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एनजीटी की 31 दिसंबर की डेडलाइन के बावजूद अब तक 784 प्रतिष्ठानों ने ही किया आवेदन

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देहरादून। एनजीटी की ओर से भूजल दोहन करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए 31 दिसंबर डेडलाइन दिए जाने के बावजूद अब तक केंद्रीय भूजल बोर्ड को 784 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। यह स्थिति तब है, जब एनजीटी के निर्देश के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या जनगणना 2011 के अनुसार ही 68 हजार के पार है।

एनजीटी को भूजल दोहन के लिए आवेदन करने वाले प्रतिष्ठानों की सूची भेजने की जिम्मेदारी जल संसाधन मंत्रालय को सौंपी गई है। इसको लेकर केंद्रीय भूजल बोर्ड के सभी क्षेत्रीय कार्यालय नियमित तौर पर रिपोर्ट भेज रहे हैं।
मंगलवार को केंद्रीय भूजल बोर्ड देहरादून से भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक जनगणना 2011 के अनुसार दायरे में आने वाले कुल प्रतिष्ठानों में से महज 1.15 फीसद प्रतिष्ठानों ने ही भूजल दोहन के लिए आवेदन किया है। सबसे अधिक भूजल का दोहन देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर व नैनीताल जिले में किया जाता है और यहां एनजीटी के निर्देश के दायरे वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 31 हजार 500 से अधिक है। मैदानी क्षेत्रों में ही भूजल दोहन की बात स्वीकार की जाए और यह माना जाए कि यहां के 25 फीसद प्रतिष्ठान ही भूजल का दोहन कर रहे हैं, तब भी यह आंकड़ा 7800 से अधिक होना चाहिए। 

इस श्रेणी के लिए भूजल दोहन का आवेदन जरूरी:
यदि उद्योग (फैक्ट्री, वर्कशॉप आदि) स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, होटल, लॉज, गेस्ट हाउस आदि भूजल दोहन कर रहे हैं तो उन्हें इससे पहले केंद्रीय भूजल बोर्ड में आवेदन करने की अनिवार्यता की गई है।
भूजल दोहन को 70 से भी कम अधिकृत
वर्ष 2003 से अब तक की बात करें तो अब तक भूजल बोर्ड के दोहन के लिए राज्य में 70 से भी कम कमर्शियल श्रेणी के प्रतिष्ठान अधिकृत हैं।
दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों की स्थिति
(जनगणना 2011 के अनुसार)
शैक्षणिक, होटल आदि, हॉस्पिटल, उद्योग
जिला
देहरादून, 3113, 1634, 1097, 2728
हरिद्वार, 2233, 2149, 1136, 3634
ऊधमसिंहनगर, 2269, 823, 1074, 3658
नैनीताल, 2502, 1284, 667, 1545
प्रदेश, 29949, 12346, 7676, 18096
इस दौरान केंद्रीय भूजल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक अनुराग खन्ना ने कहा कि भूजल दोहन के लिए आए आवेदनों की संख्या बेहद कम है, जो कि वास्तविकता से कोसों दूर भी है। हालांकि यह आवेदन भी पिछले कुछ माह में भी प्राप्त हुए हैं। आगे की कार्रवाई डेडलाइन पूरी होने के बाद एनजीटी के निर्देश पर की जाएगी।

सीमांत जनपद में बढ़ी जीओ की मुश्किल, खुदाई पर लगी रोक

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पिथौरागढ़- जीओ मोबाईल सेवाओं को पहाडों तक पहुंचाने के लिए नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में जेसीबी से भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जेसीबी से सडकों को खोद कर ओफसी लाईने बिछाई जा रही है, जिसका विरोध करते हुए स्थानीय लोगों ने कार्यवाही की मांग की तो जिलाधिकारी ने भी जेसीबी से खुदाई को मानकों की अनदेखी बताते हुए मेनुअल तरीके से लाईनें बिछाने के निर्देश दिये हैं जबकि रिलायन्स ग्रुप को इस क्षतिपूर्ति के लिए जो धनराशि जमा करनी थी वो आज तक नहीं की गयी है।
आपको बतादें की सीमांत जनपद पिथोरागढ में रिलायंस जियो नेटवर्क कंपनी द्वारा सड़क किनारे बिछाई जा रही ओएफसी लाइन में मानकों की अनदेखी की जा रही है जिसको लेकर जिलाधिकारी सख्त हो गए हैं उनका कहना है कि जेसीबी से सड़क काटे जाने पर उसको सीज किया जाएगा साथ ही कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी की जाएगी। वहीं लोनिवि को दो दिन के भीतर सड़कों से ओएफसी लाइन काटने के लिए तैनात की गई जेसीबी हटाने के निर्देश दे दिए हैं। डीएम सी रविशंकर ने ओएफसी लाइन बिछाने के लिए जेसीबी से सड़क काटे जाने को गंभीर बताया और सड़क से जुड़े विभागों, उपजिलाधिकारियों और थाना प्रभारियों को जेसीबी सीज करते हुए कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए। इस मौके पर रिलायंस कंपनी द्वारा क्षतिपूर्ति एक करोड़ की धनराशि जमा नहीं करने पर सड़क काट कर ओएफसी लाइन बिछाने का कार्य पूरी तरह बंद करने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने दी अधिकारियों को सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने की हिदायत

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सूचना क्रांति के इस दौर में उत्तराखंड के अधिकारियों की सोशल मीडिया से दूरी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को नहीं भा रही है। रावत ने बकायदा आधिकारिक आदेश जारी कर सभी अधिकारियों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और लोगों से जुड़ने के आदेश दिये हैं। मंगलवार को जारी किये इस आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के तमाम सोशल मीडिया हैंडल्स पर आने वाली शिकायतों, सुझावों और जानकारियों को संबंधित विभाग और अधिकारियों को भेजा जाता है। पर वहां से इन पर एक्शन न होने से ये संवाद अधूरा रह जाता है। इसलिये आने वाले समय में सभी विभागों और अधिकारियों को इन संदेशों और शिकायतों पर तुरंत एक्शन लेकर उन लोगों को सूचित करना होगा जिन्होंने ये पोस्ट करे हैं।

गौरतलब है कि केंद्र में पीएम और अन्य नेताओं की देखा-देखी राज्य में भी क नेताओं और अधिकारियों ने अपनी सोशल मीडिया अटेंडेंस के लिये अकाउंट तो बना लिये हैं पर अलग-अलग कारणों से इनमें लोगों से संवाद और एक्शन न के बराबर ही है। ज्यादातर हैंडलस पर नेताओं के बधाी और सरकारी प्रोग्रामों की जानकारी दी जाती है। वहीं अधिकतर अधिकारी और विभागों ने तो सोशल मीडिया से काफी दूरी बना रखी है।

वहीं मसूरी में रहने वाले लेखक गणेश सैली का मानना है कि, “हालांकि सोशल मीडिया कई मायनों में एक वरदान है, फिर भी इसकी सीमाएं और शॉर्ट-कॉमिंग हैं, यह आपको जनता की आंखों में हाईलाइट करता है और कभी-कभी अच्छे इरादे रखने वालों के खिलाफ भी यह बैकफायर हो जाता है। लेकिन स्क्रीन के जमाने में जितने भी लोग आज पब्लिक फेस में है वह इस डिजीटल क्रांति का हिस्सा बिना बने नहीं रह सकते,” सैली कहते हैं कि यह, “हॉबसन चॉइस ” है।

बिना इसके नहीं होगा गाडियों का रजिस्ट्रेशन और कट सकता है चालान भी

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राज्य सरकार उत्तराखंड मोटर वाहन विनियम में बदलाव कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्राइवेट और कर्मशियल कामों के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों में डस्टबिन हो। आपको बतादें कि यह पहल राज्य सरकार के वेस्ट मैनेजमेंट ड्राइव के अंतर्गत होगी।

मुख्यमंत्री टीएस रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि चार पहिया गाड़ियों में कूड़ेदान रखना अनिवार्य है।आपको बतादें कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री  हरीश रावत ने पहले इसी तरह के निर्देश जारी किए थे लेकिन यह कभी लागू नहीं किया गया।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि वह गाड़ियों में डस्टबिन फिट करवाने के लिए उत्सुक हैं, जिसके लिए मोटर वेहिकल नियमों में संशोधन की संभावना है। राज्य परिवहन सचिव डी.सेंथिल पांडियन, ने कहा कि “पहले हम लोगों को इसे स्वेच्छा से करने के लिए कहेंगे। इसके लिए, हम कार और अन्य वाहन डीलरों के साथ भी बात करेंगे।”

उन्होंने बताया कि, “नए (वाहन) पंजीकरण में डस्टबिन लगाए बिना गाड़ियों को रजिस्टर नहीं किया जाएगा,जिसके लिए हम राज्य के नियमों में संशोधन करने की सोच रहे हैं।”उन्होंने कहा कि, “परिवहन विभाग पहले अपनी बसों में कूड़ेदान स्थापित करना शुरू करेगा। उत्तराखंड में लगभग 60% परिवहन सार्वजनिक है।”

कूड़ेदान की स्थापना चरणों में की जाएगी और पहले चरण में, इंट्रा-स्टेट, इंटर स्टेट और सिटी बसों को कूड़ेदान फिट किया जाएगा। दूसरे चरण में, प्राइवेट कर्मशियल गाड़ियों जैसे कैब और बसों में कूड़ेदान फिट किया जाएगा और आगे हम प्राइवेट वाहनों में भी इस ड्राइव को बढ़ावा देंगे।

जहां एक तरफ, सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्सुक है; वहीं दूसरी तरफ वेस्ट मैनेजमेंट अभी भी दूर का सपना है। राज्य के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यह सुनिश्चित करें कि कचरा संग्रह केन्द्रों की स्थापना की जाए ताकि डोर-टू-डोर कचरे को उठाया जाए और कचरे को अलग किया जा सके जिसमें से नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे का रिसाइकिल किया जा सके।

देहरादून रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष महेश भंडारी ने कहा कि, “समस्या सफाई की नहीं लेकिन बड़ी समस्या सेंसीटाइजेशन यानि की संवेदीकरण की है। शहर में जगह-जगह कचरे के डिब्बे के बावजूद, लोग अभी भी खुले प्लॉट में और सड़क के किनारे पर कचरा फेंक देते हैं। यह रोके जाने की जरूरत है।”

उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों को डस्टबिन के अलावा कूड़ा फेकते हुआ पाया जाए उनपर फाईन लगना चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। “जब तक लोग अपने इलाकों को प्रदूषित करने के लिए भुगतान नहीं करते, तब तक वेस्ट मैनेजमेंट एक दूर का सपना होगा।”

अंर्तराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल गोवा का समापन, अमिताभ ‘सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्म व्यक्तित्व’

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गोवा में आयोजित 9 दिवसीय भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह (आईएफएफआई) 2017 मंगलवार को एक रंगारंग समापन समारोह के साथ संपन्न हो गया। इस वर्ष के आईएफएफआई की थीम ‘कहानियों के जरिए विश्व से जुड़ाव’ थी। सितारों से सुसज्जित समारोह के दौरान स्वर्ण मयूर, रजत मयूर, लाइफटाईम अचीवमेंट पुरस्कार एवं वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार समेत विभिन्न सम्मानजनक पुरस्कार प्रदान किए गए।

रोबिन केम्पिलो द्वारा निर्देशित फ्रांस की फिल्म ‘120 बिट्स पर मिनट’ ने आईएफएफआई 2017 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार हासिल किया। इस पुरस्कार में स्वर्ण मयूर ट्रॉफी, प्रमाण पत्र एवं 40,00,000 रुपये का नकद पुरस्कार, जिसे निर्देशक एवं निर्माता में समान रूप से विभाजित किया गया, शामिल हैं। नहुएल पेरेज बिक्सायार्ट को ‘120 बिट्स पर मिनट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला और उन्हें रजत मयूर प्रदान किया गया। ‘120 बिट्स पर मिनट’ 1990 के दशक में पेरिस में कार्यकर्ताओं के एक समूह की कहानी है, जो एचआईवी/एड्स मरीजों के पक्ष में संघर्ष करने के दौरान सरकारी एजेंसियों एवं फॉर्मास्यूटिकल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों का मुकाबला करते हैं।

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार फिल्म ‘एंजेल्स वियर व्हाइट’, के लिए विवियन क्यू को प्रदान किया गया, जिन्हें स्वर्ण मयूर ट्रॉफी एवं 15 लाख रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पार्वती थिरुवथू कोट्टूवता को मलयाली फिल्म ‘टेक ऑफ’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि नहुएल पेरेज बिक्सायार्ट को ‘120 बिट्स पर मिनट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। दोनों को रजत मयूर ट्रॉफी एवं 10-10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। विशेष ज्यूरी पुरस्कार, जिसमें रजत मयूर पुरस्कार एवं 15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल हैं, महेश नारायणन को उनकी मलयाली फिल्म ‘टेक ऑफ’ के लिए प्रदान किया गया। कीरो रोशो को उनकी स्पैनिश फिल्म ‘डार्क स्कल’ के लिए ‘किसी निर्देशक की पहली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’ का पुरस्कार मिला।

विख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए वर्ष के सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्म व्यक्तित्व का पुरस्कार प्रदान किया गया। कनाडा के विख्यात फिल्मकार एटम इगोयान को भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह (आईएफएफआई) 2017 के समापन समारोह के दौरान लाइफटाईम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया। लाइफटाईम अचीवमेंट पुरस्कार में 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल है जो सिनेमा में असाधारण योगदान के लिए किसी उत्कृष्ट फिल्मकार को प्रदान किया जाता है।

मराठी फिल्म ‘क्षितिज-ए होराईजन’ को आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी मेडल मिला, जिसका निर्देशन फिल्मकार मनौज कदम्ह ने किया है। इस पुरस्कार का गठन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म एवं टेलीविजन परिषद, पेरिस एवं यूनेस्को द्वारा किया गया है तथा यह वैसी फिल्म को दिया जाता है जो शांति एवं सद्भाव के गांधीवादी मूल्यों को प्रदर्शित करता है।

 

बिग बास पर ‘टाइगर जिंदा है’ का दूसरा गाना होगा लांच

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रियल्टी शो बिग बॉस के होस्ट और बॉलीवुड स्टार सलमान खान रेस-3 के प्रमोशन के बाद अब बिग बास पर ही अपनी आने वाली फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ के दूसरे गाने ‘दिल दीयां गल्लां’ को लांच करते हुए दिखाई देंगे। सलमान और कटरीना इस गाने पर अपनी लाइव परफार्मेंस एक स्पेशल अंदाज में लांच करेंगे। यह फिल्म 22 दिसंबर को सिल्वर स्क्रीन पर प्रस्तावित की जा रही है।

उल्लेखनीय हो कि अली अब्बास जाफर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का पहला गाना हाल ही में लांच किया गया है| ‘स्वैग से करेंगे सबका स्वागत’ को दर्शकों का काफी अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ 2012 में आई फिल्म ‘एक था टाइगर’ का सिक्वल है। एक था टाइगर को कबीर खान ने निर्देशित किया था। सलमान और कटरीना पांच साल बाद एक साथ इस फिल्म में नजर आ रहे हैं|

दो घंटे की देरी से रवाना हुई देहरादून मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस

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देहरादून, कोहरे व निर्माण कार्य के कारण ट्रेन लेट होने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को भी दून आने आने वाली कई गाड़ियां अपने निर्धारित समय से घंटों विलंब से पहुंची। जबकि देहरादून मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अपने तय समय से दो घंटे की देरी से रवाना हुई। जिस कारण यात्रियों व उसके परिजनों को ट्रेने के इंतजार में परेशानियों का सामना करना पड़ा।

मंगलवार को हावड़ा से चलकर दूेहरादून आने वाली दून हावड़ा एक्स्रपेस अपने निर्धारित समय से आठ घंटे लेट पहुंची। जबकि मुजफ्फरपुर देहरादून अपने तय समय से लगभग ढ़ाइ से तीन घंटे की देरी से आने के कारण दो घंटे देर से रवाना हुई। वहीं दिल्ली से देहरादून आने वाली मसूरी एक्सप्रेस तथा काठगोदाम से आने वाली काठगोदाम देहरादून एक्स्रपेस तय समय पर पहुंची।

दिल्ली से देहरादून आने वाली शताब्दी एक्सप्रेस व अमृतसर से चलकर देहरादून आने वाली अमृतसर एक्सप्रेस लगभग आधा घंटे की देरी से पहुंची। इलाहाबाद से वलकर देहरादून आने वाली लिंक एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 13.10 मिनट से 3:30 मिनट की देरी पर पहुंची। मुजफ्फरपुर से देहरादून सप्ताह में एक दिन मंगलवार को आने वाली मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अपने तय समय 13:55 से ढ़ाई घंटे की देरी से आई। जबकि गोरखपुर राप्ती गंगा एक्सप्रेस देहरादून से गोरखपुर तय समय पर रवाना हुई। दून से अन्य खुलने व आने वाली गाड़ियां अपने समय से रवाना हुई।

स्टेशन अधीक्षक सीताराम सोनकर ने बताया कि रेलवे ट्रेक पर निर्माण कार्य के चलते लंबी दूरी की रेल विलंब से देहरादून पहुंच रही हे। फिर भी देहरादून से गाड़ियों को समय से रवाना किया जा रहा है। ट्रेन लेट होने के कारण यात्री परेशान हो रहे हैं। यात्रियों को सुरक्षा का ध्यान दिया जा रहा है। 

मैड ने रिस्पना पुनर्जीवन पर विभिन्न संगठनों के साथ किया मंथन

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मेकिंग अ डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) संस्था ने देहरादून के अनेक संगठनों एवम बुद्धिजीवियों के साथ रिस्पना पुनर्जीवन में आम जन मानस की भागीदारी पर वृस्त्रित चर्चा की। इस दौरान लोगों ने सरकार की नीति को स्पष्ट करने की मांग की। ताकि उसी अनुरूप कार्या को गति दिया सके।

मैड संस्था ने रिस्पना पुनर्जीवन पर एक बैठक का आयोजन आम जन मानस एवं समाज के हर टपके को अपने इस अभियान से जोड़ने के लिए किया गया। 15 नवंबर को इसी के बारे में मैड की ओर से एक प्रस्तुति मुख्य सचिव उत्पल कुमार के अध्यक्षता में हुई थी जिसमे इको टास्क फोर्स को यह जिम्मेदारी दी गयी थी कि वह रिस्पना पुनर्जीवन का एक खाका तैयार करें।

बैठक में लोकेश ओहरी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, “स्पष्ट होना चाहिए कि इको टास्क फोर्स को क्या अधिकार छेत्र दिया गया है जिसके तहत वह इस प्रोजेक्ट में अपनी भूमिका निभाने वाले हैं।” इस दौरान सिटीजन्स फ़ॉर ग्रीन दून के आशीष गर्ग ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि रिस्पना में किसी भी तरह के सीवर का डाला जाना गलत है और इसपर तत्काल कानूनी प्रतिबंध न सिर्फ लगना चाहिए बल्कि लागू भी किया जाना चाहिए।

प्रमुख संगठन के परमजीत सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि, “रिस्पना पुनर्जीवन पर समाज के सभी वर्गों को साथ काम करना चाहिये। लिटिल फ्लावर स्कूल की रोहिणी मनुचा पूरी ने मलिन बस्ती के ज्वलंत मुद्दे को उठाया और कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मलिन बस्तियों के संदर्भ में उनकी नीति क्या होगी।”

दून सिटीजन कौंसिल के ब्रिगेडियर के जी बहल ने अपनी राय रखते हुए कहा कि एक ओर जहां मलिन बस्तियों के मूल भूत अधिकारों की अवेहलना नही होनी चाहिए वही दूसरी ओर उनके पुनर्वास की तरफ राज्य सरकार को ठोस नीति नियोजित करनी चाहिए।

कल्पतरु संस्था के प्रभास ने इस बात पे ज़ोर दिया कि पहले हमें उन चीजों पर ध्यान आकर्षित करना चाहिए जो बिना किसी रुकावट के की जा सके और वी अदित मुद्दों को उसके बाद है देखना चाहिए।

संयुक्त नागरिक संगठन के सुशील कुमार त्यागी ने यह बात कही की इस मुहीम को आगे बढ़ाना चाहिए और इसमें नई जान डालने के लिए और भी लोगों को साथ लेना चाहिए। राजप्यर कम्युनिटी इनिशिएटिव की अध्यक्षा रीनू पॉल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राजौर छेत्र में किसी भी तरह के निर्माण कार्य जो रिस्पना तलहटी पर हो रहे हो उन पर प्रतिबंध लगना चाहिए और आरोपियों पर निगरानी की जानी चाहिए।

नैशनल पेरेंट्स समूह के आरिफ मोहोम्मद ने भी यही कहा कि अतिक्रमण के मुद्दे पर राज्य सरकार को वोट बैंक की राजनीति नहीं खेलनी चाहिये। जगमोहन मेहंदीरत्ता ने यह कहा कि सामाजिक संगठनों की तरफ से मैड को अपने सुझाव समय से दे देने चाहिए ताकि निष्क्रिय पड़े सरकारी तंत्र को आईना दिखाया जा सके।

हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को किया तलब

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नैनीताल,  हाई कोर्ट ने सचिव स्वास्थ्य को बागेश्वर में ब्लड ब्लैड बैंक और ट्रॉमा सेंटर नही खोलने पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए है। मामले की सुनवाई न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायधीश आलोक सिंह की खंडपीठ में हुई।

नागरिक मंच बागेश्वर ने जनहित याचिका दायर कहा था कि बागेश्वर में ब्लैड बैंक और ट्रॉमा सेंटर नही है, जिसको खोलने के लिए उन्होंने सरकार को कई बार प्रार्थना पत्र भी दिए परन्तु इस पर कोई कार्यवाही नही हुई। जिसके कारण उनको जनहित याचिका दायर करनी पड़ी। पूर्व में खंडपीठ ने 10 नवम्बर 2016 को सरकार से चार सप्ताह में ब्लैड बैंक और ट्रॉमा सेंटर खोलने के आदेश दिए थे जिसकी जिमेदारी सचिव स्वास्थ्य को दी थी परन्तु कोर्ट के आदेश करने के बावजूद भी सरकार ने ब्लैड बैंक और ट्रॉमा सेंटर नही खोला गया आज याचिकाकर्ता ने प्रार्थना पत्र देकर न्यायालय को अवगत कराया कि अभी तक ब्लैड बैंक और ट्रॉमा सेंटर नही खोल गया।

मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हए सचिव स्वास्थ्य को अगले सोमवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए है।

जनसुनवाई दिवस में नौ मामलों का निस्तारण

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देहरादून। जिलाधिकारी एस.ए मुरूगेशन की अध्यक्षता में आज सभी विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनसुनवाई में 43 शिकायतें प्राप्त हुई, जिसमें 9 शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया है तथा बाकी को सम्बन्धित विभागों को हस्तांतरित करते हुए तय समय में निस्तारित करने के निर्देश दिये।
सोमवार जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलैक्र्टेट सभागार में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कि जो समस्याएं शिविर में प्राप्त हो रही है और जिनका मौके पर निस्तारण नही हो पाया है। ऐसी शिकायतों को सम्बन्धित विभाग त्वरित गति से निस्तारण करे। यदि समस्याएं उनके स्तर की नही है तो जिस स्तर की समस्या है को सम्बन्धित अधिकारी को हस्तान्तरित कर दी जाये तथा इसकी सूचना से शिकायतकर्ता को भी अवगत कराया जाय।
जिलाधिकारी ने जनसुनवाई कार्यक्रम में प्राप्त प्रत्येक जन शिकायतकर्ता के आवेदन का निस्तारण सम्बन्धित विभाग के सक्षम अधिकारियों को मौखिक रूप में उपस्थित करते हुए करवाया। उन्होने पूर्व की जनसुनवाई में लम्बित रह गये प्रकरणों/आवेदनों को भी जांचा तथा आज सामने प्रकरणों का तत्काल समाधान करवाया तथा कुछ प्रकरणों को सम्बन्धित विभाग को तय समय के अन्दर निस्तारण के निर्देश दिये।
उन्होंने स्वच्छता के नोडल अधिकारियों से फीडबैक भी लिया तथा इसमें अच्छा कार्य करने वाले कार्मिकों को भी फीडबैक देते हुए उन्हे प्रेरित करने के भी निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अध्यक्षों,प्रभारी अधिकारियों को निर्देश दिये है। जो कार्य करने के लिए वे सक्षम है उसका मौके पर ही निस्तारण करें तथा जो शिकायतें उनके विभाग से सम्बन्धित नही है उसकी सिफारिश तुरंत सम्बन्धित विभागीय अधिकारी को करें ताकि जनहित के कार्यों का जल्दी से समाधान हो सके और पात्र व्यक्ति को उसका लाभ मिल सके।
जनसुनवाई में अधिकतर शिकायतें राजस्व विभाग, समाज कल्याण, जल संस्थान, नगर निगम, पुलिस विभाग, ग्राम्य विकास, लोक निर्माण, शिक्षा, पेयजल, विद्युत विभाग इत्यादि से सम्बन्धित रही।
जनसुनवाई शिविर में नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदांडे, मुख्य विकास अधिकारी जी.एस रावत, अपर जिलाधिकारी अरविन्द पाण्डेय, परियोजना निदेशक राजेन्द्र रावत, जिला विकास अधिकारी प्रदीप पाण्डेय सहित सम्बन्धित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।