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आंकड़ों के लिहाज से 2017 चारधाम सबसे सफल यात्रा

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ऋषिकेश, श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा ने भी शीतकाल के लिए विराम ले लिया। वर्ष 2013 की आपदा के बाद इस वर्ष की चारधाम यात्रा आंकड़ों के लिहाज से सबसे सफल रही। इस दौरान चारधाम सहित प्रसिद्ध श्री हेमकुंड साहिब में कुल 18 लाख 53 हजार 900 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

इस वर्ष 29 अप्रैल को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। तीन मई को केदारनाथ धाम व छह मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा ने गति पकड़ ली थी। नतीजा, दूसरे सप्ताह ही ऋषिकेश में वाहनों का टोटा पड़ने लगा। लिहाजा प्रशासन को कुमाऊं मंडल सहित अन्य स्रोतों से भी चारधाम के लिए वाहनों का इंतजाम करना पड़ा। हालांकि, मानसून काल में यात्रा कुछ हल्की रही, लेकिन इसके बाद फिर उसने रफ्तार पकड़ ली।

2013 में केदार घाटी की आपदा के बाद चारधाम यात्रा पूरी तरह ठप पड़ गई थी। वर्ष 2014 व 2015 में भी स्थिति निराशाजनक ही रही। वर्ष 2016 में स्थिति कुछ संभली, मगर बीच में हुई बारिश के कारण यात्रा फिर लडख़ड़ा गई। हालांकि, इस वर्ष चारधाम दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या 13 लाख 35 हजार 239 पहुंच गई। लेकिन, इस वर्ष की यात्रा आंकड़ों के लिहाज से बेहतरीन रही।

राज्य सरकार ने आपदा से सबक लेते हुए त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम को यात्रियों के फोटोमैट्रिक पंजीकरण की जिम्मेदारी सौंपी। इससे चारधाम यात्रा के काफी हद तक व्यवस्थित आंकड़े सामने आ रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम के सभी 16 केंद्रों पर सात लाख 63 हजार 69 यात्रियों ने पंजीकरण कराया। जबकि, चारों धाम में कुल दर्शनार्थियों की संख्या 18 लाख 53 हजार 900 रही।

उ.प्र. से पहुंचे सबसे अधिक यात्री 

चारधाम दर्शनों को इस वर्ष सबसे अधिक 98161 यात्री उत्तर प्रदेश से पहुंचे। जबकि महाराष्ट्र से 90114, मध्य प्रदेश से 75216, पंजाब से 74521, राजस्थान से 64069, गुजरात से 49607, दिल्ली से 44033 कर्नाटक से 36246, हरियाणा से 32371, आंध्र प्रदेश से 32238 यात्रियों ने चारधाम दर्शन किए। इसके अलावा लक्षद्वीप सबसे कम दो, मिजोरम से चार, नागालैंड से 17 व दमन व दीव से 49 यात्री चारधाम पहुंचे। देश के सभी 29 राज्यों व सात केंद्र शासित प्रदेशों से यात्री यहां पहुंचे।

13 हजार विदेशी पहुंचे चारधाम

इस वर्ष 12827 विदेशी यात्रियों ने भी चारधाम दर्शन किए, जो कि 2013 के बाद सर्वाधिक संख्या है। इससे पूर्व, वर्ष 2016 में 7112, वर्ष 2015 में 6919 व वर्ष 2014 में 319 विदेशी यात्री चारधाम दर्शनों को पहुंचे थे।

धाम———– पंजीकृत श्रद्धालु

यमुनोत्री———–303784

गंगोत्री————-353266

केदारनाथ———-560053

बदरीनाथ———–509718

हेमकुंड साहिब—125079

कुल—————1853900

बिल्डरों को पेनाल्टी में राहत देने की तैयारी में छूट रहे पसीने

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देहरादून। तय समय के बाद पंजीकरण को आवेदन करने वाले बिल्डरों को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में पेनल्टी में छूट देने के फॉमूर्ले की खोज में आवास विभाग के अफसरों की चकरघिन्नी बनी है। इस संबंधी में अन्य राज्यों की ओर से अपनाई गई व्यवस्था/फॉर्मूले के बाद भी तस्वीर साफ नहीं हो पा रही। दरअसल, रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट-2016 एक केंद्रीय कानून होने के नाते राज्य के अधिकारी किसी भी तरह की चूक करने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि इस कैबिनेट की बैठक में पेनल्टी में राहत देने के मसले को रखा नहीं जा सका।

दरअसल, रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट में स्पष्ट किया गया है कि जिन बिल्डरों ने निर्माणाधीन परियोजनाओं में एक मई 2017 से पहले कंप्लीशन सर्टिफिकेट (कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र) नहीं लिया, वे सभी 31 जुलाई तक रेरा में पंजीकरण के लिए आवेदन कर लेंगे। ऐसा न करने की सूरत में कुल परियोजना लागत के 10 फीसद तक जुर्माना वसूल करने की व्यवस्था एक्ट के सेक्शन 59-1 में की गई है। तय समय के भीतर 168 बिल्डर पंजीकरण को आवेदन कर चुके थे। जबकि इसके बाद भी पंजीकरण को आवेदन जारी रहे, जो संख्या अब तक 252 पहुंच चुकी है। पेनल्टी अवधि में बिल्डरों के बढ़ते आवेदन को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यवस्था की थी कि एक एक अगस्त से 31 अक्तूबर तक अलग-अलग फेज में आवेदन करने वाले बिल्डरों पर एक, दो, पांच फीसद की पेनल्टी लगाई जाएगी। जबकि इसके बाद 10 फीसद जुर्माने का प्रावधान किया गया। हालांकि उत्तराखंड रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशंस ने रियल एस्टेट सेक्टर के मंदी के दौर से गुजरने का हवाला देते हुए गुहार लगाई कि पेनल्टी को माफ किया जाए और अन्य राज्यों की तरह वहन करने योग्य पेनल्टी लगाई जाए। राज्य सरकार भी इस बात से सहमत हो गई और अन्य राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन किया गया। इसको लेकर रेरा सेल प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज चुकी है। इसमें 60 फीसद तक की जा चुकी रजिस्ट्री (बिक आदि बिंदु राहत के लिए शामिल किए गए। हालांकि शासन के अधिकारियों ने एक्ट व अन्य राज्य की व्यवस्था के अध्ययन में पाया कि इसमें 10 फीसद तक पेनल्टी की बात कही गई है, जबकि अन्य राज्यों ने जुर्माने की निर्धारित राशि तय की है। लिहाजा, बिना उचित जांच-पड़ताल के अन्य राज्य की व्यवस्था को लागू करने से केंद्रीय कानून की खिलाफत हो सकती है। वहीं, अधिकारियों ने केंद्रीय राज्य आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी की उस बात का भी संज्ञान लिया, जिसमें वह कह चुके हैं कि कुछ राज्य रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट के खिलाफ काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ तेलंगाना व कर्नाटक में ऐसी ही व्यवस्था के खिलाफ कुछ लोग कोर्ट भी जा चुके हैं। यही वजह है कि आवास विभाग के अधिकारी राहत के फार्मूले पर नए सिरे से मंथन में जुट गए हैं।
रेरा प्राधिकारी व सचिव आवास अमित नेगी ने बताया कि इस समय रियल एस्टेट सेक्टर मंदी के दौर से गुजर रहा है, लिहाजा बिल्डरों को राहत देने को हरसंभव विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि निर्णय कानून के दायरे हो, इसलिए समय लग रहा है। यदि बिल्डरों को राहत नहीं देते हैं तो उससे परियोजना की लागत बढ़ेगी और निवेशकों पर ही उसका बोझ पड़ेगा।
राज्य में बिल्डरों पर पेनल्टी की स्थिति
168, शून्य
64, एक फीसद
10, दो फीसद
08, पांच फीसद
02, 10 फीसद
अन्य राज्यों में यह व्यवस्था
उत्तर प्रदेश, एक अगस्त से 15 अगस्त तक पंजीकरण कराने में किसी तरह की पेनल्टी नहीं। इसके बाद 31 अक्तूबर तक के लिए 1000 रुपये की पेनल्टी पर पंजीकरण का प्रावधान। गुजरात, 30 सितंबर तक कोई पेनल्टी नहीं। इसके बाद 31 अक्तूबर तक रजिस्ट्रेशन के बराबर पेनल्टी। गोवा, पहले 31 अक्तूबर तक किसी तरह की पेनल्टी नहीं थी, जिसे बढ़ाकर अब 31 दिसंबर किया गया है। महाराष्ट्र, अगस्त माह तक एक लाख रुपये या रजिस्ट्रेशन की राशि जो भी अधिक हो। इसके बाद 30 सितंबर तक दो लाख रुपये का जुमार्ना या रजिस्ट्रेशन की दोगुनी राशि जो भी अधिक हो। 

डॉक्टरों के ग्रुप ने लंडौर के स्कूली बच्चों को बांटे ट्रेक-सूट और ऊनी कंबल

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मसूरी। एनएससीबी, मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के 68 साथी डॉक्टर मसूरी हिल-स्टेशन में अपने 78वी सालगिरह बनाने के लिये आये। इस मुलाकात को खास बनाने के लिए इन लोगों ने लंडौर कैंट में सरकारी प्राथमिक विद्यालय, मसूरी के छात्रों को ठंड से बचने के लिए गरम ट्रैक-सूट और कंबल दिए।

बहुत ही छोटे से समारोह में, प्राथमिक विद्यालय के बीस छात्र सुबह लाइन बनाकर स्कूल में अपने सर उदित शाह के साथ खड़े मिले जिन्हें सर्दियों के चरम पर आने से पहले ही डॉक्टरों के इस ग्रुप ने गरम ट्रेक-सूट और ऊनी कंबल बाटे।

इस कार्यक्रम में कोई व्याख्यान नहीं थे, कोई भाषण नहीं केवल गरीब छात्रों के लिए कुछ करने की ललक थी। स्थानीय तौर पर इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाले आभा सैली, पूर्व प्रिंसिपल मसूरी गर्ल्स इंटर कॉलेज और प्रोफेसर गणेश सैली ने कहा कि, ‘इस उम्र में ऐसा अच्छा काम करना काबिले तारीफ है, और यह एक ऐसी भावना है जो आगे बढ़ानी चाहिए। डॉक्टरों द्वारा किया गया यह नेक काम बहुत लंबा रास्ता तय करेगा। ‘

प्रिंसिपल मोहम्मद तस्लीम ने कहा कि, ‘ये उदार डॉक्टर अपने आदर्श वाक्य ‘पुनर्मिलित, पुनर्मिलन और पुनजागरण’ के लिए जीवित रहते हैं, जो इन छात्रों को याद रहेंगे और उम्मीद है कि वे अपने जीवन में भी इसे आगे बढ़ाऐंगे।’

गैर न्यायपंचायत क्षेत्र में खुलेंगे फाॅर्मर मशीन बैंकः सुबोध उनियाल

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उत्तरकाशी। कृषि, उद्यान एवं रेशम विकास मंत्री सुबोध उनियाल ने तहसील बडकोट के गैरबनाल में आयोजित राजकीय देवलांग सांस्कृतिक मेला का बतौर मुख्य अतिथि के रूप में विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का शुभारंभ किया। इस मौके पर काबिना मंत्री सुुबोध उनियाल ने गैर न्यायपंचायत क्षेत्र में फाॅर्मर मशीन बैंक खोलने की घोषणा की। जबकि राजकीय इण्टर कालेज गडोली के नाम शदीद राकेश चमयान के नाम पर रखने की मांग पर उन्होने मुख्यमंत्री से वार्ता करने का आश्वासन दिया। साथ ही खेल मैदान के लिए विधायक निधि से प्रयास करने का आश्वासन दिया।

रविवार को मेले में पहुंचे कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि भारी मात्रा में प्रदेश के अन्दर फल कलेक्सन सेन्टर खोले जा रहे हैं। सरकार ने काश्तकारों की फसल की क्षति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में फसल बीमा का मानक न्याय पंचायत स्तर पर किया है। सरकार इस साल काश्तकारों की कृषि भूमि की जांच रिपोर्ट मुहैया करायेगी। गुणवत्ता परक खाद दी जाएंगे। पर्वतीय बीज विकास की स्थापना की गई है। नौजवानों को कृषि के क्षेत्र में कार्य करने के जिले में 2 प्रतिशत की ब्याज पर ऋण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बागवानी के क्षेत्र में गम्भीरता से कार्य कर रहे है, बागवानी को हिमाचल प्रदेश के बराबर बनाने के लिए सरकार बागवानी काश्तकारों की सहयोग करेंगे। उन्होने चकबंदी विंग गांव को लेकर कहा कि सरकार, मैं एक गांव हूं, के तहत वीर माधोसिंह भण्डारी के नाम पर हर ब्लाक में एक गांव का चयन कर रही है, जिन गांवों में सामुहिक खेती की प्रथा आज भी विद्यमान है, उक्त गांव में कृषि के क्षेत्र में एक करोड़ खर्च किया जाएगा। उन्होने कहा कि 10 या 10 से अधिक किसानों को आंशिक चकबंदी के तहत सरकार कानूनी संरक्षण दे रही है। अतिवृष्टि से फसलों की नुकसान पर 10 हजार तक के सहायता मंडी परिषद के द्वारा काश्तकारों को दिया जा रहा है। जल्द ही सरकार महिला स्वायत समूह को एक मुस्त फण्ड देने जा रही है जिससे वे अपनी आजिविका का संवर्धन कर आर्थिक रूप से सम्मपन बन सकें। इस दौरान यमुनोत्री विधायक केदार सिह रावत, पुरोला विधायक राजकुमार, नौगाव ब्लाक प्रमुख रचना बहुगुणा, दीपक बिजल्वाण आदि शामिल रहे। 

‘आप’ ने किया महानगर कार्यकारिणी का विस्तार

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देहरादून। आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। सोमवार को देहरादून महानगर इकाई ने लक्ष्मी रोड स्थित जिला कार्यालय में एक बैठक आयोजित की। महानगर अध्यक्ष विशाल चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में नगर निगम चुनाव व कार्यकारिणी विस्तार सहित कई नीतिगत निर्णय लिए गए।
महानगर अध्यक्ष विशाल चौधरी ने कहा कि आम आदमी पार्टी आगामी नगर निगम चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को कड़ी चुनौती देने के लिये तैयार है। संगठनात्मक रूप से आम आदमी पार्टी प्रत्येक वार्ड में बूथ अध्यक्ष व पोलिंग सेंटर प्रभारी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है और आने वाले समय में नगर निगम सीमा विस्तार के अंतर्गत प्रत्येक नवगठित वार्डों में बूथवार और बूथ एजेंट बनाए जाएंगे। प्रत्येक वार्ड में वार्ड अध्यक्षों व वार्ड सचिवों की नियुक्तियां पहले ही की जा चुकी है, जो तेजी से सदस्यता अभियान पर काम कर रहे हैं।
बैठक में महानगर कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए विपिन खन्ना को महानगर उपाध्यक्ष, राधव दुआ को शिक्षक प्रकोष्ठ महानगर अध्यक्ष व दिनेश सती को राजीव नगर वार्ड सचिव पद पर सर्वसम्मति से नियुक्त किया गया। विशाल चौधरी ने बताया कि 26 नवम्बर को आम आदमी पार्टी के स्थापना दिवस पर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में देहरादून से बड़ी संख्या में कार्यकर्तागण भाग लेने जाएंगे।
इस बैठक में प्रदेश मीडिया प्रभारी कुलदीप सहदेव, जिला सचिव अभिषेक बहुगुणा, जिला उपाध्यक्षद्वय विनोद बजाज व सुदेश चौरसिया, महानगर सचिव विनय राणा, राजपुर विधानसभा प्रभारी सरिता गिरी, कैंट विधानसभा प्रभारी उपमा अग्रवाल, रायपुर विधानसभा प्रभारी जीतेन्द्र पन्त, डोईवाला विधानसभा प्रभारी दिनेश पेटवाल, शैलेश तिवारी, धर्मेन्द्र ठाकुर, राजेन्द्र सिंह, कमल राणा, धीरेन्द्र कुमार आदि उपस्थित रहे।

पेशी पर आए अभियुक्त को बदमाशों ने गोलियाें से भूना

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हरिद्वार। रूड़की कोर्ट में पेशी पर आए एक अभियुक्त को तीन बदमाशों ने कोर्ट परिसर में ही गोलियों से भून दिया। इस घटना से अदालत में हड़कंप मच गया। पुलिस बुरी तरह घायल को फौरन सिविल अस्पताल ले गई, जहां उसने दम तोड़ दिया। वहीं इस बीच पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो बदमाशों को दबोच लिया, जबकि एक आरोपी फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी कृष्ण कुमार वीके मयफोर्स मौके पर पहुंच गए हैं।

सोमवार की सुबह एक आरोपी देवपाल राणा को पेशी पर रूड़की कोर्ट लाया गया था। वह सुनील राठी गिरोह का गुर्गा बताया जाता था। पुलिस देवपाल को अदालत में पेश करने ले जा रही थी, तभी तीन बदमाशों ने उस पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। देवपाल घायल हो गया। गंगनहर कोतवाली प्रभारी कमल लूंठी ने इस बीच तत्परता दिखाते हुए दो हमलावरों को दबोच लिया, जबकि एक आरोपी भागने में कामयाब रहा। गोली चलाने वाले चीनू पंडित गिरोह के बदमाश बताए जा रहे हैं। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। 

गोली चलाने वाले चीनू पंडित गिरोह के सदस्य बताए जा रहे हैं। गोली बारी की सूचना मिलते ही क्षेत्र में हडकंप मच गया। कोर्ट परिसर में मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगे। इसी बीच गंगा नहर कोतवाली प्रभारी कमल लूंठी ने पुलिस कर्मियों की मदद से दो आरोपियों को दबोच लिया, जबकि एक फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस ने घायल अभियुक्त को उपचार के लिए भर्ती कराया। पुलिस पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ कर रही है।
वहीं पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर ली है तथा फरार आरोपी की तलाश की जा रही है। कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े हुए इस गोली कांड़ ने एक बार फिर से पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

राजाजी पार्क मे रह रहे वन गुर्जरो का सांकेतिक धरना

ऋषिकेश के गौहरी रेंज वन विभाग कार्यालय के समक्ष राजाजी पार्क मे रह रहे वन गुर्जरो ने सांकेतिक धरना दिया और अपनी मांग वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखी।

राजाजी टाइगर रिजर्व की गोहरी रेंज के कुनाओ में सालों से रह रहे  वन गुज्जर अपनी विस्थापन की राह देख रहे हैं लेकिन पार्क प्रशासन इन लोगों को विस्थापन परिक्रिया के तहत विस्थापित नहीं कर पा रहा है जिसके चलते वन गुजरों के  छोटे से  परिवारों में पार्क प्रशासन के प्रति रोष है वन गुर्जरों का कहना है कि हमारे 70 परिवारों का विस्थापन अभी तक नहीं हो पाया है हम सरकार से लगातार विस्थापन की मांग कर रहे हैं लेकिन पार्क प्रशासन नीति का पालन नहीं कर रहा है जिसको लेकर वन गुज्जरो ने धरना दिया है

राजाजी पार्क के गौहरी रेंज मे रहने वाले वन गुर्जरो को वहां से जबरदस्ती हटाने से गुस्साए वन गुर्जरो ने आज पार्क प्रशासन कार्यालय के समक्ष शांति धरना प्रदर्शन किया और अपने विस्थापन की मांग की, वही वन विभाग के अधिकारीयो का कहना है कि पूर्ण विस्थापन के बाद भी वन गुर्जर पार्क मे अवैध रूप से रह रहे है।छुटे हुए वन गुर्जरों के पुनर्वास को लेकर दिया  धरना राजाजी नेशनल पार्क कर रहा नाइंसाफी .राजा जी राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में वर्षों से रह रहे वन गुर्जरों के पुनर्वास को लेकर लंबे समय से कार्यवाही चल रही है लेकिन अभी तक सफल नहीं हो पाए हैं वन गुर्जरों की और राजा जी नेशनल पार्क की समस्या लंबे समय से चलती आ रही है राजाजी नेशनल पार्क की तरफ से वन गुजरों के साथ नाइंसाफी को लेकर पथिक  सेना संगठन के बैनर तले राजा जी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क में रहने वाले वन गुर्जर उनके परिवार वालों ने पार्क प्रशासन की गोहरी रेंज पर धरना दिया है

वही पार्क प्रशासन का कहना है कि विस्थापन की परिक्रिया पार्क प्रशासन द्वारा समय पर ही कर दी गई थी लेकिन लगातार वन गुज्जरों के परिवार की  आबादी बढ़ने पर लगी है बावजूद इसके सभी को  जमीन उपलब्ध करा दी गई है लेकिन यह लोग पार्क की जमीन खाली  करने को तैयार नहीं है जिसके चलते पार्क प्रशासन ने इनको डेरे खाली करने के नोटिस दिए हैं ,  गुज्जरों के और पाक प्रशासन के बीच हमेशा से ही विस्थापन को लेकर आपसी खींचातानी चली आ रही है एक तरफ वन विभाग का कहना है कि गुर्जरों को पार्क प्रशासन ने भूमि आवंटित कर दी है लेकिन यह गुज्जर वहां ना रहकर पार्क की भूमि खाली नहीं करना चाहते जिसको लेकर दोनों पक्षों में लगातार मतभेद बना रहता है अब देखना यह होगा कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन कितनी जल्दी पाक से इन गुर्जरों को विस्थापित कर पाता है।

राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क छूटे हुए वन गुजरों का पुनर्वास को लेकर कुछ भी नहीं कर रही है जब तक छूटे भी गुज्जर और उनको पुनर्वासित नहीं किया जाता तब तक उन्हें पार्क म सेना हटाया जाए गुज्जरों के अध्यक्ष मोहम्मद अमीर हमजा ने कहा कि अगर गुज्जरों के घरों में तोड़फोड़ और बदसलूकी की गई तो 1 हफ्ते के बाद सभी गुर्जर परिवार समेत राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के निदेशक कार्यालय पर अनशन पर बैठ जाएंगे साथ ही चेतावनी दी की वन गुर्जरों पर किए जा रहे अत्याचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अगर आप दिल्ली-देहरादून सड़क से जा रहे हैं तो सावधान !!

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झबरेडा-दिल्ली देहरादून हाईवे मार्ग पर टिकौला गांव के समीप शीला खाले का पुल काफी खराब हालत में है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पुल की हालत को लेकर किसान नेता कई बार विभाग के अधीक्षण अभियंता से गुहार लगा लगा चुके हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग शायद किसी बड़े हादसे के इंतजार में है।

रविवार को पुल की हालत को लेकर किसान नेताओं ने पुल पर प्रदर्शन किया और लोक निर्माण विभाग अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि अगर अगले एक सप्ताह में पुल को ठीक नहीं कराया गया तो पुल पर जाम लगाने के बाद विभागीय अधिकारियों को बंधक बनाया जाएगा।

किसान नेता चौधरी सेठपाल सिंह, प्रधान विजय कुमार चौधरी मैनपाल सिंह, सुरेश शर्मा ने प्रदर्शन करते हुए बताया कि यह मार्ग दिल्ली देहरादून बाईपास हाईवे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर टिकौला गांव के समीप शिला खाला का यह बड़ा पुल दयनीय हालत में है। यह पुल अंग्रेजी शासन काल में 80 वर्ष पहले बना था, जब पुल की भार क्षमता लगभग 200 कुंतल रही थी। आज दयनीय हालत में होने के बावजूद भी पुल से 500 से 1000 कुंतल के भारी वाहन हर समय गुजर रहे हैं, जिससे यह पुल नीचे लटक चुका है और कब टूट जाए इसका कुछ अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इतना तय है कि इस पुल पर कोई बड़ा हादसा किसी भी समय हो सकता है और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी को बार-बार सूचना देने के बावजूद भी विभाग पुल की अनदेखी कर रहा है।

किसान नेता सेठपाल सिंह ने चेतावनी दी है कि अगर अगले एक सप्ताह में पुल की मरम्मत के लिए विभाग ने कार्रवाई नहीं की तो पुल पर जाम लगाकर मार्ग को बंद कर दिया जाएगा और विभाग के अधिकारियों को बंधक बनाया जाएगा।

भारत के आखिरी गांव माणा के लोगों की आप बीती

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बद्रीनाथ धाम के कपाट आने वाले 6 महीने के लिए बंद हो चुके हैं, साथ ही बंद हो चुके हैं भारत के आखिरी गांव माणा के घर और लोगों की दुकानें।जी हां, बद्रीनाथ धाम से लगभग 3-4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भारत का आखिरी गांव माणा भी बंद हो चुका है।गांव के लोगों ने अपने-अपने घरों में ताले लगाकर निचले घरों का रुख करने लगे है। सुनने में तो यह बात आसान सी लगती है लेकिन असल में इस गांव के लोग छः महीन माणा और छः महीने जोशीमठ,कर्णप्रयाग,देहरादून और अलग-अलग जगहों पर विस्थापित हो जाते हैं।ठीक छः महीने बाद जब बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं, तब 4-5 दिन पहले से यह लोग अपने घरों और बद्री विशाल के प्रहरी घंटाकर्ण की सेवा में लग जाते हैं।

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इसी कड़ी में भारत की आखिरी दुकान के मालिक भूपेंद्र सिंह टकोला से बातचीत में बताया कि, “यह साल उनके और उनके जैसे सभी व्यापारियों के लिए काफी अच्छा रहा। 2013 की आपदा के बाद मानो यात्रा पर विराम लग गया था लेकिन साल 2017 में सालों बाद एक बार फिर रौनक देखने को मिली है।” भूपेंद्र बताते हैं कि, “यह छः महीने माणा के गांव के लोगों के लिए ना केवल अच्छे समय होते हैं बल्कि उनके कमाने का जरिया भी यही छः महीने होते हैं।” माणा गांव के लोग भेड़ों से निकाले गए ऊन की टोपियों,शॉल,र्स्काफ,जैकेट,स्वेटर आदि चीजें अपने हाथों से बनाकर बेचते हैं।भूपेंद्र जिनके परिवार में उनके अवाला उनकी पत्नी और दो बच्चें हैं वह गोपेश्वर के रहने वाले हैं लेकिन छः महीने हिदुस्तान की आखिरी दुकान चलाते हैं।भूपेंद्र बताते हैं कि, “माणा से विदाई लेने के समय पूजा-पाठ और ढ़ोल दमाउं के साथ भगवान बद्री विशाल के प्रहरी घंटाकर्ण की पुजा की जाती है और उनकी देख-रेख का जिम्मा क्षेत्रपाल को सौपा जाता है।”

बद्री विशाल के कपाट खुलने के साथ ही माणा के निवासी घंटाकर्ण की देखरेख में लग जाते हैं।आपको बतादें कि माणा के लोगों के जीवन में उतार-चढ़ाव होने के बाद भी यहां के 90 प्रतिशत लोग ग्रेजुएट है, 80 प्रतिशत लोग नौकरी कर रहे हैं और 20 प्रतिशत लोग छोट-मोटे व्यापार से अपना जीवनयापन कर रहे हैं।

यह लोग अपने जीवन को लेकर सकारात्मक है और अपनी परंपरा और संस्कृति के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं।माणा की निवासी से बातचीत में बताया कि, “यह कोई आसान बात नहीं कि हमें अपना घर छोड़कर जाना पड़ता है लेकिन हम खुशी-खुशी इस रस्म को निभाते हैं और अगले साल की प्रतिक्षा में रहते हैं।”

क्या विडंबना है जीवन की प्रकृति के आगे घुटने टेक कर माणा के लोग छः महीनों के लिए यहां से पलायन कर देते हैं? लेकिन किसी ने क्या खूब कहा है अगर अंत खूबसूरत नहीं तो वह किसी नए शुरुआत का परिचायक है और माणा के लोगो के लिए छः महीने के पलायन करने से बढ़कर आने वाले साल का इंतजार करना होता है।

फिल्म ‘पद्मावती’ की रिलीज की प्रस्तावित तारीख टली

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‘वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स’ ने फिल्म पद्मावती की प्रस्तावित तारीख को स्थगित करने का आधिकारिक रूप से एलान कर दिया है। वायकॉम ने यह निर्णय फिल्म को लेकर हो रहे विरोध को देखते हुए किया है।

वायकॉम ने अपने अधिकारिक बयान में कहा है कि फिल्म पर हो रहे विवाद को देखते हुए वायकॉम मोशन पिक्चर्स फिल्म की प्रस्तावित तारीख को स्थगित करता है। हमने प्रतिभाशाली फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के साथ मिलकर एक अच्छी फिल्म ‘पद्मावती’ बनाई है जो कि राजपूतों की वीरता, परंपरा और गरिमा को दर्शाता है। इस फिल्म की कहानी भारत के लोगों को गर्व से भर देगी।

हम कानून का पालन करने वाले एक जिम्मेदार नागरिक हैं। हम कानून और उसके अन्तर्गत स्थापित संस्थानों जिसमें सेंसर बोर्ड भी शामिल है का सम्मान करते हैं। हम उस स्थापित प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें इस बात का पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही फिल्म को प्रस्तावित करने की अपेक्षित मंजूरी और प्रस्तावित करने की अगले तारीख की घोषणा करेंगे।

उल्लेखनीय है कि शनिवार को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित विवादित फिल्म ‘पद्मावती’ कुछ चुनिंदा मीडियाकर्मियों को दिखाए जाने पर आपत्ति प्रकट की थी। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड ने अभी तक फिल्म देखी नहीं है और न ही फिल्म प्रमाणन दिया है ऐसे में फिल्म निर्माता द्वारा प्राइवेट स्क्रिनिंग करना निराशाजनक है।

प्रसून जोशी ने कहा कि फिल्म को प्रमाण पत्र देने की एक प्रणाली है तथा प्राइवेट स्क्रिनिंग से यह व्यवस्था कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि भंसाली ने सेंसर बोर्ड को जो फिल्म और कागजात सौंपे थे वह अधूरे थे। फिल्म का कथानक ऐतिहासिक है या काल्पनिक, इसकी उद्घोषणा करने वाले कॉलम को खाली छोड़ दिया गया था। इस कारण इसे फिल्म निर्माता के पास दोबारा भेज दिया गया।