15 अगस्त 1947 को मिठाई की जगह बंटा था नैनीताल का खास ‘लोटे वाला जलेबा’

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जलेबी

आपने जलेबी तो बहुत खाई होगी, लेकिन नैनीताल आएं तो यहां के खास ‘लोटे वाले जलेबा’ का स्वाद लेना न भूलें। खास बात यह है कि यह वह जलेबा है, जो देश को आजादी मिलने पर 15 अगस्त 1947 को पहले स्थापना दिवस पर पर मिठाई के रूप में बांटा गया था।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल की स्थापना 1841 में हुई थी। बताया जाता है कि इसके 9 साल बाद से ही नैनीताल में ‘लोटे वाला जलेबा’ बन रहा है। नगर के मल्लीताल में शिव लाल साह ने 1850 में यहां ‘लोटे वाला जलेबा’ की दुकान स्थापित की थी। शिव लाल साह के पांचवी पीढ़ी के इस दुकान को चला रहे रक्षित साह दावा करते हैं कि देश की आजादी के दौर तक नगर में मिठाई की दुकान नहीं थी। अंग्रेजी दौर में उनकी दुकान का जलेबा अंग्रेज अधिकारियों के साथ गवर्नर हाउस तक जाता था और 15 अगस्त 1947 को उनकी दुकान का जलेबा ही मिठाई की जगह बांटा गया था। नंदा देवी मेले के दौरान बड़े परात के बड़े आकार का जलेबा भी आकर्षण का केंद्र रहता है।

इसलिए खास और जलेबी से अलग है ‘लोटे वाला जलेबा’

नैनीताल। नैनीताल में बनने वाला जलेबा एक तरह से जलेबी ही है, लेकिन इसे बनाने में मैदे के घोल को कपड़े की गठरी में लपेटकर पिचकाकर गर्म तेल की कढ़ाई में नहीं डाला जाता है, बल्कि इसमें मैदे के अपेक्षाकृत कम गाढ़े घोल को छेद युक्त लोटे से, यानी कपड़े की तरह बिना पिचकाए, गर्म तेल की कढ़ाई में टपकाया जाता है। इस तरह बनने वाला जलेबा जलेबी की अपेक्षा अधिक मोटा बनता है, और इसके बावजूद बेहद करारा होता है। जबकि लोग करारी जलेबी खाने की चाह में पतली जलेबी चाहते हैं, क्योंकि मोटी जलेबी करारी-कुरकुरी नहीं होती है। यही कारण है कि पिछले दिनों सिने अभिनेता आशीष विद्यार्थी भी यहां लोटे वाला जलेबा खाने आए और प्रसिद्ध कपिल शर्मा शो में भी इसे दिखाया गया।