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दि वाईनबर्ग एलेन स्कूल पहुंचे बोमन “वाय़रस” इरानी ने मांगी माफी

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मंगलवार सुबह दि वाईनबर्ग एलेन स्कूल, मसूरी ने अपने 129 वर्ष पूरे होने पर अपना वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह 2017, सर किर्बी लैंग आडिटोरियम में आयोजित किया।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य लेज़ली टिन्डलें नें कहा,”आज का दिन बहुत गर्वऔर उपलब्धि का हैं स्कूल के स्टाफ, छात्रों और अभिभावकों के लिए, यहां के स्टूडेंट्स ने हमेशा अपने स्कूल की सफलता और उसके आदर्शों के लिए काम किया है। ये साल कामयाबी भरा रहा, शायद अब तक का सबसे सफल साल । इस कामयाबी में हमारे छात्रों और संस्थापकों का बड़ा योगदान रहा है। हमें अपने छात्रों और उनकी कामयाबी पर गर्व है और हम इन छात्रों का धन्यवाद करते हैं”

इस दो घंटे चले के समारोह में उन स्टूडेन्टस को पुरस्कृत किया गया जिन्होंनें मार्च से शुरु होने वाले सेशन से लेकर अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। समारोह के मुख्य अतिथि,एक्टर बोमन इरानी रहे,जिन्होंने अपने स्टाइल में बच्चों और बड़ों सभी को खूब हसाया।थियेटर आर्टिस्ट और लगभग 50 फिल्मों में काम करने वाले,बोमन ने कहा कि मैने प्रिसिंपल को एक गलत नाम दिया जब मैने थ्री इडियट्स वायरस का रोल अदा किया था,मुझे उस रोल के लिए माफ करें,और यहां सबके बीच आना मेरे लिए बहुच ही खुशी और गर्व की बात है।उन्होंने कहा कि मुझे यहां बच्चों का उत्साह और डिसिप्लीन देखकर बहुत अच्छा लग रहा है और यहां की सबसे खास बात यही है डिसिप्लीन के साथ  बच्चों में फ्रीडम का एहसास जो मेलजोल बहुत कम देखने को मिलता है।उन्होंने कहा कि जब सब यहां से बाहर जाऐंगे वो केवल अकेले जाऐंगे,और आगे आने वाली जिंदगी सब कुछ खुद करेंगे और हो सकता है जिंदगी में कुछ ऐसे लोग मिले जो आपके सपनों को ना समझे लेकिन सबसे महत्तवपूर्ण बात है कि आप आपने अंदर अपनी मासूमियत बरकरार रखें।जिंदगी में सबसे ज्यादा यही ं जरुरी हैं।

सर्दिंयों की छुट्टियों के लिए मसूरी  के तमाम बोर्डिंग स्कूल अब बंद  होने के लिये तैयार है। तीन महीनें के लिए स्कूल बंद रहेंगे जिससे शहर में भी सन्नाटा छा जाता है और मार्च के पहले हफ्ते में स्कूल खुलने पर मसूरी में एक बार फिर रौनक और चहल पहल दुबारा लौट जाती है।

 

शिक्षकों ने मुहैया कराया नौनिहालों को फर्नीचर

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विकासनगर/कालसी। भले ही सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या के लिए शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा हो, लेकिन कई शिक्षक ऐसे भी हैं जो इमानदारी से शिक्षण करने के साथ ही नौनिहालों को शिक्षा जारी रखने के लिए समाज के साथ मिलकर आवश्यक संसाधन भी मुहैया करा रहे हैं।

ऐसी ही पहल प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय डांडा के शिक्षकों ने विद्यालय प्रबंधन समिति के साथ मिलकर की है। यहां शिक्षकों व एसएमसी सदस्यों ने खुद के संसाधनों से अध्ययनरत पचास नौनिहालों को फर्नीचर मुहैया कराया है। जिससे सर्दी में जमीन पर बैठने से निजात मिली है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बजट की कमी के चलते अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में सरकारी सुविधा के नाम पर सिर्फ नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तक व मध्याहन भोजन ही मिल रहा है। वहीं, अधिकांश विद्यालयों में नौनिहालों के लिए फर्नीचर उपलब्ध नहीं है। जिससे नौनिहालों को सर्दियों में भी जमीन पर बैठकर आखर ज्ञान लेना पड़ता है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनीता चौहान ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में इस मसले को रखा गया था। जिसमें निर्णय लिया गया कि सरकारी बजट की राह देखने के बजाय शिक्षक व एसएमसी सदस्य अपने संसाधनों से फर्नीचर मुहैया कराएंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक नौनिहाल को गुणवत्तापरक शिक्षा तभी मुहैया हो सकती है, जब उनके पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हों। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र-छात्रा को उचित संसाधनों के साथ गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराना शिक्षक का नैतिक कर्तव्य है। इस दौरान शिक्षक अनिल तोमर, एसएमसी अध्यक्ष बारू सिंह नेगी, सदस्य राजेंद्र सिंह नेगी, ठेमिया नेगी, सीमा देवी, प्यारो देवी, गोपाल दास, खजान आदि मौजूद रहे।

शांतिकुंज में पढ़ेंगे झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चे

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हरिद्वार। हरकी पौड़ी के निकटवर्ती झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों के नौनिहाल अब गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में सुसंस्कारिता का पाठ भी पढ़ेंगे, तो वहीं संगीत व डांस की रुचि रखने वाले बच्चे अपनी प्रतिभा निखार सकेंगे। झुग्गी झोपड़ियों के इन बच्चों को पढ़ाने व उनकी प्रतिभा को विकसित करने के लिए एसएसपी कृष्ण कुमार वीके की धर्मपत्नी श्रीमती शीबा केके वीके व एएसपी रचिता जुयाल व एसपी सीटी ममता बोहरा ने पहल की और बच्चों में सुसंस्कारिता के बीच बोने के लिए शांतिकुंज का सहयोग माँगा। शांतिकुंज ने भी देश के भावी कर्णधारों को तैयार करने में अपना हाथ बढ़ाया। इन बच्चों के लिए चलाई जाने वाली बालसंस्कार शाला की श्रीमती शीबा केके वीके एवं शांतिकुंज व्यवस्थापक ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए शांतिकुंज व्यवस्थापक ने कहा कि बच्चे देश के भावी कर्णधार हैं। कच्ची उम्र में सुसंस्कारिता के बीज बोने से ये बच्चे सभ्य नागरिक के रूप मे विकसित होंगे। शांतिकुंज रचनात्मक प्रकोष्ठ के प्रभारी श्री केदार प्रसाद दुबे ने बच्चों को प्रेरणाप्रद कहानियों के माध्यम पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, तो वहीं शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगाभ्यास भी कराया। श्रीमती शीबा के अनुसार ये बच्चे नियमित रूप से शांतिकुंज के कुशल नेतृत्व में आगे बढ़ने के लिए सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण के हिस्से बनेंगे। इन बच्चों के प्रशिक्षण और भोजन की व्यवस्था भी शांतिकुंज कर रहा है। श्रीमती शीबा ने शांतिकुंज के उदारमना सहयोग के लिए बहुत सराहना की। इस अवसर पर शांतिकुंज के हरिमोहन गुप्ता, श्रीमती शीबा की टीम के सदस्य मीना कंडपाल, शुकिता मुंडेवी, क्षमा शर्मा आदि उपस्थित रहे।

विद्युत उपभोक्ताओं को किया जागरूक

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देहरादून। सामाजिक एवं रचनात्मक मुहीम “रंगोली आंदोलन” के तत्वावधान में आज देहरादून तगबहादुर रोड स्थित आराघर विद्युत सब स्टेशन के कैम्पस में विद्युत उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन में देहरादून शहरी व ग्रामीण क्षेत्र सैकड़ों उपभोक्ताओं ने प्रतिभाग किया।
सोमवार को शिविर में बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के तकनीकी उप-निदेशक यशवर्धन डिमरी ने शिविर में मौजूद विद्युत उपभोक्ताओं को विस्तार से उपभोक्ताओं के अधिकारों के बारे में बताया। श्री डिमरी ने अपने सम्बोधन में कहा कि सबसे पहले उपभोकताओं को अपने मूल अधिकारों कि सम्पूर्ण जानकारी का होना आवश्यक है ।उपनिदेशक ने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में उपभोक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने उपभोक्ताओं को बिजली के सदुपयोग का भी पाठ पढ़ाया।
शिविर में बतौर मुख्य वक्ता उत्तराखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के लीगल एडवाईजर एडवोकेड शिवांकू भट्ट ने कहा कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग का गठन किया गया है। आयोग के गठन से पूर्व बिजली संबंधी समस्याओं का समाधान विद्युत बोर्ड के माध्यम से होता था । वैसे में उपभोक्ताओं की समस्याओं पर बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया जाना संभव नहीं हो पाता था। धीरे-धीरे उपभोक्ताओं की ओर से बढ़तीशिकायतों को देखते हुए राज्य में विद्युत नियामक आयोग का गठन किया गया। जो कि प्रभावी रूप से उपभोक्ताओं के अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति समय-समय जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं व विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित गोष्ठियों व सेमीनारों के माध्यम से भी उपभोक्ता कि शिकायत व निस्तारण संबंधी अभियान चलाए जाते हैं।
शिविर में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपनी-अपनी परेशानियों को रंगोली आन्दोलन के अभियान के मार्फत आयोग के अधिकारियों व विद्युत विभाग के अधिकारियों के सामने रखा । उपभोक्ता सेवा निवृत अधिकारी महेंद्र कुमार ने आयोग को सुझाव दिया कि बिजली का बिल दो महीने के बजाय एक महीने में दिया जाय जिससे उपभोक्ताओं पर अतरिक्त भार न पड़े । वहीं मोहकमपुर ग्रामीण से पहुंचे उपभोक्ता राजेंद्र बिष्ट ने विभाग कि शिकायत आयोग से की तो तौर्न्त संबन्धित अधिकारियों को शिविर में बुलाकर उपभोक्ता की शिकायत एक हफ्ते के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिये । जबकि नत्थुवाला से विनोद कपरुवान, अनुसूया प्रसाद सती ने भी अपनी समस्या से अवगत कराया । इसी बीच उत्तराखंड पुलिस के जवान महावीर पाण्डेय बताया कि ऑन लाईन बिजली बिल जमा करने के बाद भी उनका बिल जमा नहीं माना जा रहा और हर माह जमा किया गया बिल नए बिल में जोड़ा जा रहा है । आयोग से आए सदस्यों ने उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए उपभोक्ता से लिखित शिकायत मांगी और हफ्तेभर में निस्तारण का भरोषा दिया है ।
अतिविशिष्ट अतिथि के तौर पर एस डी ओ जगपाल सिंह ने भी अपने सम्बोधन में उपभोक्ताओं को कहा कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहें और एचएम आपकी सेवा के लिए हमेशा तत्पर हैं ।
रंगोली आंदोलन के संस्थापक व समाजसेवी शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’ ने बताया कि रंगोली आंदोलन एक गैर राजनीतिक मंच है यह एन जी ओ भी नहीं है बल्कि वह अपने संसाधनों व अपने सहयोगियों कि मदद से समय – समय पर अपनी सामाजिक मुहीम को गति देते हैं । मैठानी ने बताया कि रंगोली द्वारा बहुत जल्दी उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपभोक्ता जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। उन्होने उत्तराखंड राज्य विद्युत नियामक आयोगके अध्यक्ष सुभाष कुमार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का यह शिविर आयोग के वक्ताओं कि उपस्थिती से ही सफल हो सका और आगे भी इसी तरह के सहयोग कि अपेक्षा कि जाती है।

सोलर वाटर सब्सिडी से विभाग को हो रहा नुकसान

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देहरादून। विद्युत उपभोक्ताओं के लिए आयोजित जागरूकता शिविर में सोलर वाटर सब्सिडी पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग को नुकशान उठाना पड़ रहा है। आराघर विद्युत सबस्टेशन पर बिलिंग कलर्क मोहन पाठक ने शिविर में बताया कि आरघर स्टेशन को प्रतिमाह 15 से 20 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उत्तराखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग से आए अधिकारियों के सामने विभाग कि समस्या को रखते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को सब्सिडी सरकार द्वारा दिया जाना चाहिए न कि विभाग से। इसी तरह उन्होंने आयोग से मांग की कि शहर भर में सभी वेडिंग प्वाईंट बिना बिजली कनेक्सन चल रहे हैं जो कि ठीक शादी व्याह व पार्टियों के दरमियान बड़ी चालकी से उपभोक्ता के मार्फत पर्मिशन लेकर मामूली भुगतान कर अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान चला रहे हैं और विवाह में लगने वाली बिजली का खर्चा भी वेडिंग प्वाईंट मालिक उपभोक्ता से भरवाता है। उन्होंने आयोग को सुझाव दिया कि विशेष समारोह में अनुमति लिए जाने पर प्रतिदिन के हिसाब से एक नियत राशि तय कि जाय जिससे विभाग को भी लाभ मिलेगा।

घोटालेबाजों को बचा रही एसआईटी,एचसी की हो निगरानी

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काशीपुर, एनएच-74 मुआवजा घोटाले की एसआइटी जांच जसपुर और काशीपुर से आगे क्यों नहीं बढ़ रही है, और एनएचएआइ के अधिकारियों को जांच से बाहर आखिर क्यों रखा गया है, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने काशीपुर में कहा कि मुआवजा घोटाले में एसआईटी की जांच कई सवाल खडे कर रही है, एसआईटी की जांच की दिशा सही नहीं है जबकि कई नामों को एसआईटी अब भी दबाये हुए है, वहीं रावत ने कहा कि मुआवजा एनएचएआइ के अधिकारियों ने दिया था तो वो जांच से बाहर क्यो है।

पुर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एनएच मुआवजा घोटाले की जांच पर सवाल खडे करते हुए कहा कि जसपुर और काशीपुर को ही जांच के दायरे में रखा गया है जबकि काशीपुर से आगे भी एनएच का काम हुआ है और वहीं भी घोटालों की जडें जमीं है, लेकिन एसआईटी की जांच सीमित क्यो कि गयी है ये सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल खडे करता है?

रावत ने कहा कि बाजपुर गदरपुर किच्छा सितारगंज में भी एनएच में घोटाले हुए है जिनकी तरफ जांच की कोई पहल नहीं की जा रही है जबकि कई नाम और भी है जिनको एसआईटी सार्वजनिक नहीं कर रही है और बडे मगरमच्छों को बचाने में लगी है, यही नहीं इशारों में रावत ने कहा कि जो घोटाले में शामिल थे, वो सत्ता की गोद में बैठ गये हैं इस लिए उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है, रावत ने घोटाले की जांच हाईकोर्ट की देखरेख में कराए जाने की मांग की।

निगम के सीमा विस्तार पर गर्मायी राजनीति

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काशीपुर, नगर निगम का सीमा विस्तार हो गया है, जिसमें करीब 15 गांव और जुडने जा रहे हैं, और निगम के बीस वार्ड और बढने की उम्मीद जतायी जा रही है, वहीं सीमा विस्तार को लेकर विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे है, निर्धारित सीमा विस्तार को भाजपा की साजिश बताया जा रहा है, जिससे सीमा विस्तार का मामले पर राजनीति गर्मा गयी है।

नगर निगम के विस्तारीकरण की राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने नगर निगम को एक सप्ताह के भीतर परिसीमन कर वार्डों की सूची तलब की है। सरकार ने नगर निगम के सीमा विस्तार प्रस्ताव पर 22 सितंबर 2017 को मंजूरी दी। सरकार के आदेश पर संयुक्त मजिस्ट्रेट विनीत तोमर ने आपत्तियों पर सुनवाई की। ग्राम प्रधान व कांग्रेस और बसपा नेताओं ने आपत्तियां दर्ज कराई। जारी अधिसूचना में 13 ग्राम सभाएं, दो ग्राम सभाएं आंशिक और एक राजस्व गांव को नगर सीमा में सम्मलित कर दिया है। नगर निगम की जनसंख्या एक लाख 21 हजार 610 है। सम्मलित क्षेत्र की जनसंख्या 67 हजार है। सीमा विस्तार से नगर की जनसंख्या एक लाख 88 हजार 610 हो जाएगी। नगर निगम में अभी 20 वार्ड है। सीमा विस्तार के बाद वार्डों की संख्या 35 से 40 तक होने का अनुमान है।

वहीं सीमा विस्तार की अधिसूचना जारी होने पर राजनीतिक दलों, ग्राम प्रधान संघ ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने सीमा विस्तार को हाइकोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। ब्लॉक प्रमुख ने इसे अव्यवहारिक और राजनीतिक निर्णय बताकर विरोध जताया है।नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष शमशुद्दीन ने कहा कि सीमा विस्तार अव्यवहारिक है। इसके पीछे राजनीतिक स्वार्थ है। विस्तार में नगर से लगे गांवों को छोड़ा गया। दूर के गांवों लिए गए। जिन गांवों का शहरीकरण हो चुका है उनको नहीं लिया। नगर निगम के पास पहले ही कर्मचारियों की कमी है। उन्होंने इस निर्णय के विरूद्ध अदालत जाने की बात कही है।

ऋषिकेश से स्वर्गाश्रम को जोड़ने के लिए तीन लेंन के पुल का पिछले 5 सालों से इंतज़ार

ऋषिकेश, पर्यटन नगरी ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला-राम झूला अपनी विशेष पहचान रखते है, लेकिन ये दोनों पुल पैदल आने जाने का साधन है काफी लम्बे समय से छेत्र में एक अन्य पल की मांग की जा रही थी, जिसका शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपने कार्यकाल में किया था, जिसका नाम जानकी पुल रखा गया लेकिन बजट के अभाव में इस पुल का काम पिछले 5 सालों से लटका हुआ है। 

ऋषिकेश से स्वर्गाश्रम, नीलकंठ महादेव को  जोड़ने के लिए जानकी पुल का निर्माण होना है जिसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया था, जिस से नीलकंठ कावड़ यात्रा में जाने वाले  श्रधालुओ को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा, ऋषिकेश से 35 करोड़ 53 लाख की लागत  से बनने वाला जानकी पुल पैदल के साथ साथ हल्के वाहनो के लिए भी प्रयोग में आएगा ,लेकिन अभी तक इस पुल के निर्माण के लिए कार्य बड़ी धीमी गति से चल रहा है।

मुनि की रेती पालिका अध्यक्ष शिव मूर्ति कंडवाल का कहना है कि, “सरकार इनसे लिए काफी समय से काम देख रही है लेकिन बजट न मिलने से काम फिलहाल अधूरा है,  जानकी पुल का निर्माण ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट से वेद निकेतन घाट के बीच होना है जिस से स्वर्गाश्रम जाने वाले यात्रियों को लगभग तीन किलो मीटर की दुरी और लगभग पैदल जाने का 1 घंटे का समय बचेगा।”

पिछली सरकार द्वारा भी इस पल के लिए वादे किये गए थे लेकिम कार्य पूरा नहीं हो सका, ऐसे में बीजेपी सरकार के आने से एक बार फिर लोगों में पुल के प्रति उम्मीद जगी है लेकिन लोगों में अब इसके खिलाफ गुसा भी देखा जा रहा है क्युकी कार्य जस का तस पड़ा हुआ है जिससे सबसे ज्यादा लोगों और यहाँ पहुंचने वाले पर्यटकों को उठानी पद रही है। 

पर्यटन के छेत्र में अपनी विशेष पहचान बना चुके लक्ष्मण झूला -राम झूला के बाद अब जानकी पुल का बेसब्री से इंतज़ार है जिसके बनने से इन दोनों पुलो पर दुपहिया वाहनो और भीड़भाड़ का दबाव काम होगा, और तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भी सहूलियत मिलेगी। अब देखने लायक बात होगी की प्रदेश सरकार इस थमी योजना को कब तक पूरा कर पाते है                

फुटपाथ पर रात गुजार रहे असहायों की सुध नहीं

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विकासनगर। पछवादून में कोई भी रैनबसरा नहीं होने के कारण बेघर लोगों को सर्द रातें फुटपाथ पर ही रात गुजारनी पड़ती है, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में फुटपाथ नहीं होने के चलते बेघर लोग हाईवे पर ही सोने को मजबूर हैं, जिसके चलते दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। ठंड बढ़ने के बावजूद तहसील प्रशासन द्वारा इन लोगों को कंबल भी मुहैया नहीं कराए गए हैं, वहीं निकाय प्रशासन ने भी अभी तक अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की है।

पछवादून में दर्जनों लोग रात फुटपाथ पर गुजारते हैं। पांच लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में कोई भी रैन बसेरा व सेल्टर होम नहीं है, जिससे बेसहरा, बेघर लोगों को कड़ाके की ठंड में भी बिना छत के नीचे रात गुजारनी पड़ती है। गौरतलब है कि पूरे क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक लोग फुटपाथ पर रात गुजारते हैं, जिनमें से कुछ मजदूरी करने वाले हैं तो कुछ भीख मांग कर जीवनयापन करने वाले भी हैं। कुछ मानसिक विक्षिप्त लोग भी सड़क पर ही रात गुजारते हैं। इनमें से किसी के लिए प्रशासन ओर से कोई सहायता नहीं दी जा रही है। बताते चलें कि पछवादून के तीनों निकायों अलाव की व्यवस्था भी नहीं की गई है, साथ ही कस्बों में फुटपाथ नहीं है। जिससे रात में वाहनों के चपेट में आने की संभावना भी बनी रहती है। पूरे क्षेत्र में ऐसे लोगों के रहने के लिए प्रशासन की ओर से टीन शेड भी नहीं बनाए गए हैं। जिसके चलते दर्जनों लोगों को ठंड में खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ती है, वहीं इस वर्ष तहसील प्रशासन ने इन लोगों को कंबल भी वितरित नहीं किए हैं। जबकि मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को कुछ ही दूरी पर बने राज्य मानसिक रोग संस्थान में भर्ती कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। उधर, एसडीएम जितेंद्र कुमार ने कहा कि शीघ्र ही असहाय जनों को कंबल वितरित कर दिए जाएंगे। जबकि मानसिक विक्षिप्त लोगों को स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर टीम का गठन किया जाएगा।

सरकार पर जनता रखे भरोसाःसीएम

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रुद्रपुर, मुख्यमंत्री  ने तराई के संस्थापक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामसुमेर शुक्ल की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पंडित शुक्ल की स्मृति में आयोजित प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लचीली नजूल नीति तैयार करेंगे, ताकि लोगों को उसका लाभ मिल सके। कहा कि एनएच घोटाले की जांच वह सीबीआई से कराना चाहते थे, लेकिन सीबीआई ने जांच करना स्वीकार नहीं किया। इसलिए सरकार ने समानान्तर जांच कराई और आज दो पीसीएस अफसरों समेत दस लोग जेल में हैं।

श्री रावत ने कहा कि सरकार के आठ महीने पूरे होने जा रहे हैं। हमने पहला निशाना भ्रष्टाचार पर किया। ऊधमसिंह नगर में एनएच 74 में मुआवजा घोटाला हुआ और बिहार के चारा घोटाले की तर्ज पर खाद्यान्न घोटाला हुआ। उन्होंने आरएफसी को बर्खास्त किया तथा तमाम अधिकारियों को स्थानांतरित किया। वह गरीबों का हक किसी को नहीं छीनने देंगे। कहा कि एनएच घोटाले में हमने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन सीबीआई ने जांच स्वीकार नहीं की, जिस कारण उन्होंने समानांतर जांच कराई।

जांच अभी जारी है। जो भी दोषी होंगे वह जेल जरूर जाएंगे। सरकार संस्थागत भ्रष्टाचार को रोक रही है। कहा कि वह विकास करना चाहते हैं। जनता सरकार पर भरोसा रखे, हम भ्रष्टाचार की कालिख से साफ निकलेंगे। हम सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर रहे हैं, ताकि जनता को भटकना न पड़े।