नई दिल्ली, इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण के लिए चेन्नई सुपर किंग्स ने महेन्द्र सिंह धोनी, सुरेश रैना और रवींद्र जडेजा को टीम में बरकरार रखा है।
इसके अलावा मुंबई इंडियंस ने कप्तान रोहित शर्मा, हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह, किंग्स इलेवन पंजाब ने अक्षर पटेल,कोलकाता नाइट राइडर्स ने सुनील नरेन और आंद्रे रसेल, राजस्थान रॉयलस ने स्टीव स्मिथ और सनराइजर्स हैदराबाद ने डेविड वॉर्नर और भुवनेश्वर कुमार को टीम में बरकरार रखा है।
उल्लेखनीय है कि आईपीएल के 11वें संस्करण के लिए खिलाड़ियों की निलामी 27-28 जनवरी को की जाएगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पिछले महीने ही खिलाड़ियों की नीलामी के नए नियमों की घोषणा की थी।
देहरादून। नमामि गंगे परियोजना के अन्तर्गत भारत सरकार को भेजी जाने वाली ऋषिकेश-हरिद्वार रीवर फ्रंट डेवलपमेंट से संबंधित कार्ययोजना का मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के समक्ष न्यू कैन्ट रोड स्थित मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश-हरिद्वार का धार्मिक ही नही आध्यात्म व पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान है। गंगा के तट पर बसा होने से इस क्षेत्र का और भी अधिक महत्व है।
इस मौके पर सीएम ने कहा कि, “इस क्षेत्र के नदी तटों का बेहतर सौन्दर्यीकरण हो ताकि यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों व पर्यटको को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें तथा अधिक से अधिक तीर्थयात्री व पर्यटक इस क्षेत्र में आए। ऋषिकेश व हरिद्वार के घाटो के सौन्दर्यीकरण की योजना भी कार्ययोजना में शामिल की जाए। इन क्षेत्रों में प्रकाश, स्वच्छता व जन सुविधाओं एवं सुरक्षा से संबंधित योजनाओं को इसमें सम्मिलित किया जाए।”
क्षेत्रों की जी.आई.एस. मैपिंग में भी सभी आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान देने पर बल दिया तथा मैपिंग में सभी संबंधित विभागों को भी जोडा जाए। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने कहा कि ऋषिकेश-हरिद्वार रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के लिये सी.एस.आर. फण्ड के तहत क्रियान्वित की जाने वाली योजनाओं के लिये धनराशि की स्वीकृति हेतु केन्द्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा भी आश्वासन दिया गया है।
इस अवसर पर इस योजना की कार्ययोजना से संबंधित प्रस्तुतीकरण में इन्टरनेशनल सेन्टर फॉर सस्टेनेबल सिटि(आईसीएससी) की प्रतिनिधि समीहा सेठ ने बताया कि उनकी टीम द्वारा इस संबंध में पूरे क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के साथ ही स्थानीय लोगों से भी वार्ता कर कार्ययोजना तैयार की है। जिसे शीघ्र ही मुख्यमंत्री के सुझावों को सम्मिलित करने के बाद अंतिम रूप दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा पूरे क्षेत्र की जी.आई.एस. मैपिंग कर 38 किमी क्षेत्र के लगभग 70 जीआईएस मैप तैयार किये गए है। इस अवसर पर अपर सचिव डॉ. राघव लंगर, इं. पीयूष के सिंह समेत अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
विधान सभा अध्यक्ष कैम्प कार्यालय, ऋषिकेश में आयोजित एक बैठक के दौरान विधान सभा अध्यक्ष श्री प्रेम चन्द अग्रवाल ने गुजरात की इण्टरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल सिटीज(आई.सी.एस.सी.) कंसल्टेंसी फर्म द्वारा नमामि गंगे के तहत ऋषिकेश एवं हरिद्वार के घाटों पर बनायी गयी कान्सेप्ट रिपोर्ट पर चर्चा की। इस दौरान नमामि गंगे के रिवर डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट पियुष कुमार सिंह के साथ आई.सी.एस.सी कंसल्टेंसी फर्म के स्पेशलिस्ट समीहा सेठ एवं डा. सी. नाथ.रे मौजुद थे।
आई.सी.एस.सी कंसल्टेंसी फर्म द्वारा अपनी कान्सेप्ट रिपोर्ट के दौरान बताया गया कि किस प्रकार से ऋषिकेश एवं हरिद्वार के घाटों का जीर्णाधार किया जा सकता है। जिसमें घाटों पर बिजली की ब्यवस्था, स्नान गृह, टॉयलेट एवं कपडें बदलने वाले स्थानों को और अच्छा बनाया जा सकता है।आई.सी.एस.सी कंसल्टेंसी फर्म द्वारा पहला ऐसा मानचित्र बनाया गया है जिसमें गंगा किनारे स्थित मन्दिर, आश्रम एवं घाटों को बिन्दु रूप में स्पष्ट दर्शाया गया है। जिस कारण गंगा किनारे के तटों एवं स्थलों को समझने में काफी आसानी होगी।आई.सी.एस.सी कंसल्टेंसी फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि किस प्रकार से ऋषिकेश एवं हरिद्वार में पर्यटकों का और अधिक आकर्षित किया जा सकता है। रिपोर्ट में घाटों पर आने वाले पर्यटकों का भी आकंलन किया गया है।
बैठक के दौरान विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि नदी का न सिर्फ़ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि देश की 40 प्रतिशत आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40 फीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी। अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है। इस सोच को कार्यान्वित करने के लिए ही सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ का शुभारम्भ किया है अतः इस अभियान के तहत सभी को अपने- अपने स्तर पर कार्य करना अति आवश्यक है। विधान सभा अध्यक्ष ने आई.सी.एस.सी की रिपार्ट को देखने के बाद अपने सुझाव देते हुए कहा कि घाटों के किनारे रेलिगं, उचित प्रकाश एवं आस्था घाट की मरम्म्त के लिए भी रिर्पाट में सम्मिलित करें।
देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की नियुक्तियों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ियों का निपटारा पांच जनवरी तक हो जाएगा। हाल में विवि की जिम्मेदारी संभालने वाले कुलपति प्रो. अभिमन्यु कुमार ने नियुक्तियों में धांधली को लेकर विशेष समिति का गठन किया था। समिति को पांच जनवरी तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। जानकारों की माने तो जांच रिपोर्ट के बाद विवि नए सिरे से कुल 292 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी कर सकता है।
292 पदों की नियुक्ति प्रक्रिया का है मामला
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने बीते 31 दिसंबर 2016 को संस्थान में शैक्षिक, तकनीकी व नर्सिंग संवर्ग सहित विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। इसके तहत शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक करीब दो सौ से ज्यादा पदों पर भर्ती होनी थी। लेकिन कुछ दिन बाद ही यूनिवर्सिटी ने विज्ञप्ति निरस्त करने की सूचना वेबसाइट पर अपलोड कर दी। इसके बाद दोबारा नए सिरे से विज्ञपत्ति जारी की गई। लेकिन राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद यह प्रक्रिया भी ठंडे बस्ते में चली गई। इस बीच विवि फैकल्टी की भारी कमी से जूझता रहा। बीते कुछ वक्त पहले एक बार विवि ने कुल 292 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की। प्रक्रिया भी जारी है। लेकिन इस बार नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली को लेकर सवाल उठने लगे। यहां तक की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बनाई गई समितियों तक पर बाहरी दखल के आरोप लगाए गए। इसे लेकर कुलपति तक से लिखित रूप से विवि के अधिकारियों द्वारा शिकायत की गई। हालांकि अभी तक इसे लेकर कुछ सकरात्मक कदम नहीं उठाए गए। विवि में इन तमाम अव्यवस्थाओं के होने का कारण स्थाई कुलपति का न होना माना जा रहा था।
नए कुलपति ने गठित की जांच समिति
बीते माह विवि को नया निजाम मिला। विवि को स्थाई कुलपति मिला। नए कुलपति ने अव्यवस्थाओं को ढर्रे पर लाने के लिए नए सिरे से सकरात्मक दिशा में बदलावों की पहल की। संबद्ध संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगाने को जहां फैकल्टी के आधार और पैन कार्ड अनिवार्य किए। वहीं, दूसरी ओर नियुक्तियों के होने तक शासन से अटैच चिकित्सकों को बरकरार रखे जाने का अनुरोध भी किया। कुलपति ने विवि में चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर लग रहे आरोपों को भी गंभीरता से लिया। जिसके बाद नियुक्तियों पर विभिन्न स्तरों में प्राप्त शिकायतों का निपटारा करने के लिए पूर्व में जारी विज्ञप्ति के पुनरवलोकन एवं परीक्षण किए जाने हेतु नए समिति बनाई।
पांच जनवरी को समिति देगी रिपोर्ट
जाचं समिति को पांच जनवरी तक रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित करने के निर्देश दिए। माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट के बाद नियुक्तियों को लेकर निर्णय हो सकता है। बताया जा रहा है कि यदि जाचं रिपोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई गई तो विवि नियुक्तियों को लेकर नया विज्ञापन भी जारी कर सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर विवि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की। विवि के कुलचसिव प्रो. अनूप कुमार गक्खड़ के मुताबिक विवि जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लेगा।
देहरादून। यूपी के मदरसों में मुस्लिम युवतियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में खुलासे के बाद अब उत्तराखंड में भी मदरसों की जांच की मांग उठने लगी है। ग्रामीण विकास समिति की ओर से मदरसों में जांच की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड राज्य सरकार को पत्र लिखकर मदरसे की जांच की मांग की गई।
प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान समिति के अध्यक्ष कुंवर सिंह ने कहा कि, “कई बार पिरान कलियर के आसपास बने होटलों में देह व्यापार का खुलासा हुआ है। इस लिहाज से उत्तराखंड के हरिद्वार, उधमसिंह नगर, देहरादून व पौड़ी जनपदों में संचालित हो रहे मदरसों की जांच की जानी चाहिए। जिसमें प्रदेश व बहार की कई मुस्लिम छात्र छात्राएं तालीम ले रही हैं। लोक-लाज वह जान माल के डर से कई महिलाएं सामने नहीं आती है। राज्य सरकार को भी इस गंभीर विषय पर विचार कर आगे आकर जांच करनी चाहिए।”
देहरादून एजूकेशन हब के रूप में पूरे देश में जाना जाता है यहां पर कई प्रकार के शैक्षिक संस्थान चलते हैं जिसमें मदरसे भी शामिल है।जहां केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक के विरोध में विधायक पेश कर मुस्लिम महिलाओं पर रहे उत्पीड़न के खिलाफ कार्रवाई कर रही है वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मदरसों की कार्यवाही को ऑनलाइन करके अपनी पैनी निगाह बनाए हुए है। बावजूद इसके मदरसों में ऐसी घटना निंदनीय है।
उत्तराखंड की भाजपा सरकार को भी ठोस कदम उठाकर मदरसों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समीति की ओर से इस संबंध में उत्तराखंड पुलिस को पत्र लिखकर जांच करने की मांग की जाएगी। साथ ही समीति का एक प्रतिनिधिमंडल डीजीपी से मिलकर भी जांच की मांग करेगा।
देहरादून। यदि हम हैण्डलूम के उत्पादों को खरीदते है तो देश के गरीबों के श्रम का सम्मान करते है। हैण्डलूम भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, जो लगभग 65 लाख लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउण्ड में आयोजित नेशनल हैण्डलूम एक्सपो में देश के विभिन्न राज्यों से आए बुनकर समूहों के उत्पादों का अवलोकन कर उनके उत्पादों की सराहना की।
हैंडलूम एक्सपो में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि, “हैंडलूम उत्पादों का इस्तेमाल कर हम इस कार्य से जुड़े मजदूर की पसीने की कीमत उन्हें अदा करते है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सपो में आए बुनकरों ने बताया कि वे वर्षो से इसमें प्रतिभाग करते आ रहे है। इससे यह अहसास होता है कि यहां पर उनके उत्पादों को लोगों द्वारा काफी पसन्द किया जाता है। उन्होंने कहा कि हैंडलूम का क्षेत्र रोजगार प्रदान करने के साथ ही हमारी पुरानी भारतीय परम्परा व बुनकर समुदायों की सुदृढ़ सामाजिक व सांस्कृतिक परम्परा को बनाए रखने में भी मददगार रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील से कि साल में हर भारतीय खादी का एक जोड़ा कपड़ा जरूर पहनें। इससे देश में खादी की बिक्री बढ़ी है व देश-विदेशों से बड़े डिजाइनर इस क्षेत्र में कार्य कर रहे है। उन्होंने कहा कि हैण्डलूम के वस्त्रों का उपयोग कर हम देश के विकास में भी योगदान देते है, इस क्षेत्र में कार्य करने वाले क्षेत्रों में स्वालकुची, आसाम, भागलपुर, संथाल परगना व देवघर का उन्होंने विशेष उल्लेख किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने इस अवसर पर हिमाद्री के वार्षिक कैलेण्डर का विमोचन किया तथा एक्सपो के थीम पेवेलियन एवं सांस्कृतिक संध्या का भी शुभारम्भ किया।
निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल ने बताया कि राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में वस्त्र उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मकता एवं वैश्वीकरण की चुनौतियों का सामना करने लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र को सहायता उपलब्ध करा रही है। बुनकरों को विपणन के समुचित अवसर उपलब्ध कराने के लिए विकास आयुक्त(हथकरघा), भारत सरकार की विपणन सहायता योजना के अन्तर्गत देश के विभिन्न शहरों में नेशनल हैण्डलूम तथा स्पेशल हैण्डलूम एक्सपो आयोजित किए जाते है। उन्होंने बताया कि देहरादून में भारत सरकार की इस योजना के अन्तर्गत गत 10 वर्षों में नेशनल हैण्डलूम एक्सपो का नियमित आयोजन उद्योग निदेशालय, उत्तराखण्ड एवं उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष यह आयोजन 31 दिसम्बर, 2017 से 13 जनवरी, 2018 तक किया जा रहा है।
नौटियाल ने बताया कि, “नेशनल हैण्डलूम एक्सपो, देहरादून में देश के 14 राज्यों साथ ही उत्तराखण्ड के 46 समितियों/व्यक्तिगत बुनकारों सहित शीर्ष हथकरघा संगठन एवं बुनकर समूह अपने उत्पादों सहित प्रतिभाग कर रहे है। नेशनल हैण्डलूम एक्सपो में विभिन्न प्रांतो एवं क्षेत्रों के विशिष्ट हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। “
देहरादून। अब कार्बेट और राजाजी पार्क में बाघ और हाथियों की सुरक्षा ने लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद वन विभाग सुरक्षा इंतजामों में जुट गया है। वहीं, कोर्ट ने मार्च तक वहां वन्यजीव सुरक्षा के लिए विशेष ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
पिछले साल कार्बेट और राजाजी में बाघ और हाथियों के शिकार और संदिग्ध मौतों के कई मामले सामने आए थे। जिसे लेकर कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली थी। इस पर कोर्ट ने वन विभाग को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तीन माह में विशेष इंतजाम करने के आदेश दिए। इसके बाद वन विभाग ने सुरक्षा इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। विभाग की ओर से पिछले साल के डाटा के आधार पर इन दोनों जगहों पर शिकार के लिहाज से संवेदनशील जगहों को चिह्नित किया जा रहा है। इसके अलावा सुरक्षा के सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
वाइल्ड लाइफ के एपीसीसीएफ डा. धनंजय मोहन ने बताया कि वन्यजीव सुरक्षा को लेकर अदालत का विस्तृत आदेश आया है। जिसमें कार्बेट और राजाजी में मार्च तक विशेष सुरक्षा ढांचा तैयार करने को कहा गया है। विभाग की ओर से इस पर काम शुरू कर दिया गया है।
नई दिल्ली, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित आधार डाटा लिक संबंधी रिपोर्ट का खंडन करते हुए उसे भ्रामक बताया है। यूआईडीएआई ने आश्वासन दिया कि कोई आधार डेटा उल्लंघन नहीं है बायोमेट्रिक जानकारी सहित आधार डेटा पूरी तरह से सुरक्षित है।
यह खबर ‘‘500 रुपये, 10 मिनट और आपके पास अरब आधार का विवरण’’ नाम से अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी। खबर के मुताबिक केवल कुछ रुपये देकर आप एक लिंक पा सकते हैं जिसमें यूजर आईडी और पासवर्ड के जरिये लॉगिन कर किसी भी आधार नंबर से संबंधित डाटा हासिल कर सकते हैं|
यूआईडीएआई का कहना है कि, “खबर में प्रकाशित शिकायत निवारण तंत्र के तहत कुछ लोगों को दी गई खोज सुविधा के दुरुपयोग का मामला है। यूआईडीएआई ने नामित कर्मियों और राज्य सरकार के अधिकारियों को शिकायत निवारण के उद्देश्य से लॉगिन की सुविधा देता है। यूआईडीएआई इस सुविधा पर लगातार नज़र रखता है। ऐसे में तत्काल इसमें शामिल व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने सहित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
यूआईडीएआई का कहना है कि शिकायत निवारण खोज सुविधा भी केवल नाम और अन्य विवरण तक सीमित पहुंच प्रदान करती है। इसमें बायोमेट्रिक विवरण नहीं होता।
यूआईडीएआई ने आश्वासन दिया है कि बायोमेट्रिक डाटाबेस का कोई भी डाटा उल्लंघन नहीं है जो यूआईडीएआई पर पूरी तरह से सुरक्षित है और उच्चतम एन्क्रिप्शन के साथ सुरक्षित है| बायोमेट्रिक्स के बिना जनसांख्यिकीय जानकारी का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है।
रांची, चारा घोटोले में राजद प्रमुक लालू प्रसाद यादव को पेशी के मद्देनजर पूरा कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील था। चार डीएसपी और लगभग 400 जवानों को कोर्ट परिसर की सुरक्षा में लगाया गया था। सुरक्षा को लेकर कोर्ट परिसर में किसी भी कार्यकर्ता या अन्य बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था। कोर्ट परिसर में सिर्फ अधिवक्ता, मीडिया और मुकदमे से जुड़े लोगों को ही कोर्ट परिसर में जाने दिया जा रहा था। अपने मुकदमे के लिए आये कई लोगों को भी गेट से ही लौटना पड़ा। कोर्ट के बाहर राजद कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गयी थी। सुरक्षा के लिहाज से कोर्ट के दोनों गेट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। साथ ही कोर्ट के मेन गेट पर लगने वाले चाय सहित अन्य खाने-पीने की दुकानों को भी नहीं लगने दिया गया था।
विधायक को रोका तो हुई बकझक
राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह और विधायक भोला यादव कोर्ट परिसर में अपने काफिले के साथ सीधे चले आ रहे थे। गेट के पास आते ही पुलिस के जवानों ने रोक दिया। इस पर विधायक और कार्यकर्ता भड़क उठे और काफी हो हंगामा होने लगा। इसके बाद मेन गेट के बाहर तैनात सिटी डीएसपी राजकुमार मेहता ने बातचीत की और दोनों नेताओं को अंदर जाने दिया गया।
तेजस्वी तेजप्रताप नही आए रांची
लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव में कोई भी रांची नही आए थे जबकि इससे पहले 23 दिसम्बर को सुनवाई में तेजस्वी रांची आए थे। कोर्ट ने तेजस्वी को भी अवमानना का नोटिस भेजा है। इस मामले में जब रघुवंश प्रसाद सिंह से पूछा गया कि लालू के पुत्र नहीं आए है तो उन्होंने कहा कि मौसम खराब होने के कारण फ्लाइट और ट्रेन लेट चल रही हैं। इसी कारण से दोनों नहीं आ सके।
पार्टी की बैठक में रणनीति तय होगी
पत्रकारों से बात करते हुए राजद उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद ने बताया कि पार्टी की बैठक में रणनीति तय की जाएगी। कई बार इस तरह की परिस्थिति को झेल चुके हैं। इस विषम परिस्थिति में पार्टी का जनाधार बढ़ा है। राजद एक परिवार है। पार्टी के सिद्धांत के तहत ही बैठक में चर्चा की जाएगी।
भाजपा करेंगे ध्वस्त
राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद ने एक सवाल के जबाब में कहा कि बीजेपी का सब किया धरा है। हम लोगों की भाजपा से लड़ाई है। नीतीश से लड़ाई है। जनता एकजुट है। दोनों को सबक सिखायेंगे। सभी गैर भाजपा दलों को एकजुट किया जाएगा। उसके बाद बीजेपी को ध्वस्त कर देगे। राजद मुकाबले को तैयार है। यह जनता की लड़ाई है। हमलोग इन्फैन्ट्री के जवान हैं। झटका लगने से हमारी ताकत बढ़ती है।
राज्य बनने के बाद से ही उत्तराखंड के सामने पहाड़ के पानी और जवानी को रोकने की चुनौती मुंह खोलकर खड़ी है। पलायन को रोकने के सरकारी दावों और कागजी बातों के बीच राज्य के कुछ युवाओं ने भी इससे निपटने को लिये कमर कस ली है।
ऐसे ही टिहरी के दो युवा रिवर्स पलायन को हकीकत बनाने में लगे हुए हैं। रिवर्स माइग्रेशन में पहली सीढ़ी इन्होंने देवकौश आर्गेनाईजेशन की फ़ूड प्रोसेसिंग का काम स्टार्ट किया जिसमें उन्होंने कोदर्फ़ी (मंडवा बर्फी), तिम्ले का अचार(अंजीर अचार),चूलू(वाईल्ड एप्रिकोट), मशरुम और अन्य पहाड़ी उत्पादों में काम किया जो सभी सफल रहे और आज पूरे देश के कोने-कोने में कोदर्फ़ी और अन्य प्रोड्क्टस की डिमांड है।आपको बतादें कि इस बर्फी में इस्तेमाल होने वाली सभी चीजों की उगाई पहाड़ में हुई है चाहें वह मंडवा हो, सूखे फल हो, मूंगफली हो, घी हो या और कोई भी इंग्रडियेंट हो।
संदीप सकलानी से टीम न्यूजपोस्ट से हुई बातचीत में कहा कि, ”देवकौश आर्गेनाइजेशन के सभी प्रोडक्ट के इंग्रिडियेंट्स नेचुरल पहाड़ी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से बहुत ही सपोर्ट मिला साथ ही इसको प्रमोट भी किया। सीएम रावत ने कोदर्फ़ी को उत्तराखंड की बहुमूल्य स्वीट उत्पाद घोषित किया।” साथ ही साथ नई टिहरी के नगर पालिका अध्यक्ष उमेश चरण गुसाईं ने भी पूरा सहयोग दिया और प्रमोट किया।
देवकौश आर्गेनाइजेशन के को-फांउडर संदीप सकलानी, नई टिहरी और कुलदीप रावत, चम्बा को इस काम में टेक्निकल सपोर्ट कृषि विज्ञान केंद्र, रानिचोरी की फ़ूड प्रोसेसिंग साइंटिस्ट कु.कीर्ति कुमारी ने किया है। पिछले 2 साल में गढ़-माटी संगठन जिसकी प्रेसिडेंट रंजना रावत है उनके साथ मिलकर साथ ही 1400 किसानों के साथ कार्य कर रहें है, जिसके तहत 18 महिलाओं और 4 पुरुषों को टिहरी में रोजगार मिला।
उत्तराखंड में उगने वाली फसल कोदे को जिस तरह से इन युवाओं ने पलायन के खिलाफ इस्तेमाल किया है वह वाकई प्रशंसनीय है। संदीप सकलानी, जो की राजस्थान में एक सिविल इंजीनियर थे मूल रूप से टिहरी के निवासी हैं। रिवर्स माइग्रेशन के प्लान से फ़रवरी 2016 वापस उत्तराखंड आये और उन्हें कुलदीप रावत मिले जो की एचएनबी गढ़वाल यूनिर्वसिटी से ग्रेजुएट हैं। एक जैसी सोच होने की वजह से इन दोनों ने साथ काम करने का फैसला किया। इतना ही नहीं उन्होंने नगर पालिका के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इसके जरिये रोजगार दिया।संदीप कहते हैं कि, “आगे देवकौश आर्गेनाइजेशन रिवर्स माइग्रेशन के लिए 2018 के अंत तक 100 लोगों को रोजगार देने का टारगेट है।” संदीप और कुलदीप को उनकी इस पहल के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा ‘हिल-रत्न पुरस्कार’ से भी नवाजा गया है। 26 साल के संदीप सकलानी और 25 साल के कुलदीप रावत ने ना सिर्फ रिवर्स पलायन के रास्ते खोलें हैं बल्कि उत्तराखंड की दम तोड़ती मिठाईयों को एक नई पहचान भी दिलाई है।टीम न्यूजपोस्ट कुलदीप और संदीप को उनकी इस पहल के लिए सलाम करता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं देता है।
यहां देखिए किस तरह से इन युवाओं ने पलायन को चुनौती दी हैंः विडियो साभारः सूचना निदेशालय,उत्तराखंड