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प्रदेश में तेजी से बढ़ रही गो-सदनों की संख्या

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देहरादून। प्रदेश में इन दिनों गो-सदन खोलने वालों की संख्या में वृद्धि देखने को मिल रही है। इसका अंदाजा पशु निदेशालय में हर माह आ रहे आवेदनों की संख्या से लगाया जा सकता है। आवेदनों की संख्या में हुई बढो़तरी को देखते हुए अब विभागीय अधिकारी भी गो-सदनों की मान्यता देने से पहले संस्थाओं की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर रहे हैं।

प्रदेश में निजी एवं धर्मार्थ संस्थाएं अवारा एवं निराश्रित गोवंशों के लिए आश्रय के रूप में गो-सदनों की स्थापना करते हैं। इसके लिए संस्थाओं को पशु कल्याण बोर्ड से मान्यता लेेनी होती है। पंजीयन होने पर संस्था को प्रदेश सरकार से आर्थिक सहायता राशि भी प्रदान की जाती है। वर्तमान में प्रदेश में 22 पंजीकृत गो-सदन हैं। इनमें अधिकांश गो-सदन देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो पिछले दो-तीन वर्षों में गो-सदनों के लिए आवेदनों की संख्या में तेजी देखने को मिली है। विभाग का कहना है कि हर महीने गो-सदनों के लिए 12 से 20 तक आवेदन आ रहे हैं। आज कईं गो-सदनों में यह शिकायत भी आती हैं कि गो-सदनों में निराश्रित पशुओं को नहीं रखा जाता है, बल्कि लाभकारी पशुओं को ही तवज्जो दिया जाता है। उन्होंने कहा कि विभाग जल्दबाजी में किसी भी संस्था को मान्यता नहीं देना चाहता। कड़ी जांच-पड़ताल के बाद ही मान्यता दी जाएगी।
निर्धारित शर्तें:
गो-सदन में कम से कम 50 अलाभकारी गोवंश अनिवार्य। गो-सदन में रखे जाने वाले गोवंशों के लिए खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था। भूमि स्वामित्व का अभिलेख। पट्टे की जमीन है तो निर्विवाद हो। स्थानीय निकाय से एनओसी।

2022 तक किसानों की आय करनी होगी दोगुनीः सीएम

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देहरादून। सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए संकल्पबद्ध है। इसके लिए जिलाधिकारियों और संबन्धित विभागीय अधिकारियों को पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा। बेस्ट प्रैक्टिसेज को चिह्नित करके उनका प्रचार-प्रसार करना होगा। सभी लाइन डिपार्टमेंट(संबंधित विभाग) और फंडिग एजेन्सियों के प्रयासों का एकीकरण करने की जरुरत भी है। आईएस वीक के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि किसानों को सभी योजनाओं की जानकारी व सभी सुविधाएं एक स्थान पर मिले इसके लिये एक सिंगल विण्डो सिस्टम स्थापित किया जाना जरुरी है।

इस मौके पर सचिव कृषि सेंथिल पाण्डियन ने मुख्यमंत्री और अन्य आईएएस अधिकारियों के समक्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने संबंधी एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। पाण्डियन ने कहा कि सरकार फार्म मैनेजमेंट के सभी पहलुओं पर ध्यान देगी। किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज समय पर मिले तथा कृषि मे सीड रिप्लेसमेंट दर बढ़ाना (बीजों में बदलाव) भी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि क्लस्टरवार कृषि उपजों को चिह्नित कर खेती करना एक लाभदायक उपाय होगा। पाली हाउस खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सभी किसानों को सायल हेल्थ कार्ड दिए जाएंगे और गावों में फार्म मशीनरी बैंक विकसित किए जा रहे हैं। फसल बीमा योजना में ऐसे सभी किसानों को आच्छादित किया जायेगा जिन्होने खेती के लिये ऋण लिया है। जंगली जानवरों से कृषि को बचाने के लिये क्लस्टरवार ऐसी उपजें चिन्हित की जा रही है, जिनको जंगली पशुओं से खतरा न हो। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट हारवेस्ट प्रबन्धन पर भी अपनी कार्ययोजना बताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 400 से अधिक सहायक कृषि अधिकारी है जो कृषि विषय में परास्नातक हैं इनका उपयोग जिलाधिकारियों को करना चाहिए। पाण्डियन के प्रस्तुतिकरण के उपरान्त उपस्थित आईएएस अधिकारियों ने अपने-अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए। 

मेडिकल स्टोर पर मिला प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा

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बनबसा। क्षेत्र में नशे का कारोबार खूब फल फूल रहा है। मेडिकल स्टोरों पर लगातार मिल रही नशीली दवाईओं की शिकायत पर प्रशासन, स्वास्थ्य व पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी अभियान चलाया तो एक दुकान पर प्रतिबंधित दवाईयों के साथ नशीली दवाईयों का जखीरा पकड़ लिया। एसडीएम ने दुकान को मौके पर ही सीज कर दिया। हालांकि ड्रग इंस्पेक्टर के न होने से दवाईयों का आंकलन नहीं हो सका।

नशे की बढ़ती प्रवृत्ति की रोकथाम के लिए पुलिस व प्रशासन द्वारा निरंतर लोगों को जागरूक किया जा रहा है लेकिन क्षेत्र के कुछ मेडिकल स्टोर नशीली दवाइयों का व्यापार कर युवाओं को नशे की लत लगा रहे हैं। पुलिस को इसकी लगातार शिकायतें आ रही हैं। इसको देखते हुए गुरुवार को एसडीएम अनिल चन्याल के नेतृत्व में पुलिस व स्वास्थ्य विभाग ने नगर के मेडिकल स्टोरों मे संयुक्त छापेमार कार्यवाही की। जब टीम अजय मेडिकल स्टोर पर पहुंची तो वह सकपका गया। चेकिंग शुरू की तो दुकान व उसके गोदाम से भारी मात्रा मे प्रतिबंधित दवाइयां मिली। दुकान से कोरेक्स सीरप, कोकस कोडीन सीरप और नाइजिमाम टेबलेट जैसी प्रतिबंधित दवाइयां बरामद की। टीम ने इसके बाद राज मेडिकल स्टोर पर छापेमारी की लेकिन वहां सब ठीक मिला। एसडीएम ने मौके पर ही दुकान व गोदाम को सीज कर दिया। टीम मे डॉ. एच एस हयांकी, फार्मसिस्ट वीवी पंत, एलआईयू प्रभारी भास्कर बडोला और एसओटीएफ प्रभारी मोहम्मद आसिफ आदि शामिल रहे।
एसडीएम ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर के न होने के कारण गोदाम मे रखी प्रतिबंधित दवाईयों की मात्रा का आकलन नहीं हो पाया है। ड्रग इंस्पेक्टर के आने के बाद जांच की जाएगी। सीओ राजन सिंह रौतेला ने बताया कि उक्त मेडिकल स्टोर के द्वारा प्रतिबंधित दवाईयों को उचे दामों में नेपाल सप्लाई करता था। थानाध्यक्ष मनीष खत्री ने बताया कि पुलिस को लंबे समय से इसकी शिकायत मिल रही थी। जिसे आज जाल बिछाकर पकड लिया गया है।
विदेश में रहता है संचालक
अजय मेडिकल स्टोर अर्चना राणा नाम की महिला के लाइसेंस पर चलता है। स्टोर का मालिक अजय मदान न्यूजीलैंड रहता है। छापेमारी के दौरान दुकान पर उसका भतीजा लवी मदान मिला।
नेपाल पुलिस ने पकड़ी थी प्रतिबंधित दवाइयां
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पूर्व ही नेपाल के गड्ढा चौकी में नेपाल पुलिस ने भारत से तस्करी कर लाई गई भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाईयां पकड़ी थी। इससे एक बात तो साफ है कि क्षेत्र में नशे का कारोबार व प्रतिबंधित दवाईयों की तस्करी बड़ी मात्रा में हो रही है।

मोबाइल एप जल्द होगा शुरू, कवायद तेज

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देहरादून। ऊर्जा निगम की एंड्राइड आधारित बिलिंग सिस्टम की शुरुआत हरिद्वार, रुड़की और रुद्रपुर से होगी। एक जनवरी को इस योजना का शुभारंभ करने का लक्ष्य है। निदेशक परिचालन ने इसके लिए मोबाइल एप तैयार करने वाली कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक भी की है। इन जगहों से योजना शुरू करने के पीछे कारण ये है कि सबसे ज्यादा बिजली कनेक्शन भी इन्हीं क्षेत्रों में है और बिजली ज्यादा खपत भी यहीं होती है।

बिलिंग सिस्टम में खामियों के चलते उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार मीटर रीडर मौके पर जाने के बजाय अपने हिसाब से रीडिंग दर्ज कर देते हैं तो कभी सही मीटर को भी खराब दर्शा देते हैं। तो कभी रीडिंग दर्ज ही नहीं होती, जिससे कई-कई महीने का बिल उपभोक्ताओं को एक साथ मिलता है। निदेशक परिचालन अतुल अग्रवाल ने बताया कि बिलिंग सिस्टम को मजबूत और बेहतर करने के लिए एप लाया जा रहा है। इसके जरिये मीटर रीडरों पर पैनी नजर रहेगी। इसमें सबकुछ सिस्टम के माध्यम से होगा। एप शुरू होने के बाद गलत बिल जारी होने की समस्या भी समाप्त हो जाएगी।

ऐसे काम करेगा एप: मोबाइल एप्लीकेशन डाटा सेंटर से कनेक्ट रहेगी। मीटर रीडरों को ब्लूटूथ प्रिंटर दिए जाएंगे, जो मोबाइल से कनेक्ट होगा। मशीन के बजाय मोबाइल से ही बिल जारी किए जाएंगे, जिसकी जानकारी तत्काल डाटा सेंटर को मिल जाएगी। इसमें कैमरे का विकल्प भी होगी। मीटर रीडर को मीटर की फोटो भी एप पर अपलोड करनी होगी। जीपीएस के माध्यम से ये भी पता रहेगा कि मीटर रीडर मौके पर गया या नहीं।

जल्द ही आपके शहर देहरादून में होगा ”स्पीकआउट” का ओपन माइक सेशन

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देहरादून। इंतजार की घड़ियां खत्म हुई, देहरादून एक बार फिर आपके सामने एक रोमांचक लिट्रररी इवेंट ‘स्पीकआउट’ को होस्ट करने के लिए तैयार है।’स्पीकआउट’ जैसा कि नाम सुनकर पता चल रहा बोलो दिल खोल के, एक ऐसा मंच है जो पिछले डेढ़ साल से अलग अलग लेखकों की कविताएं, शब्दों को सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहंचा रहा है।

जैसा कि पुरानी कहावत हैं कि, ‘एक-एक कदम चलकर ही बड़े से बड़े पहाड़ पर चढ़ा जा सकता है’ ठीक वैसे ही ‘स्पीकआउट’ ने छोटी शुरुआत करके अपने आप को एक वेंचर की तरह स्थापित कर लिया है।जिया कुरैशी द्वारा ‘स्पीकआउट’ को अगस्त 2016 से शुरु किया गया, जिसके पीछे जिया का मुख्य लक्ष्य था लोगों की अंदर छुपी कला को सामने लाना। ‘स्पीकआउट’ प्रोफेशनल और नॉन प्रोफेशनल राइटर को उनके द्वारा लिखी गई कविताएं, कहानीयां, शायरी भेजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं jinhe जिया अपने सोशल मीडियम के जरिए लोगों तक पहुंचाते हैं।

टीम न्यूजपोस्ट से बातचीत में जिया ने बताया कि, “यह सफर फेसबुक के माध्यम एक पोस्ट के माध्यम से शुरु हुआ जिसमें मैनें नए लेखकों को उनका काम भेजने के लिए कहा और उनके काम को अपने ‘स्पीकआउट’ पेज पर छापना शुरु किया।बस एक के बाद एक लोगों के पोस्ट आते रहे और उसके बाद ‘स्पीकआउ’ट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने इस सफर में ‘स्पीकआउट’ किसी भी नए लेखक या लेखिका के काम को अपने फेसबुक पेज पर जगह देना नहीं भूला और यह सफर चलता रहा।

‘स्पीकआउट’ एक संस्था की तरह उभरते कलाकारों को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिए अलग-अलग माध्यमों से उनके विचारों को एक मंच दे रहा है। इतना ही नहीं ‘स्पीकआउट’ के खाते में अब वर्कशॉप और ओपन-माइक सेशन भी आ चुके हैं।अब तक ‘स्पीकआउट’ ने देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिर्वसिटी मे राइटिंग-स्किल की वर्कशॉप, लखनऊ और बैंगलोर में ओपन माइक सेशन का आयोजन भी किया है।

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‘स्पीकआउट’ ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से अब तक तकरीबन पांच सौ राइटअप जिसमें लगभग तीन सौ लेखकों ने योगदान रहा है उसे अपने मंच के जरिए लोगों तक पहुंचाया है।’स्पीकआउट’ अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  जैसे कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों की कला को छापते हैं। जल्द ही ‘स्पीकआउट’ अपनी किताब का पहला एडिशन दून में होने वाले इवेंट में लाँच करने वाला है, जहां ओपेन-माइक सेशन के माध्यम से सभी लेखकों को अपनी कला को इवेंट में मौजूद दर्शकों के सामने रखने का मौका मिलेगा।

ओकेश छाबड़ा, सीक्यूब देहरादून के मालिक और सेंट-थॉमस स्कूल की अध्यापिका सोनिया पांडे इस कार्यक्रम के चीफ गेस्ट होंगे।इस इवेंट को खुद ‘स्पीकआउट’ के ओनर जिया कुरैशी होस्ट करेगें।

यह इवेंट आने वाले 19 नवंबर को क्रॉसबार कैफे जाखन, देहरादून में 1:30 मिनट पर शुरु होगा।

 

महाराष्ट्र सरकार ने संजय लीला भंसाली को दी सुरक्षा

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विवादित फिल्म ‘पद्मावती’ की रिलीज को लेकर हो रहे विरोध को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली को सुरक्षा प्रदान की है। इसके लिए फिल्म निर्माता, सामाजिक कार्यकर्ता और टेलीविजन डायरेक्टर अशोक पंडित ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को पत्र लिखा था।

अशोक पंडित ने पूरे फिल्म बिरादरी की तरफ से मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को संजय लीला भंसाली को सुरक्षा प्रदान करने करने के लिए धन्यवाद कहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पास आपका आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं।

फिल्म पद्मावती के खिलाफ करणी सेना 01 दिसम्बर को ‘भारत बंद’ करेगी

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संजय लीला भंसाली की विवादस्पद फिल्म पद्मावती का विरोध कर रही करणी सेना ने फिल्म के जारी होने के खिलाफ आगामी 01 दिसम्बर को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस बीच फिल्म के खिलाफ बढ़ रहे देशव्यापी विरोध में फिल्म निर्माता भंसाली के साथ ही पद्मावती की भूमिका निभा रही अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

करणी सेना के प्रमुख लोकेन्द्र सिह ने कहा कि अब हम फिल्म जारी होने के पहले उसे उन्हें दिखाए जाने की मांग नहीं कर रहे हैं। अब हमारी मांग की है फिल्म पर प्रतिबन्ध लगाया जाय।

फिल्म के खिलाफ हो रहे विरोध राजस्थान गुजरात के अलावा अन्य राज्यों में फैल गया है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में राजपूत समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन कर फिल्म पर रोक लगाए जाने की मांग की है। फिल्म के खिलाफ हो रहा विरोध हिंसक रूप ले रहा है। राजस्थान के कोटा नगर में कल एक सिनेमा हाल में तोड़फोड़ की गई| कई अन्य स्थानों पर फिल्म को पोस्टर उतार दिए गए।

अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के इस बयान पर कि फिल्म का विरोध भारत में हो रही गिरावट का परिचायक है, तीखी प्रतिक्रिया हुई है। भारतीय जनता पार्टी सांसद सुब्रम्णयम स्वामी ने इस बयान पर दीपिका को खरी-खोटी सुनाते हुए उनकी राष्ट्रीयता पर सवालिया निशान लगाया है। उनके अनुसार दीपिका भारत नहीं बल्कि हॉलैंड की नागरिक हैं औऱ वह विदेशी नजरिए से भारत को देख रही हैं।

फिल्म की रिलीज को लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली को सुरक्षा प्रदान की है| इस संबंध में फिल्म निर्माता, सामाजिक कार्यकर्ता और टीवी निर्देशक आशोक पंडित ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को पत्र लिखा था।

आरटीई के तहत प्रदेश में पढ़ रहे लाखों बच्चों का भविष्य अधर में

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(देहरादून), आरटीई के तहत बजट न मिलने से नाराज पब्लिक स्कूल अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। निजी स्कूलो ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 31 दिसंबर की डेडलाइन तय करते हुए बजट न मिलने पर नोटिस देने और अगले सत्र से बच्चों को न लेने की चेतावनी दी है। जिससे प्रदेश के करीब 3 हजार से ज्यादा स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ने वाले लाखों बच्चों का भविष्य केन्द्र से बजट न मिलने की वजह से अधर में लटक गया है।
केन्द्र से शिक्षा विभाग को आरटीई के तहत मिलने वाले बजट का भुगतान न होने की वजह से पब्लिक स्कूलों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रिंसीपल प्रोगेसिव स्कूल एसोसिएशन ने सरकार को बजट दिलाने के लिए 31 दिसंबर की डेडलाइन तय की है। जिसके लिए अगले 15 दिनों में सभी स्कूल बैठक भी करेंगे। स्कूलों का कहना है कि पहले भी कई बार केन्द्र की ओर से बजट को रोका गया था। लेकिन जब बार-बार विरोध दर्ज कराया गया तो केन्द्र की ओर से बजट जारी हुआ लेकिन 2015 के बाद से पूरा ही बजट रोक दिया गया।
पीपीएसए के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने बताया कि सरकार ने तो नर्सरी के बच्चों से लेकर भी आरटीई के तहत फायदा देने की बात की थी। लेकिन, सरकार पुराने नियमों के तहत भी बजट नहीं दिया। उन्होंने बताया कि अब तक स्कूलों का सरकार पर करोड़ो रूपए का बजट हो चुका है। जिसको वे अब किसी भी सूरत मेंं बरदाश्त नहीं करेंगे।
उन्होंने बताया कि 30 नवम्बर तक वे सरकार को एक बार फिर नोटिस भेजेंगे। इसके बाद 31 दिसम्बर तक पैसा न मिलने की सूरत में वे अगले सेशन से बच्चों को पढ़ाना भी बंद कर देंगे। इसके साथ ही उन्होंने मामले को लेकर कोर्ट तक जाने की भी बात कही है।
बयान
“2 साल से स्कूलों को बजट नहीं मिला है। जिससे स्कूलों की आर्थिक स्थिति भी खराब होने लगी है। हम अगले 15 दिनों में निर्णायक फैसला लेंगें। अगर 31 दिसंबर तक पैसा नहीं मिला तो बच्चों को अगले सेशन में पढ़ाना बंद करने को मजबूर हो जाएंगे।” यह कहना है प्रेम कश्यप, अध्यक्ष, पीपीसीए का।

हिमनदों के बिना कैसे बचेंगी गंगा-यमुना

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देश के दर्जन भर पहाड़ी राज्यों में प्राकृतिक आपदा सबसे अधिक तबाही उत्तराखंड में ही मचा रही हैं। जवानी की दहलीज पर खड़े इस राज्य को भूकंप और बाढ़ दोनों से ही खासा खतरा है। उपर से भूस्खलन तो आए दिन की बात है। इससे बचने का एकमात्र उपाय पर्यावरणविदों की निगाह में राज्य के संवेदनशील इलाकों में मनुष्य की घुसपैठ को सीमित करना, नदी-नालों, जंगलों से छेड़छाड़ पर लगाम लगाना ही है। मनुष्य के हस्तक्षेप को हिमनदों वाले इलाके में रोकने की यह राय देसी और विदेशी दोनों ही पर्यावरणविद और हिमालयी भूगोल के विषेशज्ञ दे रहे हैं। जीवनदायी और पुण्य पावन गंगा नदी का स्रोत गंगोत्री ग्लेशियर वैज्ञानिकों के अनुसार तेजी से सिकुड़़ रहा है। उत्तराखंड के तहत अन्य प्रमुख ग्लेशियर यमुनोत्री, पिंडारी और शिखर कामेट, काफिनी, मैकटोली, मिलम, नमिक, रालम, सुदरढूंगा, बंदर पूंछ, चैराबाड़ी बमक, डोकरियानी, दूनागिरि,, खटलिंग, नंदा देवी समूह, सतोपंथ और भागीरथी खर्क, टिपरा बामक का भी कमोबेश यही हाल है। उनमें मानव दखल बढ़ने से उनके आसपास कचरे के ढेर साफ करने के लिए भी सेना को विषेस अभियान चलाने पड़ते हैं। इन ग्लेषियरों के लिए केदारनाथ आपदा सबसे बड़ा संकेत है। इसके बावजूद धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के नाम पर चारधाम यात्रा रूट पर सदाबहार सड़क बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना षुरू कर दी गई है।
मानव दखल और जलवायु में गर्मी बढ़ने के कारण गंगोत्री ग्लेशियर में नई झील बन गई है जिससे उसके नीचे के क्षेत्रों में बाढ़ आने पर केदारनाथ जैसी किसी आपदा की चेतावनी वैज्ञानिक दे रहे हैं। यह चेतावनी वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने वहां के सर्वेक्षण के आधार पर दी है। उनके अनुसार केदारनाथ आपदा भी उसके उपर स्थित चैराबाड़ी ग्लेशियर में विशाल झील बनने और फिर उसके फट जाने से ही आई थी। गंगोत्री ग्लेशियर में इस झील के कारण गौमुख के बजाए अब भागीरथी उसके दाएं से निकलने लगी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूट कर झील बनने की यह अकेली घटना नहीं है। बगल के राज्य हिमाचल प्रदेश में पिछले दो साल में प्राकृतिक झीलों की संख्या 596 से बढ़कर 705 हो गई है। इस तरह समूचे मध्य हिमालय के ग्लेशियरों के अस्तित्व पर खतरे की तलवार लटक रही है। मध्य हिमालयी क्षेत्र महाहिमालय के दक्षिण में फैली पर्वत श्रृंखला है। इसकी चोड़ाई 40 से 60 किमी ओर उंचाई औसतन 3500 मीटर है। इसके दोनों तरफ गहरी घाटियां और ढलानों पर घने जंगल हैं। दुनिया की खाक छान चुका प्रकृति प्रेमी सैलानी लगभग सन 1846 में इस क्षेत्र में पहुंचा तो उसने गढ़वाल के उत्तुंग पर्वत शिखरों को सबसे खूबसूरत पाया। उसने बताया है कि तक यहां के हिमनद मीलों दूर तक फैले हुए थे और मनुश्य के वहां तक फटकने का दूर-दूर तक कोई निषान नहीं था।
उस सैलानी ने इस अपार हिमराशि के अनन्त काल तक अखंड रहने की भविश्यवाणी की थी। दुर्भाग्य यह है कि उसकी यात्रा के पौने दो सौ साल बाद ही यह हिमनद सिकुड़ कर आधे रह गए और अब इनके अस्तित्व के साथ ही साथ मानव जाति के सिर पर भी खतरा मंडरा रहा है। इन हिमनदों के पिघलते ही गंगा और यमुना दोनों ही नदियां सूख जाएंगी जिससे मनुश्य जाति का अस्तत्व ही खतरे में पड़ जाएगा। याद रहे कि सरस्वती नदी सूखने से ही सिंधु घाटी की समृद्ध सभ्यता नश्ट हुई थी। यह बात दीगर कि हमारी सिंघु घाटी के पार बसे निवासियों को आज भी दुनिया हिंदु के रूप में ही जानती है जो सिंघु का ही अपभ्रंश है। मैदान में सैकड़ों किलोमीटर तक जो सदानीरा गंगा मनुष्यों के पाप धोने से लेकर उनका पेट भरने के काम आती है उसमें पानी की धार बरकरार रखने के लिए उत्तराखंड के 968 छोटे बड़े हिमनदों को पिघल कर बूंद-बूंद पानी टपकाना पड़ता है। यह ग्लेषियर करीब 2850 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। इसके अलावा भी सैकड़ों पहाड़ी सोतों, नालों और झीलों का पानी मिलकर गंगा को उसका पावन स्वरूप प्रदान करते हैं।
गंगा में प्रदूशण खत्म करके उसके अस्तित्व को बचाने के लिए मोदी सरकार ने नमाममि गंगे परियोजना तो चला रखी है मगर उत्तराखंड हाईकोर्ट की ऐतिहासिक कोशिश को वह नाकाम करने में जुटी हुई है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा को मानव का दर्जा देकर उसे भी मानवाधिकारों से लैस और मानवों को उपलब्ध सारे कानूनों का हकदार घोशित किया हुआ है। इसके बाद गंगा से किसी भी प्रकार की मनमानी संज्ञेय अपराध हो जाता। उसी से घबरा कर भारतीय संस्कृति की झंडबरदार भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेष को पलटवाने के लिए पहुंची हुई है। इससे साफ है कि देष के नागरिकों द्वारा निर्वाचित सरकार भी उन नागरिकों के अस्तित्व की रक्षा के बजाए प्रकृति के मनमाने दोहन को तवज्जो दे रही हैं क्योंकि उसमें स्याह-सफेद की खासी गुंजाइष रहती है।
हिमनदों के छीजने और जंगलों के कटने से पिछले पचास साल में पानी बरसाने वाले बादलों का घनत्व भी छीज रहा है। इसी वजह से माॅनसून में भी खूब उतार-चढ़ाव होने लगा है और बारिष की मात्रा घटने लगी है। बादलों के कमजोर पड़ने से ही उत्तराखंड में तो दो-तिहाई से भी अधिक क्षेत्र में फकत जंगल होने के बावजूद बादल फटने की आपदा बढ़ती जा रही है। ऐसे विकट हालात के बावजूद राज्य और केंद्र सरकार द्वारा जलवायु परिवर्तन से उत्तराखंड जैसे महत्वपूर्ण राज्य को बचाने के ठोस उपाय न करना अंततः राज्य के बाशिंदों पर ही भारी पड़ेगा।

आखिर कब खुलेगा आढ़त बाजार का बॉटल-नेक

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वर्ष 2013 में चकराता रोड चौड़ीकरण के बाद उम्मीद जगी थी कि अब शायद देहरादून शहर को आढ़त बाजार के बॉटल-नेक से भी निजात मिल जाएगी, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी मामला जस का तस बना हुआ है। आज भी शहरवासियों को इस बॉटल-नेक में दिनभर में एक बार तो फंसना ही पड़ता है। उधर, एमडीडीए में लगातार आला पदों पर अधिकारियों की बदली की वजह से यह प्रोजेक्ट लगातार पीछे खिसकता जा रहा है जिसका खामियाजा कहीं न कहीं आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
एमडीडीए में आर मीनाक्षी सुंदरम के वीसी रहते समय आढ़त बाजार चौड़ीकरण एवं शिफ्टिंग के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम हुआ। यहां तक की इसके प्रथम चरण में यहां सिंह गुरूद्धारा के सामने वाली कुछ दुकानों का अतिक्रमण तोडक़र उन्हें पीछे भी किया गया। जबकि रेलवे स्टेशन चौक से लेकर सहारनपुर चौक तक उन दुकानों पर भी लाल निशान लगाने का काम कर लिया गया था जिनके कारण यहां पर जाम की समस्या पैदा होती है लेकिन मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण में लगातार अधिकारियों की बदली के कारण यह प्रोजैक्ट पीछे खिसकता चला गया। मीनाक्षी सुंदरम के बाद आए अधिकारियों ने इस प्रोजैक्ट में अब तक बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है जिस कारण यह मामले आगे बढ़ता नहीं दिख रहा है। करीब एक माह पूर्व वीसी का कार्यभार संभाल चुके डॉ.आशीष श्रीवास्तव का भी कहना है कि उनकी कोशिश होगी कि शहर की इस ज्वलंत समस्या के निदान के लिए तेजी से काम किया जाए। इसके लिए उन्होंने संबंधित फाइलें भी तलब की हैं।
एमडीडीए की प्रोजैक्ट मैनेजमैंट यूनिट ने बकायदा आढ़त बाजार का सर्वे कर यहां से कितने दुकानदारों का विस्थापन किया जाना है इसकी पूरी सूची तैयार कर रखी है। यहां तक की आढ़त बाजार के दुकानदारों से इसे लेकर कई दौर की वार्ताएं भी की चुकी हैं। यहां तक की व्यापारियों ने भी उस समय काफी हद तक शिफ्टिंग का मन बना लिया था। भाजपा नेता विनय गोयल के अनुसार अगर एमडीडीए प्रोजैक्ट को सही तरह से आगे बढ़ाता तो व्यापारी क्यों नहीं उसका साथ देंगे।
एमडीडीए की योजना थी कि आढ़त बाजार को शहर से बाहर किसी स्थान पर शिफ्ट किया जाए। पूर्व में तक इसे निरंजनपुर मंडी परिसर में शिफ्ट करने की योजना था लेकिन मंडी परिसर में स्थान कम होने के कारण बाद में इसे शिमला बाईपास रोड पर कहीं जमीन लेकर बसाने की योजना थी। इसके पीछे मकसद यही था कि आढ़त सरीखी जगह पर अक्सर ही भारी वाहनों का आवागमन होता रहता है, ऐसे में शहर के बाहर ही अगर इस बाजार को बसाया जाएगा तो शहर में जाम की समस्या भी कम से कम उत्पन्न होगी।