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छपरा के प्रभाकर को अमेरिका में मिला फर्स्ट इंडियन एक्टर का अवार्ड

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छपरा,  सारण जिले के अमनौर निवासी हॉलीवुड एक्टर प्रभाकर शरण को प्रथम भारतीय एक्टर का आवार्ड दिया गया है। प्रभाकर ऐसे पहले भारतीय एक्टर हैं जिन्होने लैटिन अमेरिका में ‘इनरेदादोस: ला कन्फ्यूजन’ फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में काम किया है। उन्हें यह एवार्ड मिसेज इंडिया 2017 प्रतियोगिता के दौरान दिया गया जहां वे जज के रूप में शामिल हुए थे।

प्रभाकर ने कहा ‘छपरा से कोस्टारिका का सफर मेरे लिए काफी मुश्किल रहा। मुझे याद है कि 10वीं तक की पढ़ाई छपरा से करने के बाद पटना में अपने माता-पिता के साथ आ गया | वहां से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सोनीपत में एडमिशन कराया। सोनीपत में मैंने रेसलिंग सीखी और वहां अखाड़ों में जाता था, कुश्ती लड़ता था। फिर मैं अपने दोस्त राकेश से मिला जिसने मुझे विदेश में पढ़ाई का सुझाव दिया। कोस्टारिका में जाकर मुझे काफी दिक्कत हुई। खाने से लेकर काम करने तक, हर चीज में दिक्कतें आईं। कई बार वापस लौटने का भी सोचा, लेकिन घरवालों के सपनों को तोड़ना नहीं चाहता था। मैंने कमाई के लिए भारत की मिट्ठी का सहारा लिया और वहां से 100 रुपये में मिट्टी मंगाकर यहां 1000 रुपये में बेचने लगा। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और अपने कई स्टोर खोले। बिजनेस तो जम गया, लेकिन मेरा सपना था बॉलीवुड में चमकने का, तो धीरे-धीरे बॉलीवुड की फिल्में खरीदनी शुरू की। मैंने पहली बॉलीवुड की फिल्म यहां रिलीज कराई, हालांकि इससे कोई फायदा नहीं होता था बल्कि नुकसान ज्यादा होता था।’

प्रभाकर ने बताया कि मेरे पिता प्रभुनाथ शरण और मां शुभद्रा प्रसाद रिटायर्ड बैंकर हैं। फिलहाल, वे मोतिहारी में रहते हैं। प्रभाकर ने बताया कि कोस्टारिका में सफलता नहीं मिलने के बाद आर्थिक समस्या होने लगी जिसके बाद वे भारत लौटने पर मजबूर हो गए। 2010 से चार साल तक पंचकूला में रहे। इस दौरान उनकी पत्नी उनसे अलग हो गईं और अपनी बेटी को लेकर वापस कोस्टारिका चली गईं। प्रभाकर ने बहुत तनाव का सामना किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वे दोबारा कोस्टारिका लौट गए।
प्रभाकर ने बताया कि लैटिन अमेरिका में हॉलीवुड फिल्म ‘इनरेदादोस : ला कन्फ्यूजन’ उनकी पहली फिल्म है। यह फिल्म इसी साल नौ फरवरी को रिलीज हुई थी जिसमें वे लीड रोल में रहे। ये फिल्म अमेरिका समेत 14 देशों में रिलीज हुई थी। फिल्म के डायरेक्टर आशीष मोहन हैं जिन्होंने 2012 में आई अक्षय कुमार की फिल्म ‘खिलाड़ी 786’ का डायरेक्शन किया था। फिल्म का निर्माण कोस्टारिका की टेरेसा रॉड्रिग्स ने किया था।

प्रभाकर ने बताया कि ‘इनरेदादोस: ला कन्फ्यूजन’ की सफलता के बाद उन्होंने फिल्म को ‘एक चोर दो मस्तीखोर’ नाम से हिंदी और भोजपुरी में डब कराया है जो बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत पूरे देश में प्रदर्शित होने वाली है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म आम बॉलीवुड मसाला फिल्मों से काफी अलग है। यह बॉलीवुड अंदाज में बनाई जा रही अपनी किस्‍म की कोस्‍टारिका की पहली फिल्‍म है। फिल्म के निर्माण में पनामा, कोलंबिया और अर्जेटीना के लोगों का भी योगदान है। अब उनकी योजना मेक्सिकन अभिनेत्री बारबरा मोरी के साथ भी फिल्म करने की है।

कड़ाके की ठंड से बाजार गर्म

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(ऋषिकेश) तीर्थ नगरी मे पड़ रही कड़ाके की सर्दी के बीच मफलर और कैप की मांग बढ़ गई है। दुकानदारों ने भी ग्राहकों की मांग को ध्यान में रखते हुए स्टाइलिश कैप और मफलर से दुकानों को सजाना शुरू कर दिया है। डिमांड में एवरग्रीन मंकी कैप का क्रेज लोगों में दिख रहा है।
सर्दी हो या गर्मी युवाओं में हमेशा सबसे अलग दिखने की ललक रहती है। सर्दी के मौसम की पहली बारिश के बाद ठंड में इजाफा हुआ तो इससे बचने के लिए स्टाइलिश कैप और मफलर की बिक्री बढ़ गई है। बाजार में उपलब्ध कैपों में बिन्नी कैपनाइन, वन कैप, वूलन मफलर जैसे कपड़ों के नए ट्रेंड्स नजर आ रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी बाजारों में सर्दी के कपड़ों में फैशन के नए ट्रेंड्स आ हुए हैं। हर कोई अपने लुक को बेहतर बनाने के लिए अलग कॉम्बिनेशन बना रहा है। महिलाओं और युवतियों द्वारा वूलन स्टॉल, वूलन स्कॉफ, बैगी कैप, फ्लावर कैप को भी पसंद किया जा रहा है। दुकानदार भी ग्राहकों की भीड़ को देखकर काफी खुश नजर आ रहे हैं। दिसम्बर माह की शुरुआत में दुकानदार सर्दी न बढ़ने से परेशान थे, लेकिन अब सर्दी बढ़ने के साथ ही मांग बढ़ने से उनके चेहरे खिल गए हैं। दुकानदारों के अनुसार मफलर, कैप और स्कार्फ की मांग ज्यादा है।

आबकारी विभाग सुस्त,ठेकों पर धड़ल्ले से हो रही ओवर रेटिंग

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ऋषिकेश। खनन और शराब माफियाओं पर नकेल कसने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही उत्तराखंड सरकार को अब शराब के ठेका संचालकों ने भी ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया है।

उत्तराखंड सरकार के तमाम दावों के बाद भी शराब के ठेको पर शराब निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। यह खेल सरकार की आंखों के नीचे राजधानी देहरादून के ठेकों में ही खुलकर नही चल रहा। बल्कि उत्तराखंड के तमाम जनपदों के शराब के ठेकों में पियक्कड़ों से निर्धारित मूल्य से अधिक शराब की बोतल पर वसूल कर बहती गंगा मे हाथ धोने की कहावत को चरितार्थ किया जा रहा है। इस मामले विभिन्न स्थानों पर निर्धारित दाम से ज्यादा में शराब बेचने की शिकायत पर छापेमारी की कारवाई के अनेकों मामले लगातार प्रकाश मे आने के बावजूद इस पर नकैल न कसा जाना सूबे के आबकारी विभाग की कार्य प्रणाली पर भी गहरा प्रश्न चिन्ह लगाये हुए है। कुछ अर्से पूर्व रायवाला के ठेके पर भी लगातार शराब की ओवर रेटिंग की जानकारी संज्ञान मे आती रही हैं जिसके बाद कई बार बवाल भी हुआ था। हालांकि, यह दीगर बात है कि अभी हाल ही में ऋषिकेश के उप जिलाधिकारी द्वारा इस दिशा में किए गए औचक निरीक्षण में उन्हें ओवर रेटिंग का कोई साक्ष्य नहीं मिला, लेकिन इन सबके बावजूद ठेके की कार्य प्रणाली पर उप जिलाधिकारी संतुष्ट नही बताए गए हैं। दिलचस्प यह भी है कि शराब के ठेकों पर अधिक रेट वसूले जाने की शिकायतों के बाद विभिन्न जनपदों मे पूर्व मे चले अभियान के दौरान ठेके पर नियमानुसार लगाने वाली रेट लिस्ट भी नहीं पाई गई थी। ऐसे में आबकारी विभाग की कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवालिया निशानों पर त्रिवेन्द्र सरकार की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है।

पर्यटन मंत्री ने पीएम मोदी को भेंट किया पांच जन्य दक्षणा व्रती शंख

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देहरादून। प्रदेश के सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, लघु-सिंचाई, वर्षा जल संग्रहण, जलागम प्रबन्धन, भारत-नेपाल उत्तराखंड नदी परियोजनाएं, पर्यटन, तीर्थाटन, धार्मिक मेले एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने प्रधानमंत्री भारत सरकार नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर व केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू से भेंट की।
संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट के दौरान पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने गुजरात एवं हिमाचल राज्य में उन्हें विजय की बधाई दी और पांच जन्य दक्षणा व्रती शंख भेंट किया। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से मुलाकात के दौरान मंत्री सतपाल ने उनका ध्यान आकृष्ट किया कि प्रदेश की 93 बसावटों को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से कोर नेटवर्क में संयोजित करना दर्शाया है, जबकि यह 93 बसावटें पीएमजीएसवाई की सड़कों से आच्छादित नहीं हैं तथा धरातल में संयोजित नहीं हैं। उन्होंने कोर नेटवर्क में इस त्रुटि को ठीक करने की ओर केन्द्रीय मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया, ताकि उपरोक्त बसावटों में पीएमजीएसवाई की सड़कों का निर्माण किया जा सके। मामले में केंद्र सरकार की ओर से सकरात्मक कार्रवाई करते हुए समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया।

मौसम में बदलाव के साथ बढ़ी बिजली कटौती

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विकासनगर। सर्दियों के बढ़ने के साथ ही जनजातीय क्षेत्र में बिजली कटौती का दौर भी शुरू हो गया है। आए दिन हो रही बिजली कटौती से लोग परेशान हैं।

मंगलवार को दोपहर तीन बजे क्षेत्र की बिजली गुल हो गई। शाम सात बजे तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी। जिसके चलते शाम ढलते ही चकराता छावनी बाजार, त्यूनी और साहिया बाजार के साथ ही आसपास के सैकड़ों गांवों में अंधेरा पसर गया। लोगों में विभाग के प्रति खास आक्रोश दिखा। लोगों का आरोप है कि सर्दियों के शुरू होने के साथ क्षेत्र में बिजली की आंख मिचौली का खेल शुरू हो जाता है। स्थानीय निवासी शमशेर चौहान, अंकित मोहल, राजेश चौहान, सुरेंद्र तोमर आदि का कहना है कि करीब एक माह से क्षेत्र में बिजली कटौती का दौर जारी है। अक्सर सुबह और शाम के समय बिजली कटौती की जाती है। जिससे रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित होते हैं। लोगों का कहना है कि लाइन सालों पुरानी है। लोड बढ़ने पर अक्सर लाइन ट्रिप कर जाती है। यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता ने बताया कि 33केवी की लाइन में फाल्ट आया गया है। फाल्ट को ढूंढने के लिए पेट्रोलिंग की जा रही है।

एरा इंफ्रा को केंद्र से मिले 280 करोड़ रुपये, राज्य में रुके प्रॉजेक्टस के लिये जगी उम्मीद

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(देहरादून) एरा इंफ्रा को केंद्र से मिले 280 करोड़ रुपये के ‘अभयदान’ के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कंपनी के साथ नया एमओयू साइन करेगी। इस एमओयू के बाद ही कंपनी को यह ग्रांट जारी की जा सकेगी। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक यह कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी और नए साल से चौड़ीकरण का कार्य गति पकड़ने लगेगा।
हरिद्वार से देहरादून के बीच करीब 39 किलोमीटर दूरी को फोरलेन करने का काम इरा इंफ्रा कंपनी ने नवंबर 2011 में शुरू किया था। यह कार्य कंपनी को बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर/बनाना, चलाना और हस्तांतरण) मोड में आवंटित किया गया था। यानी कि कंपनी को अपने खर्चे पर चौड़ीकरण कार्य करना था और 20 साल की अवधि तक इसका संचालन, रखरखाव भी करना था। इसकी एवज में राजमार्ग पर टोल टैक्स के जरिये होने वाली आमदनी कंपनी को मिलनी थी। चौड़ीकरण का काम अक्टूबर 2013 तक पूरा किया जाना था, जबकि इसके बाद सितम्बर 2016 व दिसम्बर 2017 की संशोधित डेडलाइन मिलने के बाद भी कार्य की प्रगति 53 फीसद से आगे नहीं बढ़ पाई। जबकि परियोजना की लागत 1020 करोड़ की जगह अब 1400 करोड़ को पार कर गई है। इसके लिए कंपनी ने विभिन्न बैंकों से 736 करोड़ रुपये का ऋण लिया था और यह राशि भी ब्याज समेत 800 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। इसी वित्तीय संकट के कारण इरा इंफ्रा ने चौड़ीकरण कार्य से हाथ खड़े करते हुए सरकार से 280 करोड़ रुपये की मदद मांगी थी। जबकि केंद्र सरकार निर्माण कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी कर चुकी थी। हालांकि कंपनी को ऋण देने वाले बैंकों ने सरकार से ऐसा न करने का आग्रह किया था, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे कर्ज डूब जाएगा। हाल ही में केंद्र ने भी तमाम स्तर पर मंथन करने के बाद कंपनी के लिए 280 करोड़ रुपये की ग्रांट स्वीकार कर दी। एनएचएआइ के परियोजना निदेशक पीएस गुसाईं के अनुसार इस राशि को कंपनी को देने के लिए दिसम्बर माह के अंत तक एमओयू साइन कर लिया जाएगा। एमओयू कंपनी को ऋण देने के वाले बैंक ऑफ इंडिया व अन्य बैंकों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में साइन किया जाएगा। इसी के अनुरूप कंपनी को अधूरा काम पूरा करने के लिए एक वर्ष की अवधि की नई डेडलाइन जारी की जाएगी।
चौड़ीकरण कार्य पर एक नजर
कार्य : हरिद्वार-दून राजमार्ग का चौड़ीकरण
लंबाई: 39.025 किमी
चौड़ीकरण के बाद लंबाई: 36.52 किमी
कार्य शुरू: नवम्बर 2011
कार्य समाप्ति की अवधि: अक्टूबर 2013
समय विस्तार: सितम्बर 2016
नई डेडलाइन: दिसम्बर 2017
कार्य प्रगति: 53 फीसद 

गजब : बिजली कनेक्शन व मीटर लगे बिना बन रहे बिल

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देहरादून, ऊर्जा निगम के कारनामे एक से बढ़कर एक है। कनेक्शन दिया नहीं, मीटर लगा नहीं और बिल जेनरेट हो गया। यह देख उपभोक्ता हैरान हुआ, क्योंकि साल भर पहले आवेदन करने के बाद भी कनेक्शन नहीं लगा तो बिल कैसे आया। जेई, एसडीओ तक खूब चक्कर काटे। फिर, विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में शिकायत दर्ज कराई तो सुनवाई में पता चला कि विभाग स्तर से मीटर जारी तो हुआ, पर लगाया नहीं गया। मंच के निर्देश पर मीटर लगा और विभाग को आदेश दिए कि मीटर लगने से पूर्व का बिल निरस्त किए गए।
विनोद विहार कॉलोनी ऋषिकेश निवासी सिद्धार्थ मैठाणी ने जून, 2016 में घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन किया था और इस्टीमेट के अनुसार 1400 रुपये की धनराशि भी जमा करा दी थी। एक साल तक वह चक्कर काटते रहे, पर विभाग ने कनेक्शन नहीं दिया। अगस्त, 2017 में उनके घर मीटर रीडर आया, लेकिन मीटर तो लगा ही नहीं था। इसके बाद सिद्धार्थ ने कॉल सेंटर फोन किया तो पता चला कि करीब दो महीने पहले कनेक्शन लग चुका है और 630 रुपये का बिल भी बना हुआ है। मंच में सुनवाई के दौरान उप खंड अधिकारी अमित कुमार भट्ट ने पक्ष रखते हुए कहा कि मीटर लाइनमैन महेंद्र सिंह बिष्ट को दिया था। लाइनमैन ने न तो मीटर लगाया और न ही इस संबंध में जानकारी दी। उससे स्पष्टीकरण तलब किया है।

विभागीय स्तर पर किया गया खेल
मंच ने ऊर्जा निगम से कनेक्शन से पूर्व बिल जारी करने के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी और जेई ने 09 सितम्बर 2017 को मीटर स्थापित करने की बात कही। मंच ने इससे जुड़े कागजात मांगे तो उसमें मीटर लगाने की तिथि 20 सितम्बर थी। सीलिंग में टिप्पणी अंकित थी कि पुराना मीटर खराब होने के कारण नया मीटर लगाया गया, जबकि सीलिंग पर विभागीय कर्मचारी के साथ उपभोक्ता या उसके किसी प्रतिनिधि के हस्ताक्षर तक नहीं थे। मीटर के विवरण वाला कॉलम भी खाली था। वहीं, उपभोक्ता को जारी बिल पर भी मीटर संख्या का उल्लेख नहीं था। मंच ने आदेश में कहा है कि मीटर स्थापित करने की तिथि से ही उपभोक्ता को बिल दिया जाए।

नहीं सुधर रही विभागीय व्यवस्थाएं
कनेक्शन जारी करने में देरी पर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग पिछले आठ सालों में ऊर्जा निगम पर 14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा चुका है। निगम की हठधर्मिता ऐसी है कि व्यवस्थाओं में सुधार करने के बजाय कई बार जुर्माना माफी की याचिका आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर चुका है। इतना ही नहीं, इस वित्तीय वर्ष में एक माह की भी लंबित कनेक्शन रिपोर्ट आयोग को नहीं दी गई, जबकि हर महीने रिपोर्ट देने का प्रावधान है। हाल ही में आयोग ने ऊर्जा निगम को नोटिस जारी किया है।

राहुल के हाथों पर बागडोर देते ही भाजपा की फतहःभट्ट

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रानीखेत, मिशन गुजरात और हिमांचल जीत के बाद कोन्फीडेंस से भरी भाजपा अब कांग्रेस पर तंज कसने में कोई कसर नहीं छोड रही है, प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कसीदे पढ़ते हुए कांग्रेस पर जमकर तंज कसे, उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के हाथ में बागडोर आने पर कांग्रेस गुजरात और हिमाचल से भी हाथ धो बैठी है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड में सिडकुल घोटाले को कांग्रेसराज की देन करार देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार पर त्रिवेंद्र सरकार किसी को बख्शने वाली नहीं है।उन्होने तल्ख तेवरों में  कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा कि एनएच-74 हो या मौजूदा सिडकुल घोटाला, सब पूर्व की कांग्रेस सरकार की देन है, नोटबंदी, जीएसटी आदि पर विपक्ष द्वारा फैलाये जा रहे भ्रम भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की देश-विदेश में बढ़ती लोकप्रियता और जनविश्वास से कांग्रेस बौखला गयी है।

साइकिल पर डीएम जाऐंगे ऑफिस, शनिवार होगा ”नो कार डे”

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चंपावत, शहर में बढ़ रही गाड़ियों और उनसे निकलने वाले धूएं से हर रोज प्रदूषण बढ़ता जा रहा है जिससे लोगों में अलग-अलग बिमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए चंपावत जिले के डीएम ने एक अलग और अनोखी पहल की है। डीएम अहमद इकबाल ने कहा है कि, “मुख्यालय पर काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी साइकिल से दफ्तर आये। केवल जरूरी दौरे या फिर बीमार होने की स्थिति में ही वाहन का प्रयोग करे।” शनिवार को जारी हुए इस अनोखे आदेश पर मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही हैं।

कलक्ट्रेट सभागार में हुई सड़क सुरक्षा कमेटी की बैठक में इस समस्या पर लंबी चर्चा चली। जिसमें अधिकारियों व आमजन ने कई सुझाव रखे। इन्हीं सुझावों को देखते हुए डीएम ने पर्यावरण संरक्षण, सेहत व यातायात समस्या का हवाला देते हुए डीएम ने ये एडवाईजरी जारी की है। इसके तहत शनिवार को ‘नो-कार डे’ मनाया जायेगा। डीएम डॉ. इकबाल ने न्यूजपोस्ट से बातचीत में बताया कि, “यह केवल एक एडवाइजरी है और यह स्थानीय लोगों के लिए करना आसान भी है, ऐसा करने से ट्रैफिक की समस्या के साथ-साथ सेहत भी ठीक रहेगी।” उन्होंने कहा कि “समीक्षा बैठक में हमने यह एडवाइजरी क्षेत्रीय लोगों के लिए निकाली और साथ ही अपने दफ्तर में भी इसे करने का सोचा। इसमें कार पूलिंग के अलावा एक दिन ‘नो-कार-डे’ भी शामिल है। आने वाला शनिवार इस योजना का पहला शनिवार है और हम आशा करते हैं कि यह दिन हमारी अपेक्षाओं पर खरा उतरे। हमने सभी अॉफिस वालों को अपनी साइकिल खरीदने की बात कही है और कुछ लोगों ने मुझे बताया कि आज से 15 साल पहले हर कोई साइकिल से ही चलता था और अगर एक बार और ऐसा वापस हो जाए तो इससे अच्छी बात क्या होगी।”

बीते दिनों वन अभियान में चारधाम में आॅल वेदर सड़क के नाम पर जिस तरह से विकास के नाम पर दानवीय प्रवृति दिख रही है, वह खतरनाक संकेत है। 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और 24 मीटर का अधिग्रहण हो रहा है। पर्वतीय क्षेत्र में पेड़ों का कटान जहां तेजी से हो रहा है तो प्रदूषण की मात्रा भी तेजी से बढ़ी है। यही नहीं यातायात की समस्या भी इस कदर बढ़ गई है कि तमाम प्लानिंग के बाद भी इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

चिन्यालीसौड़ में हुर्इ वायु सेना के मालवाहक की सफल लैंडिंग

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उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर मंगलवार को वायु सेना के मालवाहक विमान एएन-32 ने सुरक्षित लैंडिंग की। हवाई पट्टी का जायजा लेने के लिए वायु सेना के इस विमान ने तीन लैंडिंग और टेक आफ का परीक्षण किया। इसके साथ ही वायु सेना की टीम ने हवाई पट्टी बनाने वाली यूपी निर्माण निगम के अधिकारियों से हवाई पट्टी के बारे में जानकारी ली। वायुसेना के इलाहाबाद के एयरबेस के एयर कामाडोर एस बनर्जी ने बताया कि वे जल्द ही वायु सेना के दूसरे विमान की भी यहां लैंडिंग कराएंगे। उन्होंने हवाई पट्टी को भविष्य में किसी भी आपात आपरेशन के लिए मुफीद बताया।

वायुसेना के इलाहाबाद के एयरबेस के एयर कामाडोर एस बनर्जी की अगुवाई मे वायुसेना के 6 सदस्यीय पायलेट दल ने दोपहर 1.15 बजे चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर वायु सेना के मालवाहक विमान एएन-32 को उतारा। रनवे का परीक्षण करने के लिए पायलेट दल ने तीन बार आसमान में चक्कर लगा कर तीन बार लैंडिंग की। तीनों बार पायलेट दल ने रनवे को सुरक्षित लैंडिंग के लिए मुफीद पाया। साथ ही हवाई पट्टी के आसपास हवाई सर्वेक्षण किया। हालांकि रनवे के एन्डिग प्वाइंट पर जहाज को घुमाने में हलकी कठिनाई हुई। जिसको एयर कामाडोर ने एन्डिग र्सिकल पांच मीटर बढाने और रनवे के दोनों और पीसीसी व हवाई अड्डे के लिए सेपरेशन दीवार बनाने को कहा।

गौरतलब है कि सामरिक नज़रिये से भारत और चीन की सीमा नाजुक मानी जाती है। पिछले कुछ समय से बॉर्डर को जाने वाली सड़कों और अन्य व्यवसाथओं को सुदृण करने के लिये सरकार ने काफी कदम उठाये हैं।