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सलमान खान, कैटरीना के खिलाफ याचिका पर स्टेटस रिपोर्ट मांगा

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नई दिल्ली। फिल्म स्टार सलमान खान, कैटरीना कैफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अनुसूचित जाति , जनजाति आयोग से इनके खिलाफ दायर शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई के बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।


याचिका हरनाम सिंह ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म ‘ टाईगर जिंदा है ‘ के प्रमोशन के दौरान सलमान खान और कैटरीना कैफ ने वाल्मीकि समाज के लिए जातिगत एवं अपमानजनक शब्द कहे। फिल्म के प्रमोशन के दौरान सलमान ने अपने एक डांस स्टेप के बारे में बताते हुए ‘भंगी’ शब्द का इस्तेमाल किया। कैटरीना कैफ ने इसी शब्द का इस्तेमाल करते एक रिएलिटी शो में कहा था कि वो घर में अक्सर ऐसी ही दिखती हैं। 

छात्रों और अभिभावकों को होली पर केमिकल रंगों से बचने की सलाह

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ऋषिकेश। निःशुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान स्कूल मायाकुंड में होली के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित कर स्कूली बच्चों एवं उनके अभिभावकों को सुरक्षित होली खेलने और रासायनिक रंगों से बचाव की जानकारी दी गयी।
सोमवार को विद्यालय में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों को होली पर्व का महत्व बताते हुए होलिका दहन के इतिहास की जानकारी भी दी गई। स्कूल के निदेशक एवं नेत्र चिकित्सक डॉ. राजे नेगी ने बताया कि आमतौर से बाजार में ज्यादा मुनाफा कमाने के उद्देश्य से ऐसे रंगों को तैयार किया जाता है जिनमे भारी मात्रा में कांच, क्रोमियम आयोडाइड, लेड आक्साइड, कॉपर सल्फेट, एल्युमिनियम आदि मिला होता है, इन रंगों के सम्पर्क में आते ही श्वांस, त्वचा, आंख, किडनी पर बुरा असर पड़ता है। अगर आंखों में रंग चला जाये तो आंखों को मलें या मसलें नहीं, तुरन्त साफ पानी से आंखों को धो लेना चाहिए।
डॉ. नेगी ने कहा कि होली खेलने से पहले अपने चेहरे और हाथ पैरों पर नारियल या सरसों का तेल या वेसलीन लगा लेना चाहिए। इससे रंग हमारे शरीर पर जल्दी से चिपकता नहीं है। कोशिश करें कि अपने बच्चों को हर्बल रंगों से होली खेलने के लिए प्रेरित करें या घर पर ही आप फूलों से या हल्दी, चंदन द्वारा तैयार किये गए रंगो से होली खेलें। डॉ. नेगी ने बच्चों से राह चलते लोगों पर गुबारे या पिचकारी से रंग न फेंकने की बात कही। उन्होंने बताया कि कई बार ये आपसी झगड़े का कारण बन जाता है। होली में पानी की बर्बादी न करें और पर्यावरण के साथ ही जल सरंक्षण भी करें।

उरेडा से ऊर्जा संरक्षण को राज्य में मिल रहा है बल

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देहरादून। उत्तराखंड के कुछ विभाग शासकीय कामों के साथ-साथ प्राकृतिक व्यवस्थाओं के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण में विशेष महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं में शामिल है उरेडा, जो ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में सरकार द्वारा नामित एजेंसी है। संस्थान के अधिकारी शासन के दिशा-निर्देअनुसार ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा पर विशेष कार्य कर रहे हैं, जिससे बिजली की कमी तो दूर हो रही है, प्रदेश को भी अच्छा-खास लाभ हो रहा है। मुख्यमंत्री जिनके पास ऊर्जा विभाग का भी दायित्व है, के दिशा-निर्देश पर प्रबंधक एके त्यागी तथा सीपी अग्रवाल वैकल्पिक ऊर्जा को महत्वपूर्ण आयाम देने पर जुटे हुए हैं।

यह जानकारी देते हुए वरिष्ठ अधिकारी सीपी अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा उजाला कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्ष 2019 तक 100 लाख एलईडी बल्ब के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक लगभग 44.42 लाख बल्ब का वितरण हो चुका है, जिससे प्रतिवर्ष 576 मिलियन यूनिट विद्युत खपत में कमी लाई गई है। राज्य में 67 डाकघर, उरेडा के 13 जनपदीय कार्यालयों एवं यूपीसीएल के बिल काउंटर, पेट्रोल पम्प, स्वयं सहायता समूहों आदि के माध्यम से भी बल्ब की बिक्री का कार्य कराया जा रहा है।
अग्रवाल के अनुसार राज्य के 54 शासकीय भवनों में ऊर्जा आॅडिट का कार्य पूर्ण कराया गया है। उत्तराखंड सचिवालय परिसर के विभन्न भवनों/ कक्षों एवं जनपद के विकास भवनों तथा कलेक्ट्रेट भवनों में विद्युत की बचत हेतु आक्यूपेन्सी सेन्सर्स की स्थापना का कार्य पूर्ण कराया गया, जिससे 15-20 प्रतिशत विद्युत खपत में कमी लाई गई है। उत्तराखंड जल संस्थान, राजपुर रोड में पांच परम्परागत जल पम्पों तथा मसूरी में दो परम्परागत जल पम्प को ऊर्जा दक्ष पम्पों से बदला गया है।
उन्होंने बताया कि जनपद नैनीताल की पांच ग्राम पंचायतों में 1000 परम्परागत एलईडी बल्बों से बदला गया एवं जनपद हरिद्वार के ग्राम पंचायत रसूलपुर बहादराबाद में100 वाॅट के 2484 बल्बों को 12 वाॅट के एलईडी बल्बों से बदला गया। राज्य में ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता को संशोधित कर नये भवनों के निर्माण में संस्तुतियों को लागू किए जाने के लिए अधिसूचना जारी की गई है एवं उरेडा द्वारा भवन ऊर्जा संरक्षण संहिता के अंतर्गत जनपदों में प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
मसूरी नगर पालिका क्षेत्र में 500 स्ट्रीट लाइट, हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में 386 एलईडी स्ट्रीट लाइट की स्थापना प्रदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्ण करायी जा चुकी है। ईईएसएल द्वारा देहरादून में 42000 सोडियम वेपर लैम्प बदले जाने हेतु एमओयू किया गया है। दून विश्वविद्यालय देहरादून में स्थापित 150 सोडियम स्ट्रीट लाइट्स को ऊर्जा दक्षण जोन आधरित स्ट्रीट लाइट्स के रूप में बदला गया है। राज्य के समस्त स्थानीय निकाय क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट्स, भवनों, जल पम्प आदि में ऊर्जा बचत की संभावनाओं हेतु वार्षिक ऊर्जा बचत प्लान तैयार कराया गया है। 

ट्रेन के सामने कूदकर युवक ने की आत्महत्या

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हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सोमवार को एक युवक ने ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का कारण प्रेम प्रसंग बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह पुलिस को खड़खड़ी रेल लाइन पर एक युवक का शव पड़े होने की सूचना मिली। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक की शिनाख्त अभिषेक चौहान (25) निवासी कैलाश गली खड़खड़ी के रूप में की। आत्महत्या से पूर्व अभिषेक ने रेल पटरी पर अपनी सेल्फी ली और उसे फेसबुक पर पोस्ट किया, जिसमें लिखा की यह उसकी आखिरी फोटो है। पुलिस आत्महत्या की वजह प्रेम प्रसंग मान रही है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

प्रकृति प्रदत्त जीवन ही आरोग्य की कुंजी : चिदानन्द

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ऋषिकेश। स्वामी शुकदेवानन्द चेरिटेबल अस्पताल में निःशुल्क ‘एक्यूपंक्चर एवं नेचुरोपैथी’ चिकित्सा शिविर का परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, अमेरिका से आये प्रसिद्ध एक्यूपंक्चर एवं नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डाॅ सैमी, डाॅ एंजी, डाॅ रवि कौशल एंव अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी कर चिकित्सा शिविर का समापन किया।
इस मौके पर स्वामी चिदानन्द ने कहा कि ‘नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धति का इतिहास प्रकृति जितना ही पुराना है। पौराणिक ग्रन्थों एवं वैदिक काल में भी इसी चिकित्सा पद्धति का जिक्र किया गया है। हम जितनी गहराई के साथ प्रकृति प्रदत्त संपदा के जुड़ेंगे उतने ही स्वस्थ और निरोग जीवन यापन कर सकते है। उन्होंने कहा कि प्रकृति प्रदत्त जीवन ही आरोग्य की कुंजी है। हम प्राकृतिक जीवन के मूलभूत आदर्शों को अपनाकर स्वस्थ रह सकते है। आज के युग में भी नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धति स्वस्थ जीवन के लिये वरदान है।’’
चिकित्सा शिविर के माध्यम से अमेरिका से आये प्रसिद्ध एक्यूपंक्चर एवं नेचुरोपैथी विशेषज्ञों ने दस दिनों तक मां गंगा के तट पर स्वामी जी के सानिध्य में उत्तराखण्ड एवं उत्तरप्रदेश के दूर-दराज के इलाकों से आये 800 से अधिक रोगियों की चिकित्सा की। इस दल में एक्युपन्चर, नैचुरोपैथी, एक्युप्रेशर, योग, मसाज, सूर्य चिकित्सा, जल चिकित्सा, मृदा चिकित्सा एवं अन्य अनेक विधाओं के माध्यम से रोगियों की चिकित्सा की।
प्रसिद्ध एक्यूपंक्चर विशेषज्ञ डाॅ सैमी ने बताया की इस चिकित्सा पद्धति के माध्यम से हम पुरानी से पुरानी वेदनाओं का शमन कर सकते है। यह एक बेहतर चिकित्सा पद्धति है इसके द्वारा शरीर के विभिन्न बिन्दुओं में सुई चुभाकर दर्द से राहत दिलायी जाती है। इस चिकित्सा से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता, एक्यूपंक्चर के 365 पॉइंट्स होते है उनमें से कुछ काफी असरदार होते है और डिप्रेशन, सिरदर्द, चक्कर, लकवा, यूटरस, दिमागी असंतुलन, नाक व कान से जुड़ी बीमारियों के लिये बहुत लाभदायक पद्धति है। उन्होने बताया कि परमार्थ निकेतन में आयोजित चिकित्सा शिविर में लोअर बैक पेन, जाॅइंट पेन, घुटनों का दर्द, डिप्रेशन, यूटरस से सम्बंधित बीमारियों के रोगी अधिक थे।
डाॅ सैमी ने कहा कि हम सौभाग्यशाली है कि हमें सेवा के साथ-साथ दस दिनों तक परमार्थ निकेतन के इस पावन, आध्यात्मिक वातावरण में रहने का अवसर प्राप्त हुआ। चिकित्सा शिविर के माध्यम से हमारे इस दल ने अनेक स्थानों पर सेवा कार्य किये है परन्तु गंगा के तट की शान्ति और आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के मार्गदर्शन एवं सान्निध्य में सेवा करने का अनुभव अद्भुत रहा। उन्होने कहा कि हमने पूज्य स्वामी जी के साथ चर्चा कर एक कार्ययोजना तैयार की है जिसके माध्यम से हम प्रतिवर्ष यहां आकर इस सेवा कार्य को आगे भी जारी रखेंगे।
डाॅ रवि कौशल ने बताया कि इस चिकित्सा शिविर का लाभ 800 से अधिक रोगियों लिया।
चिकित्सा शिविर के समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ डाॅ सैमी, डाॅ डैन, डाॅ एंजी, मैट लाॅरा, डेनिस, कैथी, एड्रियाना, ब्रिटेट, बायराॅन, स्टेफनी, डेब्रा, बैरोन, शाना, डाॅ रवि कौशल जी, लौरी, एलिस, ट्रीसा, एवं अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों नेे विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति होती रहे इस भावना से वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की।

ये है उत्तराखंड के विकास कामों की स्टेटस रिपोर्ट

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मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के साथ पीएमओ में गठित पीएमजी (प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप) की बैठक में राज्य में चल रहे की निर्माण कार्यों पर रिव्यू हुआ।इनमे 3846 करोड़ रुपये से बनने वाली तपोवन-विष्णुगाड (6×130 मेगावाट) जल विद्युत परियोजना, 208 करोड़ रुपए से बनने वाली किच्छा-खटीमा रेलवे लाइन, 105 करोड़ रुपये से बनने वाली देवबंद-रुड़की नई रेलवे लाइन, 605 करोड़ रुपए से बनने वाली काशीपुर-सितारगंज सड़क परियोजना और चारधाम मार्ग कनेक्टिविटी सुधारीकरण परियोजना के प्रगति की समीक्षा की गई।
विभिन्न प्रोजेक्ट के बारे में अपडेट:
  • चमोली जनपद में धौलीगंगा नदी पर बनने वाली तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की ई.आई.ए.(एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट) कराने के बाद एन.टी.पी.सी. को उप-खनिज निकासी की अनुमति दे दी जाएगी।
  • किच्छा-खटीमा रेलवे लाइन रेलवे अधिकारियों द्वारा एलाइनमेंट के सर्वेक्षण का प्रस्ताव मिलने के बाद कार्यवाही की जाएगी। देवबंद-रुड़की रेलवे लाइन बनने से दिल्ली-देहरादून की दूरी 42 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके लिए उत्तराखण्ड सरकार ने भूमि अधिग्रहण का कार्य पूर्ण कर लिया है। केवल एक गांव का अधिग्रहण शेष है। इस लाइन पर होने वाला व्यय अब बढ़कर 791 करोड़ रूपये हो गया है। भारत सरकार से 50ः50 व्यय भार वहन करने का अनुरोध किया गया है।
  • काशीपुर-सितारगंज मार्ग के लिये 80 प्रतिशत सड़क का निर्माण हो गया है। 46 किलोमीटर पाइप लाइन को शिफ्ट कर दिया गया है। कुल 800 में से 126 स्ट्रक्चर शिफ्ट हो गए हैं।
  • चारधाम मार्ग कनेक्टिविटी सुधारीकरण के लिये 4200 करोड़ रुपये की 396 किलोमीटर सड़कों की स्वीकृति मिल गई है। 371 किलोमीटर सड़कों का अवार्ड कर दिया गया है। 52 फारेस्ट क्लीयरेंस में से 45 प्रस्ताव अपलोड कर दिए गए हैं। 23 का स्टेज एक और 15 का स्टेज दो क्लीयरेंस मिल गया है।
  • 856 किलोमीटर भू-अधिग्रहण करना है। 73 प्रतिशत भूमि के अधिग्रहण की कार्यवाही हो गई है। शेष भूमि का अधिग्रहण विभिन्न चरणों में है।

घाटे में चल रही चीनी मिलों को उबारने को तैयार होगा रोडमैप

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देहरादून। प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों को घाटे से उबारने के लिए रोडमैप तैयार किया जाएगा। गन्ना विकास मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए।

सोमवार को प्रदेश के संसदीय कार्य, विधायी, भाषा, वित्त, आबकारी, पेयजल एवं स्वच्छता, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री प्रकाश पन्त ने विधान सभा सभाकक्ष में गन्ना विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि डोईवाला 52 करोड़, नादेही 36 करोड़, किच्छा 54 करोड़ एवं बाजपुर 50 करोड़ घाटे में चलने वाले चीनी मिल को उबारने के लिए रोडमैप तैयार किया जाएगा एवं ढांचागत सुधार किया जाएगा। चीनी मिलों के सुधारात्मक उपाय के लिए आधुनिकी करण भी किया जाएगा। बैठक में सितारगंज, किच्छा, नादेही एवं डोईवाला चीनी मिल में सिरे के उत्पादन को बेचने के लिए टेंडर के लिए दो तिथियां माह के 7 एवं 21 तारीख निर्धारित की। इस सम्बन्ध में कहा गया कि इस व्यवस्था के अन्तर्गत लेबी के अनुसार चीनी की उठान होगी। चीनी मिलों के आधुनिकी करण के सन्दर्भ में बाजपुर और नादेही चीनी मिल का आधुनिकी करण और ऊर्जा का उत्पादन यूजीवीएनएल के माध्यम से होगा। इसके अतिरिक्त एनसीडीसी के माध्यम से किच्छा और डोईवाला चीनी मिल का आधुनिकी करण किया जाएगा। चीनी मिलों के स्टेबलिसमेंट, अनावर्तक व्यय कम करने के लिए सितारगंज चीनी मिल के ऐसे कार्मिक जो 50 वर्ष के हो चुके हैं और वीआरएस लेना चाहते हैं, वीआरएस योजना लाई जाएगी। यह प्रस्ताव सचिव स्तर की समिति के बाद मंत्रिमंण्डल में लाया जाएगा। बैठक में रिकवरी दर को बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में सचिव डी. सेंथिल पांडियन, अपर सचिव प्रदीप सिंह रावत, महाप्रबन्धक एके भट्टाचार्य, अधिशासी अधिकारी किच्छा दिप्ती सिंह, जीएम बाजपुर केके मिश्रा, अधिशासी निदेशक डोईवाला मनमोहन सिंह इत्यादि मौजूद थे। 

होली पर शराब की दुकानें रहेंगी बंद, डीएम ने दिए आदेश

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रूद्रपर। जिलाधिकारी डॉ नीरज खैरवाल ने कानून एवं शांति व्यवस्था के मद्देनजर दो मार्च को होली पर्व पर रंग खेले जाने के दिन सभी प्रकार की देशी-विदेशी मदिरा की दुकानों को पूर्णतः बन्द रखने के निर्देश जिला आबकारी अधिकारी आलोक कुमार शाह को दिये है।

उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि इस दिन समस्त अनुज्ञापी समेत एल्कोहल से सम्बन्धित सभी दुकानो को सायं पांच बजे तक पूर्णतया बंद रखा जाये। डीएम ने आदेश का कडाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। 

मान्यता के लिए ‘खेल’ नहीं कर सकेंगे स्कूल

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देहरादून। अब स्कूलों को व्यवस्थाएं चाक चौबंद रखनी होंगी। ऐसा न करना उनकी मान्यता के लिए भारी पड़ सकता है। सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने मान्यता के नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के मुताबिक अब हर पांच साल में स्कूलों में बोर्ड से मान्यता लेनी होंगी।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन ने अपने मान्यता संबंधी आवेदन देने की प्रक्रिया में बदलाव किया है। आने वाले दिनों में बोर्ड से संबद्ध किसी भी स्कूल को स्थाई मान्यता नहीं मिलेगी। स्कूल को 2019-2020 सेशन से नए नियमों के मुताबिक मान्यता के लिए आवेदन करना होगा। मौजूदा नियमों की बात करें तो अभी तक 15 साल पुराने स्कूल को स्थाई मान्यता मिल जाती थी। जबकि, नए स्कूलों को हर पांच साल में मान्यता के लिए आवेदन करना होता था। लेकिन, नए नियम के तहत सभी नए-पुराने स्कूलों को हर पांच साल में सीबीएसई से मान्यता लेनी होगी। स्कूलों द्वारा आवेदन करने पर बोर्ड की ओर से प्रोविजनल एफिलिएशन प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। यदि किसी स्कूल का एफिलिएशन 2019 में खत्म हो रहा है तो उसे साल 2018 से ही सारा डॉक्यूमेंटेशन करके सीबीएसई को भेजना होगा ताकि 2019 में स्कूल की मान्यता खत्म होने से पहले ही उसे प्रोविशनल एफिलिएशन मिल जाए। सभी जानकारी तय समय से पहले ही देनी होगी।
नहीं हो सकेगा कोई खेल
अभी तक स्कूल कई बार मान्यता हासिल करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इनमें कई बार स्कूल फैकल्टी और संसाधनों तक को महज मान्यता भर के लिए अपयोग में लाते हैं। मान्यता मिलते ही किराए के संसाधनों और काम चलाउ शिक्षकों से काम लेते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। जिंप पायनियर स्कूल के प्रधानाचार्य जगदीश पांडे का कहना है कि बोर्ड ने यह कदम कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उठाया है। बीते कुछ वक्त में स्कूलों में घटित घटनाओं के बाद यह महसूस किया गया कि स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से नहीं निभा रहे हैं। स्कूल को इस बात का एहसास रहे कि यदि वे किसी तरह की लापरवाही बरतते हैं तो उसकी मान्यता खत्म की जा सकती है। अभिभावक दीपिका चौहान का कहना है कि पांच साल में मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया स्कूलों के लापरवाही भरे रवैये पर लगाम लगाने का कार्य करेगी।
मानकों में नहीं कोई बदलाव
बोर्ड के हर पांच साल में मान्यता देने के नियम के बाद स्कूलों में आपनी व्यवस्थाओं को चाक चौबंद रखना ही होगा। स्कूलों को हर पांच साल में नया एफिलिएशन बिल्कुल उसी तरह लेना होगा, जिस तरह पहली बार स्कूल शुरू करते वक्त लिया था। यानी स्कूल की इमारत की डिटेलिंग, सुरक्षा मानक, बाउंड्रीवाल, इंटरनेट, क्लासरूम, स्टूडेंट्स और टीचर्स की संख्या, स्टूडेंट्स, टीचर्स रेशियो, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पोर्ट्स ग्राउंड हाइजीन, स्कूल एक्टिविटीज, स्कूल का रिजल्ट, टीचर्स की क्वालीफिकेशन, बस में सुरक्षा मानक, लेबोरेट्री आदि जैसी जानकारी रिपोर्ट बोर्ड को भेजनी होगी।
नियमों को लेकर बोर्ड गंभीर
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने स्कूल्स द्वारा गाइडलाइंस की अनदेखी के लिए अब सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बीते दो सालों की बात करें तो अकेले सीबीएसई देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय ने कई स्कूलों की मान्यता को खत्म किया। बोर्ड द्वारा गाइडलाइन की अनदेखी करने वाले करीब आधा दर्जन स्कूलों की मान्यता रद्द की जा चुकी है। दो सालों की बात करें तो साल 2015 में मेरठ, बुलंदशहर और सहारनपुर के स्कूलों की मान्यता रद्द की थी।
गाइडलाइंस के मुताबिक ऐसे मिलती है मान्यता
– स्कूलों में एजुकेशन के स्टैंडर्ड को देखा जाएगा।
– स्कूल में इंफ्रास्ट्रक्चर को देखा जाएगा।
– मैनेजमेंट, लीडरशिप के आधार पर भी मार्किंग होती है।
– एक्रीडिटेशन करने वाली एजेंसी और सीबीएसई ऑफिसर्स की रिपोर्ट से तय होता है कि स्कूल को मान्यता दी जाए या नहीं।
– एफिलिएशन न मिलने पर 6 महीने का समय मिलेगा और उसके बाद फिर से एक्रिडिटेशन का प्रोसेस स्टार्ट होगा।
– स्कूल को पांच साल के लिए एक्रिडिटेशन मिलता है। 

फ्योली के फूल से सजी होगी महिलाओं की ”स्पेशल पहाड़ी टोपी”

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सोहम आर्ट और हैरिटेज द्वारा बनाई गई पहाड़ी टोपी के देखते ही देखते लोगों के दिल में अपनी खासी जगह बना ली है।बीते साल नवंबर में उत्तराखंड के लोगों की शान बनी पहाड़ी टोपी एक बार फिर कुछ हटकर और अलग तरह से लोगों के बीच आने वाला है।जी हां, अब तक पहाड़ी टोपी केवल पुरुषों के लिए बनाई गई थी लेकिन आने वाले फूलदेई त्यौहार पर सोहम आर्ट एंड हैरिटेज राज्य की महिलाओं के लिए भी पहाड़ी टोपी लॉंच कर रहा है।

पहाड़ी टोपी की महिलाओं में भी डिमांड को देखते हुए सोहम हैरिटेज और आर्ट सेंटर के समीर शुक्ला पहाड़ी टोपी की एक और रेंज लेकर आने वाले हैं।और इस रेंज की खास बात है यह पूरी तरह से औरतों के लिए समर्पित होगी।आपको बतादें की पहाड़ी टोपी बहुत ही जल्दी लोगों के बीच मशहूर हो गई है और ना केवल देश के लोग बल्कि दूर-दराज के देशों के लोग भी पहाड़ी टोपी को पसंद कर रहे हैं।

फूलदेई

इस बारे में बात करते हुए सोहम हैरिटेज और आर्ट सेंटर के समीर शुक्ला ने बताया कि, “हमने पुरुषों के लिए जो पहाड़ी टोपी बनाई उसकी डिमांड महिलाएं भी कर रही हैं, जो बहुत अच्छी बात है।लेकिन दुख इस बात से हुआ कि महिलाओं के लिए समर्पित टोपी ना तो हमारे पास है ना ही उत्तराखंड राज्य में किसी और के पास है।इसी सोच के साथ हमने महिलाओं के लिए फ्योली टोपी बनाने का निश्चय किया जिसे हम फूलदेई के दिन लॉंच करेंगे। समीर ने कहा कि, “हर राज्य के पास महिला समर्पित टोपी है चाहें कश्मीर हो या हिमाचल लेकिन हमारे राज्य में महिलाओं की टोपी है ही नहीं जिससे पता चलता है कि अभी भी राज्य महिलाओं को पुरुषों के समान दर्जा नहीं देता है।”

गौरतलब है कि टोपी को सम्मान की तरह पहना जाता है लेकिन उत्तराखंड की महिलाओं के पास कोई भी समर्पित टोपी नहीं है।महिलाओं को एक नई पहचान दिलाने के लिए फ्योली पहाड़ी टोपी जल्द ही बाज़ार में होगी।

टोपी के बारे में और बताते हुए समीर ने कहा कि, “यह टोपी लाल और मैरुन रंग की होगी जो सर्दियों के लिए ऊनी ब्लेजर के कपड़े से बनाई जाएगी और गर्मियों के लिए लाल कपड़े को बकरम के साथ बनाया जाएगा।” उन्होंने कहा कि, “पहले से पहाड़ी टोपी पर ब्रह्रमकमल मौजूद है लेकिन इस टोपी में फ्योली के फूलों की सजावट होगी जो पुरुषों से महिलाओं की टोपी को अलग करेगा, महिलाओं की टोपी का रंग और उसकी सजावट टोपी को और खूबसूरत बना देगा।”

महिलाओं के लिए खासतौर पर डिजाईन यह टोपी ना केवल उन्हें एक अलग सम्मान देगी बल्कि उन्हें यह भी एहसास दिलाऐगी कि वह किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है।तो अगर आप भी यह पहाड़ी टोपी लेना चाहती है तो कुछ दिन का और इंतज़ार करना होगा और फूलों के त्यौहार फूलदेई के दिन यह टोपी मसूरी के सोहम हैरिटेज एंव आर्ट सेंटर पर उपलब्ध होगी।