रुद्रपुर- एसएसपी डा. सदानंद दाते ने महिला बैरिक का फीता काटकर उद्घाटन किया है। एसएसपी डा. दाते ने बताया कि महिलाओं के रहने के लिए अब इधर उधर नहीं भागना पड़ेगा। इस बैरिक में 10 तख्त नुमा बेड डाल दिए गए हैं। ताकि दस महिला आरक्षी उसमें आराम से रह सकें। एसएसपी ने कहा कि महिला आरक्षियों को कोतवाली की बैरिक में रहने से आराम होगा। वे वहां पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित रहेंगी। उन्होंने सभी महिला आरक्षियों से कहा कि वे लोग अपने आसपास पूरी सफाई रखें। इस दौरान महिला आरक्षियों को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया है। सदर कोतवाल तुषार बोरा ने मुख्य अतिथि एसएसपी का कोतवाली पहुंचते ही स्वागत किया। उद्घाटन से पूर्व आज कोतवाली को पूरी तरह साफ और स्वच्छ कराया गया। हर तरफ झाडू लगाई गई तो गंदगी को बाहर फिकवाया गया। एसएसपी ने कोतवाली की साफ सफाई पर भी संतुष्टि जताई। एसएसपी ने इस मौके पर कोतवाल से क्राइम कंट्रोल पर भी चर्चा की। इस दौरान कई अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
भाजपा नेता का नाम आते ही नोटिस हुआ खारिज
रुद्रपुर- अतिक्रमण पर कार्यवाही को अंजाम देने वाला रुद्रपुर नगर निगम सभी को नोटिस जारी कर रहा है, लेकिन क्या पता था कि एक भाजपा के बडे नेता को भी नोटिस जारी हो जाएगा, नोटिस भाजपा के नेता के घर चस्पा हुा तो निगम बेक फुट पर आ गया और नोटिस को ही गलत बता दिया, यहां तक कि नोटिस जारी करने वालों के खिलाफ भी कार्यवाही की बात की जा रही है, गौरतलब है कि मेयर भाजपा की है तो भला भाजपा नेता को नोटिस कैसे जारी हो सकता है, भले ही अतिक्रमण कर भी रखा हो।
आपको बतादें कि दिग्गज और पूर्व जनप्रतिनिधि रहे भाजपा के एक नेता को अतिक्रमण का पहले तो नोटिस जारी किया, बाद में जब खबर मीडिया की सुर्खियां बनीं तो निगम ने भाजपा नेता को दिए गए नोटिस को गलत बताते हुए अपनी गलती को स्वीकारा है। मेयर ने यह भी कहा कि नोटिस भेजने वाले संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
भाजपा के दिग्गज नेता के आवास के आसपास अतिक्रमण बना हुआ है। इस अतिक्रमण के बाद आवास विकास में फैले सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया। इसमें भाजपा नेता को भी नोटिस भेज दिया और कहा गया कि उनके आवास के आसपास दो दुकानों द्वारा मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण कर रखा है, जिसे तीन दिन में हटवा दिया जाए। अन्यथा हटाने का हर्जा खर्चा भी उनसे वसूला जाएगा। इस बावत आज जब मेयर सोनी कोली से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा नेता ने कोई भी अतिक्रमण नहीं कर रखा है। अतिक्रमण तो उनकी दुकान के आसपास अन्य दुकानदारों ने कर रखा है। जिसे हटवाने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा नेता को भेजा गया नोटिस त्रुटिवश चला गया है। इसके लिए नोटिस भेजने वाले संबंधित अधिकारी से जवाब तलब भी किया गया है।
जनसंपर्क पद यात्रा को तिरंगा दिखाकर किया रवाना
ऋषिकेश। विधानसभा शीतकालीन सत्र प्रारम्भ होने से पूर्व ही सामाजिक आंदोलनकारियों ने आन्दोलन का बिगूल फूंक दिया है। तीन सूत्रीय मांगों को लेकर कुमाऊं और गढ़वाल मण्डल में आंदोलनकारियों की 21 नवम्बर से जनसंपर्क पद यात्रा जारी है। इसी क्रम में आन्दोलन को समर्थन देते हुए गढ़वाल महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ राजे नेगी और साथियों ने गुरुवार को महासभा के प्रदेश महामंत्री अरविन्द हटवाल को गैरसैंण में आगामी सात दिसम्बर से होने वाले अनशन से पूर्व गढ़वाल मण्डल जनसम्पर्क पद यात्रा के लिए तिरंगा देकर रवाना किया।
जनसंपर्क यात्रा तीन सूत्रीय मांगों को लेकर गढ़वाल मण्डल के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए गुजरेगी। देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग से होते हुए गैरसैंण पहुंचेगी। जहां तीन सूत्रीय मांगों के पूरा न होने तक आमरण अनशन चलेगा, जिनमें गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाए जाने, मद्य निषेध विभाग की पुनर्स्थापना करने और रोजगार को मौलिक अधिकार बनाए जाने की मांग सरकार से की जा रही है। इस अवसर पर सामाजिक आन्दोलनकारी विनोद जुगलान ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि एक ओर राज्य सरकार धन आभाव का रोना रोती है। वहीं दूसरी ओर दो-दो राजधानी को संचालित कर राज्य की जनता पर आर्थिक दबाव डालना चाहती है। नेतागण गांवों को गोद लेने की बात करते हैं, जबकि गांवो का विकास, गांवो की गोद में बैठकर होगा ना कि देहरादून से शासन संचालित कर गांव और राज्य का विकास होगा। उन्होंने कहा कि मलेरिया और मद्यपान निषेध जैसे विभाग खत्म किया जाना दुखद है, सरकार जन कल्याणकारी विभाग की अनदेखी कर रही है, जिससे लोगों में सरकार के प्रति रोष व्याप्त है।
छात्रों ने छात्रवृति को लेकर जिलाधिकारी से लगायी गुहार
गोपेश्वर। अनसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग के छात्रों ने जिलाधिकारी चमोली को ज्ञापन देकर छात्रवृति दिए जाने की मांग की है। तीन साल से अभी तक आरक्षित वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पा रही है। गुरुवार को जिलाधिकारी चमोली को दिए ज्ञापन में छात्रों का आरोप है कि विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्यनरत आरक्षित वर्ग के छात्रों को पिछले तीन साल से छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है।
ज्ञापन में बताया गया है कि गरीब तपके के छात्रों को अपनी पढ़ाई में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले से भी छात्र इसके आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन इस पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पा रही है, जिससे छात्रों में भारी रोष व्याप्त है। छात्रों ने कहा कि यदि शीघ्र ही उन्हें छात्रवृत्ति मुहैया नहीं की जाती है, तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। ज्ञापन में लक्ष्मण सिंह बुटोला, चंद्रशेखर बुटोला, अंकित बिष्ट, संदीप राणा, प्रवीण भंडारी, पूरन सिंह, सुमित रातव आदि के हस्ताक्षर है।
पालिका चुनाव को मजबूती से लड़ेगी आप
ऋषिकेश। आम आदमी पार्टी नगर पालिकाओं व नगर निगमों के चुनावों में अधिकांश सीटों पर चुनाव मजबूती के साथ लड़ेगी, जिसका नुकसान भाजपा कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। ये बातें नगर पालिका स्वर्ण जयंती हाल में गुरुवार को आयोजित आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान पूर्व डीआईजी व आप के प्रदेश प्रभारी राकेश कुमार सिन्हा ने कही।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आम पार्टी भाजपा व कांग्रेस के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस ने उत्तराखंड को विकास देने की जगह लूटने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नगर पालिका विकास की सबसे छोटी इकाई होती है जहां से किसी भी क्षेत्र का विकास किया जा सकता है। सिन्हा का कहना है कि उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी नगरपालिकाओं के माध्यम से पार्टी को मजबूत कर सकती है। इसी को ध्यान में रखकर आम पार्टी ने उत्तराखंड में नगर पालिकाओं व नगर निगमों ने में अपने प्रत्याशी उतारे जाने का निर्णय लिया है। उन्हेांने कहा कि नगर पालिकाओं में वह अधिकाधिक सिटों पर जीत दर्ज करेंगे। बैठक में आम पार्टी के जिला अध्यक्ष प्रदेश सचिव राजीव बहुगुणा, अमित बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
ईको टूरिज्म में स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा लाभ
देहरादून। उत्तराखंड में ईको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और इसके अनुरूप यह सेक्टर बड़ी संख्या में रोजगार के मौके पैदा कर रहा है। हालांकि चिंता की बात यह कि इसका लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा। ईको टूरिज्म के क्षेत्र में बाहर के बड़े घराने लाभ कमा रहे हैं और यहां के लोगों को वाहन चालक व कुक आदि जैसी नौकरियां ही नसीब हो रही हैं। यह बात ‘हिमालयन हेरिटेज: कम्युनिटी-लेड इकॉनोमिक रीजेनरेशन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तराखंड कैंप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर सिन्हा ने कही।
बुधवार को भारतीय वन्यजीव संस्थान में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज (इंटैक) के सहयोग से आयोजित सम्मेलन में समीर सिन्हा ने इस बात पर भी बल दिया कि हिमालय की विरासत ईको टूरिज्म का लाभ सबसे पहले यहां के लोगों की आर्थिकी बढ़ाने के रूप में दिया जाना चाहिए। इसके लिए स्थानीय समुदाय को स्वरोजगार से जोड़ा जाना चाहिए। वहीं, इंदिरा गांधी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल के निदेशक प्रो. सरित कुमार चौधरी ने बताया कि उनके संग्रहालय में समूचे हिमालयी क्षेत्रों की पारंपरिक वस्तुओं को संकलित किया गया है। इस तरह के प्रयास हर क्षेत्र में किए जाने चाहिए, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और लोगों की आर्थिकी में भी सुधार हो सके। इसी कड़ी में साहित्कार डॉ. शेखर पाठक ने ने कहा कि उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों में पूर्व में कॉपर के बर्तनों का प्रयोग किया जाता था। यदि इस तरह के पारंपरिक बर्तनों आदि को फिर से बढ़ावा दिया जाए तो स्थानीय समुदाय को इसके कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं। हालांकि इस पर प्रसिद्ध लेखक डॉ. पुष्पेश पंत ने असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यह बीती बात हो चुकी है और अब बात मौजूदा संसाधनों पर की जानी चाहिए। जम्मू कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक फैले हिमालयी क्षेत्र में ऐसे तमाम प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, जिनके बल पर वहां के जनसमुदाय की आर्थिकी सुधारी जा सकती है। सम्मेलन में प्रोडक्ट डिजाइन, ईकोस्ट्रीम सिक्किम के निदेशक सोनम ताशी ने बताया कि जो उत्पाद स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाते हैं, यदि उनकी बेहतर डिजाइनिंग और मार्केटिंग की जाए तो इसके बेहतर परिणाम सामने होंगे। राष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. लोकेश ओहरी, सुधीर सिंह आदि ने विषय पर विचार रखे।
चार शिक्षकों के भरोसे चल रहा इंटर कॉलेज कांडाखाल
देहरादून। सरकारी सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों का हाल देखना हो तो पौड़ी जिले के इंटर कॉलेज कांडाखाल (द्वारीखाल) चले जाइए। कॉलेज में शिक्षकों के 18 सृजित पदों के सापेक्ष यह विद्यालय चार नियमित और दो पीटीए शिक्षकों के भरोसे चल रहा है। छात्र-छात्राओं के भविष्य को लेकर चिंतित क्षेत्रवासी इस विद्यालय के प्रांतीयकरण की मांग लगातार उठाते आ रहे हैं।
इंटर कॉलेज कांडाखाल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक सत्यप्रसाद कंडवाल इस मामले में न सिर्फ विभागीय अधिकारी बल्कि मंत्रियों से भी कई बार मुलाकात कर चुके हैं। पर सिवाय कुछ आश्वासन कुछ नहीं मिला। उन्होंने अब कोर्ट जाने की बात कही है। कंडवाल का कहना है कि पूरा सरकारी तंत्र स्कूल प्रबंधन के सामने बौना साबित हो रहा है। विगत 18 माह से विद्यालय के प्रांतीयकरण को लेकर आंदोलन चल रह है, लेकिन सुधलेवा कोई नहीं है। प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित जनता दरबार में कंडवाल ने यह मसला काबीना मंत्री सुबोध उनियाल के समक्ष रखा। जिन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले में जनभावनाओं के अनुरूप जल्द कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने फोन पर महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी से भी बात की। इस प्रकरण में जल्द कार्रवाई के निर्देश उन्होंने दिए हैं।
विकास व पर्यावरण में संतुलन आवश्यकः राज्यपाल
देहरादून। विकास और पर्यावरण में संतुलन स्थापित करना होगा। सस्टेनेबल डेवलपमेंट की अवधारणा को अपनाना होगा। ऐसी नीति अपनानी होगी जिससे हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आधारभूत आवश्यकताएं भी पूरी हों और पर्यावरण व जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय द्वारा दून विश्वविद्यालय में ‘हिमालयी क्षेत्रों में सस्टेनेबल डवलपमेंट की चुनौतियां’ विषय पर यह बात कही। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में शोध व नवाचारों को बढ़ावा देने की भी जरूरत बताई। 29 से एक दिसंबर तक चलने वाली अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में देश दुनिया के विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
दून विश्वविद्यालय में हिमालयी पर्यावरण और विकास को लेकर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। जिसमें हिमालय के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे दुनियाभर के विद्वानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिमालय केवल एक भू-स्थलाकृति ही नहीं है बल्कि यह मानव सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। यहां हमारी सनातन धर्म व संस्कृति की धारा सदियों से प्रवाहित होती रही है। हिमालय का अध्ययन केवल एक भौगोलिक इकाई के वैज्ञानिक विश्लेषण तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता है। हिमालय समृद्ध भारतीय संस्कृति की आत्मा है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड एक प्रमुख हिमालयी राज्य है। ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव उत्तराखंड में भी देखने को मिल रहा है। हर साल बादल फटने, भूस्खलन जैसी दैवीय आपदाएं की घटनाएं हो रही हैं। अगर हमें हिमालय, यहां के वनों, नदियों, जीव जंतुओं, जैव विविधता की रक्षा करनी है तो स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पलायन बड़ी समस्या है। राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए पौड़ी में पलायन आयोग स्थापित किया है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में ज्ञान का सृजन होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस तीन दिवसीय सेमीनार में वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के गम्भीर मंथन से कुछ ठोस निष्कर्ष अवश्य निकलेंगे जो कि नीति निर्धारण में सहायक होंगे।
केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि ऐसी तकनीक के विकास पर ध्यान देना चाहिए जिससे दैवीय आपदाओं का कुछ समय पहले पूर्वानुमान लगाया जा सके। विकास व पर्यावरण एक दूसरे के पूरक हैं। केंद्र सरकार हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण व स्थानीय लोगों की विकास की आवश्यकता को पूरा करने के लिए गम्भीर है। केंद्र सरकार ने उच्च हिमालयी अध्ययन केंद्र खोलने की आवश्यकता महसूस करते हुए जीबीपंत हिमालयी पर्यावरण व विकास संस्थान को जीबीपंत हिमालयी पर्यावरण व स्थायी विकास के राष्ट्रीय संस्थान के रूप में अपग्रेड किया है।
सेमीनार के उद्घाटन के अवसर पर विधायक दिलीप सिंह रावत, अपर मुख्य सचिव डाॅ. रणवीर सिंह, सचिव रविनाथ रमन, विज्ञान व तकनीक विभाग, भारत सरकार से आए वैज्ञानिक डाॅ. अखिलेश गुप्ता, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. यूएस रावत, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुसुम अरूणाचलम सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
जल, ऊर्जा व वन विभाग राज्य हित में मिलकर करेंगे कामः सीएम
देहरादून। राज्य की 33 जल विद्युत परियोजनाओं के संचालन के लिए जन संसधान, ऊर्जा और वन विभाग मिलकर काम करेंगे। दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री स्वतंत्र प्रभार आरके सिंह साथ मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह ने इन परियाजनाओं को लेकर चर्ता की।
बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह से भेंट की। मुख्यमंत्री ने बताया कि केन्द्रीय मंत्री से वार्ता के दौरान उत्तराखण्ड की 33 जल विद्युत परियोजनाओं पर व्यापक चर्चा की गई। इस सम्बंध में ऊर्जा, जल संसाधन एवं वन मंत्रालय तीनों विभागों के मिलकर राज्य हित में सकारात्मक परिणाम देने का केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री ने आश्वासन दिया। देहरादून एवं हरिद्वार में अंडर ग्राउण्ड केबल के लिए सीएसआर में फंडिंग देने के लिए भी मुलाकात के दौरान सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखवाड़-ब्यासी परियोजना, किसाऊ बांध परियोजना, टिहरी हाइड्रो पावर कार्पोरेशन (टीएचडीसी) के लिए भी केन्द्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिल रहा है। वार्ता के दौरान उत्तराखण्ड में हास्पिटिलिटी यूनिवर्सिटी के लिए भी सहमति बनी तथा इसके लिए उन्होंने हर संभव सहयोग का भी आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री को अवगत कराया कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जनपद उत्तरकाशी में भागीरथी नदी के 100 किमी विस्तारित क्षेत्र गौमुख से उत्तरकाशी तक 4179.59 वर्ग किमी को ईको सेंसेटिव जोन के अन्तर्गत अधिसूचित किया गया है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि इस क्षेत्र में कुल 82.5 मेगावाट की पूर्व में आवटिंत 25 मेगावाट क्षमता तक की 10 लघु विद्युत परियोजनाओं कार्य शुरू किए जाने की अनुमति प्रदान की जाय जैसा कि पश्चिमी घाट महाराष्ट्र व हिमाचल प्रदेश को दी गई है।
मुख्यमंत्री ने लखवाड़ बहुउदेश्यीय तथा किशाऊ बहुउदेशीय परियोजनाओं पर भी शीघ्र सहमति प्रदान किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अलकनंदा तथा भागीरथी नदियों पर 70 में से 33 जल विद्युत परियोजनाएं जिनकी कुल क्षमता 4060 मेगावाट व लागत 41,000 करोड़ रूपये है, एनजीआरबीए, ईको संसेटिव जोन और उच्चतम न्यायालय के निर्देशो क्रम में बन्द पड़ी है। मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि यदि एक संयुक्त शपथ पत्र ऊर्जा मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय तथा पर्यावरण व जल मंत्रालय द्वारा मा.उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए तो उक्त परियोजनाओं के लिए शीघ्र अनुमोदन मिल सकता है। इसी प्रकार चमोली की 300 मेगावाट की बावला नन्दप्रयाग जल विद्युत परियोजना के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री को बताया कि इस परियोजना से सम्बन्धित डीपीआर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के समक्ष अनुमोदन के लिए लम्बित है क्योंकि जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इन्वार्यमेन्टल फ्लों का अभी अध्ययन नहीं किया गया है। साथ ही बावला नन्द प्रयाग जल विद्युत परियोजना जबकि तथा नन्द प्रयाग लंगासू विद्युत परियोजना हेतु पर्यावरण व वन मंत्रालय द्वारा पर्यावरणीय अध्ययन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेन्स का अनुमोदन किया जाना बाकी है। मुख्यमंत्री ने टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड में उत्तराखण्ड के 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के प्रकरण को आपसी सहमति से सुलझाने का सुझाव भी केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री को दिया। जिस पर उन्होंने सहमति व्यक्त की है।
मुख्यमंत्री ने यह भी अनुरोध किया कि देहरादून, हरिद्वार तथा नैनीताल अंडरग्राउन्ड केबलिंग के लिए 1883.16 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रस्ताव ऊर्जा मंत्रालय के समक्ष रखा गया है। इसमें हरिद्वार कुम्भ क्षेत्र हेतु अन्डरग्राउण्ड केबलिंग का कार्य भी सम्मिलित है। एकीकृत ऊर्जा विकास योजना (आईपीडीएस) के अन्तर्गत 190.68 करोड़ रूपये की डीपीआर भी देहरादून तथा हरिद्वार के सरकारी कार्यालयों में सोलर रूफ टॉप सिस्टम लगाने के लिए ऊर्जा मंत्रालय के समक्ष रखी गई है। मुख्यमंत्री और केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री के मध्य लघु जलविद्युत, ट्रांसमिशन वडिस्ट्रीब्यूसन के लिए ईएपी और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कारपोरेट सोशल रिसपोंसिबिलीटी के अंतर्गत राज्य में प्रस्तावित हास्पिीटीलिटी यूनीवर्सीटी के लिए फंडिंग के मुद्दों पर भी चर्चा की गई। इसके लिए उन्होंने सहयोग का आश्वासन दिया है। इस अवसर पर सचिव, ऊर्जा श्रीमती राधिका झा उपस्थित थी।
केंद्रीय मंत्री ने की समीक्षा
केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री आरके सिंह के साथ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड की ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा की गई पहलों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता बढाने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारियों के प्रदर्शन की, उनकी चरित्र पंजिका में प्रविष्टि की जा रही है। एलईडी बल्बों का सभी सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों में उपयोग किया जा रहा है, जबकि एलईडी बल्बों का वितरण स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। विद्युत आपूर्ति, उपयोग एवं गुणवत्ता बढाने आदि के संबंध में की गई इन तीन पहलों को केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह ने सराहा है तथा इसे बेस्ट प्रेक्टिसेज के रूप में माना। उन्होंने राज्य के इन प्रयासों को अन्य राज्यों को भी अपनाने को कहा। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखा जाएगा।
नए पाठ्यक्रमों के लिए साल में एक ही बार हों आवेदनः सीएस
देहरादून। नर्सिंग संस्थानों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए वर्ष में एक बार ही आवेदन कराए जाएंगे। मुख्य सचिव ने निजी संस्थानों की इम्पावर्ड कमेटी की बैठक में उक्त निर्देश दिए।
बुधवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में सचिवालय में निजी नर्सिंग संस्थानों को अनापत्ति दिए जाने से संबंधित इम्पावर्ड कमेटी की बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नर्सिंग के नए पाठ्यक्रमों के संबंध में निजी संस्थानों की सुविधा को देखते हुए व्यवहारिकता को देखते भविष्य में वर्ष में एक बार ही आवेदन जमा कराए जाएं। कार्य के सरलीकरण व व्यवहारिकता को देखते हुए निरीक्षण दल प्रवेश प्रक्रिया से पूर्व पुनः भौतिक निरीक्षण करने पर भी विचार करें। बैठक में बताया कि वर्ष 2018-19 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी नर्सिंग संस्थान खोलने औऱ सीट वृद्धि के लिए वर्ष में दो चरणों जनवरी और जून में आवेदन किए जाते हैं, अब वर्ष में एक बार ही आवेदन करने पर निर्णय लिया गया। पाठ्यक्रम में एकरूपता लाने व संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए देहरादून में संचालित स्टेट कालेज नर्सिंग तथा स्टेट स्कूल ऑफ नर्सिंग को एक ही संस्थान के रूप में सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया। राज्य के विभिन्न जिलो में 05 ए.एन.एम सेन्टर जो वर्तमान में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अधीन संचालित है, उन्हे अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियंत्रण में चलाया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के 25 निजी नर्सिंग संस्थान चल रहे है, जो 04 मैदानी जिलों तक ही सीमित हैं। पर्वतीय जनपदों में भी नर्सिंग संस्थान खोलने के नये प्रस्ताव तैयार कर इन्वेस्टर्स को आमंत्रित किया जाय। वर्तमान में जनपद बागेश्वर तथा उत्तरकाशी में कोई नर्सिंग कालेज नही है। उन्होंने कहा कि इन जनपदों में कालेज खोलने हेतु निजी संस्थानों को आमंत्रित करने के साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार हेतु कैम्पस चयन की प्रक्रिया अपनायी जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि निरीक्षण दल को पुनर्गठित करते हुए उनसे अपेक्षा की जाए कि उनके द्वारा जो भी संस्तुति दी जाए वह स्पष्ट व निश्चित हो। बैठक में अन्य राज्यों की भांति स्टेट मेडिकल फैकल्टी, स्टेट नर्सिंग काउंसिल, पैरामेडिकल काउंसिल एवं डेन्टल काउंसिल तथा मेडिकल काउंसिल को चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग से स्थानान्तरित कर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन किये जाने पर निर्णय लिया गया। नर्सिंग छात्रों के लिए कौशल विकास विकसित करने के उद्देश्य से तीनों राजकीय मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिये जाने पर सहमति दी गई। बैठक में सचिव एनके झा, अपर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्री चन्द्रेश कुमार, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. अर्चना, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना, सीएमएस देहरादून डॉ. केके टम्टा समेत चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।





























































