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तीर्थनगरी में निकली धूप, ठंड में राहत

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ऋषिकेश। तीर्थनगरी में कड़ाके की ठंड और गुनगुनी धूप के बीच शहर में शुक्रवार को लोगों ने कुछ राहत की सांस ली। हालांकि बर्फीली हवा से निजात लोगों को आज भी नहीं मिल पाया और दिनभर शीतलहर का प्रभाव बना रहा।
शुक्रवार सुबह करीब सवा दस बजे सूर्य देव के दर्शन होने से ठंड से ठिठुर रहे लोगों को कुछ राहत जरूर मिली। धूप निकलने से जहां अधिकतम तापमान में वृद्धि हुई, वहीं न्यूनतम तापमान रात की हवा के चलते गिर गया। अधिकतम तापमान 18.4 और न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस रहा। धूप के कारण दोपहर में कोहरे और पाले का असर भी शुक्रवार को कम रहा। ऑफिस पहुंचने के बाद भी कई लोग धूप में घूमते या बैठे नजर आए। साफ आसमान के चलते अधिकतम तापमान में करीब एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई। गुरुवार को जहां अधिकतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस था, तो शुक्रवार को यह बढ़कर 18.4 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। हवा का रुख बदलने से तापमान में वृद्धि हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हवा होने से वातावरण में नमी रहेगी और रात में घना कोहरा रहने के आसार हैं। पाले का असर अभी अगले तीन दिन तक कम होने के आसार नहीं हैं। कड़ाके की ठंड के चलते गर्म कपड़ों के साथ हीटर, ब्लोअर की बिक्री बढ़ी है। वहीं रेवड़ी, गजक और मूंगफली की बिक्री में भी तेजी आ रही है।

राज्यपाल से मिला कांग्रेस प्रतिनिधि मण्डल, सरकार पर लगाया आरोप

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देहरादून। उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार को कांग्रेसजनों के एक प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें नोटबंदी और जीएसटी से लोगों को हो रही दिक्कतों से सम्बन्धित ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने कि भाजपा सरकार को जन विरोधी बताते हुए कहा कि अफसल योजनाओं के कारण देश से लेकर राज्य में हाहाकार माचा हुआ है लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं है, जिस कारण उत्तराखण्ड की देवभूमि शर्मशार हो रही है।
शुक्रवार को राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र व राज्य सरकारें जन सरोकारों के प्रति संवेदनहीन हो चुकी हैं। देशभर में पहले कर्ज के बोझ से दबे किसानों ने आत्म हत्या का रास्ता अपनाया और अब नोटबंदी एवं जीएसटी की मार झेल रहा व्यापारी वर्ग भी इसी राह पर चल पड़ा है। प्रकाश पाण्डेय की मौत इसका ज्वलंत उदाहरण है। देश में लाखों लोग इस जबरन नेाटबंदी व जीएसटी के कारण बर्बाद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में लिए गए नोटबंदी और जीएसटी के अविवेकपूर्ण फैसलों के कारण पूरे देश में लम्बे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्रकाश पाण्डेय तो जीएसटी व नोटबंदी के दुष्परिणामों से प्रभावित उन लाखों लोगों के प्रतीक मात्र हैं जिनका व्यापार उजड़ गया है। यह हम सबके लिए चिन्ता और चिन्तन का विषय है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड में स्व. प्रकाश पाण्डेय जैसे निम्न मध्यम वर्ग के व्यवसायियों की संख्या में राज्य बनने के बाद भारी इजाफा हुआ है और जीएसटी तथा नोटबंदी लागू होने के साथ ही राज्य में भाजपा की सरकार सत्ताधीन होने के बाद के इस एक वर्ष की समयावधि में इन निम्न मध्यम वर्ग के व्यवसायियों का कारोबार चौतरफा प्रभावित हुआ है।
प्रीतम सिंह ने कहा कि इस प्रकार के व्यवसायियों में से अधिकांश ने राष्ट्रीयकृत बैंकों, सहकारी बैंकों या निजी सेक्टर के वित्तीय संस्थानों से मासिक किस्तों के भुगतान की शर्तों पर कर्ज लेकर अपना व्यवसाय खड़ा किया है। जीएसटी, नोटबंदी व राज्य सरकार की गलत नीतियों से इनका कारोबार नहीं चल पाने के कारण यह लोग अपने कर्जों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
परिणामस्वरूप स्व. प्रकाश पाण्डे के जैसी दिक्कतों (जिसकी वजह से उनको आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाना पड़ा) का सामना राज्य के बहुतायत व्यवसायियों को करना पड़ रहा है। कांग्रेस प्रतिनिधमण्डल ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि स्व. प्रकाश पाण्डेय के परिवार को समुचित आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ-साथ सरकार के संदेशवाहक के रूप में जिलाधिकारी ने जो आश्वासन दिया उसको पूरा करते पाण्डेय को सरकारी सेवा में लिया जाए। राज्य के निम्न मध्यम वर्ग के व्यवसायियों जिनके कारोबार जीएसटी व नोटबंदी से प्रभावित हुए हैं।

त्यागी डाईग्नोस्टिक सेन्टर पर डीआईएमसी का छापा, अल्ट्रासाउण्ड मशीन सीज

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देहरादून। शहर के धर्मपुर चौक स्थित त्यागी डाईग्नोस्टिक सेन्टर पर हरियाणा के अम्बाला जनपद तथा देहरादून जिले की डीआईएमसी (जिला निरीक्षण निगरानी समिति) ने गुरुवार को औचक छापामारी की। कार्रवाई के दौरान केन्द्र संचालक डाॅ. प्रमोद कुमार त्यागी को अनाधिकृत अल्ट्रासाउण्ड मशीन का संचालन करते हुए उप जिलाधिकारी सदर प्रत्युष सिंह व संयुक्त टीम ने मौके पर रंगे हाथ पकड़ा। अनाधिकृत अल्ट्रासाउण्ड मशीन तथा पूर्व में सीज की गयी पोर्टेबल मशीन दोनो मशीनों को सीज कर दिया।
उप जिलाधिकारी सदर प्रत्युष सिंह ने बताया कि अम्बाला की डीआईएमसी टीम ने आराघर स्थित डाईग्नोस्टिक सेन्टर पर केन्द्र संचालक डाॅ. प्रमोद त्यागी द्वारा अनाधिकृत अल्ट्रासाउण्ड मशीन से कार्य किये जाने की सूचना दी। जिस पर दोनो टीमों द्वारा संयुक्त रूप से औचक छापेमारी की गयी । उन्होंने कहा कि छापामारी के दौरान लेनदेन में उपयोग की गयी 25 हजार की धनराशि भी जब्त की गयी तथा इस दौरान डील करने वाले अम्बाला निवासी दो दलाल करणपाल पुत्र राम स्वरूप, और हरीश वर्मा पुत्र ज्ञान चन्द तथा एक दलाल अल्मोड़ा के चैसली गावं निवासी राजेन्द्र सिंह पुत्र गोधन सिंह को भी केन्द्र पर डील करते हुए दबोच गया।
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी वी.एस जंगपांगी ने बतया कि केन्द्र के संचालक तथा डील करने वाले व्यक्तियों पर पीसी पीएनडीटी अधिनियम के तहत कार्यवाही की जा रही है तथा केन्द्र पर दोनो अल्ट्रासाउण्ड मशीनों को सीज कर दिया गया है। वहीं छापेमारी के दौरान पीसीपीएनडीटी के तहत गठित हरियाणा के अम्बाला जनपद के डाॅ बीबी लाला, डाॅ विजय, डाॅ मंदीप सचदेवा सहित हरियाणा पुलिस की पांच सदस्य टीम तथा देहरादून डीआई एमसी की सदस्य डाॅ ममता बहुगुणा सहित स्थानीय पुलिस के अधिकारी एवं जवान उपस्थित थे।

रेरा ने पांच बिल्डरों के प्रोजेक्ट किए निरस्त

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देहरादून। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में पंजीकरण कराने को लेकर सुस्त बने पांच बिल्डरों/प्रॉपर्टी डीलरों के प्रोजेक्ट निरस्त कर दिए हैं। रेरा की प्रोजेक्ट निरस्त करने की दिशा में प्रदेश में यह पहली कार्रवाई है। अब इन प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट या प्लॉट की खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकेगी। ये सभी प्रोजेक्ट ऊधमसिंहनगर के हैं।

रेरा के सचिवालय के रूप में काम कर रहे उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) के कार्यक्रम प्रबंधक कैलाश पांडे के मुताबिक ”14 बिल्डर/प्रॉपर्टी डीलर ऐसे थे, जिन्होंने रेरा में पंजीकरण के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन पर्याप्त दस्तावेज जमा नहीं कराए गए थे। इन्हें समुचित दस्तावेज जारी कराने के नोटिस जारी किए गए थे। दो नोटिस जारी करने के बाद एक और अंतिम नोटिस भेजा गया था। नोटिस मिलने पर नौ प्रोजेक्ट संचालकों ने जवाब दाखिल कर दिया, जबकि पांच प्रोजेक्ट के बारे में कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद रेरा के नियामक प्राधिकारी व सचिव आवास अमित नेगी ने लापरवाह बिल्डरों व प्रॉपर्टी डीलरों के प्रोजेक्ट का नक्शा निरस्त कर दिया गया। ”

इनके प्रोजेक्ट निरस्त

  • लाल जी गोपीनाथ जी इंफ्राटेक प्रा.लि.,
  • मनोज चंद्र पनेरू (दो प्रोजेक्ट),
  • विजय भूषण गर्ग,
  • मुखत्यार सिंह। 

अगले चार महीने में 179 आटोमेटिक वेदर स्टेशन होंगे स्थापित

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अगले चार महीने में 179 आटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित हो जाएंगे। डॉप्लर रडार के लिए मसूरी, मुक्तेश्वर और पिथौरागढ़ में स्थल का चयन कर लिया गया है। स्थापित करने की प्रक्रिया 18 महीने में पूरी हो जाएगी, पहला डॉप्लर रडार मसूरी में लगाया जाएगा। यह जानकारी मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सचिवालय में भारतीय मौसम विभाग के उप महानिदेशक डॉ.डी.प्रधान के साथ विचार विमर्श के दौरान दी।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि यात्रियों की सुविधा के लिए उन्हें मौसम की रियल टाइम जानकारी दी जाय, कहा कि मानसून से पहले आटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित कर दिए जाए। एसएमएस के अलावा यात्रा मार्ग पर जगह जगह डिस्प्ले बोर्ड भी लगाया जाए। बताया गया कि आटोमेटिक वेदर स्टेशन लगने से रियल टाइम पूर्वानुमान करने में सुविधा होगी।
राज्य के हर ब्लॉक में स्टेशन की स्थापना होगी। इससे बाढ़, बारिश, हिमस्खलन, बादल फटने, तूफान, ओलावृष्टि की जानकारी मिल सकेगी। पर्यटन, खेती, बागवानी, आपदा से बचाव में मदद मिलेगी। स्टेशन के संचालन और तकनीकी सपोर्ट के लिए भारतीय मौसम विभाग से एमओयू किया गया है। स्टेशन का डेटा भारतीय मौसम विभाग के नेटवर्क से जुड़ जाएगा। हर 15 मिनट में मौसम के पूर्वानुमान का रियल टाइम डेटा मिलता रहेगा, बताया गया कि 7 आटोमेटिक वेदर स्टेशन को वीसैट और अन्य को जीपीआरएस से चलाया जाएगा। बताया गया कि इसमें 28 ऑटो रेन गेज, 25 एडवांस सरफेस ऑब्जरवेशन, 16 ऑटो स्नो गेज भी शामिल है।

निकाय चुनाव के लिए दावेदारों की परिक्रमा शुरु

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रुद्रपुर- निकाय चुनावों की सरगर्मियां तेज होते ही नेताओं की परिक्रमा करने वालों की होड लग गयी है, नगर पालिका नगर पंचायत सहित मेयर के पदों को लेकर भाजपा कांग्रेस के दावेदार अपने अपने राजनैतिक आकाओं की परिक्रमा में जुट गये है, जनपद उधमसिंहनगर की बात करें तो यहां दो मेयर की सीटों पर घमासान मचा है, दावेदारों की संख्या इतनी है कि संगठन को भी असमंजस में खडा कर दिया है वहीं कांग्रेस के अनुसार जीताउ कन्डीडेट पर ही दाव लगाना बेहतर होगा।

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भाजपा में जहां मेयर की काशीपुर और रुद्रपुर सीट पर दावेदारों की फेहरिस्त काफी लम्बी है वहीं दावेदार अपने राजनैतिक आकाओं के संरक्षण में अपनी दावेदारी मजबूत मान रहे है जबकि संगठन का रुख फिलहाल साफ नहीं है, वहीं काशीपुर की बात करें तो यहां मेयर की सीट भाजपा की झोली मे जरुर में मगर इस बार किस पर दांव खेलें ये पेचीदा होगा, वहीं कांग्रेस के पास पिलहाल उम्मीदवारों की सूची तो लम्बी है मगर जीताउ पर दांव खेलने के मूड में लग रही कांग्रेस किसी भी करवट बैठ सकती है।

रुद्रपुर के मेयर प्रत्याशी का चुनाव भी इससे अछूता नहीं है। यहां टिकट मांगने वालों की लंबी फेहरिस्त है। टिकट के दावेदारों में सत्ता व संगठन में भी दूरी होने की चर्चाएं हैं।

सूबे की कुल मेयर की आठ सीटे हैं। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, कोटद्वार, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर व रुड़की।  जिसमें सभी सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी के रूप में कई कई दावेदार देखे जा रहे हैं। हालांकि कांग्रेस में अभी मेयर प्रत्याशी बनने को लेकर खास उछल कूद नहीं है, लेकिन भाजपा में प्रत्याशियों के दावेदारों की संख्या में खासा इजाफा है। जाहिर है कि भाजपा में टिकट वितरण के बाद उतना ही विरोध और असंतोष होगा। लगभग सभी स्थानों पर दावेदारों की सूची काफी लंबी है। हालांकि इन नामों पर भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी यों से बात की जा रही है तो वे लोग कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। संगठन जिसको टिकट देगा, वही पार्टी का प्रत्याशी होगा।

रुद्रपुर मेयर की सीट पहली बार में आरक्षित की गई थी। जिससे अनुसूचित जाति की मेयर सोनी कोली ने शहर में भाजपा का परचम फहराया था। हालांकि राजनीतिक गलियारों से मिल रही खबरों पर विश्वास करें तो इस बार रुद्रपुर की सीट सामान्य अनारक्षित हो रही है। जिसके चलते यहां अनेक दावेदार हो गए हैं। यहां तो कई को मेयर पद का प्रत्याशी कहकर लॉलीपाप थमाने का काम किया गया है। जिसके चलते ऐसे कथित प्रत्याशी पद के दावेदारों ने पूरे शहर में जगह जगह पोस्टर और बैनर लगाकर दावेदारी पुख्ता करने में जुटे हैं।

केक की मिठास से लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाती हल्द्वानी की श्रुति

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उत्तराखंड राज्य में हो रहे पलायन को रोकने के लिए हर कोई प्रयासरत है।जहां एक तरफ सभी राज्य से हो रहे पलायन को दिखा रहा वहीं कुछ युवा ऐसे भी है जो रिवर्स पलायन कर रहे और अपनी जन्मभूमि को अपनी कर्मभूमि बना रहे हैं।इस कहानी की मुख्य भूमिका में हैं श्रुति जिन्होंने देश और विदेश से ट्रेनिंग लेने के बाद अपनी केक बनाने की कला को अपने शहर में निखारने का प्रण लिया है।

27 साल की युवती है श्रुति माहेश्वरी हल्द्वानी की रहने वाली हैं। प्रारंभिक शिक्षा हल्द्वानी में करने के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से बीबीए की डिग्री ली। अपनी कला को तराशने के लिए लंडन के कॉलेज ली-कार्डन बिल्यु से पेटिज्री में डिप्लोमा लिया।इसके बाद श्रुति ने ओबरॉय ग्रुप के ट्राइडेंट होटल मुंबई में कुछ समय काम किया, लेकिन अपनी जिंदगी बदलने वाले फैसले में श्रुति ने अपनी जन्मभूमि यानि की उत्तराखंड को चुना। इस समय  हल्द्वानी में लोगों की पसंदीदा बेकरी है ‘केक स्मिथ बाई श्रुति‘।अपने केक की मिठास के माध्यम से श्रुति ने बहुत से लोगों के दिल जीते हैं और अब श्रुति केक स्मिथ के माध्यम से लोगों में मशहूर हैं।

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श्रुति से टीम न्यूज़पोस्ट की बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने लंडन से डिप्लोमा करने के बाद अपनी करियर की शुरुआत मुंबई के ट्राइडेंट होटल से की जहां काम करने के दौरान उन्होंने अपने ग्रुप के साथ काम करते हुए बहुत से लोगों और सेलिब्रिटी जैसे की सुष्मिता सेन के लिए भी केक बनाया है।श्रुति कहती है कि, “मेरे परिवार ने मुझे हमेशा मेरे काम में सहयोग दिया हैं। इसके अलावा मेरे दो गुरु शेफ ललित मनराल और शेफ एडेलबर्ट एंथोनी डिसूज़ा से भी मैने बहुत कुछ सीखा है।”श्रुति कहती हैं कि, “वैसे तो वह जो कर रही हैं उससे बहुत खुश हैं लेकिन भविष्य में वह डायबिटिज के मरीजों के लिए शुगरलेस केक बनाा चाहती हैं, मैने बहुत से शुगर के मरीज़ देखें हैं जो केक और बेकरी के प्रोडक्ट खाने की इच्छा तो रखते हैं लेकिन अपनी बीमारी की वजह से खा नहीं पाते।” श्रुति कहती हैं ऐसे मरीज़ो को देखकर मुझे शुगरलेस केक बनाने की प्रेरणा मिली है।यह केक शहद और खजूर के शुगर से मिलकर बनेगा जो डायबिटिक मरीज़ बिना किसी डर के खा सकेंगें। श्रुति कहती हैं कि, “मैं चाहती हूं कि मेरा केक ना केवल हल्द्वानी बल्कि आसपास की जगहों तक पहुंचे और लोग बेझिझक फ्रेश और स्वास्थवर्धक केक खा सकें।”

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ऐसे बहुत कम लोग है जो दूसरों के बारे में सोचते हैं लेकिन आपको बतादें कि श्रुति ने नए साल यानि की 1 जनवरी को एनएबी नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड संस्था के बच्चों के लिए 100 चॉकलेट चिप मफीन केक बनाये  और उनके पास लेकर गई थीं।श्रुति कहती हैं कि, “उन बच्चो के चेहरे पह वह मुस्कान मेरे लिए मेरे काम की सराहना थी और मुझे यह महसूस करा रही थीं कि मैं सच में एक अलग और शकुन देने वाले प्रोफेशन में हूं।” श्रुति कहती हैं कि आने वाले समय में वह डायबटिज के मरीजों के चेहरों पर भी केक खाते समय यही मुस्कान देखना चाहती हैं।

श्रुति जैसे लोग कम हैं लेकिन लंडने से डिप्लोमा करने और मुंबई में नौकरी करने के बाद भी श्रुति का हल्द्वानी शहर में अपना काम बढ़ाना इस बात का प्रतीक है कि अभी भी बहुत से लोग राज्य में हो रहे पलायन को पीठ दिखाते हुए रिवर्स पलायन का संदेश दे रहै हैं।

श्रुति को टीम न्यूजपोस्ट की तरफ से उनके काम के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।

आबकारी विभाग में उलटी गंगा, अपर आयुक्त दौड़ेंगे फील्ड में

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देहरादून। किसी विभाग में शायद ही ऐसा उदाहरण देखने को मिला हो, जिसे आबकारी विभाग ने अंजाम दिया है। संयुक्त आयुक्त व उपायुक्त के जिन पदों का सृजन फील्ड के लिए किया था, वह ढाई से करीब साढ़े तीन साल के अंतराल से मुख्यालय में जमे हैं और अपर आयुक्त का जो पद मुख्यालय के लिए बना है, उन्हें फील्ड में उतारने के फरमान जारी किए गए हैं। शासन स्तर पर लिए गए इस निर्णय से आबकारी आयुक्त वी षणमुगम सहमत नहीं थे और इस असंतुष्टि के कुछ दिन बाद ही उन्होंने इस पद को छोडऩे की इच्छा जाहिर कर दी। उन्होंने लिखित रूप से अपनी इच्छा के बारे में कार्मिक विभाग को भी अवगत करा दिया है। आयुक्त की इस ‘इच्छा’ को लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं।

सितंबर 2014 में संयुक्त आयुक्त के दो पद गढ़वाल व कुमाऊं मंडल के लिए स्वीकृत किए गए थे। इसी तरह मई 2015 में दोनों मंडल के लिए दो उपायुक्त के पद भी सृजित किए गए थे। जिसका सीधा आशय यह था कि जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी मिले, वह अपने-अपने कार्य क्षेत्र में राजस्व बढ़ाने, शराब तस्करी रोकने, अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने, नियमित जांच करने की व्यवस्था में अपना भरपूर योगदान दे सकें। कागजों में तो यह पद सृजित भी कर दिए गए है और अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी भी दे दी गई। यह बात और है कि इन पदों को सृजित करने का मकसद आज तक पूरा नहीं हो पाया। हालांकि आयुक्त के रूप में वी षणमुगम के चार्ज संभालने के बाद से ही व्यवस्था परिवर्तन होने लगी थी। उनकी निगाह संयुक्त आयुक्त व उपायुक्त के पद सृजन पर भी पड़ी और इससे पहले कि वह कुछ निर्णय कर पाते, शासन से इससे एक कदम आगे बढ़कर जूनियर अधिकारियों की जगह वरिष्ठतम रैंक के अधिकारियों को फील्ड में उतारने का तानाबाना बुन डाला।
अपर आयुक्त को गढ़वाल व कुमाऊं मंडल की जिम्मेदारी संभालने के आदेश में यह लिखा गया है कि अग्रिम आदेश तक दोनों अपर आयुक्त संबंधित मंडल से ही काम देखेंगे। जबकि आबकारी आयुक्त वी षणमुगम इससे असहमत थे, उनका यह मानना था कि अपर आयुक्त नोडल के रूप में यह जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। ताकि जरूरत पडऩे पर वह अपने मंडल में बैठक कर सकें या विभिन्न दौरों पर जा सकें। न कि स्थानांतरण के रूप में उन्हें यह जिम्मेदारी दी जाए।
आबकारी अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि ”अपर आयुक्त के मुख्यालय के जिन दो पदों को मंडल में उतारने के आदेश किए गए हैं, उन पर पुनर्विचार के लिए आबकारी मंत्री से विचार-विमर्श किया जाएगा। जहां तक बात आबकारी आयुक्त के अंसुष्ट होने के चलते पद छोडऩे की इच्छा जाहिर करने की है, वह बात मुझ तक भी पहुंची थी। इस पर मैने उनसे बात की तो उन्होंने काम की अधिकता के चलते यह निर्णय लेने की बात कही।”

योगी के खौफ से बचने को बदमाश ने किया उत्तराखंड का रुख

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हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का खौफ उत्तराखंड में खासतौर पर यूपी की सीमा से सटे क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। योगी के खौफ से परेशान अपराधी बचने के लिए उत्तराखंड का रुख करने लगे हैं।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ ने जब से संभाली है, अपराधियों के हौसले पस्त होने लगे हैं। प्रतिदिन कोई न कोई मुठभेड़ पुलिस की अपराधियों के साथ हो रही है। बदमाश पकड़े भी जा रहे हैं और मारे भी जा रहे हैं। इसके चलते अब अपराधी उत्तर प्रदेश छोड़ उत्तराखण्ड का रुख करने लगे हैं। यह खुलासा मंगलवार को लक्सर क्षेत्र में पुलिस व बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद पकड़े गए दो बदमाशों ने किया है।

बदमाशों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उत्तर प्रदेश में योगी के खौफ से बचने के लिए ही उन्होंने उत्तराखण्ड का रुख किया। योगी की बदमाशों में पर सख्ती के चलते पुलिस का शिकंजा बदमाशों पर कसता जा रहा है। यही कारण है कि उन्होंने लूटपाट के लिए उत्तराखण्ड का रुख किया। पकड़े गए बदमाशों के इस खुलासे ने पुलिस को और सतर्क रहने की हिदायत दी है। इस खुलासे के बाद उत्तराखण्ड पुलिस के लिए चुनौतियां और बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश के बदमाशों को रोकने के लिए उत्तराखण्ड पुलिस को अधिक सतर्क रहने के साथ अपने सूचना तंत्र को और अधिक मजबूत करना पड़ेगा। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में पैनी नजर रखनी पड़ेगी, जिससे उत्तराखण्ड जैसे शांत प्रदेश में बदमाश अशांति न फैला सकें।

 

फरियादी की मौत पर मजिस्ट्रीयल जांच शुरू, एडीएम ने भाजपा मुख्यालय में की पूछताछ

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देहरादून। हल्द्धानी निवासी प्रकाश पाण्डेय की मौत को लेकर मजिस्ट्रीयल जांच शुरू हो गई है। गुरुवार को अपर जिलाधिकारी बीर सिंह बुदियाल ने भाजपा मुख्यालय पहुंचकर पूछताछ की।
ज्ञात रहे कि भाजपा मुख्यालय में शनिवार को लगे कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के जनता दरबार में पाण्डेय ने खुद को जहर खाकर आया हुआ बतया था। उसके बाद उसे दून चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां से उसे मैक्स अस्पताल भेज दिया गया। वहां उपचार के दौरान 09 जनवरी को पांडेय की मौत हो गई। इस संबंध में घटना से सम्बन्धित कारणों की मजिस्ट्रीयल जांच के लिए जिलाधिकारी द्वारा अपर जिलाधिकारी बीर सिंह बुदियाल को नामित किया गया है।
बुदियाल ने गुरुवार को बलबीर रोड स्थित भाजपा मुख्यालय से जांच की शुरुआत की। उन्होंने इसी क्रम में भाजपा मुख्यालय प्रेस कांफ्रेंस हाल और परिसर में भी जांच-पड़ताल करते हुए मुख्यालय में भाजपा सचिव पुष्कर सिंह काला से स्व. प्रकाश पाण्डेय से सम्बन्धित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की। घटना के विभिन्न पहलुओं के तहत एडीएम जांच कर रहे हैं।