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गंगा घाटों के निर्माण का जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण

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हरिद्वार। जिलाधिकारी दीपक रावत ने भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत नमामि गंगे योजना में चण्डीघाट के नीचे बनाये जा रहे गंगा घाटों का शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण किया। योजना के अंतर्गत हरिद्वार जनपद में चण्डीघाट सहित चार स्थानों पर यह कार्य चल रहे हैं। इनमें श्यामपुर, भोगपुर, बालावाली शामिल हैं।

जिलाधिकारी ने वाप्कोस लिमिटेड द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रोजेक्ट मैनेजर तथा साइट इंजीनियर से ली। योजना कार्यों को कर रहे इंजीनियरों ने प्लान नक्शे की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी को बताया कि योजना के तहत कुल 41,872 स्क्वायर मीटर के एरिया पर घाट का निर्माण किया जा रहा है। इसमें सामान्य स्नान घाट के अलावा महिलाओं के लिए स्नान घाट तथा वस्त्र बदलने के कक्ष, अंत्येष्टी घाट व शौचालय, जिनकी सप्लाई के लिए एसटीपी बनाए जाएंगे। लगभग 75 वाहन क्षमता की कार व बस पार्किंग सहित हरियाला के लिए निर्धारित एरिया में हरित प्रांगण बनाया जाएगा। अंत्येष्टी के लिए आने वाले यात्रियों के लिए पूजा करने व बैठने के लिए पक्के शेड भी बनाये जा रहे हैं।
योजना प्रबंधक ने जिलाधिकारी रावत को बताया कि हरिद्वार चण्डीघाट के नीचे बन रहे घाटों के निर्माण कार्य 36 माह में पूर्ण करने की अवधि भारत सरकार द्वार निर्धारित की गई है। कार्य दिसम्बर तक समाप्त कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यों की अनुमानित लागत 50 करोड़ है, जिसमें से 12 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता तथा निर्माण में वैज्ञानिक तथ्यों की परख समय-समय पर सिंचाई तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाती रहेगी। अधिकारी इस बात पर विशेष रूप से माॅनिटरिंग करेंगे कि घाट निर्माण से भविष्य में पुराने पुल को कोई क्षति तथा आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हो सके। 

आधा दर्जन ट्रेनें दून पहुंची लेट, दून-हावड़ा रिशेड्यूल

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देहरादून। मैदानी इलाकों में घने कोहरा पड़ने के कारण शुक्रवार को लंबी दूरी की आधा दर्जन गाड़ियां अपने तय समय से विलंब से पहुंची, जिस कारण देहरादून से चलने वाली दून हावड़ा को रिशेड्यूल किया गया है। ट्रेनों के लेट-लतीफी के चलते यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

हावड़ा-दून एक्सप्रेस का देहरादून आने का समय 7:35 मिनट है जबकि वह लगभग 11 घंटे की विलंब से दून पहुंची। जिसके करण यहां से जाने वाली दून-हावड़ा को रिशेड्यूल किया गया है जो अब रात 22:55 मिनट की देरी से रवाना होगी। वहीं, इलाहाबाद से देहरादून आने वाली लिंक एक्सप्रेस 17 घंटे लेट चल रही है जिसके चलते देहरादून-काठगोदाम का जाने का समय अभी तय नहीं किया गया।
इसके अलावा, काठगोदाम-देहरादून एक्सप्रेस अपने तय समय से एक घंटे की विलंब से दून पहुंची, जबकि दिल्ली सराय रोहिला से देहरादून आने वाली मसूरी एक्सप्रेस और दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस, नंदा देसी एक्सप्रेस 30-30 मिनट की देरी से दून पहुंची। काठगोदाम से देहरादून आने वली काठगोदाम एक्स्रपेस एक घंटा लेट से आई। ट्रेनें देरी से चलने के कारण यात्रियों व उनके परिजनों को इंतजार में दो चार होना पड़ा रहा है।
स्टेशन अधीक्षक सीताराम सोनकर के मुताबिक, मैदानी इलाकों में घना कोहरा पड़ने के कारण लंबी दूरी की कई गाड़ियां अपने तय समय से विलंब चल रही है। इस कारण देहरादून से दून हावड़ा को रिशेड्यूल किया गया है। जबकि, लिंक एक्सप्रेस अभी चल रही है। इस कारण इसका जाने का समय तय नहीं हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से सावधानी बरती जा रही है। अन्य गाड़ियों को देहरादून से समय पर रवाना किया जा रहा है। 

बच्चों में डिप्रेशन से बचाव के लिये उठाये ये पांच कदम

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हमारे समाज में आज भी मानसिक बिमारियों को तिरसकार से देखा जाता है। लेकिन अगर बच्चों और युवाओं में होने वाले डिप्रेशन के आंकड़ों पर गौर करें तो ये हैरान कर देते हैं। अधिक्तर माता पिता के लिये मानना बेहद मुशकिल होता है कि उनके बच्चे को मानसिक बीमारी है। वो इस तरह के हालातो पर हंसते हैं और कहते हैं कि ये सब उम्र के साथ खुद ब खुद ठीक हो जाता है। पर क्या सच में ये सोच सही है? कया सच में बढ़ती उम्र के साथ साथ डिप्रेशन के लक्ष्ण खुद ब खुद कम हो जाते हैं? क्या समय रहते बच्चों में डिप्रेशन के लक्ष्णों की पहचान और इलाज ज़रूरी नही है?

आखिर कया कहते हैं बच्चों में डिप्रेशन के आंकड़े?  

डिप्रेशन किस तरह हमारी सेहत के लिये खतरनाक है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हमारी युवा पीढ़ी में करीब 1 प्रतिशत इसका शिकार हैं। युवाओं में आत्महत्या की प्रवृति को भी डिप्रेशन बढ़ावा देता है। आंकड़े बताते हैं कि डिप्रेशन के शिकार लोगों में से 15 प्रतिशत आत्महत्या करने की कोशिश करते हैं। पिछले कुछ दशकों में युवाओं में आत्महत्या की दर कई गुना बढ़ गई है। ये चौकाने वाले आंकड़े इस ओर साफ इशारा करते हैं कि डिप्रेशन के लक्ष्णों की पहचान और उनका सही तरह से इलाज कितना ज़रूरी हो गया है।

बच्चों और युवाओं में डिप्रेशन की शुरूआत

बच्चों में डिप्रेशन की पहचान माता पिता आसानी से कर सकते हैं अगर वो अपने बच्चों के बरताव में इन बातों का ध्यान रखें।:

  • बच्चा अगर लगातार उदास रहता है
  • उसका कुछ भी काम करने में मन नहीं लगता
  • उसे जो काम पहले पसंद थे अब वो उनमे रुचि नही लेता
  • पढ़ाई में मन न लगना और ध्यान न दे पाना
  • खेलने और दोस्तों में रुचि कम होना
  • ज्यादातर समय चिढ़चिढ़ा रहना
  • लड़ाई झगड़ों में पड़ते रहना
  • काम करने में आलस दिखाना
  • आसानी से थक जाना
  • भूख और नींद के पैटर्न में बदलाव
  • अपने बारे में बेचारेपन का एहसास करना
  • अपने को नुकसान पहुंचाने की बाते करना

यदी इनमें से कोई भी लक्ष्ण दो हफ्ते से ज्यादा दिखे तो ये डिप्रेशन की तरफ इशारा करता है। इन लक्ष्णों की जानकारी जरूरी है ताकि डिप्रेशन को शुरू में ही पहचान लिया जाये और उसका इलाज किया जा सके। किसी भी अन्य बीमारी की तरह डिप्रेशन का इलाज जितनी देर से होगा उतने ही उसके लक्ष्णों की तीव्रता बढ़ती जायेगी।

अगर आपके बच्चे में डिप्रेशन के लक्ष्ण हैं तो क्या करें?

अगर आपके बच्चे में डिप्रेशन के लक्ष्ण दिखे तो उसे नज़रअंदाज न करें। जल्द से जल्द हालात पर काबू इन छोटी छोटी बातों का पालन करके करें:

  • अपने बच्चे पर और बेहतर परफॉर्म करने का दबाव न डालें। इससे बच्चे में तनाव और अपने प्रति हीन भावना पैदा होगी। इसके बदले अपने बच्चे का साथ दे और हौंसला बढ़ाये। अगर कोई बच्चों से अन्यथा सवाल करें तो बच्चों का बचाव करें।
  • अपने बच्चों की बातों को पूरे ध्यान से सुने। आपकी की ही तरह बच्चे भी इस तरह की बीमारी से अंजान हैं और अपने अंदर हो रहे बदलावों को समझ नहीं पाते हैं। ये उनके लिये काफी परेशान करने वाली बात हो सकती है जो आने वाले समय में और तनाव को जन्म देती है।
  • अपने बच्चों को ज्यादा बेहतर परफॉर्म कराने के लिये उनकी तुलना और बच्चों से कभी न करें। ऐसा करने से बच्चों में और ज्यादा नकरात्मक भावना घर करने लगती है।
  • ध्यान रखे कि आपका बच्चा अपने को नुकसान पहुंचाने के बारे में बात न कर रहा हो। ऐसा होने पर बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताये जिससे बच्चे अपनी मन की बात आप से कर सकेँ।
  • डिप्रेशन के इलाज के लिये डॉक्टर की मदद लेने से न हिचकिचाये। सही इलाज से आपके बच्चे के इलाज में तेज़ी आयेगी। इसके लिये मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक की मदद से आप अपने बच्चे के लिये इस लड़ाई को आसान बना सकते हैं।

डिप्रेशन का इलाज दवाईयों और काउंसलिंग के ज़रिये आसानी से किया जा सकता है। पर ज़रूरत है कि हम अभिभावकों के तौर पर इसे पहचाने और स्वीकार करें कि ये किसी भी अन्य शारीरिक बीमारी की ही तरह है और इसे शर्म और तिरस्कार से न जोड़ें।

Dr kamna

(डॉ कामना छिब्बर एक मनोचिकित्सक हैं और फोरटिस हेल्थकेयर के मनोरोग विभाग की निदेशक हैं। डॉ छिब्बर पिछले दस सालों से मनोरोग के क्षेत्र में काम कर रही हैं। इनसे संपर्क करने के लिये [email protected] पर लिखें )

क्षेत्र की सबसे वृद्ध महिला को किया गया सम्मानित

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गोपेश्वर। चमोली जिले के विकासखंड दशोली के मंडल में शुक्रवार को राइका बैरागना का एनएसएस शिविर आयोजित किया गया। शिविर में खंड शिक्षा अधिकारी दर्शन लाल टम्टा ने क्षेत्र की सबसे वृद्ध 75 वर्षीय महिला कमला देवी को शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया। साथ ही शिविर के बेस्ट स्वयं सेवक के रूप में अंजली व संदीप को भी सम्मानित किया गया।
आयोजित एनएसएस शिविर के बौद्धिक कार्यक्रम में खंड शिक्षा अधिकारी टम्टा ने युवाओं से देश का एक अच्छा नागरिक बनने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से ही युवाओं के अंदर समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलती है। शिविर के दौरान किए गए कार्यों से युवाओं के मन में उत्साह तो भरता ही है साथ ही वह स्वयं का मूल्यांकन भी कर सकता है।

मौसम की बेरुखी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

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विकासनगर। मौसम की बेरुखी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ना तय है। जनवरी का पहला पखवाड़ा बीतने को है बावजूद अब तक क्षेत्र में बर्फबारी नहीं हो सकी है। ऐसे में शीतोष्ण फलों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है। क्षेत्र के करीब 800 हेक्टेयर भू-भाग में शीतोष्ण फल खासकर सेब की पैदावार की जाती है। 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच होने वाली बर्फबारी इस फसल के लिए खासा मुफीद मानी जाती है। लेकिन इस साल अब तक बर्फबारी नहीं हुई है। जिससे सेब के बागों के ‌मालिक मायूस नजर आने लगे हैं। विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि यदि जल्द क्षेत्र में बर्फबारी नहीं हुई तो उत्पादन में 30-40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

यहां होती है सेब की बंपर पैदावार
कथियान, डांगूठा, भटाड़, छजाड़, रायगी, ऐठाड़, पुरटाड़, भूट, फनार, कुल्हा, बागी, बास्तिल, ठारठा, पिंगुवा, बुल्हाड़, बायला समेत कई गांव में सेब की बंपर पैदावार होती है। वहीं, बारिश न होने से आड़ू, नाशपाती, खुमानी, पुलम, बादाम आदि की खेती भी प्रभावित हो रही है।
सेब की ये प्रजातियां होती है क्षेत्र में
क्षेत्र में रॉयल डिलिसियस, गोल्डन रेड, स्पर्श, रेड चीफ, सुपर स्पर्श, गोल्डन स्पर्श, आर्गेन स्पर्श, रेड चीफ स्पर्श आदि प्रजाति होती है। क्षेत्र में करीब 800 हेक्टेयर में सेब के बागान हैं। यहां के सेब की बाजारों में भारी डिमांड रहती है।
एक पेड़ पर 1500 रुपये तक खर्च
बागवान तुलाराम शर्मा, विरेंद्र शर्मा, मातवर सिंह का कहना है कि एक पेड़ की देखरेख पर सालाना 1000 से 1500 रुपये खर्च होते हें। ऐसे में इस साल ये लागत भी निकालना मुश्किल लग रहा है।
क्या कहते है जानकार
उद्यान प्रभारी त्यूनी आरपी जसोला का कहना है कि बर्फबारी के चलते लंबे समय तक जमीन में नमी का संरक्षण रहता है। जिसका फायदा फलों और फूलों के उत्पादन में होता है। साथ ही कीटों और बीमारियों के पनपने की आशंका कम रहती है। खुमानी, नाशपाती, अखरोट, बादाम के लिए भी बर्फबारी लाभदायक होती है। बर्फबारी ‌चिलिंग की आवश्यकताओं को भी पूरा करती है। लेकिन इस साल मौसम के बदले मिजाज के बीच फलों के उत्पादन पर प्र्तिकूल असर पड़ेगा।

आयकर दाताओं की संख्या छह लाख पार

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देहरादून। कर सुधार की दिशा में नोटबंदी व जीएसटी के रूप में केंद्र सरकार ने जो क्रांतिकारी कदम उठाए उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। उत्तराखंड में वित्तीय वर्ष 2017-18 में दिसंबर माह तक 90 हजार 766 नए आयकरदाता सामने आए हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कुल करदाताओं की संख्या छह लाख आठ हजार 706 हो गई है।

मुख्य आयकर आयुक्त पीके गुप्ता के मुताबिक उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में इस वित्तीय वर्ष 90 हजार से अधिक आयकरदाता बढऩा बड़ी बात है। आयकर विभाग के आउटरीच प्रोग्राम (बाह्यय संपर्क कार्यक्रम) से यह संभव हो पाया है। इसके तहत आयकर कार्मिक कार्यालयों से बाहर निकलकर करदाताओं के बीच जाकर उनके साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं। अब तक करीब 20 आउटरीच कार्यक्रम गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में आयोजित किए जा चुके हैं। जिसमें से आठ कार्यक्रमों में मुख्य आयकर आयुक्त पीके गुप्ता स्वयं उपस्थित रहे। इसके अलावा मुख्य आयकर आयुक्त गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश से करीब 11 हजार करोड़ रुपये का आयकर अर्जित करने का लक्ष्य रखा गया है और दिसंबर माह तक सात हजार 529 करोड़ रुपये आयकर के रूप में अर्जित किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा कुल लक्ष्य का 68.44 फीसद है और अभी वित्तीय वर्ष समाप्ति को करीब तीन माह का समय है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आयकर विभाग इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगा।
एडवांस टैक्स के रूप में प्राप्त होता है आयकर
वैसे तो आयकर जमा करने की अंतिम सीमा वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर होती है, लेकिन एकमुश्त की जगह समय-समय पर आयकर मिलता रहे, इसके लिए एडवांस टैक्स जमा करने की व्यवस्था की जाती है। यह टैक्स क्वार्टरली रूप में 15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर व 15 मार्च तक जमा कराना होता है। अंतिम क्वार्टर का टैक्स जुर्माने के साथ 31 मार्च तक जमा कराया जा सकता है। इसी तरह विभिन्न क्वार्टर में भी तिथि बढऩे पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन यह अंतिम क्वार्टर से अधिक होता है।
आयकर रिकवरी में बड़ी कामयाबी
मुख्य आयकर आयुक्त पीके गुप्ता के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष के आरंभ में राज्य में करीब 2700 करोड़ रुपये का आयकर डिफॉल्टरों के पास फंसा था। आयकर की यह देनदारी करीब तीन वर्षों से लंबित थी। इसकी रिकवरी के भी प्रयास तेज किए गए, लिहाजा दिसंबर अंत तक करीब 2000 करोड़ रुपये के आयकर की रिकवरी कर ली गई थी। इसमें कुछ हजार रुपये के डिफॉल्टर से लेकर करोड़ों रुपये के डिफॉल्टर भी शामिल हैं।

फरियादी की मौत प्रदेश को शर्मसार करने वाली घटना: हरीश रावत

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देहरादून। पांडे की मौत को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने फरियादी की मौत को उत्तराखंड के लिए शर्मसार करने वाली घटना बताया है। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मृतक फरियादी को श्रद्धांजलि दी तथा देहरादून कार्यालय से गांधी पार्क तक मार्च निकालते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ मांगी।
गुरुवार को कांग्रेस भवन में पत्रकार वार्ता में हरीश रावत ने सत्तारूढ़ सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रकाश की मौत सरकार की लापरवाही और इलाज में देरी के कारण हुई है, जिसकी जिम्मेदार बीजेपी सरकार है। उन्होंने कहा कि पांडे का जिस तरह से निधन हुआ वो बेहद दुखद और चिंताजनक है। इस मामले पर किसी एक्सपर्ट से अध्ययन कराने की जरूरत है लेकिन बीजेपी ने ज़हर खाने वाले व्यक्ति का उपहास उड़ाया। यह अकेले प्रकाश की मौत नहीं बल्कि संवेदनशीलता की मौत है। उन्होंने कहा कि बीजेपी चाहे कांग्रेस पर कितनी भी राजनीति करने का आरोप लगाती रहे क्योंकि विपक्ष का काम ही ऐसे मामलों को उठाना है।

पेट्रोल पंप मालिक के घर में घुसे बदमाश

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रुद्रपुर की पॉश इलाके मॉडल कालोनी में बदमाशों ने एक बार फिर दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दे डाला। इस बार बदमाशों के निशाने पर पेट्रोल पंप स्वामी का घर था। देर रात धारदार हथियार से लैस होकर घर में दाखिल हुए नकाबपोश बदमाश अपनी नीयत में कामयाब हो पाते, इससे पहले ही गृह स्वामिनी की आंख खुल गई। सोर सरावा हुआ तो बदमाश दीवार फांद कर मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस के आलाधिकारी मौके पर जा पहुंचे। इधर, फॉरेंसिक टीम ने मौके से बदमाशों के फिंगर प्रिंट जुटाए है।टीम ने रसोईघर की खिडक़ी के कांच से बदमाशों के फिंगर प्रिंट लिए। पुलिस को घर से एक बड़ा खंजर भी बरामद हुआ। हालांकि खंजर से फॉरेंसिक टीम को फिंगर प्रिंट नहीं मिल सके। बदमाश जाते-जाते खंजर के साथ अपनी एक टोपी भी छोड़ गए हैं। जान-माल सलामत होने पर राहत की सांस ले रही पुलिस ने जल्द ही बदमाशों को सलाखों के पीछे डालने का दावा किया है।

आपको बतादें की मॉडल कालोनी निवासी बलदेव डाबर का इंद्रा चौक पर पेट्रोल पंप है। रात करीब तीन बजे धारदार हथियार से लैस नकाबपोश चार बदमाश दीवार फांद कर बलदेव के घर में दाखिल हुए। अंदर जाने के लिए बदमाशों ने रसोईघर की विंडो निकाल दी। घर के निचले हिस्से में सुनीता अपने बेडरूम में सो रही थी। जबकि बेटा सौरभ अपने कमरे में ऊपर सो रहा था। इसी बीच सुनीता को आहट हुई कि कोई उसके बेडरूम का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है। इस पर सुनीता की आंख खुल गई और उन्होंने तुरंत अपने बेटे को फोन कर पूछा कि क्या वह नीचे आया है। नहीं के जवाब पर सुनीता ने तुरंत बेटे को नीचे आने की बात कहते हुए कहाकि घर में कोई घुस आया है। आनन-फानन में सौरभ ने झांक कर नीचे देखा तो उसके होश उड़ गये। नकाबपोश एक बदमाश घर के मेन गेट पर खड़ा था। इतना देखते ही सौरभ ने शोर मचाना शुरू कर दिया। सौरभ की चीख पुकार सुनकर बदमाश दीवार फांद कर मौके से फरार हो गए। उन्होंने घटना की सूचना पुलिस को दी तो पुलिस के अधिकारियो ने भी मौका मुआयना किया और सीसीटीवी केमरो की फुटेज खंगाली।

युवा मोर्चा चलायेगा अभियान

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भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंदन सिंह लटवाल ने रुद्रपुर स्थित भाजपा के जिला कार्यालय में प्रेस वार्ता की उसके बाद उन्होंने युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओ के साथ बैठक की जिसमे उन्होंने कहा की भाजयुमो शताब्दी वोटर अभियान चलाकर हर बूथ पर नये मतदाता बनाने का कार्य करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजयुमो द्वारा नये मतदाता बनाने के लिए अभियान चलाया जायेगा। जिसमें 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा और युवतियों के नये वोट बनवाये जायेंगे। इसके साथ ही 1 जिला केन्द्र पर लगभग 1 हजार रक्तदाताओं की सूची तैयार की जायेगी और यह रक्त जरूरतमंदो को देकर उनकी जान बचायी जायेगी। कहा कि आगामी 6 अप्रैल को भाजपा का स्थापन दिवस युवा मोर्चा द्वारा धूमधाम के साथ मनाया जायेगा। 14 अप्रैल को संविधन निर्माता डा. भीमराव अम्बेकर का जन्मदिन मनाया जायेगा। कहा भजयुमो द्वारा भीमराव अम्बेकर के जन्मदिवस के मौके पर भाजयुमो के पदाधिकारियों द्वारा अपने घर से भोजन बनाकर आम कार्यकर्ताओ को सहभोज कराया जायेगा।

क्यों मुकर गये मुख्यमंत्री

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हल्द्वानी- मंत्री के जनता दरबार में जहर खाकर जान देने वाले ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे के परिजनों को आर्थिक सहायता देने के आश्वासन से सरकार ने भले ही अपना पल्ला झाड़ लिया हो, मगर कालाढूंगी के भाजपा विधायक बंशीधर भगत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर उन्हें याद दिलाया है कि उनसे वार्ता हुई थी, जिसमें मुख्यमंत्री ने दस लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री झूठ क्यों बोल रहे हैं?

गौरतलब है कि प्रकाश पांडे का शव जब उनके काठगोदाम स्थित आवास पर लाया गया था तो परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था। उन्होंने मुआवजे और नौकरी की मांग रख दी थी। नैनीताल के जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी व क्षेत्रीय विधायक व नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश की बंद कमरे में बैठक हुई थी। तकरीबन 75 मिनट तक चली वार्ता के बाद प्रकाश पांडे की पत्नी कमला पांडे को संविदा पर नौकरी देने तथा 12 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान जिलाधिकारी ने किया था। डीएम के आश्वासन पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जिलाधिकारी ने विभिन्न संगठनों की मदद से दो लाख रुपये परिजनों को दे दिए थे। बाद में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने मृतक की पत्नी को नौकरी देने एवं दस लाख रुपये की सहायता देने के मामले में यह कह दिया कि शासन ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है। आर्थिक सहायता व नौकरी देने के आश्वासन से जब सरकार ने पल्ला झाड़ लिया तो अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई।

उधर, कालाढूंगी के विधायक बंशीधर भगत ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में भगत ने कहा है कि प्रकाश पांडे की जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई मौत के बाद हल्द्वानी क्षेत्र में उत्पन्न आक्रोश के संबंध में 10 जनवरी को उनके द्वारा मुख्यमंत्री से वार्ता की गई थी। उन्होंने वार्ता का स्मरण कराते हुए कहा कि प्रकाश पांडे के परिजनों की मांग के अनुरूप दस लाख रुपये देने की घोषणा मुख्यमंत्री के आश्वासन के उपरांत ही की थी। जिसके बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार शांतिपूर्वक कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उनके द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुरूप मानवीय दृष्टि से दस लाख रुपये की धनराशि पांडे की पत्नी कमला पांडे को प्रदान करने की कृपा की जाए, ताकि मृतक के परिवार का भरण पोषण उचित प्रकार से हो सके तथा बच्चों को उचित शिक्षा उपलब्ध हो सके। भगत का यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अब सवाल यह है कि यदि भगत ने मुख्यमंत्री से वार्ता कर उनके आश्वासन पर घोषणा कराई तो अब मुख्यमंत्री क्यों झूठ बोल रहे हैं?