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आधार के बिना बोर्ड परीक्षा में नहीं होंगे शामिल

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हल्द्वानी। हर काम में जरूरी हो चुके आधार कार्ड को उत्तराखंड की बोर्ड परीक्षा में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है। अब परीक्षा के आवेदन पत्र में आधार नंबर भी देना होगा। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद अगले साल से इसे शुरू कराएगा।

परिषद द्वारा हर साल हाईस्कूल व इंटर की बोर्ड परीक्षा कराई जाती है। इसके लिए स्कूलों से संस्थागत व प्राइवेट परीक्षार्थियों द्वारा आवेदन पत्र भरे जाते हैं। बैंक, मोबाइल व गैस कनेक्शन आदि में आधार को लिंक करने के बाद अब इसे शिक्षा विभाग ने अपने यहां भी लागू करने का फैसला लिया है। इसके लिए हाईस्कूल व इंटर के आवेदन पत्रों में परीक्षार्थियों से उनके आधार नंबर मांगे जाएंगे। शिक्षा विभाग का कहना है कि अगले साल की होने वाली बोर्ड परीक्षा में इसे पूरी तरह से लागू करने का प्रयास किया जाएगा। आवेदन पत्र में ही एक कॉलम होगा, जिसमें परीक्षार्थियों को अपना आधार कार्ड का नंबर लिखना होगा।

निदेशक ने माध्यमिक शिक्षा ने कहा कि बोर्ड के अलावा विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी छोटे बच्चों व शिक्षकों का आधार कार्ड भी अनिवार्य किया गया है। बच्चों का आधार कार्ड बनने से सरकार की जो भी छात्रवृत्ति से संबंधित या अन्य स्कीम हैं, उनको डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर के तहत आधार से लिंक किया जाएगा। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर का कहना है कि आधार कार्ड का हर जगह उपयोग हो रहा है तो बोर्ड के आवेदन पत्रों में भी इसे लागू किया जा रहा है। आधार नंबर से छात्र की पहचान होगी। अगले साल होने वाली परीक्षा से इसे लागू करने का प्रयास रहेगा।

निगम का बढ़ा दायरा, पार्षदों के कुनबे में भी बढ़ोतरी

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रुद्रपुर- नगर निगम का दायरा बढ़ गया है। शासन ने इसका गजट जारी कर दिया। इसके मुताबिक शहर की आबादी अब एक लाख 85 हजार हो जाएगी। यानी जनसंख्या में करीब 35 हजार का इजाफा होगा। साथ ही 4716.7952 हेक्टेयर क्षेत्रफल भी बढ़ जाएगा। निगम में पार्षदों का कुनबा भी बढ़ेगा। 20 के स्थान पर अब 40 वार्ड होंगे। गजट जारी होने के बाद निगम ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। परिसीमन का कार्य जल्द शुरू हो जाएगा।

रुद्रपुर को नगर निगम का तमगा वर्ष 2012 में मिला था। तभी से सीमा विस्तार की कवायद चल रही थी। कोशिशों को मंजिल भाजपा सरकार में मिली। राजस्व ग्राम बिगबाड़ा, रुद्रपुर देहात, शिमला बहादुर देहात, लमरा देहात, रम्पुरा देहात, जगतपुर देहात, फाजलपुर महरौला, भूरारानी, कल्याणपुर, फुलसुंगा और फुलसुंगी को नगर निगम सीमा में शामिल करने को हरी झंडी मिल गई। गुरुवार को इसका गजट भी जारी हो गया। नए क्षेत्रों के जुड़ने से आबादी में 35 हजार का इजाफा हो गया है। यानी आबादी डेढ़ लाख से बढ़कर एक लाख 85 हजार हो गई है। निगम का क्षेत्रफल भी 4716.7952 हेक्टेयर बढ़ गया है। निकाय चुनाव निकट हैं, ऐसे में निगम में परिसीमन की तैयारी तेज कर दी गई है। साथ ही नए क्षेत्रों से दावेदारों ने भी सरगर्मी बढ़ा दी है।

 

तीर्थ नगरी की नैसर्गिक सुंदरता के कायल हुए विदेशी पर्यटक

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ऋषिकेश। ठंड की शुरुआत के बीच तीर्थ नगरी की हसीन वादियां पर्यटकों को खूब लुभा रही हैं। रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आ रहे हैं। इनमे विदेशी पर्यटकों की तादाद भी अच्छी खासी देखने को मिल रही है।

बद्रीनाथ धामपात के बाद देवभूमि में ठंड का असर दिखने लगा है। खुशगवार मौसम के बीच तीर्थ नगरी का शांत वातावरण और यहां की नैसर्गिक सुंदरता खूब भा रही है। इस वर्ष शरद ऋतु के आगाज में भी तीर्थाटन के लिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों की भी अच्छी खासी भीड़ उमड़ी रही है।
खेलों के रोमांच के साथ योग की शांति के लिए सात समुन्दर पार से आये विदेशी पर्यटक भी इस भीड़ के सैलाब मे शामिल हैं। ऋषिकेश के मठों-मन्दिरों में धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संतों-महात्माओं के अमृत प्रवचनों से आध्यात्मिकता के शीर्ष पर पहुंचा जा सकता है, इसे अब महसूस किया जाने लगा है। तीर्थ नगरी के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो इस स्थल को प्राचीन काल में कई ऋषि-मुनियों ने अपनी साधना के लिए चुना था। शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में प्राकृतिक खूबसूरती के बीच सुबह-शाम गूंजने वाली वेद ऋचाएं यहां की अध्यात्मिक शांति की संजीवनी हैं। यहीं से गंगा की धारा शांत-संयमित होकर गंगासागर की ओर बढ़ती है। योग-ध्यान के इस केंद्र को आठवीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य ने भी हिमालय गमन से पहले अपना पड़ाव बनाया था। महर्षि महेश योगी ने इस स्थल को कर्मभूमि बनाया और ‘चौरासी कुटी’ की स्थापना की। इन सबके बीच योग ध्यान और अध्यात्म की इस पावन भूमि में पर्यटकों की बढ़ती आमद से यहां का बाजार भी चहका है।

‘राम मंदिर मुद्दे को धर्म गुरु और अखाड़ा परिषद सुलझाएंगे’

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श्री बनखण्डी साधु बेला आश्रम के पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी गौरी शंकर दास महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है कि अयोध्या में श्रीरामलला का मंदिर निर्माण संत महापुरुषों के सानिध्य में शीघ्र होगा।

भारत की सर्वोत्तम संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि महाराज भी चाहते हैं कि देश के धर्माचार्यों के सानिध्य में शीघ्र राम मंदिर का निर्माण हो क्योंकि राम मंदिर में करोड़ों हिन्दुओं की आस्था जाग चुकी है, अगले माह सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले पर फैसला भी आने वाला है। कोर्ट के फैसले के बाद संत महापुरुष चाहते हैं कि करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को ध्यान मे रखते हुए मंदिर निर्माण शीघ्र होना चाहिए।

स्वामी गौरी शंकर दास महाराज ने बताया कि अब देश के समस्त संत समाज को एकजुट होकर अयोध्या मसले पर खुलकर सामने आना होगा। तभी रामलला का मंदिर बनने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी शक्तियां हमारे संत समाज को बदनाम करने की साजिशें रच रहे हैं, जिसे संत समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और संतों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को कतई बक्शा नहीं जाएगा। भारतीय संस्कृति का परचम देश के साथ-साथ विदेशों में भी हमारे संत महापुरुषों ने फहराया है और हमारी सनातन परम्पराओं को पूरे विश्व में प्रचारित-प्रसारित किया।

स्वामी ने कहा कि आदि अनादिकाल से गुरु शिष्य की परम्परा का निर्वाह होता चला आ रहा है क्योंकि गुरु ही शिष्य का परमात्मा से साक्षात्कार कराता है और गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरुप कहलाते हैं। इसीलिए शिष्य को चाहिए कि अपने से बड़ों का आदर सत्कार करें और अपने गुरुजनों की सेवा करें और भारतीय सनातन परम्पराओं का निर्वाह बखूबी करते रहें। उन्होंने श्रीश्री रविशंकर के लिए कहा कि जो पहल राम मंदिर के मुद्दे को लेकर अब शुरू की है। यह पहल बहुत पहले श्रीश्री रविशंकर को करनी चाहिए थी क्योंकि राम मंदिर के मुद्दे को लेकर कई धर्मगुरु और धर्माचार्य वर्षो से मंदिर मसले को सुलझाने को लेकर प्रयासरत है। इसीलिए अब देश के सभी संत महापुरुषों को रामलला के मंदिर को लेकर एकजुटता दिखानी चाहिए, तभी अयोध्या में राम मंदिर बनेगा। 

आई.एम.ए परेड रिहर्सल, के दौरान यातायात डाइवर्ट प्लान

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24/11/2017 का यातायात डाइवर्ट प्लान

 निम्नवत रहेगा: –

1- परेड के दौरान आईएमए की ओर कोई भी यातायात नहीं जायेगा तथा आईएमए की तरफ जीरो जोन रहेगा।
2- बल्लूपुर से आने वाले समस्त यातायात रांगणवाला चौकी आईएमए के पास से डायवर्ट कर मीठी बैरी से होकर प्रेमनगर की ओर मुख्य मार्ग पर जा सकेगा।
3- प्रेमनगर की ओर से आने वाले यातायात को आईएमए एम.टी सेक्शन गेट की ओर डाइवर्ट कर रांगणवाला बैरियर की ओर निकाला जायेगा। उक्त यातायात रांगणवाला बैरियर से बल्लूपुर, पण्डितवाडी की ओर जा सकेगा।
4- विकासनगर की ओर से आने वाले भारी वाहनों को हर्बटपुर चौक से धर्मावाला चौक की ओर डाइवर्ट किया जायेगा। उक्त यातायात धर्मावाला चौक से शिमला बाईपास होते हुए शहर की ओर आ सकेगा।
5- देहरादून से विकासनगर, हर्बटपुर होते हुए दिल्ली जाने वाले भारी वाहनों को शिमला बाईपास से डाइवर्ट कर विकासनगर, धर्मावाला की तरफ भेजा जायेगा।
6- देहरादून की ओर से विकासनगर जाने वाले समस्त यातायात को बल्लूपुर से बल्लीवाला होते हुए जी.एम.एस रोड होते हुए कमला पैलेस की ओर से शिमला बाईपास की ओर निकाला जायेगा। उक्त यातायात शिमला बाईपास से विकासनगर की ओर जा सकेगा।
7- समस्त भारी वाहनों को पूर्णतः हर्बटपुर, शिमला बाईपास चौक तथा बल्लूपुर चौक से जीएमएस रोड की ओर डायवर्ट किया जायेगा।

दिनांक 24/11/17 को समस्त भारी वाहन 15:30 बजे से 17:45 बजे तक डायवर्ट किया जायेगें। आमजन से अपील है कि असुविधा से बचने के लिए चौपहिया वाहन से प्रयोग कम से कम करते हुये दोपहिया वाहनों का प्रयोग करे तथा यातायात व्यवस्था बनाने में जनपद पुलिस को अपना सहयोग प्रदान करें।

कानूनी जंग में डीपी की हार, सरेंडर

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पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह कानूनी दांव पेंच में अपनी पहली लड़ाई हार गए। अंतत: उन्हें एसएसपी दफ्तर में आत्म समर्पण करना पड़ा,एनएच 74 मुआवजा घोटाले के आरोपी निलंबित पीसीएस अफसर डीपी सिंह ने गुरुवार को ढाई बजे फिल्मी अंदाज में एसएसपी दफ्तर पर आत्म समर्पण किया। वह अपने साथ अधिवक्ताओं को लेकर आए थे।

पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह की पुलिस लंबे समय से तलाश कर रही थी। उनके आवासों पर कुर्की का नोटिस चस्पा हो चुका था। जबकि डीपी सिंह को पकडने के लिए पुलिस का पूरा ध्यान नैनीताल स्थित कोर्ट पर था लेकिन एसएसपी आफिस में पहुंचे डीपी को देख सभी चकित रह गये।

प्रदेश का सबसे चर्चीत मुआवजा घोटाले के मुख्य आरोपी की तलाश लम्बे समय से चल रही थी लेकिन इस जांच में तब ट्वीस्ट आ गया जब पुलिस को छकाते हुए डीपी सिंह ने खुद आत्म समर्पण कर दिया, गुरुवार को ढाई बजे पूर्व एसएलएओ डीपी सिंह अपनी कार से दो अधिवक्ताओं के साथ एसएसपी दफ्तर पहुंचे। उन्होंने दफ्तर के बाहर कार खड़ी की। वहां से वह पैदल चल कर एसएसपी दफ्तर पहुंचे।

इस दौरान उनके अधिवक्ता पूरी वीडियोग्राफी कर रहे थे, ताकि एसआईटी उनकी गिरफ्तारी न दर्शा सके। डीपी सिंह ने एसएसपी दफ्तर का दरवाजा खोला और बोले, “मैं आई कम सर।” डीपी सिंह को देखकर पुलिस आफिस में हलचल मच गई। उन्हें एसआईटी के दफ्तर में बिठाया गया, देखते ही देखते वहां मीडिया का जमघट लग गया। माना जा रहा है कि कल डीपी सिंह को पुलिस न्यायालय के समक्ष पेश करेगी। फिलहाल डीपी सिंह से पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि तकरीबन 270 करोड़ के एनएच चौड़ीकरण में मुआवजा घोटाले में डीपी सिंह को आरोपी बनाया गया है। पुलिस को काफी समय से उनकी तलाश थी। गैरजमानती वारंट होने के बाद पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट से अनुमति लेकर धारा 82 के अंतर्गत कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया था। उसके बाद डीपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी।

पुलिस की नजर नैनीताल स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट पर थी। दरअसल, पुलिस को यह अनुमान था कि डीपी सिंह कोर्ट में सिरेंडर कर सकते हैं। हालांकि पुलिस की कई टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिशें दे रही थी। पुलिस की सारी चौकसी को धता बता कर डीपी सिंह ने खुद एसएसपी दफ्तर पहुंच कर आत्म समर्पण कर दिया।
जब एसआईटी ने उन्हें बयानों के लिए बुलाया था तो वह कानून की किताब लेकर अपने बयान दर्ज कराने आए थे। उन्होंने दावा किया था कि उनके द्वारा जो भी अभिनिर्णय पारित किए गए हैं वह नियमों के हिसाब से सही हैं। डीपी सिंह कानूनी दांव पेंच का सहारा लेते रहे, लेकिन कानूनी दांव पेंच में वह फिलहाल लड़ाई हार गए, और उनको आत्म समर्पण करना पड गया। फिलहाल डीपी से एसआईटी को और भी कई बडे खुलासे की उम्मीद है।

उद्यमियों के प्रोत्साहन के लिए 1300 करोड़ स्वीकृत

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देहरादून। केन्द्र सरकार की आर्थिक मामलों की स्क्रीनिंग कमेटी ने उत्तराखंड से जुड़ी दो परियोजनाओं एकीकृत बागवानी विकास तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के विकास पर आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देने के लिए 1300 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उम्मीद जताई है कि शीघ्र ही पर्वतीय कृषि विकास से संबन्धित योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी लगभग 550 करोड़ की मंजूरी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि बागवानी विकास के लिए निर्धारित 700 करोड़ की धनराशि से प्रदेश में स्वीकृत बागवानी विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। जबकि 600 करोड़ की धनराशि से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के तहत स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा मिल सकेगा।
सीएम ने कहा कि इससे बागवानी से जुड़े कृषकों व कास्तकारों एवं छोटे उद्यमियों व स्वरोजगारियों के आर्थिक उन्नयन में मदद मिलेगी। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण आर्थिकी के विकास एवं युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के अतिरिक्त पर्वतीय कृषि के विकास से सम्बन्धित परियोजनाओं के लिए लगभग 550 करोड़ की वित्तीय मदद के प्रस्ताव विचाराधीन हैं। उम्मीद है इसकी भी शीघ्र स्वीकृति प्राप्त हो जाएगी, जिससे परम्परागत कृषि को बढ़ावा मिल सकेगा। साथ ही किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को भी हासिल करने में निश्चित रूप से मदद मिल सकेगी।
निदेशक उद्यान डाॅ. वीएस नेगी ने बताया कि दिल्ली में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के अधीन विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं के तहत राज्य में बागवानी के विकास के लिए 700 करोड़ तथा ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 600 करोड़ की योजनाओं पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। जबकि पर्वतीय कृषि विकास से सम्बन्धित परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित धनराशि लगभग 550 करोड़ की मंजूरी, स्क्रीनिंग कमेटी की आगामी आगामी बैठक में प्राप्त होने की पूर्ण सम्भावना है। 

सड़क की बदहाली से बढ़ रही घटनाएं

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सुगम और मंगलमय सफर की कामना को लेकर सड़कों पर उत्तराखंड की त्रिवेन्द्र रावत सरकार सूबाई सियासत की कमान संभालने के बाद करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है लेकिन उसके बावजूद भी आए-दिन बदहाल सड़के किसी न किसी को निवाला बना रही हैं।

उल्लेखनीय है कि समूचा उत्तराखंड सड़क हादसों से जूझ रहा है। हादसों की रोकथाम के लिए पीडब्ल्यूडी, पुलिस, आरटीओ समेत समस्त जिम्मेदार विभागों के पास नियम कानून को लेकर निर्देश जारी होते रहते हैं लेकिन जमीन पर इसका असर नहीं दिखता है। सिर्फ निश्चित समय व दिन तक ही कुछ गतिविधि रहती है और फिर पुराने ढर्रे में जिंदगी फर्राटा भरने लगती है।

एआरटीओ अनिता चमोला का कहना है कि पुलिस विभाग और आरटीओ की ओर से संयुक्त चिन्हित दुर्घटना प्वाइंट ऐसे हैं, जहां निरंतर दुघर्टना होती है। जिसके सम्बंध में शासन को भी अवगत करवाया जा चुका है। वहीं कुछ सड़के ऐसी हैं जहां सालों से नवीनीकरण या पैचवर्क तक की जहमत नहीं उठाई गई।

पीडब्लूडी की लाचार कार्य प्रणाली पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। बावजूद इसके व्यवस्था में कोई भी सुधार होता हुआ नजर नही आ रहा है। तीर्थ नगरी के मुख्य मार्गों की बात करें तो अक्सर देखने को मिलता है कि गड्ढायुक्त सड़कों पर विभाग का ध्यान नहीं जाता।

ऋषिकेश-बद्रीनाथ मार्ग मानसूनी मौसम के बाद से अनेकों स्थानों पर बुरी तरह से छतिग्रस्त हो रखा है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की बदतर सड़क पर अनेकों सड़क दुघर्टनाओं के बावजूद पैचवर्क तक लोनिवि करवाने को तैयार नही है। जबकि इस सन्दर्भ में विभिन्न संगठनों के माध्यम से लगातार आवाज उठाई जाती रही है।

उधर, मानकों की बात करें तो ज्यादातर सड़कों में हादसों की रोकथाम की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। सिर्फ बोर्ड लगाकर जिम्मेदारी से इतिश्री कर लिया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि इन खस्ताहाल सड़कों पर सड़क हादसे कब रुकेंगें।

संदिग्ध परिस्थितियों में मिला छात्र का शव

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नैनीताल- शहर से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर हल्द्वानी रोड स्थित हमुमानगढ़ी पार्क में एक युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बैग से मिले आधार कार्ड से युवक की पहचान अनिल सिंह बिष्ट (22) पुत्र नरेंद्र सिंह निवासी बेतालघाट के रूप में हुई।

युवक बंगलुरू में होटल मैनेजमेंट का छात्र था।  बताया जाता है कि अनिल बंगलुरू में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा था और अपने भाई के साथ रहता था। पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि वह करीब एक सप्ताह पहले रिश्तेदारी में हल्द्वानी आया था। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। एसओ प्रमोद पाठक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों को पता लग सकेगा।

श्रमिक की मौत के बाद हंगमा

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खटीमा- फाइबर फैक्ट्री में काम कर रहे श्रमिक की मशीन से गिरकर मौत हो गई। श्रमिक की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने फैक्ट्री के गेट पर शव रखकर फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।

राजीव नगर निवासी महेंद्र सिंह बिष्ट (45) फाइबर फैक्ट्री में टाइजन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था। गत शाम शिफ्ट के दौरान राजीव मशीन पर कार्य कर रहा था। इसी बीच वह मशीन से नीचे गिर गया और गंभीररूप से घायल हो गया। अन्य श्रमिकों की मदद से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। जहां उसकी हालत गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। इस बीच रास्ते में उसकी मौत हो गई।

मौत के बाद परिजन ग्रामीणों के साथ फैक्ट्री पहुंचे और प्रबंधन से उचित मुआवजा देने की मांग करने लगे। जब कोई बात नहीं बनी तो ग्रामीण शव को लेकर फैक्ट्री पहुंच गये और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन करने लगे। परिजनों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें उचित सहायता का कोई आश्वासन नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने परिजनों को दस लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को फैक्ट्री में नौकरी देने की मांग की।