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मोटर मार्ग के घटिया निर्माण का लगाया आरोप

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गोपेश्वर, चमोली जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र स्यूण-बेमरू के लिए बनाए जा रहे मोटर मार्ग पर निर्माणदायी संस्था के घटिया निर्माण किये जाने का आरोप लगाया गया है। कहा जा रहा है कि सड़क के बीचों-बीच कई स्थानों पर गढ्ढे बने हुए हैं, जिससे वाहनों के आने-जाने में भी परेशानी हो रही है।

क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह राणा का कहना है कि, “स्यूण-बेमरू के लिए ग्रामीणों के काफी संघर्ष के बाद मोटर मार्ग का निमार्ण कार्य तो शुरू हुआ लेकिन निर्मात्री संस्था ने मोटर मार्ग पर इतना घटिया कार्य किया है कि मोटर मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क धंस गई, जिससे सड़क पर गड्ढे बन गए। इन गड्ढों के कारण वाहनों के आने-जाने में भी दिक्कतें हो रही हैं। कभी भी कोई बड़ी घटना होने की आशंका बनी हुई है। “

इस संबंध में कई बार शासन-प्रशासन को लिखा जा चुका है लेकिन इस पर कार्यवाही अमल में नहीं लायी गई है, अगर शीघ्र ही प्रशासन ने सड़क निर्मात्री कंपनी स्टार कंट्रक्शन के खिलाफ उचित कार्यवाही करते हुए निर्माण कार्य में सुधार नहीं किया तो ग्रामीणों आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

फिस रेस की तैयारियों को लेकर डीएम ने बुलाई बैठक

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गोपेश्वर, औली में आयोजित होने वाली फिस रेस की तैयारियों को अंतिम रूप देने तथा व्यवस्थाओं की प्रगति को लेकर जिलाधिकारी आशीष जोशी ने औली में अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने सभी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिये।

जिलाधिकारी ने फिस रेस के आयोजन के लिए नियुक्त सभी नोडल अधिकारियों को सौंपे गये कार्यो की प्रगति समीक्षा करते हुए व्यवस्थाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि फिस रेस के आयोजन में किसी प्रकार की हीलाहवाली एवं कोताही बर्दास्त नहीं की जायेगी। जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों को आठ जनवरी तक हर हाल में फिस रेस से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को पूरा करने के निर्देश दिये हैं तथा कोई भी समस्या होने पर तत्काल अवगत कराने को कहा।

जीएमवीएन को स्लोप के अवशेष कार्य को शीघ्र पूरा करने तथा आईटीबीपी के सक्षम अधिकारियों को फिस रेस से पूर्व स्लोप की टेस्टिंग करने के निर्देश दिये तथा स्लोप की टेस्टिंग के दौरान आने वाली खामियों को शीघ्र दूर कराने को कहा। डीएम ने नये साल के मौके पर चेयर लिफ्ट मेंटेनेंस के कार्यो के लिए गलत समय का चयन करने पर जिलाधिकारी ने जीएमवीएन के अधिकारियों को फटकार लगायी।

एटीएम बदलकर ठगने वाले गिरोह के दो बदमाश गिरफ्तार

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ऋषिकेश, कोतवाली पुलिस ने एटीएम कार्ड बदल कर लोगों की गाड़ी कमाई ठिकाने लगाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दो लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस को उनके कब्जे से वैगनआर कार समेत 60 हजार की नगदी एवं 12 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। सीओ सिटी ने शातिर गिरोह को पकड़ने वाली टीम के लिए 1500 रुपये के ईनाम की घोषणा की है।

सहायक पुलिस अधीक्षक व क्षेत्राधिकारी मंजूनाथ टीसी ने पत्रकारों के समक्ष एटीएम कार्ड बदलकर लोगों की गाड़ी कमाई को ठिकाने लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बताया कि, “गत आठ दिसम्बर को गुमानीवाला निवासी मोहन कुमार डबराल पुत्र वाचस्पति डोभाल द्वारा कोतवाली मे रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि उसकी पत्नी बबीता से घाट रोड़ स्थित पंजाब नेशनल बेंक के एटीएम में पैसे निकालते वक्त दो युवकों ने धोखे से एटीएम बदल दिया और अलग अलग एटीएम से 75 हजार रुपये निकाल लिए। इसी तरह की घटना में 26 नवंबर को 14 बीघा निवासी राकेश चंद भी हरिद्वार रोड़ स्थित एटीएम मे उक्त गिरोह का शिकार हुए। उनके खाते 49,500 रुपये निकाले गए थे। लगातार आ रही शिकायतों को देखते एसएसपी ने टीम गठित कर गुरोह को पकड़ने के निर्देश दिए थे।” पुलिस टीम कई दिन से गिरोह को दबोचने की कोशिश में जुटी थी।

पुलिस के बुने जाल मे आखिरकार धर दबोचा। तहसील चौक पर वाहनों की सघन जांच मे वैगनआर डीएल 3 सीसी एम 9331 को सुबह पुलिस ने रोका तो तलाशी में 12 एटीएम कार्ड और 60 हजार की नगदी बरामद हुई। सख्ती से पूछताछ मे कार सवार युवकों ने कबूल किया कि वे एटीएम बदल कर ठगी करते रहे हैं। बाद मे ठगी का शिकार हुई बबीता डोभाल ने भी उनकी शिनाख्त भी की। अभियुक्तों की शिनाख्त इमरान पुत्र अब्दुल हमीद निवासी बलराम नगर लोनी गाजियाबाद व मौ. सद्दाम पुत्र मौ. सगीर निवासी लोनी गाजियाबाद के रूप मे हुई है। सद्दाम पर पूर्व मे गाजियाबाद मे शस्त्र अधिनियम व धोखाधड़ी के मामले का अभियोग दर्ज है।

जमीनी विवाद में दो भाईयों में खूनी संघर्ष

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रुद्रपुर,जमीनी रंजीश में परिवार के दो सगे भाई ही एक दूसरे के खून के प्यासे बन गये, बंटवारे की जमीन पर निगाह गड़ाए बैठे सगे भाई ने अपने बेटों के साथ मिलकर ही अपने ही भाई पर कातिलाना हमला कर दिया। जिससे वह ग्भीर घायल हो गया। जिसको अस्पताल सरकारी में भर्ती कराया गया है।

किच्छा के प्रतापपुर डेरा में रहने वाले रामायन प्रसाद अपने परिवार के साथ रहता है उसके पास ही उसका छोटा भाई भी रहता है जिनके बीच लम्बे समय से जमीनी विवाद चल रहा था, लेकिन अक्सर विवाद होता रहता है। बताया जाता है कि बीती शाम करीब साढ़े पांच बजे रामायन प्रसाद अपने खेतों की ओर जा रही नाली में उगी घास को साफ कर रहे थे। इसी बीच उसका भाई अपने दोनों पुत्रों के साथ मौके पर पहुंच गए और विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते भाई रामायन पर हावी हो गया और अपने बेटों संग उसे पीटना शुरू कर दिया। पहले तो उसे लाठी डंडों से पीटा और फिर सिर पर फावड़े से हमला कर दिया। जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गया। चीख पुकार सुन दौड़ी रामायन की पत्नी कलावती देवी को भी तीनों बुरी तरह धुन डाला और मौके से भाग निकले। आनन फानन में दौड़े रामायन के बेटे अश्वनी ने पुलिस को सूचना देने के साथ पिता को 108 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

डाक्टरों ने हड़ताल कर जताया विरोध

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रुद्रपुर, आईएमए के आह्वान पर जिले के सभी निजी डाक्टरों ने मंगलवार को 12 घंटे ओपीडी ठप रखकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। डाक्टर एमसीआई को भंग करके एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) लाने का विरोध कर रहे थे। डाक्टरों का कहना था कि एनएमसी से चिकित्सा शिक्षा महंगी हो जाएगी और उपचार भी महंगा हो जाएगा। कहा कि सरकार को हिन्दुस्तान की शिक्षा पर भरोसा नहीं है।

आईएमए के आह्वान पर जिला मुख्यालय समेत जिले भर के डाक्टरों ने मंगलवार को ओपीडी ठप रख कर एनएमसी का विरोध जताया। एनएमसी के विरोध में देश भर के डाक्टरों ने बीती छह जून को दिल्ली में धरना देकर विरोध जताया था। आईएमए के मीडिया प्रवक्ता डा. राजीव सेतिया ने बताया कि एनएमसी बिल पारित होने के बाद प्राइवेट मेडिकल कालेजों को यह अधिकार होगा कि वह सीटें अपनी मर्जी से बढ़ा सकते हैं। सरकार सिर्फ 40 फीसदी मेडिकल सीटों का शुल्क तय करेगी। शेष सीटों के शुल्क को तय करने का अधिकार प्राइवेट स्कूलों को होगा। उन्होंने आशंका जताई कि प्राइवेट मेडिकल कालेजों का हाल इंजीनियरिंग कालेजों की तरह होगा।

एनएमसी में यह व्यवस्था होगी कि मेडिकल कालेज में किसी भी कमी पर पांच करोड़ देकर प्रबंधन छूट जाएगा। यह धनराशि वह मेडिकल के छात्रों से वसूल करेगी। एनएमसी में सिर्फ पांच राज्यों का प्रतिनिधित्व होगा। राज्य के प्रतिनिधि सिर्फ सलाहकार की भूमिका में होंगे। उनके सारे अधिकार छिन जाएंगे।

डा. सेतिया ने बताया कि एनएमसी में क्रास पैथी का घालमेल होगा। सरकार ने यह व्यवस्था की है कि मार्डन मेडिशन के लिए किसी भी पद्धति से शिक्षा पाए डाक्टर तीन महीने का ब्रिज कोर्स करके प्रैक्टिस करने का अधिकार होगा। मसलन होम्योपैथी अथवा आयुर्वेदिक पद्धति के डाक्टर एलोपैथी का दवाएं लिख सकेंगे। कहा कि ऐसे में सालों पढ़ाई करके एमबीबीएस करने वाले और होम्योपैथी से पढऩे वाले एक ही श्रेणी में खड़े होंगे तो चिकित्सा का स्तर कहां पहुंच जाएगा।

गंगा में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकाला

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ऋषिकेश। त्रिवेणी घाट पर सोमवार दोपहर को गंगा का जल स्तर आचानक बढ़ गया। इस बीच करीब 30 पर्यटक नदी के बीच टापू पर फंस गए। हालांकि जल पुलिस की टीम ने सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जल पुलिस के जवान महावीर सिंह नेगी ने बताया कि नदी का जल स्तर टिहरी बांध से पानी छोड़ने के कारण अचानक काफी बढ़ गया था। इससे कुछ समय पहले दोपहर 1:30 बजे गंगा के बीच में बने टापू पर करीब 30 पर्यटक गए थे।अचानक जल स्तर बढ़ने से वे चिल्लाने लगे। आवाज सुनकर घाट पर तैनात पुलिसकर्मी मुकेश गौड़, पंकज जखमोला, दीपक रावत, अनिल चौधरी ने सभी लोगों को सुरक्षित गंगा की धारा से बाहर निकाल लिया।

साल के पहले दिन मरीजों की संख्या कम रहने से डॉक्टरों ने ली राहत की सांस

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देहरादून। साल के पहले दिन दून अस्पताल (दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय) की ओपीडी में मरीजों का भारी टोटा रहा। करीब एक बजे यानी नियत वक्त से दो घंटे पहले ही ओपीडी में सन्नाटा पसर गया। सोमवार को ओपीडी लगभग आधे पर सिमट गई। ओपीडी में महज 850 मरीज पहुंचे, जबकि आमतौर पर अस्पताल में ओपीडी डेढ़ से दो हजार के बीच रहती है। दून महिला अस्पताल में भी बेहद कम मरीज पहुंचे। ऐसे में मरीजों का जबरदस्त दबाव झेलने वाले डॉक्टरों ने साल के पहले दिन राहत की सांस ली।

आमतौर पर लोग साल के पहले दिन अस्पताल जाने से परहेज करते हैं। इसका असर सोमवार को दून अस्पताल में भी दिखा। आम दिनों में मरीजों से ठसाठस रहने वाली अस्पताल की ओपीडी, पैथोलॉजी, पंजीकरण, दवा व बिलिंग काउंटर दिनभर खाली रहे। यहां इक्का-दुक्का मरीज ही दिखाई दिए। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जगह भी यही हाल था। यह हाल तब था जब साल का ही नहीं बल्कि सप्ताह का भी यह पहला दिन था। वहीं, दून महिला अस्पताल में भी काफी कम संख्या में मरीज पहुंचे। यहां रोजाना की ओपीडी 300 तक रहती है, लेकिन साल के पहले दिन यह आंकड़ा आधा हो गया। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा के अनुसार साल के पहले दिन ज्यादातर लोग अस्पताल से परहेज करते हैं। इसके चलते मरीजों की संख्या काफी कम रही। पिछले कई वर्षों में मरीजों की इतनी कम संख्या पहली बार देखी गई है। 

नए साल के हैंगओवर ने पहुंचा दिया अस्पताल

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देहरादून। नए साल के जश्न में सुरा का सुरूर कुछ लोगों के सिर ऐसा चढ़ा कि उन्हें अस्पताल का रास्ता देखना पड़ा। पार्टियों में शराब व नशे के सेवन के कारण सोमवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऐसे कई मरीज पहुंचे। कुछ डॉक्टर को दिखाकर वापस लौट गए तो कुछ लोगों को भर्ती भी करना पड़ा। नए साल का हैंगओवर उनपर भारी पड़ा।

वर्ष 2017 की विदाई और 2018 के आगमन की खुशी में क्या युवा और क्या बुजुर्ग, हर किसी ने जमकर जश्न मनाया। जश्न में डीजे और सुरा के सुरूर में युवा जमकर थिरके, लेकिन अत्याधिक शराब पी लेने के कारण उन्हें अस्पताल का मुंह देखना पड़ा। कुछ देर रात अस्पताल दौड़े और कुछ साल के पहले दिन। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इमरजेंसी में ही लगभग बीस लोग ऐसे पहुंचे। जबकि दो युवा तो बेहोशी की हालत में लाए गए। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि अस्पताल ने पहले से ही बेड आदि की अतिरिक्त व्यवस्था कर रखी थी। थर्टी फस्र्ट नाइट को अत्याधिक शराब पीने और डीहाईड्रेशन का शिकार लोग ज्यादा आए। 

पुलिस की मुस्तैदी ने बनाया मसूरी के लिये सच में “हैप्पी न्यू ईयर”

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2017 को जाते जाते मसूरी और मसूरी के लोगों को एक अच्छी यादगार दे गया। 31 दिसंबर की शाम को शहर में पुलिस के बेहतरीन तालमेल और इंतजामों के चलते मसूरी वासी और यहां आये पर्यटक साल की आखिरी शाम का लुत्फ उठा सके। सीजन के समय ट्रैफिक जाम और बदहाल व्यवस्थाओं को लिये मशहूर हो चुके मसूरी के लिये ये मौका पिछले दस सालों के न्यू ईयर ईव से बेहतर रहा।

न्यूजपोस्ट से बात करते हुए डीआईजी ट्रैफिक केवल खुराना ने बताया कि, “इस बार देहरादून और मसूरी में पीएसी की एक कंपनी तैनात की गई थी। इसके साथ ही सिटी पेट्रोल युनिट की चार टीमें भी लगाई गई थीं। सभी थानों और चौकियों को सड़कों पर यातायात और हुड़दंगियों पर नज़र रखने के निर्देश दिये गये थे।”

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मसूरी के सभी एंट्री और एक्सिट प्वाइंट पर प्रशिक्षित पुलिस बल की तैनाती और साथ साथ शहर की तंग गलियों और अन्य इलाकों में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती ने ये सुनिशतचित किया कि शहर में जश्न के माहौल में भंग न डले।

खुराना ने बताया कि, “31 तारीख से चार दिन पहले ही हमने देहरादून और यहां से आगे जाने वाले रास्तों पर शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के लिये चैकिंग शुरू कर दी थी। इसके चलते भी शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाओं में कमी आई।”

इस बार नये साल की सुबह में मसूरी में ट्रैफिक जाम और हुड़दंग की खबरें सुर्खियां नहीं बन सकी। इसके पीछे कारण रहा सैकड़ों पुलिस कर्मियों और अधिकारियों का घंटों शहर की सड़कों और अन्य इलाकों में मुस्तैदी से मौजूद रहना। इस बात की तस्दीक मसूरी में सालों से रहने वाले लोगों ने भी की। मसूरी निवासी रजत अग्रवाल का कहना है कि, “इतने सालों में ये पहला मौका था जब मसूरी में इतनी बेहतरीन ट्रैफिक व्यवस्था देखने को मिली। हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में भी मसूरी में इस तरह के इंतजाम देखने को मिलेंगे।”

 

17 साल में 374 फीसद बढ़ी बिजली की खपत, उत्पादन मात्र 30 फीसद

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देहरादून। उत्तराखंड बनने के बाद 17 सालों में बिजली की खपत 374 फीसद बढ़ी है, जबकि बिजली उत्पादन में महज 30 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है। उपभोक्ताओं की संख्या में 150 फीसद इजाफा हुआ है। और, इसी स्थिति के अनुरूप सुखुद ये है कि जैसे-तैसे बिजली मांग करीब-करीब पूरी हो रही है।

राज्य गठन के बाद कोई बड़ी नई परियोजना शुरू नहीं हुई। जल विद्युत निगम की 1284 मेगावाट क्षमता की 13 परियोजना हैं, वही राज्य गठन के वक्त थी। परियोजनाओं के आधुनिकरण, नवीनीकरण एवं मेंटीनेस से ही उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा ने बताया कि हर साल करीब 80 हजार से एक लाभ नए उपभोक्ता जुड़ते हैं। बिजली की कोई कमी नहीं है और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी में कटौती नहीं हो रही।

उद्योगों में आधी बिजली
कुल खपत में से आधी बिजली उद्योगों में खप रही है। राज्य में करीब 12 हजार औद्योगिक उपभोक्ता हैं। इनमें वर्ष 2016-17 में 5808 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई। जबकि, कुल बिजली खपत 10571 मिलियन यूनिट रही।

2001- 2017
बिजली खपत, 2229, 10571 (मिलियन यूनिट)
बिजली उत्पादन, 3067, 4379 (मिलियन यूनिट)
उपभोक्ता, 8.40, 20.94 (लाख)

40 फीसद बढ़े बिजली के दाम
राज्य बनने के बाद बिजली के दाम औसतन 3.36 रुपये प्रति यूनिट थे। जबकि वर्तमान बिजली दर 4.72 रुपये प्रतियूनिट है। इस हिसाब से 40.48 फीसद इजाफा हुआ है।