उत्तराखण्ड राज्य की झांकी ‘ग्रामीण पर्यटन’ दिखेगी गणतंत्र दिवस परेड में
यातायात व्यवस्था सुधारने के लिये यातायात समीक्षा बैठक आयोजित
मंगलवार को डीजीपी उत्तराखण्ड अनिल के0 रतूड़ी, की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय उत्तराखण्ड में राज्य की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए यातायात समीक्षा बैठक आयोजित की गयी जिसमें उन्होंने कहा कि ”फिलहाल यातायात व्यवस्था बेहतर बनाना पुलिस का मुख्य कार्य हो गया है क्योंकि जनता इससे ज्यादा प्रभावित है।जेसे कि उत्तराखण्ड राज्य पर्यटन प्रधान राज्य है और अधिक से अधिक संख्या में लोगों का आगमन यहाँ हो रहा है जिससे सड़कों पर भी यातायात का दबाव बढ़ रहा है । हमें अपने सीमित संसाधनों का प्रयोग करके जनता के हित में कार्य करना है।”
बैठक में अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखण्ड, राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन,दीपम सेठ, पुलिस महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, पुष्पक ज्योति, पुलिस उपमहानिरीक्षक, गढ़वाल परिक्षेत्र, केवल खुराना पुलिस उपमहानिरीक्षक/निदेशक- यातायात, लोकेश्वर सिंह, पुलिस अधीक्षक यातायात देहरादून, मंजूनाथ टी0सी0, पुलिस अधीक्षक,यातायात हरिद्वार, और प्रभारी सीपीयू सहित अन्य अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
अशोक कुमार ने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण ओवर स्पीड,नशे में वाहन चलाना, रेश ड्राइविंग,ओवरलोडिंग, वाहनों एवं सड़कों की खराब स्थिति तथा अप्रशिक्षित चालक होना है जिनकी रोकथाम करना पुलिस की प्राथमिकता है।
इस बैठक में कुछ खास बिन्दुओं पर विचार-विमर्श किया गयाः-
- दुर्घटना सम्भावित/बोटल नेक/ब्लैक स्पॉट स्थानों का चिन्हीकरण कर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु चेतावनी बोर्ड लगाये जाने हेतु निर्देशित किया गया।
- जनपद हरिद्वार एवं ऊधमसिंहनगर में 100-100 तथा जनपद पौड़ी एवं टिहरी में 30-30 यातायात कर्मियों की नियुक्ति किये जाने का निर्णय लिया गया।
- समस्त जनपदों में यातायात जागरुकता के सम्बन्ध में अभियान चलाकर आमजन को यातायात नियमों एवं सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुक करने हेतु निर्देशित किया गया।
- सड़कों पर अतिक्रमण के विरुद्घ 133 सीआरपीसी के अन्तर्गत कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किया गया।
- समस्त जनपदों में नये पार्किंग स्थल विकसित किये जाने का निर्णय लिया गया।
- सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों जैसे ड्रंकन ड्राईविंग, रेड लाईट जम्पिंग, ओवर स्पीड, ओवर लोड़िंग, रैश ड्राईविंग, एवं मालवाहक वाहनों में सवारी बैठाना में शत-प्रतिशत डीएल निरस्तीकरण की कार्यवाही करने हेतु भी निर्देशित किया गया।
- पार्किंग स्थलों, बाईपास, फ्लाईओवर के निर्माण एवं सड़कों के सुधारीकरण हेतु अन्य सम्बन्धित विभागों एम0डी0डी0ए0,पी0डब्लू0डी0,एन0एच0आई0ए0 आदि से समन्वय स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है।
- प्रधानमंत्री भारत सरकार के निर्देशनुसार यातायात जागरुकता हेतु प्रदेश की स्थानीय बोलियों (गढ़वाली,कुमाऊंनी व जौनसारी) में यातायात जागरुकता संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रचारित-प्रसारित करने हेतु भी निर्देशित किया गया।
जनता दरबार में ज़हर खाने वाले प्रकाश की मैक्स अस्पताल में मौत
देहरादून। बीते शनिवार को हल्द्वानी निवासी प्रकाश पांडे ने जनता दर्शन कार्यक्रम में जहर खाया जिसके बाद उन्हें मैक्स अस्पताल में भर्ती किया गया था जहां उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई थी लेकिन मंगलवार दोपहर को प्रकाश का निधन हो गया।ज़हर खाने के बाद प्रकाश की हालत बेहद नाज़ुक थी जिसकी वजह से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। सीएमओ डॉ वाईएस थपलियाल ने बताया कि प्रकाश का पोस्टमार्टम मैक्स हॉस्पिटल में ही होगा।
आपको बतादें कि बीते शनिवार को हल्द्वानी के स्थानीय निवासी प्रकाश पांडे ने बीजेपी कार्यालय में चल रहे जनता दर्शन कार्यक्रम में जहर खाकर था। लेकिन जहर खाने से पहले वह रो-रोकर अपनी शिकायत दर्ज करा रहे थे। ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे बैंक के कर्ज से परेशान थे। उसका कहना था कि जीएसटी और नोटबंदी ने उनका कारोबार ठप कर दिया था। वह कर्ज तले डूब गये है और अब उसके पास और कोई रास्ता नहीं बचा इसलिए वह यह कदम उठा रहे हैं।शनिवार को देहरादून के बलवीर रोड स्थित बीजेपी कार्यालय में सुबोध उनियाल जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों की समस्या सुन रहे थे और ऐसे ही प्रकाश भी वहां अपनी शिकायत लेकर पहुंचा था। जहर खाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रकाश पांडे को दून अस्पताल पहुंचाया,जहां उसका इलाज किया जा रहा है। जाते-जाते भी कारोबारी सरकार के खिलाफ बोलता रहा। उन्हें गम्भीर हालत में दून हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके पेट से जहरीला पदार्थ निकाल दिया गया है लेकिन प्रकाश की हालत गंभीर बनी हुई थी।

जहां एक तरफ प्रकाश की मौत ने बीजेपी सरकार पर सवालिया निशान लगा दिए हैं वहीं कांग्रेस सरकार प्रकाश की मौत पर हमलावर हो गई है।प्रकाश के मौत की खबर सुनते ही कांग्रेस के पीसीसी अध्यक्ष प्रीतम सिंह,सूर्यकांत धस्माना समेत कई नेता का मैक्स अस्पताल में तांता लग गया है।पीसीसी अध्यक्ष प्रीतम संह ने कहा कि ”प्रकाश का परिवार उनके मृत्यु से टूट गया है और प्रकाश की मौत का कारण ज़हर नहीं बल्कि नोटबंदी और जीएसटी है।राज्य सरकार और केंद्र सरकार के उठाए कदम से प्रकाश जैसे ना जाने कितने लोगों को दुख पहुंचाया है।सिंह ने कहा कि प्रकाश आज से नहीं बल्कि काफी समय से अपनी परेशानी लेकर सरकार से मिन्नतें कर रहे थे लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई और यह आत्महत्या नहीं बल्कि सरकार के किए गए फैसले का बैकफायर है।”
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हल्द्वानी निवासी ट्रासंपोर्टर प्रकाश पाण्डे के निधन पर शोक व्यक्त किया है, उन्होंने दिवंगत की आत्मा की शांति एवं दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनो को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है।मुख्यमंत्री ने कहा कि, “स्व. प्रकाश पांडे की जीवन रक्षा के लिए सभी आवश्यक एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई र्गइं। उनको इलाज के लिए शीघ्र मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डाॅक्टरों को उनको बेहतर ट्रीटमेंट देने को कहा गया था।मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृत्ति न हो।”
फिल्म अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थी नंदा
नई दिल्ली, बॉलीवुड अभिनेत्री नंदा के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि अभिनय नहीं बल्कि सेना में भर्ती होना चाहती थी। 8 जनवरी 1939 को जन्मी नंदा के घर का महौल शुरू से फिल्मी था क्योंकि नंदा के पिता मास्टर विनायक मराठी रंगमंच के हास्य कलाकार के साथ-साथ फिल्म निर्माता भी थे। पिता नंदा को फिल्म अभिनेत्री ही बनाना चाहता थे लेकिन नंदा का मन कहीं और ही लगता था। नंदा सुभाष चन्द्र बोस के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित थीं। एक बार नंदा की मां ने उन्हें बाल कटवाने के लिए कहा क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि वो उनकी फिल्म में लड़के का रोल करें। जिसको सुनकर नंदा अपनी मां पर बहुत गुस्सा हुई लेकिन मां के बहुत समझाने पर वह बाल कटवाने के लिए मान गई। हालांकि फिल्म के निर्माण के दौरान ही मास्टर विनायक का निधन हो गया।
नंदा के सिर से पिता का साया उठ गया। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ने लगी। घर की माली हालत को देखते हुए नंदा ने फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया। बतौर बाल कलाकार नंदा ने वर्ष 1948 में मंदिर, वर्ष 1952 में जग्गु, वर्ष 1954 में शंकराचार्य और अंगारे जैसी फिल्मों में काम किया। वर्ष 1956 में अपने चाचा वी. शांताराम की फिल्म “तूफान और दीया” से नंदा ने बतौर अभिनेत्री अपने सिने करियर की शुरुआत की। हालांकि फिल्म की असफलता से वह कुछ खास पहचान नहीं बना पायी।
फिल्म तूफान और दीया की असफलता के बाद नंदा ने राम लक्ष्मण, लक्ष्मी, दुल्हन, जरा बचके, साक्षी गोपाल, चांद मेरे आजा, पहली रात जैसी बी और सी ग्रेड वाली फिल्मों में बतौर अभिनेत्री काम किया लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा। नंदा की किस्मत का सितारा निर्माता एल.वी. प्रसाद की वर्ष 1959 में प्रदर्शित फिल्म “छोटी बहन” से चकमा। इस फिल्म में भाई-बहन के प्यार भरे अटूट रिश्ते को रूपहले परदे पर दिखाया गया था। इस फिल्म में बलराज साहनी ने बड़े भाई और नन्दा ने छोटी बहन की भूमिका निभायी थी। शैलेन्द्र का लिखा और लता मंगेशकर द्वारा गाया फिल्म का एक गीत “भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना” बेहद लोकप्रिय हुआ था। रक्षा बंधन के गीतों में इस गीत का विशिष्ट स्थान आज भी बरकरार है। फिल्म की सफलता के बाद नंदा कुछ हद तक फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गयी।
फिल्म “छोटी बहन” की सफलता के बाद नंदा को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये देवानंद की फिल्म “काला बाजार और हमदोनों” बी.आर. चोपड़ा की फिल्म “कानून” खास तौर पर उल्लेखनीय है। फिल्म काला बाजार में नंदा ने एक छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। वही सुपरहिट फिल्म हमदोनों में उन्होंने देवानंद के साथ बतौर अभिनेत्री काम किया।
वर्ष 1965 नंदा के सिने करियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी “जब जब फूल खिले” प्रदर्शित हुई। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने न सिर्फ अभिनेता शशि कपूर और गीतकार आनंद बख्शी और संगीतकार कल्याण जी-आनंद जी को शोहरत की बुंलदियां पर पहुंचा दिया। बल्कि नंदा को भी ‘स्टार’ के रूप में स्थापित कर दिया। वर्ष 1965 में ही नंदा की एक और सुपरहिट फिल्म ‘गुमनाम’ भी प्रदर्शित हुई।
मनोज कुमार और नंदा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में रहस्य और रोमांस के ताने-बाने से बुनी, मधुर गीत-संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल किया गया था। वर्ष 1969 में नंदा के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म “इत्तेफाक” प्रदर्शित हुई। दिलचस्प बात है कि राजेश खन्ना और नंदा की जोड़ी वाली सस्पेंस थ्रिलर इस फिल्म में कोई गीत नहीं था, बावजूद इस फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया और उसे सुपरहिट बना दिया।
वर्ष 1982 में नंदा ने फिल्म “आहिस्ता आहिस्ता” से बतौर चरित्र अभिनेत्री फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर से वापसी की। इसके बाद उन्होंने राजकपूर की फिल्म “प्रेमरोग” और मजदूर जैसी फिल्मों में अभिनय किया। दिलचस्प बात है इन तीनों फिल्मों मे नंदा ने फिल्म अभिनेत्री पदमिनी कोल्हापुरे की मां का किरदार निभाया था।
वर्ष 1992 में नंदा ने निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई के साथ परिणय सूत्र में बंध गयी लेकिन वर्ष 1994 में मनमोहन देसाई की असमय मृत्यु से नंदा को गहरा सदमा पहुंचा। अपनी दिलकश अदाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाली नंदा 25 मार्च 2014 को इस दुनिया को अलविदा कह गयीं।
25 जनवरी को रिलीज होगी भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत ’
नई दिल्ली, पद्मावती से बदलकर पद्मावत बनी संजय लीला भंसाली की फिल्म को केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा यूए सर्टिफिकेट मिल गया है और यह अब 25 जनवरी को रिलीज होगी।
अक्षय कुमार की फिल्म पेडमैन भी इसी दौरान रिलीज हो रही है| गणतंत्र दिवस के दौरान दो बड़ी फिल्मों की बॉक्स ऑफिस में टक्कर होगी। खबरों के मुताबिक फिल्म को सेंसर बोर्ड से सशर्त सर्टीफिकेट मिल गया है और फिल्म निर्माताओं ने इसे इस महीने की 25 तारीख को रिलीज करने का फैसला लिया है।
फिल्म प्रदर्शित करने वालों को वायकॉम-18 की ओर से अनुमति मिल गई है। करीब 200 करोड़ में बनी फिल्म पद्मावत को 26 जनवरी को रिलीज करने से छुट्टियों को लाभ मिलेगा। पहले यह फिल्म ‘पद्मावती’ के नाम से 1 दिसंबर को रिलीज होने वाली थी, लेकिन करणी सेना समेत कई राजनीतिक हलकों से उठे विरोध के बाद इस फिल्म की रिलीज टल गई थी।
यह भी खबर है कि पद्मावत की रिलीज के चलते कुछ फिल्म निर्माता अपनी फिल्मों की रिलीज डेट में बदलाव कर रहे हैं। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक नीरज पांडे की फिल्म अय्यारी की रिलीज तारीख बदलकर 9 फरवरी 2018 कर दी गई है।
”सेव द गर्ल चाइल्ड” के लिए फिक्की की महिला बिजनेस शाखा निकालेगी कार रैली
देहरादून, उत्तराखंड में कम होते लिंग अनुपात और राज्यों में कम होती बालिका जन्म दर को लेकर फिक्की की वीमेन बिजनेस शाखा जन जागरूकता के लिए वुमन कार रैली का आयोजन करने जा रही है जिससे राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सेव द गर्ल चाइल्ड को एक नई उम्मीद मिलेगी।
उत्तराखंड प्रोजेक्टर की नवनिर्वाचित चेयरपर्सन शिल्पी अरोड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि, “मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित होकर उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण व बाल विकास मंत्री रेखा आर्य रैली को मुख्यमंत्री आवास से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेगी।” शिल्पी ने कहा है कि। “बेटियों से आंखें चुराने वाले दंपति को सीख देने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के प्रति जागरूकता के उद्देश्य इस रैली का आयोजन किया जा रहा है।राज्य में बिगड़ते लिंगानुपात पर भी चिंता व्यक्त की क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत राम वर्मा का रैली की अध्यक्षता करेंगे।
14 जनवरी को होने जा रही है कार्यक्रम के उद्देश्य पर बोलते हुए फ्लो के सदस्य आलोक ने कहा कि, “यह कार्य में अपना एक अलग महत्व रखती है क्योंकि भारत के कई हिस्सों व राज्यों से महिलाएं जीवन में कई क्षेत्रों में अपनी क्षमता और ड्राइव दिखाने के लिए फलों के माध्यम से आगे आ रही हैं। राज्य भर के विभिन्न शहरों और स्थानों से महिलाओं ने कार रैली के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है और यह रैली पूरे राज्य में महिला सशक्तिकरण को एक नई उम्मीद देगी साथ ही रूढ़िवादी सोच पर अंकुश लगाएगी।
अब वन कर्मियों को सिखाया जाएगा ड्रोन उड़ाना
देहरादून। अब वन कर्मियों को वन्यजीव और संपदा की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और कानूनों के प्रभावी इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वर्तमान चुनौतियों में भी वे अपना काम बेहतर ढंग से कर सकें। पिछले कुछ सालों में राज्य में लगातार वन्य जीव तस्करी बढ़ी है। इसके अलावा उनके तरीकों में भी बदलावा आया है।
यारशागंबू, लीसा, लकड़ी समेत वन्य संपदा की तस्करी के मामले भी बढ़ हैं। ऐसे में वन विभाग भी तस्करी रोकने और सुरक्षा के आधुनिक तरीके और तकनीकें इस्तेमाल कर रहा है। इसमें ड्रोन कैमरेों से जंगलों पर नजर रखने, ट्रैकिंग के लिए जीपीएस सिस्टम का उपयोग करने सहित कई आधुनिक तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा वन कानूनों में बदलाव, वर्तमान समय में उनका बेहतर इस्तेमाल, बेहतर कार्ययोजना आदि पर भी विभाग का खास फोकस है। इसके लिए सभी डिवीजनों में वन दरोगा और फारेस्ट गार्ड को इन तकनीकों और तरीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा वन्यजीव कानून का अपडेट और उनके ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल की भी जानकारी दी जा रही है।
इस दौरान पीसीसीएफ एचआर मोनीष मलिक ने बताया कि वर्तमान में ड्रोन और जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीकें वनों की सुरक्षा के लिए जरूरी हो गई हैं। निचले स्तर के कर्मचारियों को इसकी जानकारी होना जरूरी है। इसका उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वन कानूनों के प्रभावी इस्तेमाल की भी जानकारी विभाग दे रहा है।
मोबिलिटी प्लान बनने के बाद ही मेट्रो डीपीआर को स्वीकृति
देहरादून। मेट्रो रेल परियोजना को सुव्यवस्थित बनाने के लिए अभी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को स्वीकृति मिलने में थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। अब परियोजना की डीपीआर को कैबिनेट में रखने से पहले उसका कॉम्प्रेहेंसिव मोबिलिटी प्लान (व्यापक गतिशीलता योजना) तैयार किया जाएगा। मार्च माह तक प्लान तैयार हो जाएगा और फिर डीपीआर को कैबिनेट में रखा जाएगा।
उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक जितेंद्र त्यागी के मुताबिक देहरादून से हरिद्वार व ऋषिकेश तक के मेट्रोपोलिटन क्षेत्र का कॉम्प्रेहेंसिव मोबिलिटी प्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया है। इसकी जिम्मेदारी शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त उपक्रम मास ट्रांजिट कंपनी को दी गई है। कंपनी प्लान के तहत मेट्रो की संभावनाओं के साथ ही हर तरह के नागरिक यातायात की संभावनाओं का सर्वे किया जाएगा। इसमें बस, बिक्रम, ऑटो आदि भी शामिल किए गए हैं। पता लगाया जाएगा कि यातायात के लिहाज से मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में लोगों का आवागमन किस तरफ अधिक रहता है और कहां किस तरह के यातायात साधन विकसित किए जाने चाहिए। ताकि मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में यातायात का विकास संतुलित ढंग से हो सके।
पहले फेज के लिए दो माह का समय
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक त्यागी ने बताया कि पूरे मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में मोबिलिटी प्लान तैयार करने के लिए सात माह की अवधि रखी गई है। हालांकि परियोजना के पहले फेज में दून के दो मेट्रो कॉरीडोर का निर्माण किया जाना है, लिहाजा कंपनी से आग्रह किया गया है कि पहले फेज का प्लान दो माह में तैयार कर दिया जाए। इससे डीपीआर स्वीकृति को सात माह का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पहले फेज के दो कॉरीडोर की लंबाई करीब 24 किलोमीटर रखी गई है और इस पर करीब 3,372 करोड़ रुपये की लागत आएगी। वर्ष 2021-22 तक पहले फेज का निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद अगले फेज में शेष परियोजना पर काम किया जाएगा।
इस तरह आकार लेनी परियोजना
पहला फेज :आइएसबीटी-कंडोली/राजपुर, लागत 1760 करोड़ रुपये। एफआरआइ-रायपुर, लागत 1612 करोड़ रुपये।
दूसरा फेज :हरिद्वार-ऋषिकेश लागत 4740 करोड़ रुपये। आइएसबीटी-नेपाली फार्म, लागत 5026 करोड़ रुपये।
अगले वित्तीय वर्ष के लिए मांगे 250 करोड़ : उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अगले वित्तीय वर्ष मार्च 2018 से परियोजना को गति देने की तैयारी कर ली है। इसके लिए कॉर्पोरेशन ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए राज्य सरकार से करीब 250 करोड़ रुपये की मांग की है। उम्मीद की जा रही है कि डीपीआर स्वीकृति मिलने के बाद इस राशि का प्रावधान भी बजट में कर दिया जाएगा।
बीजेपी सरकार जाति व धर्म के नाम पर लोगों को बांट रही है : राहुल गांधी
नई दिल्ली, बहरीन में सरकारी मेहमान के तौर पर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वहां प्रवासी भारतीयों के ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडिया ऑरिजन (जीओपीआईओ) को संबोधित करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार लोगों को धर्म और जाति के आधार पर बांट रही है।
पार्टी का अध्यक्ष पद संभालने के बाद राहुल भारत के बाहर प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को पहली बार संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऐलान किया कि वह अगले छह माह में एक ‘नई चमकदार कांग्रेस पार्टी’ देंगे। ये संकेत देते हुए कि संगठन में बदलाव होंगे जिसमें लोग भरोसा करेंगे। देश में ‘गंभीर समस्या’ के मद्देनजर उन्होंने प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि वे इस समस्या का समाधान करने में मदद करें और इस पुनर्गठन का हिस्सा बनें।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वहां से केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘लोगों को धर्म और जाति के आधार पर बांट रही है। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार विहीन युवाओं के गुस्से को सामुदायिक नफरत में बदल रही है।’
प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए राहुल ने देश के लिए अपना दृष्टिकोण पेश करते हुए तीन प्राथमिकताओं का जिक्र किया। ये प्राथमिकताएं हैं, रोजगार, स्वास्थ्य तंत्र और एक शिक्षा प्रणाली।
उन्होंने कहा, ‘भारत आज आजाद है, लेकिन यह एक बार फिर खतरे में है। आज दो खतरे साफ हैं। सरकार रोजगार पैदा करने में विफल रही है। रोजगार नहीं होने से युवाओं में गुस्सा है। सभी धर्मों के लोगों को साथ लाने की बजाय सरकार रोजगारविहीन युवाओं के गुस्से को सामुदायिक नफरत में बदल रही है।’
पशुओं को सर्दी कर सकती है बीमार
कड़ाके की सर्दी और शीत लहर से जहां आम जनजीवन प्रभावित है, वहीं पशुओं के भी बीमार होने का खतरा कम नहीं है। अगर इस मौसम में पशुओं के रहन-सहन और आहार का ठीक तरह से इंतजाम नहीं किया गया तो पशु के स्वास्थ्य व दुग्ध उत्पादन की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
पशु चिकित्सक की सलाह है कि ठंड के मौसम में पशुपालक अपने पशुओं को संतुलित आहार दें। सीधी हवा से बचाएं।अधिक कोहरे और शीत लहर की वजह से पशुओं में निमोनिया जैसी खतरनाक बीमारी होने का अंदेशा रहता है। इस बीमारी से उचित देखभाल के जरिए ही पशुओं को बचाया जा सकता है। यह बीमारी खासकर बछड़ों पर जल्दी असर करती है।
जनवरी के महीने में कंपकंपाती ठंड से न सिर्फ इंसानों के बीमार होने का खतरा है, बल्कि पशुओं के भी बीमार होने का डर है। ऐसे में पशुपालकों को पशुओं की ज्यादा देखभाल करने की जरूरत है। हमारी जरा सी लापरवाही पशु की जान ले सकती है। ऐसे में जरूरी है कि समय समय पर पशुओं की देखरेख की जाए। पशुपालकों को चाहिए कि कोहरे में पशुओं को अंदर कमरे में बांधे और उसके दरवाजे पर कोई कपड़ा टांग दें, जिससे हवा जानवर के पास तक नहीं पहुंच पाए। पशु के बैठने की जगह रोज नया पुआल डालें। रखा हुआ पानी हरगिज न पिलाएं, हमेशा ताजा पानी पिलाएं, पशु के ऊपर किसी गर्म कपड़े का झूल सिलकर डाल दें। बछड़ों को कोहरे में बाहर न बांधे।
पशु चिकित्साधिकारी राजेश रतूड़ी कहते हैं कि, “इन दिनों में पशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। पशुओं के खान-पान व दूध निकालने का समय एक ही रखना चाहिए। इसके अलावा ठंड में पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से चलाए जाने वाले विशेष टीकाकरण अभियानों में टीके लगवाने चाहिए, पशु ठंड के मौसम में निरोग रह सके।”





























































