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पश्चिमी विक्षोभ के चलते नैनीताल का तापमान काबू में रहा

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नैनीताल का मौसम खुशनुमा बनाए रखने में पश्चिमी विक्षोभ कारगर साबित हुआ। बीते मई में भी अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के पार नहीं जा पाया। नैनीताल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार इस साल गर्मी में जब मैदान इलाके तप रहे थे उस समय यहां समय-समय पर बारिश मेहरबान होती रही। जून में भी आए दिन वर्षा का क्रम जारी रहा और तापमान को सिर उठाने का मौका नहीं मिला।

सरोवर नगरी में इस बार पश्चिमी विक्षोभ के साथ ही मानसून जमकर मेहरबान रहा। मई से लेकर सितंबर तक 2134 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। जीआइसी मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक मानसून के सर्वाधिक मेघ जुलाई में बरसे। जिसमें 788 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। मई में 225 मिमी वर्षा हुई, जबकि प्रचंड गर्मी वाले जून में 306 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। अगस्त में 427 मिमी वर्षा हुई। सितंबर माह में 391 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। मौसम विज्ञान केंद्र प्रभारी प्रताप सिंह बिष्ट का मानना है कि संभवत: मई में कई बार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से यहां के वातावरण के नमी में काफी वृद्धि हो गई और लोकल वर्षा का चक्र चल पड़ा। जिससे स्थानीय वर्षा शुरू हो गई।

इस वर्ष मई से अक्टूबर के बीच अधिकतम पारा (डिग्री सेल्सियस में) 

7,8 व 15 मई -29

5 जून -29

24 जुलाई- 22.7

7 अगस्त – 24

30 सितंबर- 25

17 अक्टूबर- 25

पिछले सात सालों में पारा 

-मई 2017  में तीन बार अधिकतम 29 व जून में एक ही बार

-मई 2016 मई दो बार अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस

– मई 2015 मई में दो बार पारा 31 डिग्री सेल्सियस तक गया और जून में पांच बार 31 तक पहुंचा।

– मई 2014 मई में 28 से उपर नही गया, जून में 30 डिग्री सेल्सियस पर आकर ठहरा

– मई और जून 2012 में 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा।

आठ साधुओं समेत 15 को मिली बद्रीनाथ में रहने की अनुमति

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(गोपेश्वर) बद्रीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। इस अवधि में बद्रीनाथ में बिना अनुमति के पुलिस और सेना के अलावा जिन्हें रहना होता है, उन्हें प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है। इस बार आठ साधुओं सहित 15 लोगों को अभी तक बद्रीनाथ में रहने की अनुमति मिली है।
शीतकाल में बद्रीनाथ मंदिर में सुरक्षा और अन्य आश्रमों, भवनों के कुछ लोग प्रशासन की अनुमति से ही रह पाते हैं। जो तपस्वी साधु भी बद्रीनाथ में इस अवधि में तप करना चाहते हैं, उन्हें भी इसके लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होती है। इसके लिए बद्रीनाथ में अभी तक 8 साधुओं साहित 15 लोगों ने यहां पर रहने की अनुमति प्रशासन से मांगी है। हालांकि अभी यह संख्या और भी बढ़ सकती है। मंदिर की सुरक्षा के लिए बीकेटीसी के निश्चित कर्मी भी बद्रीनाथ में रहेंगे। बद्रीनाथ के थानाध्यक्ष दीपक रावत ने बताया कि बद्रीनाथ में 8 साधुओं सहित 15 लोगों को अभी तक बद्रीनाथ धाम में रहने की अनुमति मिली है। उन्होंने कहा कि यह संख्या बढ़ भी सकती है।

योगध्यान बदरी में विराजे उद्धव व कुबेरजी

बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के बाद सोमवार को उद्धवजी व कुबेरजी का उत्सव विग्रह योगध्यान बदरी पांडूकेश्वर में विराजमान हो गये हैं। जहां शीतकाल में इनकी पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं आदिगुरु शंकाराचार्य की गद्दी को नृसिंह मंदिर जोशीमठ लाया गया है।
बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के बाद बदरीश पंचायत से कुबेर जी व उद्धव जी के उत्सव विग्रह को योगध्यान बदरी पांडूकेश्वर लाया जाता है। रविवार को बदरीनाथ के कपाट संधसमय बंद होने के कारण कुबेर व उद्धव के उत्सव विग्रह को सोमवार को पांडुकेश्वर लाया गया जहां पूजा अर्चना के बाद उन्हें विराजमान किया गया। जहां पर शीतकाल में दोनों देवों की पूजा अर्चना की जाएगी। वहीं आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी को भी जोशीमठ नृसिंह मंदिर में स्थापित कर दिया गया है। जहां पर इसकी शीतकाल में पूजा-अर्चना की जाएगी। 

भविष्य बद्री मंदिर के कपाट भी हुए बंद

 पंच बद्री में से एक भविष्य बद्री (सुभाई) मंदिर के कपाट भी बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के समय पर रविवार सांय 7 बजकर 28 मिीतकाल के लिए बंद हो गए हैं।
भविष्य बद्री मंदिर के मुख्य पुजारी सुशील चंद डिमरी ने बताया कि बद्रीनाथ मंदिर की तरह भविष्य बद्री मंदिर के कपाट भी नित्य पूजा, अभिषेक और भोग के बाद शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। अब अगले वर्ष भगवान के कपाट बद्रीनाथ के कपाट खुलने के समय ही खुलेंगे। मान्यता है कि भविष्य में जोशीमठ-बद्रीनाथ मार्ग पर जब जय-विजय पहाड़ मिल जाएंगे, तभी भगवान बद्री विशाल के दर्शन भविष्य बद्री में होंगे। मूल रूप से भविष्य बद्री के रूप में एक जगह पत्थर पर भगवान बद्री विशाल का अदभुत विग्रह स्वयं अंकित हो रहा है। भगवान के चेहरे के दर्शन पूर्ण रूप से प्रकट होने लगा है। यह स्थान जोशीमठ मलारी मोटर मार्ग पर तपोवन से सलधार होते हुए सुभाई गांव में भविष्य बद्री मंदिर स्थापित है। यहां पर भगवान श्री हरी के साथ-साथ शालिग्राम रूप में बद्रीश पंचायत भी अंकित हो रही है। 

मुख्यमंत्री स्वास्थ बीमा योजना के लाभार्थी इलाज की झेल रहे परेशानियां

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(देहरादून) मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मरीजों को अब नई मुसीबत से जूझना पड़ रहा है। उनके पास कार्ड है, पर इलाज फिर भी नहीं मिल पा रहा। अस्पताल पहुंचने पर पता चलता है कि कार्ड मान्य नहीं है। ऐसे में उन्हें बिना इलाज वापस लौटना पड़ रहा है।
एमएसबीवाई से जुड़ी बीमा कंपनी ने राज्य स्थापना दिवस पर योजना से हाथ खींच लिए थे। जिसके बाद से इस योजना के तहत मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा था। स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने मरीजों का खर्च स्वयं वहन करने का फैसला लिया। इस काम के लिए मुख्य चिकित्साधिकारियों को माध्यम बनाया गया है। एमएसबीवाई कार्ड धारकों को सीएमओ से अप्रूवल मिलने के बाद इलाज दिया जाता है। इलाज में आने वाले खर्च का बिल बनाकर सीएमओ ऑफिस भेजा जाता है। फिर सीएमओ कार्यालय की तरफ से भुगतान जारी किया जाता है। लेकिन इस बीच कई मरीज ऐसे भी हैं, जो अभी भी इलाज से महरूम हैं। अस्पतालों से ऐसे मरीज लगातार बिना इलाज लौट रहे हैं। बताया गया कि विभागीय वेबसाइट पर कार्ड सत्यापित करने पर ‘अमान्य’ का मैसेज आ रहा है। बता दें कि त्रुटियों के चलते बीमा कंपनी ने गत वर्ष करीब तीन लाख कार्ड ब्लॉक कर दिए थे। तब यह कहा गया कि कार्ड अपात्र लोगों के ब्लॉक किए गए हैं। जबकि इनमें कई बीपीएल व अन्य पात्र लोग भी शामिल थे। ऐसे में सैकड़ों लोग पात्र होकर भी ब्लॉक कार्ड लिए घूम रहे हैं। इसका पता उन्हें तब चलता है जब वह अस्पताल इलाज के लिए पहुंचते हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना कार्ड का सत्यापन हुए इलाज दे पाना संभव नहीं है।
क्या है एमएसबीवाई
अप्रैल 2015 में शुरू हुई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभार्थियों को बायोमेट्रिक स्मार्ट कार्ड जारी किए गए थे। जिसके तहत कार्डधारक परिवार को 50 हजार रुपये का हेल्थ कवर और सवा लाख रुपये गंभीर बीमारियों का बीमा कवर मिलता है। इस कार्ड का इस्तेमाल एमएसबीवाई के पैनल में शामिल किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए किया जा सकता है। योजना में सरकारी कर्मचारी, पेंशनर और आयकर दाता शामिल नहीं हैं। 

अब सिर्फ करना नहीं है, वरन क्या करना है, ये भी निर्धारित करना हैः मुख्यमंत्री

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(देहरादून) प्रारंभिक फेज में अधिकारी उप जिलाधिकारी, सीडीओ, जिलाधिकारी के रूप में नीतियों, नियमों, निर्देशों का सिर्फ पालन कर रहे थे, लेकिन आठ-10 साल के अनुभव के बाद अब बड़ी जिम्मेदारियों के साथ उन्हें नीतियों-नियमों के निर्धारण में भी अपनी भूमिका अदा करनी होगी। वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के फेज-तीन मध्यावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सिर्फ करना नही है, वरन क्या करना है, अब यह भी आपको निर्धारित करना है।

सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के प्रशिक्षण सत्र को संबोधित किया। ये अधिकारी अकादमी में फेज-तीन मध्यावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए आए हैं। आईएएस प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि 22 राज्यों के 85 अधिकारियों की उपस्थिति राष्ट्र की विशालता और विविधता में एकता की परिचायक है। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार धाम स्थापित कर सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया था। सरदार पटेल ने स्वतंत्रता प्राप्त होने के उपरान्त देश की विभिन्न रियासतों को भारत संघ में विलय करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम 8-10 वर्ष का अनुभव प्राप्त कर चुके अधिकारियों के लिए आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आधुनिक कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी से लगातार अपडेट रहने को कहा। उन्होने कहा कि नई पीढ़ी अधिक होशियार है, उन्हें रिस्पांस तेज चाहिए, इसलिये आईएएस अफसर भी आधुनिक तकनीक के साथ लगातार रिस्पांसिव व अपडेटेड हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर जनता अपनी समस्याए एवं शिकायतें भेजती है और तत्काल प्रतिउत्तर एवं समाधान की अपेक्षा करती है। अधिकारियों को भी नयी तकनीकि को अपनाना होगा।
मुख्यमंत्री ने जन संवाद का महत्व बताते हुए कहा कि कई बार जनता के बीच में से बहुत अच्छे सुझाव एवं समाधान प्राप्त होते हैं, अतः जनता से संवाद लगातार बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने स्वंय के कृषि मंत्री के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अपने अधिकारियों के साथ 07 दिन क्षेत्र भ्रमण किया और मौके पर ही तीन शासनादेश जारी किए थे। जनता से वार्तालाप के दौरान व्यवहारिक समाधान प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार जो नर्सरी एक्ट लाने जा रही है, वह भी जनता से प्राप्त सीधे फीडबैक के आधार पर ही तैयार किया गया है। उन्होने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग में कोई न कोई गुण अवश्य होता है, उसको पहचान कर, सबको साथ लेकर आगे बढ़ना वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित मानस में उल्लिखित पक्तियों ‘‘सचिव, वैद, गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस; राज, धर्म तन, तीनि कर होई बेगिहि नास‘‘ का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को राजनीतिक नेतृत्व के समक्ष अपनी राय बेबाकी से स्पष्ट वादिता के साथ रखनी चाहिए। उन्होने कहा नियम-कानूनों की जानकारी रखना तथा उनके बारे में अवगत कराना सचिव का कार्य है।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का स्वागत करते हुए अकादमी की निदेशक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उपमा चौधरी ने कहा कि उनके कार्यकाल में पहली बार किसी मुख्य अतिथि ने पूरा अकादमी गीत सबके साथ पढ़ा। उन्होने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किए जा रहे विभिन्न जन कल्याणकारी कार्यो का उल्लेख भी किया। श्रीमती चौधरी ने कहा कि उत्तराखण्ड चौथा राज्य है जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हुआ है। उन्होने राज्य सरकार की 670 न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेण्टर बनाने की योजना, टेली रेडियोलॉजी, टेलीमेडिसिन, बैलून टेक्नोलॉजी का भी उल्लेख किया। उन्होने बाहर से आये आईएएस अधिकारियों को रिस्पना और कोसी नदी के पुनर्जीवीकरण अभियान के बारे में भी बताया।
एक माह के फेज-3 प्रशिक्षण कार्यक्रम में 22 राज्यों के 85 अधिकारी हैं। अधिकांश अधिकारी वर्ष 2006 से 2008 बैच के हैं। उत्तराखण्ड काडर के बृजेश संत, राघव लंगर, राजेश कुमार, एसएन पाण्डे और विनोद रतूड़ी इस मध्यावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित है। इस मौके पर मुख्यमंत्री की सचिव राधिका झा, अकादमी की संयुक्त निदेशक आरती आहूजा आदि भी उपस्थित थे।

पति-पत्नी के बीच विवाद में बीच-बचाव करना बड़े भाई को पड़ भारी

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छोटे भाई को पत्नी के साथ लड़ता देख बड़े भाई को बचाव करना भारी पड़ गया। विवाद बढ़ने पर छोटे भाई ने पत्थर मारकर बड़े की हत्या कर दी। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया।

बाजपुर, पति-पत्नी के बीच विवाद में बीच-बचाव करना बड़े भाई को भारी पड़ गया। बात बढ़ने पर हुई मारपीट में छोटे भाई ने उसकी हत्या कर दी।

ग्राम महेशपुरा में राजेशअपनी पत्न्नी से झगड़ा कर रहा था। बीच बचाव को आए बड़े भाई राकेश ने राजेश को समझाने का प्रयास किया। इसी बीच पत्नी को छोड़ राजेश अपने बड़े भाई और भाभी से उलझ गया। इस दौरान गुस्साए राजेश ने भाई पर पत्थर से हमला कर दिया। पत्थर लगते ही राकेश की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना पर पहुंची दोराहा पुलिस मामले की जांच की जा रही है। चौकी प्रभारी पंकज जोशी ने बताया कि, “अभी तक पत्थर लगने से मृत्यु होने का मामला सामने आया है, फिर भी ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है।” परिवार की ओर से तहरीर आने पर मामला दर्ज किया जाएगा। वहीं घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को भी दे दी गई।

किच्छा स्थित बिजली सब-स्टेशन के ट्रांसफार्मर पर लगी आग

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किच्छा स्थित बिजली के सब स्टेशन के ट्रांसफार्मर पर आग लगने से आसपास के क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। एक घंटे में आग पर काबू पाया गया।

विद्युत सब स्टेशन में ट्रांसफार्मर में आग लगने से आसपास के क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। दमकल की दो गाड़ियों से आग पर काबू पाया गया।…….बिजली घर में लगें 250 केवीए ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग जाने से हड़कंप मच गया। आग लगने की सूचना अग्निशमन विभाग को देने के साथ ही विधुत आपूर्ति ठप कर दी गई। ऊर्जा निगम के अधिकारी भी आनन फानन बिजलीघर पहुंच गए।

अपने संसाधनों से आग पर काबू पाने केंप्रयास शुरू कर दिए,  लेकिन आग की लपटों के आगे सब बेबस हो गए। एफएसओ हरीश गिरी दमकल के दो वाहनों के साथ पहुंचे और एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग से 250 केवीए का ट्रांसफार्मर फुंक गया। ऊर्जा निगम बिजली आपूर्ति सुचारु करने के प्रयास में जुट गया

नेता ने हड़पी जमीन, न्याय न मिलने पर पीड़ित ने दी आत्महत्या की चेतावनी

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हरिद्वार, शिवसेना के एक नेता पर एक ग्रामीण ने विक्रय की गई भूमि से अधिक भूमि हड़पने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को पत्र भेजकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। साथ ही न्याय न मिलने पर परिवार समेत आत्महत्या करने की चेतावनी दी है।

अशोक कुमार पुत्र स्व. चंद्रभान निवासी ग्राम मिस्सरपुर, कनखल ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि, “उसके पिता ने शिवसेना नेता छविराम सैनी पुत्र राजाराम सैनी को पूर्व में 2 बीघा 6 बिस्वा भूमि विक्रय की थी। विक्रय के साथ भूमि पर कब्जा भी दे दिया था। जबकि, छविराम ने विक्रय की गई भूमि से अधिक भूमि पर कब्जा कर लिया है।” उन्होंने कहा कि, “तहसीलदार हरिद्वार की मदद से छविराम ने भूमि को अपने नाम भी दर्शा लिया है। अतिरिक्त भूमि पर कब्जा छोड़ने की बात कहने पर छविराम उनके साथ गाली-गलौच व मारपीट करता है। मामले की शिकायत कनखल पुलिस से भी की गई, लेकिन नेता के दबाव में आकर पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी।”

पीड़ित का कहना है कि, “पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी शिकायती पत्र भेजा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।” अशोक ने आरोप लगाया कि छविराम ने उनकी जमीन पर कब्जा करने के साथ उनकी दुकानों को भी तोड़ दिया और घर का सारा सामान बाहर फेंक दिया। वह बेघर हो गए हैं। उक्त भूमि के अतिरिक्त उसके पास कोई और भूमि नहीं है। नेता द्वारा उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। अब महज आत्महत्या का ही रास्ता बचा है। यदि न्याय नहीं मिला तो वह परिवार के साथ आत्महत्या कर लेगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”

पीड़ित ने छविरम के कब्जे वाली भूमि शीघ्र वापस दिलाने की मांग की है। वहीं इस मामले में जिलाधिकारी दीपक रावत का कहना है कि, “मामले की जांच की जा रही है, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”

 

तमाम घरेलू व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एसटीपी से जोड़ा जाएः सीएम

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सभी घर, होटल एवं अन्य संस्थानों को सीवर ट्रीटमेंट प्लान (एसटीपी) से जोड़ा जाना सुनिश्चित किया जाए। यह कहना है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का। वह साेमवार को नमामि गंगे की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने के लिए दिशा-निर्देश दे रहे थे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में भारत सरकार के राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह और विभागीय अधिकारियों के साथ नमामि गंगे की बैठक की। बैठक में गंगा को स्वच्छ, अविरल तथा निर्मल बनाए रखने के लिए घाटों के सौन्दर्यीकरण, घाटों की सफाई, गंगा की स्वच्छता, सीवर ट्रीटमेंट प्लान (एसटीपी) पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसटीपी के जो कार्य हुए हैं, उसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी घर, होटल एवं अन्य संस्थान इससे जुड़े हों। इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

उन्होंने कहा कि स्थलीय निरीक्षण कर प्रत्येक 15 दिन में रेटिंग की जाए। नमामि गंगे केन्द्र सरकार का महत्वपूर्ण प्रोजक्ट है। कार्यों में तेजी लाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर गंगा कमेटी की समय-समय पर बैठक ली जाए। स्टेट प्रोजेक्ट मोनेटरिंग ग्रुप (एसपीएमजी) का शीघ्र डेशबोर्ड बनाया जाए। इससे कार्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का समय-समय पर सही आंकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता सभी संबंधित विभागों द्वारा मिल-जुलकर कार्य करने पर ही संभव हो पाएगी।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार में कनखल स्थित सती घाट को भी नमामि गंगे के अंतर्गत विकसित किया जाए। गंगा घाटों पर नियमित सफाई अभियान चलाएं। गंगा के किनारे ठोस अपशिष्ट डालने वालों पर कार्यवाही की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कूड़ा निर्धारित स्थानों पर ही डाला जाए।

केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल ने कहा कि, “नमामि गंगे के तहत होने वाले सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाए। गंगा की स्वच्छता के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरुकता अभियान चलाना जरूरी है। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी इंडस्ट्री एवं होटल एस.टी.पी से जुड़े हों। सभी इंडस्ट्रियों का निरीक्षण किया जाए कि उनमें दूषित जल संचार उपचार सयंत्र (ई.टी.पी) की उचित व्यवस्था है या नहीं। यदि किसी इंडस्ट्री में ईटीपी की उचित व्यवस्था नहीं है तो उन पर त्वरित कार्यवाही की जाए। इसके लिए पुलिस भी सक्रियता से कार्य कर सकती है।”

नवोदय विद्यालय के छात्रों से मिले पूर्व सीएम हरीश रावत

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बद्रीनाथ यात्रा से लौटते हुए उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत सोमवार को पीपलकोटी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों से रूबरू हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का जवाहर नवोदय विद्यालय का संचालन करना एक सुनहरे भारत की परिकल्पना थी, जो आज देश के कोने-कोने में इन विद्यालयों ने साकार कर दिखाया है।

बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के बाद लौटते हुए रविवार की रात्रि पूर्व सीएम पीपलकोटी में रुके। सोमवार को नवोदय विद्यालय के प्रधानाचार्य भगवान सिंह ने उन्हें विद्यालय में आने का न्योता दिया। पूर्व सीएम का विद्यालय में पहुंचने पर फूल माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। पूर्व सीएम के स्वागत में स्कूली छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी।

छात्र-छात्राओं के बीच उन्होंने अपने प्राथमिक पठन-पाठन का जिक्र भी किया। इस दौरान रावत भावुक होते नजर आये। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि शिक्षा के साथ-साथ अपनी सभ्यता व संस्कृति से जुड़े रहें व अपने गांव और अपने माता-पिता से जुड़े रहने का आग्रह भी किया, जिससे एक सुनहरे भारत के निर्माण का सपना पूरा कर सके।

स्पीकआउट के जिया से न्यूजपोस्ट की छोटी सी मुलाकात

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25 साल के जिया कुरैशी एक ऐसे युवा है जो हमेशा से कुछ अलग करना चाहते थे और बहुत जल्दी ही उन्हें पता चल गया था कि वह अपने आप को कहां देखना चाहते हैं। ‘स्पीकआउट’ को शुरु करने का फैसला जिया ने बहुत पहले ही कर लिया था लेकिन इसकी शुरुआत उन्होंने अगस्त 2016 से की। ग्राफिक एरा यूनिर्वसिटी, देहरादून से ग्रेजुएशन करने के बाद वह बैंगलोर में सर्वर एनालिस्ट कर रुप मे काम कर रहे हैं। नैनीताल में पले बड़े जिया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अमतुल पब्लिक स्कूल, नैनीताल से की है और यहीं से जिया ने खुद से कुछ अलग करने का सोचा। ‘स्पीकआउट फाउंडेशन’ जिया की मां ने शुरु किया और उसे सहयोग उनके दोस्त दे रहे हैं।

टीम ‘न्यूजपोस्ट’ से जिया की खास बातचीत में उन्होंने बताया कि, ”उन्हें लिखने का शौक हमेशा से था और वह अपने फेसबुक वॉल पर आए दिन कुछ ना कुछ लिखते रहते थे। एक दिन जिया ने सोचा कि जैसे मैं लिखता हूँ वैसे क्यों ना दूसरों के लिखे काम को फेसबुक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाए?”।बस इसी सोच के साथ उन्होंने ‘स्पीकआउट’ की शुरुआत की।

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शुरुआत में स्पीकआउट के काम फॉलोवर थे लेकिन अब लगभग तीन हजार फॉलोवर के साथ ‘स्पीकआउट’ ने लोगों के दिलों में जगह बना ली है। जिया कहते हैं कि, ”एक वो दिन था और एक आज का दिन है ‘स्पीकआउट’ रुका नहीं, बहुत सी वर्कशॉप, ओपन माइक सेशन और अब एक किताब लांच कर चुके  है।”

जिया को किस बात ने स्पीकआउट शुरु करने के लिए उत्सुक किया?वह कहते हैं कि, ”मैं अपने व्यक्तिगत फेसबुक प्रोफाइल में अपने विचार लिखता था, एक दिन मैंने सोचा कि लोगों से उनके लेखों को साझा करने के लिए क्यों न पूछें जिन्हें मैं दुनिया के सामने संपादित और पेश कर सकूं ?  मैंने लोगों से प्रतिक्रिया लेनी शुरू की, मैंने इसे एक ऐसी शुरुआत की जहां सभी लेखकों को उनके लेखन साझा करने का मौका मिले।” 2016 के अगस्त में लेखकों को एक साथ लाने के लिए फेसबुक पेज शुरू किया। “पहले दिन जब मैने स्पीकआउट के लिए लिखा तब मैंने अपने एफबी प्रोफाइल पर लिखा था कि मैं पेज के लिए लेखों को आमंत्रित कर रहा हूँ, और उस वक्त मेरे पास केवल एक एंट्री थी, अब हमारा पेज 3000 फॉलोवर के साथ मजबूत है। उस दिन से आज तक यह प्लेटफार्म वर्कशॉप, ओपन माइक और किताबों के साथ आगे बढ़ रहा हैं।” साथ ही स्पीकआउट किसी एक फॉर्म को प्रमोट नहीं करता वह कविता, शॉर्ट स्टोरी, गाना, शायरी हो या कुछ भी क्रिएटिव हो स्पीकआउट उस काम को लोगों के सामने लाता है। किसी की भावनाओं की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना और इस क्षेत्र में मान्यता लाने के लिए ऐसे सभी कलाकारों को एक साथ लाने के लिए ‘स्पीकाउट’ एक अकेला प्लेटफॉर्म है।

जिया से ये पूछने पर कि वह ‘स्पीकआउट’ के प्रदर्शन से वह कितने संतुष्ट हैं? इसपर उनका जवाब था, “मैं छोटे लक्ष्यों को पाने में विश्वास करता हूं, जो कम समय-सीमाओं और लक्ष्यों के अंदर हासिल की जा सकती हैं।  इसलिए मैं स्पीकाउट के प्रदर्शन से संतुष्ट हूं।” जिया ने कहा कि, “एक साल की छोटी से समय-सीमा के अंदर हमने न केवल एक मंच मान्यता हासिल की है, बल्कि बंगलौर, लखनऊ और देहरादून जैसे स्थानों में वर्कशॉप और ओपन माईक का आयोजन किया है, और इसके अलावा हमारी पुस्तक का पहला संस्करण भी हाल ही मे लॉन्च हुआ।”

जिया से यह पूछने पर कि वह ‘स्पीकआउट’ को कैसा देखना चाहते हैं, इसपर जिया ने कहा कि ” जहां तक योजनाओं का संबंध है, मैं क्रिएटिवी को अभिव्यक्त करने के लिए सभी संभावित क्षेत्रों को शामिल करने के लिए काम करना जारी रखना चाहता हूं, अवसरों की तलाश जारी रखने के लिए कि हम अपने ‘स्पीकआउट’ परिवार में अधिक से अधिक कलाकार, अधिक भौगोलिक कवरेज, अलग-अलग फॉर्म और विविध प्लेटफार्म शामिल करने पर काम कर रहे हैं”।

जिया से पूछने पर कि बीटेक करने के बाद साहित्य में झुकाव कैसे, इसपर उनका जवाब था कि, “मुझे लगता है कि यह सवाल गलत रूप से तैयार किया गया है। यह हमेशा बीटेक और साहित्य,स्कूलिंग और साहित्य रहा है।और मैं इसे साहित्य की बजाय क्रिएटिवीटी कहना चाहूंगा। यह केवल एक माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्याख्यान प्रस्तुति, संगीत, नाटक,शॉर्ट स्टोरी या किसी भी रूप में हो सकती है, और हर कोई जानता है कि हम इंजीनियर बहुत क्रएटिव होते हैं, और हम जानते हैं कि हमारे काम के साथ अपने पैशन को कैसे पाना है।”