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साईबर क्राईम और डीएनए बायोलाजी पर पुलिस का प्रशिक्षण

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रुद्रपुर, तकनीकी में पारंगत करने एवं विधि विज्ञान के माध्यम से साक्ष्यों का संकलन करने संबंधित कार्यों के लिए पुलिस जावानों को प्रशिक्षित करने के लिए बुधवार को भी कार्यशाला आयोजित हुई। एडवांस साइबर क्राइम फारेंसिक सांइस कोर्स की विस्तृत जानकारी दी गई। 27 नवंबर से शुरू हुई यह कार्यशाला एक दिसंबर तक चलेगी।

पुलिस लाइन में चल रही पांच दिवसीय साइबर क्राइम एवं विधि विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला के तीसरे दिन पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। आज का प्रशिक्षण सेंटेफिक आफीसर एमके अग्रवाल ने डीएनए बायोलॉजी पर दिया। इस दौरान पुलिस कर्मियों में भी खासी जागरूकता दिखी और उन्होंने तमाम सवालों के जवाब भी पूछे, जिस पर प्रशिक्षक ने बड़ी ही खूबसूरती के साथ जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया।

इस कार्यशाला में एटीसी हरिद्वार सेनानायक आईपीएस नीलू गर्ग डिप्टी डायरेक्टर एनसी पंत ने जवानों को एडवांस तकनीकी एवं पुलिस से संबंधित साक्ष्यों में जरूरी प्रयोग में लाई जाने वाली तकनीकी की जानकारी दी। आज बुधवार को भी एमके अग्रवाल ने भी डीएनए बायलॉजी पर प्रशिक्षणार्थियों के बीच विस्तृत व्याख्यान दिया। बताया गया कि आने वाले दो दिनों में एसटीएफ के राजीव अग्रवाल फेस बुक और व्हॉटसअप, आरआई एटीसी अखिलेश कुमार कंप्यूटर और फॉरेंसिंक, निरीक्षक प्रीतम सिंह मेडिको लीगल,  संजय जोशी फिंगर प्रिंट लेबलिंग, पैकिंग, स्ट्रंगुलेशन, हैंगिंग की जानकारी देंगे।

इसके अलावा प्राइवेट एक्सपर्ट अभिषेक वशिष्ठ डोकोमेंट एंड हैडराइर्टिंग कोर्स, कॉर्डिनेटर एसआई निशांत कुमार एवं कुलवीर सिंह भी विभिन्न तकनीकी पहलूओं पर प्रशिक्षण देंगे।

इंजीनियर यतिन वर्मा की मौत में हुआ ये खुलासा

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बीते 2 दिन पहले कोतवाली क्षेत्र के घण्टाघर समीप इंजीनियर यतिन वर्मा का मौत मामलें का हुआ खुलासा। हल्द्वानी के इंजीनियर यतिन वर्मा हत्याकांड में 2 दिन बाद आया नया मोड़। घटना के 60 घण्टे की पुलिस जांच के बाद निकला मामला आत्महत्या का।

60 घण्टे तक एक होटल में छिपा रहा मौत का राज, होटल के सीसीटीवी कैमरे में मौत से पहले मृतक यतिन की दिखी छटपटाहट। पुलिस जांच में ड्रग की लत से तंग आकर इंजीनियर यतिन वर्मा ने खुद को गोली मार कर मौत को गले लगाया। छानबीन में 2 तमंचे और गोलियां यतिन के होटल के कमरे से बरामद की गई ।

होटल कमरें से मिली यतिन की आत्मकथा की डायरी जिसमे यतिन ने अपनी डायरी में ड्रंग माफियाओं को बताया देश का आतंकी, यतिन की डायरी में सबूत के तौर पर दर्जनों ड्रग सौदागरों के नाम और पते दर्ज भी मिले।

यतिन के मौत के बाद होटल के दो कमर्चारीयों ने पुलिस को जांच से भटकाया, होटल कर्मियों ने यतिन की लाश को अपने होटल से बहार एक लॉज के सामने जा फेका था जिसे पुलिस ने सबूतों को ठिकाने लगाने के आरोप में होटल के दो कर्मीयों को गिरफ्तार किया ।

ड्यूटी से नदारद मिले चिकित्सक, दी हिदायद

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रानीखेत – सरकारी स्वास्थ्य सेवाए पहले ही पटरी से उतरी हुई है एसे में चिकित्सकों का नदारद रहना मरीजों को और भी खल रहा है, ड्यूटी से नदारद रहने वाले चिकित्सकों पर कार्यवाही करते हुए एसडीएम ने औचक निरीक्षण के दौरान नदारद चिकित्सकों को कडी हिदायद देते हुए कार्यवाही की बात कहीं है, जबकि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में और भी की खामियां पायी गयी, जिसके लिए सीएमओ को कार्यवाही के लिए कहा है।
विकासखंड के सबसे बड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में छापे के दौरान पांच चिकित्सा कर्मी ड्यूटी से नदारद मिले। बच्चों के टीकाकरण को दी जाने वाली वैक्सीन कब, किसे, कितनी उपलब्ध कराई गई, रजिस्टर में रिकॉर्ड तक नहीं मिला। यही नहीं पीएचसी से कितने मरीज किन कारणों से रेफर किए गए, इसका भी कोई ब्योरा नहीं रखा गया था। दवाओं का स्टॉक रजिस्टर भी दुरुस्त नहीं था। लापरवाही से नाराज संयुक्त मजिस्ट्रेट ने अनुपस्थित चिकित्सा कर्मियों से स्पष्टीकरण के साथ ही जांच व कार्रवाई के लिए सीएमओ को लिखा है। परिसर में पहुंचते ही कूड़ादान मिले ही नहीं। रजिस्टर दुरुस्त नहीं मिले। स्वास्थ्य केंद्र से पाच चिकित्सा कर्मी बगैर सूचना नदारद थे। स्टोर से वितरित की जाने वाली दवाओं के स्टॉक का विवरण तक नहीं रखा गया था।

मेडिकल के साथ व्यवहारिकता का पाठ पढ़ाता एम्स ऋषिकेश

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ऋषिकेश एम्स किसी ना किसी बहाने से सुर्खियों में बना रहता है लेकिन इस बार ऋषिकेश का एक एक अलग ही अंदाज में सुर्खियां बटोर रहा है । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश देश का पहला ऐसा मेडिकल संस्थान होगा जिसमें स्टूडेंट्स को मेडिकल शिक्षा के साथ व्यवहारिकता का पाठ पढ़ाया जाएगा इसके लिए सिलेबस में नया सब्जेक्ट भी जोड़ा जाएगा जो अगले सत्र से लागू होगा डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल एजुकेशन को प्रशासन की ओर से मेडिकल सिलेबस में नया शब्द जोड़ने की जिम्मेदारी दी है।
मानव व्यवहार विषय को सिलेबस में शामिल करने के लिए विभाग में कवायद शुरु कर दी है इसमें 2012 से ओपीडी शुरू हुई थी इसके बाद 2014 में पहला बैच शुरू हुआ। मेडिकल की कुल सीटें हैं जिसमें एमबीबीएसMBBS 450 बीएससी नर्सिंग 340 एम डी एम एस मे 150 और पीएचडी में 60 सीटें हैं एम्स प्रशासन के मुताबिक संस्थान का उद्देश्य बेहतर सेवाओं के साथ-साथ स्टूडेंट्स को व्यवहार का पाठ भी पढ़ाया जाना जरूरी है।
इस सब्जेक्ट में स्टूडेंट को पढ़ाया जाएगा कि मरीजों के साथ किस तरीके से व्यवहार करना चाहिए जिससे मरीज और तीमारदार डॉक्टर के साथ असहज महसूस ना करें इस सब्जेक्ट को शामिल करने और पढ़ाने के साथ बाकी सब्जेक्ट की तरह इसकी भी परीक्षा होगी जिस को पास करना हर मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए जरूरी होगा।
एम्स के निदेशक प्रोफेसर डॉ रवि कांत ने बताया कि, “मेडिकल के क्षेत्र में अलग तरह का सब्जेक्ट होगा इसमें मेडिकल स्टूडेंट्स मरीजों की परेशानियों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और लोगों का एम्स और डॉक्टर के प्रति विश्वास बढ़ेगा मुख्य का रुप से प्रोफेशनलिज्म जिसमें मरीजों के साथ व्यापारिक संबंधों का पाठ पढ़ाया जाएगा।”

पाइप लाइन डालने के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहा एडीबी विंग

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देहरादून। 23 जनवरी से पहले काम खत्म करने की जल्दी में एडीबी विंग पाइप लाइन डालने के नाम पर महज खानापूर्ति करने में लगा है। खुड़बुड़ा, डालनवाला के बाद अब गुरु रोड, पटेलनगर व विजय रतूड़ी मार्ग पर ऐसा ही मामला सामने आ रहा है।

एडीबी विंग ने इस क्षेत्र में पाइप लाइन को कम गहराई में डाल दिया है। नियमानुसार लाइन की गहराई चार फीट होनी चाहिए थी, लेकिन कर्मचारी यहां एक से डेढ़ फीट की गहराई पर ही लाइन डालकर छोड़ दे रहे हैं। लाइन की गहराई कम होने के कारण लोगों के पानी के कनेक्शन टूटने का खतरा बना हुआ है। क्षेत्र के पूर्व पार्षद गोविंद मोहन ने एडीबी विंग के प्रोजेक्ट मैनेजर विनय मिश्रा को शिकायत करते हुए बताया कि लाइन के नालियों व पुलियाओं के बीच से डालने से नालियां चोक हो रही हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा भी कार्य मानकों के अनुरुप नहीं किया जा रहा, जिसका भविष्य में स्थानीय लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इतना ही नहीं, कई बार शिकायत के बावजूद एडीबी विंग के अधिकारी मौके पर आकर देखने को तैयार नहीं।
टूटी सड़कों पर भड़की भाजयुमो
भाजपा युवा मोर्चा जीएमएस मंडल के महामंत्री संतोष कोठियाल, महानगर महामंत्री राजेश रावत ने एडीबी विंग के प्रोजेक्ट मैनेजर विनय मिश्रा को ज्ञापन देते हुए बताया कि बल्लुपुर वनस्थली में लंबे समय से टूटी हुई सड़कों और जगह-जगह एडीबी विंग की ओर से डाली गई पाइप लाइनों में लीकेज के कारण स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में कुछ दिन पूर्व स्थानीय विधायक हरबंस कपूर ने भी एडीबी विंग के अधिकारियों को शिकायत की थी, बावजूद इसके अधिकारी सुनने को तैयार नहीं। इस दौरान उन्होंने शीघ्र गड्ढों की मरम्मत करते हुए लीकेज को ठीक कराने की मांग की। शिकयत करने वालों में हिमांशु गोगिया, रोहित मौर्य, धीरज बिष्ट, मधु उप्रेती, विकास बेनवाल, पार्षद शारदा गुप्ता आदि मौजूद रहे।

बिजली कार्मिकों के तेवर तल्ख, पांच बजते ही विभागीय मोबाइल ऑफ

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देहरादून। अपनी मांगों को लेकर बिजली कार्मिकों के तेवर ज्यों के त्यों बने हुए हैं। मंगलवार को भी चार प्रमुख संगठनों से जुड़े कार्मिकों ने शाम पांच बजते ही विभागीय मोबाइल नंबर स्विच ऑफ कर दिए। इससे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है। विभिन्न कारणों से बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आपूर्ति बहाल करने में वक्त लग रहा है। क्योंकि, अधिकांश उपभोक्ता कॉल सेंटर पर सूचना देने के बजाय जेई, एसडीओ और अधिशासी अभियंताओं को मोबाइल से सूचना देते हैं।

उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन, ऊर्जा कामगार संगठन, ऊर्जा ऑफीसर्स, सुपरवाइजर्स एंड स्टाफ एसोसिएशन पे-मैट्रिक्स और पदोन्नत वेतनमान के मुद्दे पर संयुक्त रूप से आंदोलनरत हैं। सोमवार को सचिव ऊर्जा राधिका झा के साथ प्रतिनिधि मंडल की वार्ता भी हुई, जो कि विफल रही। चारों संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि मांगों के संबंध में शासनादेश जारी होने के बाद ही आंदोलन स्थगित किया जाएगा। साथ ही आंदोलन के दौरान अगर किसी भी कार्मिक का प्रबंधन और शासन ने उत्पीडऩ किया तो उसी वक्त से हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। संयुक्त मोर्चे के गढ़वाल मंडल प्रवक्ता दीपक बेनीवाल ने कहा कि सातवें वेतनमान में पे-मैट्रिक्स का निर्धारण गलत हुआ है और पदोन्नत वेतनमान की नई व्यवस्था भी अव्यवहारिक है। इसमें संशोधन का प्रस्ताव तीनों निगम प्रबंधन शासन को भेज चुके हैं, लेकिन शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। जिससे कर्मिकों में भारी आक्रोश है। 

संचार कंपनियों के जेसीबी इस्तेमाल पर लगाई रोक

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पिथौरागढ़। जिलाधिकारी रविशंकर की अध्यक्षता में विभागीय और विभिन्न संचार कंपनियों के अधिकारियों के संग मंगलवार को बैठक हुई। इस दौरान डीएम ने लोनिवि को दो दिन के भीतर रिलायंस जियो की सड़क किनारे खड़ी जेसीबी मशीनों को हटाने को निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी संचार कंपनी जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल करती पाई गई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में डीएम सी रविशंकर ने जिले में सड़क किनारे बिछाई जा रही ओएफसी लाइन में जेसीबी मशीन के इस्तेमाल के खिलाफ कड़ा तेवर दिखाया। इस दौरान जिलाधिकारी ने रिलायंस जियो संचार कंपनी की जेसीबी मशीन को सीज करने के आदेश देते हुए ओएफसी लाइन बिछाने के काम पर रोक लगा दी है। डीएम ने रिलायंस जियो कंपनी की जेसीबी मशीनों को सीज करने के साथ ही एक करोड़ रुपये की रायल्टी नहीं देने पर काम पर पूरी तरह रोक लगा दी है। डीएम ने सड़क निर्माण से जुड़े सभी विभागों, एसडीएम, थाना प्रभारियों को ओएफसी लाइन बिछाने के लिए इस्तेमाल हो रही जेसीबी मशीनों को तत्काल सीज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित कंपनियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि कोई भी संचार कंपनी ओएफसी लाइन बिछाने में जेसीबी मशीन का इस्तेमान नहीं करेगी। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता लोनिवि वाईएस शैल, एडीबी, जल संस्थान, बीएसएनएल के अधिकारी मौजूद रहे।

रियल एस्टेट एक्ट में चालू प्रोजेक्ट परिभाषित न होने से लटका बिल्डरों पर राहत मामला

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देहरादून। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 में चालू (ऑनगोइंग) प्रोजेक्ट के परिभाषित न होने के कारण ही अब तक बिल्डरों के लिए रेरा में राहत का फॉर्मूला निकालने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। लिहाजा, 31 जुलाई के बाद रेरा (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) में पंजीकरण को आवेदन करने वाले बिल्डरों व प्रॉपर्टी डीलरों को पेनल्टी से राहत देने की दारोमदार अब अन्य राज्यों की व्यवस्था और कैबिनेट के निर्णय पर टिकी है।

इस दौरान सचिव आवास अमित नेगी ने बताया कि बिल्डरों को पेनल्टी में राहत देने के लिए रेरा ने शासन को जो प्रस्ताव भेजा था उसमे स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि चालू परियोजनाओं को एक्ट में परिभाषित नहीं किया गया है। हालांकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गुजरात व राजस्थान राज्यों की ओर से अपनाए गए फॉर्मूले का हवाला भी दिया गया है। इन सभी राज्यों की व्यवस्था में एक समान बात यह है कि सभी ने 60 फीसद तक बिक चुके प्रोजेक्ट को पेनल्टी में राहत दी है। हालांकि इन राज्यों ने 60 फीसद का फॉर्मूला कहां से निकाला, इससे राज्य के अफसर पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। अब देखने वाली बात यह है कि उत्तराखंड की कैबिनेट भी इन राज्यों के नक्शेकदम पर आगे बढ़ती है और बिल्डरों व प्रॉपर्टी डीलरों को राहत देने के लिए कोई और उपाय खोजे जाते हैं।
एक्ट में कंप्लीशन सर्टिफिकेट को बनाया आधार
रियल एस्टेट एक्ट में सिर्फ इतना स्पष्ट किया गया है कि जिन परियोजनाओं में एक मई 2017 से पहले कंप्लीशन सर्टिफिकेट (कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र) नहीं लिया गया है, उन्हें रेरा में पंजीकरण कराना जरूरी है। इसके लिए समयसीमा 31 जुलाई भी तय कर दी गई थी। जबकि इसके बाद पंजीकरण कराने वाले प्रोजेक्ट को कुल परियोजना लागत के 10 फीसद तक पेनल्टी के दायरे में रखा गया। राज्य सरकार ने इतना जरूर किया कि 31 अक्तूबर तक के समय को एक, दो, पांच फीसद की पेनल्टी में बांट दिया और इसके बाद 10 फीसद पेनल्टी लागू की गई। हालांकि राज्य के बिल्डर यह मांग कर रहे हैं कि अन्य राज्यों की दर परियोजना लागत के प्रतिशत में पेनल्टी की जगह कुछ निश्चित शुल्क लगा दिया जाए। 

628 विद्यालयों में लटके रहे ताले, देहरादून में गरजे शिक्षक

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विकासनगर। मंगलवार को जौनसार-बावर परगने सहित पछवादून के सभी प्राथमिक विद्यालयों में ताले लटके रहे। शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश लेकर डीएलएड के विरोध में निदेशालय ने धरना प्रदर्शन किया।

शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार की गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कहा कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सत्रह वर्षों बाद शिक्षकों को अप्रशिक्षित मानना तर्कसंगत नहीं है जबकि कई शिक्षक सेवानिवृत्ति के कगार पर हैं। शिक्षकों के सामूहिक अवकाश के चलते जौनसार-बावर परगने सहित पछवादून के कुल 628 विद्यालयों में ताले लटके रहे। बताते चलें कि मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा सभी प्राथमिक शिक्षकों के लिए डीएलएड अनिवार्य कर दिया गया है। सूबे में प्रदेश सरकार ने बीएड डिग्री धारक शिक्षकों को छह माह का विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण कराया लेकिन मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा मान्यता नहीं लिए जाने से शिक्षकों के छह माह के प्रशिक्षण को केंद्र सरकार ने अमान्य घोषित करते हुए उसे सेवारत प्रशिक्षण करार दिया है। ऐसे में प्रदेश के कई शिक्षकों पर तलवार लटक रही है। प्राथमिक शिक्षक विशिष्ट बीटीसी को मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण की श्रेणी में लाने व उन्हें डीएलएड की अनिवार्यता से वंचित रखने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग के तहत उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ शिक्षा निदेशालय पर धरना प्रदर्शन कर रहा है। मंगलवार को जौनसार-बावर व पछवादून के शिक्षकों ने भी सामूहिक अवकाश लेकर निदेशालय में प्रदर्शन किया जिसके चलते चकराता ब्लाक के 216, कालसी ब्लाक के 194, विकासनगर ब्लाक के 105 व सहसपुर ब्लाक के 113 प्राथमिक विद्यालयों में ताले लटके रहे।

अब मदरसे भी होंगे हाईटेक, कवायद शुरू

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देहरादून। मदरसा बोर्ड ने राज्य के मदरसों को हाईटक बनाने की कवायद शुरु कर दी हैं। इस कड़ी में अब अगले शिक्षण सत्र से छात्रों को परीक्षा के लिए ऑनलाइन नामांकन करना होगा। इसके लिए उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया है।

राज्य में मदरसों की हालत सुधारने और यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को अन्य बोर्ड के समकक्ष लाने को मदरसा बोर्ड लगातार नए प्लान पर काम कर रहा है। मदरसों में हाईटेक शिक्षा देने के लिए भी मदरसा बोर्ड ने आवेदन के लिए भी ऑनलाइन सिस्टम तैयार कर लिया है। इतना ही नहीं अब नामांकन करने के लिए बच्चे मदरसा बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर घर से ही सीधे आवेदन कर सकेंगे। अगले सत्र से पूरी तरह से इसी प्रक्रिया पर काम किया जाएगा। फिलहाल इस सत्र के लिए पुरानी प्रक्रिया पर ही काम चलेगा।
इस दौरान मदरसा बोर्ड के उप रजिस्ट्रार अखलाक अहमद ने बताया मदरसा बोर्ड ने परीक्षा के लिए नामांकन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार हो चुका है। साथ ही अब छात्रों को दस के बजाए मात्र छह एग्जाम देने होंगे।

अब होंगे सिर्फ छह पेपर:
मदरसा बोर्ड ने मदरसों का एग्जाम पैटर्न भी बदला है। अब मदरसों में पढऩे वाले बच्चों को दस की जगह छह ही पेपर देने होंगे। बोर्ड को उत्तराखंड बोर्ड के समकक्ष लाने के लिए एग्जाम पैटर्न बदला है। वर्तमान में मदरसों में दो प्रकार का सलेबस पढ़ाया जाता है पहला धार्मिक और दूसरा मॉडर्न। धार्मिक सलेबस की अब सिर्फ दो परीक्षाएं होंगी। जबकि मॉडर्न सलेबस में हिंदी, गणित, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान में से छात्र को कोई भी चार विषय चुनने होंगे।

ये है मदरसों की स्थिति:
प्रदेश में फिलहाल 297 मदरसे हैं। इनमें से 42 मदरसे ऐसे हैं जो बोर्ड परीक्षा कराते हैं। साथ ही इन मदरसों में करीब तीस हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनमें से इस साल छह हजार से ज्यादा छात्रों के बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद है।