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निमोनिया से 80 से अधिक बकरियों की मौत

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गोपेश्वर। चमोली जिले के विकास खंड जोशीमठ में निमोनिया से पीड़ित 80 से अधिक बकरियों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि पेचिस लगने के बाद बकरियों की मौत हो रही है।

जोशीमठ विकासखंड के बड़गांव, सलूड डुंग्रा व पैनी में बीते एक सप्ताह से बकरियों के मरने का सिलसिला जारी है। पशुपालकों का कहना है कि बकरियों को पहले पेचिस लग रही है। उसके बाद बुखार आ रहा है। वहीं पशु चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बताया कि बकरियों को निमोनिया की बीमारी हो रही है। पशुपालक विक्रम सिंह, वीरेंद्र सिंह समेत अन्य पशुपालकों की बकरियों की मौत होने से पशुपालकों के सामने संकट पैदा हो गया है।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरएस राणा का कहना है कि हमने बकरियों का परीक्षण किया है। बकरियों में निमोनिया की शिकायत मिल रही है। गांवों में टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है। इससे बकरियों की मौत पर नियंत्रण भी हुआ है।

राज्य स्थापना दिवस पर होगी क्रॉस कंट्री दौड़, चलेगा सफाई अभियान

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गोपेश्वर। राज्य स्थापना दिवस पर खेल विभाग द्वारा क्रॉस कंट्री दौड़ का आयोजन करवाया जाएगा।

मुख्य विकास अधिकारी ने खेल विभाग को गोपेश्वर खेल स्टेडियम में विभिन्न वर्गों में क्रॉस कंट्री रेस का आयोजन करने के निर्देश दिए। क्रॉस कंट्री रेस के दौरान रूट पर विभिन्न स्थानों पर पेयजल व्यवस्था के लिए भी निर्देश दिए गए। नगर पालिका परिषद चमोली को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर वार्डों में सफाई अभियान के निर्देश दिए।
आठ नवम्बर को सभी जिला स्तरीय अधिकारी को प्रातः सात से आठ बजे कुण्ड स्थित इन्डोर बैडमिंटन कोर्ट के निकट विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। प्रभारी जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को अपनी विभागीय योजनाओं, उपलब्धियों की जानकारी आम जन नागरिक को देने के निर्देश भी दिए। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सूचना विभाग द्वारा राज्य स्थापना के 17 वर्ष पूर्ण होने पर प्रकाशित विकास पुस्तिका का भी विमोचन किया जाएगा।
इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष संदीप रावत, गणमान्य नागरिक सुरेन्द्र सिंह लिंगवाल, बीएस झिंक्वाण, एसडीएम योगेन्द्र सिंह, एसडीएम सीएस डोभाल आदि मौजूद रहे। 

कांग्रेसियों ने सीएम का पुतला फूंका

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गोपेश्वर। जिला मुख्यालय गोपेश्वर में कांग्रेसियों ने जन समस्याओं व स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने के लिए धरने पर बैठे आंदोलनकारियों पर फर्जी मुकदमा का आरोप लगाते हुए सीएम का पुतला फूंका।
सोमवार को कांग्रेसियों ने जिला मुख्यालय के मुख्य चौराहे पर उत्तराखंड सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए आक्रोश व्यक्त किया कि कर्णप्रयाग में लोग स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं सरकार उनकी मांग को सुनने के बजाय उन पर पुलिस के माध्यम से फर्जी मुकदमें दायर करवाने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस अन्याय पूर्ण नीति का विरोध किया जाएगा। पुतला दहन करने वालों में अरविंद नेगी, आनंद सिंह पंवार, वाईएस बत्र्वाल, प्रमोद बिष्ट, संदीप कंडारी, आदि मौजूद रहे।

नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने का संदेश लेकर उत्तरकाशी पहुंची सविता

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उत्तरकाशी। हौसले बुलंद हों और मन में कुछ करने का जज्बा तो व्यक्ति क्या कुछ नहीं कर सकता। ऐसे ही बुलंद हौसलों को लिए बिहार में जन्मी और कोलकाता में पली-पढ़ी 23 वर्षीया सविता महतो ने पहाड़ पर साइकलिंग करने का फैसला किया है। इसके लिए 2 नवंबर को वह अपने अभियान के लिए हरिद्वार से रवाना हो गईं। देश में ऐसा पहली बार है कि कोई लड़की पहाड़ पर साइकिल यात्रा करने निकली है।

गंगा सहित अन्य नदी नालों की स्वच्छता के शुरू हुई साइकिल यात्रा सोमवार को उत्तरकाशी पहुंची। उत्तरकाशी में साइकिल चलाने वाली सविता महतो का माउंटेन एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्वागत किया।हरिद्वार से ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, चंबा, चिन्यालीसौड होते हुए यह साइकिल यात्रा उत्तरकाशी पहुंची। उत्तरकाशी में सोमवार सुबह को हिमालय माउंटेन एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने साइकिल चलाने वाली सविता महातो का स्वागत किया।

सविता महतो ने बताया कि यह साइकिल यात्रा उत्तरकाशी से संगमचट्टी होते हुए डोडीताल सहित उच्च हिमालय के बुग्याल व पगडंडी पर साइकिल चलेगी। यह साइकिल यात्रा गंगा और यमुना सहित सभी नदियों की स्वच्छता के लिए है। बिहार के छपरा पानापुरा निवासी 23 वर्षीय सविता महतो कि बताया कि हरिद्वार लेकर हरिद्वार तक यह साइकिल यात्रा 7500 किलोमीटर लंबी है।

संगमचट्टी से लेकर हनुमान चट्टी तथा जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक के पैदल ट्रैक पर पहली बार साइकिलिंग की जाएगी। जहां पर खड़ी चढ़ाई या रास्ता खराब होगा वहां पर साइकिल को उठा कर आगे पहुंचाया जाएगा।

शह-मात की राजनीति के पाठशाला बने अखाड़े

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हरिद्वार। अखाड़ों को सनातन संस्कृति का पोषक व संवाहक कहा जाता है। सनातन संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए संतों ने राजाओं का साथ देकर मुगल आततायियों से कई युद्ध लड़े। यही कारण रहा कि राजा-महाराजाओं ने संतों के कौशल व सनातन संस्कृति की रक्षा करने के लिए उनके अमूल्य योगदान के लिए जागीरें तक दान में दे दीं। यही जागीरें आज विवाद का कारण बन चुकी हैं और अखाड़े आज राजनीति की पाठशाला का रूप ले चुके हैं।

मौजूदा दौर में अखाड़ों में सनातन संस्कृति का पोषण व उसका प्रचार-प्रसार कम और राजनीति अधिक होने लगी है। सभी में समानता का भाव रखने वाले संत अब एक-दूसरे के साथ शह-मात का खेल खेल रहे हैं। यही कारण है कि अखाड़ों के संतों के बीच विवाद समय-समय पर खुलकर सामने आने लगे हैं। इनमें से अधिकांश विवाद अखाड़ों की अकूत सम्पदा पर वर्चस्व कायम रखने तथा पदों के लिए लालसा के कारण उत्पन्न हो रहे हैं।
श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला में दो संतों के गुटों के बीच उत्पन्न हुआ विवाद भी इसी की परिणीति है। विदित हो कि श्री निर्मल पंचायती अखाड़े के श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने अखाड़े के सचिव श्रीमहंत बलवंत सिंह पर अखाड़े की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया था। जिसके बाद दोंनों गुटों के बीच विवाद गहराता चला गया। श्रीमहंत बलवंत सिंह ने अपने गुट के संतों के साथ बैठक कर श्रीमहंत संतोख सिंह को अखाड़े का नया श्रीमहंत घोषित कर दिया था। इसके बाद एक बार फिर अखाड़े की राजनीति में हलचल उत्पन्न हो गई थी।
श्रीमहंत संतोख सिंह को अभी श्रीमहंत बने पांच दिन भी नहीं बीते थे कि संतोख सिंह अचानक निर्मल अखाड़े पहुंचे और श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह में अपनी आस्था जताते हुए बलवंत सिंह पर कई आरोप मढ़े। संतोख सिंह के इस प्रकार अचानक पलटी मारने से बलवंत सिंह के खेमे में हलचल मच गई। संतोख सिंह अचानक पलटी कैसे मार गए इसको लेकर बलवंत सिंह खेमेे में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। भले ही सचिव बलवंत सिंह को भूमाफियाओं का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन है, लेकिन श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज भी राजनीति के माहिर खिलाड़ी होने के साथ संत समाज के बीच अपनी अच्छी पैठ रखते हैं। विद्वान होने के साथ किसको किस तरह से मनाना है, वह अच्छी तरह से जानते हैं। यही कारण है कि बलवंत सिंह खेमे में से संतों का श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह के समर्थन में एक-एक कर खड़ा होना बलवंत सिंह खेमे को जहां कमजोर कर रहा है।
वहीं यह भी साबित कर रहा है कि श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज की संत समाज के बीच पकड़ खासी मजबूत है। जिस तरह की राजनीतिक उठा-पटक भारतीय राजनीति में समय-समय पर देखने को मिलती है और एक-दूसरे को शह-मात का खेल चलता है, अखाड़ों में भी उसी प्रकार की राजनीति दिखाई दे रही है। किसको किस तरह से मात देनी है यह अखाड़ों की नीयति व दिनचर्या में शामिल हो चुका है। यही कारण है कि कभी सनातन संस्कृति के पोषक व संवाहक कहे जाने वाले अखाड़े आज राजनीति की पाठशाला बन चुके हैं।
यह केवल निर्मल अखाड़े की कहानी नहीं है। श्री उदासीन पंचायती अखाड़ा नया में भी सम्पत्ति के कारण इस तरह का विवाद काफी समय से चला आ रहा है। यहां भी अखाड़े के महंत व कोठारी के कई दावेदार हैं, जो समय-समय पर बैठक कर स्वंय को अखाड़े का सर्वे सर्वा बताते रहते हैं। यहां भी राजनीति के माहिरों की कमी नहीं है। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के श्रीमहंत शंकर भारती जो 25 वर्षों तक अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे, उन्हें भी अखाड़े की राजनीति का शिकार होना पड़ा था और अपने जीवन के अंतिम काल में अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। सवाल पैदा होता है कि जब संत समाज स्वंय की उठापटक में ही व्यस्त है और एक-दूसरे को शह मात देने के लिए रणनीति बनाने में ही जुटे रहते हैं तो वह ऐसे में क्या सनातन संस्कृति का पोषण कर पाएंगे और कैसे उसका प्रचार-प्रसार करेंगे।

पुलिसकर्मियों को मेला ड्यूटी में मिलेगा पानी व लंच

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हरिद्वार। स्नान पर्व पर व लक्खी मेलों में अब उत्तराखंड की पुलिस को खाली पेट और सूखे गले ड्यूटी नहीं करनी पड़ेगी। पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिसकर्मियों के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। पुलिस को पानी और भोजन ड्यूटी स्थल पर ही दिया जाएगा। एडीजी कानून-व्यवस्था अशोक कुमार ने दिन की ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था कराने की बात कही है।

कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए करीब दो हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इन पुलिसकर्मियों को बारी-बारी से 12 घंटे की ड्यूटी करनी थी। दिन की ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को भोजन और पानी के लिए तरसना पड़ा। जब पुलिसकर्मियों के भोजन की जानकारी जुटाई तो मालूम चला कि पुलिसकर्मी भूखे हैं। उनके पास पीने के लिए पानी तक नहीं है। वहीं एडीजी अशोक कुमार को पुलिसकर्मियों के भूखे रहने की जानकारी हुई। उन्होंने बताया कि रात्रि में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मी तो भोजन घर से ही करके आते हैं, लेकिन दिन की ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था पुलिस-प्रशासन की ओर से कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी 12 घंटे पुलिस ड्यूटी करते हैं। ऐसे में पुलिस-प्रशासन मेला पर्व व अन्य धार्मिक आयोजन के दौरान उनके भोजन के लिए लंच पैकेट की व्यवस्था कराकर रखेगा। जिससे पुलिसकर्मियों को भूखा नहीं रहना पड़े।

रिस्पना के पुनर्जीवीकरण कार्यक्रम का सीएम ने किया शुभारंभ

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देहरादून। रिस्पना नदी को मूल स्वरूप में लौटाने की कार्ययोजना का शुभारंभ सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज उद्गम स्थल शिखर फॉल के पास किया। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ 108 दीपों को प्रज्वलित कर नदी को साफ-सुथरा रखने का संकल्प और शपथ ली गई। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी और आइआइटी रुडकी के विशेषज्ञ इस महत्वकांक्षी योजना में सहयोग दे रहे हैं। जबकि जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह और पर्यावरणविद् सचिदानन्द भारती समेत देश और राज्य के नामी लोग भी शामिल रहे। आज पहले दिन से ही नदी में कूड़ा-कचरा, मलबा एवं अन्य सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाएंगे।

पानी रोकने को बनेंगे तालाब : रिस्पना के उद्गम से आबादी क्षेत्रों तक जगह-जगह पानी को रोका जाएगा। ताकि नदी में जल प्रवाह बना रहे। इसके अलावा नदी तटों पर साफ-सफाई की जिम्मेदारी तय होगी। सीवर एवं अन्य गंदगी को नदी में डालने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

आपको बतादें कि मुख्यमंत्री ने पहले भी कहा था कि छह नवम्बर को रिस्पना नदी से कूड़ा-कचरा, मलबा हटाने व डिसिल्टिंग का कार्य आरम्भ कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी छह नवम्बर को रिस्पना नदी के जल को हाथ में लेकर इसके पुनर्जीवीकरण का संकल्प लेना होगा। राज्य सरकार का सिंचाई विभाग इसके लिए नोडल विभाग होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों, प्रशासन, गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से रिस्पना पुनर्जीवीकरण के लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार की जाए।

2 लाख 24 हजार कंपनियां फर्जी, एक कंपनी के 2134 बैंक खाते, एक खाते में 2484 करोड़

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दिल्ली। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने प्रधानमंंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए अब तक दो लाख 24 हजार कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए हैं। जांच में पता चला था कि इन कंपनियों ने पिछले दो साल में कोई कारोबार या गतिविधि नहीं की थी, जिसके चलते जांच एजेंसियों को इन कंपनियों पर शक हुआ।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने बताया कि इन कंपनियों के बैंक खातों पर भी रोक लगा दी गई है। 56 बैंकों से मिले आंकड़ों की जांच में पता चला कि 35 हजार कंपनियों ने इन 56 बैंकों में 58 हजार से ज्यादा बैंक खाते खोले हुए थे। इन बैंक खातों में नोटबंदी के बाद 17 हजार करोड़ रूपये का लेन-देन हुआ। एक कंपनी के खाते में तो नोटबंदी के बाद 2484 करोड़ रूपये जमा किए गए और निकाले गए। वहीं एक कंपनी के 2134 बैंक खाते पाए गए। अब ऐसी कंपनियों के खिलाफ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), फाइनेंसियल इन्टेलिजेंस यूनिट (एफआईयू), वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), आरबीआई सहित तमाम संबंधित विभाग एवं एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं।इसके अलावा उत्तराखंड में  भी हजारों कंपनियां फर्जी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कालेधन के खिलाफ जंग का एलान कर चुके हैं। इतना ही नहीं इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया है। जिसका अध्यक्ष राजस्व सचिव एवं कॉर्पोरेट मामलों के सचिव को संयुक्त रूप से बनाया गया। ये एसटीएफ ऐसी फर्जी कंपनियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर नजर रखेगा और सभी जांच एजेंसियों में सामंजस्य स्थापित रखेगा। अब तक इस एसटीएफ की पांच बैठकें हो चुकी हैं।

समाज कल्याण: शहर ऑनलाइन, गांव ऑफलाइन

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विकासनगर। भले ही सरकार से लेकर शासन तक समाज कल्याण विभाग से संचालित तमाम योजनाओं को ऑनलाइन करने के दावे करते हों, लेकिन स्थिति ये है कि सिस्टम ऑनलाइन के दावे सिर्फ शहरों तक सीमित रह गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों ये योजनाएं आज भी 30 साल पुराने ऑफलाइन ढर्रे पर संचालित हो रही हैं। इसका परिणाम ये है कि ग्रामीणों को योजना से संबंधित कोई भी जानकारी लेने के लिए जिला समाज कल्याण कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

सरकार ने पेंशन, छात्रवृत्ति, पारिवारिक लाभ से लेकर समाज कल्याण विभाग की तमाम योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया है। अब लाभार्थियों को ऑनलाइन ही आवेदन करना पड़ता है और योजनाओं से लाभान्वित लोगों को सीधे बैंक खाते के माध्यम से ऑनलाइन ही भुगतान किया जाता है। सरकार की ऑनलाइन व्यवस्था राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में तो काम कर रही है, लेकिन बाकी के 95 विकासखंड़ों में इन योजनाओं के लिए संचालन के लिए एक कंप्यूटर तक नहीं रखा गया। अब स्थिति ये है कि यदि किसी ग्रामीण को योजना से संबंधित कोई जानकारी चाहिए होती है तो यह विकासखंड स्तर पर ऑनलाइन व्यवस्था न होने के कारण नहीं मिल पाती। इस कारण लोगों को फिर जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यही नहीं विकासखंड स्तर पर ऑनलाइन व्यवस्था कर दी जाए तो इससे स्थानीय लोग समय-समय पर योजनाओं के लाभ की जानकारी और यदि आवेदन में त्रुटि हो तो उसे समय से अपने क्षेत्र में ही ठीक करा सकते हैं, जबकि अभी उन्हें इस प्रक्रिया काफी समय और पैसा खर्च करना पड़ता है। जीआर नौटियाल उप निदेशक समाज कल्याण का कहना है कि पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। जिन जगहों पर अभी यह व्यवस्था नहीं है, वहां भी जल्द ही ऑनलाइन कर दिया जाएगा, जिससे लोगों को मदद मिलेगी।

सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान कर रहे आत्महत्या : यूकेडी

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देहरादून। रविवार को उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टियों ने अपने कर्मों से राज्य स्थापना दिवस को उत्साहविहीन बना दिया है। दिवाकर भट्ट ने कांग्रेस और भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि इन दोनों पार्टियों के राज्य के प्रति लापरवाही और सत्ता की लूट खसोट के कारण पृथक राज्य की अवधारणा के मुताबिक नीतियां नहीं बन पाई। जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। दिवाकर भट्ट रविवार को पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिस राज्य में सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान आत्महत्या कर रहा है,जिस राज्य को स्वावलंबी बनाने में सहायक सारे संसाधन (परिसंपत्तियां) जबरन छीन लिए गए हो,जिस राज्य का निर्माण में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाली मात्र शक्तियों के ऊपर शराब माफियाओं के इशारे पर मुकदमे दर्ज किए गए हों, जिस राज्य में भूमाफियाओं के इशारों पर जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाते हुए जबरन निर्णय थोपे जाते हो,वह राज्य राज्य गठन की खुशी कैसे मना सकता है।
राष्ट्रीय दलों के लापरवाही से राज्य स्थापना दिवस महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत का राज्य में 3000 प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का बयान इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। वर्तमान में भी पहाड़ों में शिक्षा,चिकित्सा, रोजगार जैसी बुनियादी चीजों के अभाव के कारण जबरदस्त पलायन हो रहा है। 3000 स्कूलों का बंद होना साफ तौर से इस बात का संकेत है कि पहाड़ो मे हजारों गांव जनता विहीन हो चुके हैं। किसानों के ऋण माफी के मामले में प्रदेश के मुखिया साफ बता चुके हैं कि उन्हें किसानों की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं इसलिए ऋण माफ किसी हाल में नहीं होगा। राज्य का युवा बेरोजगार पूरी तरह हताश और निराश है।
एक सवाल के जवाब में भट्ट ने कहा कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की बात दल का कोई भी नेता अथवा पदाधिकारी सपने में भी नहीं सोच सकता। यह मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। पत्रकार वार्ता में मौजूद उक्रांद संरक्षक काशी सिंह ऐरी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों पर बर्बरता पूर्वक गोली कांड के दोषी तत्काल जिलाधिकारी अनंत कुमार को बेकसूर साबित करवाने में भाजपा की बहुत बड़ी भूमिका रही है।
इस दौरान उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक ने उत्तराखंड क्रांति दल को राज्य के हित में एकमात्र क्षेत्रीय दल मानते हुए यूकेडी में विलय किया। उक्रांद डी के केंद्रीय अध्यक्ष दीपक गैरोला आज अपने समर्थकों के साथ विधिवत रूप से विलय की घोषणा करते हुए यूकेडी में शामिल हुए। इसके साथ ही जोहड़ी गांव निवासी सूबेदार मेजर(सेवानिवृत्त) व वर्तमान में पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक अधिकारी के रुप में तैनात जयदीप सिंह थापा ने भी यूकेडी की सदस्यता ग्रहण की। दल के महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने उन्हें महानगर उपाध्यक्ष के पद पर मनोनीत किया।