कभी जंबो, कभी छोटी टीम पर उलझ रही कांग्रेस

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-उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का मामला बना अबूझ पहेली
-पिछले दो वर्षों से पुरानी टीम से काम चला रहे प्रदेश अध्यक्ष
हार दर हार झेल रही कांग्रेस की प्रदेश कमेटी यानि पीसीसी का गठन अबूझ पहेली सा बन गया है। गुटों में बंटी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पिछले दो वर्षों से पुरानी टीम को ढो रहे हैं। एक के बाद एक कई बार पीसीसी का खाका तैयार हो चुका है, लेकिन उस पर अंतिम मुहर नहीं लग पा रही है। दिलचस्प बात ये है कि पीसीसी का आकार क्या हो, इस पर पार्टी की राय थोडे़ थोडे़ समय पर बदल जा रही है। कभी बडे़ आकार पर सहमति बन रही है, तो कभी छोटे आकार को कांग्रेस के हित में जरूरी बताया जा रहा है।
दरअसल, पीसीसी के गठन में जरूरत से ज्यादा देर हो जाने की वजह कांग्रेस की गुटबाजी को माना जा रहा है। उत्तराखंड कांग्रेस की जो मौजूदा तस्वीर है, उसमें कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ़ इंदिरा हदयेश एक पाले में खडे़ नजर आते हैं। कांग्रेस महासचिव और पूर्व सीएम हरीश रावत का पार्टी के भीतर एक अलग और मजबूत गुट है। इन स्थितियों के बीच, पूर्व अध्यक्ष और एनडी तिवारी सरकार में मंत्री रह चुके किशोर उपाध्याय भी हैं, जिनका अपना कोई गुट तो नहीं है, लेकिन वह समीकरणों के हिसाब से गुटीय प्रभाव को कम ज्यादा करने में अपनी भूमिका जरूर निभा लेते हैं।
वैसे, देखा जाए, तो मॉडल पीसीसी में 70 से 80 पदाधिकारियों के लिए जगह निकलती है, लेकिन निवर्तमान पीसीसी की बात करें, तो यह संख्या 300 के पार पहुंची है। इसके पीछे तर्क दिए गए हैं कि 2016 में उत्तराखंड के सत्ता संग्राम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिस तरह की एका प्रदर्शित की थी, उसमें संगठन में सभी का सम्मान किया जाना जरूरी हो गया था। ये ही वजह है कि पीसीसी का जंबो साइज हो गया। जहां तक प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का सवाल है, वह अपनी छोटी टीम चाहते हैं, लेकिन हरीश रावत गुट का इस कदर दबाव है कि ऐसा संभव होता दिखाई नहीं दे रहा हैं।
 सू़त्रों के अनुसार, पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को हाल ही में जो प्रस्तावित पीसीसी सौंपी गई है, उसमें पदाधिकारियों की संख्या 200 तक रखी गई हैं। हालांकि इस पर मुहर कब तक लगती है और किस रूप में लगती है। इसका जवाब आना बाकी है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह को उम्मीद है कि जल्द ही पीसीसी सामने होगी। इसमें सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।