सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपीएटी के शत प्रतिशत मिलान की मांग वाली याचिका खारिज की

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Central government notice to Supreme Court
File Photo

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 100 फीसदी ईवीएम और वीवीपीएटी के मिलान की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। एक एनजीओ ने ये मांग की थी।

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने याचिका को बकवास करार देते हुए कहा कि एक ही मांग बार-बार नहीं सुन सकते। लोग अपनी सरकार चुनते हैं। कोर्ट इसके आड़े नहीं आएगा।

सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपीएटी के मिलान की संख्या बढ़ाने से इनकार कर दिया था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने पहले के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया था।

सुनवाई के दौरान याचिकर्ताओं की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि अगर 50 फीसदी मुमकिन नहीं तो कम से कम 25 फीसदी ईवीएम का वीवीपीएटी से मिलान कराया जाना चाहिए। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम अपने पुराने आदेश में कोई बदलाव नहीं करने जा रहे हैं। कोर्ट ने विपक्षी दलों की रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया था।

विपक्षी दलों की याचिका में कहा गया था कि 50 फीसदी वीवीपीएटी का ईवीएम से मिलान होना चाहिए और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में वीवीपीएटी की गिनती के आधार पर नतीजे घोषित होने चाहिए।

आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आगामी लोकसभा चुनाव में एक विधानसभा के एक बूथ के ईवीएम से वीवीपीएटी के मिलान की वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस चुनाव में एक विधानसभा के पांच बूथों के ईवीएम का वीवीपीएटी से मिलान किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि इससे राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों को भी ज्यादा भरोसा होगा।