जोशीमठ भू-धंसाव : जेपी काॅलोनी में पानी का रिसाव कम होना राहत भरी खबर

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जोशीमठ
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जोशीमठ भू-धंसाव के बीच जेपी काॅलोनी में पानी का रिसाव कम होना राहत भरी खबर है। राज्य और केन्द्र सरकार की ओर से लगातार इस आपदा पल-पल नजर रखी जा रही है। भारत सरकार ने एसडीआरएफ की कुल 392 करोड़ की बड़ी धनराशि रिलीज़ कर दी है। होटल मलारी इन और माउंट व्यू के ध्वस्तीकरण के लिए लोगों से सहमति ली जा रही है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जिलाधिकारी के स्तर पर की जाएगी।

सचिव आपदा प्रबन्धन डा.रंजीत कुमार सिन्हा ने बुधवार शाम सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में जोशीमठ नगर क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव और भूस्खलन के उपरान्त राज्य सरकार की ओर से किये जा रहे राहत और बचाव, स्थायी/अस्थायी पुनर्वास के संबंध पत्रकारों को जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की ओर से एनडीआरएफ की दो टुकड़ियां पूर्व से ही जोशीमठ में तैनात हैं और एक टुकड़ी गौचर में तैयार रखी गई हैं। एसडीआरएफ की चार टुकड़ियां जोशीमठ में तैनात की गई हैं।

डा.रंजीत ने बताया कि जेपी काॅलोनी में पानी का रिसाव कम होना एक राहत की खबर है। अब तक 131 परिवार सुरक्षा के दृष्टिगत अस्थायी रूप से विस्थापित किए गए हैं। विस्थापित परिवार के सदस्यों की संख्या 462 है। अस्थायी रूप से जोशीमठ में कुल 344 कमरे हैं, जिनकी क्षमता 1425 लोगों की है और पीपलकोटी में 491 कमरे हैं। इनकी क्षमता 2205 लोगों की है। उन्हें चिह्नित कर लिया गया है।

प्रभावितों को वितरित राहत राशि के तहत प्रति परिवार 5 हजार की दर से घरेलू राहत सामग्री के लिए अभी तक कुल 53 (कुल 2.65 लाख रुपये) प्रभावितों को वितरित की गई है। तीक्ष्ण/पूर्ण क्षतिग्रस्त भवन के लिए 10 प्रभावितों को 13 लाख रुपये धनराशि वितरित की गई है।

सचिव आपदा प्रबन्धन ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से प्रति परिवार विस्थापन के लिए अग्रिम के रूप में एक लाख रुपये और सामान इत्यादि ले जाने के लिये 50 हजार अर्थात कुल 1.50 लाख धनराशि आवंटित किये जाने का शासनादेश निर्गत किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की ओर से अपने विभिन्न तकनीकी संस्थानों को यह निर्देश दिए गए हैं कि जोशीमठ आपदा में जांच/ सर्वे की कार्रवाई को समयबद्ध पूरा किया जाए।

जनपद चमोली में राहत और बचाव कार्यों के लिये धनराशि 11 करोड़ पूर्व में ही अवमुक्त की जा चुकी है। जोशीमठ में ड्रेनेज सम्बन्धित कार्यों और टो-इरोजन की रोकथाम के लिए तत्काल कार्य प्रारम्भ के लिए ईपीसी मोड में कार्य करवाने के लिये सिंचाई विभाग से प्रस्ताव प्राप्त कर अग्रेत्तर कार्रवाई की जा रही है।

जोशीमठ में आपदा प्रभावित एचटी/एलटी लाइनों और परिर्वतकों को स्थानान्तरित करने के लिए ऊर्जा विभाग को धनराशि 214.43 लाख अवमुक्त की जा रही है। अभी तक 723 भवनों की संख्या जिनमें दरारें दृष्टिगत हुई हैं। गांधीनगर, सिंहधार, मनोहरबाग, सुनील क्षेत्र/वार्ड असुरक्षित घोषित किए गए हैं। 86 भवन असुरक्षित क्षेत्र में स्थित है। जोशीमठ भू-धंसाव की ज़द में आए प्रभावित परिवारों के विस्थापन के लिए 2 समितियों का गठन किया जा रहा है। जल्द ही इस पर कुछ आउटपुट आएगा।

सचिव आपदा प्रबन्धन ने बताया कि भू-धंसाव के चलते कई इलेक्ट्रिक पोल भी इसकी ज़द में आए हैं। ऐसे में विद्युत लाइन को क्षति पहुंचने की स्थिति में 2 करोड़ से ज़्यादा की धनराशि भी जारी की गई है ताकि फौरी तौर से बिजली से जुड़ी समस्याओं का हल निकल सके। इसके अलावा जोशीमठ में कार्यरत सारी तकनीकी एजेंसीज को निर्देशित किया गया है ताकि सारी संस्थाएं अपने कामों को सही तरीके से मोबलाइज करें, जिससे कोई भी तकनीकी दिक्कत ना आए। मैपिंग के लिए जीएसआई की टीम भी लगी हुई है।

इस मौके पर अपर सचिव आपदा प्रबन्धन, निदेशक उत्तराखण्ड भूस्खलन प्रबन्धन एवं न्यूनीकरण संस्थान, प्रभारी अधिकारी पीआईबी, निदेशक वाडिया संस्थान, निदेशक आईआईआरएस देहरादून, निदेशक एनआईएच और निदेशक आईआईटीआर उपस्थित थे।