साल 2017: शिक्षकों के लिए रहा भारी

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देहरादून। कुछ खट्टी-मीठी यादों को संजोकर साल 2017 विदा ले रहा है। शिक्षा के क्षेत्र की बात करें तो इस पूरे साल ने जहां कुछ खूबसूरत पल दिऐ तो वहीं कुछ मामलों में कई निराशा भी दिखाई। स्कूली शिक्षा के लिए हुए सर्वे में जहां स्कूलों की खामियां उजागर हुई, वहीं उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी साल कई आंदोलनों से भरा रहा। नियुक्तियों के मामले में भी सालभर धरने प्रदर्शन और तमाम आंदोलन देखने को मिले।

 60 हजार शिक्षकों की सीबीआई जांच का फैसला
शिक्षा विभाग में लगातार फर्जी प्रमाण पत्रों के मार्फत नौकरी पाने वालों की शिकायत मिल रही थी, जिसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने करीब 60 हजार शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के इस फैसले से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। नई सरकार के बनने के बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने आते ही एक के बाद एक कई अहम फैसले लिए हैं। उनके निर्णयों से शिक्षा विभाग की तस्वीर बदलेगी यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन उनके फैसलों से आलसी और ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों में खलबली मची हुई है।

 प्रदेश के हजारों स्कूलों बंद करने का फैसला
उत्तराखंड के तीन हजार सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को बंद किए जाने के फैसले पर मुहर लग गई है। शिक्षा सचिव चंद्रशेखर भट्ट ने इस बाबत आदेश भी जारी कर दिया। आदेश के मुताबिक बंद होने वाले स्कूलों का आस-पास के दूसरे सरकारी विद्यालयों में विलय किया जाएगा। बंद किए जाने वाले सभी स्कूल वो हैं जिनमें वर्तमान में छात्र संख्या दस या दस से कम है। प्रदेश में लगभग 2500 प्राइमरी और 500 से ज्यादा जूनियर स्कूल ऐसे हैं जिनमें दस से कम बच्चे पढ़ रहे हैं। प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के मुताबिक शिक्षा की गुणवत्ता के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी था।
स्कूली शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड
शिक्षा विभाग में ड्रेस कोड लागू करने का फैसला लिया। विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि फैसले पर शिक्षक संघों ने अपनी कड़े तेवर दिखाते हुए फैसले को न मानने का निर्णय लिया। विभागीय अधिकारियों और शिक्षक संगठनों के बीच इसे लेकर कई बार वार्ता भी हुई। लेकिन कोई हल नहीं निकला। शिक्षा मंत्री के खुद ड्रेस कोड के तहत पोशाक पहनने के बयान के बाद भी शिक्षकों ने निर्णय को ठेंगा दिखा दिया।

 डिग्री कॉलेजों में ड्रेस कोड
स्कूली शिक्षा से अलग उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिक्ष मंत्री डा. धनसिंह रावत ने भी कई अहम फैसले लिए। इनमें एक ओर जहां कॉलेजों में तिरंगा लहराने का फैसला रहा, वहीं शिक्षकों की बायोमेट्रिक हाजिरी का फैसला भी चर्चाओं में रहा। डा. रावत ने कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने का फैसला भी कई अहम फैसलों में से एक रहा। 

कई फैसलों पर बैकलुट पर आई सरकार
शिक्षा मंत्रियों के कई फैसले जहां स्कूली और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने का काम करने वाले थे, तो कई ने आंदोलनों को भी हवा दी। डिग्री कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव न कराए जाने के फैसले पर छात्रों की नाराजगी झेलने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री बैकफुट पर आए। इसके अलावा सेमेस्टर प्रणाली खत्म करने के मामले में भी डा. रावत ने बैकफुट लिया। वहीं विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे भी अपने बयानों को लेकर काफी चर्चाओं में रहे। कई मामलों में तो शिक्षा मंत्री ने अपने बयान भी बदल दिए। 

कुलपतियों को लेकर चलता रहा विवाद
प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति बेहद खराब है। वजह, शिक्षण संस्थानों में आपसी विवाद और शासन स्तर पर दखल। यही कारण रहा कि साल भर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कुलपति जैसे पद पर भी विवाद चलता रहा। आयुर्वेद विवि में कुलपति पर कई आरोप लगे। इसके अलावा उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति के 11 वर्ष की आयु में 10वीं पास करने के मामले में प्रमाण पत्रों के विवाद ने काफी तूल पकड़ा। इसके बाद उत्तराखंड तकनीकि विश्वविद्यालय के कुलपति और संघटक कॉलेज वुमेन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी की निदेशक के बीच का विवाद भी काफी समय से चलता रहा। इसके अलावा विवि में लगातार अनियमितताएं, शिकायत और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर करीब एक साल तक कुलपति प्रो. पीके गर्ग विवादों में बने रहे। जिसके बाद दो माह पहले विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पॉल ने उन्हें कार्य से विरत कर दिया। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जवाहरलाल कौल को भी नियम विरुद्ध सीटें बढ़ाने सहित कई अनियमितताओं के आरोप में जांच के बाद विश्वविद्यालय के विजिटर व राष्ट्रपति ने उन्हें पद से हटा दिया। इसी प्रकार दून विवि में भी कुलपति प्रो. वीके जैन के सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यवाहक कुलपति प्रो. कुसुम अरुणाचलम और शासन के बीच निरंतर टकराव जारी है। 

नियुक्तियां शुरू 
शिक्षकों की कमी झेली रही उच्च शिक्षा को इस साल एक बड़ी राहत मिली। शासन स्तर पर इस साल नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई। प्रक्रिया के तहत डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति शुरू की जा चुकी है। बता दें कि राज्य में इस वक्त तकरीबन पांच हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। सरकार के इस कदम से शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार देखने को मिलेगा।

दीक्षांत की ड्रेस बदली
डिग्री कॉलेज में दीक्षांत समारोहों में भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिले। इसके लिए भाजपा सरकार ने समारोहों का अलग ड्रेस कोड निर्धारित किया। डा. रावत ने संस्थानों को ऐसी ड्रेस तैयार करने को कहा जिसमें पहाड़ की संस्कृति की झलक दिखाई दे। इसके अलावा देश सेवा में वीरगति को प्राप्त हुए शहीदों को सम्मान देने और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनाने के लिए शिक्षण संस्थानों में शौर्य दीवार बनाए जाने का फैसला भी अहम रहा। इसके अलावा गई अन्य फैसले भी लिए गए जो न सिर्फ चर्चाओं में रहे बल्कि काफी प्रशंसनीय भी थे। साल 2017 भले ही इन फैसलों के साथ खत्म होगा, लेकिन इन फैसलों का असर आने वाले साल 2018 में देखने को मिलेगा।