने के बाद से विवि का यह पद स्थाई कुलपति की बाट जोह रहा था। लंबे अरसे के बाद अप्रैल 2015 में आईआईटी रुड़की से प्रो. पीके. गर्ग ने यूटीयू के स्थाई कुलपति पद की जिम्मेदारी संभाली। स्थाई कुलपति मिलने के बाद विवि में सकारात्मक माहौल बनने की उम्मीद जगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके उलट विवि लगातार विवादों और हंगामों की भेंट चढ़ता रहा।
ऐसे रहा विवादों से नाता
– पूर्व कुलपति डॉ. पीके. गर्ग के कार्यकाल में यूटीयू की उत्तराखंड स्टेट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (यूकेएसईई) काउंसलिंग सवालों के घेरे में आई।
– काउंसलिंग बोर्ड को बिना बताए सीट आवंटित करने का आरोप लगा।
– विवि कर्मचारियों और अधिकारियों को इधर-उधर करने से पैदा हुए विवाद।
– कुलपति और शासन के बीच भी निरंतर टकराव की स्थिति पैदा होती रही।
– टनकपुर संघटक कॉलेज में चार संविदा कर्मियों की नियुक्ति पर शासन ने मांगा था स्पष्टिकरण। 

शराब ओवर रेटिंग के खिलाफ तीन दिवसीय विशेष अभियान शुरू

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देहरादून। प्रदेश में आबकारी विभाग शराब रेटिंग के खिलाफ 31 अक्टूबर से 2 नवम्बर तीन दिन तक एक विशेष अभियान चला रही है। इस दौरान कोई भी दुकानदार गड़बड़ी करते पाया गया तो सख्त कार्यवाही की जाएगी।

प्रदेश के आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने यहां एक बयान में कहा कि राज्य सरकार शराब की दुकानों पर “ओवर रेंटिग को लेकर उत्तराखड की सरकार बहुत संवेदनशील हैं। उन्होंने बताया कि जनता के माध्यम से कोई शिकायत आती है उस पर हम गोपनीय रूप से उसकी जॉच करवाकर उसके खिलाफ विधिक कार्यवाही करते है।
मंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी को भी कही भी इस प्रकार की शिकायत मिले हम तक अवश्य पहुचाएं धन्यवाद”जिस पर समय रहते विभाग द्वारा कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने शराब रेटिंग के कानून के प्रावधानों को बताते हुए कहा कि ओवर रेटिग को लेकर तीन कठोर प्रावधान किए है। जिसमें पहला प्रावधान चालान से सम्बन्धित है और पहली बार ये अपराध करने पर पांच हजार रूपये जुर्माना, दूसरी बार दस हजार, तीसरी बार पचास हजार,चौथी बार एक लाख व पांचवी बार दो लाख का जुर्माना उस पर होगा और उसके साथ साथ छठी बार लाइसेन्स निरस्त कर दिया जायेगा।
आबकारी मंत्री ने बताया कि प्रदेश में इसके तहत अभी तक 1331 चालान दुकानों के किये है। जिसके तहत 197 दुकानों पर ओवररेटिंग के तहत चालन किये है। जिसमें 34 लाख 92 हजार रूपया जुर्माना हमने अभी तक वसूला गया है। तीन दिन तक चलाए जा रहे अभियान में सभी दुकानों पर पहुंचने का प्रयास किए जाएंगे। 

नेट परीक्षा में बाहर से नहीं होगी स्क्राइब लाने की अनुमति

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देहरादून। नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) परीक्षा में दिव्यांग छात्रों को बाहर से स्क्राइब (लेखक) ले जाने की अनुमति नहीं होगी। परीक्षा केंद्र से ही स्क्राइब की व्यवस्था की जाएगी। जिन अभ्यर्थियोें को स्क्राइब की आवश्यकता होगी उन्हें परीक्षा से दो दिन पहले संपर्क करना होगा। परीक्षा का आयोजन पांच नवम्बर को होगा।

देशभर के 91 शहरों में सीबीएसई (नेट) परिक्षा का आयोजन पांच नवन्बर को होना है। अभ्यर्थी सीबीएसई (नेट) की वेबसाइट cbsenet.nic.in पर लॉगइन कर अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। राज्य में सीबीएसई देहरादून रीजन ने परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गई। एग्जाम संबंधी दिशा निर्देश परीक्षा केंद्रों को भेजे जा चुके हैं। बोर्ड ने इस बार परीक्षा में शामिल होने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब (लेखक) की व्यवस्था केंद्रों पर ही की है। इस बार अभ्यर्थियों को बाहर से स्क्राइब (लेखक) लाने की सुविधा नहीं दी जाएगी। खास बात यह कि जिन अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रश्न पत्र लिखने के लिए सहायक की आवश्यकता होगी, उन्हें संबंधित परीक्षा केंद्र पर जाकर वहां परीक्षा सुप्रीटेंडेंट को परिक्षा के दो दिन पहले से जानकारी देनी होगी। ताकि समय रहते केंद्र द्वारा स्क्राइब (लेखक) की व्यवस्था की जा सके।

प्रदेश में तीन शहरों पर परीक्षा
उत्तराखंड के तीन शहरों में परीक्षा का आयोजन होगा। इनमें देहरादून शहर में 18, श्रीनगर में चार और नैनीताल में 11 परीक्षा केंद्रों पर नेट की परीक्षा आयोजित होगी। परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को सुबह नौ बजे तक केंद्रों पर पहुंचना होगा। साढ़े नौ बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने का अनुमति नहीं दी जाएगी। सीबीएसई देहरादून के क्षेत्रीय अधिकारी रनबीर सिंह ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा संबंधी जिम्मा स्थानीय प्रशासन को दिया गया है। इसके अलावा केंद्रों पर सेंटर सुप्रीटेंडेंट व्यवस्थाओं को चाक चौबंद रखने का कार्य करेंगे। अभ्यर्थी अपने साथ परीक्षा केंद्रों पर केवल पेन, एडमिट कार्ड व एक पहचान पत्र ले जा सकेंगे।

परीक्षा केंद्रों पर लगाई जाएंगी दीवार घड़ियां
सीबीएसई ने इस बार भी परीक्षा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। बोर्ड ने एडमिट कार्ड के साथ अभ्यर्थियों को कोई एक फोटो आईडी कार्ड मसलन पैन कार्ड, आधार, वोटर कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस लेकर आना होगा। अन्यथा केंद्रों पर उन्हें प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके अलावा मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, ईयरफोन, माइक्रोफोन, पेजर, हैंड-बैंड, सेंटर पर ले जाने की सख्त मनाही है। कलाई घड़ी भी प्रतिबंधित रहेगी। हालांकि बोर्ड द्वारा अभ्यर्थियों को कोई परेशानी न हो इसके लिए सभी केंद्रों के परीक्षा केंद्रों में दीवार घड़ी अनिवार्य रूप से लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। इससे अलग हैंडबैग व छोटे पर्स, कैमरा, खाने की वस्तुएं, प्लास्टिक पाउच, केल्कुलेटर, स्केल, राइटिंग पैड, कार्डबोर्ड, पेंसिल बॉक्स आदि भी पूरी तरह से वर्जित होंगे।

परीक्षा की समय सारणी
टेस्ट बुकलेट प्रदान की जाएगी- 9.20 बजे
बुकलेट खोल सकते हैं- 9.25 बजे
फस्ट पेपर-9.30 से 10.45 बजे
सेकेंड पेपर-11.15 से 12.30 बजे
थर्ड पेपर-2.00 से 4.00 बजे

शिक्षा के अधिकारों की अनदेखी पर बाल आयोग गंभीर

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देहरादून। बाल आयोग ने राज्य में प्राइमरी विद्यालयों में गिरते शिक्षा स्तर व शिक्षा के अधिकार का पालन न होने को गंभीरता से लिया है। आयोग ने मुख्य सचिव को इस दिशा में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने के दिशा-निर्देश दिए हैं। साथ ही आयोग ने रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल द्वारा जनपद में शिक्षा के सुधार के लिए अपनाई गई पहल से सीख लेने की नसीहत भी दी।

मंगलवार को उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूरी की ओर से ‘प्रथम’ एनजीओ की सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में 50 फीसद से भी कम बच्चें प्राथमिक शिक्षा ग्रहण कर पाते हैं। यह प्रदेश के भविष्य के लिए चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में प्राइमरी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर में बड़ी गिरावट पाई है। साथ ही यह भी पाया है कि शिक्षा का अधिकार भी लागू नहीं हो रहा है।

आयोग के अध्यक्ष ने रुद्रप्रयाग जनपद में शिक्षा सुधार के लिए लागू की गई व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि रुद्रप्रयाग जनपद ने शिक्षा सुधार में मिशाल पेश की है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकारी अधिकारी प्राइमरी शिक्षा में सुधार के लिए परोक्ष रूप से भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक शिक्षा में सुधार आना असंभव है। उन्होंने इस संबंध में मुख्य सचिव को सभी जनपदों में रुद्रप्रयाग की तर्ज पर शिक्षा में सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
जनपद रुद्रप्रयाग से सीख लें
आयोग के अध्यक्ष खंडूरी ने कहा कि रुद्रप्रयाग जनपद के डीएम मंगेश घिल्डियाल ने जिला, ब्लॉक, तहसील स्तर में सरकारी अधिकारियों को दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालय आवंटित किए हैं। ये अधिकारी माह में दो दिन स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता की जांच करने पहुंचते हैं। साथ ही अधिकारी बच्चों की कॉपी, पेंसिल, बैग जैसी दैनिक जरुरतों को भी पूरा करते हैं। साथ ही बच्चों को सैनिक स्कूलों की परीक्षा की तैयारी भी कराई जाती है।

पलायन रोकने में कारगर होगा ”यशपाल का माॅडल”

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यूं तो पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में प्रतिभाओं की लंबी कतार है, लेकिन इस राज्य में एक ऐसा जिला है रुद्रप्रयाग जो अपने अलगपन के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। इसी जिले का एक गांव मक्कू मठ है, गांव के एक निवासी है देश के एक मुख्य पक्षी प्रेमी जिनका नाम है यशपाल नेगी, 54 साल के बहुत ही सरल जिंदगी जीने वाले यशपाल अपनी जिंदगी में कुछ ऐसा कर रहे है कि वह लोगों का रोल माॅडल बनकर उभर रहे हैं।

यशपाल एक गाईड हैं जो हफ्ते के 4-5 दिन पक्षी प्रेमी पर्यटकों को घूमाते हैं, अौर इन सब में उनका साथ देता है उनका 24 साल का बेटा बिपिन जोकि पक्षी प्रेमियों को अपनी जीप में लाते है। यशपाल की पत्नी उर्मिला देवी अपने तीन कमरों के घर में अायें मेहमानों को रुकने से लेकर उनके खाने-पीने का इंतजाम करती हैं। यशपाल के इस काम कि खास बात हैं कि उनका परिवार उनके साथ मिलकर काम करता है और जरुरत पड़ने पर वे खुद गांव के युवाओं को काम देते हैं।

yashpal

यशपाल साल 2013 की आपदा से पहले काकड़ागाड़ में अपना बर्ड वाचिंग केंद्र चलाते थे। आपदा के बाद उन्होंने अपने पैतृक गाँव मक्कू में ही आने वाले बर्ड वॉचर के लिए घर पर ही होम स्टे खोला है, जो बरसात के अलावा साल भर भरा रहता है। यशपाल अपनी जन्मभूमि में एक शांत और बेहतर जिंदगी जीते है। उनकी पत्नी बताती हैं, “आधा किलो चावल ले कर बच्चों को खिला और खेत का काम करके 10 किलोमीटर नीचे काकड़ागाड़ जाती ताकि अपने पति की मदद कर सकें।”

साल 2000 से पहले यशपाल नेगी, पंचकेदार में ट्रेक गाइड का काम करते थे,  2000 में उन्होंने कॉर्बेट नेशनल पार्क से 7 दिन के नेचर गाइड का कोर्स किये। यंही से उनके जीने का नजरिया बदल गया। आज वे देश में पक्षियों की पाई जाने वाली कुल 1200 प्रजातियों में से उत्तराखंड की 650 में से इस क्षेत्र की 300 प्रजातियों के विशेषज्ञ हैं। वे हिमालयी तीतर वर्ग की पक्षियों – मोनाल, कोकलाश, हिल पैंतीस ओर रेड फजेंट के विशेषज्ञ हैं, जिस कारण देश के सर्वश्रेष्ठ पक्षी प्रेमियों में से आधे उनके पास आकर रुक चुके हैं।

यशपाल नेगी की सादगी भरी जिंदगी अपने अाप में एक प्रेरणा है,  संकटों के दौर में भी वे परेशानियों से भागे नही, बल्कि अपने परिवार के साथ मिलकर उन्होंने अपने अास पास की प्रकृति को शौक ओर आजीवका का साधन बनाया।